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योगी सरकार का बड़ा फैसला, ईवी खरीद पर रोड टैक्स शून्य और भारी आर्थिक राहत

लखनऊ यूपी में नए ई-वाहन (ईवी) खरीदने पर योगी सरकार ने बड़ी राहत दे दी है। अब ईवी खरीदने पर रोड टैक्स का नहीं देना होगा। ईवी पर 2.56 लाख रुपये तक का लाभ प्रदान किया जाएगा। कैबिनेट बैठक में सोमवार को वायु प्रदूषण से निपटने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एनसीआर क्षेत्र में परिवर्तन योजना लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। योजना के तहत एनसीआर में बीएस-वन से बीएस-फोर तक के पुराने ट्रकों और बसों को स्क्रैप कर नई बीएस-सिक्स अथवा इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर वाहन स्वामियों को मोटरयान कर और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 10 वर्ष तक भारी छूट प्रदान की जाएगी। नए बीएस-सिक्स या इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 100 फीसद रोड टैक्स माफ होगा। पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत की छूट वहीं पुराने/प्रयुक्त बीएस-सिक्स/ईवी वाहनों पर रोड टैक्स में 50 फीसद छूट दी जाएगी। यह छूट 10 वर्षों तक वैध रहेगी। नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रजिस्ट्रेशन शुल्क शत-प्रतिशत माफ होगा। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को विशेष प्रोत्साहन दिया है। डीजल-सीएनजी गाड़ियों पर पांच प्रतिशत ब्याज छूट और ईंधन वाउचर मिलेगा जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों पर गाड़ी की श्रेणी के अनुसार 64 हजार रुपये से 2.56 हजार रुपये तक का एकमुश्त लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा नई गाड़ी खरीदने पर ओईएम यानी वाहन कंपनियों की ओर से 8% की शुरुआती छूट भी मिलेगी। भारत सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए परिवर्तन योजना शुरू की है। यूपी सरकार ने अब इसे राज्य के एनसीआर जिलों में प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया है। योजना का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध ढंग से हटाना है। बस-ट्रक पर माफ होगा बकाया टैक्स यूपी एनसीआर में पंजीकृत बीएस-वन, टू, थ्री व फोर श्रेणी की बसों-ट्रकों पर यदि एक वर्ष से अधिक का टैक्स बकाया है तो उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए पुराने वाहन को अधिकृत रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) के जरिए स्क्रैप कराना होगा और उसके बाद ही नए वाहन का पंजीकरण कराना होगा। वाहन स्वामियों को अपने पुराने वाहन आरवीएसएफ केंद्र पर जमा कर स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट लेना होगा। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर नई गाड़ी खरीदते समय रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में छूट मिलेगी। बकाया टैक्स माफी का लाभ भी इसी प्रक्रिया से मिलेगा। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डाटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत दो गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और दो लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। टियर/रेटिंग-3 व 4 वाले डाटा सेंटर्स को प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। 50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डाटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डाटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। सुनियोजित नीति से मिले ठोस परिणाम मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने जनवरी 2021 में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 लागू की थी, जिसे बाद में 7 नवंबर 2022 को संशोधित किया गया। उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022) के तहत लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डाटा सेंटर पार्क तथा 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली दो डाटा सेंटर इकाइयों में से 7 परियोजनाएं परिचालन में आ चुकी हैं। 210 करोड़ की सब्सिडी दी गई वहीं, प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। योगी सरकार ने 210 करोड़ रुपये से अधिक सब्सिडी के रूप में ईवी वाहन मालिकों को वितरित किए हैं। कहा कि खाड़ी देशों में गंभीर हालात और तेल संकट के बीच ईवी वाहनों की तरफ रुख करना ही बेहतर है। ईवी खरीद सब्सिडी योजना शानदार सहयोग दे रही है। इससे पेट्रोल-डीजल पर लोगों की निर्भरता कम होगी और बेहतर पर्यावरण से लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा।

