जयपुर
भारतीय वायुसेना (IAF) के इतिहास के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति:2026' का आधिकारिक आगाज आज यानी शनिवार से वायुसेना स्टेशन जोधपुर में हो रहा है। आगामी 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेगा मिलिट्री इवेंट में दुनिया भर के 8 ताकतवर देश अपने अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट एसेट्स के साथ हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 32 अन्य देश इस ऐतिहासिक युद्धाभ्यास को देखने के लिए ऑब्जर्वर के तौर पर जोधपुर में मौजूद रहेंगे। युद्धाभ्यास के शुरू होने से एक दिन पहले ही यानी शुक्रवार से ही विभिन्न मित्र देशों के विशालकाय ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जोधपुर एयरबेस पर उतरने शुरू हो गए थे, जिससे पूरे पश्चिमी राजस्थान में रक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है।
शुक्रवार को जोधपुर एयरबेस पर उतरे विमानों में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स का सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस, अमरीका वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर, बांग्लादेश का सी-130 जे और फ्रांस की वायुसेना 'आर्मा द लेयर' का ए330 एमआरटीटी शामिल रहे। इन मालवाहक विमानों के जरिए विदेशी सेनाओं के सैनिक दल, तकनीकी स्टाफ और अन्य जरूरी साजो-सामान जोधपुर पहुंच चुके हैं, जबकि विभिन्न देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का पहुंचना आज से शुरू हो रहा है। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास के जरिए भारत अपनी सामरिक ताकत, लॉजिस्टिक्स क्षमताओं और रक्षा कूटनीति का पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शन कर रहा है, जिसका केंद्र इस बार मरुधरा की धरती यानी जोधपुर बना है
100 से अधिक लड़ाकू विमान, 3000 सैनिक ले रहे हिस्सा
'तरंगशक्ति' का यह दूसरा संस्करण है, जिसे अब तक का सबसे व्यापक और बड़ा वायु अभ्यास माना जा रहा है। इससे पहले इसका पहला संस्करण वर्ष 2024 में तमिलनाडु के सुलूर और जोधपुर में आयोजित किया गया था, लेकिन इस बार इसका दायरा और अधिक विस्तृत किया गया है।
भाग लेने वाले देश: इस युद्धाभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया कुल 8 देश अपने लड़ाकू विमानों के साथ मैदान में उतर रहे हैं।
ऑब्जर्वर देश: दुनिया भर के 32 देश इस पूरी सैन्य गतिविधि का जायजा लेने के लिए बतौर ऑब्जर्वर जोधपुर में शिरकत कर रहे हैं।
फाइटर जेट्स और जवान: इस पूरे मेगा इवेंट में कुल मिलाकर 100 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान आसमान में अपनी ताकत दिखाएंगे, और करीब 3,000 सैन्य जवान व पायलट इस ऑपरेशन का हिस्सा बनेंगे।
एयरबेस का दायरा: मिशन की जटिलता और विशालता को देखते हुए इस अभ्यास के संचालन के लिए 4 से 5 प्रमुख एयरबेसों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें जोधपुर एयरबेस मुख्य कमांड सेंटर के रूप में कार्य कर रहा है।
भीषण गर्मी बनेगी विदेशी पायलटों के लिए चुनौती!
जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में अक्टूबर महीने की शुरुआत में मौसम अपने तीखे तेवर दिखा रहा है। मानसून की विदाई के बाद जोधपुर में दिन का अधिकतम तापमान अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही दिन के समय हवा में नमी करीब 25 प्रतिशत के आसपास रहने के कारण मारवाड़ में भीषण लू जैसे हालात बने हुए हैं।
विदेशी वायुसेना के पायलटों और तकनीकी दलों के लिए रेगिस्तान की इस प्रचंड गर्मी और तापमान से निपटना इस युद्धाभ्यास की सबसे बड़ी और शुरुआती चुनौती साबित होने वाली है।
रक्षा जानकारों का कहना है कि भारतीय वायुसेना के साथ पूर्व में हुए 'वीर गार्जियन' जैसे अभ्यासों के दौरान भी जापान और अन्य पश्चिमी देशों के सैनिकों को राजस्थान की इस विशेष भौगोलिक गर्मी से तालमेल बिठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। विदेशी एयरक्रू को यहां के शुष्क और गर्म मौसम में ऑपरेशनल रूटीन बनाए रखने के लिए विशेष एयर कंडीशनिंग और हाइड्रेशन प्रोटोकॉल फॉलो करने पड़ रहे हैं।
भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित यह युद्धाभ्यास केवल दो देशों के बीच की सैन्य ड्रिल नहीं है, बल्कि यह एक 'मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज' है। इसका मुख्य उद्देश्य मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा युद्ध रणनीतियों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और कंबाइंड ऑपरेशंस की क्षमताओं को परखना और मजबूत करना है।
आज के दौर में जब वैश्विक सुरक्षा के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, तब भारत की धरती पर दुनिया की शीर्ष वायुसेनाओं का एक साथ आना भारत की बढ़ती रणनीतिक साख और तकनीकी दक्षता को रेखांकित करता है। जोधपुर एयरबेस पर अगले कई दिनों तक सुखोई, राफेल, एफ-16 और अन्य आधुनिक फाइटर जेट्स की गर्जना से मरुधरा का आसमान गूंजता रहेगा। 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के दौरान विभिन्न जटिल सामरिक परिदृश्यों का अभ्यास किया जाएगा, जिससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना की तैयारी और अधिक पुख्ता होगी।





