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भारत-ब्राजील रिश्तों में बड़ा मोड़! राष्ट्रपति लूला की यात्रा से खुलेंगे सहयोग के नए दरवाज़े

नई दिल्ली
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने पुष्टि की है कि वह फरवरी में आधिकारिक दौरे पर भारत आएंगे। भारत यात्रा के बाद वह अमेरिका जाएंगे, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति लूला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि भारत और दक्षिण कोरिया की यात्राओं के बाद फरवरी में वॉशिंगटन में मुलाकात होगी, जिसकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी। भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति लूला के नई दिल्ली में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन में भी भाग लेने की संभावना है।
इससे पहले इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति लूला के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा आने वाले वर्ष में इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि और जन-से-जन संपर्क सहित द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सुधारित बहुपक्षवाद के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति लूला को शीघ्र भारत आने का आमंत्रण भी दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में ब्राजील का दौरा किया था। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचा विकास, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यूपीआई, पारंपरिक चिकित्सा, योग, खेल, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की थी।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने, भारत-मर्कोसुर प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट के विस्तार और अगले पांच वर्षों में व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा करते हुए, हाइड्रोकार्बन और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश की व्यापक संभावनाओं पर भी सहमति बनी।
इसके अलावा, महत्वपूर्ण खनिज, नई और उभरती प्रौद्योगिकियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटर, डिजिटल सहयोग और मोबिलिटी जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा हुई।

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