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सिरसा डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ गवाही बाधित: कोर्ट का सख्त रुख, अधिकारियों को फटकार

पंचकूला डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले में अमेरिका से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज होनी थी लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक तैयारी न होने के कारण गवाही नहीं हो सकी। अदालत ने देरी पर नाराजगी जताते हुए सीबीआई को अधिक सक्रिय होने के निर्देश दिए। सीबीआई के डिप्टी एसपी ने अदालत को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कई बार अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस को पत्र भेजे लेकिन जवाब नहीं मिला। इस कारण गवाही की तारीख आगे नहीं बढ़ाई जा सकी। तकनीकी उपकरण भी काम नहीं आए  सीबीआई अपने साथ गवाही रिकॉर्ड करने के लिए डिवाइस और डॉक्यूमेंट विजुअलाइजर लेकर आई थी लेकिन अदालत के सिस्टम में ये उपकरण काम नहीं कर पाए। तकनीकी विंग के प्रभारी ने बताया कि वेंडर एक सप्ताह में कंपैटिबल डिवाइस उपलब्ध कराएगा। शिकायतकर्ता ने सीबीआई पर लापरवाही का आरोप लगाया  अदालत ने सीबीआई से पूछा कि क्या अमेरिकी विभाग की मदद लिए बिना केवल भारतीय एंबेसी की सहायता से गवाही रिकॉर्ड की जा सकती है। इस संबंध में नियम, मार्गदर्शन और पूरी रिपोर्ट 21 नवंबर तक अदालत को पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।   शिकायतकर्ता के वकील नवकिरन सिंह ने कहा कि गवाह अमेरिका से गवाही देने के लिए तैयार हैं और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति भी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई ढिलाई बरत रही है और गवाह को कोई जानकारी नहीं दी गई। अदालत ने कहा कि 2018 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद से कुल 92 गवाहों में से केवल 12 गवाही दर्ज हो सकी है। अदालत ने इसे गंभीर देरी बताया और प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए।  

143 खिलाड़ियों के ग्रेडेशन प्रमाणपत्र रद्द करने की तैयारी, हरियाणा के इन जिलों के खिलाड़ियों पर सबसे बड़ा असर

