samacharsecretary.com

नोएडा ने रचा नया इतिहास, देश की पहली स्मार्ट कचरा व्यवस्था शुरू; सफाई व्यवस्था होगी पूरी तरह हाईटेक

नोएडा  नोएडा प्राधिकरण शहर में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि वह सड़क पर किसी भी प्रकार का कचरा न फेंकें। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकी से लैस कचरा पेटियों (डस्टबिन) की व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही इन डस्टबिन में कचरा भर जाएगा, कंट्रोल रूम में घंटी बजने लगेगी। इससे प्राधिकरण का जन स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो जाएगा और कचरा कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था देश में पहली बार नोएडा में लागू की जा रही है। प्रथम चरण में इसे सार्व जनिक शौचालयों पर लागू किया जाएगा। प्राधिकरण ने शहर में 320 सार्वजनिक शौचालयों की स्थापना की है, जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित हो रहे हैं। इस माॅडल की सराहना करते हुए मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स (महुआ) ने अन्य नगर निगमों को भी इसे अपनाने की सलाह दी है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन डस्टबिन को शौचालयों के बाहर स्थापित किया जाएगा, जो जीपीएस और सेंसर से युक्त होंगे। इनकी मानिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) द्वारा की जाएगी, जहां डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की सभी गाड़ियों की निगरानी होती है। हालांकि नियमित डस्टबिन की सफाई और कचरा कलेक्शन का कार्य जारी रहेगा। यदि डस्टबिन में कचरा भर जाता है और कंट्रोल रूम पर घंटी बजती है, तो कचरा उठाने वाली गाड़ी मौके पर पहुंचकर डस्टबिन से कचरा हटा देगी। इससे सड़क पर कचरा फेंकने वालों को रोका जा सकेगा। शहर की जनसंख्या के अनुसार, वर्तमान में साढ़े छह लाख की आबादी के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा था। नई जनगणना के अनुसार, लगभग पांच लाख मकान और 14.5 लाख की आबादी सामने आई है। इस बदलाव के चलते कचरा कलेक्शन के लिए नए नियमों के तहत कार्ययोजना बनाई जाएगी। कम से कम दो टेंडर जारी किए जाएंगे, जिससे गली, गांव, सेक्टर, सोसायटी और बाजारों में कचरा एकत्र करने का कार्य किया जाएगा। जनगणना के बाद शहर की स्थिति     नई जनगणना के हिसाब से करीब पांच लाख मकान     नई जनगणना के हिसाब से करीब आबादी 14.5 लाख     पुरानी जनगणना के हिसाब से करीब दो लाख मकान     पुरानी जनगणना के हिसाब से शहर की आबादी 6.5 लाख शहर में शौचालयों की स्थिति     पब्लिक टाॅयलेट : 117     कम्यूनिटी टाॅयलेट : 67     पिंक टाॅयलेट : 16     यूरिनल ब्लाॅक्स : 120     "तमाम फाइव स्टार व थ्री स्टार होटल्स में अत्याधुनिक शौचालय तैयार किए गए है, नोएडा में भी सड़क किनारे लग्जरी टायलेट की सुविधा उपलब्ध कराया जा रही है। ऐसे में अत्याधुनिक तकनीकी से लैस डस्टबिन को शौचालयों के बाहर लगवाजाएगा, जिसमें कचरा डालने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। वैसे अधिकांश शौचालय उन्हीं जगहों पर बने है, जहां पर वेंडिंग जोन बाजार,आम जनमानस के आने जाने के पर्याप्त स्थान है।"     -इंदु प्रकाश सिंह, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण।  

मिर्जापुर में बनेगी भव्य गंगा पैड़ी! बलुआ लाल पत्थरों से संवरेगा घाट, काशी जैसा होगा नजारा

