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रूस-यूक्रेन से अमेरिका-ईरान तक तनाव पर बोले एस. जयशंकर, कहा- दुनिया मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती

नई दिल्ली
यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि युद्ध कहीं भी हो, इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगती है ऐसे में मूक दर्शक बनकर चुपचाप बैठे नहीं रहा जा सकता है। चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन दिल्ली के कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा, किसी भी संघर्ष को रोकने के लिए बातचीत और कूटनीति ही रास्ता हो सकता है। चाहे वह रूस और यूक्रेन का युद्ध हो या फिर अमेरिका और ईरान का।

उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जब यह कहता है कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान हैं, तो वह वैश्विक भावना को व्यक्त करता है।

जयशंकर ने कहा, ''आतंकवाद शांति के लिए एक और घातक खतरा है। आतंकवाद का इस्तेमाल किसी देश की नीतियों और उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसके पक्ष में कोई तर्क दिया जा सकता है। इसके बावजूद आतंकवाद जारी है, क्योंकि सभी देश इसे बिल्कुल न बर्दाश्त करने का रुख वास्तव में नहीं अपनाते। इतिहास में इतने सबक मिलने के बावजूद कुछ देश अब भी राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।''

उन्होंने कहा कि इसलिए दुनिया को इस साझा खतरे के प्रति अधिक सजग होना चाहिए और आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबला करने के लिए अधिक दृढ़ संकल्प के साथ एकजुट होना चाहिए। जयशंकर ने कहा, ऐसे में आतंकवाद का सामना करने के लिए पूरी दुनिया को और भी दृढ़ता के साथ खड़े होना होगा। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद का खतरा इसलिए बना हुआ है, क्योंकि ''सभी देश इसे बिल्कुल न बर्दाश्त करने की नीति वास्तव में नहीं अपनाते हैं।''

मूक दर्शक नहीं बना जा सकता
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में जब इस तरह की घटनाएं हो रही हों तब मूकदर्शक नहीं बना जा सकता। भारत भी शांति बहाल करने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर अपने प्रयास करता है। बता दें कि इस समय रूस-यूक्रेन. अमेरिका-ईरान के अलावा सऊदी अरब और हूतियों के बीच भी तनाव चरम पर है। हूतियों ने सऊदी अरब की ऑइल रिफाइनरी और एयरपोर्ट को कई बार निशाना बनाया है।

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