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ताकसिंग सेक्टर में भारत-चीन सीमा पर तनाव की चर्चा, नक्शों में अंतर और सीमित सड़कें बनीं चिंता

नई दिल्ली अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में स्थित ताक्सिंग एक ऐसा इलाका है, जहां पहुंचना कभी कई दिनों की पैदल यात्रा के बाद ही संभव था. अब यह इलाका भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर चर्चा में है. यहां चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने आने की खबरें सामने आई हैं. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के तत्कालीन महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने भी कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर इस तरह की घटनाएं हुई हैं और ये जारी हैं।  इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने नक्शों, सैटेलाइट तस्वीरों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दूसरी जानकारियों के आधार पर यह समझने की कोशिश की कि इस इलाके में वास्तव में क्या हो रहा है. पड़ताल में तीन बड़ी चुनौतियां सामने आईं- सीमा रेखा को लेकर नक्शों में अंतर, भारत की तरफ सड़कों की कमी और चीन की तरफ बढ़ता बुनियादी ढांचा।  6-7 किलोमीटर घुसपैठ के दावे पर क्या कहती हैं तस्वीरें? कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चीनी सैनिक भारतीय इलाके में 6-7 किलोमीटर तक अंदर आ गए, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह दूरी 40-50 किलोमीटर तक बताई गई. लेकिन इन दावों की पुष्टि के लिए यह जानना जरूरी है कि दूरी किस जगह से मापी गई और वास्तविक सीमा रेखा कहां मानी जा रही है।  अगर 6-7 किलोमीटर की दूरी को मापा जाए, जिसका जिक्र कुछ रिपोर्ट्स में किया गया है, तो दिशा अहम हो जाती है. माजा के उत्तर में ऐसा इलाका है जो 1959 से चीन के कब्जे में है. वहां चीन ने सैन्य मौजूदगी और बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है. इसके दक्षिणी हिस्से की तरफ पुकुरला स्थित है. माजा में भारत के पास सड़कें, हेलीपैड और सैनिक मौजूद हैं।  अगर चीनी सैनिक वास्तव में माजा स्थित भारतीय पोस्ट को पार कर गए होते, तो यह महज आमने-सामने आने की घटना से कहीं गंभीर मामला होता. हालांकि, तस्वीरों और जानकारियों में ऐसा होने का कोई सबूत नहीं मिला. ऐसे में संभावना है कि गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों का सामना पश्चिम में पुकुरला की तरफ या ताक्सिंग के आसपास हुआ हो।  पुकुरला के उत्तर में चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी मौजूदगी और बुनियादी ढांचा बढ़ाया है. इसके मुकाबले भारतीय तरफ कनेक्टिविटी कमजोर है. ताक्सिंग के आसपास पहले चीन की मौजूदगी इतनी आक्रामक नहीं थी और स्थानीय जनजातियों को तीर्थयात्रा के लिए चीन के नियंत्रण वाले इलाके में जाने की अनुमति भी दी जाती थी. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में वहां सीमा पर निगरानी और सख्ती बढ़ने की खबरें आई हैं।  सैटेलाइट तस्वीरों में पूर्वी लद्दाख में 2020 के लंबे गतिरोध जैसी बड़े पैमाने की सैन्य हलचल नहीं दिखी. हालांकि, इस इलाके की कम रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरों और घने हरे भूभाग के कारण छोटे स्तर पर सैनिकों की आवाजाही का पता लगाना मुश्किल है।  भारत और अमेरिका के नक्शों में ही अंतर इस पूरे मामले की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का कोई स्पष्ट नक्शा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. LAC को दोनों देशों के बीच नियंत्रण की एक अवधारणा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसे किसी आधिकारिक नक्शे पर स्पष्ट रूप से अंकित नहीं किया गया है और न ही जमीन पर चिह्नित किया गया है।  अरुणाचल प्रदेश में भारत 1914 के शिमला सम्मेलन में तय मैकमोहन रेखा को चीन के साथ अपनी सीमा मानता है. सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे में इसी रेखा के आधार पर भारत की सीमा दिखाई गई है. लेकिन इस नक्शे में कई जगह ऐसी हैं, जहां भारतीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा भारत की सीमा के बाहर दिखाया गया है।  अमेरिका के जियोग्राफर के नक्शे में भी मैकमोहन रेखा को आधार बनाया गया है, लेकिन वह भी हर जगह सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे से मेल नहीं खाता. ताक्सिंग में सर्वे ऑफ इंडिया का नक्शा कम से कम एक भारतीय सैन्य पोस्ट, निर्माणाधीन सड़क के एक हिस्से और भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्से को भारत की सीमा से बाहर दिखाता है. अमेरिकी नक्शे में ये इलाके भारत में आते हैं, लेकिन दूसरी जगह वह कुछ भारतीय क्षेत्र को चीन की तरफ दिखाता है।  उत्तर-पूर्व में पुकुरला और सबसे उत्तरी हिस्से लॉन्गजू के आसपास भी नक्शों में अंतर है. लॉन्गजू में चीन 1959 से सैन्य मौजूदगी और बुनियादी ढांचा बनाए हुए है. सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ओपनस्ट्रीटमैप भी इन मतभेदों को दूर नहीं कर पाता।  पांच जगह चीनी घुसपैठ का आरोप नाह वेलफेयर सोसाइटी (NWS) ने पांच जगहों पर चीनी घुसपैठ का आरोप लगाया था. इनमें असाफिला का ओयिंग, चुजार्ता का पनियार, मारपन, पोटरांग झील और टिंडिंगटांग शामिल हैं. हालांकि, भारतीय सेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई घुसपैठ नहीं हुई।  ITBP प्रमुख के बयान के बाद भी सीमा पर गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हुई थी. उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनका बयान किसी एक खास घटना के बजाय चीनी सैन्य गतिविधियों के एक पैटर्न की ओर इशारा करता था. दोनों देशों के सैनिक अपने-अपने दावों वाले इलाकों में गश्त करते हैं और इस दौरान आमने-सामने आ सकते हैं. लेकिन ऐसी घटनाओं के बार-बार होने से पूर्वी लद्दाख जैसे लंबे गतिरोध की स्थिति बनने की आशंका फिलहाल दूर की बात लगती है।  भारत के विदेश मंत्रालय ने भी कहा था कि सीमा पर आमने-सामने आने की घटनाएं तब होती हैं, जब चीनी सैनिक तय गश्त के पैटर्न से अलग जाते हैं. वहीं, चीन ने अपनी गश्त को नियमित बताया था।  ताक्सिंग तक पहुंचने के लिए भारत के पास कितनी सड़कें? सीमा पर मौजूदगी बनाए रखने के लिए सड़कें और दूसरी कनेक्टिविटी अहम हैं. ताक्सिंग के आसपास भारत ने कम से कम सात सड़क संपर्कों की योजना बनाई है या उन पर काम किया है. लेकिन इनमें से सिर्फ तामा चुंग चुंग (TCC)-ताक्सिंग सड़क पूरी हुई है।  ताक्सिंग-घोरा कैंप-लुंग ऑपरेशनल पोस्ट (OP) तक 7 किलोमीटर लंबी सड़क का काम 2025 के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद थी. लेकिन सितंबर 2026 में भी सड़क की सतह बनाने के काम के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही थी. अब इसके 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. दिलचस्प बात यह है कि लुंग OP सर्वे … Read more

