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बिजली संकट पर सख्त हुए योगी, अफसरों को दी सुधार की अंतिम चेतावनी

लखनऊ बिजली की आंख मिचौली से खफा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ट्रिपिंग, ओवरबिलिंग और अनावश्यक कटौती किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। विद्युत आपूर्ति के लिए व्यवस्था में सुधार करना ही होगा वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री योगी ने यहां ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था अब केवल तकनीकी या प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और शासन की संवेदनशीलता का पैमाना बन चुकी है। सीएम ने शिकायतों पर जताई नाराजगी  बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जून 2025 में उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड 31,486 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग सफलतापूर्वक पूरी की। इस अवधि में 16,930 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई। लगातार बढ़ रही उमस (ह्यूमिडिटी) और तापमान ने खपत को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाया, इसके बावजूद शहरी क्षेत्रों में औसतन 24 घंटे, तहसील स्तर पर 21.5 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने ट्रिपिंग की लगातार आ रही शिकायतों पर गहरी नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि प्रत्येक फीडर की तकनीकी जांच हो, कमजोर स्थानों की पहचान कर तुरंत सुधार कराया जाए।  ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता तुरंत बढ़ाई जाएः योगी  सीएम ने कहा कि जहाँ ज़रूरत हो, वहां ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता तुरंत बढ़ाई जाए ताकि ओवरलोडिंग की स्थिति न बने। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि फील्ड से प्राप्त वास्तविक शिकायतों का समाधान समयबद्ध ढंग से हो, ताकि जनता को राहत मिले। उन्होंने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है, सरकार ने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड बजट उपलब्ध कराया है। ऐसे में किसी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों से उनके क्षेत्रों की आपूर्ति की स्थिति जानने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।  बिलिंग व्यवस्था पर ये बोले सीएम योगी  बिलिंग व्यवस्था पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘हर उपभोक्ता को हर महीने सही समय पर स्पष्ट और सटीक बिल मिलना चाहिए। फॉल्स या ओवरबिलिंग जैसी शिकायतें जन विश्वास को तोड़ती हैं और विभाग की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। यह किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए। बिलिंग एफिशिएंसी बढ़ाई जाए। उन्हें जानकारी दी गई कि अब तक 31 लाख उपभोक्ता स्माटर् मीटर से जोड़े जा चुके हैं और इस प्रक्रिया को ब्लॉक स्तर तक ले जाने का कार्य तेज़ी से जारी है। योगी ने तकनीकी और वाणिज्यिक हानियों (लाइन लॉस) को चरणबद्ध रूप से नीचे लाने का लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर डिस्कॉम को अपने स्तर पर ठोस रणनीति बनाकर काम करना होगा। साथ ही, जहां आवश्यक हो, पारेषण व वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया भी गति पकड़े।  

योगी आदित्यनाथ का ऐतिहासिक कीर्तिमान: यूपी की सत्ता में सबसे लंबे समय तक रहने वाले सीएम बने

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नया इतिहास रच दिया है। वे अब राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने इस मामले में प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। अब तक योगी आदित्यनाथ 8 साल और 132 दिन तक मुख्यमंत्री पद पर रह चुके हैं, जबकि गोविंद बल्लभ पंत ने कुल 8 साल और 127 दिन (स्वतंत्रता से पहले और बाद को मिलाकर) तक यह जिम्मेदारी निभाई थी। 19 मार्च 2017 को ली थी मुख्यमंत्री पद की शपथ मिली जानकारी के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। फिर 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को दोबारा बहुमत मिला और वे लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। वे पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने यूपी में पूरा कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सीएम पद संभाला है। योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक सफर योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 22वें मुख्यमंत्री हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं और साथ ही गोरखनाथ मठ के महंत (मुख्य पुजारी) भी हैं। उन्होंने 1998 में सिर्फ 26 साल की उम्र में गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीता और संसद पहुंचे। वे लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद चुने गए। 2017 के चुनाव से सीएम बनने तक 2017 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ भाजपा के सबसे चर्चित और लोकप्रिय चेहरों में शामिल थे। चुनाव में पार्टी को भारी बहुमत मिला और उन्हें मुख्यमंत्री चुना गया। इसके बाद 2022 में एक बार फिर भाजपा को जीत मिली और वे फिर से मुख्यमंत्री बने।   अब अगला चुनाव 2027 में उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होगा। अगर योगी आदित्यनाथ तब तक मुख्यमंत्री बने रहते हैं, तो उनका कार्यकाल और भी लंबा हो जाएगा और यह रिकॉर्ड और मजबूत होगा।  

