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मध्यप्रदेश में ‘इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी’ लागू, 6 जिलों और 2510 गांवों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा फोकस रोजगार और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना है। इसके तहत नर्मदापुरम रोड नया आर्थिक क्षेत्र, एमपी नगर मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री, पचमढी-रातापानी में टूरिज्म इंडस्ट्री जैसे प्लान शामिल किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल सहित विदिशा, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम एवं राजगढ़ में ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने का काम सौंपा जहां नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में भोपाल शहर की नर्मदापुरम रोड पर नए आर्थिक क्षेत्र विकसित करने एवं एमपी नगर में मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री बनाने और नर्मदापुरम, रायसेन के पचमढ़ी, रातापानी जैसे पर्यटक स्थलों पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के बिंदु को शामिल किया गया है। भोपाल सहित अन्य जिलों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट के पैटर्न को समझने के बाद विकास की रूपरेखा तय होगी। इन क्षेत्रों पर फोकस रहवासी विकास: सिंगल विंडो के जरिए रेसीडेंशियल अनुमतियां मिल सकेंगी। अभी चार से पांच विभाग के चक्कर काटने होते हैं। औद्योगिक विकास: मंडीदीप, गोविंदपुरा, अचारपुरा, पीलूखेड़ी, कोकता, बंगरसिया के बाद अब नॉलेज हब, मोबाइल हब, स्टार्टअप हब बनाने की योजना है। धार्मिक पर्यटन: सलकनपुर, कंकाली माता मंदिर, नर्मदा नदी धर्म स्थल, सिहोर गणेश मंदिर सहित अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का सर्किट बनाया जाएगा। वन्य पर्यटन: रातापानी, पचमढ़ी, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, वन विहार, केरवा, कलियासोत के जंगलों तक सफारी का दायरा बढ़ाकर नए टूरिस्ट सुविधा वाले उपक्रम स्थापित होंगे। परिवहन सुविधा: मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को सिहोर, मंडीदीप, विदिशा से नर्मदापुरम से कनेक्ट करने, 200 ई बसों को चलाने, रेलवे की मेमू ट्रेन चलाने की प्लानिंग डेटा एनालिसिस का हिस्सा है। शामिल होंगे 2510 गांव भोपाल के मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12, 098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें 6 जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया गया है। भूमि के सबसे कम क्षेत्रफल की बात करें तो इसमें सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम जिले से लिया गया है, जबकि बड़ा हिस्सा यहां तक की भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र से लिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही, अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। 6 जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले की 8 तहसीले आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी और सीहोर रहेंगी।

मध्यप्रदेश को साधना सप्ताह में अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने पर मिला राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान

