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सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाना चाहते हैं? इन 5 आदतों को तुरंत छोड़ें

हर इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस का होना जरूरी है। ये एक ऐसी जरूरी चीज है जिसके बल पर वो दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकता है। जिस इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी होती है वो ज्यादातर सक्सेज नहीं पाते। अगर आपके अंदर भी सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी रहती है तो जरा इन 5 आदतों पर गौर करें। अगर ये आदते आपकी लाइफ का हिस्सा हैं तो फौरन इन्हें दूर कर दें। तभी आत्मविश्वास बढ़ पाएगा। खुद के बारे में निगेटिव सोचना अगर आप खुद के बारे में हमेशा निगेटिव बातें बोलते और सोचते हैं। खुद की कमियां निकालते हैं तो इससे आपकी सेल्फ एस्टीम प्रभावित होती है। और आपके अंदर का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। आपको खुद पर विश्वास नहीं रहता कि कोई काम आप अकेले कर सकते हैं। इसलिए सेल्फ वैल्यूएशन करने और खुद को क्रिटिसाइज करने के बीच का फर्क समझकर निगेटिव सोचना बंद करें। हमेशा परफेक्ट बनने की चाह किसी भी काम में परफेक्शन अच्छी बात है लेकिन यहीं परफेक्शन की चाह कई बार आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। क्योंकि जरा सी कमी भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और कई बार सेल्फ कॉन्फिडेंस पर निगेटिव असर पड़ता है। दूसरों से तुलना दूसरों से तुलना करना अगर आदत बन जाती है तो खुद में केवल कमियां ही कमियां नजर आती हैं। जिसकी वजह से आत्मविश्वास कमजोर होता है। नए चैलेंज एक्सेप्ट ना करना अगर आप लाइफ में आने वाले नए चैलेंज को एक्सेप्ट नहीं करते हैं तो ये आपकी ग्रोथ को रोक सकती है। क्योंकि मन में बात आती है कि मुझसे ये काम नहीं होगा, जो कि पूरी तरह से कमजोर आत्मविश्वास की निशानी है। खुद को जिम्मेदार ठहराना लाइफ में और अपने आसपास आपसे जुड़े लोगों के जीवन में हो रही किसी भी समस्या के लिए अगर आप खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं, तो ये सेल्फ कॉन्फिडेंस को कमजोर बना देती है।  

जानें घर की सही दिशा, जहां अपराजिता लगाने से बढ़ती है खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर में पेड़-पौधे लगाने के लिए भी कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का ध्यान रखने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। आज हम आपको अपराजिता के पौधे से संबंधित कुछ वास्तु नियम बताने जा रहे हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में। मिलते हैं ये फायदे घर में अपराजिता का पौधा लगाने से व्यक्ति को धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही यह पौधा सकारात्मक ऊर्जा के संचार को भी बढ़ाता है और नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखता है। माना जाता है कि घर में अपराजिता का पौधा लगाने से व्यक्ति के करियर में आ रही परेशानियां भी दूर हो सकती हैं। किस दिशा में लगाएं पौधा वास्तु शास्त्र में अपराजिता का पौधा लगाने के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना गया है। क्योंकि वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, यह दिशा देवी-देवताओं की देशा मानी गई है। ऐसे में इस दिशा में पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। साथ ही और नकारात्मकता भी दूर होती है। वहीं वास्तु शास्त्र में अपराजिता लगाने के लिए पूर्व दिशा भी शुभ मानी गई है। इस दिशा से अपराजिता का पौधा लगाने से सुख-शांति और समृद्धि में वृद्धि हो सकती है। रखें इन बातों का ध्यान अपराजिता के पौधे कभी भी पश्चिम या फिर दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है और आपके जीवन में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं। साथ ही यह भी माना गया है कि आपको शनिवार के दिन अपराजिता का पौधा लगाने से काफी लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही शनि देव की पूजा में अपराजिता का फूल अर्पित करने से शनिदेव की कुदृष्टि आपके ऊपर नहीं पड़ती।

इंदिरा एकादशी विशेष: पितृ दोष दूर करने के आसान टिप्स, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