आंबेडकरनगर में एसटीएफ एनकाउंटर, 25 मुकदमों वाला इनामी बदमाश आसिफ मारा गया

नॉएडा यूपी में एसटीएफ और बदमाशों के बीच एक बार फिर एनकाउंटर हुआ है। आम्बेडकरनगर के बेवाना थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह नोएडा एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक लाख के इनामी बदमाश आसिफ उर्फ विक्की को मार गिराया गया। आसिफ मूल रूप से कानपुर नगर के धुरैया मरकरपुर का निवासी था और लंबे समय से पुलिस उसके पीछे पड़ी थी। पुलिस के अनुसार, मारे गए अपराधी पर हत्या, लूट, गैंगस्टर समेत 25 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे विभिन्न जनपदों में दर्ज थे। वह लंबे समय से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तलाश में था। एनकाउंटर में दोनों ओर से हुई फायरिंग में यूपी एसटीएफ के सिपाही ओमनाथ चौहान भी घायल हो गए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से एक .32 बोर की पिस्तौल, 12 बोर का देसी हथियार, भारी मात्रा में कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। बताया जाता है कि एसटीएफ ने मुखबिर की सूचना पर बदमाश की घेराबंदी की थी। खुद को घिरा देख विक्की ने टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ की गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और अन्य सामान भी बरामद किया। विक्की का लंबा आपराधिक इतिहास विक्की उर्फ आसिफ अली पर हत्या, डकैती और लूट की कई सनसनीखेज वारदातों के आरोप थे। वर्ष 2013 में सुल्तानपुर में साथियों के साथ घर में घुसकर डकैती के दौरान एक व्यक्ति की हत्या की। वर्ष 2014 में जौनपुर के शाहगंज में परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट की और धारदार हथियार से हमला किया, जिसमें दो महिलाओं की मौत हो गई। वर्ष 2015 में कौशांबी में दंपती की हत्या कर डकैती की वारदात को अंजाम दिया। 2015 में ही मुजफ्फरनगर में कई घरों में सिलसिलेवार डकैतियां डालीं और महिलाओं पर जानलेवा हमला किया। वर्ष 2021 में कानपुर देहात के रसूलाबाद में घर में घुसकर तासीम की हत्या करने का भी आरोप था। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ विभिन्न जनपदों में 25 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 25 हजार के इनामी का हाफ एनकाउंटर उधर, बहराइच में सोमवार की रात गोकशी के आरोपी व थाना कैसरगंज के 25 हजार के इनामी बदमाश अशरफ उर्फ टन्ने के साथ पुलिस की मुठभेड़ हो गई। इस घटना में वांछित अपराधी के पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस को उसके हरनी गांव की रोड से प्यारेपुर जाने वाले रास्ते में पुलिया पर बैठे होने की जानकारी मिली थी। सूचना पर थाना कैसरगंज की पुलिस टीम द्वारा पुलिया के नजदीक पहुंच कर घेरेबंदी की। पुलिस टीम से घिरता देख बदमाश ने पुलिस टीम पर फायर कर दिया। पुलिस ने फायर किया तो उसके दाहिने पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी से उसके पास एक देशी तमंचा, कारतूस और एक खोखा कारतूस बरामद हुआ है।

जनसहभागिता से 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल करेगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी

उत्सवपूर्ण माहौल में 12 जुलाई को एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाएगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी जनसहभागिता से 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल करेगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी औपचारिकता नहीं प्रतिबद्धता के भाव के साथ सफल होगा वृक्षारोपण महायज्ञ: मुख्यमंत्री योगी 12 जुलाई का वृक्षारोपण महायज्ञ बने जनभागीदारी का नया कीर्तिमान, सभी विभाग पूरी तैयारी के साथ जुटें: मुख्यमंत्री योगी हरित उत्तर प्रदेश की दिशा में तेज कदम, मुख्यमंत्री ने की वृक्षारोपण महाभियान 2026 की तैयारियों की समीक्षा वन एवं वृक्षावरण बढ़ाने में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धि, अब हरित विकास के नए लक्ष्य की ओर बढ़ा प्रदेश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वृक्षारोपण केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का व्यापक जनआंदोलन है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जनभागीदारी का महायज्ञ बनाते हुए आगामी 12 जुलाई को उत्साह और उत्सवपूर्ण वातावरण में इस वर्ष वृक्षारोपण महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है, इसमें प्रत्येक नागरिक, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी, किसान, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सभी सरकारी विभागों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान की सफलता केवल लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण और उसके वृक्ष बनने से तय होगी। यह औपचारिकता नहीं प्रतिबद्धता के भाव के साथ सफल होगा। मुख्यमंत्री सोमवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वृक्षारोपण महाभियान 2026 की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने में हरित विकास की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पर्यावरण संरक्षण को जनसहभागिता से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाए तथा प्रत्येक विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरी गंभीरता और उत्तरदायित्व के साथ पूरा करे। उन्होंने निर्देश दिए कि 12 जुलाई को प्रस्तावित वृहद वृक्षारोपण अभियान को पूरी तैयारी, समन्वय और जवाबदेही के साथ संपन्न कराया जाए। पौधरोपण स्थलों का पूर्व सत्यापन, गड्ढों की तैयारी, पौधों की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रजातियों का चयन, सिंचाई, जियो टैगिंग तथा नियमित अनुश्रवण की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधरोपण के समय प्रत्येक एक घंटे के अंतराल पर प्रगति रिपोर्ट जारी की जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश ने वर्ष 2030 तक हरित आवरण को 15 प्रतिशत तथा वर्ष 2047 तक 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आगामी पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 35 करोड़ पौधों के रोपण की कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे लगभग 72 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण की क्षमता विकसित होगी। बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार उत्तर प्रदेश ने हरित क्षेत्र बढ़ाने में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। वर्ष 2017 से 2023 के बीच वन एवं वृक्षावरण में लगभग 3.38 लाख एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का वन एवं वृक्षावरण वर्ष 2017 के 9.18 प्रतिशत से बढ़कर 9.96 प्रतिशत हो गया है। वन क्षेत्र के बाहर वृक्षावरण का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है तथा कार्बन स्टॉक में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज की गई है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच प्रदेश में 242 करोड़ पौधों का रोपण किया गया, जबकि वर्ष 2009 से 2016 के बीच यह संख्या 51.48 करोड़ थी। बैठक में बताया गया कि पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पौधशालाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। वर्तमान में 1,939 विभागीय पौधशालाओं के साथ उद्यान, रेशम तथा निजी पौधशालाओं के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त 38 नई पौधशालाएं भी स्थापित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने 12 जुलाई के महाअभियान के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान, पंचायतीराज, राजस्व, नगर विकास सहित सभी संबंधित विभागों से उन्हें आवंटित लक्ष्यों के अनुरूप विभागीय माइक्रोप्लान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थी किसानों को इस अभियान से जोड़ा जाए। रोपे जाने वाले पौधों में अधिकतम जैव विविधता सुनिश्चित की जाए तथा फलदार, छायादार, औषधीय और इमारती प्रजातियों का संतुलित समावेश हो। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान में रेलवे, रक्षा मंत्रालय, हाईकोर्ट सहित सभी न्यायालयों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी कार्मिकों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में अगले तीन दिनों के भीतर सभी स्तरों पर संवाद और समन्वय की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए। बैठक में आगामी विशेष पहलों की भी जानकारी दी गई। इसके अंतर्गत मिशन छाया, समरस वन, समृद्धि वन, सिटी वन, कपि वन, महर्षि चरक औषधि वन, ऊर्जा वन, पौराणिक वन तथा अविरल धारा वन जैसी अभिनव अवधारणाओं पर कार्य किया जा रहा है। हीट वेव के प्रभाव को कम करने के लिए सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर छायादार वृक्ष लगाने हेतु मिशन छाया संचालित किया जाएगा। खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए समृद्धि वन, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए समरस वन तथा मानव और वानर संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से नगर क्षेत्रों के बाहर कपि वन विकसित किए जाएंगे। बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी, सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित विभागों के मंडल एवं जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

