samacharsecretary.com

‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर आयुर्वेद को जनकल्याण से जोड़ें : राज्यपाल पटेल

भोपाल 

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि मन की बात से प्रेरणा लेकर आयुर्वेद को जनकल्याण से जोड़ें, क्योंकि आने वाला समय आयुर्वेद का है। आवश्यकता उसके ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन, प्रकृति संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आयुर्वेद को केवल उपचार तक सीमित नहीं रखें। उसके ज्ञान से रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद महाविद्यालय को शिक्षा, शोध, सेवा और जन-जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाने का केंद्र बनने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य का संबंध केवल दवा से नहीं, बल्कि स्वच्छता, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, योग, व्यायाम और सकारात्मक सोच से भी है।

राज्यपाल  पटेल पं. खुशीलाल शासकीय (स्वशासी) आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान के रजत जयंती सभागार में रविवार को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रसारण से पूर्व श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के नागरिकों से संवाद का नवाचार है, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रेरक कार्य और अनुभव सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम सामान्य नागरिकों के छोटे प्रयासों और जन भागीदारी की उपयोगी पहल को सामने लाकर समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा देता है। जागरूक नागरिक अपने स्तर पर निरंतर प्रयासों से समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं। ‘मन की बात’ यह संदेश देती है कि समाज में बदलाव केवल बड़े प्रयासों से नहीं, बल्कि छोटे और निरंतर कार्यों से भी संभव है। उन्होंने उदाहरण दिया कि किसी गांव में एक विद्यार्थी भी स्वास्थ्य जागरूकता का छोटा अभियान शुरू कर अनेक परिवारों तक उसका प्रभाव पहुंचा सकता है।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि आधुनिक समय में जीवनशैली से जुड़ी अनेक चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और अनुशासित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मन और सक्रिय बुद्धि का निर्माण होता है। उन्होंने संतुलित आहार, मिलेट के सेवन, पर्याप्त पानी पीने, नियमित व्यायाम और कम तेल के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया। कोविड के दौरान गिलोय की महत्ता को बताते हुए अधिकांश पेड़-पौधों में औषधीय गुण होने की बात कही। जन औषधि केंद्रों से दवाएँ लेने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों पर बल दिया। बताया कि देश में 25 हजार केंद्र बनाने का लक्ष्य है, जिनमें 19 हजार केंद्र स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गांवों और जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों तथा पारंपरिक उपचार से जुड़ा व्यापक ज्ञान उपलब्ध है। इस ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टि से समझना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से स्थानीय ज्ञान, वन औषधियों और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के अध्ययन तथा शोध के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज की आधारशिला हैं। शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि आयुष विभाग द्वारा जन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित शिक्षा, शोध, उपचार और योग की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद प्रकृति, संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो स्वास्थ्य और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। आभार प्रदर्शन आयुक्त आयुष मती आर. उमा महेश्वरी ने किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल  पटेल का शॉल, फल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। अतिथियों द्वारा भगवान धनवंतरी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here