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भारत का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बना गेमचेंजर, डबल-स्टैक ट्रेन से तेज होगा सामान का सफर; आम लोगों को क्या फायदा?

नई दिल्ली  सौ बात की एक बात ये कि खबरों की भीड़ में जो रेल की लेटेस्ट खबर आई है उसपर ध्यान पब्लिक का शायद उतना नहीं जा रहा क्योंकि बात मालगाड़ी की है, लेकिन उसको समझने की जरूरत है कि बात सिर्फ मालगाड़ी की नहीं है. ये सब के मतलब की खबर है. वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इसके आखिरी तीन हिस्सों का भी उद्घाटन कर दिया गया. डेडिकेटेड मतलब सिर्फ फ्रेट के लिये, माल के लिए. मतलब सिर्फ मालगाड़ियों के लिए अलग रेल की पटरी. जिसपर सिर्फ मालगाड़ियां चलेंगी. इसके आखिरी तीन हिस्से यानी कुल 326 km के हिस्से का भी अब उद्घाटन हो गया. यानी पूरा 2,843 किलोमीटर का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क अब पूरी तरह चालू हो गया है. तो ये सिर्फ मालगाड़ियों की बात इसलिए नहीं है क्योंकि इसका फायदा तो सबको मिलेगा. मालगाड़ी के चक्कर में किसकी ट्रेन लेट नहीं हुई जीवन में? ये वाली प्रॉब्लम तो सब झेल चुके हैं. पहले एक ही पटरी पर यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां दोनों चलती थीं. मालगाड़ियां भारी और धीमी होती हैं, इसलिए यात्री ट्रेनों को बार-बार रुकना पड़ता था या लेट होना पड़ता था. पटरियां जैम रहती थीं. अब मालगाड़ियों का बड़ा हिस्सा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चला गया है. पुरानी लाइनों पर जगह खाली हुई है. रेलवे अब उन लाइनों पर ज्यादा यात्री ट्रेनें चला सकता है और वो टाइम पर चलेंगी ये भी उम्मीद बढ़ जाती है। 20 साल पहले बना प्लैन क्योंकि ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बनी हुई एकदम अलग रेल लाइन है. इसलिए मालगाड़ियां बिना रुके तेज दौड़ सकती हैं. और ये काम चल रहा था 2005 से. 20 साल पहले से. 2005 में प्लैन बना. 2006 में इसके लिए DFCCIL नाम से अलग कंपनी बनाई गई इसे बनाने और चलाने का काम संभालने के लिए. जापान की मदद से वेस्टर्न कॉरिडोर और विश्व बैंक की मदद से ईस्टर्न कॉरिडोर का काम शुरू हुआ. जमीन लेने में दिक्कतें आईं, ठेके देने में कई अड़चनें आईं, निर्माण में कई बाधाएं आईं. तो काम जरूर लंबा खिंचा. ईस्टर्न कॉरिडोर 2023-24 में पूरा हुआ और वेस्टर्न का आखिरी हिस्सा अब जाकर 2026 में पूरा हुआ है। ये कॉरिडोर दो बड़े हिस्सों में बंटा है. एक है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक 1,337 किलोमीटर लंबा है. ये मुख्य रूप से कोयला, स्टील, अनाज जैसे भारी माल के लिए है. दूसरा है वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो उत्तर प्रदेश के दादरी से मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक 1,506 किलोमीटर लंबा है. ये कंटेनर माल और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के लिए है खासतौर पर. दादरी पर दोनों कॉरिडॉर मिलते हैं और पूरे उत्तर, पश्चिम और पूर्व को जोड़ देते हैं. लेकिन खबर में जो खासतौर पर समझने की बात है वो ये कि ये दुनिया में अनोखा है. क्यों? क्या दुनिया में मालगाड़ियां नहीं चलतीं? बिल्कुल चलती हैं. लेकिन इसमें डबल स्टैक मालगाड़ी चल सकती है। डबल स्टैक का मतलब डबल स्टैक मतलब एक डिब्बे के ऊपर दूसरा डिब्बा, एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर. वैसे तो अमेरिका जैसे देशों में डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनें चलती हैं यानी एक डिब्बे पर दो कंटेनर एक के ऊपर एक रखे जाते हैं, लेकिन वहां ऐसी मालगाड़ी चलती है डीजल इंजन से. अब आप कहोगे तो ये कौनसा बड़ा फर्क हो गया? तो वो समझने वाली बात है कि भारत ने जो बनायी है पटरी उसपर ये इलेक्ट्रिक गाड़ी चलेगी. और इलेट्रिक इंजन की पटरी पर एक के ऊपर एक कंटेनर रख कर चलाओ तो बिजली की तारें भी तो फंस जाएंगी. इसलिए ये भारत में पटरी बनी है वो दुनिया में अनोखी बनाई गई है. इसकी तारें उतनी ऊचीं लगाई गई हैं कि गाड़ी डबल कंटेनर ले कर चल सके. पैसेंजर गाड़ियों वाली पटरी पर डबल कंटेनर लेकर नहीं जा सकते क्योंकि बिजली की तारें आ जती हैं बीच में. भारत ने पूरे कॉरिडोर पर बिजली की तारें ऊंची लगाई हैं, लगभग 7.5 मीटर ऊंची. इससे बिजली के इंजन से डबल स्टैक ट्रेनें चल सकती हैं. ऐसा पूरा फ्रेट कॉरिडोर, ऐसी पूरी रेल लाइन ही ऊंची तारों की हो, ये दुनिया के किसी और देश में नहीं है. और क्योंकि पूरी लाइन है ही मालगाड़ियों के लिए, तो ट्रेन की लंबाई भी डबल रख सकते हैं। डबल लंबाई और डबल ऊंचाई लॉन्ग हॉल यानी लंबी दूरी तक माल ढोने के लिए ट्रेन में डिब्बे भी ज्यादा लगाते हैं. तो डबल लंबाई और डबल ऊंचाई, तो एक ट्रेन अब चार सामान्य ट्रेनों जितना माल ले जा सकती है. स्पीड भी 100 km/h तक हो सकती है क्योंकि पूरी लाइन ही मालगाड़ी की है. पैसेंजर ट्रेनों के लिए रुकना ही नहीं है. पुरानी लाइनों पर मालगाड़ियां औसतन 25 km/h ही चल पाती थीं. ट्रक से जिस माल को पहुंचने में 30 घंटे लगते हैं, वही माल अब इससे 10-12 घंटे में पहुंच जाता है. तो फायदा हर लेवल पर है. आप ये देखो कि पहले लॉजिस्टिक्स यानी माल ढोने का खर्च देश की जीडीपी का लगभग 14% था, जो बाकी देशों से बहुत ज्यादा था। यानी हमारे यहां ज्यादातर सामान की कीमत का बड़ा हिस्सा तो उसकी ढुलाई के खर्चे का होता था. अब ये घटकर 8-9 % के आसपास आ रहा है. माल सस्ता भी पहुंचता है और जल्दी भी पहुंचता है. किसानों का अनाज हो, फैक्टरियों का माल हो, कच्चा माल हो, तैयार सामान हो, सब में फायदा है. और लोगों को रेल का सीधा फायदा तो ये कि पुरानी रेल लाइनों से मालगाड़ियां हटने से बाक़ी यात्री ट्रेनें ज्यादा चलाई जा सकती हैं और टाइम पर चल सकती हैं. क्योंकि ये भी प्रॉब्लम खड़ी हो गई थी कि दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रूट पर यात्री बढ़े जा रहे हैं और वो वंदे भारत जैसी ट्रेनों के लिए पैसा देने को भी तैयार दिख रहे हैं लेकिन पटरियां ही इतनी नहीं थीं कि और ट्रेनें चला सकें. तो पटरियां तो और बिछाने की जरूरत थी है. यानी जितनी ट्रेनें चल सकती थीं उससे कहीं ज्यादा ट्रेनें दौड़ रही थीं पहले ही पटरियों पर इन रूट पर. इस वजह से नई यात्री ट्रेनें शुरू करना मुश्किल हो जाता था. … Read more

