samacharsecretary.com

MP में पराली जलाने की घटनाओं में 10% का इजाफा, 2025 के मुकाबले बढ़े मामले

भोपाल धान की कटाई के साथ ही मध्य प्रदेश सहित देश के बड़े राज्यों में पराली के मामले तेजी से बढ़े हैं. मध्य प्रदेश में पिछले 45 दिनों में पराली जलाने के 538 मामले आए हैं. यह पिछले साल के मुकाबले करीबन 10 फीसदी ज्यादा हैं।  पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश पंजाब और राजस्थान के बाद तीसरा राज्य है, जहां इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. प्रदेश में पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को समझाइश के साथ कार्रवाई भी की जा रही है. पंजाब में पिछले 15 दिनों में पराली जलाने के 1339 मामले सामने आ चुके हैं।  प्रदेश के 18 जिले बिगाड़ रहे आंकड़े पराली जलाने से रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा जिला स्तर पर किसानों को समझाइश दी जा रही है. पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय और खेत में पहुंचने वाले नुकसान को लेकर चेताया जा रहा है, साथ ही लगातार कार्रवाई भी की जा रही है. इसके बाद भी प्रदेश के कई जिलों में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस मामले में प्रदेश के 18 जिलों में पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं।  45 दिनों में पराली जलाने के 538 मामले इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में सबसे ज्यादा 53 मामले सामने आए हैं. इसके अलावा अशोक नगर, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, सीहोर, सिवनी, शिवपुरी, उज्जैन विदिशा जिलों में लगातार पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं. पिछले 45 दिनों में इस तरह के 538 मामले सामने आ चुके हैं. जबकि 2025 में इसी समय पराली जलाने के 483 मामले सामने आए थे. हालांकि 2023, 2024 के मुताबिक यह आंकड़े काफी कम हैं. साल 2023 में प्रदेश में 2995 और 2024 में 1780 मामले सामने आए थे।  देश में पंजाब से उठ रहा सबसे ज्यादा धुंआ मध्य प्रदेश सहित देश भर में 15 सितंबर से अभी तक 3071 मामले सामने आ चुके हैं. देश में सबसे ज्यादा पराली जलाने से धुंआ पंजाब से उठ रहा है. पंजाब में 15 सितंबर से 30 अक्टूबर के दौरान पराली जलाने के 1339 मामले सामने आ चुके हैं. 31 अक्टूबर को पंजाब में 292 पराली जलाने के मामने सामने आए हैं।  पंजाब के बाद राजस्थान के आंकडे सबसे ज्यादा हैं. राजस्थान में अभी तक 638 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं. इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर आता है. उधर हरियाणा में 35, उत्तर प्रदेश में 345 और उत्तराखंड में 174 मामले सामने आ चुके हैं. दिन- प्रतिदिन हर राज्य में यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. किसानों को लगातार समझाइश दी जा रही है लेकिन फिर भी पराली जलाने के मामले कम होने की जगह बढ़ते जा रहे हैं। 

पंजाब में पराली विवाद ने पकड़ा तूल, अधिकारी पर हमले के बाद 90 किसानों पर FIR

तरनतारन. पराली और फसली अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं को रोकने के लिए निकले ब्लाक खडूर साहिब में तैनात क्लस्टर अफसर मनिंदर सिंह (भूमि एवं जल संरक्षण अफसर, खडूर साहिब) पर वीरवार को गांव कंग में कुछ व्यक्तियों ने हमला कर गंभीर घायल कर दिया। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। डिप्टी कमिश्नर राहुल सिंधु ने बताया कि मनिंदर सिंह को कंग, होठियां, हंसावाला, भरोवाल, पिंडियां, खख, गोइंदवाल साहिब और मियानी का क्लस्टर अफसर लगाया गया है और उनके अधीन 3 नोडल अफसर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमला करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। खडूर साहिब के एसडीएम संजीव शर्मा ने घायल मनिंदर सिंह का हाल जाना और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। तरनतारन में पराली जलाने के सबसे अधिक मामले पंजाब के तरनतारन जिले में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इसी को लेकर वीरवार को पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 90 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। डिप्टी कमिश्नर ने साफ कहा है कि आग लगाने वालों और ड्यूटी में बाधा डालने वालों पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।

