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दिल्ली में आयोजित हिंदी ग्रंथ अकादमी बैठक में मध्यप्रदेश की सक्रिय भागीदारी

दिल्ली में हिंदी ग्रन्थ अकादमियों की बैठक में मध्यप्रदेश ने की सहभागिता दिल्ली में आयोजित हिंदी ग्रंथ अकादमी बैठक में मध्यप्रदेश की सक्रिय भागीदारी हिंदी साहित्य के मंच पर मध्यप्रदेश की उपस्थिति, दिल्ली में हुई अकादमियों की बैठक भोपाल  वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रो. धनंजय सिंह की अध्यक्षता में देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालकों की बैठक तकनीकी शब्दावली आयोग मुख्यालय दिल्ली में संपन्न हुई। बैठक में मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के प्रतिनिधि राम विश्वास कुशवाह सहायक संचालक एवं महेंद्र सिंह सिसोदिया सम्मिलित हुए। सहायक संचालक कुशवाहा ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत नवीन पुस्तकों के प्रकाशन के लिए अकादमियों को न्यूनतम 15 लाख से लेकर 40 लाख रुपए तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में मप्र हिंदी ग्रन्थ अकादमी के प्रतिनिधियों ने तकनीकी शब्दावली आयोग को मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित 40 विषयों की 275 से अधिक शीर्षक की प्रकाशित पुस्तकों की सूची तथा प्रत्येक विषयों की एक-एक पुस्तकों की प्रति सौंपी। इस अवसर पर मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी से प्रकाशित द्विमासिक मासिक "रचना" पत्रिका के वर्तमान अंक तथा मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के स्थापना के अवसर पर तैयार किया गया 55 वर्ष की यात्रा पर आधारित प्रकाशित "विकास गाथा" ब्रोशर भी आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य राज्यों के अकादमियों के संचालकों को भेंट किया गया। बैठक में प्रोफेसर रूपेश चतुर्वेदी ,जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली, प्रोफेसर मोहम्मद शरीफ, जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली, डॉ. अनूप कोकसल, वित्त अधिकारी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पंजाब, गुजरात, उड़ीसा, केरल, हरियाणा आदि विभिन्न राज्यों की हिंदी ग्रंथ अकादमी तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय दिल्ली के संचालक/ प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

सरकार का फैसला: खरीदी केंद्रों की जगह अब गोडाउन को मिलेगी प्राथमिकता, अनाज खरीद होगी आसान

 भोपाल  प्रदेश में गेहूं, धान, चना और उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी को और सरल बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब खरीदी केंद्रों की प्राथमिकता गोडाउन को दी जाएगी, जिससे खरीदे गए अनाज को ढोने में लगने वाला अतिरिक्त खर्च रोका जा सके। यह घोषणा अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरुण शमी ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित स्टेट लेवल प्रोक्योरमेंट रिफार्म कार्यशाला में की। शमी के मुताबिक पिछले रबी सीजन में करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा गया। लगभग 20 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए। सरकार ने गेहूं खरीदी पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया। इसी तरह 6.50 लाख किसानों से 43.5 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। किसानों के पंजीयन में अब आधार नंबर जोड़ा गया है। खरीदी केंद्रों से सीधे मिलर्स को धान देने की व्यवस्था की गई है। उपभोक्ताओं के लिए नई पहल अपर मुख्य सचिव ने बताया कि पीडीएस दुकानों में अनाज ले जाने वाले वाहनों की निगरानी की जा रही है। प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसकी शुरुआत इंदौर से हो चुकी है। उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी की जा रही है, जिससे अपात्र लोगों को बाहर किया गया है। लगभग 5.70 लाख नए उपभोक्ता जोड़े गए हैं।