इंदिरा एकादशी पितृपक्ष में आने वाली विशेष तिथि है, जिसका संबंध पितरों की शांति और मोक्ष से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और नियमपूर्वक पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृदोष से मुक्ति का मार्ग खुलता है. शास्त्रों के अनुसार, जो लोग पितृपक्ष में अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय करते हैं, उन्हें न केवल पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि उनके जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति भी आती है. आइए जानते हैं इस बार की एकादशी की तिथि और उन उपायों के बारे में जिन्हें करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है. इंदिरा एकादशी 2025 पंचांग के अनुसार, 16 सितंबर को रात 12 बजकर 21 मिनट पर आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी. वहीं, 17 सितंबर को देर रात 11 बजकर 39 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 17 सितंबर को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी. पितृ दोष क्या है? जब किसी व्यक्ति के पूर्वजों (पितरों) की आत्मा को शांति नहीं मिलती, तो उसे पितृ दोष माना जाता है. यह दोष कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि पितरों का विधिपूर्वक श्राद्ध न करना, उनकी मृत्यु के बाद कोई अनुष्ठान अधूरा रह जाना, या उनका असंतोष. पितृ दोष के कारण परिवार में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं, जैसे धन की कमी, विवाह में देरी, संतान संबंधी परेशानियां और लगातार बीमारियां. इंदिरा एकादशी पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए क्या करें? अगर आप पितृ दोष से परेशान हैं, तो इंदिरा एकादशी का दिन आपके लिए बहुत शुभ है. इस दिन कुछ विशेष उपाय करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं: व्रत और पूजा: इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. भगवान शालिग्राम और भगवान विष्णु की पूजा करें. पूजा में तुलसी दल, फूल, फल और पंचामृत जरूर चढ़ाएं. श्राद्ध और तर्पण: इस दिन पितरों का श्राद्ध करना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है. अगर आप अपने पितरों का श्राद्ध करने में सक्षम हैं, तो किसी योग्य ब्राह्मण से विधिपूर्वक श्राद्ध करवाएं. अगर ऐसा संभव न हो तो तर्पण (जल अर्पित करना) कर सकते हैं. ब्राह्मणों को भोजन कराएं: पितरों की शांति के लिए इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना बहुत शुभ होता है. भोजन में खीर और पूड़ी जैसी चीजें शामिल करें. दान-पुण्य: इस दिन अनाज, कपड़े या धन का दान करना भी बहुत लाभकारी होता है. गाय को चारा खिलाना भी पुण्य का काम है. पितृ स्तोत्र का पाठ: अगर आपको पितृ दोष महसूस होता है, तो इंदिरा एकादशी के दिन पितृ स्तोत्र या गरुड़ पुराण का पाठ करना बहुत ही फलदायी होता है. यह पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है. इंदिरा एकादशी का महत्व यह एकादशी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकमात्र एकादशी के रूप में जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. यह भी कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पितरों को स्वर्गलोक में स्थान प्राप्त होता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं.

दो तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन! पितृ पक्ष में पिंडदान करने का सही तरीका

साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है. हर साल पितृ पक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होते हैं और आश्विन माह की अमावस्या तिथि पर समाप्त होते हैं. साल 2025 में पितृ पक्ष की अंतिम श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन 21 सितंबर के दिन किया जाएगा. साल 2025 में श्राद्ध की दो तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं. पंचांग के अनुसार इस वर्ष तृतीया और चतुर्थी तिथि का श्राद्ध एक ही तिथि पर पड़ रहा है. इन दोनों की तिथि के श्राद्ध 10 सितंबर 2025 के दिन किए जाएंगे. इन दो तिथि का श्राद्ध होगा एक साथ तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर, 2025 बुधवार तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर, 2025, बुधवार आश्विन, कृष्ण तृतीया तिथि के दिन है. इस दिन इन लोगों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि पर हुई हो. इस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की तृतीया तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है.तृतीया श्राद्ध को तीज श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है. तृतीया श्राद्ध करने का समय-     कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.     रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से 01 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.     अपराह्न काल – दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. चतुर्थी श्राद्ध 10 सितंबर, 2025, बुधवार आश्विन, कृष्ण चतुर्थी तिथि के दिन है. चतुर्थी श्राद्ध परिवार के उन मृत सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि पर हुई हो. इस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है. चतुर्थी श्राद्ध करने का समय-     कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.     रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.     अपराह्न काल – दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. दो तिथियों के श्राद्ध और पिंडदान की विधि     इस दिन सुबह स्नान आदि करके साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें.     घर के पूजा स्थल को गंगाजल स्वच्छ करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें.     दो तिथियों के लिए अलग-अलग संकल्प करें.     संकल्प में दोनों तिथियों के पितरों का नाम, गोत्र, और मृत्यु तिथि शामिल करें.     तांबे के लोटे में गंगाजल, काले तिल, जौ, और दूध मिलाकर तर्पण करें.     प्रत्येक तिथि के लिए तीन बार जल अर्पित करें.     चावल, जौ, काले तिल, और घी को मिलाकर पिंड बनाएं. प्रत्येक तिथि के पितरों के लिए अलग-अलग पिंड तैयार करें.     दो तिथियों पर दोनों तिथियों के पितरों के लिए अलग-अलग पिंड बनाएं.     पिंडों को कुश के आसन पर रखें और गंगाजल, दूध, और तिल से अभिषेक करें.     पिंडों को दक्षिण दिशा की ओर अर्पित करें और पितरों से आशीर्वाद मांगे.     पिंडदान के बाद पिंडों को पवित्र नदी में विसर्जित करें या पीपल के पेड़ के नीचे रख दें.     भोजन को केले के पत्ते या पत्तल पर परोसें और पितरों को अर्पित करें.     ब्राह्मणों को भोजन कराएं. दोनों तिथियों के पितरों के लिए अलग-अलग ब्राह्मणों को आमंत्रित करें.     ब्राह्मण को दक्षिणा, वस्त्र, और फल दान करें.  

आज का राशिफल (10 सितंबर 2025): किन्हें मिलेगा धन लाभ, किसकी चमकेगी किस्मत

मेष आज के दिन मेष राशि जीवन को खुशहाल बनाने के लिए लव लाइफ में आ रही दिक्कतों को सुझाएं। जहां, रोमांस में कुछ लोग डूबे रहेंगे वहीं, व्यावसायिक सफलता का आभास भी करेंगे। आपके जीवन में छोटी-मोटी आर्थिक परेशानियां भी रहेंगी। वृषभ आज के दिन आपकी कड़ी मेहनत नया कार्यभार दिला सकती है। आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है। नेचर के बीच वक्त बिताएं। अपनी मेंटल का हेल्थ का खासतौर पर ख्याल रखें। मिथुन आज के दिन स्वास्थ्य अच्छा रहने वाला है। व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। जीवनसाथी के साथ बहस करने से बचें क्योंकि मनमुटाव की स्थिति पैदा हो सकती है। घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है। कर्क धन और वित्त के मामले में बुधवार का दिन अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। सिंह आज के दिन हो सकता है कि कुछ लोग अपने लक्ष्य हासिल न कर पाएं। खर्चे बढ़ सकते हैं और आपका बजट गड़बड़ा सकता है। व्यापार से जुड़े लोगों को आज काफी मेहनत करनी पड़ेगी। स्ट्रेस से बचने के लिए मेडिटेशन का सहारा ले सकते हैं। कन्या आज के दिन व्यापार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। वहीं, कुछ लोगों के रिश्तों में थोड़ी-बहुत नोक-झोक हो सकती है, जिसे बात-चीत कर आसानी से सुलझाया जा सकता है। बच्चों के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। तुला आज के दिन समाज में आपका मान सम्मान बढ़ेगा। व्यापार में थोड़ी बहुत दिक्कतें आ सकती हैं, जिसे आप अपनी सूझबूझ के साथ आसानी से हल कर लेंगे। कारोबार में उन्नति के योग बन रहे हैं। सेहत भी अच्छी नजर आ रही है। वृश्चिक आपका पार्टनर आपके लिए कोई सरप्राइज प्लान कर सकता है। व्यापार में धन लाभ होने की संभावना है। बिजनेस कर रहे लोगों को कोई अच्छी डील भी मिल सकती है। वहीं, ऑफिस में पॉलिटिक्स से दूर रहना आपके लिए बेहतर रहेगा। धनु आज के दिन अपनी वाणी को मधुर रखें। पितरों को खुश करने के लिए किसी जरूरतमंद की सहायता करें। आपके सिनीयर्स आप पर बिना किसी वजह के प्रेशर डाल सकते हैं और कार्य संतुष्टि में कमी हो सकती है। मकर आज के दिन सालों से रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। काम के सिलसिले में विदेश यात्रा पर जा सकते हैं। शादी तय करने के लिए आज का दिन अच्छा माना जा रहा है और जो लोग रिश्ते को लेकर गंभीर हैं वे उचित निर्णय ले सकते हैं। कुंभ आज के दिन आपकी अर्थिक स्थिति दमदार रहने वाली है। पार्टनर पर इल्जाम लगाने से बचें क्योंकि इससे मनमुटाव की स्थिति पैदा हो सकती है। सेहत में सुधार होगा। जीवनसाथी के साथ चल रही मतभेदों को बैठकर बातचीत कर सुलझाएं। मीन आज के दिन लव लाइफ में हंसी-खुशी का माहौल रहेगा। दोनों एक-दूसरे के साथ अच्छा वक्त बिताएंगे। प्रोफेशनल लाइफ में अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए चुनौतियों का बखूबी सामना करें। आज के दिन आपकी सेहत ठीक रहेगी।

