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अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े हों युवा अधिवक्ता: मुख्यमंत्री योगी

रूल ऑफ माफिया से मुक्त हुआ यूपी, अब रूल ऑफ लॉ का राज: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने मेधावियों को दिए पदक   अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े हों युवा अधिवक्ता: मुख्यमंत्री योगी   सत्यं वद, धर्मं चर को चैंबर की दीवार पर नहीं, हृदय में उतारें, संविधान को बनाएं मार्गदर्शक   शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन रखें, मुख्यमंत्री योगी ने याद दिलाए डॉ. लोहिया के विचार   एआई को सहायक बनाएं, सारथी नहीं, अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से ही होगा   75 जिलों में साइबर थाने, एआई प्रज्ञा से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण, 2029-30 तक यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश 'रूल ऑफ माफिया' से मुक्त हुआ है और 'रूल ऑफ लॉ' लागू हुआ है। वर्ष 2017 से पहले कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह रहता था। माफिया से विकास बाधित था। सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर प्रदेश की छवि बदली है। कोई व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं है। फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है।   मुख्यमंत्री योगी शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने मेधावियों को पदक दिए।   आपातकाल ने समझाया कानून और शासक के शासन का अंतर मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ 25 जून 1975 भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण तारीख है। आपातकाल ने 'रूल ऑफ लॉ' और 'रूलर ऑफ लॉ' का अंतर समझाया। न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया निर्णय इतिहास में स्थान बनाता है। युवा अधिवक्ताओं को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।   सत्यं वद, धर्मं चर को हृदय में उतारें मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः' को चैंबर की दीवार पर नहीं, हृदय में उतारें। सत्य और निरंतर अध्ययन अधिवक्ता के जीवन का आधार हो। डॉ. लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए।   विकसित भारत की पैरवी करें युवा अधिवक्ता मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया। कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस दावे की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी से करनी होगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका होगी। प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना तैयार है।   एआई को सहायक बनाएं, सारथी नहीं मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से होना चाहिए। लापरवाह मसौदे से निर्दोष व्यक्ति को स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है। डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता की चुनौती पैदा की है। प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं। 'एआई प्रज्ञा' से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।   अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, जड़ों से जुड़े रहने और निरंतर अध्ययन की सीख दी। कहा कि गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान दें। गलत काम का दबाव आए तो सिद्धांतों से समझौता न करें।   दूसरों के जीवन में बदलाव से तय होगी सफलता: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि उपाधि मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है। सफलता का आकलन इससे होगा कि विद्यार्थी दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाते हैं। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को जीवन में उतारने का आह्वान किया।   कानून के शासन को मजबूत करें विद्यार्थी : मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि विधि शिक्षा में विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है। संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यार्थी उच्च मानकों और परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए कानून का शासन मजबूत करेंगे।   20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए: कुलपति कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। यहां से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता नहीं, समाज सेवा का माध्यम भी है। इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में हो।   रुपाली और तेजस्वनी को स्वर्ण पदक एलएलएम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक मिला। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला।   ईशा अग्रवाल को तीन प्रायोजित स्वर्ण पदक ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक मिला। तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला।   डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के मेधावी भी सम्मानित साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिला। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिले। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक मिला।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह और … Read more

‘नाइट शिफ्ट में भी निडर होकर काम कर रहीं महिलाएं’, CM योगी ने बताया यूपी का बदलाव

