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No Hug, Only Handshake! मोदी-ट्रंप की मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां, समझिए भारत का कूटनीतिक मैसेज

नई दिल्ली

आखिरकार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो ही गई. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका में हुई थी. उस मुलाकात के 16 महीने बाद फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस मुलाकात में हैंडशेक भी हुआ, बातचीत भी हुई लेकिन Hug नहीं हुआ. यानी दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह गर्मजोशी वाला हग नहीं दिखा. हैंडशेक और हग (गले लगना) के बीच पिछले 16 महीने के भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर संबंधों में आई खटास शायद सामने थी। 

जी-7 के आउटरीच सत्र में जाने से पहले ग्रुप फोटो के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो खड़े थे लेकिन ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेता दो मिनट से अधिक वक्त तक एक दूसरे के आसपास रहे. हालांकि, न तो दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ और न ही दोनों एक दूसरे के तरफ बढ़ते हुए दिखे जबकि इस दौरान दोनों नेताओं की बाकी कई नेताओं के साथ बातचीत हुई। 

पीएम मोदी के मन में क्या चल रहा था
प्रधानमंत्री मोदी का रुख बहुत ही संतुलित दिखा और ट्रंप से मिलने की कोई बहुत उत्सुकता उन्होंने नहीं दिखाई. शायद पीएम के मन में हाल में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से लेकर ट्रेड टैरिफ, भारत पाकिस्तान मध्यस्थता के दावे और दूसरे वो तमाम विषय रहे होंगे, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध पिछले 20 वर्षों में सबसे कमजोर दौर से गुजरे हैं.
पीएम मोदी ने इशारों में ट्रंप को मैसेज दे दिया। 

कैसे दोनों की हुई मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी के G7 आउटरीच सत्र की शुरुआत से पहले के ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच में कोई मुलाकात नहीं हुई. दोनों नेता जब आउटरीच सत्र में पहुंचे तो ट्रंप अपनी जगह ले चुके थे. दूसरी तरफ से अपनी सीट पर मोदी आ रहे थे. क्योंकि ट्रंप और मोदी का सत्र में बैठने का स्थान अगल बगल ही था, इसलिए पीएम मोदी की नजर ट्रंप पर पड़ी और दोनों के बीच हैंडशेक हुआ और संक्षिप्त बातचीत हुई. बातचीत कुछ ऐसी थी कि ट्रंप ने पीएम मोदी की बाजू थपथपाई…लेकिन दोनों की मुलाकात हैंडशेक और संक्षिप्त बातचीत तक ही रही। 

मोदी ने पब्लिकली बर्थडे विश भी नहीं किया
अभी तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को अपना 80वा जन्मदिन मनाया था. इस दौरान दुनिया के कई देशों के नेताओं ने ट्रंप को शुभकामनाएं भेजी लेकिन पीएम मोदी की तरफ से कोई सार्वजनिक बधाई संदेश सामने नहीं आया. खासकर ऐसी पृष्ठभूमि में जब पीएम मोदी के 75 साल पूरे होने और भारत में निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बनाने पर ट्रंप ने मोदी को शुभकामनाएं दी थी। 

पीएम मोदी स्टार्मर से मिले गले, ट्रंप से सिर्फ हैंडशेक
जी-7 शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही मैक्रों ने पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया. इसके बाद वो मीटिंग हॉल में पहुंचे, दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं से खचाखच भरे हॉल में पीएम मोदी और ट्रंप की सीट अगल-बगल थी. जिस पर बैठने से पहले औपचारिक तौर पर पीएम मोदी और ट्रंप ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, दोनों के बीच थोड़ी-बहुत बातचीत हुई. हालांकि, ये बातचीत काफी फॉर्मल दिखाई दी. दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से गले नहीं मिले। 

इसके बाद जब जी7 फैमिली फोटो के लिए सभी नेता लॉन में गए तो ऐसा मालूम हुआ कि पीएम मोदी ने ट्रंप से दूरी बना ली है. फ्रंट लाइन में एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ पीएम मोदी नजर आए और दोनों के बीच में मैक्रों खड़े हुए. इस फोटो सेशन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पीएम मोदी से गले मिले, कई और नेता हाथ मिलाते, बात करते दिखे लेकिन ट्रंप से दूरी बनी रही। 

मोदी के नो हग का मैसेज
हालांकि, पिछले 16 महीने में दोनों नेताओं की फोन पर कई बार बात हुई है लेकिन भारत और पीएम मोदी ने ट्रंप और अमेरिका से अपनी कूटनीति को संतुलित रखा है. ट्रंप और मोदी की मंगलवार की द्विपक्षीय बातचीत से पहले मोदी ने कूटनीति को हैंडेशक तक ही ही सीमित रखकर शायद ये बताने की कोशिश की हो कि हैंडशेक से Hug तक पहुंचने में अब ट्रंप और अमेरिका को भारत की बहुत सारी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. तब तक हेंडेशेक से ही काम चलेगा। 

पीएम मोदी ने उन्‍हीं की भाषा में समझाया कैसे न‍िभाते हैं र‍िश्ते
कहते हैं क‍ि क‍िसी को कोई बात समझ न आए, तो उसे उसकी भाषा में समझाना चाह‍िए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्‍कुल वही क‍िया. ज‍िस रोनाल्‍ड रीगन को डोनाल्‍ड ट्रंप अपना आइकॉन मानते हैं, ज‍िनका नारा Make America Great Again चुराकर वे सत्‍ता में आए हैं, उन्‍हीं की भाषा में पीएम मोदी ने समझाया क‍ि जो दुन‍ियाभर में जो आप कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है. भारत का उदाहरण देकर बताया क‍ि दूसरे देशों के साथ र‍िश्ते कैसे न‍िभाते हैं। 

मौका G7 सम‍िट का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही ‘भरोसे में कमी’ से की. उन्‍होंने कहा- आज दुन‍िया इंटरकनेक्‍टेड है. एक दूसरे पर ड‍िपेंडेंट है. ऐसे में पार्टनरश‍िप का महत्‍व बढ़ जाता है. लेकिन ऐसी पार्टनरश‍िप तभी सफल होती है, जब उनके केंद्र में व‍िश्वास हो. यह भरोसा हो क‍ि सप्‍लाई चेन का इस्‍तेमाल हथ‍ियार के रूप में नहीं होगा. इसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का उदाहरण द‍िया. उन्‍होंने कहा, रोनाल्‍ड रीगन कहते थे क‍ि Trust but Verify. यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप ट्रस्‍टेड रूल बेस्‍ड ऑर्डर का न‍िर्माण करें. यह उस ट्रंप को सीधा जवाब था, जो क‍िसी रूल बेस्‍ड ऑर्डर को नहीं मानते. सप्‍लाई चेन को हथ‍ियार बना रहे हैं. कभी टैर‍िफ लगा द‍िया तो कभी धमकी दी, तेल लोगो को ये कर देंगे, वो कर देंगे। 

भारत का उदाहरण देकर समझाया
पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देकर दोस्‍ती के मायने समझाए. मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है. हमारे सभी प्रयास सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं.  जब संकट आया तो भारत ने दुन‍िया की मदद करना अपना दाय‍ित्‍व समझा. कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयां और vaccines भेजी. श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोजाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव Humanity First के सिद्धांत पर कार्य किया. हम पार्टनर को ऐसे ही देखते हैं. जंग ऐसे भरोसे को खत्‍म करती है. आज जरूरत है भरोसे को बनाए रखने की. यह सीधा ट्रंप को मैसेज था। 

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हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
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