samacharsecretary.com

एमपी हाईकोर्ट की युगलपीठ ने संस्कृति जैन को सजा के मामले में लगाई रोक, भोपाल नगर निगम कमिश्नर को मिली राहत

 जबलपुर
 मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति हैं को अवमानना की दोषी पाए जाने के आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, आज न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सजा के प्रश्न पर सुनवाई होनी थी। निगमायुक्त को अपना पक्ष देखने हाजिर रहने कहा गया था। किन्तु इससे पूर्व ही युगलपीठ में आवेदन दायर कर निगमायुक्त जैन ने सजा पर रोक की मांग कर दी।

गुरुवार को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए नगर निगम, भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने साफ किया था कि नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। लिहाजा, आयुक्त को सजा के प्रश्न पर अपना पक्ष रखना होगा। इस सिलसिले में शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे से सुनवाई नियत की गई थी।

मई 2025 में जारी किया गया था नोटिस

दरअसल, यह मामला मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने 18 नवंबर, 2025 को उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को विहित प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था। सात नवंबर, 2024 को दी गई अनुमति निरस्त की जा चुकी थी। 14 मई, 2025 को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 2025 में जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को नैसर्गिक न्याय सिद्यांत अनुरूप न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया, न ही सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके स्थान पर सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो अवैधानिक है।
आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि बिना शर्त माफी के साथ तोड़े गए हिस्से को बहाल किया जाता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था। लेकिन नगर निगम आयुक्त ने अदालत में स्पष्ट किया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।

हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) के तहत दोषी ठहराया है। इस मामले में शुक्रवार, छह फरवरी को सुबह 10:30 बजे सजा के बिंदु पर सुनवाई निर्धारित की गई थी। किन्तु निगमायुक्त ने अपना बचाव सीजे की अध्यक्षता वाली बेंच पहुंचकर कर लिया।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here