अभिषेक शर्मा को वनडे टीम में मौका देने की मांग, क्या वर्ल्ड कप में मचाएंगे धमाल?

 नई दिल्ली वेलिंगटन के मैदान पर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले भारतीय युवा ओपनर अभिषेक शर्मा की तूफानी बैटिंग पर दिग्गज लगातार अपनी राय दे रहे हैं. भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने अभिषेक शर्मा के खेल का विश्लेषण करते हुए बड़ा बयान दिया है।  मोहम्मद कैफ का मानना है कि अभिषेक जिस खूंखार अंदाज में टी20 क्रिकेट के महज 6 ओवर के पावरप्ले में विरोधी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ रहे हैं. अगर उन्हें वनडे फॉर्मेट में 10 ओवर का पावरप्ले मिल जाए तो वह मैदान पर ऐसा कोहराम मचाएंगे कि क्रिकेट वर्ल्ड में भूचाल आ जाएगा! मोहम्मद कैफ ने अपने यू-ट्यूब चैनल पर एक चर्चा के दौरान कहा कि अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसी खूंखार जोड़ियां जब मैदान पर उतरती हैं तो विपक्षी कप्तानों के पास सोचने तक का मौका नहीं बचता।  टी20 के शुरुआती 6 ओवरों में जिस तरह से अभिषेक ने दुनिया के बड़े-बड़े गेंदबाजों को आड़े हाथों लिया है और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं, उसे देखकर यह साफ है कि आने वाले समय में जब वह वनडे क्रिकेट खेलेंगे और उन्हें शुरुआती 10 ओवरों का पावरप्ले मिलेगा तो वह गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ा डरावना सपना साबित होंगे।   कैफ ने की कोच गंभीर और अय्यर की तारीफ कैफ के मुताबिक ऐसी बैटिंग देखकर बड़े-बड़े कप्तान और गेंदबाज भी लाचार नजर आते हैं, जैसा कि इस सीरीज में कीवी कप्तान मिचेल सेंटनर की हालत देखने को मिली है. इस दौरान मोहम्मद कैफ ने गौतम गंभीर की कोचिंग और श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया के इस विदेशी दौरे की जमकर तारीफ की।  उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड को उनके घर में जाकर 3-0 से हराना और वो भी इतने एकतरफा अंदाज में कोई आम बात नहीं है. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के तुरंत बाद बिना किसी खास आराम के सीधे न्यूजीलैंड पहुंचकर ऐसी खतरनाक और अनुशासित टीम को धूल चटाना यह साबित करता है कि भारतीय टीम इस समय दुनिया की सबसे खूंखार और डॉमिनेटिंग टीम बन चुकी है।  क्या वर्ल्ड कप में मिलेगा मौका? भारतीय टीम को अगले साल वनडे वर्ल्ड कप खेलना है. मोहम्मद कैफ के इस बयान के बाद इस बात की चर्चाएं तेज हो गई है कि अभिषेक को वर्ल्ड कप में मौका मिलेगा या नहीं? वनडे वर्ल्ड कप के लिए अभिषेक को बैकअप ओपनर के तहत टीम से जोड़ा जा सकता है. अभिषेक शर्मा के पास ऐसी काबिलियत है कि वह अपनी बल्लेबाजी से पावरप्ले में ही मैच का नतीजा तय कर देते हैं। 

