नई दिल्ली
कच्चे तेल की अधिक कीमतों की वजह से इस समय ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा समय में एक सिलेंडर पर HPCL को 245 रुपये का नुकसान हो रहा है। HPCL के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास कौशल के अनुसार नवंबर में यह नुकसान 327 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध की वजह से यह नुकसान हो रहा है। बता दें, विश्व भर में कई मोर्चे पर जारी युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें इस समय सातवें आसमान पर है। यही वजह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है।
दूसरी तिमाही में एलपीजी पर 500 करोड़ रुपये का नुकसान
एचपीसीएल के एमडी ने कहा कि उन्होंने कहा कि जुलाई से सितंबर के दौरान उन्होंने 500 करोड़ रुपये का नुकसान के साथ एलपीजी सिलेंडर की बिक्री की है। बता दें, मौजूदा समय में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलिय कारपोरेशन और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन ने मार्केट प्राइस से कम की कीमत पर घरेलू सिलेंडर की बिक्री की है। जिसकी वजह से इन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
मौजूदा समय में कंपनियां सिर्फ कच्चे तेल की अधिक कीमतों की वजह से ही नहीं परेशान हैं। माल ढुलाई की बढ़ती लागत का भी असर कंपनियों के बहिखाते पर पड़ रहा है। कंपनी के अनुसार स्वेजमैक्स टैंकर का भाड़ा 9 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। जोकि पहली तिमाही में 4 डॉलर प्रति बैरल था। इन सबके अलावा HPCL मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आपतकालीन खरीद पर विचार कर रहा है।
कितना हुआ है दूसरी तिमाही में नेट प्रॉफिट
एचपीसीएल ने पिछले हफ्ते तिमाही नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी ने दी जानकारी में बताया है कि दूसरी तिमाही में कुल नेट प्रॉफिट 3625.22 करोड़ रुपये रहा है। पहली तिमाही में कंपनी को 12264.67 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ है। बता दें, सालाना आधार पर कंपनी का प्रॉफिट 6.1 प्रतिशत घट गया है। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट (टैक्स भुगतान के बाद) के 3859 करोड़ रुपये रहा था।
कंपनी का रेवन्यू (ऑपरेशंस) से सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 139140 करोड़ रुपये रहा है। इससे पहले पिछले साल कंपनी को 110323 करोड़ रुपये की आय हुई थी।





