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MP सूचना आयोग में बढ़ता गया मामलों का बोझ, 28 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग; हाईकोर्ट सख्त

जबलपुर
 मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में 28,866 प्रकरण लंबित हैं, जबकि आयोग के स्वीकृत 10 पदों में से पांच रिक्त हैं। अध्यक्ष का पद भी खाली है। इस स्थिति पर हाई कोर्ट ने चिंता जताते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने प्रशांत त्रिपाठी विरुद्ध मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए। कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत जानकारी में बताया गया कि आयोग में वर्तमान में केवल पांच सदस्य कार्यरत हैं। यहां 27,103 द्वितीय अपील और 1,763 शिकायतें लंबित हैं।

180 दिन की वैधानिक समय-सीमा भी बेअसर
हाई कोर्ट ने आदेश में कहा कि पर्याप्त नियुक्तियां नहीं होने से आयोग प्रकरणों का शीघ्र निराकरण नहीं कर पा रहा है। मध्य प्रदेश संशोधन अधिनियम के तहत द्वितीय अपीलों के निराकरण के लिए 180 दिन की वैधानिक समय-सीमा निर्धारित है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।

लंबित मामलों का बोझ कम हो सके
एकलपीठ ने मुख्य सचिव को स्थिति पर गौर कर रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा, ताकि द्वितीय अपीलों का निराकरण हो और लंबित मामलों का बोझ कम हो सके।

60 दिन में तय करनी होगी अपील
इसी मामले में याचिकाकर्ता प्रशांत त्रिपाठी की लंबित द्वितीय अपील पर हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को 60 दिन के भीतर विचार कर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया। इन निर्देशों के साथ याचिका का निराकरण कर दिया गया।

 

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