DA Hike: केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा फायदा? 12% महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी से समझें वेतन का पूरा हिसाब

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने  केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) में तीन प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इससे 1.17 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों को लाभ होगा। DA और DR में नई बढ़ोतरी एक जुलाई, 2026 से प्रभावी होगी। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीने का एरियर भी मिलने वाला है। इस तरह, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी के साथ आने वाले डीए में कुल 12 पर्सेंट की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। आइए जानते हैं कि केंद्रीय कर्मचारियों को कितना एरियर मिलेगा। उदाहरण से समझें मान लीजिए किसी केंद्रीय कर्मचारी का मूल वेतन ₹18,000 है, तो DA के 60% से बढ़कर 63% होने पर उसे हर महीने ₹540 अतिरिक्त मिलेंगे। चूंकि यह बढ़ोतरी जुलाई महीने से लागू होगी तो कर्मचारी को 4 महीने का एरियर 2160 रुपये मिलेगा। मतलब ये कि केंद्रीय कर्मचारियों के कुल डीए में 12% इजाफा होगा। वहीं, ₹25,000 मूल वेतन वाले कर्मचारी को हर महीने ₹750 का फायदा होगा। ऐसे में कर्मचारी को 4 महीने का एरियर 3000 रुपये मिलेगा। वहीं, ₹50,000 मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी को हर महीने ₹1,500 अतिरिक्त मिलेंगे। ऐसे में 4 महीने का एरियर 6000 रुपये होगा। इसी तरह, पेंशनभोगियों के महंगाई राहत यानी डीआर में भी बढ़ोतरी होगी और उन्हें एरियर मिलेगा। जिस पेंशनभोगी की मूल पेंशन ₹20,000 है, उसे हर महीने ₹600 अतिरिक्त मिलेंगे। इसी तरह, ₹30,000 की मूल पेंशन वाले पेंशनभोगी को हर महीने ₹900 अतिरिक्त मिलेंगे। यह नई दर 1 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी। इसका मतलब है कि पात्र पेंशनभोगियों को इस अवधि के लिए एरियर भी मिलेगा। इस बढ़ोतरी का क्या मतलब है? इस बदलाव से वेतन और पेंशन में महंगाई से जुड़ा हिस्सा बढ़ जाएगा, जिससे सरकार का खर्च भी बढ़ेगा। इससे 1.17 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को फायदा होने की उम्मीद है। इस फैसले से उन परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक मदद मिलेगी, जो केंद्र सरकार के वेतन और पेंशन पर निर्भर हैं। सरकार पर कितना पड़ेगा बोझ महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर हर साल 10,016.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। सरकार ने बताया कि यह बढ़ोतरी सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय फॉर्मूले के अनुसार की गई है। इसका उद्देश्य बढ़ती कीमतों के असर की भरपाई करना है। बता दें कि आठवें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और यह अगले साल अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा।

Harley-Davidson Sprint 440: स्टाइलिश डिजाइन और पावरफुल इंजन के साथ आने वाली है हार्ले की सबसे सस्ती बाइक

