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पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल ने इंग्लैंड की आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने की रणनीति की आलोचना की

नई दिल्ली  ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल ने भारत के खिलाफ ड्रॉ हुई टेस्ट श्रृंखला के दौरान इंग्लैंड की आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने की रणनीति की आलोचना करते हुए कहा, ‘सकारात्मक क्रिकेट का मतलब लापरवाह क्रिकेट नहीं है।'  चैपल ने अपने कॉलम में युवा भारतीय टीम की अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रशंसा की, वहीं इंग्लैंड के खिलाड़ियों, विशेषकर हैरी ब्रुक की आलोचना की, क्योंकि वे परिस्थितियों को समझने में विफल रहे। भारत के पूर्व मुख्य कोच चैपल ने कहा, ‘इस श्रृंखला में इंग्लैंड का सफर उसके सामने चेतावनी पेश करता है। इसे प्रतिभाशाली लेकिन चंचल प्रकृति के हैरी ब्रुक ने मूर्त रूप दिया, जिनकी मैं पहले सार्वजनिक रूप से प्रशंसा कर चुका हूं।'  उन्होंने कहा, ‘उनकी टाइमिंग बहुत अच्छी है। वह कई तरह के शॉट लगा सकते हैं। उनमें आत्मविश्वास है और बल्लेबाजी को सहज बनाने का दुर्लभ कौशल है। लेकिन क्रिकेट, विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट, केवल शॉट लगाने के बारे में नहीं है। यह निर्णय लेने के बारे में है। टेस्ट क्रिकेट में यह समझना जरूरी होता है कि कब आक्रामक होकर खेलना है और कब संयम बरतना है।'  लंदन में पांचवें टेस्ट के चौथे दिन सोमवार को इंग्लैंड ने 374 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय तीन विकेट पर 301 रन बना लिए थे लेकिन 26 वर्षीय ब्रूक के आउट होने से उसकी टीम लड़खड़ा गई और उसे 6 रन से हार का सामना करना पड़ा। चैपल ने कहा, ‘सकारात्मकता में कुछ भी ग़लत नहीं है। लेकिन सकारात्मक क्रिकेट का मतलब लापरवाह क्रिकेट नहीं है। इसका मतलब है आत्मविश्वास से भरा, सोच-समझकर जोखिम उठाना।'   