1705KM की धांसू रेंज और लग्जरी इंटीरियर! Xiaomi ने लॉन्च की 7-सीटर SkyNomad SUV, फीचर्स कर देंगे हैरान

नई दिल्ली शाओमी (Xiaomi) का जब भी नाम आता है, तो हममें से ज्यादातर लोगों के जेहन में किसी फोन की तस्वीर आती है. मगर ये कंपनी सिर्फ फोन नहीं बल्कि कई दूसरे प्रोडक्ट्स भी बेचती है. ऐसा ही एक सेगमेंट शाओमी कार्स का है. शाओमी चीनी बाजार में कई कारें बेचती हैं. हाल में ही कंपनी ने अपने स्काईनोमाड प्रोडक्ट को इंट्रोड्यूस किया है।  कंपनी ने आधिकारिक रूप से अपनी स्काईनोमाड (Xiaomi SkyNomad) सीरीज को लॉन्च किया है. इस रेंज में चार मॉडल्स एक्सटेंडेड रेंज इलेक्ट्रिक व्हीकल कैटेगरी के है. इसमें स्काईनोमाड एन70 (N70) और एन90 (N90) नेमप्लेट के तहत चार कॉन्फिग्रेशन आते हैं।  कंपनी ने एन70 प्रो, एन70 मैक्स, एन90 मैक्स और एन90 मैक्स स्टूडियो को लॉन्च किया है. बता दें कि शाओमी स्काईनोमाड की एन70 एक 5-सीटर कार है, जबकि एन90 एक 7 सीटर एसयूवी है. आइए जानते हैं इनकी खास बातें।  बैटरी, इंजन और रेंज  इन दोनों एसयूवी की खासियत इनका रेंज एक्सटेंडर अवतार है. सबसे पहले बात करते हैं एन70 प्रो की, जो एक फ्रंट व्हील ड्राइव कॉन्फिग्रेशन मॉडल है. इस कार में 52kWh की बैटरी मिलती है, जिसकी क्लेम्ड इलेक्ट्रिक रेंज 351 किलोमीटर है. वहीं इंजन और इलेक्ट्रिक अवतार की कंबाइन्ड रेंज 1351 किलोमीटर है।  इसका एन70 मैक्स अवतार डुअल मोटर के साथ आता है. ऑल व्हील ड्राइव वाली इस कार में 76kWh की बैटरी मिलती है, जिसकी इलेक्ट्रिक अवतार में क्लेम्ड रेंज 505 किलोमीटर है. वहीं इसकी कंबाइन्ड रेंज (इलेक्ट्रिक + पेट्रोल) 1461 किलोमीटर है।  N90 में क्या कुछ मिलेगा Xiaomi SkyNomad N90 Max की बात करें, तो इसमें डुअल मोटर के साथ ऑल-व्हील ड्राइव फीचर मिलता है. ये कार 76kWh की बैटरी के साथ आता है, जो क्लेम्ड इलेक्ट्रिक रेंज 464KM है. वहीं पेट्रोल और इलेक्ट्रिक की कंबाइन्ड क्लेम्ड रेंज 1705 किलोमीटर है. एसयूवी की टॉप स्पीड 190 किलोमीटर प्रति घंटे की है।   कार के मैक्स स्टूडियो वेरिएंट में इलेक्ट्रिक पॉप-अप रूफ मॉड्यूल मिलता है, जो कार की ऊंचाई को बढ़ाकर 2294 एमएम तक पहुंचा देता है. कार की दूसरी रो में मिलने वाली सीट्स को 30 सेकंड में बेड में बदला जा सकता है. ये पूरा मैकेनिज्म इलेक्ट्रिकली काम करता है. इसमें फैक्टरी फिटेड अंडरफ्लोर हीटिंग, वुड ग्रेन ऐलुमिनियम फ्लोरिंग और 30 इंच की प्रोजेक्शन स्क्रीन मिलती है।  स्काईनोमाड एन90 मैक्स की लंबाई 5.285 मीटर, चौड़ाई 1.998 मीटर और व्हीलबेस 3.080 मीटर है. ये कार 2 + 2+ 3 सीटिंग कॉन्फिग्रेशन में आती है. वहीं SkyNomad N70 की बात करें, तो इसकी लंबाई 4.96 मीटर, चौड़ाई 1.998 मीटर और व्हीलबेस 2.950 मीटर है। 

गैस सिलेंडर के दाम ₹400 तक आने की चर्चा, क्या बढ़ेगी LPG सब्सिडी? जानें पूरा मामला

नई दिल्ली ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद यानी CEW की एक रिपोर्ट आई है। इसमें कहा गया है कि LPG की कीमत एक ऐसा बड़ा मुद्दा है, जो सभी वर्गों के लिए चुनौती बना हुआ है। मौजूदा दरें आम आदमी की पहुंच से काफी ऊपर हैं। इसी वजह से लोग जलाऊ लकड़ी या महंगे अनौपचारिक सिलेंडरों का सहारा ले रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो जाए तो 80 प्रतिशत से अधिक लोग पूरी तरह से गैस पर आ जाएंगे। अभी सिलेंडर रिफिल करवाने की औसत भुगतान क्षमता 500 रुपये प्रति सिलेंडर है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाला सिलेंडर 642 रुपये का है। प्रवासी मजदूरों को भारी दिक्कतें स्टडी के अनुसार, प्रवासी मजदूरों में से 79 प्रतिशत के पास औपचारिक गैस कनेक्शन नहीं है और 4 प्रतिशत से भी कम लोग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए और हैरान करने वाली है, क्योंकि 2021 की नीति में प्रवासी मजदूरों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन के माध्यम से कनेक्शन लेने की सुविधा पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और कागजी प्रक्रियाओं में उलझन के कारण प्रवासी मजदूर इस योजना से दूर हैं। सीईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बराह का कहना है कि सरकार का यह सोचना कि केवल एलपीजी कनेक्शन दे देने भर से काम हो जाएगा, सही नहीं है। असली चुनौती यह है कि लोग नियमित रूप से गैस रिफिल करवा पाएं, प्रवासी मजदूरों को उज्ज्वला योजना की पूरी जानकारी हो और ग्रामीण घरों तक सिलेंडर भरोसेमंद ढंग से पहुंचते रहें। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्वच्छ हवा की नीति को केवल 'कनेक्शन देने' से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साफ ईंधन सस्ता, भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ हो। शहरी झुग्गियों और प्रवासियों की स्थिति शहरी अनौपचारिक बस्तियों में 70 प्रतिशत लोग पूरी तरह से गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिना औपचारिक कनेक्शन वाले 31 प्रतिशत लोगों को एड्रेस प्रूफ न होने के कारण कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है। इस वजह से 11 प्रतिशत लोग वास्तविक रिटेल प्राइस के बजाय 1,040 रुपये तक अनौपचारिक रूप से सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं। वहीं, प्रवासी मजदूरों में से 70 प्रतिशत, जो खुले स्थानों में रहते हैं, पूरी तरह से ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी और कोयले पर निर्भर हैं। जो प्रवासी अनौपचारिक रूप से गैस खरीदते हैं, उन्हें 71 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान करना पड़ता है, जो आधिकारिक दर से 20 प्रतिशत से अधिक महंगा है। 200 रुपये और बढ़े सब्सिडी सीईडब्ल्यू की पहली सिफारिश यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को उज्ज्वला सब्सिडी को प्रति सिलेंडर लगभग 200 रुपये बढ़ाना चाहिए। दूसरा सुझाव प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाने का है, ताकि वे आसानी से उज्ज्वला योजना से जुड़ सकें। तीसरा, स्मार्ट मीटर कियोस्क की पायलट परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की गई है, ताकि लोग छोटी-छोटी किस्तों में गैस के पैसे जमा कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर डिलीवरी बढ़ाने के लिए विक्रेताओं को अलग-अलग कमीशन देने का सुझाव दिया गया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी सिलेंडर पहुंच सकें।