नई दिल्ली   दुनिया भर में बाइक लवर्स के बीच जो मुकाम हार्ले-डेविडसन का है वो शायद ही किसी और ब्रांड का हो. भारत में भी हार्ले के प्रसंशकों की कोई कमी नहीं है. लेकिन हार्ले ही बाइक्स हमेशा से ही आम आदमी के लिए आउट ऑफ बज़ट रही हैं. ख़ासकर हार्ले की क्रूजर बाइक्स. लेकिन अब ऐसा नहीं है, हार्ले डेविडसन जल्द ही अपनी सबसे किफायती क्रूजर बाइक 'Harley Sprint 440' को पेश करने की तैयारी में है।  हाल ही में कंपनी ने अपने ग्लोबल वेबसाइट पर इस बाइक का एक टीजर जारी किया था. जिसमें केवल बाइक का शैडो मात्र दिखाया गया था. लेकिन अब लॉन्च से पहले ही इस बाइक की पूरी तस्वीर सामने आ चुकी है. रेडिट पर 'एक्स्ट्रीम अंकित' नाम के एक यूजर ने इस बाइक की एक तस्वीर को शेयर किया है. जिसमें Harley Sprint 440 किसी फैक्ट्री में खड़ी नज़र आ रही है।  दिलचस्प बात ये है कि, बाइक पूरी तरह खुली है और इस पर किसी तरह का कोई कैमोफ्लेज या कवर नहीं है. ये प्रोडक्शन रेडी वर्जन लग रहा है और संभवत: इसे लॉन्च से पहले डिस्पैच करने की तैयारी हो रही है. इस बाइक को हार्ले-डेविडसन और हीरो मोटोकॉर्प द्वारा मिलकर तैयार किया जा रहा है. इसलिए इसकी कीमत बेहद कम रहने की उम्मीद है. संभवत: ये हार्ले के पोर्टफोलियो की सबसे सस्ती क्रूजर बाइक होगी।  कैसा है लुक-डिजाइन  दुनिया भर में बाइक लवर्स के बीच जो मुकाम हार्ले-डेविडसन का है वो शायद ही किसी और ब्रांड का हो. भारत में भी हार्ले के प्रसंशकों की कोई कमी नहीं है. लेकिन हार्ले ही बाइक्स हमेशा से ही आम आदमी के लिए आउट ऑफ बज़ट रही हैं. ख़ासकर हार्ले की क्रूजर बाइक्स. लेकिन अब ऐसा नहीं है, हार्ले डेविडसन जल्द ही अपनी सबसे किफायती क्रूजर बाइक 'Harley Sprint 440' को पेश करने की तैयारी में है।  हाल ही में कंपनी ने अपने ग्लोबल वेबसाइट पर इस बाइक का एक टीजर जारी किया था. जिसमें केवल बाइक का शैडो मात्र दिखाया गया था. लेकिन अब लॉन्च से पहले ही इस बाइक की पूरी तस्वीर सामने आ चुकी है. रेडिट पर 'एक्स्ट्रीम अंकित' नाम के एक यूजर ने इस बाइक की एक तस्वीर को शेयर किया है. जिसमें Harley Sprint 440 किसी फैक्ट्री में खड़ी नज़र आ रही है।  दिलचस्प बात ये है कि, बाइक पूरी तरह खुली है और इस पर किसी तरह का कोई कैमोफ्लेज या कवर नहीं है. ये प्रोडक्शन रेडी वर्जन लग रहा है और संभवत: इसे लॉन्च से पहले डिस्पैच करने की तैयारी हो रही है. इस बाइक को हार्ले-डेविडसन और हीरो मोटोकॉर्प द्वारा मिलकर तैयार किया जा रहा है. इसलिए इसकी कीमत बेहद कम रहने की उम्मीद है. संभवत: ये हार्ले के पोर्टफोलियो की सबसे सस्ती क्रूजर बाइक होगी।  कैसा है लुक-डिजाइन  Harley Sprint 440 के लुक और डिजाइन की बात करें तो बाइक में नया फ्यूल टैंक दिया गया है. इसके साथ ही सिंगल-पीस सीट को इस तरह बनाया गया है कि राइडर की सीट थोड़ी नीचे की तरफ धंसी हुई नजर आती है. पीछे बैठने वाले के लिए सीट का हिस्सा थोड़ा ऊंचा रखा गया है. इसका हैंडलबार भी ऊपर उठा हुआ और राइडर की तरफ मुड़ा हुआ है. ये सभी बदलाव इसे एक ट्रेडिशनल क्रूजर लुक देते हैं।  बाइक के ज्यादातर हिस्सों पर ब्लैक फिनिश देखने को मिलती है. हालांकि, इंजन के मशीनी फिन्स और एग्जॉस्ट पर चमकते हुए हीट शील्ड दिए गए हैं. तस्वीरों में नजर आ रही ब्लैक कलर की बाइक के फ्यूल टैंक पर नारंगी बॉर्डर वाला ग्राफिक्स दिया गया है. इसके बीच Harley-Davidson की बड़ी ब्रांडिंग दिखाई देती है. बाइक के नए साइड पैनल पर Sprint नाम भी लिखा है।  राउंड-शेप हेडलैंप और अलॉय व्हील्स  Sprint 440 के फ्रंट में राउंड-शेप हेडलैंप दिया गया है, जिसके चारों तरफ क्रोम वर्क देखने को मिलता है. इसके इंडिकेटर्स को सिंपल रखा गया है. आगे की तरफ छोटा मडगार्ड मिलता है. ख़ास बात ये है कि बाइक में बड़ा विंडस्क्रीन नहीं दिया गया है, जिससे इसका फ्रंट लुक काफी क्लीन नज़र आता है. हो सकता है कि, कंपनी विंडस्क्रीन को एक्सेसरीज के तौर पर पेश करे।  हार्डवेयर की बात करें तो इसमें आगे की तरफ अपसाइड-डाउन फोर्क्स और पीछे ट्विन शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं. बाइक में अलॉय व्हील्स मिलते हैं, जिनका डिजाइन X440 से मिलता-जुलता है. पहियों पर मशीन फिनिश भी दी गई है. दोनों पहियों में डिस्क ब्रेक मिलते हैं. आगे के पहिये पर ABS सेंसर रिंग भी दिखाई देते हैं।  तस्वीरों के आधार पर कहा जा सकता है कि, इसका व्हीलबेस X440 से लंबा हो सकता है. इसके फ्रंट फोर्क का रेक एंगल भी अलग नजर आता है. फुटपेग्स X440 के मुकाबले थोड़े आगे की तरफ रखे गए लगते हैं. हालांकि, इन्हें बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया गया है और ये इंजन के करीब ही दिखाई देते हैं. इससे बाइक में क्रूजर जैसा लुक देने के साथ सिटी राइड में भी आसानी होगी।  मिल सकते हैं ये फीचर्स नई Harley-Davidson Sprint 440 में हैंडलबार के ऊपर राउंड-शेप इंस्ट्रूमेंट कंसोल दिया गया है. इसका डिजाइन X440 में मिलने वाले कंसोल जैसा दिखाई देता है. इसे राइडर की तरफ थोड़ा झुकाकर लगाया गया है, ताकि चलते समय जानकारी देखना आसान रहे. तस्वीरों में स्विचगियर और ट्रेडिशनल इग्निशन सिस्टम भी नजर आता है।  इंजन और परफॉर्मेंस इंजन और स्पेसिफिकेशन के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन माना जा रहा है कि, कंपनी इसमें Harley-Davidson X440 वाला ही इंजन इस्तेमाल कर सकती है. इस बाइक में 440 सीसी, सिंगल-सिलेंडर, एयर-ऑयल-कूल्ड इंजन मिलने की उम्मीद है. इसके साथ 6-स्पीड गियरबॉक्स दिया जा सकता है. X440 में यह इंजन 27 bhp की पावर और 38 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. हालांकि, Sprint 440 के लिए इंजन को अलग से ट्यून किया जा सकता है।  लॉन्च और प्राइस कंपनी की तरफ से अभी Harley-Davidson Sprint 440 के लॉन्च टाइम लाइन को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन माना जा रहा है कि, कंपनी इसे 3 नवंबर से मिलान, इटली में शुरू होने वाले EICMA मोटरसाइकिल शो में शोकेस कर सकती है. जहां तक प्राइस की बात है तो लॉन्च … Read more