साधना सप्ताह में मप्र को अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान राज्य में जनजातीय कार्य व‍िभाग प्रथम स्थान पर नये व‍िषयों, एआई आधार‍ित पाठयक्रमों में लोकसेवकों ने द‍िखाई व‍िशेष रूच‍ि भोपाल  भारत सरकार द्वारा म‍िशन कर्मयोगी के अंतर्गत लोक सेवकों के ल‍िए संचाल‍ित ऑनलाइन प्रश‍िक्षण एवं क्षमता न‍िर्माण के ल‍िये चलाये गये साधना सप्ताह में मध्यप्रदेश को आईगाट पोर्टल पर अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने के ल‍िए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान म‍िला है। साधना सप्ताह गत दो अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलाया गया था। राष्ट्रव्यापी साधना सप्ताह में व‍िभ‍िन्न पाठयक्रमों में पंजीयन करने वाले लोक सेवकों की संख्या 9 लाख 49 हजार 215 रही। एक घण्टे के कोर्स पूरा करने वाले प्रदेश के लोक सेवकों की संख्या 3 लाख 12 हजार 662 रही। चार घंटे के कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 2 लाख 25 हजार 700 और कम से कम एक एआई कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 1 लाख 85 हजार 562 रही। साधना सप्ताह के दौरान कर्मयोगी उत्कर्ष बैच 855 को म‍िला जबक‍ि 92,432 को एआई दक्ष बैच म‍िला। केन्द्रीय कार्म‍िक मंत्री डॉ. ज‍ितेन्द्र सिंह ने नई द‍िल्ली में गत द‍िवस गर‍िमापूर्ण समारोह में मप्र को सम्मान‍ित क‍िया। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के महान‍िदेशक सच‍िन स‍िन्हा ने पुरस्कार ग्रहण क‍िया। उन्होने व‍िभागों के लोक सेवकों को न‍िरंतर मार्गदर्शन द‍िया और व‍िभागों में न‍िरंतर समन्वय बनाये रखा। अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान ने बताया क‍ि अकादम‍िक स्टाफ और व‍िभागों के सहयोग से प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान म‍िला है। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी को व‍िभागों के ल‍िए एआई आधार‍ित क्षमता न‍िर्माण कार्ययोजनाएं बनाने में उल्लेखनीय योगदान के ल‍िये पुरस्कृत क‍िया गया। राज्य स्तर पर जनजातीय कार्य व‍िभाग द्वारा 10 हजार से ज्यादा लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर व‍िजय शाह ने व‍िभाग के सभी अध‍िकार‍ियों-कर्मचार‍ियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होने कहा क‍ि प्रश‍िक्षण एक न‍िरंतर प्रक्र‍िया है। लोकह‍ित के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने के ल‍िए कार्यदक्षता अन‍िवार्य है। साधना सप्ताह में क्या हुआ साधना सप्‍ताह का उद्देश्य शासकीय सेवकों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्‍यम से शासकीय तंत्र में सुदृढ़ता सुनिश्चित करना था। प्रशिक्षण की विभिन्‍न प्रणालियों को अपनाने और iGoT कर्मयोगी पर उपलब्‍ध पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए लोक सेवकों को प्रेरित क‍िया गया। साधना सप्ताह का ढांचा तीन प्रमुख सूत्रों पर केंद्रित था — टेक्नोलॉजी, परंपरा और ठोस परिणाम। “साधना सप्ताह’’ के दौरान प्रत्‍येक अधिकारी/कर्मचारी को न्‍यूनतम 05 प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्‍य दिया गया था। प्रत्येक विभाग में 4 से 5 व्यक्तियों का समूह बनाया गया, जिसमें विभागाध्यक्ष, स्थापना एवं तकनीकि शाखाओं से जुड़े अधिकारी थे। संभाग, जिला, विकास खंड एवं प्रत्येक कार्यालय प्रमुख के स्तर पर समूह बनाए गये। साधना सप्‍ताह अतंर्गत विभागों के शासकीय सेवकों/संविदा अधिकारियों/कर्मचारियों को उनके पदों के अनुसार कम से कम 10 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आंवटित किए गए। कम से कम तीन एआई कोर्स पूर्ण करने पर “AI दक्ष बैज” दिया जा रहा है। डिजिटल प्रशिक्षण में आगे मध्यप्रदेश सर्वाधिक डिजिटल प्रशिक्षण iGOT पोर्टल पर कोर्स निर्मित करने वाला पहला राज्य बन गया है और सबसे अधिक लोकसेवकों को iGOT पोर्टल पर पंजीकृत करने वाला तीसरा राज्य है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केन्द्र सरकार द्वारा लोकसेवकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनको नागरिक केन्द्र‍ित होकर कर्मयोगी के रूप में दक्षतापूर्वक अपनी भूमिका निभाने मिशन कर्मयोगी वर्ष 2020 में लागू किया गया था। यह ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त करने का ऐसा प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी कहीं भी – कभी भी – किसी भी स्थान से अपनी सुविधानुसार स्व-प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। वे अपनी दक्षता और ज्ञान बढ़ाने अपने विभाग से संबंधित विषयों पर उपलब्ध पाठयक्रमों में प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। इसके अलावा अपनी रूचि अनुसार अन्य विभागों के लिए बने पाठयक्रमों में भी प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। एआई आधार‍ित क्षमता निर्माण कार्ययोजना में अग्रणी क्षमता निर्माण आयोग से मिले इनपुट को शामिल कर बनी क्षमता निर्माण नीति लागू करने में भी मध्यप्रदेश अग्रणी है। सभी विभागों में क्षमता निर्माण इकाइयाँ स्थापित हो गई हैं और प्रशिक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण करने के बाद कैडर-वार क्षमता निर्माण कार्य योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। विभागों में क्षमता निर्माण प्रबंधकों की सेवाएँ लेने का भी प्रावधान है। उन्हें क्षमता निर्माण इकाइयों द्वारा सहयोग दिया जायेगा। क्षमता निर्माण प्रबंधकों द्वारा वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की जाएंगी। विभिन्न विभागों में कार्यरत मानव संसाधन की दक्षता दर्शाने वाला एक डैशबोर्ड तैयार किया गया है, जिससे माध्यम से मुख्यमंत्री कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता की स्थिति जान सकेंगे।  

