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जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड में सीरीज के दौरान नंबर एक गेंदबाज होने के मानकों पर खरे नहीं उतरे: इरफान पठान

नई दिल्ली  भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज में सिर्फ तीन मैच खेले थे। कार्यभार प्रबंधन के कारण दो टेस्ट मैचों में जसप्रीत बुमराह नहीं खेले थे। तीन टेस्ट खेलने के बावजूद वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले चौथे गेंदबाज रहे। हालांकि सीरीज के दौरान वह कुछ पारियों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके और विकेट लेने के लिए जूझते नजर आए और इसी वजह से भारत के पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने कहा है कि जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड में सीरीज के दौरान नंबर एक गेंदबाज होने के मानकों पर खरे नहीं उतरे।   पूर्व भारतीय क्रिकेटर से कमेंटेटर बने इरफान पठान ने कहा है कि जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड में सीरीज के दौरान नंबर एक गेंदबाज होने के मानकों पर खरे नहीं उतरे। जसप्रीत बुमराह ने पांच मैचों की टेस्ट के तीन मैच में 5 पारियों में 14 विकेट लिए। बुमराह ने तीन टेस्ट में 119.4 ओवर डाले। चौथे टेस्ट में मैनचेस्टर में उन्होंने अपने करियर में पहली बार 100 से ज्यादा रन दिए। इरफान ने कहा कि भले ही उनका नाम सम्मान बोर्ड पर दर्ज हो गया, लेकिन वह नंबर एक गेंदबाज की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। इरफान पठान ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, ''ईमानदारी से कहूं तो जब वह खेलते हैं, तो उन्होंने प्रदर्शन किया है। उन्होंने पांच विकेट हॉल लिया और उसका नाम लॉर्ड्स के सम्मान बोर्ड पर दर्ज हो गया। लेकिन जब आप नंबर वन गेंदबाज हो, उनसे नंबर एक लेवल के प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है और मुझे लगता है कि वह उस पर खरा नहीं उतर पाए।" उन्होंने आगे कहा, ''मैच के दौरान कुछ पल ऐसे थे, जब छठे ओवर की जरूरत थी, मैंने ये कमेंट्री के दौरान ये भी कहा। जो रूट को उन्होंने 11 बार आउट किया और लॉर्ड्स टेस्ट में बुमराह ने पांच ओवर डाले, बस एक और ओवर, छठा, और जोर लगाया जा सकता था। मुझे लगा कि उन्होंने वहां थोड़ा संयम बरता। कुछ चुनिंदा विकल्प भी थे, जिनके मैं हमेशा से खिलाफ रहा हूं, और वो भी साफ दिख रहा था।'' बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज ने दमदार प्रदर्शन किया। इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और आखिरी टेस्ट में भारत को छह रन से जीत दिलाकर सीरीज 2-2 से ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाने वाले सिराज ने आखिरी मैच में नौ और सीरीज में 23 विकेट लिये। उन्होंने पांच टेस्ट में 185.3 ओवर डाले।  

MCA चेयरमैन ने खोली कहानी: कैसे रोहित शर्मा ने यशस्वी जायसवाल को दिलाया दूसरा मौका