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि के स्वरूप की आराधना की. इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,  'दुष्टों, असुरों और रक्तबीज जैसी तामसिक शक्तियों का संहार कर धर्म की स्थापना और भक्तों को अभय प्रदान करने वाली मां कालरात्रि का दिव्य स्वरूप हमें संदेश देता है कि अधर्म, अत्याचार और आतंक का अंत ही न्याय, शांति और निर्भय समाज की स्थापना का आधार है।  2017 से पहले दंगाइयों और अपराधियों का था आतंक  मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार को आईना दिखाते हुए बताया कि साल 2017 से पहले प्रदेश में रक्तबीज रूपी माफिया, दंगाइयों और अपराधियों के आतंक से पैदा डर और अराजकता के अंधकार ने बहन-बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन की राह में गंभीर बाधाएं खड़ी कर दी थीं. वहीं 9.5 सालों में डबल इंजन सरकार की अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति ने इन असुरी शक्तियों का दमन कर प्रदेश में कानून का राज और भयमुक्त वातावरण की स्थापना की है।  महिला सुरक्षा के प्रति सरकार प्रतिबद्ध सीएम योगी ने लिखा कि मिशन शक्ति, इंटीग्रेटेड 1090 हेल्पलाइन, महिला बीट पुलिसिंग और सेफ सिटी परियोजना जैसी पहलों ने बहन-बेटियों के लिए घर की चौखट से लेकर सड़क, शिक्षण संस्थानों व कार्यस्थलों तक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया है. पुलिस रिस्पॉन्स टाइम का साल 2016 के 65 मिनट से घटकर मात्र 5 मिनट रह जाना, प्रदेश में कानून-व्यवस्था की तत्परता और महिला सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।  सुरक्षा के विश्वास से प्रेरित होकर नाइट शिफ्ट में भी काम कर रहीं महिलाएं  मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुरक्षा के माहौल का जिक्र किया, कहा कि सुरक्षा के इसी विश्वास से प्रेरित होकर आज महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी निडर होकर कार्य कर रही हैं. महिला श्रम बल भागीदारी का 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की नारी शक्ति, अर्थशक्ति बनकर उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति दे रही है।  हर क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी ने प्रदेश की विकास यात्रा को दी नई ऊर्जा सीएम ने लिखा कि कृषि, उद्योग, सेवा और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी ने प्रदेश की विकास यात्रा को नई ऊर्जा दी है. यही भागीदारी उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में हुई तीन गुना वृद्धि की यात्रा में भी अहम योगदान दे रही है। 

प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता, फॉगिंग और स्वास्थ्य सेवाओं को युद्धस्तर पर जारी रखने के मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उच्चस्तरीय बैठक में राजधानी को जलभराव से बचाने का बड़ा रोडमैप तैयार गोमती के बैकफ्लो को रोकने के लिए लगेंगे 12 नए फ्लड पंपिंग स्टेशन, न्याय विहार से एल्डिको ड्रेन तक बिछेगा जल निकासी का नेटवर्क सीएचसी के रूप में उच्चीकृत होंगे जलभराव प्रभावित क्षेत्र के भी पीएचसी, 132 केवीए का नया सब स्टेशन बनेगा लखनऊ लखनऊ के फैजुल्लागंज में इस वर्ष अतिवृष्टि के कारण हुए जलभराव जैसी समस्या भविष्य में न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। शनिवार को रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वपूर्ण बैठक में यह तय हुआ कि आईआईएम रोड से पक्कापुल तक गोमती नदी के बाएं तट पर लगभग 5.5 किलोमीटर लंबे तटबंध का निर्माण कराया जाएगा। यही नहीं, गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने पर नालों से पानी की निकासी बाधित होने की समस्या के समाधान के लिए 12 नए पंपिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे और न्याय विहार से एल्डिको ड्रेन तक जल निकासी का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। सिंचाई, नगर विकास, आवास, स्वास्थ्य, राजस्व और ऊर्जा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री और रक्षामंत्री ने बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्थानीय विधायक डॉ. नीरज बोरा और महापौर सुषमा खर्कवाल भी उपस्थित रहीं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा अब तक किए गए राहत प्रयासों के लिए आभार भी जताया। बैठक में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में भविष्य के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता का आकलन करते हुए आवश्यक प्रबंध करने की जरूरत बताई। विधायक नीरज बोरा ने फैजुल्लागंज क्षेत्र के प्रभावित परिवारों की समस्याओं से अवगत कराते हुए सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करने, एसटीपी की आवश्यकता और ट्रांसफार्मरों के सुधार की जरूरत पर बल दिया। महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 6,500 घर प्रभावित हुए हैं और नगर निगम प्रशासन प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने के लिए 24×7 तत्पर है। बैठक में फैजुल्लागंज सहित गोमती नदी के आसपास के निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचाव के लिए तटबंध निर्माण, नालों के विकास तथा आधुनिक पंपिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में कोई कमी न रहे। स्वच्छ पेयजल, भोजन, चिकित्सा, स्वच्छता और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था निरंतर बनाए रखी जाए। जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्ययोजना पर काम करें। मुख्यमंत्री ने जलभराव के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों के तत्काल सुदृढ़ीकरण के लिए भी निर्देश दिए। केंद्रीय रक्षामंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ के नागरिकों को इस समस्या से स्थायी मुक्ति दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पिछले दो सप्ताह में बाढ़ और जलभराव से फैजुल्लागंज सहित निचले इलाकों के हजारों परिवारों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है और उनके घरों व प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आईआईएम रोड से खदरा होते हुए पक्कापुल (हार्डिंग ब्रिज) तक बंधा निर्माण के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता पर शीघ्र शुरू कराने के साथ ही, इन कॉलोनियों में ट्रंक ड्रेनेज, सीवेज नेटवर्क, घर-घर नल से जल, सड़क और सुदृढ़ विद्युत व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं का समयबद्ध विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली के बुनियादी ढांचे का होगा कायाकल्प मुख्यमंत्री ने रक्षामंत्री द्वारा रखे गए बिंदुओं पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश देते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फैजुल्लागंज में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शीघ्र ही प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के एक नए समन्वित शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए जलभराव प्रभावित क्षेत्र के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में उच्चीकृत करने तथा निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 33 केवीए के स्थान पर 132 केवीए का नया सब-स्टेशन स्थापित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगर में जल निकासी की व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि तटबंध निर्माण, पंपिंग स्टेशनों और नालों की योजना एक-दूसरे के पूरक के रूप में तैयार की जाए, ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने अथवा अत्यधिक वर्षा होने की स्थिति में भी बस्तियों के भीतर पानी न रुके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गोमती नदी लखनऊ की आत्मा है, इसके अविरल और निर्मल प्रवाह के लिए जो कुछ भी जरूरी हो, वह कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने नदी में ड्रेजिंग (गाद निकालने) की कार्यवाही को भी तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। 38 हजार से अधिक आबादी हुई प्रभावित, युद्धस्तर पर चला राहत अभियान बैठक में बीते दिनों आई बाढ़ की वर्तमान स्थिति और राहत कार्यों की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि गोमती नदी का सामान्य जलस्तर 105.70 मीटर और चेतावनी स्तर 108.50 मीटर है, जबकि आठ अक्टूबर को जलस्तर 108.60 मीटर तक पहुंच गया था। फैजुल्लागंज का भू-स्तर नदी के सामान्य स्तर से चार मीटर नीचे होने के कारण 8.05 वर्ग किमी क्षेत्र के 21 मोहल्लों में रहने वाले करीब 6,500 परिवार (38 हजार से अधिक आबादी) प्रभावित हुए। प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाते हुए 16 बाढ़ राहत चौकियां और आठ आश्रय स्थल बनाए गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की 32वीं वाहिनी की मदद से 106 नावों, 40 मोटरबोट और 19 स्टीमर के जरिए बचाव कार्य चलाया गया। प्रभावितों के बीच 11,275 राहत खाद्य किट, 67,800 लंच पैकेट और 1,18,500 लीटर पेयजल वितरित किया गया। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के मोर्चे पर 28 डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ से युक्त 46 मेडिकल टीमों ने घर-घर भ्रमण कर 8,591 मरीजों का उपचार किया तथा 12,291 मेडिसिन किट, 12,000 ओआरएस पैकेट और 8,591 क्लोरीन टैबलेट … Read more

नारी शक्ति को ‘स्टार्ट इन यूपी’ का संबल, योगी सरकार ने स्वीकृत की ग्रांट, पहली किस्त मिली

नवरात्र विशेष-8: स्वावलंबन की शक्ति झांसी नवरात्र के पावन दिनों में जब घर-घर शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना हो रही है, तब झांसी की एक मां समाज को नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण दिखा रही हैं। बेटे की एक परेशानी को उन्होंने सिर्फ सुना ही नहीं, बल्कि उसे समाधान और फिर कारोबार की शक्ल दे दी। यह कहानी है अनुराधा मेहरोत्रा की, जो आज स्टार्टअप 'हॉस्टल्स नियर मी' की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) हैं। इस स्टार्टअप को योगी सरकार की 'स्टार्ट इन यूपी' पहल के तहत 10 लाख की ग्रांट भी स्वीकृत हुई है। एक परेशानी, जो बन गई प्रेरणा कहानी की शुरुआत बेहद आम-सी समस्या से हुई। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान बेटे आर्यमन को रहने के लिए हॉस्टल तलाशने में खासी दिक्कत आई। यह हर साल हजारों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की भी परेशानी है। अनजान शहर, सीमित जानकारी और भरोसेमंद विकल्पों की कमी, इन सबके बीच सही ठिकाना तलाशना आसान नहीं होता। आर्यमन ने अपनी इस परेशानी और उसके समाधान का आइडिया मां अनुराधा के साथ साझा किया। यहीं मां ने वह भूमिका निभाई, जो हर बेटे को चाहिए। उन्होंने न आइडिया को हल्के में लिया और न बेटे के उत्साह को। मां-बेटे ने मिलकर इसे हकीकत में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया। यही विचार आगे चलकर 'हॉस्टल्स नियर मी' के रूप में सामने आया। मां ने संभाली कमान, बनीं सीओओ अनुराधा केवल प्रेरणा देने तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने स्टार्टअप में मुख्य परिचालन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली और इसके संचालन व विकास में सक्रिय भूमिका निभाई। वह कहती हैं कि कॉलेज के दिनों में बेटे ने जो समस्या बताई, उसी से इस विचार का जन्म हुआ। आज वह एक तरफ बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ कंपनी की रोजमर्रा की कमान भी संभाल रही हैं। एक मां के लिए अपने बच्चे का सहारा बनना स्वाभाविक है, लेकिन उस सहारे को कारोबारी नेतृत्व में बदल देना बड़ी बात है। नवरात्र में जिस शक्ति की उपासना की जाती है, वह यही है- परिवार को थामने वाली, और जरूरत पड़ने पर नई राह बनाने वाली। इनक्यूबेशन सेंटर से ग्रांट तक का सफर 'हॉस्टल्स नियर मी' बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के इनक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है। कंपनी के रूप में इसका रजिस्ट्रेशन वर्ष 2024 में हुआ। यह प्लेटफॉर्म कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से हॉस्टल तलाशने में मदद करता है। अब हॉस्टल खोजने के लिए गली-गली भटकने या अधूरी जानकारी पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो रही है। वर्ष 2025 में 'स्टार्ट इन यूपी' के तहत इस स्टार्टअप के लिए 10 लाख की ग्रांट स्वीकृत हुई और इसकी पहली किस्त भी प्राप्त हो चुकी है। अनुराधा के मुताबिक प्रदेश सरकार की ओर से स्टार्टअप की सराहना की गई है, जो टीम के लिए बड़ा संबल है। छह शहरों तक पहुंचा स्टार्टअप आज यह प्लेटफॉर्म सिर्फ झांसी तक सीमित नहीं है। लखनऊ, जयपुर, ग्वालियर, इंदौर और मेरठ जैसे शहरों में भी विद्यार्थी हॉस्टल तलाशने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। एक छोटे शहर से शुरू हुआ विचार अब कई राज्यों के विद्यार्थियों के काम आ रहा है। फिलहाल यह सुविधा वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध है। ग्रांट मिलने के बाद स्टार्टअप में नए फीचर जोड़ने की तैयारी है। आने वाले समय में इसे मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध कराने की योजना है। नवरात्र का संदेश भी यही है कि शक्ति केवल पूजा की चीज नहीं, जीने और करने का तरीका है। झांसी की इस मां ने दिखा दिया कि जब महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व संभालती हैं, तो घर के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़ती है। 'हॉस्टल्स नियर मी' की यह यात्रा अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन एक मां की हिम्मत और बेटे के आइडिया ने जो नींव रखी है, वह आने वाले समय में कई और परिवारों को प्रेरित करेगी।

‘हर दावे के पीछे तथ्य, साक्ष्य और तर्क जरूरी’, लॉ स्टूडेंट्स से बोले CM योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना को एक मुकदमे के उदाहरण से समझाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर केस नंबर 2047 हो और उसका विषय विकसित भारत हो, तो इस मामले में 140 करोड़ भारतीय याचिकाकर्ता होंगे. उनकी ओर से दलील रखने वाले अधिवक्ता को हर दावे के समर्थन में तथ्य, साक्ष्य और तर्क पेश करने होंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की बात करते समय यह बात ध्यान में जरूर रखना होगा कि देश के भविष्य से जुड़े हर दावे को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर साबित किया जाना भी जरूरी है. इसके लिए ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।  सच बोलना और लगातार अध्ययन करना जरूरी इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा के बारे में बोलते हुए कहा कि सत्यं वद: धर्मं चर: स्वाध्यायान्मा प्रमदः. इसका अर्थ है सत्य बोलना, धर्म का आचरण करना और अध्ययन में कभी आलस्य नहीं करना. उन्होंने कहा कि किसी अधिवक्ता के लिए इससे बेहतर कार्य-निर्देश नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र भले ही नए गाउन पहनते हों, लेकिन भारत का दीक्षांत उपदेश हजारों वर्ष पुराना है. उन्होंने कहा कि गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों में इस शिक्षा को लंबे समय से जीवन का हिस्सा बनाया जाता रहा है।  आपातकाल और न्यायपालिका की भूमिका का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश के लोकतांत्रिक इतिहास और न्यायपालिका की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया गया था. इसके 13 दिन बाद, 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था. उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन इतिहास में उनकी असहमति का महत्व बना रहा. योगी आदित्यनाथ ने साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें न्यायमूर्ति खन्ना की असहमति को सही माना गया था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 1975 के दौर ने देश को यह समझाया कि ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन और ‘रूलर ऑफ लॉ’ यानी शासक का कानून अलग-अलग अवधारणाएं हैं. उनके मुताबिक, लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए।  उत्तर प्रदेश की छवि और निवेश पर भी बोले योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पहले की छवि का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले राज्य में निवेश की बात करने पर लोग सवाल उठाते थे. उस समय कानून-व्यवस्था, कनेक्टिविटी, निर्यात और स्पष्ट नीतियों को लेकर चिंताएं जताई जाती थीं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था और लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि राज्य में सुधार नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में भी उन्होंने ऐसी सोच देखी थी, जहां उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर निराशा जताई जाती थी। 

