samacharsecretary.com

किराना घराने की विरासत से निकली सुर-तपस्या: गोंडा की बंकू बहनों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

गोंड
 एक तरफ किताबें, दूसरी तरफ भक्ति का दीप और बीच में दो ऐसी बेटियाँ जिन्होंने साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो तो क्या, संकल्प बड़ा हो तो पहाड़ भी झुक जाते हैं। उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले की श्रुतिका बंकू और रितिका बंकू आज देश के उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जो स्कूल की पढ़ाई करते हुए भी भजन-कीर्तन के मंचों पर राष्ट्रीय स्तर की पहचान बना चुकी हैं। अवध की इस धरती से उठी इनकी भक्ति की आवाज़ आज रामनगरी अयोध्या से लेकर झारखंड, हिमाचल और राजस्थान तक गूँज रही है। किराना घराने की इन दो बेटियों ने अपने सुर, साधना और समर्पण से न केवल परिवार का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है。

रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि ने किया विशेष सम्मान
बंकू बेटियों के नाम से देशभर में पहचानी जाने वाली इन दोनों बहनों की प्रतिभा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जा रही है। हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि एवं राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने इन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। इससे पहले भी देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री इन्हें सम्मान से नवाज़ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सम्मान और अयोध्या में सांस्कृतिक विभाग से जुड़ाव इनकी राष्ट्रीय पहचान को और मज़बूत करता है।

पढ़ाई के साथ-साथ भजन-कीर्तन की साधना में भी अव्वल
श्रुतिका बंकू इस समय कक्षा 12वीं और रितिका बंकू कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। इतनी कम उम्र में जहाँ एक ओर वे अपनी पढ़ाई में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर भजन-कीर्तन और जागरण के मंचों पर उनकी निरंतर उपस्थिति यह साबित करती है कि सच्ची लगन हो तो शिक्षा और साधना साथ-साथ चल सकती हैं। राजस्थान के सीकर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय अग्र गौरव पुरस्कार से नवाज़ा गया, जबकि अयोध्या की पावन भूमि पर उन्हें जागरण शक्ति की उपाधि से विभूषित किया गया जो उनकी आध्यात्मिक निष्ठा का सबसे बड़ा प्रमाण है।

तीन पीढ़ियों की संगीत विरासत से मिली भक्ति की शक्ति
श्रुतिका और रितिका की यह प्रतिभा अचानक नहीं उभरी, इसके पीछे है तीन पीढ़ियों की अटूट संगीत साधना। दादी श्रीमती लक्ष्मी देवी और माँ श्रीमती नमिता बंकू स्वयं संगीत शिक्षा से जुड़ी हैं और वर्षों से न केवल अपने परिवार में, बल्कि समाज की अन्य बेटियों को भी संगीत का संस्कार दे रही हैं। गोण्डा के प्रतिष्ठित किराना घराने की इस विरासत ने श्रुतिका और रितिका को वह नींव दी है, जिस पर उनकी भक्ति, उनका सुर और उनका समर्पण टिका है। यही कारण है कि इनकी प्रस्तुति में केवल सुर-ताल नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक अनुभूति भी झलकती है।

राम नगरी से पहाड़ों तक गूँजते हैं इनके भजन, नम हो जाती हैं श्रोताओं की आँखें
अयोध्या की रामनगरी हो या हिमाचल की पहाड़ियाँ, झारखंड की धरती हो या राजस्थान का मरुस्थल, जहाँ भी ये दोनों बहनें मंच पर उतरती हैं, वहाँ का माहौल भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। राम नाम, हनुमान चालीसा और देवी-देवताओं के भजन जब इनकी वाणी से निकलते हैं, तो श्रोताओं की आँखें नम हो जाती हैं और मन श्रद्धा से भर उठता है।

घर-घर पहुँचा रही हैं सनातन की ज्योति, आने वाली पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा
आज जब युवा पीढ़ी तेज़ी से पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है और परंपराएँ पीछे छूटती जा रही हैं, ऐसे समय में अवध की ये दो बेटियाँ सनातन धर्म की ज्योति को घर-घर पहुँचाने का बीड़ा उठाए हुए हैं। अपने भावपूर्ण और आध्यात्मिक गायन के ज़रिए वे यह संदेश दे रही हैं कि हमारी सनातन परंपराएँ केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी दिशा हैं। श्रुतिका और रितिका बंकू निःसंदेह आने वाली पीढ़ी के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं, जहाँ भक्ति, शिक्षा और संस्कार एकसाथ फलते-फूलते हैं।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here