नई दिल्ली भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने पूरी तरह से इस बात का मन बना लिया था कि वे मुंबई की टीम के लिए डोमेस्टिक क्रिकेट नहीं खेलेंगे। उन्होंने एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की भी मांग मुंबई क्रिकेट संघ यानी एमसीए से कर दी थी। एमसीए ने भी एनओसी उनको प्रदान कर दी थी, लेकिन एक शख्स है, जिसने यशस्वी जायसवाल को मुंबई के लिए ही खेलने को मनाया। ये शख्स कोई और नहीं, बल्कि भारत की वनडे टीम के कप्तान रोहित शर्मा हैं। रोहित शर्मा के कहने पर ही यशस्वी जायसवाल मुंबई के लिए खेलना जारी रखना चाहते हैं। मुंबई मिरर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह रोहित शर्मा ही थे, जिन्होंने यशस्वी जायसवाल को मुंबई की टीम में रोका। रिपोर्ट में एमसीए के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक बताते हैं, "रोहित शर्मा ने करियर के इस पड़ाव पर यशस्वी जायसवाल को मुंबई की टीम के साथ बने रहने के लिए कहा। उन्होंने समझाया कि मुंबई के लिए खेलना बड़े सम्मान की बात है, क्योंकि ये टीम 42 रणजी टाइटल जीत चुकी है। रोहित ने यशस्वी से ये भी कहा था कि ये मत भूलो कि आपको मुंबई ने ही मंच दिया था, जिसके बाद आप इतनी छोटी उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में नाम कमा रहे हैं। रोहित ने यशस्वी को ये भी कहा था कि मुंबई शहर को भी मत भूलो, क्योंकि यहीं के मैदानों पर आपने एज ग्रुप क्रिकेट खेली है।" अजिंक्य नाइक ने आगे बताया, "रोहित शर्मा और अन्य दिग्गजों से यशस्वी जायसवाल ने इस बारे में बात की, जिन्होंने इंडिया और मुंबई का प्रतिनिधित्व किया है। इसके बाद उन्होंने एमसीए को एनओसी वापस लेने के लिए ईमेल किया और हमने उनको अनुरोध को स्वीकार कर लिया है।" जायसवाल ने अप्रैल के महीने में एमसीए से एनओसी की मांग की थी। जायसवाल के इस फैसले से हर कोई हैरान था कि वे गोवा क्यों जाना चाहते हैं? हालांकि, अगले ही महीने उन्होंने एनओसी वापस लेने की अनुरोध एमसीए से कर दिया था और अब वे फिर से मुंबई के लिए डोमेस्टिक क्रिकेट खेलने के लिए तैयार हैं।  

धोनी से गिल तक हुए फेल, जो रूट का जलवा सब पर पड़ा भारी!

नई दिल्ली जो रूट को भारतीय टीम के खिलाफ खेलना पसंद है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जो रूट का बल्ला अलग आग उगलता है। हाल ही में खेली गई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में जो रूट इंग्लैंड की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि जो रूट के इस प्रकोप से न एमएस धोनी बच सके, न विराट कोहली और न ही शुभमन गिल। हर किसी की टीम के खिलाफ उन्होंने एक टेस्ट सीरीज में 500+ रन बनाए हैं। हालांकि, एक सीजन वे 400 रन भी एक सीरीज में नहीं बना सके थे। वह भी विराट कोहली की कप्तानी में खेली गई थी, लेकिन कम से कम एक सीरीज में उन्होंने 500 प्लस रन विराट के खिलाफ बनाए हैं। दरअसल, जो रूट ने घर पर एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम के खिलाफ 2014 में, विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय टेस्ट टीम के खिलाफ 2021 में और अब 2025 में शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम के खिलाफ 500+ रन बनाकर करिश्मा कर दिखाया है। हालांकि, 2018 की टेस्ट सीरीज में जो रूट विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम के खिलाफ 400 रनों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए थे। उस साल 5 मैचों की 9 पारियों में उन्होंने सिर्फ 319 रन बनाए थे। उस सीरीज को 4-1 से इंग्लैंड ने ही जीता था। जो रूट के बल्ले से साल 2014 में एमएस धोनी की कप्तानी वाली भारतीय टीम के खिलाफ 5 मैचों की 7 पारियों में 518 रन निकले थे, जबकि 2021 में 4 मैचों की 7 पारियों में उन्होंने विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम के खिलाफ 564 रन बनाए थे। 2025 में 5 मैचों की 9 पारियों में शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम के खिलाफ 537 रन बनाए हैं। हर एक साल उन्होंने कम से कम 2 शतक 2014, 2021 और 2025 में जड़े हैं। ये दर्शाता है कि वह लंबे समय से भारत के खिलाफ अपना 100 पर्सेंट दे रहे हैं।  

