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बाजार स्ट्रीट क्षेत्रों में भूतल और प्रथम तल पर बन सकेंगे मकान

 लखनऊ क्या बाजार स्ट्रीट वाले क्षेत्रों में दुकान के साथ मकान बनाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश शासन ने बाजार स्ट्रीट में नक्शा पास करने को लेकर स्थिति पूरी तरह से साफ कर दी है। बाजार स्ट्रीट वाले क्षेत्रों में भूस्वामी के चाहने पर भूतल (Ground Floor)और प्रथम तल (First Floor) का भी आवासीय नक्शा पास किया जाएगा। इन दोनों तलों पर व्यावसायिक नक्शा पास करने की व्यवस्था है। शासन से कुछ विकास प्राधिकरणों ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके आधार पर विकास प्राधिकरणों को विस्तृत-दिशा निर्देश भेजा गया है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग शहरों के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार कराता है। इसमें सड़कों की चौड़ाई के आधार पर भू-उपयोग चिह्नित किए जाते हैं। भवन विकास उपविधि में इसके मुताबिक ही नक्शा पास करने की व्यवस्था दी जाती है। आवास विभाग ने पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशंस जारी किया है। प्राधिकरणों ने स्थिति स्पष्ट करने को कहा था कुछ विकास प्राधिकरणों ने इसके कुछ बिंदु को लेकर शासन से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था। इसके आधार पर पूरी स्थिति साफ की गई है। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि बाजार स्ट्रीट में व्यावसायिक उपयोग पूरे भूखंड की गहराई के आधार पर दी जाएगी। भूतल व प्रथम तल व्यावसायिक होगा। शेष तलों का इस्तेमाल आवासीय होगा। भूखंड स्वामी के अनुरोध पर भूतल व प्रथम तल पर आवासीय उपयोग की अनुमति भी दी जाएगी। बाजार स्ट्रीट में मिश्रित भू उपयोग को मंजूरी दी गई है यूपी में 18 या 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर बाजार स्ट्रीट के रूप में चिह्नित किया गया है। इसका मकसद व्यवस्थित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की सुविधा देना है। बाजार स्ट्रीट में मिश्रित भू-उपयोग की सुविधा दी गई है। मसलन नीचे दुकान और ऊपर मकान बनाने का नक्शा पास किया जाता है। यूपी में अब आठ कमरे वाले होमस्टे भी होंगे पंजीकृत वहीं, प्रदेश में लगातार बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बी एंड बी इकाइयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया गया है तथा पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्व-नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी प्रदान की गई है। अब आठ कक्ष वाले भवन भी होम स्टे नीति के तहत पंजीकृत किए जाएंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संशोधित नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में अब न्यूनतम एक तथा अधिकतम आठ कक्ष (16 शैय्या) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पूर्व में अधिकतम छह कक्षों को ही किराये पर दिए जाने की व्यवस्था थी।

भीषण आग मामले में SIT जांच शुरू, चार लोग गिरफ्तार और अधिकारी निलंबित

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड की जांच जे हो गई है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए गठित एसआईटी का गठन किया गया है। मंगलवार को SIT की टीम मौके पर पहुंची जांच शुरू कर दी है। एक-एक चीज का निरीक्षण किया जाएगा। बिल्डिंग के दस्तावेज भी मांगे गए हैं। वहीं, फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने में जुटी है। दरअसल, सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में तीन मंजिला इमारत में आग लगने के कारण झुलसने से 15 लोगों की मौत हो गई। जबकि 9 लोग घायल हो गए। इस मामले में पुलिस ने इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को लेकर देर रात उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान किया। जिसके बाद एसआईटी का गठन किया। इसमें अपर मुख्य सचिव पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृत विभाग अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार हैं। 7 दिन में सीएम सौंपेगी SIT सीएम योगी ने एसआईटी से सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों में हुई संभावित लापरवाही और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करेगी। मृतकों के परिजनों के केंद्र से 2 लाख और राज्य से 5 लाख का मिलेगा मुआवजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। इसके अलावा सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है।

कोचिंग सेंटरों और डिजिटल लाइब्रेरी पर प्रशासन की नजर, एक सप्ताह चलेगा अग्नि सुरक्षा अभियान

