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नरवाई में आग से 1016 जगह प्रभावित, 19 किसानों पर जुर्माना, 852 मामले चिह्नित

भोपाल  नरवाई जलाने वालों की सैटेलाइट से हो रही मॉनीटरिंग में पिछले एक माह में 1016 प्रकरण सामने आए हैं। इनमें से औसतन 15% मामूली आग को हटाते हुए 852 किसानों को चिह्नित किया। नरवाई जलाने वाले 19 किसानों पर प्रशासन ने 57 हजार का जुर्माना भी लगाया है। सैटेलाइट रिपोर्ट की पुष्टि के बाद 852 नरवाई जलाने के मामले में 19 किसानों पर कार्रवाई के बाद शेष पर भी कार्रवाई की तैयारी है। 22 किसानों को एसडीएम स्तर से नोटिस जारी हो चुके हैं। वहीं 133 किसानों के पंचनामे तैयार हैं। नोटिस देकर 2500 से 15 हजार रु. जुर्माने की कार्रवाई होगी। कार्रवाई गलत : मामले में किसानों ने विरोध भी किया था। भाकिसं के प्रांत महामंत्री भारतसिंह बैस ने आरोप लगाया सरकार नरवाई नष्ट करने के उपकरण उपलब्ध कराने के बजाय कार्रवाई कर रही है। यह गलत है। उप संचालक कृषि यूएस तोमर ने बताया सैटेलाइट रिपोर्ट पर कार्रवाई हो रही है। सबसे ज्यादा खाचरौद में 45 पंचनामा, महिदपुर में एक भी नहीं- सैटेलाइट रिपोर्ट के बाद विभागीय स्तर पर 133 पंचनामा में सबसे ज्यादा खाचरौद ब्लॉक में 45 पंचनामे बने हैं, जबकि महिदपुर में एक भी नहीं बना। उज्जैन में 38, तराना में 35, घट्टिया में 10 और बड़नगर में 5 पंचनामा बनाकर टीम ने एसडीएम कार्यालय पहुंचा दिए हैं। यहां से सभी को नोटिस जारी होंगे।

पंजाब ने पराली प्रबंधन में की बड़ी उपलब्धि, 94% कमी आई जलाने की घटनाओं में, मिला स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड

चंडीगढ़  पंजाब सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में अपनाई गई दूरदर्शी रणनीति को बड़ी राष्ट्रीय मान्यता मिली है। राज्य को पर्यावरण श्रेणी में प्रतिष्ठित 'स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड 2025' से नवाजा गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में इस उपलब्धि की जानकारी दी। कृषि मंत्री ने आंकड़ों के जरिए पंजाब की सफलता को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया, "वर्ष 2020-21 में पराली जलाने के 83,002 मामले सामने आए थे, जो 2025-26 के सीजन में घटकर मात्र 5,114 रह गए हैं। यह पंजाब के किसानों की जागरूकता और प्रशासन की रियल-टाइम निगरानी का सुखद परिणाम है।" उन्होंने यह सम्मान उन किसानों को समर्पित किया जिन्होंने धुएं के बजाय मशीनों को चुना। मशीनीकरण पर 600 करोड़ का प्रावधान सरकार फसल अवशेषों को मिट्टी में ही खपाने के लिए मशीनों पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। मंत्री खुड्डियां ने बताया कि इस वर्ष 25,000 नई सी.आर.एम. मशीनों की खरीद के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। अब तक लगभग 13,000 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और 427 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में जारी की जा चुकी है। कृषि विभाग ने मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी है, जहाँ किसान 24 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। सरकार के इस मॉडल ने न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी बढ़ाने में मदद की है।