Skoda-Volkswagen को मिला भारत में नया पार्टनर? JSW के साथ डील की तैयारी, बदल सकती है कंपनी की रणनीति

नई दिल्ली स्कोडा फॉक्सवैगन ग्रुप भारतीय बाजार में लंबे समय से एक पार्टनर की तलाश में है. कंपनी का नाम कई भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ जुड़ चुका है, लेकिन लंबे समय से चर्चा है कि जेएसडब्लू ग्रुप के साथ कंपनी साझेदारी कर सकती है. अब इस मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट्स की मानें, तो स्कोडा ऑटो (इंटरनेशनल) और जेएसडब्लू ग्रिन मोबिलिटी ने एक नॉन-बाइंडिंग एमओयू साइन किया है।  इस एमओयू का मकसद भारतीय बाजार में एक स्ट्रैटेजिक जॉइंट वेंचर सेटअप करना है. इस प्रपोज्ड वेंचर में चेक कारमेकर की इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट कैपेबिलिटी को जेएसडब्लू ग्रुप की मैन्युफैक्चरिंग स्केल के साथ जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी. नॉन-बाइंडिंग एमओयू के तहत दोनों कंपनियों के ऊपर फैसला लेने के लिए कोई कानूनी दबाव नहीं होता है।  क्या है कंपनी की तैयारी? ये जॉइंट वेंचर भारत के लिए कार डेवलप करने, मैन्युफैक्चरिंग और बेचने पर फोकस करने के साथ और विदेशों में एक्सपोर्ट भी करेगा. इस पार्टनरशिप के तहत कंपनी तमाम पावरट्रेन की गाड़ियां तैयार करेगी. इसमें इंटरनल कंबशन इंजन, प्लगइन हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारें शामिल होंगी।  जेएसडब्लू के स्पोक्सपर्सन ने बताया, 'फिलहाल ये एमओयू संभावनाओं को तलाशने और नॉन-बाइंडिंग है. दोनों कंपनियां बातचीत की शुरुआत में हैं और इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.' अगर ये पार्टनरशिप होती है, तो ऑटो सेक्टर में ये जेएसडब्लू का तीसरा वर्टिकल होगा।  ऑटो सेक्टर में JSW की तैयारी कंपनी एमजी मोटर के साथ मिलकर काम कर रही है. साथ ही जेएसडब्लू अपना एक अलग ब्रांड खड़ा करने में लगी हुई है, जिसके तहत हमें आने वाले दिनों में कुछ कारें देखने को मिल सकती हैं. ऑटोकार प्रोफेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कोडा स्पोक्सपर्सन ने बताया कि दोनों पार्टिज की पार्टनरशिप जॉइंट कंट्रोल पर बेस्ड होगी।   उन्होंने बताया, 'डीप लोकलाइजेशन और प्लेटफॉर्म सिनर्जी का मकसद भारतीय बाजार में कंपटीटिव प्रोडक्ट्स लाना, स्केल को बढ़ाना और प्रॉफिट को बेहतर करना है.' इस पार्टनरशिप के तहत कंपनी अपने पोर्टफोलियो में नए प्रोडक्ट्स को जोड़ेगा, जिनमें लोकलाइजेशन पर जोर होगा। 

फोन में इंटरनेट नहीं फिर भी कर पाएंगे UPI पेमेंट, इस खास कोड से ऑफलाइन ट्रांजैक्शन का आसान तरीका जानें

 नई दिल्ली कई बार ऐसी सिचुएशन आ जाती है, जब आपके पास कैश नहीं होता और UPI पेमेंट करने के लिए इंटरनेट नहीं चल रहा होता है. कई बार डेटा प्लान खत्म हो जाता है या डेटा लिमिट पूरी हो जाती है. ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप बिना इंटरनेट के भी UPI पेमेंट कर सकते हैं।  बहुत कम लोगों को इस तरीके के बारे में पता है. आज हम आपको इसके दो तरीके बताने वाले हैं. पहला तरीका एक मैनुअल कोड के जरिए है और दूसरा ऑफलाइन चलने वाले ऑटोमेशन सिस्टम के जरिए. तो आइए जानते हैं बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट कैसे किया जा सकता है।  जानिए कैसे करें ऑफलाइन पेमेंट, कुछ आसान स्टेप्स में अगर आप ऐसी जगह फंस जाते हैं, जहां इंटरनेट सही से काम नहीं कर रहा है, तो आप एक खास कोड की मदद से बिना इंटरनेट के पेमेंट कर सकते हैं. कोड वाला तरीका. इस तरीके में *99# कोड आपकी मदद कर सकता है. इसके लिए आपको अपना डायल पैड खोलना है, जहां आप फोन नंबर डालते हैं. यहां *99# डायल करके कॉल करना है।  इसके बाद आपको अपनी भाषा चुननी होगी. फिर मांगी गई जानकारी दर्ज करनी होगी. इसके बाद आपको पैसे भेजने के ऑप्शन को चुनना है. आप जिस व्यक्ति को पैसे भेजना चाहते हैं, उसका मोबाइल नंबर, UPI ID या बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी डाल सकते हैं. इसके बाद आपको जितने पैसे भेजने हैं, वह अमाउंट डालना होगा और अपना UPI PIN दर्ज करना होगा. इसके बाद आपका पेमेंट हो जाएगा।  ऑटोमेटिक तरीका, QR स्कैन करके करें ऑफलाइन पेमेंट अगर आप बिना इंटरनेट के दुकान पर लगे QR कोड को स्कैन करके पेमेंट करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक और तरीका है. इसमें आपको मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती।  यह तरीका Jio SIM पर काम नहीं करता है. दूसरे नेटवर्क के SIM पर यह काम कर सकता है. इसके लिए आपको pwa.offpayapp.com वेबसाइट पर जाकर इसे इंस्टॉल करना होगा. इसके बाद यह सिस्टम आपके लिए ऑफलाइन पेमेंट की प्रक्रिया को आसान बना देता है।  मैनुअल तरीके में आपको नंबर, UPI ID या दूसरी जानकारी डालनी पड़ती है. वहीं, इस तरीके में आप QR कोड स्कैन करके पेमेंट की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं और सीधे पेमेंट ऑप्शन तक पहुंच सकते हैं। 