शिंगणापुर का चमत्कारी शनि मंदिर

भारत में सूर्यपुत्र शनिदेव के कई मंदिर हैं। उन्हीं में से एक प्रमुख है महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर। विश्व प्रसिद्ध इस शनि मंदिर की विशेषता यह है कि यहां स्थित यहां पर शनि महाराज की कोई मूर्ति नहीं है बल्कि एक बड़ा सा काला पत्थर है जिसे शनि का विग्रह माना जाता है और वह बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर के चबूतरे पर विराजित है। शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए देश विदेश से लोग यहां आते हैं और शनि विग्रह की पूजा करके शनि के कुप्रभाव से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। माना जाता है कि यहां पर शनि महाराज का तैलाभिषेक करने वाले को शनि कभी कष्ट नहीं देते। शनि मराहाज के शिंगणापुर पहुंचने की कहानी बड़ी ही रोचक है। सदियों पहले शिंगणापुर में खूब वर्षा हुई। वर्षा के कारण यहां बाढ़ की स्थिति आ गई। लोगों को वर्षा प्रलय के समान लगने लग रही थी। इसी बीच एक रात शनि महाराज एक गांववासी के सपने में आए, शनि महाराज ने कहा कि मैं पानस नाले में विग्रह रूप में मौजूद हूं। मेरे विग्रह को उठाकर गांव में लाकर स्थापित करो। सुबह इस व्यक्ति ने गांव वालों को यह बात बताई। सभी लोग पानस नाले पर गए और वहां मौजूद शनि का विग्रह देखकर सभी हैरान रह गये। गांव वाले मिलकर उस विग्रह का उठाने लगे लेकिन विग्रह हिला तक नहीं, सभी हारकर वापस लौट आए। शनि महाराज फिर उस रात उसी व्यक्ति के सपने में आये और बताया कि कोई मामा भांजा मिलकर मुझे उठाएं तो ही मैं उस स्थान से उठूंगा। मुझे उस बैलगाड़ी में बैठाकर लाना जिसमें लगे बैल भी मामा-भांजा हों। अगले दिन उस व्यक्ति ने जब यह बात बताई तब एक मामा भांजे ने मिलकर विग्रह को उठाया। बैलगाड़ी पर बिठाकर शनि महाराज को गांव में लाया गया और उस स्थान पर स्थापित किया जहां वर्तमान में शनि विग्रह मौजूद है। इस विग्रह की स्थापना के बाद गांव की समृद्घि और खुशहाली बढ़ने लगी शिंगणापुर के इस चमत्कारी शनि मंदिर में स्थित शनिदेव का विग्रह लगभग पांच फीट नौ इंच ऊंचा व लगभग एक फीट छह इंच चैड़ा है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आकर शनिदेव के इस दुर्लभ विग्रह का दर्शन लाभ लेते हैं। यहां के मंदिर में स्त्रियों का शनि विग्रह के पास जाना वर्जित है। महिलाएं दूर से ही शनिदेव के दर्शन करती हैं। सुबह हो या शाम, सर्दी हो या गर्मी यहां स्थित शनि विग्रह के समीप जाने के लिए पुरुषों का स्नान कर पीताम्बर धोती धारण करना अत्यावश्क है। ऐसा किए बगैर पुरुष शनि विग्रह का स्पर्श नहीं पर सकते हैं। प्रत्येक शनिवार, शनि जयंती व शनैश्चरी अमावस्या आदि अवसरों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस हेतु यहां पर स्नान और वस्त्रादि की बेहतर व्यवस्थाएं हैंखुले मैदान में एक टंकी में कई सारे नल लगे हुए हैं, जिनके जल से स्नान करके पुरुष शनिदेव के दर्शनों का लाभ ले सकते हैं। पूजनादि की सामग्री के लिए भी यहां आसपास बहुत सारी दुकानें हैं, जहां से पूजन सामग्री लेकर शनिदेव को अर्पित कर सकते हैं। मंगलकारी हैं शनिदेव: आमतौर पर शनिदेव को लेकर हमारे मन में कई भ्रामक धारणाएं हैं। जैसे कि शनिदेव बहुत अधिक कष्ट देने वाले देवता हैं वगैरह-वगैरह, लेकिन वास्तविक रूप मे ऐसा नहीं है। यदि शनि की आराधना ध्यानपूर्वक की जाए तो शनिदेव से उत्तम कोई देवता ही नहीं है। शनि की जिस पर कृपा होती है उस व्यक्ति के लिए सफलता के सारे द्वार खुल जाते हैं। शिंगणापुर की विशेषता: गौरतलब है कि कि शिंगणापुर के अधिकांश घरों में खिड़की, दरवाजे और तिजोरी नहीं है। दरवाजों की जगह यदि लगे हैं तो केवल पर्दे। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां चोरी नहीं होती। कहा जाता है कि जो भी चोरी करता है उसे शनि महाराज उसकी सजा स्वयं दे देते हैं। गांव वालों पर शनिदेव की कृपा है व चोरी का भय ही नहीं है शायद इसीलिये दरवाजे, खिड़की, अलमारी व शिंगणापुर मे नही है। कई मुख्य स्थानो से शिंगणापुर की दूरी:- शिर्डी से शिंगणापुर की दूरी -70 किमी नासिक से शिंगणापुर की दूरी -170 किमी औरंगाबाद से शिंगणापुर की दूरी -68 किमी अहमद नगर से शिंगणापुर की दूरी -35 किमी।  

जेल से छूटते ही किया शक्ति प्रदर्शन, पुलिस ने दोबारा भेजा जेल

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय में आदतन बदमाश दुर्गेश महंत को जमानत में रिहा होते ही जुलूस निकलना उस वक़्त मंहगा पड़ गया। जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया। रायगढ़ पुलिस ने तत्काल एक्शन में आते हुए उसे दोबारा जेल भेज दिया है। उक्त मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के मुताबिक, दुर्गेश महंत 22 साल ने करीब तीन माह पूर्व थाना जूटमिल क्षेत्र के मारपीट में जेल में निरुद्ध था। हाल ही में उसे जमानत मिली थी, जिसके बाद उसने अपने साथियों के साथ शहर की सड़कों पर जुलूस निकाला। वीडियो से शहरवासियों और पीड़ित परिवार में आक्रोश की स्थिति बन गई। सोशल मीडिया में वीडियो वाइरल होते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के निर्देश में कोतवाली थाना प्रभारी सुखनंदन पटेल सायबर सेल टीम के साथ आरोपी को पकड़ा और थाने लाकर पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि वह जमानत पर रिहा होने के बाद शहर में जुलूस निकाल रहा था। कोतवाली पुलिस ने धारा 170 BNSS एवं धारा 126, 135(3) BNSS के तहत मामला दर्ज करते हुए उसे एसडीएम न्यायालय में पेश किया, जहां से आरोपी को पुनः कल शाम जिला जेल भेज दिया गया।पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले तत्वों पर भविष्य में भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।  