पराली के धुएं से पंजाब की हवा खराब, अमृतसर और तरनतारन में खेत धधके; प्रशासन की सख्ती से मचा हड़कंप

जालंधर  पंजाब में पराली जलाने की 700 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं. इसे लेकर 24 एफआईआर दर्ज की गई है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाए जाने की 700 से ज्यादा घटनाओं को लेकर 24 एफआईआर दर्ज की गई हैं. अधिकारियों की ओर से बताया गया, “पंजाब में धान की कटाई के मौसम के बीच पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए मॉनिटरिंग और कार्रवाई चल रही है.” पीपीसीबी की मंगलवार तक की जिलेवार रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने की कुल 717 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें से, अधिकारियों ने 664 जगहों का निरीक्षण किया और 313 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।  रिपोर्ट में तरनतारन जिले में सबसे अधिक 318 मामले सामने आए. इस जिले में 299 जगहों का निरीक्षण किया गया और 152 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई. रिपोर्ट में बताया गया, “152 मामलों में एनवायरनमेंटल कंपनसेशन लगाया गया; कुल 7.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 2.65 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं. इसके अलावा, 64 केस दर्ज किए गए और 152 खेतों के खिलाफ ‘रेड एंट्री’ (ऑफिशियल खराब रिकॉर्ड) की गईं।  अधिकारियों ने बताया कि अमृतसर में 154 घटनाएं दर्ज की गईं, और 150 जगहों पर जांच के बाद, 75 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई. रिपोर्ट में बताया गया कि 70 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाया गया, जिससे कुल 3.35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 2.85 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं. इसमें दिखाया गया, “इस जिले में 24 एफआईआर दर्ज की गईं, और 57 रेड एंट्री की गईं; इसके अलावा, 186 चेतावनी नोटिस जारी किए गए.” इसके अलावा, फिरोजपुर में 42 घटनाएं, गुरदासपुर में 47 और कपूरथला में 46 घटनाएं दर्ज की गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, “फिरोजपुर में 20 जगहों, गुरदासपुर में 17 और कपूरथला में 15 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।  इस बीच, धान की कटाई का मौसम चल रहा है और पराली जलाने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, इसलिए पूरे पंजाब के किसानों के पास अब फसल के बचे हुए हिस्से को जलाने के बजाय उनके मैनेजमेंट के लिए प्रैक्टिकल समाधान खोजने के लिए एक खास हेल्पलाइन है. क्लीन एयर पंजाब, एयरकेयर सेंटर और सांझ पंजाब से जुड़ी एक पहल, सांझा मित्तर किसान सहायता केंद्र ने एक टेलीफोन हेल्पलाइन +91 79737 27514 शुरू की है, जो सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी।   

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ने के आसार, ट्रंप के आदेश पर 4 दिन में हो सकती है सैन्य कार्रवाई!

