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सोनपुर के 575 गांवों का बदलेगा नक्शा, अगले 20 साल के विकास के लिए बनेगा मास्टर प्लान

पटना  सोनपुर प्लानिंग एरिया विस्तार के बाद अब इसकी चारों दिशाओं की चौहद्दी भी स्पष्ट हो गई है। इसके दायरे में सात प्रखंडों के 575 राजस्व गांव शामिल किए गए हैं। इनमें मकेर, परसा, दरियापुर, गड़खा, अमनौर, सोनपुर और दिघवारा प्रखंड के गांव आते हैं। सोनपुर नगर परिषद और दिघवारा नगर पंचायत के साथ आसपास के शहरी क्षमता वाले ग्रामीण इलाकों को भी इसमें शामिल किया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार अगले 20 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान बना रही है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों के साथ सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की रूपरेखा तय होगी। विभाग के अनुसार प्लानिंग एरिया के अनुसार उत्तर पूर्वी सीमा मकेर के एकडेरवा मसूरिया और हसनपुरा से शुरू होकर परसा के बलीगांवा और बहलोलपुर दियारा होते हुए दरियापुर के कई गांवों से गुजरेगी। इसके बाद सोनपुर प्रखंड के अकिलपुर, शिकारपुर, सेमारा और बैजलपुर के गांवों को समेटते हुए नगर परिषद सोनपुर तक पहुंचेगी। इसी प्रकार पश्चिम-दक्षिणी सीमा गड़खा के मुरौदपुर और भुईगांव से शुरू होकर दरियापुर के सिसौनी, महेसिया और हरिहरपुर होते हुए अमनौर के नवादा, जोगिनी, रेपुरा, डुमरिया और गेयासपुर तक जाएगी। उत्तर-पश्चिमी सीमा अमनौर के झकरा, अमनौर अगुआन, अमनौर हरनारायण और परसरामपुर से होते हुए मकेर के नौरकरहा, हाजरपुर, बैकुंठपुर और कस्बा मकेर तक फैलेगी। जबकि दक्षिण-पूर्वी सीमा सोनपुर के सबलपुर, पहलेजा, करमचक और लोदीपुर से शुरू होकर दिघवारा के दुधिया, बभनगांवा, पकौलिया, आमी और गोराईपुर होते हुए झौआ गांव तक पहुंचेगी। सरकार का दावा है कि इस निर्णय से 575 गांवों की तस्वीर और तकदीर बदल जाएगी। साथ ही बढ़ती आबादी को अपने अनुरूप यहां आशियाना बनाना भी आसान होगा।

उत्तर प्रदेश में 52 PCS अफसरों की बल्ले-बल्ले, 2012 से 2014 बैच के अधिकारियों को मिला प्रमोशन

लखनऊ दिवाली से पहले यूपी के 52 PCS अधिकारियों को प्रमोशन का तोहफा मिला है. उत्तर प्रदेश शासन ने 7 नवंबर 2026 को 52 PCS अधिकारियों को चयन वेतनमान में प्रमोशन देने का आदेश जारी किया. इन अधिकारियों का ग्रेड पे 6600 रुपये से बढ़ाकर 7600 रुपये कर दिया गया है. यानी अब इन्हें लेवल-12 का फायदा मिलेगा।  इस प्रमोशन का लाभ अधिकारियों को उनके मौजूदा पद पर काम संभालने की तारीख से दिया जाएगा. प्रमोशन पाने वालों में 2012, 2013 और 2014 बैच के PCS अधिकारी शामिल हैं. 2012 बैच के सुशील प्रताप सिंह और रजनीश कुमार मिश्र को भी इसका लाभ मिला है।  2013 बैच में हिमांशु कुमार गुप्ता, राजेश कुमार यादव-I, जुबेर बेग, अमित कुमार भट्ट, ममता मालवीय, राहुल यादव, विनीत कुमार सिंह, अभिषेक कुमार सिंह, सुखवीर सिंह, रामजी मिश्र, शिव प्रताप शुक्ला, वंदना त्रिवेदी, त्रिभुवन, सृष्टि धवन, सुरेंद्र प्रसाद यादव, पूजा मिश्रा, धीरेंद्र प्रताप, सलिल कुमार पटेल, रत्न प्रिया, मुहम्मद मोइनुल इस्लाम, अमिताभ यादव, माया शंकर यादव, गरिमा सिंह, राजेश कुमार-पंचम और अमित कुमार-II शामिल हैं।  वहीं 2014 बैच में अमिताभ रंजन श्रीवास्तव, दिनेश, गौरव श्रीवास्तव, सूर्य कान्त त्रिपाठी, शशि भूषण राय, दीपाली भार्गव, विनय कुमार सिंह-II, अभय कुमार पाण्डेय-II, अमित कुमार, विवेक चतुर्वेदी, सुनील कुमार यादव, ज्योत्सना यादव, शिशिर कुमार, पूर्णिमा सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह-II, वंदिता श्रीवास्तव-II, प्रतिपाल चौहान, मीनू राणा, विकास कुमार सिंह, राजेश कुमार यादव-II, महेंद्र पाल सिंह-II, प्रदीप कुमार-II, सुनीन्द्र सुधाकरन, प्रदीप वर्मा और ललित कुमार को प्रमोशन का लाभ मिला है।  इन पदों पर काम कर रहे हैं अधिकारी इन अधिकारियों की तैनाती प्रदेश के अलग-अलग जिलों और विभागों में है. इनमें अपर जिलाधिकारी, अपर आयुक्त, सचिव, उप निदेशक और अन्य पदों पर काम कर रहे अधिकारी शामिल हैं. शासन के आदेश के अनुसार, 52 अधिकारियों को 6600 रुपये ग्रेड पे वाले लेवल-11 से 7600 रुपये ग्रेड पे वाले लेवल-12 में प्रमोशन दिया गया है. संबंधित विभागों और अधिकारियों को आदेश की जानकारी भेज दी गई है। 