उत्तर प्रदेश में बनेगा नया न्यू हाथरस सिटी, करीब 10 हजार एकड़ में होगा विकास; जेवर एयरपोर्ट से होगी शानदार कनेक्टिविटी

हाथरस यूपी में हाथरस जिले में 10 हजार एकड़ में नया शहर बसाने की तैयारी है.यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) मास्टर प्लान 2041 (फेज 2) के तहत ये नया शहर बसा जा रहा है. करीब 4000 हेक्टेयर में ये इंडस्ट्रियल और आवासीय शहर हाथरस अर्बन सेंटर या न्यू हाथरस नाम से बसाया जा रहा है. यीडा ने इसके लिए तीन-चार जगहें चिन्हित की हैं और कंसल्टेंट कंपनी ने यमुना अथॉरिटी को रिपोर्ट सौंप दी है. अगले 15 सालों के भीतर ये नया शहर एनसीआर के पास सबसे बड़ी आवासीय परियोजना हो सकती है।      10,000 एकड़ का एरिया न्यू हाथरस का     हाथरस, सासनी तहसील के 50 गांव     यमुना अथॉरिटी के 358 गांव अधिसूचित हाथरस के ये गांव फायदे में रहेंगे हाथरस जिले के 358 गांव यमुना अथॉरिटी के अधिसूचित क्षेत्र में शामिल हैं. ये इलाका यमुना एक्सप्रेसवे से करीब 45 किलोमीटर में फैला है.इसका प्रारंभिक सर्वे कराया गया है.अथॉरिटी से जगह फाइनल होने के बाद एजेंसी व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगी. न्यू हाथरस का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. यमुना एक्सप्रेसवे से बिल्कुल सटे हाथरस की सादाबाद तहसील के 127 गांव इसमें आते हैं.  हाथरस (सदर) तहसील के 180 से 215 गांव इसके दायरे में होंगे, जो हाथरस शहर के करीब अलीगढ़-आगरा हाईवे (NH-93) के समीप हैं।  सासनी-सादाबाद तहसील के पास सासनी तहसील में 42 से 79 गांव में ब्लॉक और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर इसमें होंगे. सासनी एवं सादाबाद क्षेत्र में सासनी देहात, टुकसान, केवलगढ़ी, बीछिया, ताजपुर, धातरा खुर्द, धातरा कलां, खेड़ा बरामई, गढ़ी जैनी, रोहई, रामगढ़, जटोई, बंका, फरसौटी गांव इसमें आ सकते हैं. सदर एवं चंदपा में चंदपा, कोटा, अहवरनपुर, चंद्रगढ़ी, फुसकरा, नगला शीशम, खरगू, कोरना चमरुआ, बुधु नगला हेमराज गांव आ सकते हैं।  हाथरस अर्बन सेंटर (न्यू हाथरस) से शहरों की दूरी मथुरा : 40–45 किमी: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर, विश्राम घाट  वृंदावन: 45–50 किमी: बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर आगरा: 50–60 किमी: ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी  अलीगढ़:30–35 किमी: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और देश का प्रमुख ताला-हार्डवेयर हब राया हेरिटेज सिटी (यीडा): 25–30 किमी: यमुना एक्सप्रेसवे किनारे धार्मिक पर्यटन टाउनशिप  गोवर्धन और बरसाना: 65–70 किमी: गोवर्धन परिक्रमा, राधा रानी मंदिर बरसाना ग्रेटर नोएडा : 100–125 किमी: यमुना एक्सप्रेसवे से 1- 1.5 घंटे का सफर हाथरस अर्बन सेंटर 4 हिस्सों में  हाथरस अर्बन सेंटर को चार हिस्सों में बांटा गया है. इसमें इंडस्ट्रियल जोन में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, एमएसएमई और एक्सपोर्ट इकाइयां लगाई जाएंगी. आवासीय परियोजना में औद्योगिक कर्मचारियों और आम जनता के लिए हाउसिंग सेक्टर, ऊंची इमारतें और किफायती आवास बनेंगे.लॉजिस्टिक्स हब में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटल, मॉल-रेस्तरां और वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स पार्क बनाया जाएगा. ग्रीन एरिया के लिए पर्यावरण संतुलन के लिए कुल क्षेत्रफल का 15% से अधिक हिस्सा पार्क, ग्रीनरी और ओपन स्पेस के लिए रखा गया है।  हाथरस के हींग उद्योग को फायदा हाथरस के ODOP उत्पाद हींग और गुलाल उद्योग को पैकेजिंग, लैब टेस्टिंग और सीधी एक्सपोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी. फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उद्योग को भी दिल्ली एनसीआर के बाहर भी बड़ा बाजार मिलेगा. यहां कांच के मोती और पीतल के आभूषण, मशीन टूल और इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जे के उद्योगों को फायदा मिलेगा.मेडिकल और पावर ग्रिड मशीनरी यूनिट का यहां की इकाइयां भी फायदा उठाएंगी।  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नजदीक हाथरस अर्बन सेंटर जेवर एयरपोर्ट से लिंक है. यह जेवर एयरपोर्ट के डायरेक्ट कैचमेंट एरिया में आता है.यीडा अलग से एक्सप्रेस रोड नेटवर्क बना रहा है. यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे, NH-93 (आगरा-अलीगढ़), बरेली-मथुरा हाईवे और हाथरस रेलवे जंक्शन से सीधे जुड़ा है. ये आगरा का सैटेलाइट टाउन बन सकता है. आगरा पर बढ़ रहे औद्योगिक कारखानों और आबादी के दबाव घटाने में यह मददगार होगा।  यमुना एक्सप्रेसवे किनारे तीन शहरी केंद्र बनेंगे यमुना एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी का मास्टर प्लान-2041 तैयार हो चुका है. यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी फेज-2 के तहत तीन शहरी केंद्रों का प्लान है.यीडा मास्टर प्लान 2041 के फेज-2 में ये तीन अर्बन नोड्स बनने हैं।   टप्पल-बाजना अर्बन सेंटर अलीगढ़ में 11,104 हेक्टेयर में ये नया शहर बसाया जाएगा. यहां लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब के साथ टाउनशिप बनेगी. जेवर एयरपोर्ट के बेहद नजदीक यहां मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, ट्रांसपोर्ट हब और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनाया जा रहा है।  राया अर्बन सेंटर  मथुरा में राया अर्बन सेंटर नाम से हेरिटेज सिटी बन रही है. धार्मिक पर्यटन एवं हेरिटेज टाउनशिप 11653 हेक्टेयर में है. मथुरा-वृंदावन के धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को संजोते हुए 753 एकड़ में ये शानदार हेरिटेज सिटी, यमुना रिवरफ्रंट, थीम पार्क और वेलनेस सेंटर बनाए जा रहे हैं।  आगरा अर्बन सेंटर या न्यू आगरा ताजनगरी में आगरा अर्बन सेंटर या न्यू आगरा बसाया जा रहा है. 14 हजार हेक्टेयर के इस शहर में आईटी, पर्यटन एवं प्रदूषण मुक्त उद्योगों के साथ आगरा में यह सबसे बड़ा नोड होगा. इसमें आईटी पार्क, हॉस्पिटैलिटी, एक्सपो सेंटर और ग्रीन इंडस्ट्री भी होगा। 