वाशिंगटन अमेरिका ईरान पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के 96 घंटे यानी चार दिनों के अंदर अमेरिकी सेना हमला शुरू कर सकती है. 26 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया गया है. अमेरिका के पास हमले के लिए जरूरी सैन्य ताकत मौजूद है. संभावित हमले में ईरान के रडार, मिसाइल लॉन्चर और दूसरे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।  अभी ट्रंप ने हमले का अंतिम आदेश नहीं दिया है. कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप साल के अंत से पहले हमले की मंजूरी दे सकते हैं. इसके लिए 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद का समय अहम माना जा रहा है. इस बीच, इजरायल भी ईरान के खिलाफ अमेरिका के अगले कदम पर नजर रख रहा है।  किन ठिकानों पर हमला कर सकता है अमेरिका? रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की योजना में ईरान के कई सैन्य ठिकाने शामिल हैं. इनमें रडार सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर और दूसरे जरूरी सैन्य ठिकाने हो सकते हैं. इसके अलावा, ईरान के ऊर्जा से जुड़े ठिकानों और परमाणु केंद्रों को भी संभावित निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।  रडार की मदद से दुश्मन के विमानों और दूसरी सैन्य गतिविधियों का पता लगाया जाता है. वहीं, मिसाइल लॉन्चर से मिसाइलें दागी जाती हैं. अगर इन ठिकानों पर हमला होता है, तो ईरान की निगरानी करने और जवाबी हमला करने की ताकत पर असर पड़ सकता है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका किन ठिकानों पर हमला करेगा।  3 नवंबर के चुनाव के बाद बढ़ सकता है तनाव रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप साल 2026 के अंत से पहले ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं. लेकिन यह सिर्फ अधिकारियों का अनुमान है. हमले की कोई तय तारीख सामने नहीं आई है. अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं. इन चुनावों में अमेरिकी संसद के कई सदस्यों को चुना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अधिकारियों को लगता है कि चुनाव के बाद ईरान पर हमले को लेकर फैसला हो सकता है. हालांकि, ट्रंप क्या फैसला लेंगे, यह अभी साफ नहीं है।  इजरायल भी रख रहा नजर ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इजरायल की भूमिका भी अहम हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के कुछ अधिकारी चुनाव के बाद ईरान के साथ सैन्य टकराव की आशंका जता रहे हैं. अगर ट्रंप हमले की मंजूरी देते हैं, तो इजरायल भी अपनी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।  दोनों देशों की ओर से किसी संयुक्त हमले की अंतिम घोषणा नहीं हुई है. अगर अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमला करते हैं, तो पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ सकता है. ईरान जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सैनिकों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है. इससे संघर्ष और बढ़ने का खतरा रहेगा।  फिलहाल, अमेरिकी सेना की तैयारी और हमले का अंतिम फैसला अलग-अलग बातें हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आदेश मिलने पर अमेरिकी सेना 96 घंटे के अंदर कार्रवाई कर सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमला जरूर होगा. अब सबकी नजर ट्रंप के अगले कदम पर है. अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान की प्रतिक्रिया और इजरायल की भूमिका से पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। 

अंतरिक्ष में चीन की रहस्यमयी उड़ान, खुले दरवाजे और जुड़े सैटेलाइट की तस्वीर से बढ़ी दुनिया की दिलचस्पी

वाशिंगटन अंतरिक्ष में चीन के एक गुप्त विमान की साफ तस्वीर सामने आई है. अमेरिका की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) ने अपनी नई रिपोर्ट में यह तस्वीर जारी की है. इसे 28 मई 2024 को अमेरिकी कंपनी वैंटोर के वर्ल्डव्यू-3 सैटेलाइट ने लिया था. चीन के इस विमान का डिजाइन अमेरिका के X-37B स्पेसप्लेन जैसा है. यह ऐसा विमान है, जो अंतरिक्ष में जाने के बाद वापस धरती पर उतर सकता है. हालांकि, चीन इस विमान का इस्तेमाल किस काम के लिए कर रहा है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।  तस्वीर में विमान के पंख, पीछे के दो खड़े हिस्से और सोलर पैनल दिखाई दे रहे हैं. इसके बीच में सामान रखने की जगह है, जिसके दरवाजे खुले हुए हैं. विमान के पिछले हिस्से में एक अलग सैटेलाइट भी जुड़ा हुआ दिखाई देता है. चीन 2020 से अब तक इस तरह के स्पेसप्लेन के चार मिशन लॉन्च कर चुका है. इसका सबसे नया मिशन 7 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया था।  तस्वीर में चीन का स्पेसप्लेन छोटे स्पेस शटल जैसा दिखता है. इसके छोटे पंख हैं. पीछे की तरफ दो खड़े हिस्से हैं. बीच में सामान रखने की जगह बनी है. इसके दरवाजे ऊपर खुलते हैं. विमान के पिछले हिस्से में अलग ढांचा भी लगा है, जिसके दोनों तरफ सोलर पैनल हैं।  वैंटोर के मुताबिक, यह तस्वीर 28 मई 2024 को ली गई थी. उस समय सैटेलाइट और विमान के बीच करीब 90 किलोमीटर की दूरी थी. तस्वीर में विमान के खुले दरवाजे और उससे जुड़ा सैटेलाइट दिखाई दे रहा है. लेकिन यह साफ नहीं है कि विमान के अंदर क्या रखा था।  अमेरिका के X-37B जैसा है विमान चीन के इस स्पेसप्लेन का डिजाइन अमेरिका के X-37B से काफी मिलता है. इस विमान का इस्तेमाल अमेरिकी स्पेस फोर्स करती है. दोनों विमानों को अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है और मिशन पूरा होने के बाद ये वापस धरती पर उतर सकते हैं. X-37B के अब तक आठ मिशन हो चुके हैं. इसका आठवां मिशन 22 अगस्त 2025 को लॉन्च किया गया था. अमेरिका और चीन दोनों अपने इन विमानों से जुड़े कई राज सार्वजनिक नहीं करते हैं।  चीन अब तक चार मिशन लॉन्च कर चुका है चीन ने 2020 से अब तक इस स्पेसप्लेन के चार मिशन लॉन्च किए हैं. इसका पहला मिशन सितंबर 2020 में शुरू हुआ था. इसके बाद 2022 और दिसंबर 2023 में भी इसे अंतरिक्ष में भेजा गया. इसका चौथा मिशन 7 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया था. 28 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह विमान अभी तक धरती पर वापस नहीं लौटा था।  दिसंबर 2023 से सितंबर 2024 तक चले तीसरे मिशन के दौरान इस विमान को अंतरिक्ष में कई छोटी चीजें छोड़ते हुए देखा गया था. इस साल भी इसके मिशन के दौरान कम से कम एक दूसरी चीज छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है. हालांकि, ये चीजें क्या थीं और इनका इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया, यह अभी साफ नहीं है।  शेनलोंग और टेंगयुन पर भी काम कर रहा चीन अमेरिकी एजेंसी की रिपोर्ट में चीन के दो स्पेसप्लेन मॉडल शेनलोंग और टेंगयुन का जिक्र है. लेकिन रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि तस्वीर में दिख रहा विमान इनमें से कौन सा है. चीन के इस विमान को आमतौर पर शेनलोंग के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा, चीन हाओलोंग नाम के एक और स्पेसप्लेन पर काम कर रहा है. इसे चीन के तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन तक सामान पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है।  अंतरिक्ष में क्या काम आते हैं ऐसे विमान? ऐसे विमानों की मदद से सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाया जा सकता है. इनका इस्तेमाल नई तकनीक की जांच करने और दूसरी चीजों को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए भी किया जा सकता है. ये अपना रास्ता बदल सकते हैं और दूसरी अंतरिक्ष वस्तुओं के करीब भी जा सकते हैं।  इनका इस्तेमाल वैज्ञानिक कामों के अलावा सैन्य गतिविधियों और खुफिया जानकारी जुटाने में भी हो सकता है. हालांकि, अभी तक ऐसा कोई पक्का सबूत सामने नहीं आया है कि चीन इस स्पेसप्लेन का इस्तेमाल हथियार के तौर पर कर रहा है. चीन के इस विमान की नई तस्वीर से उसके डिजाइन के बारे में ज्यादा जानकारी मिली है. लेकिन यह विमान अंतरिक्ष में क्या काम कर रहा है. इसका असली मकसद क्या है, इन सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं। 