चंडीगढ़  सरकारी भर्तियों में खेल कोटे के नाम पर फर्जीवाड़ा अब बड़े स्तर पर सामने आया है। राज्य सरकार को भेजी गई जांच रिपोर्ट में खेल विभाग ने कई खिलाड़ियों के प्रमाणपत्रों को संदिग्ध, अमान्य और यहां तक कि फर्जी घोषित किया है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में खेल कोटे के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर नौकरियों में फायदा उठाने की कोशिश हुई। इससे न केवल वास्तविक खिलाड़ियों का हक मारा गया, बल्कि भर्तियों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठे। कई सर्टिफिकेट तो 2012, 2014, 2016 और 2018 की प्रतियोगिताओं के बताए जा रहे थे, लेकिन संबंधित संघों ने ऐसे आयोजनों के होने से ही इन्कार कर दिया। वहीं कुछ खिलाड़ियों को असली और नकली दोनों तरह के दस्तावेज लेकर आते पाया गया। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई प्रमाणपत्र जूनियर कैटेगरी के थे, जबकि उम्मीदवार ने उन्हें सीनियर कैटेगरी के रूप में नौकरी में लगाया जो नियमों के खिलाफ है।   रिपोर्ट में कई ऐसे सर्टिफिकेट भी पाए गए हैं, जो न तो किसी मान्यता प्राप्त राज्य संघ की ओर से जारी किए गए हैं और न ही राष्ट्रीय महासंघ या इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन से संबद्ध हैं। एसोसिएशन ने बिना मान्यता के ही खेल के प्रमाणपत्र खिलाड़ियों को जारी कर दिए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट की सूची बनाकर संबंधित फेडरेशनों से सत्यापन कराया गया। जांच में बड़ी संख्या ऐसे प्रमाणपत्र निकले, जो संबंधित एसोसिएशन से संबद्ध नहीं है। उन पर सर्टिफिकेट फर्जी और मान्य नहीं है जैसी टिप्पणियां दर्ज की गईं हैं।   जांच रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि ताइक्वांडो, एथलेटिक्स, वॉलीबाल, थ्रोबाल और सर्कल कबड्डी के प्रमाणपत्रों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं मिलीं। ताइक्वांडो में कई खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट मान्य नहीं पाए गए। कोई भी दस्तावेज मान्यता प्राप्त राज्य संघ से जारी नहीं हुआ था, जबकि कुछ में राष्ट्रीय फेडरेशन की मान्यता ही नहीं थी। एथलेटिक्स में कई प्रमाणपत्र सीधे फर्जी घोषित हुए। संबंधित संघ ने स्पष्ट लिखा कि ऐसे किसी खिलाड़ी का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वॉलीबाल व थ्रोबाल में भी कई सर्टिफिकेट ऐसे निकले जिन पर दर्ज उपलब्धियां असत्य साबित हुईं। कबड्डी में कई खिलाड़ियों के प्रमाणपत्र न मान्यता प्राप्त संघ से जारी पाए गए और न ही इवेंट के वर्ष में फेडरेशन की कोई अधिकृत प्रतियोगिता हुई थी।    सबसे ज्यादा हिसार, जींद व फतेहाबाद के खिलाड़ी शामिल जारी सूची में हिसार के 36 खिलाड़ी, जींद के 31, फतेहाबाद के 20, चरखी दादरी के 8, सोनीपत के 6, कैथल के 6, महेंद्रगढ़ के 9, रोहतक के 3, करनाल के 4, पानीपत के 13, कुरुक्षेत्र व भिवानी के 2, रेवाड़ी, सिरसा व झज्जर के एक-एक खिलाड़ी शामिल हैं।

HTET में पास उम्मीदवार अचानक कैसे बढ़े? चेयरमैन के जवाब से खुली जांच की मांग

हरियाणा  10 अक्तूबर को हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा परिणाम घोषित हुआ था। इस पर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बाद 1284 अभ्यर्थी कैसे बढ़ गए? जब परीक्षार्थियों को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था तो इनकी संख्या करीब 46,094 थी लेकिन जब 10 नवंबर को परिणाम जारी हुआ तो इनकी संख्या 47,378 हो गई। बोर्ड चेयरमैन प्रो. डॉ. पवन कुमार का कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों को हल्के डार्क बिंदु के कारण बेनिफिट ऑफ डाउट मिले तो पास होने वालों की संख्या बढ़ी है। परिणाम में देरी का कारण चौथी फर्म से ऑडिट और बोर्ड सचिव का तबादला रहा। पहले चरण की वैरिफिकेशन में काफी डाउन थे। पहली फर्म ने 40 हजार ओएमआर सीट को दोबारा स्केन किया। सीसीटीवी कैमरा, फेसिंग, बायोमेट्रिक पर संशय हुआ। जिस कारण चौथी फर्म से ऑडिट करवाना पड़ा। चौथी फर्म पी सेक्टर यूनिट से थी। बता दें कि जो पहले वेरिफिकेशन के लिए करीब 46 हजार अभ्यर्थियों को बुलाया गया था, उनमें से करीब 40 हजार ही पहुंचे। जो रह गए, उन्हें ही बुलाया गया था। जो नए पास हुए है, उनके लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी की जाएगी, उसके बाद उन्हें जांच के लिए बुलाया जाएगा।