CM योगी आज प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी दौरे पर, कई विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी दौरे पर प्रतापगढ़ में 384 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास व जनसभा को करेंगे संबोधित सीएम योगी सुल्तानपुर में पीडब्ल्यूडी कार्यों की समीक्षा बैठक के साथ 819 करोड़ की परियोजनाओं की देंगे सौगात वाराणसी में विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद करेंगे बाबा कालभैरव और काशी विश्वनाथ के दर्शन करेंगे लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 7 जुलाई को प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री पहले प्रतापगढ़ पहुंचेंगे, जहां राजकीय इंटर कॉलेज में 384 करोड़ रुपए से अधिक की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।  प्रतापगढ़ दौरे के बाद मुख्यमंत्री सुल्तानपुर पहुंचेंगे, जहां कलेक्ट्रेट सभागार में वह अयोध्या मंडल के लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा व नये कार्यों की कार्य योजना के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री सुल्तानपुर व इसौली विधानसभा क्षेत्रों में 819 करोड़ रुपए से अधिक की 99 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करेंगे। सीएम यहां विभिन्न विभागों की योजनाओं के लाभार्थियों को चेक/प्रशस्ति पत्र प्रदान करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। सुल्तानपुर दौरे के बाद मुख्यमंत्री वाराणसी के सर्किट हाउस पहुंचेंगे, जहां वाराणसी के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक करेंगे। इसके बाद वह पहले कालभैरव मंदिर में और इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन/पूजन करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' के बेटे के वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। सीएम सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे।

CM योगी ने प्रयागराज मंडल के 3194 विकास कार्यों को दी मंजूरी, परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