लखनऊ लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड में छात्रों समेत 15 लोगों की मौत के बाद प्रयागराज, आगरा, मुरादाबाद और मेरठ जैसे बढ़े महानगरों में भी जिला प्रशासन, पीडीए और अग्निशमन विभाग सतर्क हो गया है। संभावित हादसों को रोकने के लिए सभी विभाग व जिम्मेदार मंगलवार से वृहद स्तर पर अभियान शुरू करने जा रहे हैं। अग्निशमन विभाग मंगलवार से जिले के कोचिंग संस्थानों और डिजिटल लाइब्रेरी की सघन जांच शुरू करेगा। एक सप्ताह तक चलने वाले अभियान में अग्नि सुरक्षा मानकों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि सभी प्रमुख कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। जांच में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास मार्ग, प्रवेश और निकास द्वारों की चौड़ाई, विद्युत वायरिंग की स्थिति, भवन की संरचना और आपदा की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जांच की जाएगी। विशेष रूप से उन कोचिंग संस्थानों और डिजिटल लाइब्रेरी को प्राथमिकता दी जाएगी, जो संकरी गलियों में संचालित हैं। अग्निसुरक्षा पर संवाद स्थापित करेगा पीडिए लखनऊ की घटना के बाद प्रयागराज प्रधिकरण, पीडीए ने शहर के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पीडीए के उपाध्यक्ष ऋषिराज ने सभी जोनल अधिकारियों और अभियंताओं को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उपाध्यक्ष ने बताया कि शहर में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों की जांच की जाएगी। कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों से संपर्क कर अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास, विद्युत सुरक्षा तथा मानकों के अनुपालन को लेकर संवाद स्थापित किया जाएगा। सुधार न होने पर भवन सील किए जाएंगे। जांच के साथ ही दी जाएगी ट्रेनिंग सीएफओ ने बताया कि सभी अग्निशमन अधिकारियों को मंगलवार से सघन चेकिंग अभियान चलाने का लिखित निर्देश जारी किया गया है। अभियान के दौरान आठ बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट भी देने का निर्देश दिया गया है। सघन चेकिंग अभियान के दौरान जांच के साथ ही कोचिंग संचालकों व छात्रों को आग बुझाने और बचाव के लिए मॉक ड्रिल के माध्यम से बेसिक ट्रेनिंग भी दी जाएगी। आग से बचाव के इंतजामों की जांच करेगी कमेटी लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने शहर के भवनों में आग से बचाव के इंतजामों की स्थिति जांचने के लिए एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। कमेटी होटल, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक इमारतों और अन्य प्रमुख प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की जांच करेगी। समिति यह देखेगी कि भवनों में फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास, अग्निशमन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। कमेटी जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट देगी। एक सप्ताह तक चलाया जाएगा विशेष अभियान कोचिंग सेंटरों में अग्निसुरक्षा के मद्देनजर निरीक्षण के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने पांच टीमों का गठन किया है। फायर स्टेशन हैलेट रोड, कटघर, बिलारी, कांठ और ठाकुरद्वारा के लिए गठित ये टीमें एक सप्ताह तक विशेष अभियान चलाकर कोचिंग सेंटरों का निरीखण करेंगी। आपातकालीन निकास मार्ग, भवन की क्षमता और छात्र संख्या, फायर एनओसी की स्थिति, बिना पंजीकरण संचालन की जांच होगी।

एक रास्ता, ऊपर AC-एग्जॉस्ट और नीचे आग… लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतों के बाद 4 पर FIR