मैट से मंडप तक: रेसलर पूजा की हुई सगाई, बिजनेसमैन से जुड़ा रिश्ता

हिसार  हरियाणा की अंतरराष्ट्रीय रेसलर पूजा ढांडा ने जीवन की एक नई पारी की शुरुआत कर हिसार के बिजनेसमैन अभिषेक बूरा से सगाई कर ली है। गुरुवार को हिसार में आयोजित भव्य समारोह में दोनों ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई। यह एक अरेंज मैरिज है, जिसका रिश्ता पूजा के पिता अजमेर ढांडा ने तय किया था। अब दोनों 13 नवंबर को शादी के बंधन में बंधेंगे। पूजा ढांडा न केवल एक बेहतरीन रेसलर हैं, बल्कि उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से देश का नाम रोशन किया है। रिंग से लेकर सगाई तक का सफर पूजा ढांडा का जन्म हिसार के बुडाना गांव में हुआ था। उनके पिता अजमेर ढांडा पशुपालन विभाग से ड्राइवर के पद से रिटायर हुए। उन्होंने हमेशा उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पूजा ने अपने करियर की शुरुआत जूडो से की थी, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ 2009 में तब आया जब एशियन जूडो चैंपियनशिप के दौरान उनकी मुलाकात रेसलर कृपा शंकर बिश्नोई से हुई। कृपा शंकर ने पूजा को कुश्ती में जाने की सलाह दी। इस सलाह ने पूजा के जीवन की दिशा बदल दी। पूजा ने जूडो छोड़कर कुश्ती में अपना हाथ आजमाया और 2010 के यूथ ओलंपिक खेलों में सिल्वर मेडल जीतकर देश को गौरवान्वित किया। असाधारण उपलब्धियां और 'दंगल' का ऑफर पूजा ढांडा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट हेलेन मारोलिस को दो बार हराना। यह कारनामा उन्होंने 2018 में प्रो रेसलिंग लीग में किया था। हेलेन को हराने के बाद उन्होंने खुद पूजा की तारीफ करते हुए कहा था मैं तुम्हारी फैन बन गई हूं। पूजा के लिए यह एक सपने के सच होने जैसा था। पूजा को साल 2016 में आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'दंगल' में बबीता फोगाट का किरदार निभाने का ऑफर मिला था। लेकिन चोट के कारण उन्होंने यह मौका ठुकरा दिया। पूजा ने पहली राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बबीता फोगाट को हराकर यह खिताब जीता था। पूजा की अन्य उपलब्धियों में 2013 और 2017 में कॉमनवेल्थ गेम्स में दो गोल्ड मेडल और 2014 में एशियन चैंपियनशिप में ब्रोंज मेडल शामिल हैं। चोट और संघर्ष का दौर पूजा का सफर कभी आसान नहीं रहा, 2016 में लगी एक गंभीर चोट के कारण वह रियो ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाई थीं। इस चोट से उबरने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। सर्जरी के बाद भी मैट पर वापसी करना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2017 में, उन्होंने अपनी चोट को पीछे छोड़ा और नेशनल चैंपियन बनकर वापसी की। उनके इसी जज्बे को देखते हुए भारत सरकार ने 2019 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया। आज, पूजा ढांडा न केवल एक इंटरनेशनल रेसलर हैं, बल्कि हिसार के महावीर स्टेडियम में एक सीनियर कुश्ती ट्रेनर के रूप में बच्चों को प्रशिक्षण भी देती हैं। अपनी शादी की तैयारियों के बीच भी वह अपनी जिम्मेदारियों को निभा रही हैं। यह उनकी लगन और समर्पण को दर्शाता है। नई जिंदगी की शुरुआत पूजा और अभिषेक की सगाई का समारोह उनकी नई जिंदगी की शुरुआत का एक खूबसूरत पल था। यह एक अरेंज मैरिज है, लेकिन दोनों के परिवार में खुशी का माहौल है। 23 फरवरी को हुई रोका सेरेमनी के बाद अब दोनों 13 नवंबर को शादी के पवित्र बंधन में बंध जाएंगे। पूजा के लिए यह एक नई पारी है, जिसमें उन्हें अपने जीवनसाथी अभिषेक का साथ मिलेगा। हम उन्हें उनके आने वाले जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हैं।  