‘मां के पैर छूकर माफी मांगिए’, संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को दिया भावुक संदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मां-बेटे के संपत्ति विवाद में एक अलग ही नजारा देखने को मिला. कोर्ट ने बेटे से कहा कि मां के पैर छूकर माफी मांगो और अपने पापों के लिए माफी मांगो. दरअसल, कोर्ट ने इस विवाद की सुनवाई के दौरान बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और आशीर्वाद लेने की सलाह थी. कोर्ट ने कहा कि मां का स्थान हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है.जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी.  सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेटे से मौखिक रूप से कहा कि आपको अपनी मां के पैर छूकर माफी मांगनी चाहिए, अपने सभी पापों के लिए माफी मांगिए।  क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है- सुप्रीम कोर्ट जस्टिस शर्मा ने अदालत में मौजूद वकील को संबोधित करते हुए भी कहा कि क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है? हम बेटे से कह रहे हैं कि वापस मां के पास जाए, उनके पैर छूए, उन्हें महसूस करे, माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले. मामला उस संपत्ति से जुड़ा है, जिसकी मां और उनके पति एकमात्र मालिक हैं.  माता-पिता ने प्रेम और स्नेह के चलते बेटे और उसकी पत्नी को संपत्ति की पहली मंजिल पर बिना किराए के लाइसेंसी के तौर पर रहने की अनुमति दी थी।  बेटे और उसकी पत्नी पर परेशान करने के आरोप माता-पिता का आरोप था कि बाद में बेटे और उसकी पत्नी ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया और संपत्ति उनके नाम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटे ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा किया. इसके बाद माता-पिता ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर बेटे से संबंध समाप्त करने की घोषणा की. उन्होंने बेटे के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई और संपत्ति खाली करने को कहा. माता-पिता ने संपत्ति का कब्जा वापस लेने, स्थायी निषेधाज्ञा और हर्जाने की मांग को लेकर मुकदमा दायर किया।  माता-पिता ही संपत्ति के एकमात्र मालिक थे- ट्रायल कोर्ट ने माना ट्रायल कोर्ट ने माना कि माता-पिता संपत्ति के एकमात्र मालिक हैं और बेटे तथा उसकी पत्नी केवल लाइसेंसी हैं. लाइसेंस वैध रूप से समाप्त किए जाने के बाद दोनों को पहली मंजिल का कब्जा खाली करना होगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की तो सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और उनका आशीर्वाद लेने की मौखिक सलाह भी दी। 