पितृपक्ष में पूजा का आसान तरीका: घर बैठे पितरों को दें श्राद्ध

पंचांग के मुताबिक, पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर समाप्त होते हैं. मान्यताओं के अनुसार, 16 दिनों के लिए पितर धरती पर आते हैं और अपने लोगों को आशीर्वाद देकर जाते हैं.  ज्योतिषियों के मुताबिक, पितृ पक्ष में लोग अपने पितरों का पिंडदान या श्राद्ध कर्म करने के लिए कई तीर्थस्थलों जैसे गया, वाराणसी, इलाहाबाद, हरिद्वार आदि जगहों पर जाते हैं जिससे पितरों की आत्मा को शांति प्रदान होती है. लेकिन कई बार तीर्थस्थलों पर जाकर श्राद्ध कर्म करना संभव नहीं हो पाता है, जिसके कारण लोग अपने घरों पर ही ब्राह्मण को बुलाकर श्राद्ध कर्म या पिंडदान की प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं. तो चलिए जानते हैं कि घर पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने की पूरी विधि क्या है.  पितृ पक्ष में घर पर श्राद्ध करने की विधि घर पर श्राद्ध करने से लिए सबसे पहले जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद रंग के साफ सुथरे वस्त्र पहनें. उसके बाद घर की किसी शांत या खुली जगह पर आसन बिछाएं. फिर, उस पर कपड़ा डालकर अपने पितर की तस्वीर रखें और उनकी तस्वीर के आगे तांबे का लोटा रखें. उस लोटे में जल, काले तिल और कुश डालें. उसके बाद, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हाथ में जल, तिल और कुश लें और पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करें. इसके बाद पितरों को जल अर्पित करते हुए 'ऊं पितृदेवाय नम: मंत्र का जाप करें. याद रखें कि पितरों का तर्पण कुतप वेला यानी दोपहर में ही करें क्योंकि इस वेला में तर्पण का विशेष महत्व होता है. कुतुप वेला दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक होती है.  फिर, पितरों को सात्विक भोजन अर्पित करें जैसे खिचड़ी, खीर, चावल, मूंग आदि और यह सात्विक भोजन केले के पत्ते पर ही रखें. उसके बाद संभव हो तो घर पर बुलाए ब्राह्मण या किसी गरीब को भोजन या दान दें.