वनटांगिया गांव में सीएम योगी मनाएंगे दीपावली, 82.41 करोड़ के विकास कार्यों की देंगे सौगात

वनटांगियों संग दीपावली की खुशियां साझा करेंगे सीएम योगी कुसम्ही जंगल के वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में हर साल दीपावली मनाते हैं मुख्यमंत्री सांसद के रूप में शुरू किया सिलसिला, मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अनवरत जारी रखी परंपरा वनटांगिया गांव के दीपोत्सव में 82.41 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे सीएम योगी वनटांगिया गांव की बाहरी कनेक्टिविटी के लिए इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का होगा शिलान्यास गोरखपुर  गोरखपुर जनपद मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल के बीच बसे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन के लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की उत्साहपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे हैं। गांव में उल्लास और उमंग का माहौल है। वजह भी खास है। सीएम योगी हर साल इस वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने आते हैं। यहां हर घर में दीपों की रोशनी अपने 'योगी बाबा' के नाम समर्पित होती है। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए प्रशासन अपनी तैयारियों में जुटा है तो गांव के लोग भी अपने घर-द्वार को साफ-सुथरा बनाने, रंग-रोगन करने और सजाने-संवारने में लगे हैं। पूरा गांव मिल-जुलकर अपने प्रिय अतिथि की अगवानी की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री रविवार (8 नवंबर) को एक बार फिर जंगल तिकोनिया नंबर तीन पहुंचकर वनटांगिया परिवारों के साथ दीपोत्सव मनाएंगे और दशकों तक वंचित रहे इस समुदाय के लोगों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करेंगे। इस अवसर पर वह 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। इनमें वनटांगिया गांव की बाहरी कनेक्टिविटी के लिए इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का निर्माण शामिल है। जंगल तिकोनिया नंबर तीन में बतौर सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय के साथ दीपावली मनाने की जो परंपरा शुरू की थी, वह मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अनवरत जारी है। उनकी दीपावली की शुरुआत इसी गांव से होती है। इस बार भी सीएम योगी के आगमन को लेकर गांव का हर व्यक्ति उत्साहित है। प्रशासन के साथ ग्रामीण भी अपने 'बाबा' के स्वागत के लिए घर-आंगन को सजाने-संवारने में जुटे हैं। ऐसा होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि करीब सौ साल तक उपेक्षा और बदहाली का सामना करने वाले वनटांगिया समुदाय को नागरिक का दर्जा दिलाने और समाज व विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों में योगी आदित्यनाथ की अहम भूमिका रही है। वनटांगियों ने बसाया जंगल, लेकिन बना रहा बेदखली का भय ब्रिटिश हुकूमत के दौरान जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं, तब रेलवे स्लीपर बनाने के लिए जंगलों से बड़े पैमाने पर साखू के पेड़ों की कटाई हुई। इसकी भरपाई के लिए अंग्रेज सरकार ने साखू के नए पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के लिए गरीब भूमिहीनों और मजदूरों को जंगल में बसाया। साखू के जंगल विकसित करने के लिए वर्मा देश की 'टांगिया विधि' का इस्तेमाल किया गया। इसी विधि से जंगल में रहकर पौधों की देखरेख करने वाले लोग वनटांगिया कहलाए। कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा में वर्ष 1918 में