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सलमान खान की ‘काला हिरण’ पर फिर हाई कोर्ट में सुनवाई, 30 सितंबर को होगा अगला फैसला

सलमान खान और फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ का विवाद एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट में फिल्म की रिलीज को लेकर सुनवाई हुई, जहां जस्टिस ज्योति सिंह ने मेकर्स से सीधा सवाल किया कि- फिल्म कब रिलीज हो रही है?

प्रोड्यूसर अमित जानी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें इस बारे में निर्देश लेने होंगे. वहीं मेकर्स की तरफ से कोर्ट में फिल्म की रिलीज को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई. उनका कहना था कि फिल्म अभी रिलीज करने की स्थिति में ही नहीं है और उसे सेंसर सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास भेजना बाकी है. यहां तक कि फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज नहीं हुआ है.

कोर्ट के आदेश में भी दर्ज किया गया कि फिल्म फिलहाल रिलीज योग्य स्थिति में नहीं है और इसकी सामग्री को अभी सेंसर बोर्ड से प्रमाणित किया जाना बाकी है. हालांकि, सलमान खान की ओर से पेश वकील ने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए सेंसर सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती. इसके बाद कोर्ट ने OTT रिलीज को भी अपने आदेश के दायरे में शामिल किया है. अब इस मामले में मेकर्स को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करना है, जबकि अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी.

फिलहाल ‘काला हिरण’ की रिलीज को लेकर मामला पूरी तरह साफ नहीं हुआ है. फिल्म बड़े पर्दे पर आएगी या OTT का रास्ता अपनाएगी, इस पर भी कानूनी पेंच बना हुआ है.

आखिर सलमान खान ‘काला हिरण’ फिल्म से इतने नाराज क्यों हैं?

अब जरा पूरे मामले की शुरुआत समझिए….
‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ कोई आम फिल्म नहीं है. इस फिल्म को लेकर सबसे बड़ा विवाद यही है कि इसकी कहानी और प्रमोशनल मटीरियल का कनेक्शन सलमान खान के 1998 के काला हिरण मामले से जोड़ा जा रहा है.

फिल्म के सामने आने के बाद सलमान की टीम ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट में उनकी शख्सियत और पहचान का इस्तेमाल किया जा रहा है. एक्टर ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए फिल्म की रिलीज, प्रमोशन और इससे जुड़े दूसरे कामों पर रोक की मांग की थी. उनकी याचिका में इसे उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स का उल्लंघन बताया गया था.

मामला सिर्फ इतना नहीं था कि फिल्म का नाम ‘काला हिरण’ है. फिल्म के पोस्टर और प्रमोशनल मटीरियल में दिखाए गए किरदार को लेकर भी सलमान की टीम ने आपत्ति जताई. आरोप था कि किरदार की शक्ल-सूरत और कुछ पहचान वाली चीजों के जरिए दर्शकों को सीधे सलमान खान की याद दिलाई जा रही है.

1998 का वो काला हिरण केस फिर क्यों आया चर्चा में?
1998 में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान राजस्थान में काले हिरण के शिकार का मामला सामने आया था. इस केस ने सलमान खान की जिंदगी में लंबी कानूनी लड़ाई को जन्म दिया.

अब ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ इसी विवाद से प्रेरित बताई जा रही है. फिल्म को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक इसमें काले हिरण से जुड़े मामले के साथ कोर्टरूम ड्रामा, अपराध और उससे जुड़े दूसरे विवादों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है. फिल्म में लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े एंगल की चर्चा भी हुई है.

यही वजह है कि सलमान खान की टीम को डर है कि फिल्म में दिखाई गई कहानी उनके बारे में लोगों की धारणा और उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है.

कोर्ट ने पहले भी मेकर्स को दिया था झटका
यह पहली बार नहीं है जब इस फिल्म को लेकर कोर्ट में हंगामा हुआ है. जून में सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म के मेकर्स को नोटिस जारी किया था. बाद की सुनवाई में फिल्म के प्रमोशनल मटीरियल को लेकर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. जुलाई में हाई कोर्ट ने ‘काला हिरण’ के टीजर से जुड़े सोशल मीडिया लिंक और प्रोड्यूसर अमित जानी के कुछ इंटरव्यू हटाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने सलमान की प्रतिष्ठा को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की थी.

यानी मामला सिर्फ ‘फिल्म रिलीज होगी या नहीं’ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फिल्म के पोस्टर, टीजर और प्रमोशन तक कोर्ट की नजर पहुंच चुकी है.

अमित जानी भी पीछे हटने को तैयार नहीं
दूसरी तरफ फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी लगातार अपना पक्ष रखते आए हैं. मेकर्स का रुख रहा है कि फिल्म एक वास्तविक विवाद से प्रेरित कहानी है और इसे सीधे सलमान खान की बायोपिक नहीं माना जाना चाहिए. विवाद बढ़ने के बाद जानी ने दिल्ली हाई कोर्ट के कुछ आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी.

यानी एक तरफ सलमान खान अपनी पहचान और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ फिल्म के मेकर्स भी प्रोजेक्ट को बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं.

अब 30 सितंबर को क्या होगा?
फिलहाल ताजा सुनवाई के बाद गेंद फिर कोर्ट के पाले में है. मेकर्स को दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करना है और 30 सितंबर को अगली सुनवाई होगी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म अभी सेंसर सर्टिफिकेशन के स्टेज तक भी नहीं पहुंची है. ऐसे में फिलहाल रिलीज को लेकर कोई साफ तस्वीर नहीं है.

लेकिन इतना जरूर है कि ‘काला हिरण’ सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई है. एक तरफ सलमान खान का नाम, 1998 का बेहद चर्चित काला हिरण केस और उनकी पर्सनैलिटी राइट्स की लड़ाई है, तो दूसरी तरफ फिल्म मेकर्स का दावा और रिलीज की कोशिश.

अब असली सवाल यही है- क्या ‘काला हिरण’ सिनेमाघरों तक पहुंच पाएगी, या सलमान खान की कानूनी लड़ाई फिल्म की रिलीज पर भारी पड़ेगी? इसका अगला बड़ा जवाब 30 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई में मिल सकता है.

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