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भारतीय संत नीम करोली बाबा की सादगी और सेवा भाव से प्रभावित हुई दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों की सोच और नेतृत्व शैली

नीम करोली बाबा एक भारतीय संत और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने अपनी सादगी, ज्ञान और प्रेम व सेवा की सीख से दुनिया के कई बड़े लोगों को प्रभावित किया. माना जाता है कि टेक दुनिया के दिग्गज जैसे स्टीव जॉब्स (Steve Jobs), मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) और जैक डोर्सी (Jack Dorsey) भी उनसे या उनके आश्रम से किसी न किसी तरह जुड़े रहे. इन लोगों का कहना है कि वहां का अनुभव उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ जैसा था, जिसने उनकी सोच और काम करने के तरीके को बदल दिया.  नीम करोली बाबा की सीख से इन तीनों ने एक मुकाम प्राप्त किया. नीम करौली बाबा की सीख आज भी लोगों को जीवन में शांति, सही दिशा और सकारात्मक सोच देने के लिए याद की जाती है. स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) स्टीव जॉब्स (Steve Jobs), जो Apple के को-फाउंडर थे, उन्होंने 1970 के दशक के बीच में उत्तराखंड के कैंची धाम स्थित नीम करोली बाबा के आश्रम का दौरा किया था. उस समय वे अपने जीवन और करियर को लेकर कुछ उलझन में थे और मानसिक शांति और सही दिशा की तलाश में भारत आए थे. हालांकि नीम करौली बाबा का निधन 1973 में हो चुका था, लेकिन जॉब्स ने आश्रम में कुछ समय बिताया और वहां के शांत माहौल को महसूस किया और बाबा के भक्तों से बातचीत की. इस यात्रा का उन पर गहरा असर पड़ा. बाद में उन्होंने बताया कि इस अनुभव ने उन्हें सादगी और फोकस का महत्व समझाया, जो आगे चलकर एप्पल (Apple) की डिजाइन सोच का बड़ा हिस्सा बना. जॉब्स ने इस अनुभव को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर किया और मार्क जकरबर्ग जैसे लोगों को भी उस जगह जाने की सलाह दी. मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) साल 2015 में मार्क जकरबर्ग ने बताया था कि उन्होंने स्टीव जॉब्स की सलाह पर नीम करौली बाबा के आश्रम का दौरा किया था. उस समय फेसबुक (Facebook) शुरुआती दौर में था और कई मुश्किलों का सामना कर रहा था, जिससे जकरबर्ग को कंपनी की दिशा को लेकर थोड़ा शक होने लगा था. ऐसे में स्टीव जॉब्स ने उन्हें सलाह दी कि वे भारत जाकर कैंची धाम आश्रम जाएं, ताकि उन्हें मानसिक शांति और सही सोच मिल सके. जकरबर्ग वहां गए और कुछ समय आश्रम में बिताया. वहां का शांत माहौल और अनुभव ने उन्हें अंदर से सुकून और एक नया उद्देश्य महसूस कराया. इस यात्रा के बाद उनका फेसबुक (Facebook) के मिशन- दुनिया को जोड़ने, पर भरोसा और मजबूत हो गया. बाद में उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें मुश्किल समय में आगे बढ़ने का हौसला और आत्मविश्वास दिया. जैक डोर्सी (Jack Dorsey) ट्विटर (अब X) के को-फाउंडर और पूर्व CEO जैक डोर्सी भी नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से प्रभावित माने जाते हैं, खासकर ध्यान और माइंडफुलनेस की सोच से. हालांकि उन्होंने कभी खुलकर यह नहीं बताया कि वे सीधे आश्रम गए थे, लेकिन उन्होंने कई बार कहा है कि भारतीय आध्यात्मिकता और ध्यान की परंपरा ने उनके जीवन और काम करने के तरीके पर असर डाला है. डोर्सी नियमित रूप से मेडिटेशन (ध्यान) करते हैं, जो नीम करोली बाबा की उस सीख से जुड़ा माना जाता है जिसमें मन की शांति और आत्म-जागरूकता पर जोर दिया जाता है. इसी वजह से उनका लीडरशिप स्टाइल भी ज्यादा शांत, संतुलित और फोकस्ड माना जाता है, जिससे उन्हें ट्विटर (Twitter) और स्क्वायर (Square) जैसी बड़ी कंपनियों को संभालने में मदद मिली. नीम करोली बाबा की शिक्षाएं नीम करोली बाबा की शिक्षाएं बहुत सरल और जीवन से जुड़ी हुई थीं. वे कहते थे कि हर इंसान से प्रेम और सम्मान से पेश आना चाहिए. जीवन का असली मतलब दूसरों की मदद करना है. उनके अनुसार, किसी से कुछ उम्मीद किए बिना सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है. वैश्विक स्तर पर नीम करोली बाबा की लोकप्रियता नीम करोली बाबा की लोकप्रियता सिर्फ टेक दुनिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सीख पूरी दुनिया में मानी जाती है. उनका आश्रम आज भी विदेशों से आने वाले लोगों, सेलेब्रिटीज, बिजनेस करने वालों और आध्यात्मिक शांति चाहने वालों को आकर्षित करता है. उनकी शिक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने में राम दास (Ram Das) की किताब Miracle of Love ने भी बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें उन्होंने नीम करोली बाबा के साथ अपने अनुभव साझा किए हैं. उनकी सोच खासकर टेक लीडर्स को इसलिए पसंद आती है क्योंकि यह तेज और तनाव भरी लाइफ के बीच शांति, फोकस और इंसानियत सिखाती है. इसी वजह से कई लोग उनकी शिक्षाओं को अपने काम और जीवन में अपनाने की कोशिश करते हैं ताकि वे ज्यादा बेहतर सोच, रचनात्मकता और दूसरों के प्रति समझ विकसित कर सकें. इसके अलावा भारत में भी कई बड़े लोग नीम करोली बाबा की आस्था से जुड़े हैं. जैसे क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी, बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा, दोनों ने अपने परिवार के साथ कैंची धाम आश्रम का दौरा किया था और वहां आशीर्वाद लिया था.