दक्षिण मुखी घर वाले जरूर पढ़ें: जानें क्यों कुछ लोगों को होता है नुकसान और क्या हैं आसान उपाय

अक्सर आपने लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि दक्षिण मुखी यानी साउथ डायरेक्शन का घर नहीं लेना चाहिए। ऐसा घर फलता नहीं है। मगर, क्या यह बात पूरी तरह से सही है। क्या दक्षिण मुखी घर किसी को नहीं फलता। यदि आपका घर भी दक्षिण दिशा में बना है, तो क्या उपाय कर सकते हैं। अगर, आपके भी मन में यह सवाल है, तो आज हम आपको इसके फायदों के बारे में बता देते हैं। मगर, इन बातों को मानने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल मजबूत स्थिति में है, उनके लिए दक्षिण मुखी घर ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत हो सकते हैं। ऐसे लोग जमीन-जायदाद के मामले में अच्छी ग्रोथ हासिल करते हैं। इन लोगों के लिए होता है फायदेमंद दक्षिण मुखी घर को इंडस्ट्रियल स्पेस या वर्क प्लेस के रूप में इस्तेमाल किया जाए, तो सफलता और समृद्धि मिल सकती है। जनसंपर्क, मीडिया और फिल्म उद्योग के लिए दक्षिण मुखी मकान अच्छे साबित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को ऐसी दिशा के घर फलते हैं। यदि वास्तु के अनुसार बनाया गया हो, तो दक्षिण मुखी घर के कई फायदे हो सकते हैं। सूर्य की रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह ठीक हो, तो ऐसे घर से कई तरह के फायदे होते हैं। दक्षिण मुखी घर में पूरे दिन पर्याप्त धूप आती है, जिससे घर में ऊर्जा और सकारात्मकता बनी रहती है। दरअसल, सूर्य की ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। दक्षिण मुखी घर में सूर्य की किरणें घर में लंबे समय तक बनी रहती हैं। इससे घर में लगातार सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहता है। क्या उपाय करने चाहिए हालांकि, यदि आपको दक्षिण मुखी घर फल नहीं रहा है, तो उसके वास्तु दोषों को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न बनाने से लाभ होता है। पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति लगाई जा सकती है। गणेश जी की प्रतिमा को ऐसे लगाना चाहिए, जिससे उनकी पीठ न दिखे। मुख्य द्वार पर लाल रंग की डोरमैट रखने से भी लाभ मिलता है।