सौरव गांगुली फिर संभाल सकते हैं कमान, क्रिकेट प्रशासन में कमबैक के आसार

 कोलकाता लगभग तीन साल पहले भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, अब फिर से सौरव गांगुली क्रिकेट प्रशासकों की दुनिया में कदम रखने पर विचार कर रहे हैं। सौरव गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ यानी सीएबी के आगामी चुनावों में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। संघ के अधिकारी ने बताया है कि वह फिर से चेयरमैन बनने के उत्सुक हैं। 52 साल के सौरव गांगुली 2019 तक सीएबी के अध्यक्ष रहे थे। उन्होंने 2014 में दिवंगत जगमोहन डालमिया के नेतृत्व में राज्य इकाई के सचिव के रूप में अपना कार्यकाल शुरू किया था। फिर 2019 में उन्हें सर्वसम्मति से बीसीसीआई का अध्यक्ष चुना गया और जय शाह सचिव बने, लेकिन एक कार्यकाल पूरा होने के बाद गांगुली की जगह 1983 विश्व कप के नायक रोजर बिन्नी आ गए। बिन्नी का कार्यकाल भी लगभग खत्म हो चुका है, क्योंकि वे 70 साल के हो चुके हैं। राज्य इकाई के घटनाक्रम से वाकिफ सीएबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘‘हां, सौरव गांगुली मैनेजमेंट सिस्टम में वापसी के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने सीएबी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने का मन बना लिया है। अगर बीसीसीआई के संविधान के अनुसार देखा जाए तो उनके पास (राज्य संस्था में कुल नौ साल) पांच साल बचे हैं। वह सर्वसम्मति से चुने जाएंगे या चुनाव होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ’’ सीएबी के मौजूदा अध्यक्ष स्नेहाशीष गांगुली सौरव के बड़े भाई हैं। वह छह साल पूरे कर लेंगे, जिसके बाद उन्हें लोढ़ा समिति की सिफारिश वाले संविधान के अनुसार अनिवार्य रूप से ब्रेक लेना होगा। बाद में वह तीन साल का कार्यकाल और पूरा कर सकते हैं, लेकिन अभी के लिए सौरव गांगुली के बड़े भाई को बंगाल क्रिकेट संघ के चेयरमैन की कुर्सी छोड़नी होगी।

जब ज़रूरत थी तब बुमराह गायब? पूर्व ऑलराउंडर ने जमकर लगाई क्लास

नई दिल्ली विराट कोहली, रोहित शर्मा और आर अश्विन जैसे दिग्गजों के बगैर भारत की युवा टीम ने इंग्लैंड दौरे पर शानदार प्रदर्शन किया। 5 मैच की सीरीज 2-2 से बराबर रही। यह तब रहा जब स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह सीरीज के सिर्फ 3 मैच ही खेले। ऋषभ पंत चोट की वजह से आखिरी टेस्ट नहीं खेल पाए। एजबेस्टन टेस्ट के हीरो आकाश दीप भी चोट की वजह से चौथा टेस्ट नहीं खेल पाए। अब भारत के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने जसप्रीत बुमराह के प्रदर्शन पर निराशा जाहिर की है। उन्होंने उन्हें 10 में से सिर्फ 6 नंबर दिए हैं।   बुमराह ने इंग्लैंड दौरे पर जो 3 टेस्ट खेले उनमें उन्होंने 14 विकेट लिए। इनमें दो बार 5 विकेट हॉल भी शामिल है। वह सीरीज में मोहम्मद सिराज के बाद दूसरे सबसे सफल गेंदबाज रहे। सिराज ने 23 और बुमराह ने 14 विकेट लिए। प्रसिद्ध कृष्ण ने भी 3 टेस्ट में 14 विकेट झटके। संयोग से बुमराह जिन भी मैच में खेले, उनमें भारत एक भी नहीं जीत सका। इरफान पठान का मानना है कि जसप्रीत बुमराह में किलर इंस्टिंक्ट की कमी दिखी। उन्होंने अपने यू-ट्यूब चैनल पर कहा, 'बुमराह को 10 में से 6 अंक मिलेंगे। जब आप सीनियर खिलाड़ी हैं और आप पर मैच जीतने की बड़ी जिम्मेदारी है। आप सिर्फ 3 मैच खेले और भारत उनमें से एक भी जीत नहीं सका।' पूर्व ऑलराउंडर ने लीड्स में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि बुमराह ने पहली पारी में तो 5 विकेट लिए लेकिन दूसरी पारी में वह 370+ के टारगेट का बचाव करते वक्त एक विकेट भी हासिल नहीं कर पाए। पठान ने कहा, ‘उस महत्वपूर्ण समय में आपके मुख्य मैच-विनर को कोई तरीका निकालने की जरूरत थी- ओवर द विकेट, अराउंड द विकेट, यॉर्कर, स्लोअर बॉल, बाउंसर- दबाव बनाने के लिए कुछ भी करने की जरूरत थी। ऐसा नहीं हुआ। लीड्स टेस्ट में हमने कोई भी दबाव बनते नहीं देखा। इंग्लैंड रन बनाता रहा और बुमराह एक विकेट तक नहीं ले सके।’ पठान ने बुमराह की इस बात के लिए भी आलोचना की कि जब जरूरत थी तब वह लंबे स्पेल से बचते नजर आए। उन्होंने कहा, 'ऐसे भी मौके आए जब उनके छठे ओवर की जरूरत थी। जो रूट को उन्होंने 11 बार आउट किया है और लॉर्ड्स टेस्ट में बुमराह ने सिर्फ 5 ओवर फेंका। एक और ओवर फेंके होते तो शायद हम दबाव बना पाते। मुझे लगता है कि वह पीछे हट गए।' बुमराह ने लॉर्ड्स में भी 5 विकेट हॉल लिया था और ऐतिहासिक मैदान के ऑनर बोर्ड पर उनका नाम लिखा गया। पठान ने कहा, 'आप नंबर एक गेंदबाज हैं तो आपसे एक नंबर के परफॉर्मेंस की उम्मीद भी होती है और मुझे लगता है कि वह उन उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।'  