बिलासपुर में बरसात का इंतज़ार, भीषण गर्मी ने बढ़ाई चिंता

बिलासपुर सावन की विदाई से पहले बिलासपुर में सूरज जमकर कहर बरपा रहा है। मंगलवार को तापमान बढ़कर 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 4.7 डिग्री अधिक रहा। राज्य का सबसे गर्म शहर बनने के साथ न्यायधानी उमस और तपिश से बेहाल रही। मानसून ब्रेक के चलते बारिश की स्थिति शून्य रही, जिससे राहत की उम्मीद भी धूमिल हो गई। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में आंशिक बदलाव के संकेत दिए हैं। न्यायधानी में सूरज सिर चढ़कर बोला और धूप की चुभन ने आमजन को घरों में कैद कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.7 डिग्री अधिक था। यह तापमान इस सीजन का रिकार्ड बन गया, जिसने बिलासपुर को प्रदेश का सबसे गर्म शहर बना दिया।     शहर अधिकतम न्यूनतम     बिलासपुर 35.0 डिग्री सेल्सियस 26.4 डिग्री सेल्सियस     पेंड्रारोड 31.4 डिग्री सेल्सियस 21.6 डिग्री सेल्सियस     अंबिकापुर 32.9 डिग्री सेल्सियस 23.6 डिग्री सेल्सियस     माना 33.4 डिग्री सेल्सियस 26.5 डिग्री सेल्सियस     जगदलपुर 33.9 डिग्री सेल्सियस 24.5 डिग्री सेल्सियस सावन के अंतिम सप्ताह में इस तरह की भीषण गर्मी ने लोगों को हैरान कर दिया। वातावरण में बढ़ी नमी के कारण उमस और अधिक बढ़ गई, जिससे छांव भी बेअसर रही। दिनभर आसमान पूरी तरह साफ रहा और सूर्य की किरणें सीधे सिर पर पड़ीं। पूरे जिले में वर्षा नहीं हुई, जिससे मौसम और ज्यादा भारी हो गया। अरुणाचल की ओर मानसून द्रोणिका मौसम विभाग के अनुसार मानसून द्रोणिका का पूर्वी सिरा अरुणाचल प्रदेश की ओर खिसक गया है। इसे मानसून ब्रेक की स्थिति कहा जाता है। इस कारण प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना बनी हुई है। कुछ इलाकों में वज्रपात की चेतावनी भी जारी की गई है। गर्मी ने बदली लोगों की दिनचर्या बिलासपुर में बढ़ती तपिश और उमस ने जनजीवन को प्रभावित किया है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और अधिकांश लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते दिखे। छोटे बच्चों को घरों में ही रहना पड़ा, वहीं ऑफिसों में उपस्थिति भी प्रभावित हुई। शहर में बिजली कटौती की शिकायतें भी सामने आईं, जिससे पंखे और कूलर बेअसर नजर आए। आमजन को राहत की उम्मीद अब संभावित बारिश पर टिक गई है।

