samacharsecretary.com

‘मां के पैर छूकर माफी मांगिए’, संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को दिया भावुक संदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मां-बेटे के संपत्ति विवाद में एक अलग ही नजारा देखने को मिला. कोर्ट ने बेटे से कहा कि मां के पैर छूकर माफी मांगो और अपने पापों के लिए माफी मांगो. दरअसल, कोर्ट ने इस विवाद की सुनवाई के दौरान बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और आशीर्वाद लेने की सलाह थी. कोर्ट ने कहा कि मां का स्थान हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है.जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी.  सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेटे से मौखिक रूप से कहा कि आपको अपनी मां के पैर छूकर माफी मांगनी चाहिए, अपने सभी पापों के लिए माफी मांगिए।  क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है- सुप्रीम कोर्ट जस्टिस शर्मा ने अदालत में मौजूद वकील को संबोधित करते हुए भी कहा कि क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है? हम बेटे से कह रहे हैं कि वापस मां के पास जाए, उनके पैर छूए, उन्हें महसूस करे, माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले. मामला उस संपत्ति से जुड़ा है, जिसकी मां और उनके पति एकमात्र मालिक हैं.  माता-पिता ने प्रेम और स्नेह के चलते बेटे और उसकी पत्नी को संपत्ति की पहली मंजिल पर बिना किराए के लाइसेंसी के तौर पर रहने की अनुमति दी थी।  बेटे और उसकी पत्नी पर परेशान करने के आरोप माता-पिता का आरोप था कि बाद में बेटे और उसकी पत्नी ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया और संपत्ति उनके नाम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटे ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा किया. इसके बाद माता-पिता ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर बेटे से संबंध समाप्त करने की घोषणा की. उन्होंने बेटे के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई और संपत्ति खाली करने को कहा. माता-पिता ने संपत्ति का कब्जा वापस लेने, स्थायी निषेधाज्ञा और हर्जाने की मांग को लेकर मुकदमा दायर किया।  माता-पिता ही संपत्ति के एकमात्र मालिक थे- ट्रायल कोर्ट ने माना ट्रायल कोर्ट ने माना कि माता-पिता संपत्ति के एकमात्र मालिक हैं और बेटे तथा उसकी पत्नी केवल लाइसेंसी हैं. लाइसेंस वैध रूप से समाप्त किए जाने के बाद दोनों को पहली मंजिल का कब्जा खाली करना होगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की तो सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और उनका आशीर्वाद लेने की मौखिक सलाह भी दी। 

MP में 17 सितंबर से बीजेपी का बड़ा अभियान, 20 यात्राओं से कवर होंगे 55 जिले; जानें पूरा प्लान