मॉड्यूलर फर्नीचर की बुकिंग रद्द करने के बाद रकम नहीं लौटाना पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर लगाया जुर्माना

भोपाल  मॉड्यूलर फर्नीचर की बुकिंग रद कराने के बावजूद अग्रिम राशि नहीं लौटाना लिवस्पेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को भारी पड़ गया। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को उपभोक्ता के 25 हजार रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने और मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। इस तरह कंपनी को ब्याज के अतिरिक्त 15 हजार रुपये हर्जाना भी देना होगा। भोपाल के सलैया निवासी प्रतीक सारस्वत ने 25 जुलाई 2025 को लिवस्पेस शोरूम में माड्यूलर फर्नीचर बनवाने के लिए 25 हजार रुपये बुकिंग राशि जमा की थी। उन्हें बताया गया था कि 48 घंटे के भीतर बुकिंग रद कराने पर पूरी राशि बैंक खाते में वापस कर दी जाएगी। उत्पाद और उनकी कीमतें पसंद नहीं आने पर प्रतीक ने अगले ही दिन, 26 जुलाई को बुकिंग रद कर रिफंड मांगा। इसके बावजूद कंपनी ने राशि लौटाने के बजाय 12 अगस्त 2025 को 25 हजार रुपये का गिफ्ट वाउचर जारी कर दिया। रिफंड नहीं मिलने पर प्रतीक ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई और कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा। समाधान नहीं होने पर उन्होंने 26 सितंबर 2025 को जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी अग्रिम राशि नहीं लौटाने के समर्थन में कोई स्पष्ट अनुबंध या संबंधित शर्तें प्रस्तुत नहीं कर सकी। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए रिफंड, ब्याज और मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।

सूर्य ग्रहण 2027 की तारीख हुई तय? जानें कब लगेगा साल का पहला ग्रहण और भारत में इसका असर