मीन राशि में चंद्रमा का गोचर, मेष, कर्क और वृश्चिक राशि वालों के लिए शुभ संकेत

 द्रिक पंचांग के अनुसार, आज (12 मई 2026) शांति के देवता चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे. मीन राशि जल तत्व राशि है, जो की बहुत ही संवेदनशील-आध्यात्मिक राशि मानी जाती है. वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक होता है, इसलिए इसका गोचर सीधे व्यक्ति के मूड, सोच और निर्णय पर असर डालता है. मीन राशि में चंद्रमा का गोचर खासतौर पर कल्पनाशक्ति, अंतर्ज्ञान और भावनात्मक गहराई को बढ़ाएगा. इस दौरान व्यक्ति आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित होता है. उसका मन ज्यादा गहराई से सोच सकता है. ऐसे में कुछ राशियों के लिए यह समय बेहद शुभ रहने वाला है. इन 3 राशियों के लिए शुभ रहेगा समय मेष राशि चंद्रमा का यह गोचर मेष राशि वालों के लिए राहत और सुकून लेकर आ सकता है. लंबे समय से चल रही मानसिक परेशानियां कम होंगी. आपको मन से शांति महसूस होगी, जिससे आपका फोकस काम पर ज्यादा रहेगा. ऑफिस में भी धीरे-धीरे स्थिति अच्छी हो जाएगी. यह समय भविष्य की प्लानिंग के लिए अच्छा रहेगा. कर्क राशि कर्क राशि के लिए यह गोचर भाग्य का साथ लेकर आ सकता है. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. जॉब या पढ़ाई से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. यात्रा के योग भी बन सकते हैं, जो लाभदायक साबित होंगे. आत्मविश्वास बढ़ेगा और निर्णय सही साबित हो सकते हैं. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय खुशियां लेकर आ सकता है. प्रेम जीवन में सुधार होगा. रिश्तों में मिठास बढ़ेगी. जो लोग क्रिएटिव फील्ड से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय खास फलदायी साबित हो सकता है. आर्थिक मामलों में भी सुधार के संकेत मिल सकते हैं. किन बातों का रखें ध्यान भावनाओं में बहकर बड़े फैसले लेने से बचें. खर्चों पर नियंत्रण रखें. ज्यादा सोचने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है. ध्यान और मेडिटेशन फायदेमंद रहेगा.