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में वाराणसी के काशी की तरह गंगा के किनारे 6 किलोमीटर निर्माण का निर्माण कराया जाएगा. पैड़ी के माध्यम से सभी गंगा घाट को एक किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ख्याल रखते हुए घाटों का निर्माण कराया जाएगा. पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा गया है।  प्रस्ताव मंजूर होने और धन आवंटन के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा. पैड़ी को विंध्याचल से मिर्जापुर तक जोड़ा जाएगा, इसमें लोगों के टहलने के साथी अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद रहेगी, जहां इसका लाभ आम लोग उठा सकेंगे. नए और अत्यधिक घाटों का निर्माण हो जाने के बाद न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. बल्कि, घाट के आसपास के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।  50 फीट चौड़ी होगी पैड़ी लोक निर्माण विभाग के द्वारा विंध्याचल से फतहा गंगा घाट को जोड़ने के लिए 400 करोड रुपए की योजना तैयार की गई है. प्रस्तावित योजना के तहत 50 फीट चौड़ी पैड़ी का निर्माण काशी की तर्ज पर कराया जाएगा. यह करीब 6 किलोमीटर लंबा होगा, इससे मिर्जापुर से विंध्याचल के जितने भी गंगा घाट है, सभी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे. वहीं, गंगा के तटीय क्षेत्र का विकास भी हो सकेगा. लोक निर्माण विभाग के द्वारा परियोजना शासन में भेज दिया गया है. परियोजना मंजूर होने के बाद काम शुरू किया जाएगा. प्रस्तावित योजना में लोगों के लिए मॉर्निंग वॉक और रोजगार व पर्यटन को बढ़ाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।  मौजूद होगी सुविधाएं पैड़ी में घाट के किनारे रंग-बिरंगे फूलों को लगाया जाएगा. आराम करने के लिए बलुआ लाल पत्थरों से चबूतरे बनाए जाएंगे. ताकि, कोई आसानी से बैठकर आराम कर सके. पैड़ी के निर्माण को लेकर कुछ जगहों पर जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी. सर्वे की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है. लोक निर्माण विभाग जमीन को अधिग्रहित करेगा. पैड़ी बन जाने के बाद मिर्जापुर के गंगा के तटीय इलाकों का विकास होगा. रोजगार के साथ सुबह टहलने के लिए समस्याएं खत्म होगी।  शासन को भेजा गया प्रस्ताव प्रांतीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि गंगा के तट पर काशी के तर्ज पर पैड़ी का निर्माण किया जाना है. 400 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार करके शासन को भेजा गया है. 6 किलोमीटर लंबा और 50 मीटर चौड़े घाटों का निर्माण कराया जाएगा. परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद घाटों के निर्माण का काम तेजी के साथ किया जाएगा। 

कानपुर में कोचिंग सेंटरों पर छापा: 26 प्रतिष्ठान सील, सुरक्षा नियमों पर सख्त कार्रवाई

लखनऊ लखनऊ में आग की घटना के बाद हरकत में आए केडीए ने समूचे शहर में अवैध बेसमेंट, बेसमेंट में हो रहे नियम विपरीत व्यावसायिक कार्य और अग्निशमन संयंत्रों के बिना संचालित किए जा रहे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की। लखनऊ अग्निकांड के बाद जागी सरकारी मशीनरी ने सोमवार की शाम से ही शहर में छापेमारी जारी रखी है। मंगलवार को भी दोपहर बाद तक 10 और कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया गया। इसके साथ ही 20 और कोचिंग सेंटर कार्रवाई के लिए चिन्हित किए गए हैं। कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के निर्देश पर यह अभियान चल रहा है। सोमवार को भी 16 कोचिंग सेंटर सील किए गए थे। अब तक इसकी संख्या 26 पहुंच चुकी है। दूसरी ओर पुलिस कमिश्नर ने कोचिंग सेंटर संचालकों के साथ बैठक की है, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर के अधिकांश कोचिंग सेंटर बंद कर दिए गए हैं। कुछ सेंटरों में अग्नि शमन से जुड़ी सेवाएं शुरू की जा रही हैं। जिन कोचिंग सेंटर में क्लासेस चल रहे थे उनमें से छात्र-छात्राओं को पहले बाहर किया गया उसके बाद विकास प्राधिकरण द्वारा सील लगाई गई। इस दौरान विकास प्राधिकरण के सचिव अभय कुमार पांडेय ने बताया कि छात्र-छात्राओं की जन की सुरक्षा के लिए ही यह कदम उठाए गए हैं। अग्निशमन सुरक्षा संबंधी उपकरण और इंतजाम करने के बाद सेंटरों से सील हटाई जा सकती है। सोमवार को कोचिंग सेंटरों समेत 16 प्रतिष्ठान सील सोमवार को भी कानपुर में कोचिंग सेंटर समेत 16 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इसके साथ ही अन्य प्रतिष्ठानों को भी कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया है। शासन के निर्देश पर केडीए उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक ने सभी प्रवर्तन जोन के प्रभारियों को निर्देश दिया कि तत्काल जोन में जाएं और नियमों के विपरीत संचालित प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करें। इसमें कोचिंग संस्थान, गेमिंग सेंटर और काम्प्लेक्स में संचालित शो रूम को भी सूचीबद्ध किया गया। इससे पहले दिल्ली में आग की घटना के बाद भी केडीए ने अभियान चलाया था और प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की थी। ऐसे में अभियान चलाने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। सोमवार को केडीए सबसे पहले बड़े कोचिंग सेंटरों पर धावा बोला। विद्यापीठ, फिजिक्स वाला, संजीव राठौर कोचिंग सेंटर, फिजिक्स स्टाइल ऑफ विवेक और अंकित सर क्लासेज के कोचिंग सेंटर को सील किया। केडीए के विधि, जनसंपर्क अधिकारी एवं ओएसडी सत शुक्ला के मुताबिक प्रवर्तन जोन-1ए में तीन, जोन-2बी में पांच, जोन-3 में तीन तथा जोन-4 में पांच प्रतिष्ठानों के विरुद्ध सीलबंदी की कार्यवाही की गई।