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा 17 सितंबर से वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक 10-10 यात्राएं निकालने जा रही है। इन यात्राओं के लिए ऐसे रूट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि एक यात्रा का मार्ग दूसरी यात्रा से न टकराए। मध्यप्रदेश से होकर गुजरने वाले अलग-अलग मार्गों के जरिए प्रदेश के सभी 55 जिलों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी स्तर पर इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन यात्राओं में उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा कवर होगा। गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और दिल्ली से होकर ये यात्राएं गुजरेंगी। अलग-अलग नेताओं को दी जिम्मेदारी अब तक 13 रूट फाइनल किए जा चुके हैं, जबकि बाकी रूट को लेकर मंथन चल रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी है। यात्राओं का उद्देश्य केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा। इनमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने, सेवा गतिविधियों और 2047 के संकल्प को भी शामिल किया जाएगा। आम लोगों के सुझाव लेंगे बीजेपी नेता यात्रा की कार्ययोजना में जनभागीदारी, विकास, सेवा और सांस्कृतिक जुड़ाव को प्रमुखता दी गई है। हर प्रमुख पड़ाव पर स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, लाभार्थियों और समुदाय के दूसरे वर्गों को गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। सरकारी योजनाओं से जुड़ी व्यावहारिक सहायता और नागरिकों के सुझाव दर्ज करने की भी योजना है। 25 आइकॉन में चुने जाएंगे मेधावी '25 आइकॉन' अभियान में हर पड़ाव से किसान, शिक्षक, महिला उद्यमी, युवा या खिलाड़ी जैसे स्थानीय प्रेरक व्यक्ति को चुना जाएगा। इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की छोटी वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप पर दिखाने का प्रस्ताव है। साथ ही 'चिट्ठी 2047 के नाम' के जरिए लोगों से पूछा जाएगा कि वे 2047 तक अपने क्षेत्र को किस रूप में देखना चाहते हैं। हर पड़ाव पर 'मेरे लिए भारत की प्रगति…' जनवाणी के जरिए नागरिकों की बात रिकॉर्ड की जाएगी। वाराणसी में इन आवाजों को जोड़कर 90 सेकेंड की फिल्म बनाने का प्रस्ताव है। स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों और सामग्री निर्माताओं को भी यात्रा से जोड़ा जाएगा। शहीदों की मिट्टी से लेकर चिकित्सा शिविर तक यात्रा के दौरान जिन क्षेत्रों का संबंध स्वतंत्रता सेनानियों या देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से है, वहां उनके गांव, स्मारक या समाधि स्थल की मिट्टी कलश में एकत्र करने की योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी। इसके अलावा चयनित पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और शुगर की जांच तथा परामर्श होगा। हर पड़ाव पर सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण एवं सहायता डेस्क लगाने का भी प्रस्ताव है। 2001 से 2026 तक की विकास यात्रा भी दिखाई जाएगी यात्रा में बुजुर्गों के अनुभव रिकॉर्ड किए जाएंगे। 'पहले और अब' प्रदर्शनी दीवार के जरिए पुरानी और मौजूदा तस्वीरों व दस्तावेजों के माध्यम से सड़क, स्कूल, घर और बिजली जैसी सुविधाओं में आए बदलाव दिखाने की योजना है। वहीं, 'विकास की यात्रा' नुक्कड़ नाटक में 2001 से 2026 तक एक परिवार की कहानी के जरिए बिजली, गैस कनेक्शन, आवास और शिक्षा जैसी सुविधाओं में हुए बदलाव को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा। नारी शक्ति सम्मेलन और क्विज भी होंगे स्थानीय योजनाओं के लाभार्थियों का सम्मान, नारी शक्ति सम्मेलन, पोस्टर प्रतियोगिता और नमो ऐप के पीपल्स कॉर्नर पर विजेता प्रविष्टियां प्रदर्शित करने का प्रस्ताव भी है। इसके साथ चलती-फिरती 'विकसित भारत 2047' संकल्प एवं हस्ताक्षर दीवार यात्रा के साथ चलेगी और अंत में वाराणसी में प्रस्तुत की जाएगी। जहां रात्रि पड़ाव, वहां 25 दीप जलाएंगे लाभार्थी रात्रि पड़ावों पर '25 साल, 25 दीप' कार्यक्रम होगा, जिसमें 25 लाभार्थी 25 दीप जलाकर दिन का सांस्कृतिक और भावनात्मक समापन करेंगे। प्रमुख पड़ावों पर पौधारोपण भी किया जाएगा और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय व्यक्ति, संस्था या विद्यालय को देने का प्रस्ताव है।