UP Election 2027: BJP की वापसी या सत्ता परिवर्तन? चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से जोड़-तोड़ और सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. चुनाव से ठीक पहले सूबे की हवा किस तरफ बह रही है और जनता के मन में क्या चल रहा है, इसे जानने के लिए न्यूज18 ने मेगा सर्वे किया है. इस मेगा सर्वे के आंकड़े राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने वाले हैं. सर्वे में जनता से सीधा सवाल किया गया कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार किसकी बनेगी, जिसके नतीजों ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है।  जनता के बीच जाकर किए गए इस सबसे बड़े ओपिनियन पोल में जब यह पूछा गया कि आगामी चुनाव में किसकी सरकार बनेगी, तो मतदाताओं ने खुलकर अपनी राय रखी. सर्वे के आंकड़े इस प्रकार हैं:     बीजेपी गठबंधन: राज्य के 67 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया है कि उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।      सपा-कांग्रेस गठबंधन: मुख्य विपक्षी दल के रूप में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को 26 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलता नजर आ रहा है.     बहुजन समाज पार्टी (BSP): मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को इस सर्वे में 5 प्रतिशत लोगों का साथ मिला है।      अन्य और कह नहीं सकते: अन्य दलों के खाते में 1 प्रतिशत और कोई भी स्पष्ट राय न रखने वाले ‘कह नहीं सकते’ वर्ग में भी 1 प्रतिशत लोग शामिल रहे।  युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा सर्वे में उम्र के हिसाब से 26 से 35 साल के लोगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 36% रही. 36 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के 29% और 18 से 25 साल के 17% लोगों से बातचीत की गई. 46 से 55 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 11%, 56 से 65 वर्ष की 5% और 66 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 1% बताई गई. लिंग के आधार पर सर्वे में 76% पुरुष और 24% महिलाएं शामिल थीं. इस अनुपात को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि सर्वे में दोनों समूहों की भागीदारी बराबर नहीं थी।  क्यों विश्वसनीय है यह सर्वे? इस मेगा सर्वे के दायरे और इसकी पारदर्शिता का अंदाजा इसके सैंपल साइज से लगाया जा सकता है. यह सर्वे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में किया गया।  भागीदारी: सर्वे टीमों ने घर-घर जाकर कुल 30,925 लोगों से आमने-सामने बात की, जिसमें गांव और शहर दोनों के 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल रहे।  डेमोग्राफिक्स: इसमें 18 से 66+ वर्ष तक के आयु वर्ग, 76% पुरुष और 24% महिलाओं के साथ-साथ व्यापारी, किसान, छात्र, कामगार, बेरोजगार और नौकरीपेशा हर वर्ग की राय ली गई।  सामाजिक समीकरण: सर्वे में विभिन्न जातियों (OBC 45.8%, सामान्य 35.8%, SC 14.7%, ST 2.4%) और प्रमुख धर्मों के मतदाताओं को शामिल कर पूरी तरह संतुलित ओपिनियन पोल तैयार किया गया। 

यूपी के 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर, 3.18 लाख मामलों में महिलाओं को मिली मदद

बंदिशों से बेखौफ उड़ान तक वन स्टॉप सेंटर से संवर रही महिलाओं की जिंदगी, मुश्किलों को मात देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहीं बेटियां लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को मजबूत करने के लिए संचालित वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। लखनऊ की तीन महिलाओं की कहानियां इस पहल के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती हैं। पारिवारिक बंदिशों से जूझ रही एक युवती ने काउंसलिंग के बाद पढ़ाई जारी रखी और आज उच्च पद पर सेवाएं देकर जिम्मेदारी निभा रही है। वहीं, शोषण की शिकार एक बालिका ने मुश्किलों से उबरकर प्रतिष्ठित होटल में नौकरी हासिल की। घरेलू प्रताड़ना से प्रभावित एक अन्य महिला भी शिक्षा और रोजगार के सहारे आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही है। काउंसलिंग से बदली परिवार की सोच महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि लखनऊ की 31 वर्षीय युवती ने वन स्टॉप सेंटर को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि परिजन उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से रोक रहे हैं। पारिवारिक तनाव के बीच सेंटर की टीम ने उनके घर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की। इसके बाद सुरक्षित और गोपनीय माहौल में काउंसलिंग कराई गई। टीम के समझाने पर परिवार ने युवती को पढ़ाई जारी रखने की स्वतंत्रता दी। वन स्टॉप सेंटर पर काउंसलिंग से युवती को मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर आगे बढ़ने का हौसला मिला। उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और प्रतिष्ठित पद पर सेवाएं देकर नई मिसाल पेश कर रही है। शोषण से निकलकर होटल में बनाई पहचान लखनऊ की एक बालिका ने 16 वर्ष की उम्र में वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी दी। सेंटर ने उसे काउंसलिंग और संरक्षण उपलब्ध कराने के साथ कानूनी कार्रवाई में सहयोग किया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे राजकीय संरक्षण में रखा गया और शिक्षा जारी रही। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिलाया गया। आज वह लखनऊ के होटल में नौकरी कर रही है। घरेलू प्रताड़ना से मुक्ति, अब पढ़ाई और नौकरी लखनऊ की एक अन्य 31 वर्षीय महिला ने शिकायत की कि पति उसे बंधक बनाकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दे रहा है। वन स्टॉप सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित निकाला। सेंटर में 12 दिन के अस्थायी आश्रय के दौरान काउंसलिंग की गई। महिला को उसका विवाह संबंधी सामान वापस दिलाने और सुरक्षित मायके पहुंचाने में भी मदद मिली। अब वह स्वतंत्र रूप से रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रही है। प्रदेश के 75 जिलों में 124 केंद्र, 3.18 लाख मामलों में मदद महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित वन स्टॉप सेंटर योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 केंद्र संचालित हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी गई है। केंद्रों पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, परामर्श, विधिक मदद और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बैलेट पेपर से हो रहा है चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने का काम जनता-जनार्दन का: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित। समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों का अपमान और शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा सपा की राजनीति का आधार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘सपा ने वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया दिया, हमने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज दिया’ परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल को उखाड़ फेंकें, आपका प्रतिनिधि वह बने जिसमें जज्बा और सामर्थ्य हो : मुख्यमंत्री योगी संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का जवाब बनेगा यह चुनाव : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना पर 40 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक बीमा सुरक्षा अधिवक्ताओं को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, मृत्यु पर परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता का प्रावधान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह शिक्षा की घोषित दुश्मन है। शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा और शिक्षकों का अपमान उसकी राजनीति का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों पर पेशेवर गुंडों का दबदबा था और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए काम किया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे इस चुनाव में परिवारवाद और वंशवाद को नकारते हुए योग्य और सक्षम प्रतिनिधि चुनें। 'शिक्षक-स्नातक सम्मेलन' में जनता को किया संबोधित उत्तर  प्रदेश विधान परिषद के आगामी लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर लखनऊ में  'शिक्षक-स्नातक सम्मेलन' का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए एवं कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यह सम्मेलन लखनऊ स्नातक क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और लखनऊ शिक्षक क्षेत्र से प्रत्याशी उमेश द्विवेदी के समर्थन में आयोजित किया गया था।  कार्यक्रम में पहुंचने पर क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, भाजपा प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और दोनों प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का  बुके भेंट कर भव्य स्वागत व अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र ,पुष्पगुच्छ भेंट किया गया और स्मृति चिह्न के रूप में भगवान श्रीराम की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने लखनऊ खंड के मतदाता महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सपा की नीतियों पर सवाल उठाए और शिक्षकों, युवाओं तथा अधिवक्ताओं के हित में सरकार की ओर से किए गए कार्यों का उल्लेख किया। ‘समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन’ मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा की व्यवस्था की उपेक्षा, शिक्षकों का अपमान, यहीं से समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीति की थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों में पेशेवर गुंडे हावी हो जाते थे और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, शिक्षा और युवा पिछली सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की व्यवस्था कमजोर होने का असर केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे समाज, प्रदेश और देश का भविष्य भी प्रभावित होता है। उन्होंने शिक्षकों के सम्मान, विद्यालयों की सुविधाओं और युवाओं के अवसरों को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के मुकाबले वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर माफिया के प्रभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी ने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया' दिया, हमने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' दिया, 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' दिया।” उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में माफिया जमीनों पर कब्जा कर लेते थे और आम लोगों, शिक्षकों तथा सरकारी संपत्तियों की जमीनों को भी निशाना बनाया जाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था में सुधार के साथ विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ने का भी उल्लेख किया। ‘परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल हटाइए’ मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और उमेश द्विवेदी के समर्थन में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के मतदाताओं को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए, जो उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सके और जिम्मेदारी के साथ काम करे। उन्होंने कहा, “आपका प्रतिनिधि वह बनेगा जिसमें जज्बा हो और जिसमें सामर्थ्य हो।” परिवारवाद और वंशवाद पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से इसे बढ़ावा देने वाली राजनीति को नकारने का आह्वान किया। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों को शिक्षकों और स्नातकों की आवाज उठाने में सक्षम बताया। बैलेट पेपर से चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने की अपील मुख्यमंत्री ने कहा, एमएलसी चुनाव “ईवीएम से नहीं, बैलेट पेपर से हो रहा है और परिणाम न्याय के पक्ष में देने का काम आपको करना है।” उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह चुनाव उसका भी जवाब होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से सतर्क रहकर मतदान करने और अति-आत्मविश्वास से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण है और कार्यकर्ताओं को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्ववित्तपोषित संस्थानों सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों तथा उनके परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के साथ किसी अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में परिवार को बीमा कवर के माध्यम से 40 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है। रसोइयों के लिए भी दो लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर उपलब्ध कराने का उल्लेख किया। ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, ड्रॉपआउट दर 20 से घटकर तीन … Read more

कासगंज पुलिस ने 7 दिन में बरामद किए 120 मोबाइल

कासगंज पुलिस ने सात दिन में बरामद किए 120 लोगों के मोबाइल, तकनीक के सहारे मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक पहुंची पुलिस योगी सरकार में डिजिटल पुलिसिंग का दिखा असर, गुम मोबाइलों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से आमजन को मिली बड़ी राहत प्रदेश के थानों पर साइबर हेल्प डेस्क के जरिए शिकायतों के निस्तारण पर जोर, तकनीक बन रही पुलिस और जनता के बीच भरोसे की कड़ी लखनऊ योगी सरकार के मिशन शक्ति 6.0 अभियान के पहले ही सप्ताह में उत्तर प्रदेश पुलिस ने तकनीक आधारित पुलिसिंग और जनशिकायतों के निस्तारण में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसी क्रम में कासगंज पुलिस ने महज सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के गुम मोबाइल फोन बरामद कर 120 लोगों को बड़ी राहत पहुंचाई है। खास बात यह है कि इन मोबाइलों की तलाश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों की मदद से मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक गुम मोबाइलों का पता लगाया और उन्हें बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और आमजन की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कासगंज पुलिस की यह उपलब्धि मिशन शक्ति 6.0 के शुरुआती सप्ताह की महत्वपूर्ण सफलता बनकर सामने आई है। सात दिन में 32 लाख के मोबाइल बरामद, दूसरे राज्यों तक पहुंची पुलिस मिशन शक्ति 6.0 की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई थी। अभियान के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस ने गुम मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया। पुलिस ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर तकनीकी माध्यमों से मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस करनी शुरू की। इस दौरान कई मोबाइल फोन की लोकेशन उत्तर प्रदेश से बाहर मिली। इसके बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक संपर्क एवं समन्वय स्थापित किया। तकनीकी सहायता से मोबाइल फोन का पता लगाकर उन्हें बरामद किया गया। सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के मोबाइल बरामद कर 120 लोगों को वापस सौंपे गए। मोबाइल के साथ वापस मिली लोगों की ‘डिजिटल दुनिया' आज मोबाइल फोन केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति की पूरी डिजिटल दुनिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, जरूरी दस्तावेज, कारोबार से जुड़ी जानकारियां, पारिवारिक तस्वीरें और महत्वपूर्ण संपर्क मोबाइल में ही सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में फोन खोने पर व्यक्ति को केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि उसकी रोजमर्रा की कई जरूरी गतिविधियां भी प्रभावित हो जाती हैं। कासगंज पुलिस की कार्रवाई से ऐसे ही 120 लोगों को राहत मिली। जिन लोगों को अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद कम रह गई थी, उनके हाथों में दोबारा फोन पहुंचने से उनके चेहरे खिल उठे। पुलिस की इस पहल ने आमजन के बीच भरोसे को भी मजबूत किया है। शिकायत दर्ज करने से लेकर मोबाइल लौटाने तक पुलिस ने की कार्रवाई कासगंज के पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने बताया कि गुम मोबाइलों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी संसाधनों के माध्यम से उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल फोन ट्रेस होने के बाद उनकी बरामदगी सुनिश्चित की गई। इसके बाद स्वामित्व और पहचान का सत्यापन कर संबंधित व्यक्तियों को मोबाइल सौंप दिए गए। उन्होंने बताया कि अभियान में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिले। इसी उद्देश्य से पुलिस टीमों ने दूसरे राज्यों तक संपर्क स्थापित कर गुम मोबाइलों की बरामदगी सुनिश्चित की। योगी सरकार में तकनीक आधारित