सीएम योगी ने प्रयागराज मंडल में प्रस्तावित 3194 कार्यों को दी स्वीकृति, चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की सावन में शिव भक्तों की सुविधा के लिए आए प्रस्ताव, कांवड़ पथ विकसित करने के निर्देश 15 अगस्त तक सभी स्वीकृत विकास परियोजनाओं का शिलान्यास कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने का सीएम ने दिया निर्देश मंडल से प्राप्त प्रस्तावों की क्रमवार समीक्षा करने और सभी जनप्रतिनिधियों से उनके महत्वपूर्ण सुझाव एवं फीडबैक लेने के सीएम ने दिए निर्देश प्रयागराज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा की। सीएम ने विकास कार्यों की परियोजनाओं को स्वीकृति देने के बाद 15 अगस्त तक सभी परियोजनाओं में निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सावन में कांवड़ यात्रियों के साथ-साथ सामान्य नागरिकों की सुविधा के लिए अलग कांवड़ पथ बनाने के निर्देश दिये। मंडल के 3194 विकास कार्य की परियोजनाओं को सीएम ने दी स्वीकृति संगम नगरी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2026-27 के लिए मंडल के 3194 विकास कार्य की परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें प्रयागराज जनपद के 1168 प्रतापगढ़ के लिए 1,092 , फतेहपुर के लिए 521 कार्यों और कौशाम्बी में लगभग 313 विकास कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सोमवार को मेला प्राधिकरण स्थित आईसीसीसी सभागार में लोक निर्माण विभाग के प्रयागराज मंडल के कार्यों की समीक्षा बैठक में इसका अनुमोदन किया गया। बैठक में सबसे पहले प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग ने गत वर्ष स्वीकृत परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति से अवगत कराते हुए वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा क्षेत्रवार प्रस्तावित विकास कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने मंडल की कुल 28 विधानसभा क्षेत्रों-प्रयागराज के 12, प्रतापगढ़ के 7, फतेहपुर के 6 तथा कौशाम्बी के 3 विधानसभा क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों की क्रमवार समीक्षा की तथा सभी जनप्रतिनिधियों से उनके सुझाव एवं फीडबैक लिया।   समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री की तरफ से वर्ष 2026-27 के लिए प्रयागराज जनपद में लगभग ₹9,668.27 करोड़ की लागत से प्रस्तावित 1,168 कार्यों, प्रतापगढ़ में लगभग ₹2,053.36 करोड़ की लागत के 1,092 कार्यों, फतेहपुर में लगभग ₹3,378.37 करोड़ की लागत के 521 कार्यों तथा कौशाम्बी में लगभग ₹915.13 करोड़ की लागत के 313 विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई। सावन में कांवड़ पथ विकसित करने के निर्देश सावन का महीना निकट है इसे देखते हुए शिव भक्तों की सुविधा के लिए समीक्षा के दौरान कांवड़ यात्रा के समय शास्त्री पुल पर बढ़ने वाले यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से पुल के समानांतर कांवड़ पथ विकसित करने का प्रस्ताव बैठक में दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव का परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए, जिससे कांवड़ यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित होने के साथ-साथ सामान्य यातायात एवं व्यापारिक गतिविधियां भी निर्बाध रूप से संचालित रह सकें। जनप्रतिनिधियों से प्राप्त प्रस्तावों की परियोजनाओं को लेकर न हो विलंब इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा क्षेत्रवार प्राप्त विकास प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी जनप्रतिनिधि अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करें। स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का चयन किया जाए। जो निर्माण कार्य सबसे ज्यादा जरूरी हो उसका प्रस्ताव सबसे पहले दें। यदि किसी प्रस्ताव में संशोधन या नया सुझाव देना हो तो उसे तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि समय पर मंजूरी दी जा सके। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी प्रक्रियाएं तय समय सीमा में पूरी हों।  सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी 15 अगस्त तक सभी स्वीकृत विकास परियोजनाओं का शिलान्यास कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए। साथ ही उन्होंने परियोजनाओं की नियमित और प्रभावी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने के लिए कहा ताकि सभी कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।

