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BJP की हरियाणा रणनीति: अक्टूबर में होगा मंत्रियों का रिव्यू, वन स्टेट-वन इलेक्शन पर फोकस

चंडीगढ़
 हरियाणा में विधानसभा चुनाव में हारी 42 सीटों पर अगले चुनाव में कमल खिलाने के लिए भाजपा पूरी रणनीति के साथ जुट गई है। मिशन-2029 की तैयारियों को धार देने के लिए हर क्षेत्र के लिए अलग रणनीति तैयार की जा रही है। संगठनात्मक मजबूती, जनता से सीधा संवाद और हारी हुई सीटों पर रणनीति, इन्हीं तीन बिंदुओं पर मिशन-2029 की नींव रखी जा रही है।

भाजपा नेताओं ने मंगलवार को चंडीगढ़ और पंचकूला में एक के बाद एक कई बैठकें की। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडौली और संगठन मंत्री फणीन्द्रनाथ शर्मा ने अलग-अलग बैठकों की कमान संभाली। प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पुनिया, डॉ. अर्चना गुप्ता और कृष्ण कुमार बेदी भी इन बैठकों में शामिल हुए।

सबसे पहले सुबह मुख्यमंत्री आवास पर जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों और पार्टी पदाधिकारियों की पहली बैठक हुई। इस बैठक में हाल ही में संपन्न जिला कार्यकारिणी की बैठकों की समीक्षा की गई और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल की रणनीति पर चर्चा हुई।

हरियाणा भाजपा के प्रदेश महामंत्री व कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, डॉ. अर्चना गुप्ता और सुरेंद्र पूनिया की मौजूदगी में हुई बैठक में तय किया गया कि जनता तक सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को और प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए, ताकि पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर पर और मजबूत हो सके।

हारे हुए नेताओं को भी बुलाया

इसके बाद भाजपा ने उन 42 नेताओं को बुलाया जो 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर हार चुके थे। इनमें पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता जैसे दिग्गज भी शामिल रहे।

इस बैठक का मकसद मिशन-2029 के तहत उन सीटों पर विशेष रणनीति बनाना है, जहां भाजपा को पिछली बार झटका लगा था। मुख्यमंत्री और संगठन पदाधिकारियों ने इन नेताओं से फीडबैक लिया और चुनावी समीकरणों पर गहन मंथन किया। पार्टी का मानना है कि यदि इन सीटों पर पुख्ता तैयारी की जाए तो आने वाले चुनावों में भाजपा का ग्राफ दोबारा ऊपर उठ सकता है।

भाजपा इन सीटों पर शेडो प्रभारी नियुक्त कर चुकी है। दोपहर तीन बजे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विधायकों से मुलाकात कर उनके क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों पर चर्चा की। इसके बाद शाम को मंत्रियों के साथ बैठक में विभागीय कार्यों, प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं की समीक्षा की गई। छठी बैठक पंचकूला में मन की बात कार्यक्रम की हुई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री शामिल हुए।
बड़े लक्ष्य को साधने की तैयारी

राजनीतिक हलकों में भाजपा की इन बैठकों को बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर भाजपा अपने घर को दुरुस्त करने में जुटी है तो दूसरी ओर विपक्षी दलों की नजर भी इन बैठकों पर टिकी हुई है। यह स्पष्ट है कि हरियाणा की राजनीति में आने वाले दिनों में भाजपा अपनी रणनीति और जमीनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए आक्रामक तेवर अपनाएगी। भाजपा की तैयारी बड़े लक्ष्य को साधने की है।
17 सितंबर से दो अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा

विधानसभा चुनाव में हारे भाजपा प्रत्याशियों की बैठक के बाद पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा। जिन विधानसभा सीटों पर हार हुई हैं, उनमें कोई प्रतिनिधि न रहने के कारण विकास में कमी न आ जाए, इसके लिए बैठक में कार्ययोजना बनाई गई। उन्होंने ऐसी बैठकों की पहल के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को साधुवाद दिया है।

हारी हुई सीटों पर विशेष ध्यान

बीजेपी ने अपनी पिछली हार से सबक लेते हुए उन 42 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। इन सीटों का जिम्मा पहले ही 12 मंत्रियों और 30 विधायकों को सौंपा जा चुका है। बैठक में मुख्यमंत्री ने इन प्रभारियों से जमीनी स्तर का फीडबैक लिया और उन्हें निर्देश दिए कि वे हारे हुए प्रत्याशियों के साथ मिलकर संगठन को मजबूत करें। पार्टी की रणनीति स्पष्ट है: हर महीने इन सीटों की समीक्षा की जाएगी, ताकि 2029 तक पूरी तैयारी के साथ चुनाव लड़ा जा सके।

पार्टी का लक्ष्य केवल हारी हुई सीटों को जीतना ही नहीं, बल्कि जीती हुई सीटों पर भी अपनी पकड़ मजबूत करना है। इसलिए, हर सीट के लिए अलग रणनीति तैयार की जा रही है। पार्टी ऐसे नए चेहरे भी तैयार करेगी जो विरोधी दलों के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे सकें।
मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड और संगठनात्मक मजबूती

संगठनात्मक स्तर पर भी बीजेपी ने कमर कस ली है। प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने बताया कि जिला कार्यकारिणी की बैठकें हो चुकी हैं और अब 23, 24 और 25 अगस्त को 377 मंडलों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में विकास कार्यों और मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर भी चर्चा होगी।

पार्टी ने सभी मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड बनाने का भी फैसला किया है। इस रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा अक्टूबर में की जाएगी, जब सरकार को एक साल पूरा हो जाएगा। इस समीक्षा का उद्देश्य यह देखना होगा कि किस मंत्री के विभाग में जनहित के कितने काम हुए हैं और उनकी सक्रियता कितनी है। इससे पार्टी को न केवल सरकार की कार्यप्रणाली का आकलन करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी तय हो पाएगा कि कौन से नेता जनता के बीच कितने प्रभावी हैं।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' की तैयारी

केंद्र सरकार की 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की योजना के मद्देनजर, बीजेपी की यह तैयारी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह रणनीति इस बात का संकेत देती है कि पार्टी हर परिस्थिति के लिए तैयार है, चाहे चुनाव कभी भी हों। संगठनात्मक स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं की ड्यूटी लगाकर और उनके रिपोर्ट कार्ड बनाकर, पार्टी अपनी पूरी मशीनरी को सक्रिय और जवाबदेह बनाना चाहती है।

यह योजना न केवल हरियाणा में बीजेपी की स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि पार्टी हर सीट पर जीत के लिए एक मजबूत और समन्वित रणनीति के साथ मैदान में उतरे। 

 

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