MP की लाड़ली बहनों को ₹1500 का इंतजार खत्म होने वाला! 40वीं किस्त की संभावित तारीख आई सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं के आधार लिंक और DBT-enabled बैंक खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह ट्रांसफर किए जाते हैं।अब महिलाओं को योजना की 40वीं किस्त का इंतजार है। सामान्य तौर पर सरकार हर महीने 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी करती है। ऐसे में इस बार भी 15 सितंबर से पहले राशि खाते में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। 19 अगस्त को जारी हुई थी 39वीं किस्त इससे पहले सरकार ने रक्षाबंधन से पहले 19 अगस्त को लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त जारी की थी। उस दौरान पात्र महिलाओं के बैंक खातों में नियमित 1500 रुपये की किस्त के साथ 250 रुपये अतिरिक्त गिफ्ट के तौर पर भी ट्रांसफर किए गए थे।अब अगली किस्त को लेकर महिलाओं की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर बनी हुई है। किन महिलाओं को मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ? लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को दिया जाता है। योजना में विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।पात्रता के अनुसार आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र कम से कम 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए। इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ योजना के तहत कुछ श्रेणियों को अपात्र रखा गया है। यदि महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो वह योजना का लाभ नहीं ले सकती।इसके अलावा परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी पात्रता नहीं होगी। सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थायी कर्मचारी या संविदाकर्मी के रूप में काम करने वाले सदस्य वाले परिवार भी योजना से बाहर हैं।सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त करने वाले परिवारों को भी योजना का लाभ नहीं दिया जाता। दूसरी सरकारी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की पात्रता यदि कोई महिला किसी अन्य सरकारी योजना के माध्यम से हर महीने 1250 रुपये या उससे अधिक की राशि प्राप्त कर रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होगी। जमीन और वाहन को लेकर भी नियम योजना की पात्रता में परिवार की कृषि भूमि और वाहन की स्थिति को भी शामिल किया गया है। 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकते।इसी तरह ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं। महिलाओं को आधिकारिक घोषणा का इंतजार फिलहाल 40वीं किस्त को लेकर 15 सितंबर से पहले भुगतान की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, राशि ट्रांसफर की अंतिम तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी।  किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ? लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को मिलता है। इसमें विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं। आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए। किन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ? जिस महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, वह पात्र नहीं होगी। परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थाईकर्मी या संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत सदस्य वाले परिवार भी अपात्र होंगे। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा, जो महिला किसी अन्य सरकारी योजना से प्रतिमाह 1250 रुपये या उससे अधिक प्राप्त कर रही है, वह पात्र नहीं होगी। वर्तमान या भूतपूर्व सांसद/विधायक के परिवार, चयनित या मनोनीत बोर्ड, निगम, मंडल या उपक्रम के अध्यक्ष, संचालक अथवा सदस्य के परिवार भी अपात्र हैं। स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (पंच और उपसरपंच को छोड़कर) के परिवार, 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार और ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना का लाभ नहीं ले सकते।  

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8th Pay Commission में बदल सकता है 40 साल पुराना नियम

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग की सिफारिशो का इंतजार बेसब्री से हो रहा है। वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों की डिमांड भी तरह-तरह की है। ऐसी ही एक डिमांड पेंशनभोगियों की भी है। यह डिमांड अगर लागू हो जाता है रिटायर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 40 साल पुराने नियम में बदलाव हो जाएगा। क्या है डिमांड? केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कम्युटेड पेंशन (समय से पहले ली गई पेंशन) को बहाल करने की 15 साल की अवधि को कम किया जाए। कई संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सिफारिश की है कि इसे 10 से 12 साल बाद बहाल किया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा नियम उन वित्तीय और एक्चुअरियल मान्यताओं पर आधारित है जो कई दशक पुरानी हैं। बता दें कि साल 1986 में कम्युटेड पेंशन के 15 साल वाले नियम को लागू किया गया था। कहने का मतलब है कि यह 40 साल पुराना नियम है। पेंशन कम्युटेशन क्या है? केंद्र सरकार के कर्मचारी रिटायरमेंट के समय अपनी बेसिक पेंशन का 40% तक कम्युट (समय से पहले एकमुश्त लेना) करवा सकते हैं और उस रकम को एकमुश्त पा सकते हैं। इसके बदले, कम्युट किए गए हिस्से को उनकी मासिक पेंशन से काट लिया जाता है। मौजूदा नियमों के तहत, काटी गई पेंशन 15 साल बाद बहाल कर दी जाती है। क्यों उठ रहे सवाल? कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों का तर्क है कि जब यह सिस्टम लागू किया गया था तब की वित्तीय और जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) स्थितियां अब काफी बदल चुकी हैं। बता दें कि नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने बहाली की अवधि 11 साल करने की मांग की है। इसके अलावा, इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने 12 साल का प्रस्ताव दिया है, जबकि ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 10 साल की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज और ऑल पेंशनर्स एसोसिएशन ने भी 11 साल की सिफारिश की है। ₹100 की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने 100 रुपये की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण दिया है। 61 साल की उम्र के पेंशनर के लिए 8.194 के कम्युटेशन फैक्टर पर हर ₹100 मासिक पेंशन कम्युट करने पर करीब ₹9,833 की एकमुश्त राशि मिलती है। इसके बाद पेंशनर की मासिक पेंशन से ₹100 की कटौती होती है। 10 साल में कुल कटौती ₹12,000 और 15 साल में ₹18,000 हो जाती है। संगठन का तर्क है कि करीब 10 साल में कम्युट की गई राशि की भरपाई हो जाती है और उसके बाद की कटौती की समीक्षा की जानी चाहिए।