लखनऊ के काकराबाद में बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव

भारतीय कला-संस्कृति को मिलेगा विश्वस्तरीय मंच, भातखंडे के नए परिसर की रूपरेखा पर हुआ मंथन लखनऊ के काकराबाद में बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव देश-विदेश के कलाकारों का नया ठिकाना बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नवीन परिसर 'नादाधीनम् जगत्' की अवधारणा पर बनेगा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया कैंपस परिसर सीएम योगी के विजन पर आगे बढ़ेगा भातखंडे, भारतीय संस्कृति को मिलेगा विश्वस्तरीय परिसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत भारतीय संस्कृति, संगीत, लोक परंपराओं और प्रदर्शन कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया परिसर एक ऐतिहासिक पहल बनने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के काकराबाद में प्रस्तावित इस विश्वस्तरीय परिसर को केवल संगीत विश्वविद्यालय तक सीमित न रखकर भारतीय संस्कृति के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसी उद्देश्य से सोमवार को अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने परिसर की रूपरेखा पर विस्तृत मंथन किया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नया परिसर आने वाले सैकड़ों वर्षों के लिए भारत की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रदर्शन कलाओं का सबसे बड़ा केंद्र बने। बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को एक ही मंच पर समेटने वाला ऐसा संस्थान आज देश में नहीं है, जहां शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय कलाएं, दृश्य एवं ललित कलाएं, साहित्य, दर्शन, योग, अध्यात्म, भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कला शिक्षा का समन्वित अध्ययन एवं शोध हो सके। इसी दृष्टि से भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के नए परिसर को देश के पहले समग्र 'संस्कृति विश्वविद्यालय' के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। इसमें दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपॉजिटरी और भारतीय प्रदर्शन कलाओं के संग्रहालय जैसी विश्वस्तरीय सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में प्रस्तावित परिसर के लिए कई अत्याधुनिक सुविधाओं पर भी सहमति बनी। नए परिसर में संगीत, नृत्य, रंगमंच, योग एवं अध्यात्म, दृश्य एवं ललित कला, साहित्य एवं दर्शन, फिल्म निर्माण तथा कला एवं सांस्कृतिक प्रबंधन जैसे विषयों के विशेष विद्यालय स्थापित किए जाने के सुझाव दिए गए। साथ ही ध्वनि-विज्ञान आधारित अभ्यास कक्ष, आधुनिक नृत्य स्टूडियो, संगीत एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, एआई म्यूजिक लैब, विष्णु नारायण भातखंडे ग्रैंड ऑडिटोरियम, ब्लैक बॉक्स थिएटर, शास्त्रीय नृत्य थिएटर, रेसाइटल हॉल और मुक्ताकाशी मंच जैसी आधुनिक अधोसंरचनाओं का भी निर्माण करने का सुझाव दिया गाया। इसके अलावा सांस्कृतिक स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेशन सेंटर, मीडिया एवं कंटेंट लैब तथा बौद्धिक संपदा (आईपी) सहायता केंद्र विकसित कर भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने की योजना रखी गई। बैठक में पद्ममालिनी अवस्थी ने परिसर को प्रकृति और भारतीय परंपरा के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने व्यापक वृक्षारोपण, खुले एवं प्राकृतिक वातावरण, शिक्षकों के लिए आवासीय व्यवस्था, उत्तर भारतीय और कर्नाटक संगीत के समन्वय, उत्तर प्रदेश के पारंपरिक घरानों को संस्थान से जोड़ने, थिएटर कॉम्प्लेक्स, एग्जीबिशन हॉल, इंटरएक्टिव लर्निंग स्पेस तथा इंटीग्रेटेड नॉलेज सिस्टम पर आधारित विशेष लैब स्थापित करने का सुझाव दिया। वहीं प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने विश्वविद्यालय को संगीत संस्थान से आगे बढ़ाकर समग्र संस्कृति विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। बैठक में पद्मप्रो. वामन केंद्रे सहित अन्य विशेषज्ञों ने लोक एवं जनजातीय कलाओं, थिएटर, परफॉर्मिंग आर्ट्स, विजुअल आर्ट्स और साहित्य को एकीकृत पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल आर्ट सेंटर की स्थापना, इसे सभी कलाओं के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने तथा देश-विदेश के प्रख्यात कलाकारों को नियमित रूप से आमंत्रित कर विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनाने का सुझाव दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि यह परिसर भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को वैश्विक स्तर की कला शिक्षा और शोध का अवसर भी उपलब्ध कराएगा। अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ऐसा विश्वस्तरीय संस्थान विकसित करने का अनूठा अवसर है, जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप भी हो। उन्होंने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय को विश्व के अग्रणी प्रदर्शन कला संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके लिए ऐसा परिसर विकसित किया जाएगा, जिसकी वास्तुकला, शैक्षणिक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक वातावरण स्वयं भारतीयता का अनुभव कराए। यहां आने वाला प्रत्येक विद्यार्थी, कलाकार और आगंतुक भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं से जुड़ाव महसूस करे और भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के नए परिसर के लिए राष्ट्रीय स्तर की आर्किटेक्चरल डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित करने की भी योजना है, ताकि देश के श्रेष्ठ वास्तु विशेषज्ञ इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि परिसर की रूपरेखा में भारत के विभिन्न घरानों और सांस्कृतिक परंपराओं की भौगोलिक विविधता भी झलकनी चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक दायरे को पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं से आगे बढ़ाते हुए डिजिटल आर्ट्स, एनीमेशन, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण, वर्चुअल प्रोडक्शन, म्यूजिक टेक्नोलॉजी, अंतर्विषयक शोध, बौद्ध सांस्कृतिक दर्शन, सांस्कृतिक कूटनीति तथा भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि यह संस्थान राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सके। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया परिसर भारतीय संस्कृति, संगीत और प्रदर्शन कलाओं के समग्र विकास का एक विश्वस्तरीय केंद्र बनेगा। यहां परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा, शोध और सृजन का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में कुलसचिव एस.पी. सिंह, पद्मभूषण पं. अजय चक्रवर्ती, प्रो. श्रुति बंदोपाध्याय, पद्मडॉ. शोवना नारायण, प्रो. अनुपम महाजन, पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह, पद्मप्रो. वामन केंद्रे, प्रो. सिद्धार्थ सिंह तथा डॉ. वंदना सहगल सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

UP में पौधरोपण का बनेगा नया रिकॉर्ड, CM योगी बोले- ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:’ के भाव को करें आत्मसात

'माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:' के भाव को आत्मसात कर पौधरोपण का नया रिकॉर्ड बनाएगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों व पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के पार्षदों आदि से किया संवाद 12 जुलाई को वृक्षारोपण महाभियान-2026 के तहत लगाएं ‘एक पेड़ मां के नाम’, उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे, सुबह 7 से शाम छह बजे तक होगा वृहद आयोजन मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से की अपील- जनसहभागिता से पौधरोपण महाभियान को बनाएं सफल, इसके लिए दो दिन के भीतर कर लें तैयारी  पौधे लगाएं और हर हाल में उसकी सुरक्षा पर भी दें पूरा ध्यानः मुख्यमंत्री 72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति, इनकी सहभागिता से हासिल किया जाएगा हर लक्ष्यः मुख्यमंत्री  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने'पौधरोपण महाभियान-2026' के दृष्टिगत जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद किया। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षदों आदि की सहभागिता रही। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।   12 जुलाई को लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधेः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पौधरोपण अभियान जनांदोलन का स्वरूप ले चुका है। 5 जून 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस) पर भी पांच करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इस प्रकार विगत 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश में 247 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। प्रदेश में 12 जुलाई को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।  जनप्रतिनिधि दो दिन के भीतर बैठक कर पूरी करें तैयारी  मुख्यमंत्री जी ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिन में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें। कई विशिष्ट वन भी किए जाएं स्थापित, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगाए जाएं छायादार पौधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष महर्षि चरक औषधि वन, समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन स्थापित किए जाएं। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी हो। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएं। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाए।  हर हाल में सुनिश्चित हो पौधों की सुरक्षा मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों व प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को सहजन का पौधा उपलब्ध कराया जाए। यह पौधा कुपोषण से बचाव में काफी कारगर साबित होता है। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों से संवाद बनाकर उन्हें भी पौधरोपण जन अभियान से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अमृत सरोवरों, नदियों के किनारे, खाली जमीन, हाइवे-एक्सप्रेसवे के किनारे, मंडी समितियों में आवश्यकतानुसार फलदार-छायादार पौधे रोपित किए जाएं। गंगा जी, यमुना जी समेत अन्य नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधे लगवाने के साथ इनकी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं। ट्री गार्ड आदि लगाकर इनकी सुरक्षा भी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।  नर्सरियों में उपलब्ध हैं 57 करोड़ से अधिक पौधे मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ वर्ष पहले जब प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान प्रारंभ किया गया था, तब वन एवं उद्यान विभाग की नर्सरियों में पांच करोड़ पौधे भी उपलब्ध नहीं थे। आज स्थिति यह है कि दोनों विभागों के पास 57 करोड़ से अधिक पौधों का भंडार है। इनमें फलदार, औषधीय, इमारती तथा सजावटी प्रजातियों सहित सभी प्रकार के पौधे शामिल हैं और प्रत्येक जनपद में इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा उत्तर प्रदेश  उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य दोनों को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय दायित्व है। ग्लोबल वार्मिंग, अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी ने पूरे देशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है और उत्तर प्रदेश लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 72 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि शासन की शक्ति  उन्होंने कहा कि प्रदेश के 72 हजार से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि शासन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि सभी जनप्रतिनिधि पूरी सक्रियता से इस अभियान से जुड़ेंगे तो वृक्षारोपण का लक्ष्य सहजता से प्राप्त किया जा सकेगा और यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण करेगा। मुख्यमंत्री का पौधों के संरक्षण व संवर्धन पर रहा जोर  मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक पौधे के संरक्षण और संवर्धन की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने पौधों की नियमित सिंचाई, गुड़ाई, सुरक्षा एवं देखरेख की व्यवस्था करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सुरक्षित पौधा ही भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण की रक्षा करेगा। महाभिय़ान को जन जागरूकता व सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जोड़ें  मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर आम, जामुन, पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, हरड़ सहित पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक स्थान पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, नुक्कड़ नाटक एवं जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए, जिससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्वाभाविक जागरूकता और उत्साह का वातावरण बने। प्रत्येक कार्यक्रम की कराएं फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक वृक्षारोपण कार्यक्रम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी कर वन विभाग द्वारा विकसित मोबाइल ऐप पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। इससे अभियान की पारदर्शी मॉनिटरिंग के साथ-साथ … Read more

शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा ‘परशुरामपुरी’

यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी 60 करोड़ रुपये से लागू होगी बीमा योजना, 85 प्रतिशत प्रीमियम देगी सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान महामारी, दैविक आपदा और आकास्मिक दुर्घटना से होने वाले नुकसान पर मिलेगा बीमा, 2.28 लाख से अधिक पशु आएंगे दायरे में पशुओं की मौत या अपंगता पर नहीं होगा आर्थिक संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती लखनऊ,   सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। अगर किसी वजह से पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंजूरी दी है। इन स्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों तथा अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पशु की स्थायी विकलांगता पर 75 प्रतिशत तक भुगतान प्रदेश सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। 2.28 लाख से अधिक पशुओं को होगा बीमा कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस बजट के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा। इनमें 1,86,800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41,550 पशुओं का बीमा एससीएसपी कम्पोनेंट के अंतर्गत किया जाएगा। योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को अंशदान के रूप में देनी होगी। धर्मपाल सिंह ने बताया कि यूपी पशुधन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। जीडीपी के संदर्भ में पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.50 प्रतिशत का योगदान है। प्रदेश में कृषि एवं संबंध क्षेत्र की कुल जीडीपी 30 प्रतिशत से अधिक है। पशुधन का इसमें विशेष योगदान है। पशुधन के माध्यम से यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना 75 जिलों में लागू होगी। राज्यांश 85 प्रतिशत (इसमें केंद्र का हिस्सा 51 प्रतिशत और राज्य का 34 प्रतिशत शामिल) और लाभार्थी का अंश 15 प्रतिशत होगा। योजना के तहत एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा। इस बीमा योजना से पशुपालकों को बड़ा लाभ होगा। यूपी के गोरसंरक्षण केंद्रों में 13.50 लाख गाय संरक्षित मंत्री ने बताया कि निराश्रित पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है। प्रदेश में 7,500 गोसंरक्षण केंद्र हैं, जिसमें लगभग 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इन पर प्रतिदिन 8 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज, वन विभाग की जमीन पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा 'परशुरामपुरी' नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर को मिलेगी नई आधिकारिक पहचान अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा नाम परिवर्तन का निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से जनपद शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय प्रभावी हो जाएगा। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम 'परशुरामपुरी' किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। इस निर्णय के बाद संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा। भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है जलालाबाद जनपद शाहजहांपुर स्थित नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान किए जाने के बाद राज्य सरकार ने नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर … Read more

