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बिहार के शहरों की बदलेगी तस्वीर, हर मोहल्ले में जरूरत के हिसाब से बनेंगे स्कूल, अस्पताल और पार्क

 पटना
बिहार के शहरों में अब विकास का दायरा सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा। शहरों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और दूसरी सामाजिक सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। 

इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग सभी 264 नगर निकायों का शहरी सामाजिक आधारभूत संरचना विकास प्लान बनाएगा। इस काम को प्राथमिकता में करने के लिए निजी एजेंसी का चयन होगा।

साधनों की उपलब्धता का भी आकलन किया जाएगा
नगर विकास एवं आवास विभाग के अनुसार चयनित एजेंसी को सभी शहरों में उपलब्ध सुविधाओं का सर्वेक्षण और जरूरतों का आकलन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी। 

जिसमें देखा जाएगा कि किस शहर और उसके किस इलाके में कौन-सी सुविधा उपलब्ध है और कहां उसकी कमी है। आबादी के अनुपात में स्कूल, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, पार्क, खेल मैदान और मनोरंजन के दूसरे साधनों की उपलब्धता का भी आकलन किया जाएगा। 

सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी प्राथमिकता 
दरअसल, राज्य के शहरों में पिछले कुछ वर्षों में आधारभूत संरचनाओं का विस्तार तो हुआ है, लेकिन इसका असर लोगों के जीवन स्तर पर अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखा है। शहरों में सड़क और दूसरी नागरिक सुविधाओं के साथ सामाजिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाओं की कमी भी सामने आती रही है। इसी को देखते हुए विभाग ने विकास की योजना में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी प्राथमिकता देने का फैसला किया है। 

डीपीआर तैयार करते समय केवल मौजूदा आबादी की जरूरतों को ही आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में शहरों की बढ़ने वाली आबादी का भी अनुमान लगाया जाएगा।

मोहल्लों की जरूरत के हिसाब से विकास योजनाएं
इसके अनुसार भविष्य में कितने स्कूल, अस्पताल, पार्क और अन्य सामुदायिक सुविधाओं की जरूरत होगी, इसका खाका तैयार किया जाएगा। इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य शहरों में स्लम बस्तियों और पाश इलाकों के बीच सुविधाओं की असमानता कम करना भी है। 

अलग-अलग मोहल्लों की जरूरत के हिसाब से विकास योजनाएं बनाई जाएंगी, ताकि शहर के हर तबके को बेहतर जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं मिल सकें। डीपीआर के आधार पर आगे इनके विकास और निर्माण की योजनाएं तैयार की जाएंगी।

 

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