samacharsecretary.com

रावण के सिंहासन के नीचे क्यों दबे थे शनिदेव? दशहरे पर जानिए पौराणिक कथा

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा आने वाला है. मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का नाश करके देवी सीता को उसकी कैद से आजाद कराया था. इसी उपलक्ष्य में हर साल दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन किया जाता है. इस साल दशहरा 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा. रावण बेहद शक्तिशाली और मायावी असुर था. उसने अपनी शक्तियों और महाविद्याओं का गलत इस्तेमाल कर बड़े योद्धाओं और देवताओं को भी परेशानी में डाल दिया था. खुद न्याय देव शनि भी रावण के मायाजाल का शिकार हो चुके थे.

रामायण से जुड़ी प्रस्तुतियों में क्या आपने कभी रावण के सिंहासन के नीचे एक नीले रंग की मानुष आकृति को देखा है. यह कोई और नहीं बल्कि स्वयं शनि देव हैं. रावण ने अपने अहंकार में इतना चूर हो गया था कि उसने शनि को बंदी बनाकर उन्हें अपने सिंहासन के पास पैरों के नीचे दबाकर रख लिया था. इससे जुड़े एक कथा बहुत प्रचलित है.

कैसे रावण के चंगुल में फंसे शनि?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण तंत्र-मंत्र और ज्योतिष विद्या का जानकार था. रावण ने ब्रह्मा और शिवजी जैसे त्रिलोकी देवताओं को प्रसन्न करके मायावी शक्तियों को हासिल कर लिया था. उसे अपनी शक्तियों पर बहुत अभिमान था. एक बार रावण ने अपने पुत्र की कुंडली देखी तो उसे पता चला की उसके पुत्र की अल्प आयु लिखी है. इससे रावण बेचैन हो उठा. उसने तुरंत अपने पुत्र की कुंडली में ग्रहों की चाल को बदलना शुरू कर दिया. ताकि पुत्र के रास्ते में आने वाली हर बाधा को दूर किया जा सके. उसने सभी ग्रहों को अपने वश में कर लिया था. लेकिन शनि देव एक ऐसे ग्रह थे जो रावण के हिसाब से अपनी चाल नहीं चल रहे थे.

इससे क्रोधित होकर रावण ने शनि देव को बंदी बना लिया और उन्हें अपने सिंहासन के पास पैरों के नीचे दबाकर रखने लगा. इस तरह वह शनिदेव की गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें अपने नियंत्रण में रखना चाहता था. कहते हैं कि जब तक शनि रावण के चुंगल में फंसे रहे, उसके पुत्र पर कभी कोई खतरा नहीं मंडराया.

रावण की कैद से शनि को किसने बचाया?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान जी भगवान राम का संदेश लेकर लंका पहुंचे. तब उन्होंने माता सीता की खोज की. फिर लंका में आग लगाने के शनि को मुक्त कराया. मान्यता है कि जिस कारागार में रावण ने शनि बंद कर रखा था, वहां उसके द्वार पर ही एक शिवलिंग भी स्थापित कर रहा था. ताकि कोई उसे लांघकर बाहर न आ सके. शिवलिंग के प्रति सम्मान के कारण शनि उसके ऊपर पैर रखकर बाहर नहीं आ सकते थे. लेकिन हनुमान जी स्वंय भगवान शिव के 11वें अवतार थे. इसलिए शनि को मुक्त कराने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई.

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here