करोड़ों का धान घोटाला! यमुनानगर में मिलर परिवार की संपत्ति जब्ती की तैयारी तेज

यमुनानगर  यमुनानगर जगाधरी के पौंटी स्थित किसान राइस मिल में धान-चावल की करोड़ों रुपए की हेराफेरी मामले में कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। हैफेड की जांच में 4.57 करोड़ रुपए मूल्य का सरकारी चावल गायब मिलने के बाद मिलर के खिलाफ बड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने मिलर जावेद खान की करीब आठ करोड़ रुपए कीमत की 32 कनाल प्रॉपर्टी तो पहले ही अटैच कर ली है, अब इसके अलावा हैफेड मिलर के परिवार व ब्लड रिलेशन वालों के रिकॉर्ड को भी खंगाल कर उनकी प्रॉपर्टी की जांच कर रही है। हैफेड के अनुसार वर्ष 2024-25 में किसान राइस मिल को68.823 क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था। 9,994.665 क्विंटल चावल जिसकी कीमत 4.57 करोड़ रुपए है न तो जमा कराया गया और न ही उसकी राशि जमा की गई। नोटिस देने के बावजूद मिलर राशि जमा नहीं करा सका, जिसके बाद उसकी संपत्ति अटैच कर दी गई। जिला हैफेड अधिकारी उधम सिंह ने बताया कि मिलर जावेद खान के नाम दर्ज संपत्ति को अटैच कर दिया गया है। अब उनके परिवार के सदस्यों और ब्लड रिलेशन वालों की प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं हेराफेरी का धन अन्य संपत्तियों में तो नहीं लगाया गया। 

टेक्सटाइल फैक्ट्री में लगी भारी आग से मचा हड़कंप, पानीपत के बलाना में दमकल की छह गाड़ियाँ तैनात

पानीपत पानीपत के इसराना क्षेत्र के बलाना गांव में शुक्रवार सुबह एक टेक्सटाइल यूनिट में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी फैक्ट्री इसकी चपेट में आ गई। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लंबे समय तक आग बुझाने का प्रयास करती रहीं। CRG Cotex Private Limited नाम की टेक्सटाइल यूनिट में सुबह अचानक आग भड़क उठी। आग ने कुछ ही समय में फैक्ट्री में रखे कच्चे माल और तैयार प्रोडक्ट को अपनी गिरफ्त में ले लिया। फैक्ट्री में मौजूद मजदूर जान बचाने के लिए तुरंत बाहर भागे और फायर विभाग को सूचना दी।   सूचना मिलने के बाद छह फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। फायर सेफ्टी ऑफिसर गुरमेल सिंह के अनुसार, दमकल कर्मी लगातार आग पर काबू पाने में जुटे रहे। घटना में फैक्ट्री की इमारत को भी काफी नुकसान हुआ है। स्थिति नियंत्रण में लाने का प्रयास जारी समाचार लिखे जाने तक फायर फाइटर्स आग पर काबू पाने की कोशिश में लगे हुए थे। फिलहाल किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन आग के कारण भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। प्रशासन ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

प्रदूषण पर कड़ा वार: सोनीपत में GRAP-III के बाद बड़ी कार्रवाई, कई यूनिटों पर शिकंजा

सोनीपल  दिल्ली–एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए ग्रेप-3 (GRAP-III) लागू होने के बाद सोनीपत जिला प्रशासन और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने शुक्रवार को बड़े स्तर पर संयुक्त कार्रवाई शुरू कर दी। जिले में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कड़ी निगरानी के लिए 19 टीमें गठित कर औचक छापेमारी की जा रही है। इस अभियान की कमान डीसी सुशील सारवान, डीसीपी नरेंद्र कादियान और जिले के चारों एसडीएम के हाथ में है। करीब 55 अधिकारियों और भारी पुलिस बल के साथ टीमें उन औद्योगिक इकाइयों की जांच में जुटी हैं जो वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार मानी जा रही हैं।    राई रेस्ट हाउस से शुरू हुई कार्रवाई सभी टीमें सुबह राई रेस्ट हाउस में इकट्ठा की गईं, जहां मौके पर ही उद्योगों की सूची, चेकिंग मानक, और कार्रवाई से जुड़े दिशा–निर्देश अधिकारियों को सौंपे गए। डीसी सुशील सारवान ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। जिलेभर में छापेमारी इसके बाद टीमें राई, कुंडली, बरौली, मुरथल सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंचीं और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, धुएं के उत्सर्जन स्तर, कचरा निस्तारण, तथा पानी–धूल नियंत्रित करने की व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर सीलिंग, नोटिस, और भारी जुर्माने जैसी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि GRAP-III लागू रहने तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