 लखनऊ लखनऊ के अलीगंज इलाके के जिस कॉम्प्लेक्स में आग लगी, वहां नियम कायदे और सुरक्षा के मानकों की धज्जियां उड़ा दी गईं थीं. तीन मंजिला इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट भी बनाया गया था. एंट्री एग्जिट के लिए सिर्फ एक छोटा सा रास्ता था और इस रास्ते के ऊपर 7 पैनल, 2 एग्जॉस्ट फैन, इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल, लगाकर रास्ते को और छोटा कर दिया गया था।  बिना इमरजेंसी गेट के तैयार हुआ था कॉम्पलेक्स बिना किसी इमरजेंसी गेट के तैयार हुए इस रिहायशी इलाके के कमर्शियल कॉम्पलेक्स में आग लगी तो दूसरी मंजिल पर फंसे 15 लोगों की जान चली गई. अब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. 4 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. आईएएस अमृत अभिजात और आईपीएस प्रवीण कुमार की एसआईटी गठित है।  आखिर 15 मौतों का जिम्मेदार कौन? एलडीए (लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी), बिजली विभाग और फायर के कुल चार अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है. साथ ही मामले में अन्य कार्रवाई भी जारी है. लेकिन रेजिडेंशियल नक्शा पास करवा कर बनाए गए इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग में 15 लोगों की जान चली गई, उसके लिए जिम्मेदार कौन है? घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, नगर निगम, फायर डिपार्टमेंट पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।  इधर लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को राज्य सरकार ने राहत राशि प्रदान की है. सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी गई है. विधायक नीरज बोरा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पीड़ित परिवारों को यह आर्थिक सहायता सौंपी. सरकार का कहना है कि यह राशि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से दी जा रही है।  साथ ही सरकार ने हादसे से प्रभावित सभी परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है. घायलों के बेहतर उपचार और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।  SIT ने तेज की जांच, घटनास्थल पहुंचकर जुटाए सबूत अलीगंज अग्निकांड मामले में सीएम योगी के निर्देश पर गठित एसआईटी ने मामले की जांच तेज कर दी है. बताया जा रहा है कि जांच टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है, जहां टीम बारीकी से निरीक्षण कर सबूत जुटा रही है।  बताया जा रहा है कि एसआईटी बिल्डिंग में आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में हुई लापरवाही की जांच करेगी. हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने पर जांच का फोकस रहेगा. इसके साथ ही एसआईटी ने सभी संबंधित विभागों से भी रिपोर्ट तलब की है।  लखनऊ के बाद कानपुर में जागा प्रशासन, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग सील लखनऊ में कोचिंग संस्थान से जुड़े हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान के दौरान फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया है. जांच में इन संस्थानों में भवन एवं सुरक्षा संबंधी मानकों के उल्लंघन की बात सामने आने पर ये कार्रवाई की गई।  केडीए अधिकारियों की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर उन संस्थानों को चिह्नित किया, जहां आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान संस्थानों को खाली कराया गया और बाद में उन्हें सील कर दिया गया।  प्राधिकरण के अनुसार, अभियान के तहत विभिन्न जोनों में एक साथ कार्रवाई की गई. पहले चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जबकि अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मानकों की अनदेखी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी. सील किए गए संस्थानों में फिजिक्स वाला, वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।  टूटे सपने, बिखरे परिवार और अपनों की गूंजती चीख-पुकार…. लखनऊ में हर आंख नम, हर जुबां पर सवाल सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुष्का, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविश्य, अब्दुल रहमान, सूरज भाह, भाहजान, जयनिज चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमल्या. ये सिर्फ नाम नहीं हैं. ये वे 15 जिंदगी थीं जिनके अपने-अपने सपने थे. किसी ने करियर की शुरुआत की थी, कोई परिवार की उम्मीद था, कोई अपने माता-पिता का सहारा बनने की तैयारी कर रहा था. लेकिन कुछ मिनटों में सब खत्म हो गया।   बिल्डिंग में आने-जाने का था एक संकरा रास्ता, जांच में खुलासा लखनऊ अग्निकांड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में पता चला है कि जिस में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई, उसमें अंदर और बाहर आने-जाने के लिए एक सकरा रास्ता था, वही से सकरी सीढ़ियां पहली-दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाने के लिए थीं. जांच में पता चला है कि यही वजह थी कि जब बिल्डिंग में आग लगी तो धुएं और आग ने रास्ता बंद कर दिया और परिसर में काम करने वाले, पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां निकल नहीं पाए. जिससे उनकी मौत हो गई।  एलडीए ने जांच की तेज लखनऊ अग्निकांड मामले में एलडीए ने भी जांच तेज कर दी है. एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है. ज्ञानेंद्र वर्मा के नेतृत्व में गठित इस टीम में के.के. गौतम, मानवेंद्र सिंह, मनोज सागर और रविनंदन सिंह को शामिल किया गया है. टीम घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।  वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एलडीए के एई और जेई को निलंबित कर दिया गया है. प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। 

शिक्षा से रोजगार तक बड़ा फोकस: सीएम योगी के मार्गदर्शन में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है। इसके साथ ही बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं वैश्यावृत्ति जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराकर पुनर्वासित बच्चों को भी इस योजना के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जा रहा है। आर्थिक सहायता से बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, ऐसे युवक-युवतियां जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। वर्तमान समय में प्रदेशभर में कुल 1,03,611 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता किसी संबल से कम नहीं है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना भी है। बाल संरक्षण को मिल रही नई मजबूती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर योगी सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास को लेकर विशेष रूप से गंभीर नजर आ रही है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं से मुक्त कराए गए बच्चों को परिवार आधारित वातावरण में पुनर्वासित कर मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनका सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। कई छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। वहीं बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त पात्र बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए जिले स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण, सत्यापन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता रखने वाला कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे। सी. इंदुमति, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