PWD अफसर होश में रहो! बिना बुलाए पुल उद्घाटन पर दयाशंकर सिंह का तीखा वार

लखनऊ  यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अपने निर्वाचन क्षेत्र बलिया में एक नवनिर्मित पुल को जनता के लिए बिना बताए खोलने पर पीडब्ल्यूडी के एक इंजीनियर को जमकर फटकार लगाई. दयाशंकर ने मौके पर मौजूद अधिशासी अभियंता को फटकार लगाते हुए कहा, "ज्यादा दिमाग न खराब हो. मैं यहां का विधायक और मंत्री हूं. आपने मुझे बिना बताए पुल खोल दिया. मुझे पता है कि आप किसके इशारे पर काम कर रहे हैं." हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन वह संभवतः इंजीनियर पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह के इशारे पर काम करने का आरोप लगा रहे थे. मंत्री ने कहा, "क्या आप यहां से चुनाव लड़ रहे हैं? क्या बसपा आपको टिकट दे रही है? हो सकता है कि विधायक आपको टिकट दिलाने में मदद कर रहे हों."   उन्होंने बाद में पत्रकारों को बताया कि अधिशासी अभियंता ने पहले बार-बार अनुरोध के बावजूद पुल न खोलने के लिए औपचारिक परीक्षण और प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव का हवाला दिया था. लेकिन मंगलवार को अचानक, लोक निर्माण विभाग के मामलों में दखल देने वाले और जिनकी बातों में ये इंजीनियर चलते हैं, किसी ऐसे व्यक्ति के प्रभाव में आकर, बिना हमारी अनुमति या सूचना के पुल खोल दिया गया- ताकि हमें श्रेय न मिले.   मंत्री ने आगे कहा, "इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी जाएगी. उन्होंने इलाके में लोक निर्माण विभाग की विश्वसनीयता पर भी चिंता जताई और कहा, "2015 से, पूर्व भुगतान के बावजूद यहां एक नाली तक नहीं बनी है. इस सरकार में कोई अधिकारी इतना शक्तिशाली कैसे हो सकता है? वह मंत्री, विधायक और यहां तक कि नगर पालिका अध्यक्ष की भी अनदेखी कर रहा है. ज़रूर कोई उच्च सुरक्षा वाला होगा." बता दें कि मंत्री दयाशंकर सिंह बीती रात को बलिया के कटहल नाले पर बने पुल का निरीक्षण करने पहुंचे थे. तभी उन्हें पता चला कि बिना उद्घाटन के ही इसे जनता के लिए खोल दिया गया. इस बात से वो मौके पर मौजूद इंजीनियर के ऊपर उखड़ गए.  वहीं, पूरे मामले में पीडब्ल्यूडी के एक्सइन ने कहा कि पुल का उद्घाटन नहीं हुआ है, केवल पुल और सड़क को चालू किया गया है, जिससे कि आवागमान सुचारु रूप से हो सके. चूंकि, बाढ़ आई हुई है और कटहल नाला भरा हुआ है, पुराना पुल जो था उसके एप्रोच की मिट्टी सरक रही थी. पुल पर खतरा हो सकता था. इसलिए पुराने पुल को बंद करके नए पुल को चालू कर दिया गया ताकि कोई हादसा न हो. 

UP में भारी बारिश के कहर को देखते हुए लिया गया फैसला, फिर बढ़ीं स्कूलों की छुट्टियां!