आचार्य चाणक्य से सीखें सफलता का मंत्र: हर इंसान को खुद से पूछने चाहिए ये 5 सवाल

हर इंसान जीवन में सफल होना चाहता है और इसके लिए भागता ही रहता है। आचार्य चाणक्य के अनुसार सफल होना है तो कुछ देर ठहरकर आत्ममंथन करना बहुत जरूरी है। अपने आप से कुछ सवाल करना जरूरी है ताकि कामयाबी की ओर कदम बढ़ा सकें। सफलता के लिए जरूरी है आत्म मंथन जीवन में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ आत्म मंथन की भी जरूरत होती है। जब तक इंसान को अपनी काबिलियत, हैसियत, और खुद की अहमियत का अंदाजा नहीं होगा, वो सही दिशा में कदम नहीं बढ़ा पाएगा। और बिना सही दिशा जानें तो सफलता की ओर एक पग बढ़ाना भी मुश्किल है। इसलिए अगर जीवन में सफल होना है, तो खुद के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है और ये आपसे बेहतर भला कौन जानता है। इसलिए आगे बढ़ना है तो थोड़ा सा ठहरना भी जरूरी है। शांत मन से खुद को टटोलना भी जरूरी है और कुछ सवालों के जवाब ढूंढना भी जरूरी है। आचार्य चाणक्य ने बताए सफलता के सूत्र आचार्य चाणक्य भारत के इतिहास में हुए उन विद्वानों में से एक हैं, जिनकी बातें आज भी लोगों का मार्गदर्शन करने का काम कर रही हैं। उन्होंने जीवन के लगभग हर एक पहलू पर अपने स्पष्ट विचार रखे। जीवन में कोई भी व्यक्ति कैसे सफलता पा सकता है, इसपर तो आचार्य ने खूब लिखा। उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि व्यक्ति को समय-समय पर खुद से कुछ जरूरी सवाल कर लेने चाहिए ताकि उसके सामने चीजें स्पष्ट हो सकें और वो अपने जीवन की सही राह चुन पाए। आइए जानते हैं आचार्य ने खुद से किन सवालों के जवाब तलाशने की बात कही है। कैसा चल रहा है समय हर इंसान के जीवन में उतार-चढ़ाव तो लगे ही रहते हैं। कभी सुख तो कभी दुख, जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। आपका समय कैसा चल रहा है, इसके बारे में समय-समय पर खुद से सवाल जरूर करते रहें। जीवन के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय, इस पर आत्ममंथन करें। अगर जीवन में दुख है तो किन कारणों से है, उससे बाहर निकलने का समाधान क्या है; ये आपको तभी पता चलेगा जब आप शांत मन से इस पर विचार करेंगे। कौन है आपका सच्चा मित्र आपका सच्चा मित्र कौन है, इसके बारे में भी इंसान को जानकारी होना बहुत जरूरी है। हर इंसान के जीवन में कई तरह के लोग होते हैं लेकिन सब पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेना समझदारी नहीं। अगर आपको जीवन में तरक्की पानी है, तो इंसान की परख होना जरूरी है। कौन सा इंसान आपका सच्चा साथी है और कौन सिर्फ दिखावे के लिए आपके साथ है, इस बात को भी आप तभी समझ पाएंगे जब खुद से एकांत में इसे लेकर सवाल करेंगे। कैसी जगह पर है आपका निवास स्थान इंसान जिस जगह पर रहता है, उस माहौल का उसके जीवन पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए अपने माहौल को अच्छा रखना जरूरी है। हर इंसान को खुद से ये सवाल करना चाहिए कि वह जिन लोगों के साथ उठ- बैठ रहा है, क्या वो उसके लिए सही हैं। आपके आसपास के माहौल का आपके जीवन पर पॉजिटिव असर पड़ रहा है या नेगेटिव, इसके बारे में विचार करना जरूरी है। अगर आपके माहौल का आपके जीवन पर नेगेटिव असर पड़ रहा है तो उसे बदलने का प्रयास करें। कितनी है कमाई और कितना है खर्च इंसान अपने जीवन में तरक्की तभी हासिल करता है, जब उसे अपनी कमाई और खर्च के बीच बैलेंस बनाना आता है। वो कहावत तो आप सब ने सुनी होगी 'उतने पैर पसारिए जितनी लंबी सौर', इस कहावत का अर्थ है कि आदमी को अपनी आमदनी को ध्यान में रखकर ही खर्चा करना चाहिए। हर इंसान को इस पर विचार जरूर करना चाहिए कि उसकी कमाई कितनी है और उसका खर्चा कितना है। साथ ही कोशिश करनी चाहिए की जितनी कमाई हो, खर्च उससे कम ही हो और बचत की जा सके। क्या है आपकी काबिलियत हर इंसान में अलग अलग गुण होते हैं। किसी को पढ़ाई में रुचि है तो किसी को संगीत में, कोई अच्छी आर्ट बना सकता है तो कोई स्वादिष्ट खाना। इसके अलावा हर इंसान का इंटरेस्ट ऑफ एरिया भी अलग-अलग होता है। कोई बिजनेस करना चाहता है तो कोई इंजीनियर बनना चाहता है, किसी को डॉक्टर बनना है तो कोई एक्टर बनने के सपने देखता है। ऐसे में जीवन में सफल होने के लिए हर इंसान को अपनी काबिलियत जरूर पहचाननी चाहिए। किस काम में आपका मन लगता है और कौन से काम को आप आसानी से कर सकते हैं, इस पर विचार जरूर करें। अपनी काबिलियत को पहचानकर ही भविष्य की प्लानिंग करें। इसके बाद आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