नर्सरी से लाने के बाद सूखने लगती है तुलसी? जानें एक्सपर्ट के बताए रिपोटिंग टिप्स और काले कीड़ों का रामबाण इलाज

लोग शिकायत करते हैं कि नर्सरी से लाने के बाद हरा-भरा तुलसी का पौधा सूखने लगता है या उसमें काले कीड़े लग जाते हैं। ऐसे में गार्डनिंग एक्सपर्ट ने तुलसी को सही तरीके से उगाने और उसे लंबे समय तक हरा-भरा रखने के कुछ खास सीक्रेट्स बताए हैं। जो आपके काम आएंगे। अक्सर लोगों का सवाल होता है कि नर्सरी से लाया हुआ हरा-भरा तुलसी का पौधा घर आते ही कुछ दिनों में सूख जाता है। अगर आप भी इस समस्या का सामना करते हैं तो यह जानकारी आपके काम आएगी। दरअसल, पौधे को लगाने के गलत तरीके और वातावरण में अचानक बदलाव के कारण वह शॉक में चला जाता है। एवर ग्रीन गार्डन की एक्सपर्ट ने तुलसी को हरा-भरा रखने और उसे काले कीड़ों से बचाने के कुछ खास सीक्रेट्स शेयर किए हैं। सभी जानते हैं कि तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में न केवल पूजनीय है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी बेमिसाल हैं। अब अगर आप पौधे की अच्छी ग्रोथ देखना चाहते हैं तो सबसे पहले उगाने का सही तरीका जानें। जब आप नर्सरी से पौधा लाते हैं, तो वह वहां के वातावरण का आदी होता है। अगर आप दोपहर की तेज धूप में पौधा लाए हैं, तो उसे तुरंत दूसरे गमले में न लगाएं। सबसे पहले उस पर थोड़ा सा पानी छिड़कें और उसे घर के वातावरण में सेट होने के लिए एक-दो दिन का समय दें। तुरंत मिट्टी बदलने से पौधे की जड़ें कमजोर हो सकती हैं। सही गमला और मिट्टी का चुनाव तुलसी के लिए 6 से 8 इंच का गमला सबसे अच्छा होता है। ध्यान रहे कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हो। मिट्टी तैयार करते समय 60% गार्डन सॉइल, 20% कोकोपीट और 20% वर्मीकंपोस्ट का मिश्रण बनाएं। कोकोपीट मिट्टी में नमी बनाए रखता है और वर्मीकंपोस्ट पौधे को जरूरी पोषण देता है। पौधा लगाने का सही तरीका गमले को पहले 3 से 4 इंच तैयार मिट्टी से भरें। अब तुलसी के पौधे को बीच में रखें और चारों तरफ से मिट्टी भरकर हल्के हाथों से दबाएं। गमले को ऊपर तक न भरें, बल्कि ऊपर से 2 इंच खाली रहने दें ताकि पानी और खाद देने की जगह बनी रहे। मिट्टी को दबाना इसलिए जरूरी है ताकि जड़ों के पास हवा के बुलबुले न रहें। एप्सम सॉल्ट और ह्मयूमिक एसिड पौधा लगाने के तुरंत बाद आधा चम्मच एप्सम सॉल्ट और आधा चम्मच ह्यूमिक एसिड डालें। एप्सम सॉल्ट पौधे को रिपोटिंग शॉक से बचाता है और पत्तियों को हरा रखता है, जबकि ह्यूमिक एसिड जड़ों के विकास में मदद करता है। ध्यान रहे कि इस प्रक्रिया को हर महीने केवल एक बार ही दोहराना है। पानी देने का नियम और सही जगह पौधा लगाने के बाद उसे भरपूर पानी दें। शुरुआत में इसे सेमी-शेड वाली जगह पर रखें, जहां सीधी तेज धूप न आती हो। दोबारा पानी तभी दें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए। तुलसी की जड़ों में बहुत ज्यादा पानी जमा होने से वे सड़ने लगती हैं, जिसे 'रूट रॉट' कहते हैं। काले कीड़ों से छुटकारा पाने का उपाय अगर तुलसी पर काले कीड़े लग गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आधा चम्मच हल्दी और थोड़ा सा डिशवॉश लिक्विड पानी में मिलाकर स्प्रे बोतल में भर लें। इसका छिड़काव पौधे पर करें। हल्दी एंटी-बैक्टीरियल होती है और कीड़ों को जड़ से खत्म कर देती है। छिड़काव के बाद अगले 24 घंटों तक पौधे पर सादा पानी न डालें।

