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राज्यसभा में भाजपा की नई स्थिति क्या है, दो-तिहाई बहुमत से NDA कितनी दूर?

नई दिल्ली

राज्यसभा में NDA अब ताकतवर नजर आ रही है। हालांकि, अब भी सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत से दूर है, लेकिन ताजा चुनाव नतीजों ने सीटों की संख्या में खासा इजाफा कर दिया है। 18 जून तक 10 राज्यों की 27 सीटों पर चुनाव हुए थे। वहीं, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस सांसदों के इस्तीफे के बाद कहा जा रहा है कि एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

NDA किसकी ताकत कितनी
उच्च सदन में एनडीए का सबसे बड़ा दल भाजपा है। वहीं, गठबंधन अब 152 सीटों पर पहुंच गया है। सबसे पहले 24 सीटों पर जब सांसद निर्विरोध चुने गए, तो उनमें 19 एनडीए के थे। वही, गुरुवार को झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने एनडीए सांसदों की संख्या 20 पर पहुंचा दी है। खास बात है कि अब गठबंधन दो तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर है।

बहुमत मिलने के आसार, पर कैसे?
दरअसल, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 4 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है। इनमें सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक का नाम शामिल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कहा जा रहा है कि इन सभी सीटों पर भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। अटकलें ये भी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं।

वहीं, राज्यसभा में बीजू जनता दल के 5 और YSRCP के 7 सांसद हैं। खास बात है कि ये दोनों ही दल किसी गठबंधन में शामिल नहीं हैं और कई मौकों पर एनडीए का साथ देते रहे हैं। हालांकि, ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजद और भाजपा के समीकरणों में कुछ बदलाव देखा जा रहा है।

क्यों जरूरी है दो तिहाई बहुमत
संसद में संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। अब जब एनडीए यह आंकड़ा हासिल कर लेती है, तो परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर राह आसान हो जाएगी। कहा जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र के दौरान ही यह बिल दोबारा पेश कर सकती है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

विपक्ष के आंकड़े
विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं। आठ सांसदों वाली डीएमके और तीन सांसदों वाली आप इस समूह से अलग हो गई हैं। लोकसभा में एनडीए की संख्या 300 पार जा सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर उसका समर्थन कर सकते हैं। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है। इधर, शिवसेना यूबीटी के बागी भी उनके साथ जा सकते हैं।

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