पितृपक्ष में खरीददारी से बचें! अगर जरूरी हो तो अपनाएँ ये आसान उपाय

  पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय हमारे पितरों को याद करने, तर्पण और दान करने के लिए माना गया है। इस काल में नया सामान खरीदने या नया काम शुरू करने को सामान्यतः अशुभ माना जाता है। इसके पीछे धार्मिक और व्यवहारिक दोनों कारण हैं। पितृपक्ष में नहीं खरीदना चाहिए नया सामान: पितृपक्ष पितरों को समर्पित काल है। यह समय भोग-विलास या नए कार्यों का नहीं बल्कि पितरों के प्रति कृतज्ञता, तर्पण और दान का माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए नए कार्य का फल पितरों को समर्पित हो जाता है। इस अवधि में वातावरण में श्राद्ध संस्कार, तर्पण और प्रेतात्माओं की स्मृति से जुड़ी ऊर्जा मानी जाती है। नया सामान खरीदना या नया कार्य शुरू करना स्थिरता और शुभ फल नहीं देता। लोक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि पितृपक्ष में खरीदे गए वस्त्र, आभूषण, भूमि या गृह निर्माण कार्य का फल स्थायी नहीं होता, या कार्य में बाधा आती है। पितृपक्ष में अवश्य खरीदना पड़े सामान तो क्या करें: कभी-कभी आवश्यक परिस्थितियों में खरीदारी करनी पड़ जाए तो ये उपाय करने चाहिए- गंगाजल या पवित्र जल छिड़क कर वस्तु को शुद्ध करें। पितरों को समर्पण करें। वस्तु को पितरों को मानसिक रूप से अर्पित करें और उनसे आशीर्वाद लेकर उपयोग करें। गोदान या ब्राह्मण सेवा करें। नए सामान खरीदने पर एक छोटा-सा दान (अन्न, वस्त्र या दक्षिणा) ब्राह्मण या गरीब को देना चाहिए। पितृपक्ष में नए कार्य का शुभारंभ टालें सामान खरीदना यदि अनिवार्य हो तो कर सकते हैं लेकिन उसका प्रथम उपयोग या कार्यारंभ पितृपक्ष के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है। पितृपक्ष में हर कार्य पितरों की तृप्ति के लिए माना जाता है इसलिए इस समय भोग-विलास, उत्सव और नये आरंभ से जुड़े कार्य वर्जित कहे गए हैं। लेकिन दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को देखते हुए कुछ वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। पितृपक्ष में न खरीदें ये सामान सुनार का सामान (सोना–चांदी, आभूषण, बहुमूल्य धातुएं) यह शुभ अवसरों के लिए होता है, जबकि पितृपक्ष शोक-श्राद्ध काल माना जाता है। नया मकान, भूमि या वाहन खरीदना इस अवधि में गृह प्रवेश, भूमि पूजन या वाहन क्रय को अशुभ माना जाता है। नए वस्त्र (शुभ अवसर हेतु) खासकर शादी, त्यौहार या मंगल कार्यों के लिए कपड़े खरीदना वर्जित है परंतु रोज़मर्रा के उपयोग हेतु सामान्य कपड़े खरीदे जा सकते हैं। शुभ मांगलिक कार्यों का सामान जैसे शादी का जोड़ा, मंगलसूत्र, सगाई की अंगूठी आदि। नया व्यापार आरंभ करने के उपकरण। यदि नया व्यापार शुरू करने के लिए सामान खरीदा जाए तो माना जाता है कि उसका फल पितरों को चला जाता है। पितृपक्ष में खरीदा जा सकता है ये सामान दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे अनाज, सब्ज़ी, दालें, फल आदि। घर के लिए आवश्यक सामान जैसे तेल, नमक, मसाले। श्राद्ध व पूजा के लिए सामग्री जैसे कुश, तिल, घी, धूप, पिंडदान हेतु सामग्री, पत्तल, कपड़े (दान हेतु)। आवश्यक जीवनोपयोगी सामान जैसे दवा, बच्चों की ज़रूरत की चीज़ें, किताबें, स्टेशनरी। टूटा-फूटा बर्तन बदलने के लिए नए बर्तन (यदि बहुत ज़रूरी हो)। यदि किसी को कपड़े की तत्काल ज़रूरत है तो साधारण वस्त्र ले सकते हैं पर शुभ अवसर वाले कपड़े नहीं। पितृपक्ष में जरूरी खरीद करने पर करें ये उपाय खरीदे गए सामान पर गंगाजल छिड़कें। पितरों को मानसिक रूप से अर्पित कर दान करें (थोड़ा अन्न, वस्त्र या दक्षिणा)। सामान का प्रथम उपयोग पितृपक्ष के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है।

