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सेक्टर-56 से पचगांव तक दौड़ेगी मेट्रो, 35.25 किमी रूट पर बनेंगे 28 स्टेशन

गुरुग्राम
 गुरुग्राम में प्रस्तावित सेक्टर-56 से पचगांव मेट्रो कॉरिडोर को तेज रफ्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकसित करने की तैयारी है।

35.25 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और इसमें 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर को रैपिड मेट्रो, आरआरटीएस और हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर (एचओआरसी) समेत भविष्य की रेल आधारित प्रणालियों से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा की और संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। परियोजना को अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर मध्यम क्षमता वाली मेट्रो के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है। मेट्रो में सीबीटीसी सिग्नलिंग प्रणाली प्रस्तावित है।

तेज डिजाइन स्पीड और आधुनिक सिग्नलिंग के साथ कॉरिडोर को गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क मजबूत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे गुरुग्राम-मानेसर-पचगांव क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करने और सड़क यातायात कम करने की योजना है।

RRTS और रैपिड मेट्रो से जुड़ेगा
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर को मौजूदा और प्रस्तावित रेल आधारित परिवहन नेटवर्क के साथ एकीकृत करने की योजना है। इसमें रैपिड मेट्रो और आरआरटीएस के साथ हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर को भी जोड़ा जाएगा।

इसके अलावा भविष्य में विकसित होने वाली रेल आधारित प्रणालियों के साथ भी बेहतर एकीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। इससे सेक्टर-56 से पचगांव तक तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को व्यापक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।

35.25 किमी रूट पर 28 स्टेशन
सेक्टर-56 से शुरू होने वाला कॉरिडोर सेक्टर-61, 65, 66, 50 और 49 से होते हुए खेड़कीदौला पहुंचेगा। इसके बाद ग्लोबल सिटी और न्यू गुरुग्राम के सेक्टर-84, 86 और 90 से होते हुए आईएमटी मानेसर और पचगांव तक जाएगा।

पूरे 35.25 किलोमीटर लंबे रूट पर 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर के जरिये प्रमुख आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।

अगले 15 साल की जरूरतों पर जोर
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने परियोजना तैयार करते समय अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण प्रक्रिया, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि डीपीआर के स्तर पर ही सभी योजना संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाए, ताकि आगे चलकर परियोजना में देरी न हो। संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के एसीएस अनुराग अग्रवाल, निदेशक जे गणेशन, शहरी स्थानीय निकाय आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, एचएसआईआईडीसी के एमडी विनय प्रताप सिंह, एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक एवं एचएमआरटीसी के एमडी मुकुल कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

 

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