यात्री परिवहन विजन समिट-2026: MP में बढ़ेगा बस नेटवर्क, 75% ग्राम पंचायतें बस सेवा से जुड़ेंगी

यात्री परिवहन विजन समिट-2026 मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन के विस्तार से निवेश, रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को करेंगे सुदृढ़ मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को प्राथमिकता भोपाल  प्रदेश के नागरिकों को स्मार्ट, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल लोक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा यात्री परिवहन विजन समिट-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस समिट में प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और उद्योग के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर भी मंथन होगा। इसमें पूरे देश से आने वाले परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस ऑपरेटर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नीति-निर्माता प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यात्री परिवहन का रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किेया जायेगा। लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड अंतर्गत ‘मोबिलिटी विज़न: 2030’ का लक्ष्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करना है। इसके अंतर्गत प्रदेश में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान की जायेगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर दिया जाएगा विशेष जोर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से समिट में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। वर्तमान में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें प्रदेश में संचालित हैं। इसके साथ आगामी 6 महीनों में 486 पीएम ई-बसें और 34 इंटरसिटी बसें जोड़ी जाएंगी, जबकि वर्ष 2027 तक यह संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य है। प्रदेश में 100 बसों की क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग डिपो और सोलर इंफ्रॉस्ट्रक्चर भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे सालाना 70,000 टन से अधिक कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। यात्री सुरक्षा, स्मार्ट तकनीक और 24×7 निगरानी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सभी बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों से बसों के संचालन, लोकेशन, टाइमिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। पीपीपी मॉडल के जरिए निजी ऑपरेटरों की सशक्त भागीदारी आमजन के आवागमन को सुगम बनाने के लिये जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। यह समिट निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित कर मध्यप्रदेश को देश के सबसे उन्नत, पर्यावरण-अनुकूल और तकनीक-सक्षम सार्वजनिक परिवहन राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। परिवहन क्षेत्र में निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा समिट से यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। कल दोपहर 12 बजे तक करा सकेंगे पंजीयन समिट में शामिल होकर अपने सुझाव देने के लिए इच्छुक प्रतिभागियों को ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। पंजीयन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है। इच्छुक प्रतिभागी दोपहर 12 बजे तक https://forms.gle/f9wEvWb444JkzJgX6 लिंक पर जाकर पंजीयन करा सकेंगे। साथ ही https://events.eletsonline.com/mpyatriparivahansummit/ लिंक पर जाकर समिट से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  

क्लाइमेट अलार्म! मध्यप्रदेश में मीथेन ने बढ़ाई चिंता, सैटेलाइट विश्लेषण में सामने आए 4 प्रदूषण क्षेत्र