इनकी पांच बस्तियां बसीं। इसी के आसपास महराजगंज के जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर इनके 18 गांव भी बसे। वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन वनटांगियों का जीवन गुलामी के दौर जैसा ही बना रहा। जंगल बसाने वाले इस समुदाय के पास देश की नागरिकता तक नहीं थी। नागरिकों को मिलने वाली सुविधाएं तो दूर की बात थीं। जंगल में झोपड़ी बनाने के अलावा किसी अन्य निर्माण की अनुमति नहीं थी। पेड़ों के पत्ते तोड़कर बेचने और मजदूरी करने के अलावा आजीविका का कोई दूसरा साधन भी नहीं था। इसके साथ ही वन विभाग की ओर से समय-समय पर जंगलों से बेदखली की कार्रवाई का भय भी बना रहता था। महाराज जी नहीं आते तो बदहाली में ही मर-खप जाते' वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर के सांसद बने। उनके संज्ञान में आया कि वनटांगिया बस्तियों में रहने वाले लोगों का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है। उन्होंने सबसे पहले इन बस्तियों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का संकल्प लिया। इस काम में उनके नेतृत्व वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं एमपी कृषक इंटर कॉलेज और एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ के साथ गोरखनाथ मंदिर की ओर से संचालित गुरु गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा को लगाया गया। जंगल तिकोनिया नंबर तीन वनटांगिया गांव में वर्ष 2003 से शुरू हुए ये प्रयास वर्ष 2007 तक आकार लेने लगे। गांव के रामगणेश बताते हैं कि वनटांगिया समुदाय पूरी तरह उपेक्षित था। वह कहते हैं, 'महाराज जी (योगी आदित्यनाथ को वनटांगिया समुदाय के लोग इसी संबोधन से बुलाते हैं) नहीं आते तो बदहाली में ही मर-खप जाते।' सीएम योगी के संघर्षों का साक्षी है गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ वनटांगिया समुदाय के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी आदित्यनाथ को मुकदमे का सामना भी करना पड़ा। वर्ष 2009 में जंगल तिकोनिया नंबर तीन में योगी के सहयोगी वनटांगिया बच्चों के लिए एस्बेस्टस शीट डालकर एक अस्थायी स्कूल का निर्माण कर रहे थे। वन विभाग ने इस काम को अवैध बताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया। योगी ने अपने तर्कों से विभाग को निरुत्तर किया और अस्थायी स्कूल का निर्माण हो सका। गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से संचालित यह विद्यालय आज भी उनके संघर्षों का साक्षी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वनटांगियों संग दीपोत्सव की परंपरा कायम वनटांगियों को सामान्य नागरिकों की तरह अधिकार दिलाने की लड़ाई शुरू करने वाले योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2009 से इस समुदाय के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू की। इससे पहली बार वनटांगिया समुदाय के लोगों को जंगल से बाहर भी जीवन के नए रंगों का अहसास हुआ। धीरे-धीरे यह सिलसिला परंपरा बन गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ ने इसे जारी रखा। परिस्थितियां कैसी भी रहीं, वनटांगियों के साथ दीपोत्सव मनाने का क्रम नहीं टूटा। वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने के दौरान मुख्यमंत्री बच्चों को मिठाई, कॉपी-किताबें और आतिशबाजी के उपहार देकर पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही बस्ती के लोगों को भी विभिन्न … Read more

Gold Price Prediction: अगले साल तक 20-40% महंगा हो सकता है सोना, जानें कितने रुपये पहुंचेगा भाव