पराली के धुएं से पंजाब की हवा खराब, अमृतसर और तरनतारन में खेत धधके; प्रशासन की सख्ती से मचा हड़कंप

जालंधर  पंजाब में पराली जलाने की 700 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं. इसे लेकर 24 एफआईआर दर्ज की गई है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाए जाने की 700 से ज्यादा घटनाओं को लेकर 24 एफआईआर दर्ज की गई हैं. अधिकारियों की ओर से बताया गया, “पंजाब में धान की कटाई के मौसम के बीच पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए मॉनिटरिंग और कार्रवाई चल रही है.” पीपीसीबी की मंगलवार तक की जिलेवार रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने की कुल 717 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें से, अधिकारियों ने 664 जगहों का निरीक्षण किया और 313 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।  रिपोर्ट में तरनतारन जिले में सबसे अधिक 318 मामले सामने आए. इस जिले में 299 जगहों का निरीक्षण किया गया और 152 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई. रिपोर्ट में बताया गया, “152 मामलों में एनवायरनमेंटल कंपनसेशन लगाया गया; कुल 7.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 2.65 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं. इसके अलावा, 64 केस दर्ज किए गए और 152 खेतों के खिलाफ ‘रेड एंट्री’ (ऑफिशियल खराब रिकॉर्ड) की गईं।  अधिकारियों ने बताया कि अमृतसर में 154 घटनाएं दर्ज की गईं, और 150 जगहों पर जांच के बाद, 75 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई. रिपोर्ट में बताया गया कि 70 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाया गया, जिससे कुल 3.35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 2.85 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं. इसमें दिखाया गया, “इस जिले में 24 एफआईआर दर्ज की गईं, और 57 रेड एंट्री की गईं; इसके अलावा, 186 चेतावनी नोटिस जारी किए गए.” इसके अलावा, फिरोजपुर में 42 घटनाएं, गुरदासपुर में 47 और कपूरथला में 46 घटनाएं दर्ज की गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, “फिरोजपुर में 20 जगहों, गुरदासपुर में 17 और कपूरथला में 15 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।  इस बीच, धान की कटाई का मौसम चल रहा है और पराली जलाने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, इसलिए पूरे पंजाब के किसानों के पास अब फसल के बचे हुए हिस्से को जलाने के बजाय उनके मैनेजमेंट के लिए प्रैक्टिकल समाधान खोजने के लिए एक खास हेल्पलाइन है. क्लीन एयर पंजाब, एयरकेयर सेंटर और सांझ पंजाब से जुड़ी एक पहल, सांझा मित्तर किसान सहायता केंद्र ने एक टेलीफोन हेल्पलाइन +91 79737 27514 शुरू की है, जो सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी।   

किसानों को पराली जलाने से रोकने की पहल, मशीनों की जानकारी के लिए हेल्पलाइन शुरू; पंचायतें सम्मानित