भोपाल मध्यप्रदेश में कार्बन डाई ऑक्साइड के बाद मीथेन गैस हवा को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रही है। सैटेलाइट विश्लेषण में राज्य में चार अलग-अलग प्रदूषण क्षेत्रों की पहचान की गई है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में उद्योग परिवहन प्रमुख स्रोत हैं। सिंगरौली कोयला खनन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है। सागर, मुरैना, व में रीवा, खरगोन और छिंदवाड़ा सहित अन्य जिलों में पशुधन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास जलाने से ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन हो रहा है। इन प्रदूषकों के चलते 2030 के दशक तक मप्र के औसत अधिकतम तापमान में 1.8-2.0 डिग्री सेल्सिसयस और न्यूनतम तापमान में 2.0-2.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभावित है। राज्य का पूर्वी हिस्सा तेजी से गर्म हो रहा है। डिंडोरी, भिंड और सीधी जैसे जिले कम अनुकूलन क्षमता के कारण विशेष रूप से जोखिम में हैं। गैर कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी ऐसे एक बहु-क्षेत्रीय आकलन के नाम से पर्यावरण विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन केंद्र, एप्को, इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट और दी एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट- टेरी के विशेषज्ञों ने तैयार की है। प्रदूषकों की समस्याओं से निपटने के रास्ते बताए गए हैं। कहा गया है कि शॉर्ट लिव्ड क्लाइमेट पॉल्यूटेंट्स को कम करना जरूरी है। स्थानीय जरूरतों के मुताबिक प्रभावी उपाय लागू किए जाएं तो 2047 तक सामान्य स्थिति की तुलना में सल्फर डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 80%, नाइट्रोजन ऑक्साइड में 78%, नॉन मीथेन वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड में 61% ब्लैक कार्बन में 56% तक कमी लाई जा सकती है। यह सुझाए तात्कालिक रास्ते रिपोर्ट में नॉन सीओटू प्रदूषकों को कम करने रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ाने, बिजली क्षेत्र में गैस के इस्तेमाल, इंडस्ट्री में साफ़ ईंधन और ट्रांसपोर्ट में ईवी अपनाने, पुरानी गाड़ियां हटाने का सुझाव है। प्राकृतिक तरीके से धान की खेती में मीथेन उत्सर्जन 65% तक कम हो सकता है। चारे के सही प्रबंधन से पशुपालन से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में 10-15% की कमी तेजी से और कम लागत में हो सकती है। कम्युनिटी-लेवल पर बायोगैस, एंटरिक फर्मेंटेशन रोकने वाले उपाय, कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन को पकड़ने, जलाने जैसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने से ये तीनों सेक्टर 2030 के बाद उत्सर्जन में और ज़्यादा और लंबे समय तक कमी लाने में अहम साबित होंगे। भविष्य के लिए बताई यह योजना -अलग-अलग सेक्टर की एसएलसीपी रणनीतियों को राज्य के जलवायु लक्ष्यों के साथ जोड़ने के लिए सेक्टर और विभागों के बीच तालमेल के सिस्टम को मजबूत करना चाहिए। -खनन, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक रोडमैप बनाया जाए, जिसमें उत्सर्जन कम करने के लिए समय-सीमा वाले लक्ष्य तय हों। -पशुपालन, खेती और कोयला खनन जैसे सेक्टर्स में खास तौर पर उत्सर्जन कम करने की रणनीतियां लागू करना चाहिए। ये राज्य में गैर सीओटू उत्सर्जन के ऐसे स्रोत हैं, जिनमें सुधार की सबसे ज्यादा गुंजाइश है, लेकिन जिन पर अब तक कम ध्यान दिया गया है। -ग्रीन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए राष्ट्रीय मिशनों और केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए और कम-कार्बन वाले इंफास्ट्रक्चर के लिए क्लाइमेट फाइनेंस और सीएसआर फंड जुटाना चाहिए। -नियम लागू करने और हालात के हिसाब से प्रबंधन के लिए मज़बूत मॉनिटरिंग और मूल्यांकन सिस्टम बनाना जरूरी है, जिसमें रियल-टाइम उत्सर्जन ट्रैकिंग और रिमोट सेंसिंग शामिल हो।

2100 तक धरती का 40% हिस्सा बन सकता है रेगिस्तान! सूखे की मार से इंसानों और पेड़-पौधों पर बड़ा खतरा