12 मई 2026 राशिफल: सभी राशियों के लिए कैरियर, प्यार और पैसों की दिशा

मेष 12 मई के दिन जल्दबाजी में खर्च करने के बजाय सोच समझकर प्लान करना चाहिए। आप अपना आत्मविश्वास दोबारा कायम कर सकते हैं। अपने गोल्स की तरफ आगे बढ़ने और बदलाव लाने का एक दुर्लभ अवसर मिल सकता है। आपकी क्रिएटिविटी और बुद्धि ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं। वृषभ 12 मई के दिन सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों में पैसे खर्च हो सकते हैं। ऑफिस में लोग आपकी मेहनत और प्रयासों की तारीफ करेंगे। आपको पैसों के मामले में लाभ हो सकता है। कुछ की जिम्मेदारी बढ़ेगी, लेकिन साथ ही आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा। मिथुन 12 मई के दिन नौकरी पेशा करने वाले जातकों पर काम का दवाब रहेगा। इस दौरान आपको सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। आपको ट्रैवल या ड्राइव करते समय सावधान रहना चाहिए। कर्क 12 मई का दिन शुभ समाचार लेकर आ सकता है। आपके कमाई के साधन में वृद्धि होगी। व्यापारियों को मन चाहा लाभ होगा। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। इस दिन नौकरी पेशा करने वाले जातकों को नए अवसर मिलेंगे। सिंह 12 मई के दिन मन में नकारात्मक विचारों का प्रभाव भी हो सकता है। जिसके कारण आपका आर्थिक बजट बिगड़ सकता है। इस दौरान आप संतान की किसी बात से परेशान रहेंगे। किसी विशेष काम में आपको सफलता मिल सकती है। कन्या 12 मई के दिन काम के सिलसिले में ट्रैवल करना पड़ सकता है। सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों में पैसे खर्च हो सकते हैं। जिससे आर्थिक बजट गड़बड़ा सकता है। व्यापारियों को मनचाहा लाभ होगा। तुला 12 मई का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। आपको किसी काम में सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले जातकों को अच्छी खबर मिल सकती है। दिन की शुरुआत में खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। वृश्चिक 12 मई का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। दिन की शुरुआत में कुछ चुनौतियों आएंगी, जिनका सामना करना पड़ सकता है। आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। गुस्से और वाणी पर काबू रखें। धनु 12 मई का दिन मिला-जुला रहने वाला है। दिन की शुरुआत में आपको मेहनत का पूरा फल मिलेगा। मान-सम्मान बढ़ेगा। हालांकि दिन के अंत में पैसों के लेन-देन से बचें। शादीशुदा लोगों की जिंदगी में खुशियां रहेंगी। मकर 12 मई का दिन मिला-जुला रहने वाला है। दिन की शुरुआत में नौकरी करने वाले जातकों पर काम का दवाब रहेगा। इस दौरान आपको सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। कुंभ 12 मई का दिन खत्म होते-होते आपको मनचाहा लाभ मिल सकता है। किसी काम में लापरवाही करने से बचना चाहिए। नौकरी पेशा करने वाले जातकों को गुप्त शत्रुओं से बचना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जातकों के लिए यह दिन शुभ साबित हो सकता है। मीन 12 मई के दिन आपको अप्रत्याशित चुनौतियों और आकर्षक अवसरों दोनों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। यह आपकी क्षमता और स्किल्स को प्रेजेंट करने का समय है। अपने मन पर भरोसा रखें और अच्छे रिश्ते बनाने पर फोकस करें। बैलेंस बनाने पर फोकस करें।  

शनि-चंद्रमा की युति से बनेगा विष योग, इन राशियों पर बढ़ेगा संकट

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली में शनि और चंद्रमा एक साथ आ जाते हैं, तो इसे 'विष योग' कहा जाता है. इस योग को मानसिक तनाव, अस्थिरता और जीवन में उतार-चढ़ाव का संकेत माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 12 मई की शाम चंद्रमा कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे. उस समय पहले से ही मीन राशि में मौजूद शनि के साथ उनकी युति बन जाएगी. इसी वजह से विष योग सक्रिय हो जाएगा. इस दौरान कुछ राशियों को ज्यादा सावधानी रखने की सलाह दी जा रही है. क्योंकि इस समय तनाव, मानसिक दबाव और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. यह अशुभ योग 14 मई से ज्यादा भी देखने को मिल सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन राशियों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है. कर्क राशि कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, ऐसे में शनि के साथ उनकी युति आपके लिए थोड़ा तनावपूर्ण समय ला सकती है. इस दौरान मानसिक बेचैनी और चिंता बढ़ सकती है. कुछ लोगों को खांसी-जुकाम या छोटी स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं. इस समय मेहनत पर भरोसा रखें. किस्मत के भरोसे एकदम न चलें. उपाय: भगवान शिव की पूजा करें, इससे राहत मिल सकती है. सिंह राशि सिंह राशि वालों को इस समय खास सावधानी रखने की जरूरत है. वाहन चलाते समय सतर्क रहें. जोखिम लेने से बचें. पुरानी बीमारियां फिर से परेशान कर सकती हैं. आर्थिक मामलों में भी ध्यान रखना होगा. अनावश्यक खर्चों से बचें. सोच-समझकर निर्णय लें. उपाय: जरूरतमंदों की मदद करें और सेवा भाव रखें. तुला राशि तुला राशि वालों पर आलस्य हावी हो सकता है, जिससे काम में देरी हो सकती है. गले या पेट से जुड़ी हल्की समस्याएं परेशान कर सकती हैं. पारिवारिक जीवन में छोटी-छोटी बातों पर विवाद से बचना जरूरी होगा. इस समय धैर्य और संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है. उपाय: विष योग का प्रभाव कम करने के लिए मां पार्वती की पूजा करें. मीन राशि मीन राशि में ही यह विष योग बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. शरीर में थकान, जोड़ों में दर्द या नींद की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. घर और परिवार में भी बहस या तनाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए शांत रहना जरूरी होगा. उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें.