मुंबई  दिवाली पर सोना या कोई अन्य कीमती मेटल खरीदना भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि इसे निवेश और बचत से भी जोड़कर देखा जाता है. इस साल सोने की कीमतें पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि इसकी तेजी अभी थमने वाली नहीं है. अगर विशेषज्ञों के अनुमान सही साबित हुए, तो अगले एक साल में सोने की कीमत 20 से 40 फीसदी तक बढ़ सकती है. यानी दिवाली 2027 तक 10 ग्राम सोने का भाव 1.75 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकता है।  हालांकि, सोने की कीमत रोजाना कई वजहों से बदलती है और इतने कम समय में इसका सही अनुमान लगाना आसान नहीं है. इसके बावजूद सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, सोने में निवेश बढ़ने और ब्याज दरों में संभावित कटौती जैसे वजहों से बाजार में तेजी की उम्मीद बनी हुई है. ऐसे में जो लोग दिवाली के मौके पर सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह समझना जरूरी है कि कीमतों में आगे कितनी बढ़त की संभावना है और इस तेजी के पीछे वजहें क्या हैं।  दिवाली 2027 तक 1.75 लाख रुपये हो सकता है सोना इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सचिव सुरेंद्र मेहता का अनुमान है कि लंबी अवधि में यानी अगले एक साल में सोने की कीमत 30 से 40 फीसदी तक बढ़ सकती है. उनका कहना है कि कम समय में कीमतों की चाल का अनुमान लगाना मुश्किल होता है, लेकिन लंबी अवधि में सोने में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।  वहीं, ऑगमॉन्ट की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनिशा चेनानी के मुताबिक, दिवाली 2027 तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव 10 ग्राम के लिए करीब 1.75 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. फिलहाल इसकी कीमत करीब 1.45 लाख रुपये है. इस हिसाब से इसमें लगभग 20 फीसदी की बढ़त का अनुमान है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत करीब 4,950 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है।  सोने की कीमतों को इन वजहों से मिल सकता है सहारा सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं. पहला, दुनिया के सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं. तीसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 321 टन सोना खरीदा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 42 फीसदी ज्यादा है. इसके अलावा, गोल्ड ETF में सोने की कुल होल्डिंग बढ़कर रिकॉर्ड 4,256 टन पर पहुंच गई है. इससे सोने की मांग को मजबूती मिल रही है।  दूसरा कारण अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं. जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें कम रहती हैं, तो महंगाई को काबू करने में मदद मिल सकती है. इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2027 में ब्याज दरें बढ़ाने के बजाय घटाने का फैसला कर सकता है. ब्याज दरें कम होने पर डॉलर और बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न कमजोर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में निवेशकों के लिए सोना ज्यादा आकर्षक बन सकता है।  चांदी में भी तेजी की उम्मीद सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी तेजी की संभावना जताई जा रही है. बाजार में चांदी की मांग उसकी सप्लाई से ज्यादा बनी हुई है. अनुमान है कि चांदी का बाजार लगातार छठे साल घाटे में रह सकता है. यानी जितनी चांदी की जरूरत है, उतनी सप्लाई उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा, सोने और चांदी की कीमतों के अनुपात से भी चांदी में आगे तेजी की गुंजाइश दिखाई देती है।  हालांकि, सोने और चांदी में निवेश के जोखिम भी हैं. अमेरिका में महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है या फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता है, तो सोने की तेजी पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, रुपये में मजबूती आने से भारत में सोने की कीमतों में बढ़त सीमित हो सकती है. चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव सोने के मुकाबले ज्यादा हो सकता है।  10 साल में करीब 4.77 गुना बढ़ी सोने की कीमत मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो सोने ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है. साल 2016 में दिवाली के आसपास दिल्ली में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 30,590 रुपये थी. 5 नवंबर 2026 तक यह बढ़कर लगभग 1,45,915 रुपये हो गई. यानी इस दौरान सोने की कीमत करीब 4.77 गुना बढ़ गई. अगर किसी ने 2016 में सोने में 1 लाख रुपये लगाए होते और निवेश बनाए रखा होता, तो उसकी कीमत अब करीब 4.77 लाख रुपये हो गई होती।  आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में सोने की कीमत 30.6 फीसदी और 2025 में 61.5 फीसदी बढ़ी. हालांकि, बीच-बीच में कीमतों में गिरावट भी आई. साल 2021 में सोने में करीब 5.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।  सोने में कितना निवेश करना सही? एक्सपर्ट रेनिशा चेनानी के मुताबिक, निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो का 15 से 20 फीसदी हिस्सा सोने में रख सकते हैं. हालांकि, एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करना बेहतर हो सकता है. इसके लिए गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड का विकल्प चुना जा सकता है।  उनकी सलाह है कि गहने पहनने और निवेश करने के मकसद को अलग रखना चाहिए. अगर दिवाली पर परिवार के लिए गहने खरीदने हैं, तो हॉलमार्क वाले गहने खरीदें. वहीं, निवेश के लिए गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड पर विचार किया जा सकता है।   

