भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा दौर आने वाला है जो सब कुछ बदल कर रख सकता है. आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'दंगल' को रिलीज हुए एक दशक पूरा हो चुका है, और तब से लेकर आज तक वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी भारतीय फिल्म बनने का इसका ताज कोई नहीं छीन पाया है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 'दंगल' ने जो सफलता हासिल की थी, उसने दुनियाभर में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था.
अब सबकी निगाहें नितेश तिवारी के निर्देशन में ही बन रही फिल्म 'रामायण: राइज ऑफ लीजेंड' पर टिकी हैं, जो इस साल दिवाली पर दुनियाभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है. क्या यह पौराणिक महाकाव्य 'दंगल' के उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ पाएगा, जो पिछले कई सालों से किसी भी हिंदी फिल्म की पहुंच से बाहर रहा है?
'दंगल' का ऐतिहासिक सफर
दिसंबर 2016 में जब 'दंगल' रिलीज हुई थी, तो देश में ही इसका प्रदर्शन शानदार रहा था और इसने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर करीब 538 करोड़ रुपये बटोरे थे. लेकिन इसकी असली ताकत इसका ग्लोबल मार्केट साबित हुआ, खासकर चीन का बाजार. 'बॉक्स ऑफिस इंडिया' के आंकड़ों के मुताबिक, एक पिता और उसकी बेटियों के कुश्ती के संघर्ष की इस इमोशनल कहानी को चीनी दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया और वहां अकेले इस फिल्म ने लगभग 1,226 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली.
शुरुआत में वैश्विक स्तर पर लगभग 750 करोड़ कमाने वाली यह फिल्म चीन की इस अप्रत्याशित सफलता के दम पर 2,000 करोड़ के क्लब में शामिल हो गई थी. यही वजह है कि 'दंगल' के इस मुकाम को छूना किसी भी फिल्म के लिए एक पहाड़ जैसा टास्क है.
फिल्म धुरंधर ने रचा इतिहास
हाल ही में रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' ने यह साबित कर दिया है कि कोई हिंदी फिल्म 'दंगल' के आंकड़े के कितने करीब आ सकती है. 'सैकनिल्क' के अनुसार, बिना चीन या मिडिल ईस्ट जैसे बड़े बाजारों के रिलीज हुए भी इस फिल्म ने लगभग 1,850 करोड़ रुपये का शानदार वैश्विक कलेक्शन किया. अब रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे बड़े कलाकारों से सजी 'रामायण' के सामने यह एक बेहतरीन मौका है. यह फिल्म किसी एक बाजार पर निर्भर रहने के बजाय 5 नवंबर को सीधे एक इंटरनेशनल थिएट्रिकल रिलीज के रूप में आ रही है, जिसे मेकर्स प्रीमियम फॉर्मेट्स में उतार रहे हैं. अगर शुरुआत से ही इसे दर्शकों का साथ मिला, तो गेम पूरी तरह बदल सकता है.
2,000 करोड़ का भारी-भरकम बजट
लगभग 2,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ बन रही 'रामायण' भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शुमार हो गई है. इतने बड़े निवेश का मतलब है कि फिल्म के लिए केवल बड़ी ओपनिंग मिल जाना ही काफी नहीं है. ट्रेड के नियमों के अनुसार, फिल्म की लागत का लगभग ढाई गुना यानी करीब 5,000 करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य इसके सामने होगा, हालांकि असल मुनाफा नॉन-थिएट्रिकल राइट्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर निर्भर करेगा.
ट्रेड पंडितों का मानना है कि अगर फिल्म दुनिया भर में 200 करोड़ रुपये की शानदार ओपनिंग भी ले लेती है, तो भी असली परीक्षा इसके बाद शुरू होगी, क्योंकि फिल्म को लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिके रहना होगा.
वर्ड-ऑफ-माउथ की अहमियत
बड़े बजट की फिल्मों के साथ जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है, जिसकी मिसाल यश की हालिया फिल्म 'टॉक्सिक' देती है. भारी-भरकम हाइप और उम्मीदों के साथ आने के बावजूद जब फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शकों के रिएक्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. लगभग 450 से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट वाली इस फिल्म का कुल कलेक्शन करीब 340 करोड़ रुपये के आसपास ही सिमट कर रह गया. यह इस बात की साफ चेतावनी है कि सिर्फ मार्केटिंग और चर्चा किसी फिल्म को नहीं बचा सकती, बल्कि पर्दे पर कंटेंट का दम होना सबसे ज्यादा जरूरी है.
क्या वैश्विक दर्शकों से जुड़ पाएगी 'रामायण'?
'दंगल' की सफलता के पीछे उसकी कहानी की वह यूनिवर्सैलिटी थी, जिसमें परिवार, संघर्ष और सपनों की ऐसी भावना थी जिसे किसी सांस्कृतिक संदर्भ की खास जरूरत नहीं पड़ी. वहीं दूसरी तरफ, 'रामायण' की कहानी से भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई हिस्सों के लोग अच्छी तरह परिचित हैं. इसके मूल में सत्य, त्याग, कर्तव्य और न्याय जैसे शाश्वत मूल्य हैं. रामायण ने ताबड़तोड़ कमाई के लिए पूरी स्ट्रैटेजी तैयारी की है. भारत से लेकर विदेशों में प्रचार, विशेष रूप से हॉलीवुड में फिल्म के प्रीमियर जैसे रामबाण फिल्ममेकर्स ने चले हैं.
लेकिन केवल कहानी से परिचय होना इस बात की गारंटी नहीं है कि दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आएंगे. फिल्म की असली सफलता इस बात पर टिकी होगी कि वह इस भव्यता और सांस्कृतिक महत्व को एक ऐसा जादुई और भावनात्मक सिनेमाई अनुभव बना पाती है या नहीं, जो सीधे लोगों के दिलों को छू सके. इसके साथ ही डायरेक्टर नितेश तिवारी के पास भी एक मौका है, जिसमें वो अपनी फिल्म दंगल का रिकॉर्ड, रामायण के जरिए ही तोड़े.