सोमनाथ मंदिर में विशेष पूजा और ध्वजारोहण, अमृत महोत्सव का भव्य समारोह

सोमनाथ सोमनाथ मंदिर में आज भव्य सोमनाथ अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए हैं। इस दौरान मंदिर में कई तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर परिसर में विशेष पूजा, कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह का आयोजन किया गया। सोमनाथ मंदिर का शिव पुराणों में भी विशेष महत्व बताया गया है। बता दें कि यह अमृत महोत्सव मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के शुभ अवसर पर मनाया जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं सोमनाथ अमृत महोत्सव क्या है साथ ही जानें इस मंदिर की पुराणों में क्या महिमा बताई गई है। सोमनाथ अमृत महोत्सव क्या है ? सोमनाथ मंदिर को सरदार वल्लभभाई पटेल ने वर्ष 1951 में पुनर्स्थापित किया था। साल 2026 में इस मंदिर को पुनर्स्थापित हुए पूरे 75 वर्ष हो चुके हैं। इसलिए यहां अमृ महोत्सव का आयोजन किया गया है। गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर में कई बार आक्रमण किए गए लेकिन, बार बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। भारत को आजादी मिलने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पहल कर इसका पुनर्निर्माण कराया था। इसका उद्घाटन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था। बात करें अमृत महोत्सव की तो अमृत के एक नाम सोम भी है और सोमनाथ का संबंध भी सोम से है यानी चंद्रमा से। शिवपुराण में इससे संबंधित कथा का भी वर्णन किया गया है। गणेशजी जब कुबेर का अभिमान नष्ट कर अपने घर कैलाश पर्वत पर लौट रहे थे उस समय चंद्रमा की रोशनी से पूरा कैलाश पर्वत चमक रहा था। तभी गणेशजी की सवारी मूषक के सामने से एक सर्प निकला तो वह डर गया और उस पर विराजमान गणेशजी अपना संतुलन खो कर गिर पड़े। तभी चंद्रमा ने यह सब होते देखा और वह जोर जोर से हंसने लगें। गणेशजी चंद्रमा पर बहुत क्रोधत हो गए ही वह उनकी मदद करने की जगह उनका उपहास कर रहे हैं। गणेशजी ने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि तुम्हें जिस चांदनी का गुरुर है आज के बाद तुम उसे खो दोगे और इस तरह चंद्रमा को क्षय रोग हो गया। चंद्रमा की सारी चांदनी चली गई। चंद्रमा ने गणेशजी से माफी मांगी तब गणेशजी का क्रोध शांत हुए तो उन्होंने कहा कि मैं श्राप को वापस नहीं ले सकता हूं लेकिन, तुम भगवान शिव की आराधना करो वह ही तुम्हें जीवन दान दे सकते हैं। जब चंद्रमा ने गुजरात में बालू से एक शिवलिंग बनाया और वहां भगवान शिव की आराधना की। चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें जीवनदान दे दिया जहां चंद्रमा को जीवनदान मिला था वह स्थान सोमनाथ है। बता दें कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से सोमनाथ को ही सबसे पहले ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां चंद्रदेव को कष्ट दूर हुए हैं इसलिए इस स्थान का नाम सोमनाथ पड़ा यानी चंद्रदेव के नाथ। सोमनाथ मंदिर का इतिहास 1026 ई में सोमनाथ मंदिर पर सबसे खतरनाक हमला महमूद गजनवी ने किया था। महमूद गजनवी ने मंदिर को बुरी तरह से लूटकर पूरा खंडहर बना दिया था। इसके बाद 1297 ई में अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने इस मंदिर को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। इसके बाद 1395 और 1412 में भी मंदिर पर हमला किया गया। औरंगजेब ने भी 1665 और वर्ष 1706 के बीच दो बार मंदिर पर हमला किया और मंदिर परिसर में पूजा पाठ पर रोक लगा दी। 18वीं सदी में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मूल मंदिर से कुछ दूरी पर एक नया मंदिर बनवाया। इसके बाद देश आजाद होने पर वर्ष 1951 में इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।