लक्ष्मी-गणेश की कृपा पाने के लिए दिवाली पर चढ़ाएं मोदक, खीर और बताशे, इन बातों का रखें ध्यान

 Diwali Puja Laxmi Ganesh Bhog List : दिवाली की शाम भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस दौरान उन्हें कई प्रकार के भोग भी लगाए जाते हैं। मान्यता है कि दिवाली के दिन श्रद्धाभाव के साथ लक्ष्मी-गणेश का पूजन करने और उन्हें भोग लगाने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष एक्सपर्ट, वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, हर साल कार्तिक मास की अमावस्या पर जब हम दीपक जलाते हैं, तो पूजा की थाली में रखा नैवेद्य सबसे खास भूमिका निभाता है। ये भोग भगवान के प्रति हमारे भाव और समर्पण का सीधा माध्यम होता है। सही नियमों के साथ लगाया भोग घर के वास्तु और वातावरण दोनों को शुद्ध कर सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को किन-किन चीजों का भोग लगाना चाहिए व इस दौरान किन नियमों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। दिवाली पर भगवान गणेश के भोग     मोदक और बेसन के लड्डू : ज्योतिष एक्सपर्ट, वास्तु गुरु मान्या बताती हैं दिवाली के दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश को मोदक का भोग जरूर लगाना चाहिए। क्योंकि, मोदक उन्हें अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा, आप शुद्ध देसी घी के बने बेसन या बूंदी के लड्डू भी अर्पित कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है।     गुड़ और घी : शुद्ध देसी घी के साथ गुड़ का भोग लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से गणपति बप्पा प्रसन्न होते हैं और गृह क्लेश दूर होता है।     दूर्वा और केला : मिष्ठान के साथ भगवान गणेश को दूर्वा और केले भी जरूर अर्पित करें। कहा जाता है कि गणेशजी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।     शीरा और गुजिया : नारियल से भरी कुरकुरी गुजिया और केसर बादाम से बना सूजी के हलवे का भोग भी आप बप्पा को लगा सकते हैं। दिवाली पर माता लक्ष्मी के भोग खील और बताशे : ये दो चीजें दिवाली का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण भोग है। इसे धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। खीर : माता लक्ष्मी खीर का भोग अत्यंत प्रिय है। ऐसे में आप दिवाली की शाम गाय के दूध, मखाने और केसर से बनी खीर देवी को अर्पित कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक शांति में वृद्धि होती है। सफेद मिठाई : माता लक्ष्मी को दूध से बनी सफे मिठाई जैसे- पेड़ा, नारियल बर्फी, रसगुल्ला आदि अत्यंत प्रिय है। ऐसे में आप दिवाली के दिन इन चीजों का भोग भी लगा सकते हैं। पंचामृत और पंचमेवा : दूध, दही, शहद चीनी और घी से बना पंचामृत व 5 ड्राई फ्रूट पूजा की थाली में जरूर शामिल करने चाहिए। सिंघाड़ा और श्रीफल : जल से उत्पन्न फल जैसे- सिंघाड़ा और नारियल लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है क्योंकि, देवी स्वयं क्षीरसागर से प्रकट हुई हैं। कमलगट्टा और बताशे : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कमल के बीज और ताला बताशे माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं। वास्तु गुरु मान्या बताती हैं कि कमल के बीज माता को उनके निवास स्थान की याद दिलाते हैं। साथ ही, बताशे शुक्र ग्रह को मजबूत करने में सहायक होते हैं। जिससे घर में धन और वैभव का आगमन तेजी से हो सकता है। मिश्री और पान का पत्ता : शुद्ध मिश्री के साथ मखाना चढ़ाने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है। पूजा के अंत में लौंग और सुपारी से सजा हुआ पान का पत्ता माता को जरूर अर्पित करें।  अनार : लाल रंग के ताजे अनार का भोग भगवान गणेश और माता लक्ष्मी दोनों को प्रसन्न कर सकता है। भोग अर्पित करने के महत्वपूर्ण नियम     शुद्धता का पालन : भोग बनाते समय रसोई बिल्कुल साफ होनी चाहिए और इस बात का विशेष ख्याल रखें की भोग बनाते समय उसे चखना नहीं चाहिए।     तुलसी दल के नियम : पूजा के दौरान भूलकर भी माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को तुलसी दल नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, गणेशजी और लक्ष्मीजी दोनों की ही व्यक्तिगत पूजा में तुलसी दल का उपयोग वर्जित होता है। इसलिए दिवाली की रात दोनों देवताओं को बिना तुलसा के शुद्ध और सात्विक भोग ही अर्पित करें।     गंगाजल का छिड़काव : नैवेद्य अर्पित करते समय उसके चारों ओर जल का आचमन जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि अगर पूरी श्रद्धा, स्वच्छता और सही नियमों के साथ लक्ष्मी-गणेश को बताशे का भी भोग लगाने से सालभर घर में रिद्धि-सिद्धि और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।  