एमपी में 14 जिलों और 42 मोहल्लों के अटपटे नाम बदलने की मांग, भोपाल भी शामिल

भोपाल   जब नाम बदलने का दौर चल ही रहा है तो लगे हाथ इनके नाम भी बदल दीजिए ना हुजूर। शुरुआत हुजूर शब्द से ही करते हैं। मध्यप्रदेश में दो तहसीलों के नाम हुजूर है। पहली हुजूर तहसील भोपाल जिले में है, तो दूसरी रीवा जिले में। एक जैसा नाम होने के कारण कई बार बड़ी गफलत की स्थिति बन जाती है। तहसील हुजूर बनी हुई है अजूबा राजधानी भोपाल की तहसील हुजूर में तो अजूबा यह कि इस नाम का कोई नगर, बस्ती या मोहल्ला तक नहीं है, फिर भी आधा भोपाल हुजूर तहसील में आता है। सिर्फ तहसील ही नहीं, भोपाल में तो एक विधानसभा सीट का नाम भी हुजूर है। कुछ साल पहले ही बनी इस सीट की भौगोलिक परिस्थिति भी विचित्र है। इसका एक सिरा सीहोर जिले के नजदीक है, तो दूसरा रायसेन जिले के सर्पाकार क्षेत्र वाली इस सीट के तहत अधिकांश हिस्सा ग्रामीण मतदाताओं का आता है। हुजूर सीट का नामकरण संभवत: तहसील हुजूर के कारण ही किया गया है, लेकिन इसमें दूसरी तहसीलों का भी कुछ क्षेत्र समाहित है। तो हुजूर, यह शब्द वैसे भी सामंतवादी सम्मान और गुलामी की मानसिकता को प्रदर्शित करता है, इसे बदला जा सकता है। क्या जातिसूचक नाम भी बदले जाएंगे? प्रदेश कांग्रेस के नेता भूपेंद्र गुप्ता ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जातिसूचक नामों वाले मोहल्लों का नाम बदलने की मांग की थी। कुछ नाम हैं, लोहारपुरा, सुनारपुरा, ढीमरखेड़ा, गुजरपुरा, तेलीपुरा, चमारपुरा, चमारटोला, ब्राह्मणपुरा, कायस्थपुरा, लखेरापुरा, दांगी मोहल्ला, भाटखेड़ी, इस्लाम मोहल्ला, कसाईपुरा, पवारखेड़ा, कोठा, खिड़किया, जाटखेड़ी, बंजारा, बंजारी आदि। ये अटपटे नाम बंदरकोल, बाबा की बरोली, बैसनपुर, बाराती, बौना, चंडी, चिल्लाखुर्द, दाढ़, घोड़ाबंद, चोरघटा (रीवा), चटाईपुरा (भोपाल), झुंड (शिवपुरी), ठीकरी (बड़वानी), फुटेरा (दमोह), भड़भडिय़ा (नीमच), लंगोटी, लालबर्रा (बालाघाट), चोली (खरगोन), चोरपुरा (मुरैना), बिहार (झाबुआ), बालमपुर (भोपाल), कुडिय़ा (सतना)। नाम बदलने की प्रक्रिया किसी भी मोहल्ले, गांव या शहर का नाम बदलने की सरकारी प्रक्रिया निर्धारित है। सबसे पहले स्थानीय निकाय से प्रस्ताव पारित कराकर जिला प्रशासन को भेजा जाता है। जिला प्रशासन से यह प्रस्ताव राज्य सरकार को और फिर केंद्र सरकार को भेजा जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन होता है। अब तक बदले गए नाम पुराना नाम – नया नाम होशंगाबाद – नर्मदापुरम नसरूल्लागंज – भैरुंदा फंदा – हरिहरनगर गंजबासौदा -वासुदेवनगर मुलताई – मूलतापी कांटाफोड़ – कांतापुर गजनीखेड़ी – चामुंडा महानगरी मौला – मोहनपुरा मौलाना – विक्रम नगर जहांगीरपुर – जगदीशपुर मिर्जापुर – मीरापुर सलामतपुरा – श्रीरामपुरा रेहमानपुरा – हनुमानपुरा इनके नाम में बदलाव की मांग पुराना नाम – नया नाम भोपाल – भोजपाल कटनी – कनकपुर जैसीनगर – जयशिव नगर औबेदुल्लागंज – हिरानिया विदिशा – वैदवती बेगमगंज – सियावास गौहरगंज – कलियाखेड़ी शमशाबाद – सूर्यनगर नूरगंज – रूपनगर सीहोर – सिद्धपुर उज्जैन – अवंतिका नगरी दतिया – दिलीपनगर महेश्वर – महिष्मती जबलपुर – जबालिपुरम