वास्तु शास्त्र: दरवाजों के पीछे सामान लटकाने से होने वाले दोष और उपाय

 हम अक्सर घर के कमरों को सजाते समय दरवाजों के पीछे की खाली जगह को स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं. खूंटियां लगाकर कपड़े टांगना, थैले लटकाना हमें सामान्य लगता है. लेकिन वास्तु शास्त्र की मानें तो ये छोटी सी लापरवाही आपके जीवन में बड़े वास्तु दोष पैदा कर सकती है. वास्तु के अनुसार, दरवाजे ऊर्जा के द्वार होते हैं. अगर इन द्वारों पर गलत चीजें लटकी हों, तो सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती, जिसका सीधा असर आपकी सेहत, तरक्की और जेब पर पड़ता है. दरवाजे पर सामान लटकाने से लगने वाले गंभीर दोष     जब दरवाजे के पीछे कपड़ों या भारी बैगों का ढेर होता है, तो दरवाजा पूरी तरह खुल नहीं पाता. वास्तु में इसे अवरोध दोष कहते हैं. यह दोष घर के सदस्यों के करियर में बाधाएं लाता है. इससे सफलता के नए रास्ते बंद हो जाते हैं.     दरवाजे पर भारी झोले या वजनदार चीजें लटकाने से घर में ऋण बढ़ता है. यह फिजूलखर्ची को बढ़ाता है, इंसान धीरे-धीरे कर्ज के बोझ तले दबने लगता है.     दरवाजे के पीछे लोहे की नुकीली चीजें, कैंची या औजार लटकाने से घर में कलह पैदा होती है. इससे परिवार के लोगों के बीच आपसी तालमेल बिगड़ता ह, इससे तनाव बना रहता है. भूलकर भी न लटकाएं ये 5 चीजें ढेर सारे कपड़े: दरवाजों पर कपड़ों का अंबार लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा जमा होती है. यह मानसिक भारीपन और चिड़चिड़ापन लाता है. दवाइयों का थैला: दवाइयां बीमारी का प्रतीक हैं. इन्हें दरवाजे पर लटकाने से घर में बीमारी का प्रभाव बना रहता है, आप पर इलाज का खर्च बढ़ता है. पुराने कैलेंडर: पिछले साल या पुराने महीनों के कैलेंडर लटकाए रखना आपकी प्रगति को रोक देता है.यह आपके समय को पीछे ले जाता है. गंदे जूते-चप्पल: दरवाजे के पीछे जूते-चप्पलों का ढेर राहु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे घर में अशांति आती है. गीले तौलिए या कपड़े: गीली चीजें नमी और राहु का प्रतीक हैं. इन्हें दरवाजे पर सुखाने से घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. ऐसे सुधारें दरवाजे का वास्तु दरवाजा रखें हल्का: कोशिश करें कि दरवाजे के पीछे कोई खूँटी न हो. कपड़ों के लिए अलग स्टैंड या अलमारी का उपयोग करें. सफाई है जरूरी: हफ्ते में एक बार दरवाजे के पीछे की धूल जरूर साफ करें. गंदगी दरिद्रता को बुलावा देती है. आवाज की मरम्मत: अगर दरवाजा खोलते समय 'चू-चू' की आवाज करता है, तो उसमें तुरंत तेल डालें. यह आवाज घर में क्लेश लाती है. शुभ प्रतीकों का प्रयोग: दरवाजे के ऊपर स्वास्तिक या ॐ का चिह्न लगाना शुभ होता है, लेकिन ध्यान रहे कि ये चिह्न पैरों के नीचे या किसी गंदी चीज के संपर्क में न आएं.