पितृपक्ष में खरीददारी से बचें, अगर करना जरूरी हो तो अपनाएं ये उपाय

पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय हमारे पितरों को याद करने, तर्पण और दान करने के लिए माना गया है। इस काल में नया सामान खरीदने या नया काम शुरू करने को सामान्यतः अशुभ माना जाता है। इसके पीछे धार्मिक और व्यवहारिक दोनों कारण हैं। पितृपक्ष में नहीं खरीदना चाहिए नया सामान: पितृपक्ष पितरों को समर्पित काल है। यह समय भोग-विलास या नए कार्यों का नहीं बल्कि पितरों के प्रति कृतज्ञता, तर्पण और दान का माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए नए कार्य का फल पितरों को समर्पित हो जाता है। इस अवधि में वातावरण में श्राद्ध संस्कार, तर्पण और प्रेतात्माओं की स्मृति से जुड़ी ऊर्जा मानी जाती है। नया सामान खरीदना या नया कार्य शुरू करना स्थिरता और शुभ फल नहीं देता। लोक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि पितृपक्ष में खरीदे गए वस्त्र, आभूषण, भूमि या गृह निर्माण कार्य का फल स्थायी नहीं होता, या कार्य में बाधा आती है। पितृपक्ष में अवश्य खरीदना पड़े सामान तो क्या करें: कभी-कभी आवश्यक परिस्थितियों में खरीदारी करनी पड़ जाए तो ये उपाय करने चाहिए- गंगाजल या पवित्र जल छिड़क कर वस्तु को शुद्ध करें। पितरों को समर्पण करें। वस्तु को पितरों को मानसिक रूप से अर्पित करें और उनसे आशीर्वाद लेकर उपयोग करें। गोदान या ब्राह्मण सेवा करें। नए सामान खरीदने पर एक छोटा-सा दान (अन्न, वस्त्र या दक्षिणा) ब्राह्मण या गरीब को देना चाहिए। पितृपक्ष में नए कार्य का शुभारंभ टालें सामान खरीदना यदि अनिवार्य हो तो कर सकते हैं लेकिन उसका प्रथम उपयोग या कार्यारंभ पितृपक्ष के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है। पितृपक्ष में हर कार्य पितरों की तृप्ति के लिए माना जाता है इसलिए इस समय भोग-विलास, उत्सव और नये आरंभ से जुड़े कार्य वर्जित कहे गए हैं। लेकिन दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को देखते हुए कुछ वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। पितृपक्ष में न खरीदें ये सामान सुनार का सामान (सोना–चांदी, आभूषण, बहुमूल्य धातुएं) यह शुभ अवसरों के लिए होता है, जबकि पितृपक्ष शोक-श्राद्ध काल माना जाता है। नया मकान, भूमि या वाहन खरीदना इस अवधि में गृह प्रवेश, भूमि पूजन या वाहन क्रय को अशुभ माना जाता है। नए वस्त्र (शुभ अवसर हेतु) खासकर शादी, त्यौहार या मंगल कार्यों के लिए कपड़े खरीदना वर्जित है परंतु रोज़मर्रा के उपयोग हेतु सामान्य कपड़े खरीदे जा सकते हैं। शुभ मांगलिक कार्यों का सामान जैसे शादी का जोड़ा, मंगलसूत्र, सगाई की अंगूठी आदि। नया व्यापार आरंभ करने के उपकरण। यदि नया व्यापार शुरू करने के लिए सामान खरीदा जाए तो माना जाता है कि उसका फल पितरों को चला जाता है। पितृपक्ष में खरीदा जा सकता है ये सामान दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे अनाज, सब्ज़ी, दालें, फल आदि। घर के लिए आवश्यक सामान जैसे तेल, नमक, मसाले। श्राद्ध व पूजा के लिए सामग्री जैसे कुश, तिल, घी, धूप, पिंडदान हेतु सामग्री, पत्तल, कपड़े (दान हेतु)। आवश्यक जीवनोपयोगी सामान जैसे दवा, बच्चों की ज़रूरत की चीज़ें, किताबें, स्टेशनरी। टूटा-फूटा बर्तन बदलने के लिए नए बर्तन (यदि बहुत ज़रूरी हो)। यदि किसी को कपड़े की तत्काल ज़रूरत है तो साधारण वस्त्र ले सकते हैं पर शुभ अवसर वाले कपड़े नहीं। पितृपक्ष में जरूरी खरीद करने पर करें ये उपाय खरीदे गए सामान पर गंगाजल छिड़कें। पितरों को मानसिक रूप से अर्पित कर दान करें (थोड़ा अन्न, वस्त्र या दक्षिणा)। सामान का प्रथम उपयोग पितृपक्ष के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है।