चंडीगढ़  पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए किसानों को अब फोन पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा। क्लीन एयर पंजाब, एयरकेयर सेंटर और सांझ पंजाब से जुड़ी पहल सांझा मित्र किसान सहायता केंद्र ने विशेष टेलीफोन हेल्पलाइन शुरू की है। इसके माध्यम से किसान पराली जलाए बिना फसल अवशेषों का प्रबंधन करने, आधुनिक कृषि मशीनरी की उपलब्धता और उसके इस्तेमाल के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे। हेल्पलाइन नंबर 79737-27514 है। यह सेवा सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक उपलब्ध रहेगी। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय होने के कारण किसानों के सामने पराली प्रबंधन की चुनौती रहती है। समय पर उपयुक्त मशीनरी और सही जानकारी नहीं मिलने से कई बार किसान पराली जलाने का विकल्प चुन लेते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सांझा मित्र के माध्यम से किसानों को किफायती और व्यावहारिक विकल्पों की जानकारी देने की पहल की गई है। किसानों के सवालों का जवाब देगी हेल्पलाइन यह हेल्पलाइन केवल किसानों के सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों और मशीनरी के प्रभावी इस्तेमाल के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जाएगा। किसानों को पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के साथ टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। असर में राज्य जलवायु कार्रवाई की निदेशक सनम ने कहा कि सांझा मित्र को किसानों के साथ संवाद कार्यक्रमों के दौरान सामने आई उनकी जरूरतों और सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। जब तकनीक किसानों की वास्तविक प्राथमिकताओं के अनुरूप होती है, तो उसका प्रभाव अधिक सार्थक होता है। यह मंच किसानों के मोबाइल फोन तक समय पर वैज्ञानिक जानकारी और सहायता पहुंचाकर उनकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत करेगा। पांच गांवों की पंचायतें सम्मानित पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए फतेहगढ़ साहिब जिले के पांच गांवों की पंचायतों को जिला स्तरीय किसान शिविर में सम्मानित किया गया। इनमें धीरपुर, वजीदपुर, बडला, रुड़की और बरोंगा जेर गांव शामिल हैं। इन पंचायतों के प्रयासों की सराहना की गई। सांझा मित्र की यह टेलीफोन सेवा पहले से उपलब्ध व्हाट्सऐप आधारित डिजिटल सहायक की पूरक होगी। इस डिजिटल सहायक को क्लीन एयर पंजाब और एग्री2पावर ने 2,000 से अधिक किसानों के साथ परामर्श के बाद विकसित किया था। इसका उद्देश्य किसानों तक समय पर सही जानकारी और जरूरी सहायता पहुंचाना है, ताकि वे पराली जलाने के बजाय फसल अवशेषों के प्रबंधन के वैकल्पिक तरीके अपना सकें।

चंडीगढ़ में धुएं का स्रोत खोजेंगे ड्रोन और सैटेलाइट, पराली जलाने पर नजर

चंडीगढ़  पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। पंजाब में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, जिससे चंडीगढ़ की पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है। सिटी ब्यूटीफुल में हवा की गुणवत्ता बनी रही और धुआं कहां से आ रहा इसके लिए अब सैटेलाइट के साथ-साथ ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। केंद्र सरकार की संस्था कमीशन फार एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ड्रोन से निगरानी पंजाब के पटियाला से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करेगी। इसके बाद संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा आदि जिलों में ड्रोन से निगरानी की जाएगी। वहीं, हरियाणा में इसकी शुरुआत करनाल से की जा सकती है। आयोग के अनुसार, अक्टूबर में इसकी टीमें पंजाब में मौके पर जाकर निगरानी और समीक्षा भी कर रही हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइ) की संयुक्त टीम सैटेलाइट डाटा के माध्यम से हर दिन आगजनी की घटनाओं पर निगरानी रख रही थी। विशेषज्ञों के अनुसार सैटेलाइट के जरिए रात में होने वाली आगजनी की घटनाओं को सैटेलाइट के जरिए ट्रैक करने में दिक्कत आती है। ऐसे में रात के समय ड्रोन से आगजनी के मामलों की निगरानी होने से आंकड़े और अधिक सटीक होंगे। इसके साथ ही ड्रोन से निगरानी करने के लिए विशेष टीमें भी गठित की जाएंगी। पीजीआई-पीयू की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार 18 तारीख की रिपोर्ट के अनुसार अब तक कुल 599 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें पंजाब में 421, हरियाणा में 178 मामले हैं। पंजाब में पिछले साल के मुकाबले 14.71 प्रतिशत वृद्धि पंजाब में पराली जलाने की 421 और हरियाणा में 178 घटनाएं दर्ज की गईं। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 14.71 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वहीं, हरियाणा में मामलों में 29.08 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके साथ ही (2012-2025) की तुलना में पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 89.59 प्रतिशत और हरियाणा में 88.34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, अक्टूबर के मध्य में घटनाओं में आई तेजी ने पराली प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पराली के धुएं से कमजोर होगी चंडीगढ़ वासियों की सांसों की डोर हर वर्ष की तरह, पंजाब-हरियाणा की पराली का धुआं चंडीगढ़ वासियों के लिए परेशानी का कारण बनने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, पराली और दीवाली के धुएं के कारण शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 के पार पहुंच सकता है। पराली के धुएं में जहरीले तत्व होते हैं, जो आंख, नाक, गले और सांस की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। जहरीली हवा बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चे वाले पराली का धुआं विशेष रूप से नुकसान पहुंचाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई, त्वचा की समस्याएं, आंखों में जलन और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।'

