samacharsecretary.com

‘घांची-तेली समाज के PM मोदी का जन्मदिन मनाएंगे’, आशीर्वाद का दीया जलाने पर राजभर का बयान

घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाने और आशीर्वाद का दीया जलाने पर मचेगा हल्ला: ओम प्रकाश राजभर

कैबिनेट मंत्री बोले- तेल जल गया, बाती जल गई और दीया बर्बाद हो गया का शोर मचाने का टूलकिट तैयार

कांग्रेस, सपा और वामपंथी सवर्णों पर साधा निशाना, कहा- सबसे ज्यादा यही लोग मचाएंगे हल्ला

वामपंथी नेतृत्व की सामाजिक पृष्ठभूमि पर उठाए सवाल, बोले- ऊंची कुर्सियों पर कौन बैठा था, कौन बैठा है और कौन बैठेगा, यह भी देखिए

मार्क्स-लेनिन से अंबेडकर और लोहिया-जेपी से जय भीम तक की राजनीति पर कसा तंज

कहा- पिछड़ा-दलित समाज अब जाग गया, जितना बांटने की कोशिश करेंगे उतना ही जुड़ता जाएगा

 लखनऊ
 प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान के तहत आशीर्वाद का दीया जलाए जाने को लेकर कांग्रेस, सपा और वामपंथियों पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि एक-दो दिन रुकिए, हो-हल्ला होने वाला है। हल्ला होगा कि तेल जल गया, त्राहि-त्राहि हो गई। इसका टूलकिट भी तैयार है, बस हल्ले का इंतजार कीजिए।

राजभर ने कहा कि पूरे देश ने घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया। अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों ने सेवा संकल्प अभियान से खुद को खुशी-खुशी जोड़ा। जनता से आशीर्वाद मांगा और हर्षोल्लास के साथ आशीर्वाद का दीया जलाया।

सबसे ज्यादा हल्ला कांग्रेस के टूलकिट वामपंथी और सपाई मचाएंगे

राजभर ने सवाल किया कि इससे बुरा किसे लगा? उन्होंने कांग्रेस, सपा और वामपंथी सवर्णों का नाम लेते हुए कहा कि अब यही लोग चिल्लाएंगे कि इतना तेल जल गया, बाती जल गई और दीया बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि देख लीजिएगा, सबसे ज्यादा हल्ला कांग्रेस के टूलकिट वामपंथी सवर्ण और सपाई मचाएंगे।

उन्होंने कहा कि वामपंथी सवर्णों को छोड़ दिया जाए तो पूरा सवर्ण समाज उनके साथ है। सबसे ज्यादा दिक्कत उस खास जमात को है, जो वर्षों से समाज में अपना वैचारिक जहर बो रही है।

वामपंथ की ऊंची कुर्सियों पर कौन बैठा था, यह भी देखिए

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अति पिछड़ों, दलितों और बहुजनों को एक बार उन वामपंथी नेताओं की जाति भी देखनी चाहिए, जो दिन-रात उन्हें जाति और ब्राह्मणवाद समझाते हैं। वामपंथी विचार की ऊंची कुर्सियों पर कौन बैठा था, कौन बैठा है और कौन बैठेगा, यह भी देखना चाहिए। राजभर ने दावा किया कि सभी वामपंथी अगड़े मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवाद के नाम पर गाली किसे दिलाई जाती है और विचार की दुकान किसके हाथ में है, तस्वीर अपने आप साफ हो जाएगी।

गरीब और सामान्य परिवार से निकला व्यक्ति पसंद नहीं

राजभर ने कहा कि वास्तव में ये राजा और राज परिवारों के इर्द-गिर्द जीने वाले लोग हैं। गरीब और सामान्य परिवार से निकलकर कोई व्यक्ति अपने दम पर ऊपर पहुंचे, यह इन्हें कतई पसंद नहीं आता। चाहे वह मोदी हों, राजभर हों, निषाद हों या किसी अन्य दलित या अति पिछड़े समाज से निकला कोई व्यक्ति।

मार्क्स-लेनिन को मानने वाले अचानक अंबेडकरवादी हो गए

राजभर ने वामपंथी और समाजवादी राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि कल तक मार्क्स और लेनिन को मानने वाले अचानक अंबेडकरवादी हो गए। लोहिया और जेपी के नाम पर पार्टी चलाने वाले अचानक रंग बदलकर जय भीम करने लगे। इतनी जल्दी विचार, नारे और महापुरुष बदल जाएं तो यह सोचने वाली बात है।

उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों और दलितों को वर्षों से अपने विचारों के जाल में फंसाने की कोशिश एक खास जमात ने की। उन्होंने इसे आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझ रही जमात बताते हुए कहा कि इसे सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब अति पिछड़ा, दलित और बहुजन इनके बताए रास्ते के बजाय अपना रास्ता खुद चुनने लगता है। घांची-तेली समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इन्हें यही परेशानी है।

भारतीय वामपंथ कांग्रेस की प्रयोगशाला

राजभर ने कहा कि वास्तव में भारतीय वामपंथ कांग्रेस की प्रयोगशाला है, जहां देश और समाज को बांटकर कुछ परिवारों की गुलामी करने की ट्रेनिंग मिलती है। उन्होंने कहा कि सारे वामपंथी अंत में वहीं नौकरी करते हैं।

पिछड़ा-दलित समाज अब जाग गया

पोस्ट के आखिर में राजभर ने कहा कि पिछड़ा-दलित समाज अब जाग गया है। आपके चेहरे पर लगा नकाब उतर चुका है। आप जितना पिछड़ों-दलितों को बांटने की कोशिश करेंगे, वे उतना ही जुड़ते जाएंगे। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा, बस देखते जाइए।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here