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भारतीय पेट्रोलियम निर्यात में बूम! स्पेन बना नया केंद्र, 46,000% की जबरदस्त छलांग

नई दिल्ली
एक तरफ यूरोपीय देशों ने रूस के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, वहीं दूसरी तरफ रूसी तेल के बिना उनकी ईंधन की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं. इसलिए वे दूसरे देशों से रिफाइन किया हुआ तेल मंगाना पड़ रहा है. इसका बड़ा फायदा भारत को हुआ है. भारत से स्पेन को होने वाले पेट्रोलियम निर्यात में इस साल जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. सितंबर 2025 में भारत ने स्पेन को जितना रिफाइंड पेट्रोलियम भेजा, वह पिछले साल की तुलना में लगभग 46,000 प्रतिशत ज्यादा रहा. और गौर करने वाली बात ये है कि भारत के पास कच्चा तेल रूस से ही आ रहा है.

बता दें कि पिछले साल सितंबर में भारत ने स्पेन को सिर्फ 1.1 मिलियन डॉलर का पेट्रोलियम निर्यात किया था, जबकि इस साल सितंबर में यह आंकड़ा 513.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया. महीने-दर-महीने की तुलना करें तो बढ़ोतरी 61,000 प्रतिशत से भी ज्यादा है.

मनीकंट्रोल की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेजी का सीधा असर यह हुआ कि भारत का स्पेन को कुल निर्यात भी सितंबर में 151 प्रतिशत बढ़ गया. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि भारत के रिफाइनर अब दक्षिण यूरोप और इबेरिया क्षेत्र में ईंधन की बढ़ती मांग का फायदा उठा रहे हैं, खासकर एविएशन फ्यूल और मिड-डिस्टिलेट्स (जैसे डीजल और केरोसिन) की मांग के कारण.

यूरोप की योजना- 2027 तक LNG के आयात पर भी बैन

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय संघ (EU) ने ऐलान किया है कि जनवरी से वे ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का आयात पूरी तरह रोक देंगे, जो रूसी कच्चे तेल से बने हैं. भले ही उन्हें किसी तीसरे देश (जैसे भारत) में प्रोसेस किया गया हो. रूस पर युद्ध के चलते अमेरिका और यूरोपीय संघ लगातार नए प्रतिबंध लगा रहे हैं. हाल ही में अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों, Rosneft और Lukoil, पर अंतरराष्ट्रीय लेन-देन रोक दिया था, जबकि यूरोपीय संघ ने रूसी LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के आयात पर भी 2027 से पूरी तरह रोक लगाने की योजना बनाई है.

भारत अभी भी अपनी रिफाइनिंग जरूरतों के लिए काफी हद तक रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है. रूस भारत को कुल तेल जरूरतों का लगभग 34 प्रतिशत तेल सप्लाई करता है, जबकि 2022 में यूक्रेन युद्ध से पहले यह हिस्सा केवल 0.2 प्रतिशत था.

सवाल है कि आखिर स्पेन ही क्यों?

दरअसल, पहले भारत से अधिकतम रिफाइंड तेल नीदरलैंड्स को जाता था, जो यूरोप का मुख्य वितरण केंद्र माना जाता है. लेकिन अब वहां पर नियम सख्त हो गए हैं और रूसी तेल से बने ईंधन पर प्रतिबंधों की वजह से भारतीय कंपनियां जोखिम से बचते हुए अपना माल सीधे उन देशों को भेज रही हैं जहां उसकी असल में जरूरत है, जैसे कि स्पेन और नीदरलैंड्स, दोनों मिलकर भारत के यूरोपीय ईंधन निर्यात का लगभग पूरा हिस्सा लेते हैं. सितंबर 2025 में स्पेन ने भारत से सबसे ज्यादा जो चीज आयात की, वह पेट्रोलियम उत्पाद थे. उसके बाद लोहा-इस्पात और मोटर वाहन रहे. पिछले साल सितंबर या इस साल अगस्त तक पेट्रोलियम उत्पाद स्पेन के शीर्ष 50 आयातों में भी नहीं थे, लेकिन अब वे पहले स्थान पर पहुंच गए हैं.

यह बदलाव साफ दिखाता है कि भारत की यूरोपीय ईंधन व्यापार नीति अब उत्तरी यूरोप के वितरण केंद्रों से हटकर सीधे दक्षिण यूरोप के बाजारों की ओर मुड़ रही है. हालांकि, भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का कुल निर्यात यूरोपीय संघ में इस साल सितंबर में 3.6 प्रतिशत घट गया, लेकिन पूरे विश्व में भारत का पेट्रोलियम निर्यात 14.8 प्रतिशत बढ़ा है.

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