पुलिसिंग को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के थानों में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था के माध्यम से साइबर अपराध और डिजिटल माध्यमों से जुड़ी शिकायतों में लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच तकनीकी संसाधनों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। कासगंज पुलिस की यह कार्रवाई इसका उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल केवल साइबर अपराधियों की पहचान और कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियों को दूर करने में भी उपयोगी साबित हो रहा है। मिशन शक्ति 6.0 में जनसेवा और जवाबदेही का संदेश मिशन शक्ति 6.0 के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस की इस उपलब्धि का महत्व केवल 32 लाख रुपये के मोबाइल फोन बरामद करने तक सीमित नहीं है। इससे 120 लोगों को उनकी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारियों और संपर्कों तक दोबारा पहुंच मिली है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि गुम मोबाइल की शिकायत पर पुलिस तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए दूसरे राज्यों तक भी तलाश कर सकती है। योगी सरकार के अभियान के शुरुआती सप्ताह में सामने आई यह उपलब्धि पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और शिकायतों के बेहतर निस्तारण का उदाहरण है। मोबाइल की बरामदगी से जहां लोगों को उनकी खोई हुई डिजिटल दुनिया वापस मिली, वहीं पुलिस के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ है।

अरुंधति को बचपन में सीएम योगी के वीडियो से मिली सीख

योगी आदित्यनाथ को बड़ा भाई मानती हैं अरुंधति, विवाह पर आशीर्वाद का आग्रह दिसंबर में होनी है शादी,  मुख्यमंत्री के शुभकामना संदेश को भी बताया अनमोल लखनऊ कभी अपनी आंखों में आने वाले आंसुओं को कमजोरी समझने वाली केरल की अरुंधति के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सीख जिंदगी का नजरिया बदलने वाली बन गई। बचपन में योगी के एक वीडियो से उन्होंने समझा कि भावुक होना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को स्वीकार करने का साहस है। वर्षों बाद भी यह सीख उनके जीवन का हिस्सा बनी हुई है। अब जब अरुंधति विवाह कर अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही हैं, तो उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हाथ से लिखकर दो पेज का पत्र भेजा है और विवाह में शामिल होकर नवदंपती को आशीर्वाद देने का आग्रह किया है। पत्र में शादी का न्योता है, पर उससे भी ज्यादा है- सीएम के प्रति कृतज्ञता का भाव। जब आंसुओं को कमजोरी मानने लगी थीं अरुंधति अरुंधति ने सीएम योगी को भेजे अपने पत्र में बचपन की उस मनःस्थिति को साझा किया है, जब छोटी-छोटी बातों पर भावुक होकर रो पड़ना उन्हें खुद अपनी कमजोरी लगने लगा था। उनके कुछ दोस्त उन्हें समझाते थे कि मजबूत बनने के लिए भावनाओं पर काबू रखना जरूरी है। धीरे-धीरे उनके मन में भी यह सवाल घर करने लगा कि क्या आसानी से रो पड़ने वाला व्यक्ति कभी मजबूत बन सकता है? क्या अपनी भावनाएं जाहिर करना शर्मिंदगी की बात है? इसी दौरान उनके चचेरे भाई ने उन्हें योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो दिखाया। वीडियो में योगी काफी भावुक थे। चचेरे भाई ने समझाया कि योगी जैसा बनो, भावुक होते हुए भी अत्यंत मजबूत। इससे अरुंधति को एक नई दृष्टि मिली। उन्हें यह समझने में मदद मिली कि आंसू किसी व्यक्ति की कमजोरी का प्रमाण नहीं होते। इस अनुभव ने उनके भीतर चल रहे द्वंद्व को बदलने में अहम भूमिका निभाई। जिस भावुकता को वह अपनी कमी मानने लगी थीं, उसे अब वह अपनी सहज मानवीय संवेदना के रूप में देखने लगीं। योगी की सीख से समझा, मजबूत होने का असली अर्थ अरुंधति के लिए इस अनुभव का महत्व केवल उस पल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने समझा कि मजबूत होने का अर्थ हर परिस्थिति में भावनाओं को छिपाना नहीं, बल्कि मुश्किलों का सामना करते हुए खुद पर भरोसा बनाए रखना है। गिरने के बाद दोबारा खड़े होना, चुनौतियों के बीच आगे बढ़ना और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ही वास्तविक साहस है। अरुंधति ने पत्र में लिखा है-‘ जब भी मैं खुद पर संदेह करती हूं,  आपसे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।‘ अरुंधती का योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान उनकी सार्वजनिक भूमिका से भी जुड़ा है। उनके लिए उनकी यात्रा मेहनत, दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास का संदेश देती है। इस तरह बचपन में देखे गए एक वीडियो से मिली सीख अरुंधती के लिए आत्मविश्वास का ऐसा आधार बन गई, जिसे वह आज भी अपने जीवन में महसूस करती हैं। जीवन के सबसे खास मौके पर याद आए प्रेरणास्रोत अरुंधति और राहुल का विवाह 20 दिसंबर 2026 में केरल के अलुवा स्थित ग्रीन पार्क कन्वेंशन सेंटर में होना है। जीवन के इस खास अवसर पर अरुंधति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है। लिखा है-‘ मेरे लिए आप एक नेता से कहीं बढ़कर हैं। मैंने आपको हमेशा एक बड़े भाई की तरह देखा है, जिसकी यात्रा ने मुझे हिम्मत और प्रेरणा दी है।‘अरुंधति ने पत्र में मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं का उल्लेख करते हुए यह भी लिखा है कि यदि उनके लिए समारोह में पहुंचना संभव न हो, तो उनका शुभकामना संदेश और आशीर्वाद भी उनके लिए बेहद अनमोल होगा। उन्होंने इस बात के लिए आभार जताया कि सीएम योगी की एक सीख ने उन्हें अपनी भावनाओं को कमजोरी मानने के बजाय स्वीकार करना सिखाया।