MP में 17 सितंबर से बीजेपी का बड़ा अभियान, 20 यात्राओं से कवर होंगे 55 जिले; जानें पूरा प्लान

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा 17 सितंबर से वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक 10-10 यात्राएं निकालने जा रही है। इन यात्राओं के लिए ऐसे रूट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि एक यात्रा का मार्ग दूसरी यात्रा से न टकराए। मध्यप्रदेश से होकर गुजरने वाले अलग-अलग मार्गों के जरिए प्रदेश के सभी 55 जिलों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी स्तर पर इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन यात्राओं में उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा कवर होगा। गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और दिल्ली से होकर ये यात्राएं गुजरेंगी। अलग-अलग नेताओं को दी जिम्मेदारी अब तक 13 रूट फाइनल किए जा चुके हैं, जबकि बाकी रूट को लेकर मंथन चल रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी है। यात्राओं का उद्देश्य केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा। इनमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने, सेवा गतिविधियों और 2047 के संकल्प को भी शामिल किया जाएगा। आम लोगों के सुझाव लेंगे बीजेपी नेता यात्रा की कार्ययोजना में जनभागीदारी, विकास, सेवा और सांस्कृतिक जुड़ाव को प्रमुखता दी गई है। हर प्रमुख पड़ाव पर स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, लाभार्थियों और समुदाय के दूसरे वर्गों को गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। सरकारी योजनाओं से जुड़ी व्यावहारिक सहायता और नागरिकों के सुझाव दर्ज करने की भी योजना है। 25 आइकॉन में चुने जाएंगे मेधावी '25 आइकॉन' अभियान में हर पड़ाव से किसान, शिक्षक, महिला उद्यमी, युवा या खिलाड़ी जैसे स्थानीय प्रेरक व्यक्ति को चुना जाएगा। इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की छोटी वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप पर दिखाने का प्रस्ताव है। साथ ही 'चिट्ठी 2047 के नाम' के जरिए लोगों से पूछा जाएगा कि वे 2047 तक अपने क्षेत्र को किस रूप में देखना चाहते हैं। हर पड़ाव पर 'मेरे लिए भारत की प्रगति…' जनवाणी के जरिए नागरिकों की बात रिकॉर्ड की जाएगी। वाराणसी में इन आवाजों को जोड़कर 90 सेकेंड की फिल्म बनाने का प्रस्ताव है। स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों और सामग्री निर्माताओं को भी यात्रा से जोड़ा जाएगा। शहीदों की मिट्टी से लेकर चिकित्सा शिविर तक यात्रा के दौरान जिन क्षेत्रों का संबंध स्वतंत्रता सेनानियों या देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से है, वहां उनके गांव, स्मारक या समाधि स्थल की मिट्टी कलश में एकत्र करने की योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी। इसके अलावा चयनित पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और शुगर की जांच तथा परामर्श होगा। हर पड़ाव पर सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण एवं सहायता डेस्क लगाने का भी प्रस्ताव है। 2001 से 2026 तक की विकास यात्रा भी दिखाई जाएगी यात्रा में बुजुर्गों के अनुभव रिकॉर्ड किए जाएंगे। 'पहले और अब' प्रदर्शनी दीवार के जरिए पुरानी और मौजूदा तस्वीरों व दस्तावेजों के माध्यम से सड़क, स्कूल, घर और बिजली जैसी सुविधाओं में आए बदलाव दिखाने की योजना है। वहीं, 'विकास की यात्रा' नुक्कड़ नाटक में 2001 से 2026 तक एक परिवार की कहानी के जरिए बिजली, गैस कनेक्शन, आवास और शिक्षा जैसी सुविधाओं में हुए बदलाव को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा। नारी शक्ति सम्मेलन और क्विज भी होंगे स्थानीय योजनाओं के लाभार्थियों का सम्मान, नारी शक्ति सम्मेलन, पोस्टर प्रतियोगिता और नमो ऐप के पीपल्स कॉर्नर पर विजेता प्रविष्टियां प्रदर्शित करने का प्रस्ताव भी है। इसके साथ चलती-फिरती 'विकसित भारत 2047' संकल्प एवं हस्ताक्षर दीवार यात्रा के साथ चलेगी और अंत में वाराणसी में प्रस्तुत की जाएगी। जहां रात्रि पड़ाव, वहां 25 दीप जलाएंगे लाभार्थी रात्रि पड़ावों पर '25 साल, 25 दीप' कार्यक्रम होगा, जिसमें 25 लाभार्थी 25 दीप जलाकर दिन का सांस्कृतिक और भावनात्मक समापन करेंगे। प्रमुख पड़ावों पर पौधारोपण भी किया जाएगा और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय व्यक्ति, संस्था या विद्यालय को देने का प्रस्ताव है।