भजनलाल सरकार का रक्षाबंधन गिफ्ट: महिलाएं दो दिन कर सकेंगी फ्री सफर

जयपुर रक्षाबंधन के अवसर पर राजस्थान सरकार ने महिलाओं को एक बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के बाद 9 और 10 अगस्त को प्रदेश की सभी साधारण और नॉन-एसी श्रेणी की रोडवेज बसों में महिलाओं और बालिकाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। यह योजना केवल राजस्थान राज्य की सीमा के भीतर यात्रा करने वाली महिलाओं पर लागू होगी। एसी, वॉल्वो और ऑल इंडिया परमिट वाली बसें इस योजना से बाहर रखी गई हैं। गौरतलब है कि यह योजना कई साल से चलाई जा रही है लेकिन अब तक इसे एक दिन ही चलाया जा रहा था लेकिन इस साल यह सुविधा दो दिन के लिए दी जा रही है। राजस्थान रोडवेज के प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि हर साल रक्षाबंधन पर यह योजना चलाई जाती है, जिसे इस बार भी सरकार ने मंजूरी दी है। इस साल करीब 8.5 लाख महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा और सरकार पर 14 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। महिलाओं को यात्रा के समय अपना कोई वैध पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी साथ रखना अनिवार्य होगा। पहचान की पुष्टि के बिना योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जयपुर में आयोजित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि यह रक्षाबंधन की भावना को सशक्त करने वाला निर्णय है।

सरगुजा कोठीघर में चोरों की घुसपैठ, पीतल की हाथी मूर्ति ले उड़े चोर

अंबिकापुर सरगुजा राजपरिवार के कोठीघर परिसर से लगभग 15 किलो वजनी पीतल की हाथी की मूर्ति चोरी कर ली गई। यह स्थल, सरगुजा पैलेस से लगा हुआ है। कोठीघर के ठीक सामने मुख्य सड़क गुजरी है। सीसी कैमरे में घटना कैद हुई है। सीसीटीवी कैमरे की एक युवक चोरी कर वापस जाता नजर आ रहा है। चोरी की घटना रविवार 3 अगस्त को मध्यरात्रि के बाद हुई है। सीसी कैमरे के फुटेज के आधार पर पुलिस अब आरोपित की पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। सरगुजा राजपरिवार का निवास कोठीघर के नाम से जाना जाता है। यह सरगुजा पैलेस से लगा हुआ है। राजपरिवार के लोग जब आते हैं तो वे कोठीघर में रहते हैं। इसका निर्माण कई साल पहले पैलेस के क्षतिग्रस्त होने के बाद कराया गया था। पूर्व उप मुख्यमंत्री सिंहदेव का निवास तपस्या है। वे कोठीघर में भी रहते हैं। जोड़े मे से एक हाथी उठा ले गया बता दें कि कोठीघर के एक हिस्से का उपयोग वर्षो तक सरगुजा जिला कांग्रेस कार्यालय के रूप में किया जाता रहा है। हाथी के जिस पीतल की वजनी मूर्ति की चोरी हुई है, वह दो वर्ष पहले लगाई गई थी, जब कोठीघर का नए सिरे से मरम्मत और निर्माण कराया गया था। कोठीघर में प्रवेश के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने पोर्च के दोनों ओर पीतल के दो हाथी की मूर्ति रखी गई थी। इसमें एक हाथी नजर नहीं आने पर सीसी कैमरों को खंगाला गया तो चोरी का पता चला। पुराने पैलेस की तरफ से आया चोर कोठीघर के प्रबंधक राज सोनी ने कोतवाली थाने में चोरी की शिकायत दर्ज कराई। सीसी कैमरों में आए फुटेज से स्पष्ट है कि चोर पुराने पैलेस की ओर से कोठीघर परिसर में आया। जहां सामने पोर्च में दोनों ओर लगी हाथी की पीतल की मूर्तियों में से एक को निकालकर अपने साथ ले गया। मूर्ति की कीमत लगभग 40 हजार थी। पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव इन दिनों विदेश प्रवास पर हैं। राजपरिवार के कोई सदस्य वर्तमान में यहां नहीं है।

इमरजेंसी मिशन बना काल: मेडिकल विमान क्रैश में किसी की नहीं बची जान

वाशिंगटन  अमेरिका के उत्तरी एरिजोना के नवाजो नेशन में मंगलवार को एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने और फिर उसमें आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने एक बयान में यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह चिकित्सीय परिवहन विमान था जिसमें बीमार, घायल या जरूरतमंद मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था। न्यू मेक्सिको के अल्बुर्क की सीएसआई विमानन कंपनी से संबंधित यह विमान चिनले के हवाई अड्डे के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में चिकित्साकर्मी सवार थे और वे एक मरीज को लेने अस्पताल जा रहे थे। संघीय विमानन प्रशासन के अधिकारियों ने एक ईमेल में बताया कि विमान दोपहर में हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें बताया गया कि राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड और एफएए मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के कारण का पता नहीं चल पाया है। नवाजो नेशन के शीर्ष नेता बुउ न्यग्रेन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस हादसे के बारे में जानकर उन्हें दुख हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘ये वे लोग थे जिन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और नवाजो नेशन में उनकी कमी हमेशा खलेगी।''   

