samacharsecretary.com

नाना पाटेकर की बिहार यात्रा की यादें फिर ताजा, किसानों के बीच उतरे खेत में, जवानों का बढ़ाया हौसला

पटना
 नाना पाटेकर का बिहार से जुड़ा एक खास किस्सा आज फिर याद आ रहा है। जून 2020 में वह दो दिवसीय दौरे पर बिहार पहुंचे थे। पटना एयरपोर्ट से सीधे मोकामा स्थित सीआरपीएफ कैंप पहुंचे थे। यहां उन्होंने शहीदों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

नाना पाटेकर जवानों के बीच आर्मी की वर्दी में भी नजर आए थे। उन्होंने जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया था।

मोकामा में जवान नहीं, किसान के अंदाज में दिखे नाना
नाना का बिहार दौरा सिर्फ सीआरपीएफ कैंप तक सीमित नहीं था। मोकामा के औंटा गांव में उन्होंने किसानों के बीच भी वक्त बिताया था। किसानों से बातचीत की और खेती-किसानी को करीब से समझने की कोशिश की।

एक किसान को खेत में हल चलाते देख नाना खुद भी हल संभालने पहुंच गए थे। ऑक्स से खींचे जा रहे हल को लेकर खेत में उतरे नाना को देखकर वहां मौजूद लोग उत्साहित हो गए। इस दौरान उनकी सादगी और किसानों से जुड़ाव की तस्वीरें खूब चर्चा में आई थीं।

बिहार में जवानों के साथ बिताया यादगार वक्त
मोकामा में आयोजित सीआरपीएफ के कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने जवानों से बातचीत की। वह उनके बीच काफी सहज अंदाज में नजर आए।

उन्होंने अपनी फिल्मों के चर्चित संवाद सुनाकर जवानों का मनोरंजन भी किया। नाना का यह अंदाज वहां मौजूद लोगों को काफी पसंद आया।

वह जवानों के साथ खड़े हुए और उनके काम के प्रति सम्मान जताया। उनकी बिहार यात्रा का यह हिस्सा लंबे समय तक लोगों को याद रहा।

पटना पहुंचे तो सुशांत सिंह राजपूत के परिवार से मिले
बिहार दौरे के दौरान नाना पाटेकर पटना भी पहुंचे थे। उन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के राजीव नगर स्थित घर जाकर उनके पिता केके सिंह से मुलाकात की।

नाना ने सुशांत की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर परिवार के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने परिवार से मुलाकात के बाद मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं की।

उनका यह दौरा उस समय भी काफी चर्चा में रहा था। बिहार से नाना का यह जुड़ाव उनकी संवेदनशील छवि का एक अलग पहलू दिखाता है।

किसानों के मुद्दों पर भी खुलकर बोलते थे नाना
नाना पाटेकर किसानों की समस्याओं को लेकर भी अपनी बात रखते रहे थे। वह किसानों की परेशानियों को सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित करके देखने के पक्ष में नहीं थे।

उन्होंने किसानों को भावनात्मक सहारे और सम्मान की जरूरत पर भी जोर दिया था। सामाजिक मुद्दों पर उनकी बेबाक राय अक्सर सुर्खियों में रहती थी।

बिहार में खेत के बीच उनका हल चलाना भी इसी किसान-केंद्रित सोच से जोड़कर देखा गया। मोकामा का वह दौरा नाना के फिल्मी व्यक्तित्व से अलग उनकी सामाजिक छवि को सामने लाता है।

75 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया।

उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार किरदार निभाए। उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी पहचान अभिनय के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी बनी थी।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here