 नई दिल्ली साल 2027 में आसमान में कई खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी, जिनमें सूर्य ग्रहण भी शामिल है. सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि यह कब लगेगा, कितनी देर तक रहेगा और क्या भारत में इसे देखा जा सकेगा. धार्मिक मान्यताओं के कारण भी सूर्य ग्रहण की तारीख और सूतक काल के बारे में जानने की उत्सुकता रहती है।  साल 2027 का पहला सूर्य ग्रहण 6 फरवरी, शनिवार को लगेगा. यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार, यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा. इसलिए भारत में इसके समय को लेकर धार्मिक परंपराओं के तहत सूतक मानने का सवाल भी नहीं उठता।  सूर्य ग्रहण 2027 की तारीख और समय राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार, 6 फरवरी 2027 को लगने वाला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारतीय समय के मुताबिक शाम 6 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगा. यह 7 फरवरी की रात 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगा. चूंकि ग्रहण की अवधि आधी रात के बाद तक रहेगी, इसलिए इसकी शुरुआत और समाप्ति अलग-अलग तारीखों में होगी।  तारीख: 6 फरवरी 2027, शनिवार – ग्रहण का प्रकार: वलयाकार सूर्य ग्रहण – शुरुआत: शाम 6:28 बजे – समाप्ति: 7 फरवरी को रात 12:32 बजे – भारत में दृश्यता: नहीं ये समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार हैं.  क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण? जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तो सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक जाता है. इसे सूर्य ग्रहण कहते हैं।  वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता. सूर्य के बाहरी हिस्से का चमकदार घेरा दिखाई देता है, जिसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी आग का छल्ला कहा जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस समय चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है, इस समय आकाश में उसका आकार सूर्य से छोटा दिखाई देता है।  किन देशों में दिखाई देगा पहला सूर्य ग्रहण? 6 फरवरी 2027 का वलयाकार सूर्य ग्रहण दुनिया के कुछ क्षेत्रों में दिखाई देगा. इसकी दृश्यता दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक सीमित रहेगी. भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।  इसलिए भारत में रहने वाले लोग इसे आसमान में नहीं देख पाएंगे. ग्रहण की दृश्यता इस बात पर निर्भर करती है कि पृथ्वी के किस हिस्से से सूर्य और चंद्रमा की स्थिति कैसी नजर आती है।  क्या सूर्य ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू होता है. परंपरागत रूप से इसे ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले माना जाता है. इस अवधि में पूजा-पाठ, भोजन बनाने और खाने से जुड़े कुछ नियमों का पालन किया जाता है।  हालांकि, 6 फरवरी 2027 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. इस दिन सामान्य धार्मिक गतिविधियां और दैनिक कामकाज किए जा सकते हैं।  अगस्त 2027 में भी लगेगा सूर्य ग्रहण साल 2027 में केवल फरवरी में ही नहीं, बल्कि अगस्त में भी सूर्य ग्रहण लगेगा. 2 अगस्त 2027 को दूसरा सूर्य ग्रहण होगा. यह वैश्विक स्तर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत के अलग-अलग हिस्सों से यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।  भारत में इस ग्रहण की दृश्यता शहर के हिसाब से अलग होगी. कुछ क्षेत्रों में सूर्य का छोटा हिस्सा ढका हुआ दिखाई देगा, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में इसका प्रभाव अधिक स्पष्ट हो सकता है. इसलिए अगस्त के ग्रहण को देखने की योजना बनाने वालों को अपने शहर का स्थानीय समय और दृश्यता पहले जांच लेनी चाहिए।  सूर्य ग्रहण देखते समय बरतें सावधानी सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, लेकिन इसे देखते समय आंखों की सुरक्षा बेहद जरूरी है. नंगी आंखों से सूर्य को सीधे देखने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.  – सूर्य ग्रहण देखने के लिए प्रमाणित सोलर फिल्टर या ISO 12312-2 मानक वाले ग्रहण चश्मे का इस्तेमाल करें.  – साधारण धूप वाले चश्मे से सूर्य को देखना सुरक्षित नहीं है.  – कैमरे, दूरबीन या टेलीस्कोप से सूर्य देखने के लिए भी उपयुक्त सोलर फिल्टर जरूरी है.  – ग्रहण को सुरक्षित तरीके से देखने के लिए पिनहोल प्रोजेक्शन जैसी अप्रत्यक्ष विधि अपनाई जा सकती है. 

Punjab School Timing: ठंड और मौसम में बदलाव के बीच स्कूलों के समय में संशोधन, 2 नवंबर से लागू होगा नया टाइम टेबल

चंडीगढ़  पंजाब में ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए 2 नवंबर से स्कूलों के समय में बदलाव किया जाएगा। शिक्षा विभाग के नए शेड्यूल के अनुसार सभी सरकारी, प्राइवेट, एडेड और मान्यता प्राप्त स्कूल सुबह 9 बजे खुलेंगे। प्राइमरी स्कूल दोपहर 3 बजे तक चलेंगे, जबकि मिडिल से सीनियर सेकेंडरी तक के स्कूल दोपहर 3:20 बजे तक लगेंगे। स्कूलों के समय में यह बदलाव 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इसके बाद 1 मार्च से समय में फिर बदलाव किया जाएगा। पंजाब में 19 हजार से अधिक स्कूल हैं, जिन पर यह व्यवस्था लागू होगी। शैक्षणिक सत्र में तीन बार बदलता है समय पंजाब में मौसम के अनुसार शैक्षणिक सत्र के दौरान स्कूलों के समय में तीन बार बदलाव किया जाता है। 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक स्कूल सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक लगते हैं। इसके बाद 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक प्राइमरी स्कूल सुबह 8:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक चलते हैं। वहीं, मिडिल से सीनियर सेकेंडरी तक के स्कूल सुबह 8:30 बजे से दोपहर 2:50 बजे तक लगते हैं। अब 2 नवंबर से नया शेड्यूल लागू होने के साथ सभी स्कूल सुबह 9 बजे खुलेंगे। प्राइमरी स्कूलों में दोपहर 3 बजे और मिडिल से सीनियर सेकेंडरी तक के स्कूलों में दोपहर 3:20 बजे छुट्टी होगी।