एमपी में इलाज के खर्चे के मुकाबले केरल से 4 गुना सस्ते, बावजूद इसके 43% लोग खुद कर रहे हैं ट्रीटमेंट का खर्च

भोपाल  मध्यप्रदेश में इलाज का खर्च भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है, खासकर केरल के मुकाबले। आम धारणा के विपरीत कि बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का मतलब महंगा इलाज है, आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के लोग औसतन अपनी जेब से केवल ₹1,739 सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा ₹7,889 है। इस कमी के बावजूद, मध्यप्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के कुल खर्च का लगभग 43% अपनी जमा-पूंजी या उधारी से निकालना पड़ता है। 10 साल में स्वास्थ्य खर्च में उल्लेखनीय कमी लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का स्वरूप काफी बदल गया है। 2014-15 में हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए कुल स्वास्थ्य खर्च का 72% खुद वहन करना पड़ता था। सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज के दायरे के विस्तार ने इस भार को 43% तक घटा दिया है। केरल और मध्यप्रदेश की तुलना केरल को अक्सर देश का सबसे मजबूत स्वास्थ्य मॉडल माना जाता है, लेकिन वहां के लोग अभी भी अपने इलाज के लिए ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। केरल में आम व्यक्ति को सालाना ₹7,889 खर्च करना पड़ता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह खर्च केवल ₹1,739 है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि कम संसाधनों के बावजूद मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य योजनाएं आम आदमी के लिए अधिक सुलभ साबित हो रही हैं। आम आदमी की जेब पर कितना भार?     मध्यप्रदेश: यहां कुल स्वास्थ्य खर्च का केवल 43.3% ही जनता को अपनी जेब से देना पड़ रहा है ।     केरल: केरल की जनता को आज भी इलाज पर कुल खर्च का 59.1% हिस्सा खुद वहन करना पड़ता है ।     उत्तर प्रदेश: यूपी में स्थिति और भी गंभीर है, वहां लोग अपने इलाज का 63.7% पैसा खुद भर रहे हैं। दस साल पहले 72% पैसा खुद खर्च करना पड़ता था लोकसभा में सामने आए आंकड़ों को देखें तो मध्यप्रदेश में 2014-15 के दौरान हालात चिंताजनक थे। तब हर व्यक्ति को इलाज के लिए 72% पैसा खुद के बैंक खाते या उधारी से चुकाना पड़ता था । लेकिन पिछले 7-8 वर्षों में सरकारी दखल ने इस आंकड़े को 43.3% पर लाकर खड़ा कर दिया है । आम आदमी की जेब पर असर मध्यप्रदेश में कुल स्वास्थ्य खर्च का 43.3% जनता अपनी जेब से देती है। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 63.7% है, जबकि केरल में यह 59.1% है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश के लोग देश के कई राज्यों की तुलना में कम आर्थिक बोझ उठाते हैं। सरकारी पहल और भविष्य की संभावनाएं मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं के प्रभाव ने आम जनता पर खर्च का बोझ कम किया है। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और मुफ्त इलाज के दायरे में विस्तार ने इसे संभव बनाया है। यदि इसी तरह योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में जनता पर खर्च और भी घट सकता है। जेब से खर्च की स्थिति ताजा आंकड़ों (2021-22) के मुताबिक, मध्यप्रदेश में एक व्यक्ति को साल भर में अपने स्वास्थ्य पर औसतन ₹1,739 अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। 2014-15 में प्रति व्यक्ति यह खर्च ₹1,808 था, जो कुल हेल्थ बजट का 72% होता था। आज की स्थिति मेंअब यह हिस्सा घटकर 43.3% रह गया है। अफसरों का तर्क है कि सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज का दायरा बढ़ा है। केरल के मुकाबले एमपी के लोग 'किस्मत वाले' अगर तुलना करें, तो हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल स्टाफ के मामले में समृद्ध केरल जैसे राज्य में भी लोगों को अपनी जेब से बहुत ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है। केरल में प्रति व्यक्ति अपनी जेब से ₹7,889 खर्च करने पड़ते हैं। मध्यप्रदेश में यह खर्च महज ₹1,739 है । राष्ट्रीय औसत: देश का औसत खर्च ₹2,600 है, यानी मध्यप्रदेश के लोग राष्ट्रीय औसत से भी कम पैसा अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश में 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 15,345 करोड़ का घाटा, हुआ दावा