पंजाब में खेतों में गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज, हवा हुई जहरीली, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI गंभीर

पंजाब में फिर धधके खेत, गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI खराब पंजाब में खेतों में गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज, हवा हुई जहरीली, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI गंभीर पंजाब में गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले, हवा की गुणवत्ता हुई खराब, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI खतरनाक स्तर पर अमृतसर  पंजाब सरकार के दावों के विपरीत सूबे में एक बार फिर से खेत धधकने लगे हैं। इस सीजन में अब तक गेहूं के अवशेष जलाने के 44 मामले दर्ज हो चुके हैं। अगली फसल के लिए खेतों को तैयार करने के लिए किसान अवशेष जला रहे हैं जिससे सूबे में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। मंगलवार को मंडी गोबिंदगढ़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 202 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में रहा। वहीं पटियाला, बठिंडा व अमृतसर का एक्यूआई यलो जोन में दर्ज किया गया। बठिंडा का एक्यूआई 155, अमृतसर का 135 और पटियाला का एक्यूआई 106 दर्ज हुआ।  पीपीसीबी के अधिकारियों के मुताबिक विभिन्न विभागों के कर्मचारी व अधिकारी फील्ड में जाकर किसानों को लगातार फसल अवशेष जलाने के नुकसान बता रहे हैं। सख्ती बरतते हुए कार्रवाई भी की जा रही है। अब निगरानी को और सख्त किया जाएगा। खेतों में गेहूं के अवशेष जलाने के मामलों की सेटेलाइट के जरिये 1 अप्रैल से निगरानी शुरू की गई है, जो 30 मई तक चलेगी। सोमवार को इससे संबंधित 14 मामले दर्ज हुए।  एसबीएस नगर में ही आठ, मुक्तसर में छह, फिरोजपुर व कपूरथला में पांच-पांच, बरनाला, गुरदासपुर व पटियाला में तीन-तीन, बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, होशियारपुर, मानसा, संगरूर और मालेरकोटला में एक-एक और जालंधर व लुधियाना में दो-दो मामले सामने आए हैं। साल 2025 में इस समय अवधि के दौरान 87 और 2024 में 49 मामले आए थे। यहां गौरतलब है कि पंजाब में तकरीबन 34 लाख हेक्टेयर रकबे पर गेहूं की बुवाई की गई है और इससे करीब 205 लाख टन भूसा निकलता है। चार मामलों में 20 हजार रुपये जुर्माना पंजाब में खेतों में आग लगाने के मामलों पर रोक लगाने के लिए पीपीसीबी एक्शन में आ गया है। पीपीसीबी ने अब तक चार मामलों में 20 हजार रुपये का जुर्माना किया है, जबकि एक मामले में सेक्शन 223 बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। तीन मामलों में रेड एंट्री की गई हैं। रेड एंट्री का मतलब है कि संबंधित किसान अपनी जमीन न तो बेच पाएंगे और न ही गिरवी रख पाएंगे। बीते दो साल में हाॅट स्पाॅट रहे जिले  जिला            2024       2025 अमृतसर        1015       1102 गुरदासपुर       1335        856 लुधियाना        841         640 फिरोजपुर        919         743 मोगा             788         863 बठिंडा           651         651 तरनतारन        589         700 कपूरथला       514          529   