तेज रफ्तार पर लगेगी लगाम! IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों संग यूपी परिवहन विभाग ने बनाई नई स्पीड पॉलिसी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर कई अभियान चला रही है। सड़क हादसों को रोकना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। इसी क्रम में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ पर काम कर रहे हैं। इसके तहत हाईवे और एक्सप्रेसवे की तरह ही शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित करना है। इस पहल का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की रोकथाम कर लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जल्द ही प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। हाल में उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी के ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और एविडेंस-बेस्ड अप्रोच के माध्यम से सड़कों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर को कम करना है। इसके तहत केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की व्यस्त सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेजों के आसपास के मार्गों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी उपयुक्त गति सीमा तय की जाएगी। इससे अनियंत्रित गति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ड्राफ्ट आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और परिवहन विभाग ने इस पॉलिसी के लिए प्रदेशभर में विस्तृत अध्ययन किया है। तैयार किए गए पॉलिसी ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल करते हुए संशोधन किया जाएगा। इसके बाद परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी को प्रदेश सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पॉलिसी प्रदेश के विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की प्रकृति और यातायात घनत्व के अनुरूप गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। वहीं विभाग सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क यात्री, सुरक्षित वाहन और पोस्ट-क्रैश केयर पर भी ध्यान दे रहा है। साथ ही सुरक्षित गति ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फिटनेस निरीक्षण, जनजागरूकता अभियान के जरिए भी सुरक्षित यातायात सुनिश्चित कर रहा है।

लखनऊ आग हादसे से नाराज CM योगी, अधिकारियों को लगाई फटकार; जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को तीन मंजिल की इमारत में लगी आग में झुलसकर 15 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और मामले की जांच के सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री अपना अलीगढ का दौरा बीच में ही छोडकर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों के मुताबिक आदित्यनाथ ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) मौके पर जाकर घटना का जायजा लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। घटना से गुस्साए सीएम योगी ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। यह आग अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला वाणिज्यिक इमारत में अपराह्न करीब तीन बजे लगी। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहनों और 'हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म' वाली गाड़ी को अभियान पर लगाया गया। पुरनिया बाजार से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह इमारत अलीगंज के पॉश रिहायशी इलाके में है, जहां कोचिंग सेंटर और कैफे जैसी जगहें हैं। अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान के दौरान आग में फंसे लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया। कुछ लोगों को 'बॉडी बैग' में लाया गया, जबकि कुछ को कंबल में लपेटा गया था और एम्बुलेंस में ले जाते समय वे बेहोश लग रहे थे। इन लोगों के शवों या घायलों को बगल की इमारत की छत से बाहर निकाला गया। प्रधानमंत्री ने जताया शोक, मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। अखिलेश यादव ने दुख व्यक्त किया सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर लिखा कि इस हादसे के पीछे के कारणों की ईमानदारी से जांच हो। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके, यही कोशिश होनी चाहिए। मायावती ने जताया शोक बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर कहा, ''उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। उन्होंने आगे कहा, ''इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा। आग लगने के समय इमारत के अंदर मौजूद रहे युवकों और युवतियों के रिश्तेदार बताये जा रहे कुछ लोग घटनास्थल के पास खड़े होकर रोते-बिलखते और अधिकारियों से इमारत के अंदर जाने की गुहार लगाते नजर आये।

32348 मेगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि: योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था।  मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। चाहे तूफानी रात हो, भारी बारिश हो या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उपकेंद्रों का निरीक्षण भी लगातार किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।  रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही चेयरमैन डॉ. गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।

योगी सरकार के तहत यूपी बना देश में सबसे अधिक बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य

लखनऊ  कई अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दर्जनों उपक्रम में नंबर एक बने उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रविवार रात को बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। तूफानी भरी रात हो या फिर भारी बारिश या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारी भी उपकेंद्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।  

रेलवे अपडेट: तीसरी लाइन कमीशनिंग के चलते दर्जनों ट्रेनों पर असर, यात्रियों को परेशानी

