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नाना पाटेकर ने 75 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कारगिल युद्ध में भी निभाई थी अहम भूमिका

75 की उम्र में नाना पाटेकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. उनका अचानक जाना हर किसी को खल रहा है. वो सिर्फ बेहतरीन एक्टर नहीं थे, बल्कि वो सच्चे नागरिक भी थे. उन्होंने हमेशा देशहित की बात की और उसके लिए काम किया.

पर्दे पर उन्होंने कई यादगार और दमदार किरदार निभाए. पर क्या आप जानते हैं कि नाना पाटेकर एक भारतीय प्रादेशिक सेना (Territorial Army) में भी रह चुके हैं? बहुत कम लोग जानते हैं कि वो कारगिल युद्ध का भी हिस्सा रहे हैं. इस बात का खुलासा खुद नाना पाटेकर ने किया था.

कारगिल का हिस्सा थे नाना
नाना पाटेकर ने कारगिल के युद्ध के दौरान कुछ समय के लिए एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था. इसके बाद वो लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में भर्ती हो गए थे. 'द लल्लनटॉप' को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कारगिल युद्ध की एक छोटी सी स्टोरी शेयर थी. उन्होंने कहा- उस वक्त फर्नाडिस साहब थे रक्षा मंत्री. हम युद्ध में जाना चाहते थे. हमने कंमाडो कोर्स पूरा किया था. अच्छे शूटर हैं. नेशनल खेले हुए हैं. हमको मेडल भी मिला हुआ है.

'युद्ध के दौरान हमने वहां फोन किया. हमने कहा कि हमें वॉर में जाना है. वहां से कहा गया कि आप सिविलियन हैं. इसलिए नहीं जा सकते. पर फर्नाडिस साहब हमें जानते थे. फिर उन्होंने हमसे पूछा कि कब जाना है. मैंने कहा कि अभी जाना है. मैं चला गया कारगिल युद्ध में. मैं क्विक रिएक्शन टीम का सदस्य बन गया. इतना सा तो कुछ हम कर सकते हैं देश के लिए. हमारा सबसे बड़ा हथियार बोफोर्स या एके 47 नहीं बल्कि हमारे जवान हैं.'

घटाया था 20 किलो वजन
नाना पाटेकर ने आगे कहा कि 'जब मैं युद्ध में गया था, तब 76 किलो था. जब आया तब 56 किलो का हो गया था. दो महीने में हड्डी पसली कम हो गए थे. पर सच कहें, तो हमको देश के लिए इतना करके बहुत खुशी मिली.' उन्होंने ने ये भी कहा कि अजीत डोभाल उनके लिए भाई सामान हैं. उन्हें दोस्त कहना गलत है. अजीत डोभाल संग उनका रिश्ता बेहद खास और अनोखा है.

नाना पाटेकर ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश के लिए कुछ कर दिखाने का मन बनाया. उन्होंने जो ठाना वो कर दिखाया. आज भले ही नाना हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़े किस्से, कहानियां कभी उन्हें भूलने नहीं देंगे.

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