Noel Tata छोड़ेंगे वोल्टास के चेयरमैन का पद, 11 नवंबर से कंपनी को मिलेगा नया नेतृत्व

 नई दिल्ली टाटा ग्रुप (Tata Group) की कंपनी वोल्टास (Voltas) के लीडरशिप में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. कंपनी के चेयरमैन नोएल टाटा 11 नवंबर 2026 को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे. उनकी जगह 12 नवंबर से टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और सीईओ सुनील डी'सूजा वोल्टास के नए चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे. हालांकि, नोएल टाटा कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं होंगे. उन्हें चेयरमैन एमेरिटस यानी मानद चेयरमैन बनाया जाएगा।  इतना ही नहीं, कंपनी ने मई 2027 में मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभालने वाले नए उत्तराधिकारी का नाम भी तय कर दिया है. वोल्टास ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया है कि कंपनी के बोर्ड ने नोएल टाटा को 12 नवंबर 2026 से चेयरमैन एमेरिटस नियुक्त करने की मंजूरी दी है. इसका मतलब है कि वह चेयरमैन पद से हटने के बाद भी कंपनी से जुड़े रहेंगे, लेकिन उनकी भूमिका बदल जाएगी. नोएल टाटा साल 2003 से वोल्टास के साथ जुड़े हुए हैं. इससे पहले वह टाटा ग्रुप की दूसरी कंपनियों के बोर्ड से भी हट चुके हैं. इनमें ट्रेंट, टाटा स्टील, टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा इंटरनेशनल शामिल हैं।  70 साल के होने पर छोड़ रहे हैं पद नोएल टाटा का जन्म 12 नवंबर 1956 को हुआ था. वह 12 नवंबर 2026 को 70 साल के हो जाएंगे. कंपनी अधिनियम 2013 (Companies Act 2013) के नियमों के मुताबिक, 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को किसी कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर या होल-टाइम डायरेक्टर के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता और इस उम्र तक पहुंचने के बाद न ही कोई व्यक्ति इस पद पर बना रह सकता है. इसी उम्र सीमा से जुड़े नियमों के चलते नोएल टाटा टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड से हट रहे हैं और उन्हें लीडरशिप पद छोड़ना पड़ रहा है।  कौन हैं नए चेयरमैन सुनील डी'सूजा? सुनील डी'सूजा फिलहाल टाटा ग्रुप की एफएमसीजी (FMCG) कंपनी टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हैं. कंपनी टाटा साल्ट, टाटा टी, टेटली और टाटा संपन्न जैसे ब्रांड के जरिए नमक, चाय, कॉफी, पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थ बेचती है. अब वह 12 नवंबर से वोल्टास के चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।  मई 2027 में कौन संभालेगा MD का पद? वोल्टास में नेतृत्व बदलाव सिर्फ चेयरमैन पद तक सीमित नहीं रहेगा. कंपनी के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर सीपी मुकुंदन मेनन का कार्यकाल 24 मई 2027 को खत्म हो जाएगा. वह टाटा ग्रुप की कार्यकारी निदेशकों के लिए तय रिटायरमेंट पॉलिसी के तहत रिटायर होंगे. उनकी जगह कंपनी के मौजूदा रूम एयर कंडीशनर कारोबार के प्रमुख जयंत बालन जिम्मेदारी संभालेंगे. बोर्ड ने उन्हें 25 मई 2027 से पांच साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने की मंजूरी दी है।  वोल्टास में कब-कब होंगे बड़े बदलाव?     तारीख                                   बदलाव 11 नवंबर 2026          नोएल टाटा चेयरमैन पद से रिटायर होंगे 12 नवंबर 2026          सुनील डी'सूजा नए चेयरमैन बनेंगे 12 नवंबर 2026          नोएल टाटा चेयरमैन एमेरिटस बनेंगे Advertisement 24 मई 2027              सीपी मुकुंदन मेनन का कार्यकाल खत्म होगा 25 मई 2027              जयंत बालन पांच साल के लिए MD बनेंगे निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव? वोल्टास में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, दोनों पदों के लिए उत्तराधिकारी तय होने से कंपनी में नेतृत्व बदलाव की प्रक्रिया साफ हो गई है. निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि नए चेयरमैन सुनील डी'सूजा और आने वाले मैनेजिंग डायरेक्टर जयंत बालन के नेतृत्व में कंपनी की रणनीति और कारोबार की दिशा कैसी रहती है. खासकर एयर कंडीशनर कारोबार में कंपनी की आगे की योजनाओं पर बाजार की नजर रहेगी। 

मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की नई पहल, 8 टाइगर रिजर्व में गठित होंगे बफर वनमंडल

 भोपाल  प्रदेश में वन्यजीवों के बेहतर प्रबंधन के लिए टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बफर वनमंडल गठित किया जाएगा। अभी केवल कान्हा टाइगर रिजर्व में बफर वनमंडल गठित है। प्रदेश के अन्य आठ टाइगर रिजर्व में इसके गठन की प्रक्रिया चल रही है।इसको लेकर वन बल प्रमुख रहते वीएन अम्बाड़े ने इसी वर्ष जनवरी में प्रदेश के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को पत्र लिखा था, तब से गठन की प्रक्रिया लंबित रही। अब एक बार फिर इसको लेकर प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें अलग से डीएफओ पदस्थ किया जाएगा। प्रबंधन में होगी आसानी इसका मुख्य उद्देश्य कोर क्षेत्र के आस-पास के गांवों, राजस्व भूमि और जंगलों में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के विकास व पर्यटन को सुचारू रूप से संचालित करना है। कान्हा को छोड़कर वर्तमान में अन्य आठ टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के जंगल अलग-अलग क्षेत्रीय सामान्य वनमंडलों के अधीन बिखरे हुए हैं। बफर वनमंडल के गठन के बाद, पूरा क्षेत्र सीधे टाइगर रिजर्व के बफर के डीएफओ के एकीकृत प्रबंधन के अधीन होगा। इससे कोर और बफर क्षेत्रों में सुरक्षा और समन्वय मजबूत होगा। ग्रासलैंड विकसित किए जाएंगे यह संवेदनशील मुख्य क्षेत्र को बाहरी इंसानी गतिविधियों और रिहायशी दबाव से बचाने के लिए एक प्रोटेक्टिव लेयर (सुरक्षात्मक परत) का काम करेगा। बफर वनमंडल में वन्यजीवों के लिए घास के मैदान (ग्रासलैंड) विकसित किए जाएंगे और कृत्रिम व प्राकृतिक पानी के स्रोत बनाए जाएंगे, ताकि शाकाहारी वन्यजीव और बाघ कोर एरिया से बाहर रिहायशी क्षेत्रों की तरफ न जाएं। अनूठी इको-टूरिज्म सफारी के लिए प्रसिद्ध कान्हा कान्हा टाइगर रिजर्व का बफर वनमंडल अपनी अनूठी इको-टूरिज्म सफारी के लिए प्रसिद्ध है। मानसून के समय जब मुख्य कोर एरिया बंद रहता है, तब भी बफर जोन की सफारी पर्यटकों के लिए खुली रहती है।     वन्यप्राणी प्रबंधन की समस्याएं व चुनौतियां बढ़ रही हैं। कोर का एक ही डीएफओ होता है, जिससे बेहतर प्रबंधन नहीं हो पाता है। इसलिए कान्हा की तर्ज पर बफर वनमंडल का गठन कर अलग से डीएफओ की पदस्थापना करने की आवश्यकता है। इसको लेकर मैंने वन मुख्यालय में रहते मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को पत्र भी लिखा था। – वीएन अम्बाड़े, मप्र के सेवानिवृत्त वन बल प्रमुख।