भोपाल  मध्यप्रदेश में पिछले 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) के रूप में 15,345 करोड़ रुपए का नुकसान होने का दावा सामने आया है। आरोप है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की सरकारों ने केंद्र सरकार की तारीख के अनुसार महंगाई भत्ता नहीं दिया, जिससे लाखों कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस मुद्दे में पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पेंशनर्स और परिवार पेंशनधारकों को भी समय पर महंगाई राहत (DR) नहीं मिल रही। वर्तमान में मोहन यादव सरकार पर भी आरोप है कि पेंशनर्स को जनवरी 2026 से राहत दी गई, जबकि यह जुलाई 2025 से मिलनी चाहिए थी। पांचवें-छठवें वेतनमान में सबसे ज्यादा नुकसान बताया गया है कि पांचवें और छठवें वेतनमान के दौरान करीब 11,970 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता समय पर नहीं दिया गया। हालांकि भत्ता बाद में दिया गया, लेकिन केंद्र की तय तारीख से देरी के कारण कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। सातवें वेतनमान में 27 महीने का DA रोका सातवें वेतनमान में जुलाई 2019 से सितंबर 2021 तक 27 महीने का 5% महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इस अवधि में राज्य में पहले कमल नाथ की सरकार थी, बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार आई, लेकिन भत्ता जारी नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों को करीब 3,375 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। दिग्विजय सरकार में 2 साल DA पूरी तरह बंद जनवरी 2002 से दिसंबर 2003 तक, जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे, उस दौरान करीब 24 महीने तक महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इससे कर्मचारियों को लगभग 1,260 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। भाजपा सरकार में भी देरी से मिला लाभ दिसंबर 2003 के बाद उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में DA दिया गया, लेकिन केंद्र की दर और तारीख से नहीं। इससे छठवें वेतनमान में करीब 10,710 करोड़ रुपए का नुकसान बताया गया है। कर्मचारी संगठन का आरोप मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी के मुताबिक, “कांग्रेस और भाजपा—दोनों ही सरकारों ने केंद्र के बराबर समय पर DA नहीं दिया। इसका सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ा है और लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।”