नई दिल्ली हमारी धरती लगातार गर्म हो रही है और इसका नतीजा बेहद भयानक होने वाला है. बढ़ते तापमान के कारण दुनिया के कई इलाके तेजी से सूख रहे हैं. जब ऐसा होता है तो सूखे इलाकों की सीमाएं आगे बढ़ने लगती हैं. इससे पूरी दुनिया का लैंडस्केप बदल जाता है और पेड़-पौधे खत्म होने लगते हैं. अब साइंटिस्ट्स ने इसे लेकर एक खतरनाक अलर्ट जारी किया है. एक नई रिसर्च के मुताबिक 21वीं सदी के अंत तक धरती का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा ड्राईलैंड्स बन सकता है।  ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में पब्लिश एक रिपोर्ट में यह डरावना दावा किया गया है. हालांकि इस रिसर्च में एक हैरान करने वाली बात भी सामने आई है. क्लाइमेट चेंज के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) इस खतरे को थोड़ा धीमा कर रही है. आइए इस डरावनी रिसर्च को डिटेल में समझते हैं।  धरती पर ड्राईलैंड्स बढ़ने का कारण क्या है? ड्राईलैंड्स उन इलाकों को कहते हैं जहां पानी की भारी कमी होती है. यहां बारिश बहुत कम होती है और वाष्पीकरण के जरिए पानी ज्यादा उड़ जाता है. साइंटिस्ट्स का मानना है कि दुनिया भर में ड्राईलैंड्स लगातार बढ़ रहे हैं।  चाइनीज एकेडमी ऑफ फॉरेस्ट्री के साइंटिस्ट्स ने इसे लेकर गहराई से एनालिसिस किया है. उन्होंने दुनिया भर के क्लाइमेट डेटा और भविष्य के अनुमानों का इस्तेमाल किया. इसके लिए 1960 से 2023 तक का मौसम डेटा देखा गया. टीम ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके यह पूरा डेटा तैयार किया है।      रिसर्च टीम के एक साइंटिस्ट ने कहा, ‘सूखे इलाकों का बढ़ना ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए बड़ा खतरा है।  अगर सूखे इलाके उन जगहों पर फैलेंगे जहां अभी अच्छी नमी है, तो पानी की कमी और गंभीर हो जाएगी. इससे पूरे इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचेगा और रेगिस्तान तेजी से बढ़ने लगेंगे. इंसान और जानवरों के लिए पानी जुटाना भी काफी मुश्किल हो जाएगा।  1994–2023 के दौरान दुनिया भर के शुष्क क्षेत्रों और उनसे जुड़े जलवायु क्षेत्रों का भौगोलिक वितरण (a); हर जलवायु क्षेत्र का प्रतिशत (b). (Visuals Credit : Cai et al., Environmental Research Letters, 2026) कार्बन डाइऑक्साइड गैस इस खतरे को धीमा कैसे कर रही है?     इस रिसर्च में सबसे हैरान करने वाली बात कार्बन डाइऑक्साइड गैस को लेकर है. हम सभी जानते हैं कि यह गैस ग्लोबल वॉर्मिंग का सबसे बड़ा कारण है. लेकिन यही गैस धरती को पूरी तरह सूखने से थोड़ा बचा भी रही है।      दरअसल वातावरण में जब CO2 का लेवल बढ़ता है तो इसका असर पौधों पर पड़ता है. पौधों की पत्तियों में छोटे छेद होते हैं जिन्हें स्टोमेटा कहा जाता है. ज्यादा CO2 होने पर यह स्टोमेटा पूरी तरह नहीं खुलते हैं. इससे पौधों के अंदर का पानी भाप बनकर कम उड़ता है. इस वजह से पेड़-पौधे लंबे समय तक अपने अंदर पानी बचाकर रख पाते हैं।      स्टोमेटा के आंशिक रूप से बंद होने के कारण पानी का नुकसान काफी कम हो जाता है. साइंटिस्ट्स का कहना है कि पुरानी रिसर्च में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया था. पुराने क्लाइमेट मॉडल में इस खास फैक्टर को इग्नोर कर दिया गया था. इसीलिए पहले की कुछ रिपोर्ट्स में 2100 तक 56 प्रतिशत धरती के सूखने का दावा किया गया था. लेकिन नई कैलकुलेशन के बाद इसे करीब 40 प्रतिशत माना गया है।  फिलहाल धरती के कितने हिस्से पर मौजूद है सूखा और बंजर इलाका? रिसर्च टीम ने 1994 से 2023 के बेसलाइन डेटा के आधार पर नई जानकारी दी है. अंटार्कटिका को छोड़कर फिलहाल धरती का करीब 38.58 प्रतिशत हिस्सा ड्राईलैंड्स है. इन सूखे इलाकों को चार अलग-अलग कैटिगरी में बांटा गया है।