नरवाई में आग से 1016 जगह प्रभावित, 19 किसानों पर जुर्माना, 852 मामले चिह्नित

भोपाल  नरवाई जलाने वालों की सैटेलाइट से हो रही मॉनीटरिंग में पिछले एक माह में 1016 प्रकरण सामने आए हैं। इनमें से औसतन 15% मामूली आग को हटाते हुए 852 किसानों को चिह्नित किया। नरवाई जलाने वाले 19 किसानों पर प्रशासन ने 57 हजार का जुर्माना भी लगाया है। सैटेलाइट रिपोर्ट की पुष्टि के बाद 852 नरवाई जलाने के मामले में 19 किसानों पर कार्रवाई के बाद शेष पर भी कार्रवाई की तैयारी है। 22 किसानों को एसडीएम स्तर से नोटिस जारी हो चुके हैं। वहीं 133 किसानों के पंचनामे तैयार हैं। नोटिस देकर 2500 से 15 हजार रु. जुर्माने की कार्रवाई होगी। कार्रवाई गलत : मामले में किसानों ने विरोध भी किया था। भाकिसं के प्रांत महामंत्री भारतसिंह बैस ने आरोप लगाया सरकार नरवाई नष्ट करने के उपकरण उपलब्ध कराने के बजाय कार्रवाई कर रही है। यह गलत है। उप संचालक कृषि यूएस तोमर ने बताया सैटेलाइट रिपोर्ट पर कार्रवाई हो रही है। सबसे ज्यादा खाचरौद में 45 पंचनामा, महिदपुर में एक भी नहीं- सैटेलाइट रिपोर्ट के बाद विभागीय स्तर पर 133 पंचनामा में सबसे ज्यादा खाचरौद ब्लॉक में 45 पंचनामे बने हैं, जबकि महिदपुर में एक भी नहीं बना। उज्जैन में 38, तराना में 35, घट्टिया में 10 और बड़नगर में 5 पंचनामा बनाकर टीम ने एसडीएम कार्यालय पहुंचा दिए हैं। यहां से सभी को नोटिस जारी होंगे।

पंजाब ने पराली प्रबंधन में की बड़ी उपलब्धि, 94% कमी आई जलाने की घटनाओं में, मिला स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड

चंडीगढ़  पंजाब सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में अपनाई गई दूरदर्शी रणनीति को बड़ी राष्ट्रीय मान्यता मिली है। राज्य को पर्यावरण श्रेणी में प्रतिष्ठित 'स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड 2025' से नवाजा गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में इस उपलब्धि की जानकारी दी। कृषि मंत्री ने आंकड़ों के जरिए पंजाब की सफलता को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया, "वर्ष 2020-21 में पराली जलाने के 83,002 मामले सामने आए थे, जो 2025-26 के सीजन में घटकर मात्र 5,114 रह गए हैं। यह पंजाब के किसानों की जागरूकता और प्रशासन की रियल-टाइम निगरानी का सुखद परिणाम है।" उन्होंने यह सम्मान उन किसानों को समर्पित किया जिन्होंने धुएं के बजाय मशीनों को चुना। मशीनीकरण पर 600 करोड़ का प्रावधान सरकार फसल अवशेषों को मिट्टी में ही खपाने के लिए मशीनों पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। मंत्री खुड्डियां ने बताया कि इस वर्ष 25,000 नई सी.आर.एम. मशीनों की खरीद के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। अब तक लगभग 13,000 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और 427 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में जारी की जा चुकी है। कृषि विभाग ने मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी है, जहाँ किसान 24 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। सरकार के इस मॉडल ने न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी बढ़ाने में मदद की है।