अयोध्या राम मंदिर दान जांच: गृह विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट, दोषियों पर कार्रवाई की सिफारिश

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। जांच में मंदिर ट्रस्ट के कई अधिकारी और कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि शाम को प्रारंभिक रिपोर्ट को सीएम योगी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। अयोध्या में राम मंदिर दान के वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को अपर मुख्‍य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक प्रतिवेदन रिपोर्ट सौंप दी। जांच दल का नेतृत्व कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित आरोपों की जांच के लिए 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। अधिकारियों ने बताया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दान पात्रों के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा। योगी ने किया था एसआईटी का गठन एसआईटी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी तथा लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी व पुलिस महानिरीक्षक किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था।ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। अयोध्या में क्या बोले थे योगी इस मामले की शुरुआत सात जून को हुई जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए मंदिर के दान में गबन का मामला उठाया और इसमें न्यायिक संज्ञान लेने की अपील की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में अपनी अयोध्‍या यात्रा में यह दावा किया था कि इस जांच में एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। उन्होंने राम भक्तों से कहा कि पांच सौ वर्षों तक इंतजार किया और 15 दिन और इंतजार करके देख लो।

अतीक-अशरफ से जुड़ी संपत्तियों पर शिकंजा, शिकायतों के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

प्रयागराज पी के संगमनगरी प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके करीबियों की कथित बेनामी संपत्तियों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता केपी श्रीवास्तव की शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अतीक अहमद और उसके परिजनों ने अपने करीबी मदन लाल भारतीया के नाम पर धूमनगंज क्षेत्र में कई संपत्तियां खरीदी थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने संपत्तियों की जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एसआईटी में पुलिस उपायुक्त नगर मनीष कुमार शांडिल्य, एडीएम सिटी सत्यम मिश्र, अपर नगर आयुक्त अरविंद राय, एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा और पीडीए सचिव विनीत कुमार सिंह को शामिल किया गया है। टीम को संबंधित संपत्तियों के बारे में गोपनीय एवं प्रामाणिक जानकारी जुटाने, दस्तावेजों की जांच करने तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश के अनुसार एसआईटी को तीन दिन के भीतर जांच शुरू करनी होगी। साथ ही टीम को प्रत्येक सोमवार को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अपर पुलिस आयुक्त को देनी होगी। माना जा रहा है कि अतीक अहमद से जुड़े आर्थिक नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों के खिलाफ चल रहे अभियान में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हर दूसरी शिकायत में है नाम 15 अप्रैल 2023 की रात भले ही माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत हो चुकी हो, लेकिन आज भी शहर में लोग उसके नाम और कारनामों से परेशान हैं। माफिया ने अपने जीवन में इतनी जमीनों पर कब्जा किया कि आज भी हर दूसरी शिकायत में उसका नाम आता है। लोग कभी अतीक तो कभी अशरफ और कभी उसके गुर्गों से खुद के परेशान होने की शिकायत कर रहे हैं। अफसर इस बात को लेकर त्रस्त हैं कि इस माफिया के अपराध की जड़े कितनी गहरी थीं कि मौत के तीन साल बाद भी उसके निशान मिट नहीं रहे हैं। 100 में से 40 से 50 शिकायतें अतीक-अशरफ के नाम सबसे ज्यादा मामले सदर तहसील की जनसुनवाई में आते हैं। हर दिन आने वाली 100 शिकायतों में 40 से 50 जमीन, संपत्ति कब्जे की शिकायतों में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ का नाम रहता है। विशेषकर करेली, करैलाबाग, कटुहला, गौसपुर, रसूलपुर समेत अन्य क्षेत्रों के हर मामले में ही उसका नाम रहता है। गंभीरता से होती है जांच जिन शिकायतों पर अतीक और अशरफ का नाम आता है, उसकी जांच भी बहुत अधिक गंभीरता से होती है। कई शिकायतों की जांच में बात में सच्चाई भी होती है। अफसरों का कहना है कि माफिया की मौत के बाद उससे परेशान लोग अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। अभी गौसपुर कटहुला में ही पांच बीघा जमीन पर माफिया के गुर्गों ने कब्जा किया था। ऐसे मामलों की सूची बन रही है।