अभी तो शुरुआत है… CSK के साथ लंबा सफर तय करने के संकेत धोनी ने दिए

नई दिल्ली चेन्नई सुपर किंग्स में अपने भविष्य को लेकर लंबे वक्त तक चुप्पी साधने के बाद महेंद्र सिंह धोनी ने आखिरकार इशारों में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि वह और सीएसके साथ-साथ हैं। अगले 15-20 सालों तक भी साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि सीएसके और उनका साथ सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर नहीं है। धोनी की बातों से साफ है कि अगर अगले आईपीएल सीजन में वह सीएसके के मेंटॉर या कोच की भूमिका में दिखें तो कोई हैरानी नहीं होगी। 44 साल के महेंद्र सिंह धोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'मैं और सीएसके, हम साथ-साथ हैं। आप जानते हैं अगले 15-20 साल भी। यह एक या दो साल के लिए नहीं है। मैं हमेशा पीली जर्सी में बैठा मिलूंगा। मैं भले ही खेलूं या नहीं, लेकिन आप खुद जानते हैं।' अभी पिछले हफ्ते ही चेन्नई में एक अलग कार्यक्रम के दौरान जब धोनी से उनके आईपीएल में भविष्य के बारे में सीधा सवाल हुआ तो उन्होंने उसका जवाब टाल दिया था। हालांकि, इस बार वह खुलकर बोले। आईपीएल 2024 के समय भी ऐसी अटकलें लगी थीं कि धोनी वो सीजन नहीं खेलेंगे लेकिन वह घुटने की समस्या से बहुत जल्दी उबरे। इतना ही नहीं, आईपीएल 2025 में सीएसके के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ जब कोहनी की चोट की वजह से बाहर हुए तब धोनी ने एक बार फिर कप्तानी संभाली। हालांकि, पिछला सीजन सीएसके के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। आईपीएल की सबसे सफल टीमों में शुमार सीएसके 14 मैच में सिर्फ 4 ही जीत सकी थी और पॉइंट टेबल में सबसे फिसड्डी रही थी। धोनी ने पिछले हफ्ते चेन्नई में एक निजी समारोह के दौरान इस बात का संकेत दिया कि चेन्नई की टीम गायकवाड़ को टीम में बनाए रखेगी। उन्होंने कहा, ‘हम अपने बल्लेबाजी क्रम को लेकर थोड़े चिंतित थे लेकिन मुझे लगता है कि अब हमारा बल्लेबाजी क्रम काफी व्यवस्थित है। रुतु (गायकवाड़) वापसी करेंगे। उन्हें चोट लगी थी। वह वापसी करेंगे तो अब हम काफी व्यवस्थित हो जायेंगे।’ उन्होंने कहा था, ‘मैं यह नहीं कहूंगा कि हमने (आईपीएल 2025 में) ढिलाई बरती। कुछ कमियां थीं जिन्हें हमें दूर करने की जरूरत थी। दिसंबर में एक छोटी नीलामी होने वाली है। हम उन कमियों को दूर करने की कोशिश करेंगे।’  