अन्न उत्पादन को बढ़ावा देगा मप्र

भोपाल  मध्यप्रदेश की तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को शीघ्र ही जी आई टैग मिलने जा रहा है। तीनों फसलों के प्रस्ताव तैयार कर परीक्षण के लिए भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री चैन्नई भेज दिए गए है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार अन्न उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक कोदो-कुटकी को बचाने और उत्पादन करने के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। औषधीय गुणवत्ता और पौष्ट‍िकता के कारण अब दुनिया अन्न की ओर लौट रही है। ग्लोबल मार्केट में अन्न की मांग बढ़ रही है। अन्न अब किसानों के लिये आर्थ‍िक लाभ देने वाली फसल बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर रानी दुर्गावती  अन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों से 1,000 प्रति क्विंटल पर कोदो कुटकी की खरीदी हो रही है। कोदो-कुटकी की खरीद के लिए 22,000 से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इन किसानों का 21,000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इस योजना में 16 जिलों में पहली बार खरीद की जा रही है। इन जिलों में जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, बालाघाट, सिवनी, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं । सिताही कुटकी सिताही कुटकी एक कम अवधि (60 दिन) वाली 'लिटिल मिलेट' (छोटी बाजरा) की देशी किस्म है। यह वर्षा-आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की स्थितियों के लिए उपयुक्त है। यह सूखे की मार, नमी की कमी, और प्रमुख कीटों (शूट फ्लाई), 'ग्रेन स्मट' व 'ब्राउन स्पॉट' जैसी बीमारियों का सामना करने में सक्षम है। इस प्रकार, यह किसानों को एक स्थिर पैदावार दिलाने में मददगार साबित होती है। सिताही कुटकी की मध्यम ऊँचाई और मोटे तने के कारण फसल के गिरने की समस्या नहीं रहती। इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ तथा कमज़ोर मिट्टी वाली स्थितियों में भी उगाया जा सकता है। डिण्डोरी के 'बैगा' तथा 'गोंड' जनजातियों के किसानों के लिए अच्छी आय दे सकती है। डिंडोरी में 'सिताही कुटकी' की खेती की 10,395 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ोतरी और 10-11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की स्थिर पैदावार से इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका, भोजन और पोषण सुरक्षा में मदद मिली है। जनजातीय ज़िलों के लगभग 60,000 आदिवासी किसान—खासकर डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया, बालाघाट और जबलपुर के कुछ हिस्सों के किसान पैदावार बढ़ाकर आर्थिक ले सकते हैं। डिंडोरी के पहाड़ी और मुश्किल इलाकों के 54 गाँवों के किसानों को मुनाफ़ा हुआ है। इन इलाकों में दूसरी रबी फ़सलों की खेती नहीं होती। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर ने 'भौगोलिक संकेतक' (GI) टैग के लिए दस्तावेज़ तैयार किया है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर 'सिताही कुटकी' का एक ब्रांड नाम स्थापित होगा। बाज़ार के नए अवसर खुलेंगे। इससे बाजरे की खेती करने वाले जनजातीय किसानों को आर्थ‍िक लाभ होगा। नागदमन कुटकी डिंडोरी जिले में उगाई जाने वाली कुटकी की एक विशिष्ट स्थानीय किस्म है। यह अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। बैंगनी अरहर दरअसल अरहर की विशेष किस्म है। इसमें पौधे या फलियों पर बेंगनी रंग की झलक हेती है। इसमें भरपूर प्रोटीन होता है। रोगों से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है। अच्छी देखभाल होने पर 15 से 20 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन हो सकता है। जीआई टैग से लाभ : औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। जीआई टैग मिलने से इस फसल की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे बिक्री बढेगी। यह साबित होगा कि फसल स्थापित मानकों के अनुरूप है। जनजातीय क्षेत्रों में उत्पादन जनजातीय जिलों में किसानों को कोदो-कुटकी की सभी प्रकार की किस्मों को बचाने और उनका उत्पादन बढ़ाने के लिये प्रात्साहित किया जा रहा है। सीधी, जबलपुर, डिंडोरी, मंडला, छिंदवाड़ा जैसे जिलों में किसानों को जोड़ा गया है। सहरिया-बहुल श्योपुर जिले में जनजातीय बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए मिलेट आधारित व्यंजनों का उपयोग किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकताओं और एकीकृत बाल विकास योजना के अमले को मिलेट के व्यंजन बनाने की जानकारी दी गई है और इसके पौष्ट‍िक गुणों से परिचित कराया गया है। जिले में 130 एकड़ में कोदो कुटकी की खेती हो रही है। करीब 200 किसानों को इसमें जोड़ा गया है। इस पहल का परिणाम यह रहा कि 2000 बच्चों का पोषण स्तर बढ़ गया और उनके स्वास्थ्य में सुधार आया। डिण्डोरी के समनापुर ब्लाक की महिला किसानों को कोदो-कुटकी उत्पादन से जोड़ा गया है। प्रत्येक महिला किसान के पास औसत ढाई एकड़ खेती है। इससे 32 गांवों की 1250 महिला किसान जुड़कर खेती कर रही है। पिछले दो सालों में कोदो कुटकी उत्पादन बढ़ा है।  