पुराने लखनऊ को राहत: 7 नए सबस्टेशन और 100 फीडर से खत्म होगी बिजली समस्या

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। पुराने लखनऊ के लोगों की समस्याएं दूर होंगी। पुराने लखनऊ की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 550 करोड़ रुपये का प्लान तैयार किया गया है। आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 07 नए उपकेंद्र व 01 नया पावर ट्रांसमिशन सबस्टेशन बनाया जाएगा। इसके अलावा 100 नये फीडर बनेंगे। इससे लगभग 10 लाख आबादी को बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी। 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे लेसा के लखनऊ सेंट्रल जोन के राजाजीपुरम, अपट्रॉन, ऐशबाग, ठाकुरगंज, चौक, रेजीडेंसी, राजभवन, हुसैनगंज, अमीनाबाद क्षेत्र में बेहतर बिजली सप्लाई के लिए सात नये उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसमें तालकटोरा में दो उपकेंद्र बनेंगे। इसके अलावा ऐशबाग, मलपुर (राजाजीपुरम), राजेन्द्र नगर, अर्जुनगंज, बालागंज में एक-एक उपकेंद्र बनेंगे। सभी 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे। पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि पुराने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए क्षेत्र के 11 मौजूदा उपकेंद्रों के पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से हरिहरपुर, अर्जुनगंज, जवाहर भवन, हनुमान सेतु, यूपीआईएल, नूरबाड़ी, अपट्रॉन, आरडीएसओ, ऐशबाग, विधानसभा मार्ग और बालाघाट शामिल हैं। इसके अलावा 33 केवी और 11 केवी की नई लाइन बिछाई जाएगी। नई एलटी लाइन निर्माण में इंसुलेटेड कंडक्टर लगाई जाएगी। 100 नए फीडर से सुधरेगी सप्लाई ओवरलोडिंग की समस्या को खत्म करने के लिए कुल 100 नए फीडर बनाए जाएंगे। मुख्य अभियंता के अनुसार, 07 नए उपकेंद्रों के बनने से 70 नए फीडर तैयार होंगे, जबकि पुराने उपकेंद्रों में 30 अतिरिक्त फीडर जोड़े जाएंगे। इसके अलावा, तालकटोरा में बनने वाले ट्रांसमिशन सबस्टेशन से 14 उपकेंद्रों के लिए नई बिजली लाइनें भी बिछाई जाएंगी। ऐसा होने इलाके बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल जाएगी। इलाके की बिजली व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। दरअलस, लो वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या से उपभोक्ता जूझ रहे। बिजली व्यवस्था बेहतर होने से लोगों को समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इलाके के लोगों को भरपूर बिजली मिलने लगेगी। लो-वोल्टेज की समस्या भी खत्म हो जाएगी। ओवरलोडिंग की समस्या भी खत्म हो जाएगी। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा लखनऊ सेंट्रल मुख्य अभियंता रवि अग्रवाल ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक बेहतर बिजली सप्लाई के लिए पुराने लखनऊ में 07 बिजली उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसके अलावा 11 उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि होगी। साथ ही 100 नये फीडर बनेंगे। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा।

नए सत्र के लिए बेसिक शिक्षा विभाग तैयार, 220 दिन की पढ़ाई और निपुण अभियान का होगा विस्तार