पीलीभीत उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में हुई मूसलधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया। जिले में लगातार हो रही बारिश और स्कूलों में जलभराव की स्थित को देखते हुए कक्षा 1 से 8 तक संचालित सभी परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, सहायता प्राप्त स्कूलों और सभी बोर्डों से मान्यता प्राप्त स्कूलों को 6 अगस्त और 7 अगस्त को बंद कर दिया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर यह फैसला लिया गया, जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।  शहर की सड़केंगलियां, कॉलोनियां और बाजार पानी से लबालब हो गए हैं। बारिश का पानी घरों के अंदर तक घुस गया, जिससे लोग अपने ही घरों में कैद हो गए हैं। मेन मार्केट, स्टेशन रोड, राजबाग कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में पानी भर गया है। नालियों की सफाई ना होने और अधूरे नाले निर्माण ने हालात को और भी बिगाड़ दिया है। नगर प्रशासन द्वारा राहत कार्य शुरू कर दिया गया है, लेकिन तेजी से जलनिकासी ना होने के कारण स्थिति अभी भी नियंत्रण से बाहर दिखाई दे रही है  

BJP पर गंभीर आरोप: अखिलेश बोले- नकली आधार बनाने की मशीनें हैं इनके पास

लखनऊ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आधार कार्ड लेकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि बीजेपी वाले नकली आधार बनाने की मशीन रखते हैं. नकली आधार बनाकर नकली वोटर आईडी बनाते हैं. इनकी मशीन छीनी जाए. इतना ही नहीं अखिलेश ने चुनाव आयोग से नई मांग की है. उनका कहना है कि चुनाव आयोग को वोटर आईडी और आधार कार्ड मैटल का बनाना चाहिए. अखिलेश ने इसके पीछे तर्क दिया कि मैटल के आईडी होंगे तो कोई चुनाव के दिन फर्जी नहीं बना सकेगा. आधार पर हमारा सबकुछ निर्भर करता है. वही हमारी पूरी पहचान है. असली-नकली की पहचान के लिए मशीनें बना ही सकते हैं. टेक्नोलॉजी इतनी आसान है, सस्ती है. चुनाव आयोग को सुधार करना चाहिए, सरकार को हमारी मांग माननी चाहिए. सपा मुखिया ने कहा कि यूपी के पिछले चुनावों की बात करते हुए कहा कि डीजीपी हटते थे, गृह सचिव, डीएम, एसपी हटते थे. ये पोस्ट होते हैं कि चुनाव कौन लूट सकते हैं. जो चुनाव अच्छी तरह लूट सकता है, उसे अच्छी पोस्टिंग दी जाती है. हमारी पार्टी ने सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग को टैग करके शिकायत की है लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

स्वामी प्रसाद मौर्य को थप्पड़ मारने की हिमाकत, रायबरेली में दो युवक भीड़ के गुस्से का शिकार

रायबरेली यूपी के रायबरेली में आज अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य का स्वागत करने के बहाने आए दो युवकों ने उन पर थप्पड़ जड़ दिए। इससे नाराज कार्यकर्ताओें ने आरोपी युवकों को दौड़ा कर पीटा। पुलिस को मामला शांत कराने में पसीने छूट गए। काफी देर तक मौके पर अफरातफरी का माहौल रहा। अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य बुधवार को फतेहपुर जा रहे थे। इस दौरान वह रायबरेली में रुके। शहर के सारस चौराहे पर कार्यकर्ता उनका स्वागत कर रहे थे। इसी दौरान दो युवकों ने मौर्य के थप्पड़ जड़ दिए। इससे नाराज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आरोपी युवकों को दौड़ा दौड़ा कर पीट दिया। इस दौरान पुलिस को मामला शांत कराने में छूटे पसीने। काफी देर तक मौके पर अफरातफरी का माहौल रहा। पुलिस आरोपी युवकों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।  

उद्योगों को बढ़ावा: यूपी में फुटवियर यूनिट्स को ज़मीन, बिजली और पूंजी पर बड़ी छूट