मध्यप्रदेश में पैरामेडिकल-नर्सिंग स्टाफ के लिए निकली वैकेंसी, ऐसे करें आसानी से आवेदन

भोपाल मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। बोर्ड ने 'ग्रुप-5' के तहत पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में 291 रिक्त पदों को भरा जाएगा। भर्ती का विवरण और पद नोटिफिकेशन के तहत स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) और अन्य तकनीकी पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक बड़ा मौका है जो चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज की सेवा करना चाहते हैं। पदों की संख्या और आरक्षण का विवरण आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिया गया है, जिसे उम्मीदवार बोर्ड की वेबसाइट पर देख सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता मानदंड) शैक्षणिक योग्यता: आवेदक ने संबंधित विषय में 12वीं (साइंस स्ट्रीम) पास की हो। इसके साथ ही, पद के अनुसार संबंधित ट्रेड में डिप्लोमा या डिग्री (जैसे- GNM, B.Sc Nursing, B.Pharma, या लैब टेक्नोलॉजी डिप्लोमा) होना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन: उम्मीदवार का मध्य प्रदेश के संबंधित काउंसिल (जैसे- नर्सिंग या फार्मेसी काउंसिल) में रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। आयु सीमा: आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश के मूल निवासी आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) और महिलाओं को सरकारी नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदकों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा ताकि अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके। भर्ती के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया 13 मार्च 2026 से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू होगी। भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 27 मार्च 2026 है। आवेदन शुल्क सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश के आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/दिव्यांग) के लिए यह 250 रुपये है। इसके अतिरिक्त, पोर्टल शुल्क का भुगतान भी करना होगा। चयन प्रक्रिया और परीक्षा केंद्र चयन पूरी तरह से लिखित परीक्षा के आधार पर होगा। परीक्षा में दो भाग होंगे। सामान्य भाग में सामान्य ज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और रगजनिंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।तकनीकी भाग उम्मीदवार के संबंधित विषय (जिस पद के लिए आवेदन किया है) पर आधारित होगा। परीक्षा का आयोजन मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और अन्य जिला केंद्रों पर किया जाएगा। आवेदन कैसे करें?     सबसे पहले MPESB की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं। 2. 'Online Form' सेक्शन में जाकर 'Group-5 Paramedical & Nursing Recruitment 2026' के लिंक पर क्लिक करें। 3. अपना प्रोफाइल रजिस्ट्रेशन (MP Online Profile) पूरा करें। 4. आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड करें। 5. आवेदन शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

मध्य प्रदेश भेजी जाने वाली गांजे की खेप का भंडाफोड़, छत्तीसगढ़ में दो आरोपी गिरफ्तार