क्रिस वोक्स की दिलचस्प बात- एक हाथ से खेलना जोखिम भरा, शुक्र है सब ठीक रहा

नई दिल्ली  जिस तरह की बहादुरी ऋषभ पंत ने चौथे टेस्ट मैच में दिखाई, उसी तरह की दिलेरी क्रिस वोक्स ने पांचवें टेस्ट में दिखाई। पंत टूटी हुई उंगली के साथ बल्लेबाजी करने उतरे, जबकि वोक्स कंधे की गंभीर चोट के साथ बल्लेबाजी करने उतरे। हालांकि, उनकी टीम को जीत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने अपनी जान को जोखिम में जरूर डाल दिया। उनको इस खतरे का भी अंदाजा था कि भारतीय पेसर उनके खिलाफ बाउंसर गेंदबाजी कर सकते हैं और वे और भी ज्यादा चोटिल हो सकते हैं, लेकिन फिर वे भी बल्लेबाजी के लिए आए। अब उन्होंने कहा है कि भगवान का शुक्र है, मुझे 90 मील प्रति घंटे की रफ्तार वाली बाउंसर का सामना एक हाथ से नहीं करना पड़ा। क्रिस वोक्स उस समय बल्लेबाजी करने उतरे जब इंग्लैंड की टीम को 17 रनों की दरकार थी। उनका एक हाथ पूरी तरह से स्वेटर के अंदर था और वह सपोर्ट के जरिए बंधा हुआ था। उसका इस्तेमाल वे किसी भी तरह से नहीं कर सकते थे। हालांकि, उनकी बल्लेबाजी एक गेंद के लिए भी नहीं आए। इससे वह खुश भी हैं, क्योंकि उनको शरीर के किसी अन्य हिस्से पर भी चोट लग सकती थी या फिर वही चोट और भी गहरी हो सकती थी। वोक्स को लंदन के ओवल में फैंस से स्टैंडिंग ओवेशन मिला और भारतीय खिलाड़ियों ने भी उनकी तारीफ की। तेज दर्द और उससे भी अधिक दबाव के बावजूद वोक्स भारत के तेज गेंदबाजों के आक्रमण का सामना करने के लिए तैयार थे। अब उस रोमांचक मैच के कुछ दिन द गार्जियन से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने सिर्फ कोडीन (पेनकिलर) ली थी और बहुत दर्द हो रहा था। हाथ में पट्टी बंधे होने के बावजूद, मैं स्वाभाविक रूप से दौड़ने की कोशिश कर रहा था। मुझे सचमुच चिंता हुई कि मेरा कंधा फिर से बाहर निकल आया है। इसलिए मैंने अपना हेलमेट उतार दिया, दांतों से दस्ताने फाड़ दिए और जांच की कि सब ठीक है या नहीं। मैंने एक भी गेंद का सामना नहीं किया, लेकिन वहां होना ही मायने रखता था। अंत में यह कड़वा-मीठा अनुभव था।" वोक्स ने बताया, "मेरे मन में एक हिस्सा सोच रहा था कि यह कैसा होगा…यह देखने के लिए कि क्या मैं गेंद का बचाव कर सकता था, शायद एक ओवर बचा सकता था, एक रन ले सकता था या चौका लगा सकता था, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह था: 'भगवान का शुक्र है कि मैंने 90 मील प्रति घंटे की रफ़्तार वाली बाउंसर का सामना नहीं किया, एक हाथ से, उल्टी दिशा में मुंह करके।'" वोक्स ने गस एटकिंसन के साथ 10 बहुमूल्य रन जोड़े, लेकिन मोहम्मद सिराज ने एक जबरदस्त यॉर्कर से एटकिंसन को आउट करके इंग्लैंड की उम्मीदें तोड़ दीं। इस मैच में इंग्लैंड को 6 रन से हार मिली और इस तरह सीरीज 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुई।  