दिल्ली समेत पूरे देश में बिजली बिल में बढ़ोतरी तय, सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त अनुमति

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली में बिजली की दरें बढ़ाने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उन बकाया भुगतानों से जुड़ा है, जो बिजली वितरण कंपनियों को सरकार से मिलने थे। क्या हैं सुप्रीम कोर्ट की शर्तें? सुप्रीम कोर्ट ने बिजली की कीमतें बढ़ाने की मंजूरी देते हुए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। कोर्ट ने कहा कि बढ़ोतरी Reasonable and Affordable होनी चाहिए। इसके अलावा कीमतें दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) द्वारा तय की गई सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने DERC को एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह बताया जाए कि बिजली की दरें कैसे, कब और कितनी बढ़ाई जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार ये बढ़ी हुई दरें सभी तरह के उपभोक्ताओं – व्यक्तिगत, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक  पर लागू होंगी। अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा असर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ सकता है। दरअसल यह मामला बिजली वितरण कंपनियों के Regulatory assets के बकाया भुगतानों को लेकर था। कोर्ट ने सभी लंबित भुगतानों को अगले चार साल के भीतर चुकाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि जिन राज्यों में लंबे समय से ये भुगतान अटके हुए हैं, वहां भी आने वाले चार सालों में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। नियामक परिसंपत्तियों का मतलब उन बकाया भुगतानों से है, जो बिजली वितरण कंपनियां राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली सप्लाई के बदले मांगती हैं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता सेनानी सर सुरेंद्रनाथ बनर्जी को दी श्रद्धांजलि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान स्वतंत्रता सेनानी सर सुरेंद्रनाथ बनर्जी की 100वी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए वैचारिक ज्योति प्रज्ज्वलित करने वाले सर बनर्जी ने इंडियन नेशनल एसोसिएशन की स्थापना सहित अनेक अभूतपूर्व कार्य किए। उनके प्रयासों से ब्रिटिश शासन की दमनकारी व्यवस्था बेनकाब हुई। सर बनर्जी का निधन 6 अगस्त 1925 को हुआ था।

कुबेरेश्वर धाम में फिर दो श्रद्धालुओं की मौत, कांवड़ यात्रा के दौरान कहर बरपा रही गर्मी

सीहोर कुबेरेश्वर धाम में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान बुधवार को दो और श्रद्धालुओं की मौत की खबर सामने आई है। मृतकों की पहचान चतुर सिंह 50 वर्ष पिता भूरा, निवासी पांचवल गुजरात और ईश्वर सिंह 65 वर्ष निवासी रोहतक हरियाणा के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, चतुर सिंह की मृत्यु कुबेरेश्वर धाम परिसर में अचानक खड़े-खड़े चक्कर आने और गिरने से हुई, वहीं ईश्वर सिंह होटल के सामने खड़े थे, जब वे अचानक गिर पड़े और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।   दो महिला श्रद्धालुओं की मौत इससे पहले मंगलवार को भी दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। अब उनकी पहचान जसवंती बेन 56 वर्ष पत्नी चंदू भाई निवासी ओम नगर, राजकोट गुजरात और संगीता गुप्ता 48 वर्ष पत्नी मनोज गुप्ता निवासी फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश के रूप में की गई है। चारों मौतों की वजह अत्यधिक भीड़, गर्मी और अव्यवस्था मानी जा रही है। श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच गई है, जिसके चलते प्रशासन के लिए स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है। इसके अलावा सुनीता 50 वर्ष निवासी जमनानगर हरियाणा घायल हो गई। निर्देश के बाद भी सिविल सर्जन गायब 6 अगस्त को निकलने वाली कांवड़ यात्रा में देशभर से लाखों लोग पहुंचे हैं, ऐसे में जिला अस्पताल में स्वास्थ्य अमला तो दूर, दो बजे सिविल सर्जन भी अस्पताल में नहीं मिले। अपनी मां का इलाज करने पहुंचे ईश्वर ने बताया कि वह इंदौर से आए हैं, लेकिन जिला अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं मिली। जब वह 2.30 बजे सिविल सर्जन को शिकायत करने पहुंचे तो पता चला कि वह अस्पताल में नहीं है।