महासमुंद छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अंतर्राज्यीय गांजा तस्करी पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. कार में ओडिशा से अवैध गांजा भरकर मध्यप्रदेश लेकर जा रहे तस्करों को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली. कार्रवाई में 35 किलो गांजा बरामद किया गया, जिसकी कीमत 17 लाख से अधिक रुपए बताई जा रही है. थाना सिंघोडा क्षेत्र का मामला है. नेशनल हाइवे 53 पर रेहटीखोल से कार में अवैध गांजा की तस्करी की सूचना पर नाकेबंदी की गई. एंटी नारकोटिक्स फोर्स और सिंघोड़ा पुलिस की टीम ने कार को रुकवाकर पूछताछ की तो युवकों ने अपना नाम पंकज राठौर और हेमंत सिंह तोमर बताया, दोनों मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के निवासी बताया. इस दौरान पुलिस ने कार की तलाशी ली तो पीछे सीट में बने चेंबर में गांजा रखना पाया गया. पुलिस ने आरोपियों के पास से 17,50,000 रुपए का गांजा और कार जब्त कर लिया गया. दोनों युवकों के खिलाफ अपराध धारा (20बी (दो)(सी), 29 -1) एनडीपीएस एक्ट की तहत कार्रवाई करते गिरफ्तार कर लिया गया. कोर्ट में पेशी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है. बता दें कि इससे पहले ओडिशा से महाराष्ट्र तक फैले गांजा तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया था. 68 लाख के गांजे के साथ 8 अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली, इस गिरफ्तारी में एक आरोपी महिला भी शामिल थी.

कृषि उत्पादन में मध्यप्रदेश ने मारी बाजी, खाद्यान्न, दलहन और तिलहन में पहला स्थान

कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में है प्रदेश का अग्रणी स्थान भोपाल  मध्यप्रदेश एक कृषि- प्रधान राज्य है और कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का मूल आधार हैं। कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करता है, साथ ही व्यापक स्तर पर रोजगार, खाद्य एवं पोषण तथा आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में विशेष रूप से अनाज और दलहनों के उत्पादन में महत्वपूर्व योगदान प्रदान करता है। राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं कृषकों के समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में घोषित किया गया है। मध्यप्रदेश ने वर्ष 2024-25 में कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। कुल खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरा स्थान राज्य ने गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा। 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया। कुल दलहन उत्पादन शीर्ष स्थान बरक़रार दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।  

मध्यप्रदेश में 1.50 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, होली से पहले एरियर की एकमुश्त राशि मिलेगी

भोपाल   होली से पहले प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। श्रम आयुक्त कार्यालय इंदौर द्वारा जारी आदेश के बाद दैनिक वेतन भोगी, श्रमिक और आउटसोर्स कर्मचारियों को 12 माह का एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि यह राशि त्योहार से पहले जारी की जाए, ताकि कर्मचारी और उनके परिवार होली का त्योहार बेहतर तरीके से मना सकें। किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ? जानकारी के अनुसार इस आदेश से विभिन्न विभागों के 60 हजार से अधिक दैनिक वेतन भोगी (दैवेभो), 35 हजार से अधिक निगम-मंडल कर्मियों के साथ-साथ डेढ़ लाख से ज्यादा आउटसोर्स और निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक कर्मचारी को 20 से 24 हजार रुपए तक की अंतर राशि एकमुश्त एरियर के रूप में मिल सकती है, जो उनके लिए बड़ी आर्थिक राहत साबित होगी। हाईकोर्ट में आपत्ति के कारण रुका था लाभ मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार मार्च 2024 में दैनिक वेतन भोगी, श्रमिक और आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन 2,000 रुपए प्रतिमाह बढ़ाया गया था। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2024 से लागू होना थी। हालांकि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में एक एसोसिएशन द्वारा आपत्ति दायर किए जाने के कारण इसका लाभ समय पर नहीं मिल पाया। बाद में वेतनवृद्धि का लाभ अप्रैल 2025 से मिलना शुरू हुआ, लेकिन एरियर का भुगतान लंबित रहा। श्रम आयुक्त कार्यालय ने दिया स्पष्ट निर्देश अब 18 फरवरी को श्रम आयुक्त कार्यालय इंदौर ने स्पष्ट आदेश जारी कर विभागों को निर्देश दिए हैं कि 2024 में बढ़ाई गई न्यूनतम वेतन की अंतर राशि का भुगतान एरियर के रूप में तत्काल किया जाए। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद जिन विभागों ने भुगतान नहीं किया था, उन्हें भी अब कार्रवाई करनी होगी। भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न विभागों और निगम-मंडलों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। यदि आदेश का समय पर पालन होता है, तो होली से पहले हजारों परिवारों के घरों में आर्थिक खुशहाली की रंगत देखने को मिल सकती है।