MP की लाड़ली बहनों को ₹1500 का इंतजार खत्म होने वाला! 40वीं किस्त की संभावित तारीख आई सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं के आधार लिंक और DBT-enabled बैंक खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह ट्रांसफर किए जाते हैं।अब महिलाओं को योजना की 40वीं किस्त का इंतजार है। सामान्य तौर पर सरकार हर महीने 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी करती है। ऐसे में इस बार भी 15 सितंबर से पहले राशि खाते में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। 19 अगस्त को जारी हुई थी 39वीं किस्त इससे पहले सरकार ने रक्षाबंधन से पहले 19 अगस्त को लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त जारी की थी। उस दौरान पात्र महिलाओं के बैंक खातों में नियमित 1500 रुपये की किस्त के साथ 250 रुपये अतिरिक्त गिफ्ट के तौर पर भी ट्रांसफर किए गए थे।अब अगली किस्त को लेकर महिलाओं की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर बनी हुई है। किन महिलाओं को मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ? लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को दिया जाता है। योजना में विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।पात्रता के अनुसार आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र कम से कम 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए। इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ योजना के तहत कुछ श्रेणियों को अपात्र रखा गया है। यदि महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो वह योजना का लाभ नहीं ले सकती।इसके अलावा परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी पात्रता नहीं होगी। सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थायी कर्मचारी या संविदाकर्मी के रूप में काम करने वाले सदस्य वाले परिवार भी योजना से बाहर हैं।सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त करने वाले परिवारों को भी योजना का लाभ नहीं दिया जाता। दूसरी सरकारी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की पात्रता यदि कोई महिला किसी अन्य सरकारी योजना के माध्यम से हर महीने 1250 रुपये या उससे अधिक की राशि प्राप्त कर रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होगी। जमीन और वाहन को लेकर भी नियम योजना की पात्रता में परिवार की कृषि भूमि और वाहन की स्थिति को भी शामिल किया गया है। 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकते।इसी तरह ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं। महिलाओं को आधिकारिक घोषणा का इंतजार फिलहाल 40वीं किस्त को लेकर 15 सितंबर से पहले भुगतान की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, राशि ट्रांसफर की अंतिम तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी।  किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ? लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को मिलता है। इसमें विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं। आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए। किन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ? जिस महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, वह पात्र नहीं होगी। परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थाईकर्मी या संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत सदस्य वाले परिवार भी अपात्र होंगे। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा, जो महिला किसी अन्य सरकारी योजना से प्रतिमाह 1250 रुपये या उससे अधिक प्राप्त कर रही है, वह पात्र नहीं होगी। वर्तमान या भूतपूर्व सांसद/विधायक के परिवार, चयनित या मनोनीत बोर्ड, निगम, मंडल या उपक्रम के अध्यक्ष, संचालक अथवा सदस्य के परिवार भी अपात्र हैं। स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (पंच और उपसरपंच को छोड़कर) के परिवार, 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार और ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना का लाभ नहीं ले सकते।  

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8th Pay Commission में बदल सकता है 40 साल पुराना नियम

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग की सिफारिशो का इंतजार बेसब्री से हो रहा है। वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों की डिमांड भी तरह-तरह की है। ऐसी ही एक डिमांड पेंशनभोगियों की भी है। यह डिमांड अगर लागू हो जाता है रिटायर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 40 साल पुराने नियम में बदलाव हो जाएगा। क्या है डिमांड? केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कम्युटेड पेंशन (समय से पहले ली गई पेंशन) को बहाल करने की 15 साल की अवधि को कम किया जाए। कई संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सिफारिश की है कि इसे 10 से 12 साल बाद बहाल किया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा नियम उन वित्तीय और एक्चुअरियल मान्यताओं पर आधारित है जो कई दशक पुरानी हैं। बता दें कि साल 1986 में कम्युटेड पेंशन के 15 साल वाले नियम को लागू किया गया था। कहने का मतलब है कि यह 40 साल पुराना नियम है। पेंशन कम्युटेशन क्या है? केंद्र सरकार के कर्मचारी रिटायरमेंट के समय अपनी बेसिक पेंशन का 40% तक कम्युट (समय से पहले एकमुश्त लेना) करवा सकते हैं और उस रकम को एकमुश्त पा सकते हैं। इसके बदले, कम्युट किए गए हिस्से को उनकी मासिक पेंशन से काट लिया जाता है। मौजूदा नियमों के तहत, काटी गई पेंशन 15 साल बाद बहाल कर दी जाती है। क्यों उठ रहे सवाल? कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों का तर्क है कि जब यह सिस्टम लागू किया गया था तब की वित्तीय और जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) स्थितियां अब काफी बदल चुकी हैं। बता दें कि नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने बहाली की अवधि 11 साल करने की मांग की है। इसके अलावा, इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने 12 साल का प्रस्ताव दिया है, जबकि ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 10 साल की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज और ऑल पेंशनर्स एसोसिएशन ने भी 11 साल की सिफारिश की है। ₹100 की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने 100 रुपये की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण दिया है। 61 साल की उम्र के पेंशनर के लिए 8.194 के कम्युटेशन फैक्टर पर हर ₹100 मासिक पेंशन कम्युट करने पर करीब ₹9,833 की एकमुश्त राशि मिलती है। इसके बाद पेंशनर की मासिक पेंशन से ₹100 की कटौती होती है। 10 साल में कुल कटौती ₹12,000 और 15 साल में ₹18,000 हो जाती है। संगठन का तर्क है कि करीब 10 साल में कम्युट की गई राशि की भरपाई हो जाती है और उसके बाद की कटौती की समीक्षा की जानी चाहिए।