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छोटी दिवाली पर स्कूलों में दीप जलाएंगे बच्चे, अभिभावकों के साथ शाम 5 बजे पहुंचेंगे विद्यालय

चंडीगढ़
 दीपावली पर घर-आंगन में दीप जलाने की परंपरा तो हर बच्चे ने देखी और निभाई होगी, लेकिन इस बार हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चे एक ऐसी परंपरा से जुड़ने जा रहे हैं, जो उन्हें त्योहार की खुशियों के साथ अपने विद्यालय के प्रति सम्मान और अपनत्व का भाव भी सिखाएगी।

इस दीपावली पर प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयों में एक दीप विद्यालय के नाम कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके तहत सात नवंबर को (छोटी दीवाली के दिन) शाम पांच बजे विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचेंगे और विद्यालय परिसर में एक दीप जलाकर उसे रोशन करेंगे।

यह पहल बच्चों को भारतीय त्योहारों की सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ उन्हें यह समझाने का भी प्रयास है कि जिस तरह घर हमारे लिए खास होता है, उसी तरह विद्यालय भी हमारी जिंदगी को संवारने वाला दूसरा घर है।

दीपावली केवल दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का संदेश भी देता है। दीपक की छोटी-सी लौ हमें सकारात्मकता, नई ऊर्जा और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। इसी भावना को शिक्षा से जोड़ते हुए हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने यह विशेष पहल की है।

परिषद की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों, खंड शिक्षा अधिकारियों और स्कूल मुखियाओं को कार्यक्रम के आयोजन के निर्देश जारी किए गए हैं। विद्यार्थियों और अभिभावकों को इस पहल का उद्देश्य समझाकर सात नवंबर को शाम पांच बजे विद्यालय पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

एक दीप से जगेगा विद्यालय के प्रति सम्मान और अपनापन
इस आयोजन के पीछे एक खूबसूरत संदेश छिपा है। बच्चे जिस स्कूल में पढ़ना, लिखना, सपने देखना और जीवन के नए सबक सीखना शुरू करते हैं, उसके प्रति भी उनमें सम्मान और आभार का भाव होना चाहिए। विद्यालय में जलाया गया एक दीप इसी भावना का प्रतीक बनेगा।

कार्यक्रम के दौरान स्कूल मुखियाओं को परिसर में दीप जलाने के लिए सुरक्षित और उपयुक्त स्थान निर्धारित करना होगा। सुरक्षा का ध्यान रखते हुए बच्चों और अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

बच्चों को मिलेगा त्योहार मनाने का एक नया अनुभव
इस गतिविधि के जरिये बच्चों को त्योहार मनाने का एक नया अनुभव भी मिलेगा। वे समझेंगे कि परंपराएं केवल घरों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उन्हें समाज, शिक्षा और सामूहिक जीवन से जोड़कर भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

जब बच्चे अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचकर दीप जलाएंगे तो यह आयोजन उनके लिए यादगार अनुभव बनेगा। आखिरकार, दीपावली का असली संदेश भी तो यही है कि रोशनी केवल घरों में नहीं, बल्कि हमारे विचारों, रिश्तों और व्यवहार में भी होनी चाहिए। इस बार हरियाणा के सरकारी स्कूलों में जलने वाला हर दीप इसी संदेश को आगे बढ़ाएगा।

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