अपरा एकादशी 2026: तिथि, महत्व और व्रत विधि की संपूर्ण जानकारी

साल भर में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को मिलाकर लगभग 24 एकादशी आती हैं, लेकिन इनमें से अपरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है और इसे बहुत ही फलदायी माना गया है. इस वर्ष अपरा एकादशी 13 मई 2026, बुधवार को पड़ रही है. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 12 मई की दोपहर 2 बजकर 52 मिनट पर शुरू हो जाएगी. लेकिन हिंदू धर्म में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए व्रत 13 मई को ही रखा जाएगा. इसका पारण 14 मई को किया जाएगा. अपरा एकादशी का महत्व अपरा एकादशी को 'अपर' यानी अपार फल देने वाली एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को धन, सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है. साथ ही इसे ऐसा व्रत माना जाता है जो गुरु निंदा जैसे दोषों से भी मुक्ति दिलाने में सहायक होता है. श्रद्धा और भक्ति से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना गया है. व्रत की तैयारी इस व्रत की तैयारी एक दिन पहले से शुरू करनी चाहिए. 12 मई से ही सात्विक भोजन करना चाहिए और मन को शांत रखना चाहिए. इस दिन प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए. संभव हो तो रात्रि भोजन भी नहीं करना चाहिए और संयमित जीवनशैली अपनानी चाहिए ताकि व्रत का पूरा लाभ मिल सके. अपरा एकादशी पूजा विधि 13 मई को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए. इसके बाद श्री हरि विष्णु की मूर्ति या चित्र को पीले आसन पर स्थापित किया जाता है. भगवान को धूप, दीप, फल, पीले फूल, मिठाई और पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. तुलसी दल भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है, इसलिए इसका विशेष महत्व होता है. तुलसी से जुड़ा नियम एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है और ना ही तुलसी को जल अर्पित किया जाता है. इसलिए तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए ताकि पूजा में इसका उपयोग किया जा सके. व्रत के दौरान क्या करें इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है. इसके साथ व्रत कथा सुनना और भगवान की आरती करना भी महत्वपूर्ण होता है. संभव हो तो प्रसाद अधिक से अधिक लोगों में वितरित करना चाहिए, जिससे पुण्य फल बढ़ता है. क्या ना करें इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है. यदि कोई व्यक्ति व्रत न भी रखे, तब भी चावल खाने से परहेज करना शुभ माना जाता है. इस दिन क्रोध, नकारात्मक विचार और गलत बोलचाल से बचना चाहिए ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके.

घर में चींटियों का दिखना शुभ या अशुभ? वास्तु शास्त्र में जानिए इसके संकेत

 गर्मियों का मौसम का शुरू होते ही घर में छोटे छोटे कीड़े-मकोड़े दिखने लगते हैं. लेकिन, वास्तु शास्त्र के अनुसार, इन कीड़े-मकोड़े में से कुछ ऐसे जीव हैं, जिनका दिखना शुभ या अशुभ माना जाता है. इन्हीं में चींटियों का घर में आना भी खास माना गया है. माना जाता है कि चींटियों का घर में आना केवल साधारण बात नहीं है, बल्कि यह भविष्य में होने वाली कुछ अच्छी या बुरी घटनाओं का इशारा भी हो सकता है. दरअसल, चींटियों को मेहनत, एकता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इनका घर में आना कई बार सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, काली और लाल रंग की चींटियां अलग अलग फल देती हैं. काली चींटियों की शुभ दिशा वास्तु शास्त्र के मुताबिक, काली चींटियां घर की पश्चिम दिशा से निकलती दिखाई दें, तो इसे शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि यह विदेश यात्रा, बड़े अवसरों और धन लाभ का संकेत हो सकता है. काली चींटियों को समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है. अनाज के आसपास चींटियां दिखना वास्तु के अनुसार, यदि चींटियां चावल या अनाज के बर्तन में दिखें, तो इसे बहुत शुभ संकेत माना जाता है. इससे धन लाभ और घर में समृद्धि बढ़ने की संभावना बताई जाती है. लाल चींटियां अगर लाल चींटियां अपने मुंह में अंडे लेकर घर से बाहर जाती दिखें, तो इसे भी अच्छा संकेत माना जाता है. माना जाता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है. दीवार और छत पर चींटियां चलना वहीं यदि चींटियां घर की दीवार पर ऊपर की ओर जाती दिखें, तो इसे जीवन में तरक्की, सुख और शांति का संकेत माना जाता है. लेकिन अगर वही चींटियां नीचे की ओर आती दिखें, तो इसे थोड़ी नकारात्मक स्थिति या रुकावट का संकेत माना जाता है. अगर चींटियां छत से निकलती दिखाई दें, तो इसे धन लाभ और संपत्ति बढ़ने का संकेत माना जाता है. इसके अलावा वैवाहिक जीवन में सुख और संतान से जुड़े मामलों में सुधार की भी संभावना बताई जाती है.