लखनऊ रेलवे गोंडा से गोंडा कचहरी के बीच पांच किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन को कमीशंड करने के लिए अगले माह प्री इंटरलाकिंग और नान इंटरलाकिंग की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस कारण गोंडा रूट होकर चलने वाली कई ट्रेनों को सात से 11 जुलाई तक निरस्त किया जाएगा। वहीं, कई ट्रेनों के रूट बदलेंगे। छह, सात व 10 जुलाई को 15109 छपरा-मथुरा एक्सप्रेस लखनऊ नहीं आएगी। ये ट्रेनें निरस्त होंगी – 22921 -बांद्रा-बलरामपुर एक्सप्रेस -05 जुलाई – 22922 -बलरामपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -07 जुलाई – 15081- गोरखपुर-गोमतीनगर एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15082- गोमतीनगर-गोरखपुर एक्सप्रेस -07 से 11 जुलाई – 15133 -छपरा-आनंद विहार एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15134 -आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15031- गोरखपुर-लखनऊ जंक्शन एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15032- लखनऊ जंक्शन-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15070- ऐशबाग-गोरखपुर एक्सप्रेस -सात से 10 जुलाई – 15069- गोरखपुर-ऐशबाग एक्सप्रेस -आठ से 11 जुलाई – 22199- ग्वालियर-बलरामपुर सुशासन एक्सप्रेस-08 जुलाई – 22200- बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15029- गोरखपुर-पुणे एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15030- पुणे -गोरखपुर एक्सप्रेस अयोध्या होकर चलेंगी यह ट्रेनें – 15078- गोमतीनगर-कामाख्या एक्सप्रेस -29 जून – 15904- चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस -28 जून व 08 जुलाई – 12512- तिरुवनंतपुरम-गोरखपुर एक्सप्रेस -28 जून से 07 जुलाई – 15046- ओखा-गोरखपुर एक्सप्रेस 28 जून व 05 जुलाई – 12592- यशवंतपुर-गोरखपुर एक्सप्रेस -29 जून व 06 जुलाई – 15134- आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -01 व 04जुलाई – 19409 – साबरमती-थावे एक्सप्रेस -02 जुलाई – 22534- यशवंतपुर-गोरखपुर सुपरफास्ट -01 जुलाई – 19623- मदार जंक्शन-दरभंगा अमृत भारत -03 जुलाई – 12522- एर्नाकुलम-बरौनी एक्सप्रेस -03 जुलाई – 15065- गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15067- गोरखपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12587- गोरखपुर-जम्मूतवी अमरनाथ एक्सप्रेस -06 जुलाई – 12565- बिहार संपर्कक्रांति एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15651- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15066- पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15565- वैशाली एक्सप्रेस – 08 से 10 जुलाई – 12571- गोरखपुर-आनंद विहार एक्सप्रेस-08 व 10 जुलाई – 12572- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस – 09 जुलाई – 14673 शहीद एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15005- गोरखपुर-देहरादून एक्सप्रेस-08 जुलाई – 15652- जम्मूतवी-गुवाहाटी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12596- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15566- वैशाली एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15653- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15204- बरौनी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -09 जुलाई – 12555- गोरखधाम एक्सप्रेस -09 जुलाई – 22537- गोरखपुर-एलटीटी कुशीनगर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 11079- एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 14674- शहीद एक्सप्रेस -09 जुलाई वाराणसी शटल समेत दो ट्रेनों में बढ़ेंगे कोच रेलवे प्रशासन ने लखनऊ और वाराणसी रूट सहित दो प्रमुख ट्रेनों में कोचों की स्थायी वृद्धि करने का बड़ा फैसला लिया है। इसमें गाड़ी संख्या 20401/20402वाराणसी-लखनऊ-वाराणसी सुपरफास्ट शटल एक्सप्रेस में 27 जून से कोच बढ़ाए जा रहे हैं। ट्रेन में सफर को सुगम बनाने के लिए एक वातानुकूलित (एसी) चेयर कार और एक शयनयान (स्लीपर) श्रेणी का कोच स्थायी रूप से जोड़ा जाएगा। इस बढ़ोतरी के बाद ट्रेन की कुल कोच संख्या 20 से बढ़कर 22 हो जाएगी, जिससे दैनिक यात्रियों को सीटों के लिए मारामारी नहीं करनी पड़ेगी। रेलवे ने वाराणसी-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (द्वि-साप्ताहिक और साप्ताहिक) में भी जुलाई की शुरुआत से एक एसी प्रथम श्रेणी और एक एसी 2-टियर कोच की स्थायी वृद्धि करने की घोषणा की है, जिससे इसकी क्षमता भी 22 कोच की हो जाएगी। इससे रेलयात्रियों को राहत मिलेगी।