यूपी में स्टार्टअप, डेटा सेंटर और पशुधन बीमा नीति को हरी झंडी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित 5 कालीदास मार्ग पर कैबिनेट बैठक हुई। जिसमें 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शाहजहांपुर जिले की तहसील जलालाबाद नगर का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का फैसला लिया गया। सरकार के इस निर्णय के बाद नाम परिवर्तन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। बैठक के बाद आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि प्रदेश में निवेश, नवाचार और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। साथ ही यूपी स्टार्टअप नीति-2026 और डेटा सेंटर नीति-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि इन नीतियों से प्रदेश में नए निवेश आकर्षित होंगे और युवाओं को उद्यमिता के बेहतर अवसर मिलेंगे। योगी कैबिनेट में 27 प्रस्तावों पर मुहर पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू होगी। इसके तहत लघु एवं सीमांत किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा, ताकि महामारी, दुर्घटना, अपंगता या मृत्यु की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके। इसके अलावा गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड का अस्पताल और वाराणसी में ईएसआई का मेडिकल कॉलेज बनेगा। इनके लिए निशुल्क जमीन हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गईं। वाराणसी के मेडिकल कॉलेज में 50% सीटें श्रमिकों के परिवार के लिए आरक्षित होगी। तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें कानपुर के बिल्हौर में महर्षि योगी इंटरनेशनल कृषि विश्वविद्यालय, फतेहपुर में ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय और गाजियाबाद में अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। एक देश में दो विधान, दो प्रधान के खिलाफ शंखनाद इससे पहले लखनऊ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने देश की अखंडता के लिए 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' के खिलाफ शंखनाद किया और 1953 में कश्मीर में बलिदान दिया। नेहरू सरकार की तुष्टीकरण नीति और धारा 370 के खिलाफ उनके सपने को पीएम मोदी के नेतृत्व में 2019 में धारा 370 हटाकर और संविधान लागू करके पूरा किया गया। सीएम ने यह भी कहा कि जिस बंगाल को उन्होंने बचाया, आज वहां भाजपा की डबल इंजन सरकार उनके स्थलों के पुनरुद्धार के लिए प्रभावी काम कर रही है।