महाभारत के श्राप और कलयुग का संबंध, युधिष्ठिर से लेकर अश्वत्थामा तक की कथाएं

महाभारत सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि जीवन का एक बड़ा ग्रंथ माना जाता है. यह कौरवों और पांडवों के बीच हुआ युद्ध था, जो धर्म और अधर्म की लड़ाई का प्रतीक है. इसमें हमें कर्म, सत्य, रिश्तों और निर्णयों के परिणाम के बारे में गहरी सीख मिलती है. इस दौरान कई ऐसे श्राप दिए गए, जिन्हें लेकर मान्यता है कि उनका असर आज के कलयुग में भी देखा जाता है. इन श्रापों को लोग कर्मों के फल और चेतावनी के रूप में देखते हैं. तो आइए विस्तार से जानते हैं उन श्रापों के बारे में. युधिष्ठिर ने दिया था समस्त नारी जाति को श्राप महाभारत की कथानुसार, जब कर्ण की मृत्यु हुई थी, तब उसकी अंतिम क्रिया के समय कुंती ने पांडवों को बताया कि कर्ण उनका बड़ा भाई था. यह सच जानकर युधिष्ठिर को बहुत दुख और पछतावा हुआ, क्योंकि उन्होंने अपने ही भाई के खिलाफ युद्ध किया था. युधिष्ठिर को लगा कि अगर यह सच पहले पता होता, तो महाभारत का युद्ध टल सकता था. उन्होंने गुस्से में आकर कहा कि आगे से कोई भी महिला किसी बात को पूरी तरह छुपाकर नहीं रख पाएगी. इस कथा के आधार पर माना जाता है कि महिलाएं कोई भी बात ज्यादा समय तक छिपाकर नहीं रख पाती हैं. हालांकि, यह सिर्फ एक पौराणिक मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. राजा परीक्षित को मिला था मृत्यु का श्राप कथानुसार, राजा परीक्षित की कहानी महाभारत के बाद की मानी जाती है और इसे कलयुग की शुरुआत से भी जोड़ा जाता है. एक बार राजा परीक्षित शिकार के लिए जंगल गए था. वहां उन्हें शमीक ऋषि ध्यान में लीन दिखाई दिए. राजा ने कई बार उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन ऋषि मौन व्रत में थे, इसलिए उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इससे नाराज होकर परीक्षित ने गुस्से में आकर एक मरा हुआ सांप उठाया और ऋषि के गले में डाल दिया. जब यह बात ऋषि के पुत्र को पता चली, तो उन्होंने क्रोधित होकर राजा को श्राप दे दिया कि 7 दिनों के भीतर सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी. कहा जाता है कि श्राप के अनुसार 7वें दिन तक्षक नाम के नाग ने राजा परीक्षित को डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी. श्रीकृष्ण ने दिया था अश्वत्थामा को श्राप महाभारत की कथा के मुताबिक, अपने पिता दौणाचार्य की मृत्यु के प्रतिशोध में आकर अश्वत्थामा ने सोते हुए पांडवों के पुत्रों (उपपांडवों) की हत्या कर दी थी. यह कृत्य युद्ध के नियमों के खिलाफ माना गया था. साथ ही, उन्होंने उत्तरा के गर्भ को भी नष्ट करने की कोशिश की, ताकि अर्जुन का वंश समाप्त हो जाए. इस घटना से दुखी और क्रोधित होकर श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को कठोर श्राप दिया था. श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप देते हुए कहा कि वे कभी मर नहीं पाएंगे और कलयुग के अंत तक धरती पर भटकते रहेंगे. लोक मान्यताओं के अनुसार, अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और अलग-अलग जगहों पर उनके दिखने की कहानियां सुनने को मिलती हैं, हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं है. कलयुग की अवधि क्या है? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कलयुग की कुल अवधि लगभग 4,32,000 साल मानी गई है. कहा जाता है कि इसकी शुरुआत भगवान कृष्ण के पृथ्वी से जाने के बाद, करीब 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. अब तक इसके हजारों साल बीत चुके हैं और यह युग अभी लंबे समय तक चलेगा.