लखनऊ योगी सरकार ने फुटवियर और लेदर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए पहली बार “यूपी फुटवियर नीति” तैयार की है। इस नीति के तहत ज़मीन, बिजली और पूंजी निवेश पर भारी छूट दी जाएगी। 150-200 करोड़ तक के निवेश पर कंपनियों को 30-50% पूंजी सब्सिडी मिलेगी। बुलंदशहर व अन्य ज़िलों में ज़मीन पर 35%, बिजली दरों पर 50% तक छूट दी जाएगी। मशीनरी पर GST की आंशिक वापसी होगी और 200 नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होंगे। 700 करोड़ से अधिक निवेश सीएम योगी ने यह सुझाव दिया कि यदि डिजाइन, अनुसंधान, उत्पादन के साथ-साथ प्रशिक्षण को एकीकृत किया जाए तो यह क्षेत्र न केवल बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित कर सकता है। सरकार का लक्ष्य 10 लाख से अधिक रोजगार उपलब्ध कराना है। 700 करोड़ से अधिक निवेश और यूपी को फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। योगी ने फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स जैसी अधोसंरचना सुविधाओं की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेष प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए सीएम योगी ने कहा कि इस नीति के तहत न केवल लेदर और नॉन-लेदर फुटवियर निर्माण इकाइयों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मशीनरी निर्माण, विशेष रूप से चमड़ा सिलाई, कटिंग, मोल्डिंग और नॉन-लेदर सेफ्टी शूज़ बनाने वाली तकनीकों से संबंधित इकाइयों को भी समर्थन मिलना चाहिए। हील्स, थ्रेड्स, टैग्स, इनसोल, लेस, केमिकल्स,लेबल्स के निर्माण को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

मकान निर्माण पर बढ़ा बोझ: LDA ने ‘चढ़ावे’ के नाम पर बढ़ाया शुल्क

लखनऊ राजधानी में अब मकान का नक्शा पास करना और महंगा हो जाएगा. पूरे लखनऊ शहर के लोगों को अब मकान का नक्शा पास कराते समय सुख-सुविधा शुल्क देना होगा. एलडीए ने इसकी दरें भी करीब तीन गुना बढ़कर 200 से 500 प्रति वर्ग मीटर कर दी है. यह शुल्क शहीद पथ, किसान पथ और ग्रीन कॉरिडोर के विकास के नाम पर देना होगा. पहले यह शहीद पथ और किसान पथ के अगल-बगल 250 मीटर के दायरे में मकान बनवाने वालों से ही लिया जाता था. ये फैसला मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की अध्यक्षता में हुई एलडीए बोर्ड की बैठक में लिया गया. बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकारी विभागों द्वारा बनाई गई 7:50 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे भी मकान का नक्शा पास होगा, बस मार्ग 200 मीटर लंबा होना चाहिए. एलडीए की इस बैठक में दो और योजनाओं को भी मंजूरी मिली है, जिनमें बीकेटी में विकसित की जाने वाली नैमिष नगर योजना के साथ-साथ आगरा एक्सप्रेस-वे की वरुण विहार योजना शामिल है. वरुण विहार योजना को 2664 हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा. साथ ही नैमिषनगर योजना को 1084 हेक्टेयर में पूरा करने की तैयारी है. इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की बैठक में ऐशबाग, बसंतकुंज, विराजखंड, गोमतीनगर जैसे क्षेत्रों में भी विकास की योजनाओं पर चर्चा की गई. यहां के सेक्टर-4 में एलडीए की तरफ से सुख-सुविधाओं से लैस अपार्टमेंट बनाए जाएंगे.

मंदिर प्रवेश पर सरकार की शर्त: सिर्फ सनातनी हिंदुओं को ही मिले अनुमति, सुप्रीम कोर्ट में रखी दलील