क्रिकेट प्रेमियों के लिए खुशखबरी! टीम इंडिया का पूरा अगला शेड्यूल जारी

नई दिल्ली इंग्लैंड दौरा पूरा हो चुका है. 5 टेस्ट मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रॉ रही. कप्तान शुभमन गिल की सेना ने इस टूर पर फैंस को कई यादें दी हैं. बतौर कप्तान वो पहले इम्तिहान में पास हुए हैं. इंग्लैंड टूर पर ना सिर्फ उनका बल्ला बोला बल्कि बतौर कप्तान भी गिल ने सभी को इंप्रेस किया है. अब सभी के मन में एक ही सवाल है कि आखिरी अब टीम इंडिया का अगला मिशन क्या है? भारत कब और किसके खिलाफ मैदान पर उतरेगी? हम आपके लिए भारतीय क्रिकेट टीम का इस साल का पूरा शेड्यूल लेकर आए हैं, जिसमें ये बताएंगी कि अब मेन इन ब्लू कब और कौन-कौन सी टीमें से भिड़ने वाली है. इंग्लैंड टूर के बाद अब टीम इंडिया कुछ दिनों रेस्ट करेगी. वो अगले महीने सितंबर में एक्शन में होगी, क्योंकि इस महीने एशिया कप 2025 होना है, जो टी20 विश्व कप 2026 की तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम है. यह टूर्नामेंट टी20 फॉर्मेट में होगा. जिसकी मेजबानी बीसीसीआई है, लेकिन टूर्नामेंट मुकाबले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो शहरों अबू धाबी और दुबई में खेले जाएंगे. कुल 8 टीमें हिस्सा ले रही हैं. भारत-पाकिस्तान भी इसमें नजर आएंगे. अब एशिया कप 2025 में नजर आएगी टीम इंडिया टीम इंडिया अब एशिया कप 2025 में नजर आएगी. उसे पहला मैच 10 सितंबर को यूएई के खिलाफ खेलना है. फिर 14 सितंबर को पाकिस्तान से भिड़ना होगा. आखिरी लीग स्टेज मैच में वो ओमान के खिलाफ खेलेगी. टीम इंडिया खिताब जीतने की दावेदार है. लीग स्टेज के 3 मैच जीतकर वो सुपर 4 स्टेज में पहुंचेगी और वहां से सेमीफाइन और फाइनल में जगह पक्की करेगी. टूर्नामेंट का फाइनल 28 सितंबर को दुबई में होगा. वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 टेस्ट होंगे एशिया कप 2025 के ठीक 2 दिन बाद टीम इंडिया टेस्ट सीरीज खेलेगी, जो वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने घर में होना है. कुल 2 मैच होंगे. पहला मुकाबला 2 अक्टूबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होगा, जबकि दूसरा मैच 10 अक्टूबर से दिल्ली के अरुण जेटली में खेला जाएगा. मतलब एक बार फिर रेड बॉल की धूम होगी, इस बार ये भारत में होगी तो रोमांचक अलग स्तर का होगा. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे और टी20 सीरीज वेस्टइंडीज के बाद टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया टूर पर जाएगी. जहां वनडे और टी20 मैचों की सीरीज होगी. ये टूरअक्टूबर महीने में ही होगा. जिसमें विराट कोहली और रोहित शर्मा भी नजर आ सकते हैं. इस टूर पर 3 वनडे और 5 टी20 मैच होंगे. टी20 विश्व कप 2026 से पहले यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उसी के घर में खेलना बढ़िया तैयारी होगी. ये टूर बेहद मुश्किल हो सकता है. भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे का पूरा कार्यक्रम देख लीजिए 19 अक्टूबर- पहला वनडे, पर्थ स्टेडियम, पर्थ 23 अक्टूबर- दूसरा वनडे, एडिलेड ओवल, एडिलेड 25 अक्टूबर- तीसरा वनडे, एससीजी, सिडनी 29 अक्टूबर- पहला T20, मनुका ओवल, कैनबरा 31 अक्टूबर- दूसरा T20, एमसीजी, मेलबर्न 2 नवंबर- तीसरा T20, बेलेरिव ओवल, होबार्ट 6 नवंबर- चौथा T20, गोल्ड कोस्ट स्टेडियम, गोल्ड कोस्ट 8 नवंबर- पांचवां T20, द गाबा, ब्रिस्बेन साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट, वनडे और टी20 में होगी जंग ऑस्ट्रेलिया का यह टूर खत्म करने के बाद टीम इंडिया अपने घर लौटेगी. यहां वो साउथ अफ्रीका से टेस्ट, वनडे और टी20 सीरीज खेलेगी. यह दौरा 14 नवंबर से शुरू होगा, जो 19 दिसंबर तक चलेगा. मतलब पूरे साल टीम इंडिया बिजी रहने वाली है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपने घर में भारत 2 टेस्ट, 3 वनडे और 5 टी20 खेलेगी. साउथ अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया का पूरा शेड्यूल 2025 पहला टेस्ट- 14 से 18 नवंबर, कोलकाता दूसरा टेस्ट- 22 से 26 नवंबर, गुवाहाटी पहला वनडे- 30 नवंबर, रांची दूसरा वनडे- 3 दिसंबर, रायपुर तीसरा वनडे- 6 दिसंबर, विशाखापत्तनम पहला टी20- 9 दिसंबर, कटक दूसरा T20- 11 दिसंबर, मुल्लांपुर तीसरा T20- 14 दिसंबर, धर्मशाला चौथा T20- 17 दिसंबर, लखनऊ पांचवां T20- 19 दिसंबर, अहमदाबाद

पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल ने इंग्लैंड की आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने की रणनीति की आलोचना की

नई दिल्ली  ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल ने भारत के खिलाफ ड्रॉ हुई टेस्ट श्रृंखला के दौरान इंग्लैंड की आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने की रणनीति की आलोचना करते हुए कहा, ‘सकारात्मक क्रिकेट का मतलब लापरवाह क्रिकेट नहीं है।'  चैपल ने अपने कॉलम में युवा भारतीय टीम की अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रशंसा की, वहीं इंग्लैंड के खिलाड़ियों, विशेषकर हैरी ब्रुक की आलोचना की, क्योंकि वे परिस्थितियों को समझने में विफल रहे। भारत के पूर्व मुख्य कोच चैपल ने कहा, ‘इस श्रृंखला में इंग्लैंड का सफर उसके सामने चेतावनी पेश करता है। इसे प्रतिभाशाली लेकिन चंचल प्रकृति के हैरी ब्रुक ने मूर्त रूप दिया, जिनकी मैं पहले सार्वजनिक रूप से प्रशंसा कर चुका हूं।'  उन्होंने कहा, ‘उनकी टाइमिंग बहुत अच्छी है। वह कई तरह के शॉट लगा सकते हैं। उनमें आत्मविश्वास है और बल्लेबाजी को सहज बनाने का दुर्लभ कौशल है। लेकिन क्रिकेट, विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट, केवल शॉट लगाने के बारे में नहीं है। यह निर्णय लेने के बारे में है। टेस्ट क्रिकेट में यह समझना जरूरी होता है कि कब आक्रामक होकर खेलना है और कब संयम बरतना है।'  लंदन में पांचवें टेस्ट के चौथे दिन सोमवार को इंग्लैंड ने 374 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय तीन विकेट पर 301 रन बना लिए थे लेकिन 26 वर्षीय ब्रूक के आउट होने से उसकी टीम लड़खड़ा गई और उसे 6 रन से हार का सामना करना पड़ा। चैपल ने कहा, ‘सकारात्मकता में कुछ भी ग़लत नहीं है। लेकिन सकारात्मक क्रिकेट का मतलब लापरवाह क्रिकेट नहीं है। इसका मतलब है आत्मविश्वास से भरा, सोच-समझकर जोखिम उठाना।'