एक जिला एक क्यूज़ीन से महिलाओं, किसानों और युवाओं को मिलेगा नया रोजगार

लखनऊ किसी भी शहर की असली रौनक उसके बाजार, गलियों और खाने की खुशबू में दिखती है। सुबह चाय की दुकान पर भीड़ लगती है, दोपहर में कचौड़ी, पूड़ी, सब्जी या चाट की दुकान चलती है और शाम को मिठाई, नमकीन, स्नैक्स और लोकल ड्रिंक की डिमांड बढ़ती है। इन छोटी-छोटी दुकानों के पीछे सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि रोजगार की पूरी चेन चलती है। यूपी में ODOC यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन इसी फूड चेन को नई दिशा दे सकता है। इसका मतलब सिर्फ किसी जिले की एक डिश को नाम देना नहीं है, बल्कि जिले के फूड सेक्टर को एक एक सही तरह का सिस्टम देना है, जहां लोकल रेसिपी, किचन ट्रेनिंग, साफ-सफाई, सर्विस, पैकिंग, सप्लाई, डिलीवरी और छोटे बिजनेस को साथ जोड़ा जा सके। अगर हर जिले में उसकी खास क्यूज़ीन के आसपास फूड सेंटर, ट्रेनिंग और बिजनेस सपोर्ट बने, तो यूथ को अपने ही शहर में काम के नए मौके मिल सकते हैं। रसोई से रोजगार, फूड चेन का विस्तार फूड सेक्टर में रोजगार केवल खाना बनाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं होता। एक छोटी दुकान भी कई लोगों को काम देती है। कोई सब्जी लाता है, कोई दूध देता है, कोई मसाला सप्लाई करता है, कोई किचन में मदद करता है, कोई पैकिंग करता है, कोई पेमेंट संभालता है और कोई डिलीवरी करता है। ODOC इसी पूरी चेन को मजबूत कर सकता है। अगर किसी जिले की खास डिश पर काम बढ़ता है, तो उससे जुड़े छोटे-छोटे काम भी बढ़ते हैं। हलवाई को हेल्पर चाहिए, स्नैक यूनिट को पैकिंग स्टाफ चाहिए, लोकल कैफे को सर्विस स्टाफ चाहिए, डिलीवरी के लिए यूथ चाहिए और ऑनलाइन ऑर्डर संभालने के लिए डिजिटल स्किल वाले लोग चाहिए। इस तरह एक डिश केवल प्लेट में नहीं रहती, बल्कि रोजगार का पूरा नेटवर्क बन सकती है। जिला फूड सेंटर, स्किल का नया ठिकाना ODOC को रोजगार से जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका जिला फूड सेंटर है। ऐसा सेंटर जहां लोकल यूथ को कुकिंग, किचन मैनेजमेंट, फूड सेफ्टी, सर्विस, पैकिंग, प्राइसिंग और ऑनलाइन ऑर्डर की ट्रेनिंग मिले। हर युवा अपना रेस्टोरेंट नहीं खोल सकता, लेकिन हर युवा फूड सेक्टर में कोई न कोई काम सीख सकता है। कोई असिस्टेंट कुक बन सकता है, कोई बेकरी या मिठाई यूनिट में काम कर सकता है और कोई क्लाउड किचन में काम सीख सकता है। जिला फूड सेंटर यूथ को यह समझा सकता है कि फूड बिजनेस केवल स्वाद नहीं, बल्कि टाइमिंग, साफ-सफाई, लागत, सर्विस और ग्राहक भरोसे का भी काम है। महिलाओं के हाथ का स्वाद, कमाई का नया रास्ता यूपी के घरों में कई रेसिपी ऐसी हैं, जिन्हें महिलाएं सालों से संभालती आ रही हैं। अचार, पापड़, मसाले, मिठाई, नमकीन, लड्डू, मठरी, सेव, ठेकुआ, चिप्स, चटनी और कई लोकल स्नैक्स घरों में बनते हैं। इनमें स्वाद भी होता है और भरोसा भी। ODOC महिलाओं को इस घरेलू हुनर से कमाई का रास्ता दे सकता है। अगर महिलाओं को साफ पैकिंग, सही वजन, रेट तय करने, डिजिटल पेमेंट और ऑर्डर संभालने की ट्रेनिंग मिले, तो उनका काम घर से बाहर बाजार तक जा सकता है। सेल्फ हेल्प ग्रुप भी इस मॉडल में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक समूह मिलकर लोकल डिश या स्नैक बना सकता है, दूसरा समूह पैकिंग कर सकता है और तीसरा समूह सप्लाई व ऑर्डर संभाल सकता है। इससे महिलाओं को घर के पास काम मिलता है और परिवार की इनकम को सपोर्ट मिलता है। घर का स्वाद, बाजार का साथ, महिलाओं को मिला कमाई का नया हाथ। किसान और फूड बिजनेस का सीधा लिंक फूड सेक्टर बढ़ेगा, तो उसका फायदा केवल दुकानदार को नहीं होगा, बल्कि किसान को भी इसका फायदा मिल सकता है। हर लोकल डिश के पीछे कोई न कोई कच्चा माल होता है। दूध, गन्ना, गेहूं, चावल, आलू, सब्जी, मसाले, दाल, तेल, फल और मेवा जैसे सामान सीधे खेती से आते हैं। अगर जिले की खास क्यूज़ीन पर डिमांड बढ़े, तो लोकल सोर्सिंग का रास्ता मजबूत हो सकता है। मिठाई यूनिट को दूध चाहिए, नमकीन यूनिट को बेसन और तेल चाहिए, अचार यूनिट को आम, मिर्च, नींबू या सब्जी चाहिए और पेठा जैसे प्रोडक्ट को कच्चे माल की लगातार जरूरत होती है। इससे किसान, डेयरी, छोटे सप्लायर, ट्रांसपोर्ट और फूड मेकर के बीच नई चेन बन सकती है। यानी ODOC खेत से किचन और किचन से बाजार तक रोजगार का रास्ता बना सकता है। सर्विस सेक्टर को नई स्पीड आज खाने का बिजनेस केवल दुकान पर बैठकर ग्राहक का इंतजार करने तक सीमित नहीं है। अब डिलीवरी, ऑनलाइन ऑर्डर, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, रिव्यू, कस्टमर सपोर्ट और फोटो-वीडियो भी इस सेक्टर का हिस्सा हैं। ODOC के साथ अगर जिले की डिश की डिमांड बढ़ती है, तो सर्विस सेक्टर में भी काम बढ़ेगा। डिलीवरी बॉय, पैकिंग असिस्टेंट, ऑर्डर मैनेजर, सोशल मीडिया हैंडलर, फूड फोटोग्राफर, मेन्यू डिजाइनर, अकाउंट हेल्पर और कस्टमर सपोर्ट जैसे कई रोल बन सकते हैं। यूथ इन रोल्स में जल्दी ट्रेनिंग लेकर काम शुरू कर सकता है। खास बात यह है कि यह काम बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी फूड सर्विस से जुड़े मौके बन सकते हैं। स्कूल, कॉलेज और ट्रेनिंग, सीखो स्किल और बनाओ अर्निंग ODOC को लंबे समय तक मजबूत बनाना है, तो इसे स्किल एजुकेशन से जोड़ना जरूरी है। स्कूल, कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और स्किल सेंटर यूथ को फूड सेक्टर की बुनियादी ट्रेनिंग दे सकते हैं। इसमें किचन हाइजीन, बेसिक कुकिंग, फूड कॉस्टिंग, मेन्यू प्लानिंग, पैकेजिंग, ग्राहक से बात, डिजिटल पेमेंट और बिजनेस की बेसिक समझ शामिल हो सकती है। इससे यूथ पढ़ाई के साथ काम की तैयारी भी कर सकता है। कई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी खोजते हैं। अगर उन्हें अपने जिले की फूड इकॉनमी की समझ पहले से मिले, तो वे लोकल स्तर पर भी काम ढूंढ सकते हैं या छोटा बिजनेस शुरू कर सकते हैं। फूड इवेंट से लोकल कमाई जिले की क्यूज़ीन को आगे बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे फूड इवेंट भी बड़ा रोल निभा सकते हैं। जिला स्तर पर फूड डे, कॉलेज फूड फेस्ट, लोकल मेले, रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर टेस्ट काउंटर और बाजारों में फूड स्टॉल लगाए जा सकते हैं। ऐसे इवेंट से दो … Read more