नई दिल्ली. बांके बिहारी मंदिर के मैनैजमेंट के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति पर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सहमति जताई है। इसके साथ ही यूपी सरकार ने यह मांग भी रखी है कि इस समिति का नेतृत्व करने वाले सेवानिवृत्त जज सनातनी हिंदू होने चाहिए। इसका अर्थ हुआ कि किसी अन्य पंथ या मजहब को मानने वाले को समिति के मुखिया के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह समिति तब तक मंदिर का प्रबंधन करेगी, जब तक इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से मंदिर में कॉरि़डोर निर्माण और अन्य सुविधाओं के लिए यूपी सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश पर फैसला नहीं हो जाता। यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की बेंच से कहा है कि हमें अंतरिम समिति के गठन से कोई आपत्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव है कि हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को समिति का मुखिया बना दिया जाए। इस पर यूपी सरकार का कहना है कि हमें सभी शर्तें स्वीकार हैं, लेकिन पैनल का हेड उसी व्यक्ति को बनाया जाए, जो आस्था से सनातनी हिंदू हो। इस समिति के मुखिया के पास मंदिर के प्रशासन का जिम्मा होगा। इसके अलावा मंदिर के फंड का भी वह मैनेजमेंट कर सकेगा और उसके विकास पर उसे खर्च करने की अनुमति देगा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंदिर के लिए बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए सरकार की ओर से फंडिंग की जाएगी। इसके अलावा आधा हिस्सा मंदिर ट्रस्ट से भी लेने की तैयारी है। इसके लिए अध्यादेश लाया गया है और मंदिर प्रशासन ने इसे ही चुनौती दी है। वहीं यूपी सरकार का कहना है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के लिए भी ऐसी ही नीति का पालन किया गया था। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम समिति की बात रखी है, जो अध्यादेश की वैधता पर फैसले तक काम करेगी। इस पर सरकार ने कहा कि हम समिति के लिए तैयार हैं, लेकिन उसका मुखिया ऐसा शख्स होना चाहिए, जो खुद एक सनातनी हिंदू हो। ऐसा इसलिए ताकि श्री बांके बिहारी जी महाराज की गरिमा और पवित्रता बनी रह सके।

यूपी पंचायत चुनाव में गड़बड़ी! पोर्टल से हटाई गईं पंचायतें, 50 हजार लोग नहीं कर सकेंगे मतदान

प्रतापगढ़ पंचायत चुनाव होने में अभी वक्त है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इस पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मतदाता पुनरीक्षण का काम भी जोर पकड़ने लगा है। जनगणना के पहले निर्वाचन आयोग ने पोर्टल से 45 मिनी पंचायतों का नाम हटा दिया गया है। पहले 1,193 ग्राम पंचायतें पोर्टल पर थीं, मगर अब 1,148 ग्राम पंचायतें की बची हैं। वर्ष 2020-21 में पंचायत चुनाव हुआ था। इस दौरान 26 लाख 19 हजार 516 मतदाताओं ने मतदान किया था। इस दौरान निर्वाचन आयोग की पोर्टल पर 1,193 ग्राम पंचायतों का ब्योरा दर्ज था। इसमें 45 ग्राम पंचायतें निकाय में शामिल हो गईं। इसमें मानधाता ब्लाक के पूरे तोरई, सराय देवराय, गौरा, छतौना, सराय हरि नारायण, लाखापुर, मानधाता, मिश्रपुर तरौल, अहिना, जिलौली, गंभीरा, सराय भूपत, बगियापुर, पूरे मोतीलाल और जगदीशपुर शामिल हुआ है। साथ ही सदर के राजापुुर कला, बाबागंज के बहोरिकपुर, जगापुर, फतूहाबाद, ऐंधा, कालाकांकर के चौरही, बजहाभीट, मिरगड़वा, लाटतारा, संडवा चंद्रिका के गड़वारा, भदौसी, शिवराजपुर, डंगरी, चौरा, आशापुर निकाय में शामिल हुईं। जनगणना के पहले निर्वाचन आयोग ने 45 ग्राम पंचायतों का नाम पोर्टल से हटा दिया है। पोर्टल पर कुल 1,148 ग्राम पंचायतें ही दिख रही हैं। पंचायतों का नाम हटाने से इस बार के पंचायत चुनाव में बूथ और मतदान केंद्रों में कमी आना भी स्वाभाविक है। चुनाव में लाखों रुपये खर्च होने से बचत हो सकेगी। अतिरिक्त मतदान कार्मिक नहीं लगाए जाएंगे। इस मुहल्ले के लोग अब निकाय चुनाव में सहभागी बन सकेंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी/एडीएम आदित्य प्रजापति ने बताया कि जनगणना शुरू होने के पहले आधा दर्जन से अधिक निकायों में शामिल 45 ग्राम पंचायतों का नाम निर्वाचन आयोग की पोर्टल से हटाया गया है। निर्वाचन आयोग से यह कार्रवाई हुई है। अब पोर्टल पर केवल 1,148 ग्राम पंचायतों का ही ब्योरा दिख रहा है।