रायपुर
विश्व पर्यटन सप्ताह 21 से 27 सितंबर के अवसर पर ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को समझने और स्थानीय संस्कृति से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत थाड़पथरा स्थित मडहाउस परिसर में ‘रूरल एंड ट्राइबल टूरिज्म वर्कशॉप एवं फील्ड विजिट’ का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के 90 विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
प्रकृति की गोद में विद्यार्थियों ने जाना पर्यटन का नया अनुभव
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण ही नहीं किया, बल्कि थाड़पथरा के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को करीब से समझने का अनुभव प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक परिवेश से होते हुए कमरापथरा मार्ग से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग की।
प्रकृति की हरियाली, जंगलों का शांत वातावरण और स्थानीय प्राकृतिक परिवेश विद्यार्थियों के लिए ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की व्यावहारिक समझ विकसित करने का माध्यम बना। फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने जाना कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है।
बैगा संस्कृति और परंपराओं से हुए रूबरू
फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान और गोदना परंपरा को करीब से समझा। प्रकृति के साथ बैगा समुदाय के सामंजस्यपूर्ण जीवन और पारंपरिक ज्ञान ने विद्यार्थियों को जनजातीय संस्कृति की विशिष्टता को समझने का अवसर दिया।
विद्यार्थियों ने स्थानीय समुदाय के साथ संवाद करते हुए यह भी जाना कि जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित न रखकर वहां की परंपराओं, लोकजीवन, खान-पान, कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर अधिक समृद्ध अनुभव के रूप में विकसित किया जा सकता है।
स्थानीय व्यंजनों से कराया परिचय
थाड़पथरा पर्यटन समिति द्वारा आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने विद्यार्थियों को स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली की विशेषताओं को भी समझा।
स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से विद्यार्थियों को यह अनुभव हुआ कि पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय लोगों की भूमिका केवल आतिथ्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे स्थानीय संस्कृति, भोजन, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से पर्यटन अनुभव को विशिष्ट बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की दी जानकारी
कार्यक्रम में पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक श्री अभिषेक जायसवाल एवं पर्यटन समन्वयक श्री हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के विकास के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता महत्वपूर्ण है। समुदाय की भागीदारी से स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
विद्यार्थियों को ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की संभावनाओं, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, सामुदायिक भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया।
पर्यटन शिक्षा को मिला व्यावहारिक आयाम
विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर आयोजित यह फील्ड विजिट विद्यार्थियों के लिए पर्यटन प्रबंधन की पुस्तकीय जानकारी को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर बना। प्राकृतिक परिवेश, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को व्यावहारिक रूप से समझा।
कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. रोहित रविंद्र बोरलिकर, डॉ. जयप्रकाश नारायना एवं डॉ. दिनेश कुमार परस्ते के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में थाड़पथरा पर्यटन समिति के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही।
थाड़पथरा बना सीखने और अनुभव का केंद्र
विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत थाड़पथरा में आयोजित यह आयोजन पर्यटन शिक्षा, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय को एक मंच पर जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आया। 90 विद्यार्थियों ने यहां बैगा संस्कृति की विशिष्टता, प्राकृतिक परिवेश की खूबसूरती और समुदाय आधारित पर्यटन की अवधारणा को करीब से समझा।
ऐसे आयोजन ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को पहचानने के साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सम्मानपूर्वक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।