लखनऊ  ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 25 जून से नियमित पठन-पाठन शुरू होगा। नए शैक्षिक सत्र में केवल विद्यालय खोलने की औपचारिकता नहीं, बल्कि हर बच्चे के सीखने के स्तर में सुधार, उसकी व्यक्तिगत जरूरतों की पहचान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब संवाद के माध्यम से शिक्षकों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों और राज्य व जिला स्तरीय रिसोर्स पर्सन को यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी को देखते हुए सुबह 10 बजे के बाद बच्चों की आउटडोर गतिविधियां नहीं कराई जाएं। विद्यालयों में ऐसा मित्रवत माहौल बनाया जाए, जहां बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें और शिक्षक उनके मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन वर्ष के बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बाल वाटिका से जोड़ेंगी, जबकि छह वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। शिक्षकों को कक्षा पांच से छह में बच्चों के सुचारु प्रवेश और संक्रमण काल को सहज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई होगी। जो बच्चे अपेक्षित सीखने के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं, उनके लिए कैच-अप ट्रेनिंग चलाकर विशेष सहयोग दिया जाएगा। शिक्षकों को बच्चों का लगातार आकलन कर नियमित फीडबैक देने और बेहतर कक्षा शिक्षण पद्धतियां अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने के लिए बच्चों को पुस्तकालय से पुस्तकें जारी की जाएंगी और प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे पठन गतिविधि कराई जाएगी। बच्चों को लेखन, कला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के अवसर भी दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 22 जून से विद्यालय प्रशासनिक कार्यों के लिए खुल चुके हैं, जबकि 25 जून से नियमित शिक्षण शुरू होगा। यह व्यवस्था आगामी वर्षों में भी लागू रहेगी। वर्ष में कम से कम 220 दिन पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि वास्तविक शिक्षण कितने घंटे हुआ। निपुण अभियान का विस्तार अब कक्षा एक और दो से आगे बढ़ाकर कक्षा एक से पांच तक किया जाएगा। बच्चों के भाषा और गणित के बुनियादी कौशल विकसित करने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और गणित के सरल निपुण लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन (एसआरपी) का प्रशिक्षण छह जुलाई से शुरू होगा, जबकि नवंबर-दिसंबर में निपुण आकलन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआरपी, एसआरजी और मेंटर शिक्षक केवल निरीक्षण या चेकलिस्ट भरने तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षकों के साथ संवाद कर उनकी शैक्षणिक कमियों को दूर करने में सहयोग करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के अनुभवों को शिक्षा संकुलों में साझा किया जाएगा। शिक्षक दीक्षा पोर्टल, आइ-गाट प्लेटफार्म और ‘द टीचर ऐप’ के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री, लेसन प्लान और एनसीईआरटी की गाइडलाइन का अध्ययन कर अपने शिक्षण को बेहतर बना सकते हैं। साथ ही अभिभावकों और समुदाय से संवाद मजबूत करें। उन्होंने शिक्षकों से स्वयं पढ़ने की आदत विकसित करने, समय प्रबंधन सीखने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की अपील की। मुंशी प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और सकारात्मक सोच के साथ हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।  

प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी, योगी सरकार नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार

योगी सरकार प्लाईवुड उद्योग के लिए नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार प्लाईवुड उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश ने खोले विकास के नए द्वार देशभर से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों ने लखनऊ और हरदोई में निवेश संभावनाओं को तलाशा  ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार, 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां और आकर्षक प्रोत्साहन निवेशकों को दे रहे नई गति : दीपक कुमार लखनऊ  योगी सरकार उद्योग-अनुकूल नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और निवेशकों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में सोमवार को लखनऊ स्थित इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों एवं संभावित निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय निवेश संवाद आयोजित किया गया। इसमें उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा ताकि उन पर शीघ्र अमल हो।  बैठक में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश के लिए तैयार आधारभूत संरचना, सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं तथा प्लाईवुड एवं संबद्ध उद्योगों में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद कर उद्योग वृद्धि के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि राज्य सरकार प्लाईवुड एवं एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र के लिए एक समर्पित नीति तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। हम पड़ोसी राज्यों की नीतियों का भी अध्ययन करेंगे ताकि प्लाईवुड और एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी एवं उद्योग-अनुकूल ढांचा विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए गठित की जाने वाली समिति में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे नीतिगत निर्णय व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप लिए जा सकें। इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश निरंतर सुधारों, सक्रिय निवेश सुविधा तंत्र और मजबूत औद्योगिक आधार के कारण देश के सबसे प्रतिस्पर्धी निवेश स्थलों में उभरकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि राज्य की 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां, पूंजीगत सब्सिडी, भूमि आधारित प्रोत्साहन और रोजगार सहायता योजनाएं निवेशकों को विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख अवसर प्रदान कर रही हैं।उन्होंने बताया कि राज्य शीघ्र ही उपलब्ध भूमि बैंक से चार से पांच औद्योगिक क्लस्टरों की पहचान कर उन्हें क्लस्टर आधारित विकास के लिए आरक्षित करेगा। साथ ही यदि निवेशकों को भूमि बैंक से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराने और छह माह के भीतर उसका आवंटन सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी। प्लाईवुड फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने इस उद्योग को कृषि, विनिर्माण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा बहुआयामी क्षेत्र बताते हुए ओडीओपी की तर्ज पर “वन इंडस्ट्रियल पार्क” मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित उद्योगों के लाइसेंस, वन नियमों, प्रदूषण मानकों, दंडात्मक प्रावधानों और एनओसी से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया तथा एग्रो आधारित उद्योगों के लिए पृथक नीति बनाने का प्रस्ताव रखा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक कुमार ने कहा, “उद्योग जगत द्वारा उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को हम गंभीरता से आगे बढ़ाएंगे तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखकर उद्योग-अनुकूल और व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे।” बैठक में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती प्रेरणा शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत निवेशक प्रतिनिधिमंडल 23 जून को हरदोई जिले के संडीला क्षेत्र का दौरा करेगा, जहां वे भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करेंगे। इस पहल से नए निवेश आकर्षित होने, रोजगार सृजन बढ़ने और उत्तर प्रदेश के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: चढ़ावा गिनने वाले कर्मियों की वर्दी से हटेंगी जेबें

अयोध्या  यूपी के अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की SIT जांच के बीच अनुबंध का कड़ाई से अनुपालन हो रहा है। वहीं, जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने के साथ ही बैंक प्रबंधन ने गणना कर्मियों के लिए सख्त ड्रेस कोड लागू कर दिया है। अब कर्मियों को बिना जेब वाली वर्दी पहननी होगी। राममंदिर भवन निर्माण समिति चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने एक टीवी इंटरव्यू में सीधे तौर पर बैंक प्रबंधन को ज़िम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि जब बैंक के साथ अनुबंध में साफ-साफ नियम बनाए गए तो गणना कर्मियों ने अनदेखी क्यों की। बताया जाता है कि बड़े क्लाइंट की वजह से बैंक ने बनारस की आउटसोर्सिंग करने वाली कंपनी से श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को कर्मचारी उपलब्ध कराए गए। उनके सैलरी भी उसी कंपनी के जरिए दिलवाए गए। सूत्रों की मानें तो 90 फीसदी नियुक्तियां ट्रस्ट पदाधिकारियों ने प्रभाव का इस्तेमाल कर करवाए। यही नहीं, समय-समय पर नियमों में ढील भी इन्हीं पदाधिकारियों की शह पर मिलते रहे। बैंक के बड़े अफसरों का कहना है कि यह तो अनुबंध तो दोतरफा हुए न कि बैंक ने अपनी ओर से कर्मचारी थोपे। कायदे से बैंक के नियमित कर्मचारी ही इस संवेदनशील कार्य में होने चाहिए। समाज से कटे राम मंदिर के कर्मचारी राम मंदिर से महत्वपूर्ण जानकारियां मीडिया में लीक होने के बाद अब मंदिर प्रशासन इसको लेकर सख्त दिखाई दे रहा है। कर्मचारी अब मंदिर के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दे रहे है। मोबाइल लेकर कर्मचारियों के प्रवेश पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ में कर्मचारियों के परिजन भी किसी से कोई बातचीत नहीं कर रहे है। इसको एसआईटी के खौफ से जोड़कर देखा जा रहा है। मीडिया से बातचीत पर रोक पिछले कई दिनों से राम मंदिर से जुड़ी कई जानकारियां मीडिया को मिल रही है। राम मंदिर प्रशासन महत्वपूर्ण गोपनीय जानकारियां कहां से मीडिया को मिल रही है, इसका पता नहीं कर पा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब इसको लेकर मंदिर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इसके बाद अब कर्मचारियों को मीडिया से बातचीत करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस कारण से राममंदिर के बारे कुछ भी बोलने से कर्मचारी बच रहे हैं। कर्मचारी नहीं उठा रहे फोन पहले जो कर्मचारी कभी कभार फोन उठा लेते थे, उन्होंने फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके साथ कर्मचारियों ने परिजनों को भी मीडिया अथवा अपरिचित व्यक्ति से कोई भी बात करने से मना कर दिया है। इसका असर सोमवार को दिखाई दिया। राममंदिर के किसी भी कर्मचारी को फोन करने पर वह तुरंत इसे काट दे रहा है। मीडिया से बात करने पर उसे खुद के एसआईटी की पूछताछ के दायरे में आने की आशंका लग रही है। दूसरी तरफ एसआईटी जांच को लेकर कर्मचारियों को विभिन्न आशंका सता रही है। अगर पूछताछ के दायरे में आते हैं, तो वह किस तरह से पक्ष रखें। मामले में लगातार नए-नए तथ्य रोज सामने आ रहे है। ऐसे में पूर्व में कई ऐसी चीजें रही हैं, जो इन कर्मचारियों के आंखों के सामने गुजरी है। खास लोगों से इन्होंने इसकी चर्चा भी की है।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: SIT की रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी गई

अयोध्या अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) ने अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में क्या है इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। बस इतना बताया गया है कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है। राममंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी को 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था। अयोध्या में सात दिन की जांच के बाद मंगलवार को एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी है। बताया जा रहा है कि करीब सवा सौ पन्नों की इस रिपोर्ट में कुछ सिफारिशें भी की गई हैं। एसआईटी की जांच अभी जारी रहेगी। माना जा रहा है कि एसआईटी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद वापस अयोध्या लौट जाएगी। लखनऊ के मंडलायुक्त और तीन सदस्यीय एसआईटी के प्रमुख विजय विश्वास पंत ने दोनों सदस्यों के साथ एसीएस होम को यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके आधार पर यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। एसआईटी के सदस्यों ने रिपोर्ट के बारे में कुछ बताया नहीं है। बस इतना कहा गया है कि जांच की कार्यवाही अभी प्रचलित है। माना जा रहा है कि इस प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ अहम जानकारियां हो सकती है। एसआईटी इस मामले की जांच में लगातार जुटी हुई थी।     जारी है जांच, नए चेहरे रडार पर, चर्चा में कई नाम चढ़ावा प्रकरण की प्रथम स्तर की जांच पूरी होने के बाद अब कुछ नए नामों की चर्चा तेज हो गई है, जो रामजन्मभूमि में कर्मचारी नहीं हैं फिर भी कहीं न कहीं उनका जुड़ाव ट्रस्ट के प्रभावशाली लोगों से रहा, जिसका फायदा भी उन्हें मिला। सूत्र बताते हैं कि अब उन लोगों ने भी एसआईटी पूछताछ कर सकती है। फिलहाल सोमवार को परिसर में एसआईटी के सभी अधिकारी उपस्थित नहीं थे, इसलिए ज्यादा लोगों से पूछताछ नहीं की गई है। कागजों की जांच-पड़ताल करने की जानकारी मिली है। माना जा रहा है किद मुख्यमंत्री को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद ही अधिकारी द्वितीय स्तर की जांच करने के लिए रामधाम पहुंचेंगे। एसआईटी सोमवार को पूरे मंदिर परिसर में नजर नहीं आई। उसका स्टाफ जरूर तथ्यों को जुटाने में लगा रहा। धातुओं के मंदिर में इस्तेमाल, भंडारण जांच भी जद में चढ़ावे की रकम के बाद दान में दी गई धातुओं के सही इस्तेमाल होने या न होने का शक, फिर मंदिर निर्माण में कमीशन लेने का आरोप, यह विषय इस तरह के हैं, जिससे कहा जा सकता है कि जांच की निर्धारित अवधि पर्याप्त नहीं है। एसआईटी के गठन के समय आरोप केवल मंदिर पर चढ़ावे की रकम में हेरफेर का था, इसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू होने के साथ आरोपों की संख्या बढ़ती चली गई और मामला बड़ा हो गया। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार है और माना जा रहा है, जिसमें चढ़ावे की रकम को प्रमुखता दी गई है। सूत्र बताते हैं कि प्रमुख आरोपियों से पूछताछ और मानक के विपरीत कार्य करने को आधार बनाया गया है। जांच में नोटों की गिनती और धातुओं को रखने के दौरान जिस प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं की गई। मामले में हर स्तर पर गलतियां उजागर हुई हैं।