पोस्टरों पर कालिख और वीडियो वायरल: सिरसा की राजनीति में बढ़ी गर्माहट

सिरसा  सिरसा में आधी रात को एक बड़ी राजनीतिक हलचल तब मच गई जब अज्ञात युवकों ने हुडा सेक्टर में स्थित भाजपा जिला कार्यालय और रेलवे स्टेशन पर लगाए गए भाजपा नेताओं के पोस्टरों व तस्वीरों पर काला रंग लगा दिया। इस दौरान आरोपियों ने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो यूथ कांग्रेस के स्टेट और नेशनल पेजों पर भी साझा किया गया है। भाजपा का आरोप “यूथ कांग्रेस की साजिश” भाजपा कार्यकर्ता कपिल सोनी ने बताया कि कार्यालय इंचार्ज विष्णु शर्मा की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है, क्योंकि वायरल वीडियो को यूथ कांग्रेस के प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया है। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह कृत्य जानबूझकर पार्टी की छवि खराब करने के उद्देश्य से किया गया है। कांग्रेस का जवाब,  हमारे कार्यकर्ताओं को बदनाम करने की कोशिश दूसरी ओर, कांग्रेस जिला प्रधान संतोष बेनीवाल ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह “पूर्व नियोजित साजिश” है, जिसका मकसद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बदनाम करना है। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के कांग्रेस के नाम पर उंगली उठाना गलत है। संतोष बेनीवाल ने यह भी कहा कि “अगर किसी कांग्रेस कार्यकर्ता ने ऐसा किया है तो उसके खिलाफ जांच कराने को तैयार हैं।” आज कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, वीडियो से गरमाई राजनीति गौरतलब है कि शुक्रवार को कांग्रेस द्वारा सिरसा में लघु सचिवालय पर वोट चोरी के मुद्दे को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया जाना है। इसका नेतृत्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और सिरसा सांसद कुमारी सैलजा करेंगी। प्रदर्शन में सिरसा विधायक गोकुल सेतिया, ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बेनीवाल, और कालांवली विधायक शीशपाल केहरवाला सहित कई नेता शामिल होंगे। इससे पहले ही भाजपा कार्यालय व पोस्टरों पर कालिख लगाने वाला वीडियो वायरल होने से राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है और दोनों पार्टियों के बीच आरोप–प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

अब हरियाणा में TB की जांच होगी और आसान, सरकार ने की 6 करोड़ की अत्याधुनिक मशीनों की खरीद

चंडीगढ़ गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में टीबी टेस्ट के परिणाम के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हरियाणा सरकार ने पहली बार छह करोड़ रुपये की लागत से 40 टू नेट मशीनों की खरीद को मंजूरी दे दी है। पहले केंद्र सरकार की ओर से यह मशीनें उपलब्ध करवाई जाती थी। इन मशीनों को सीएचसी और पीएचसी में उपलब्ध करवाया जाएगा। ये मशीनें टीबी के संदिग्ध मरीजों की गुणवत्तापूर्ण और त्वरित जांच करने में अहम म भूमिका निभाती हैं। मात्र एक से डेढ़ घंटे में पता चल सकेगा कि मरीज को टीबी है या नहीं। स्टेट टीबी अधिकारी राजेश राजू ने बताया कि टीबी के गंभीर रोगियों का पता लगाने में टू नेट मशीन बेहद उपयोगी हैं। इसके जरिए कम समय में जांच के बेहद विश्वसनीय नतीजे प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मशीन से टीबी के गंभीर मामलों का पता लगाना बेहद आसान होता है। इसका मकसद हरियाणा के ग्रामीण और दूरदराज 2018 के क्षेत्रों तक जांच सुविधा का विस्तार करना है। मशीनों के आने से जो इलाके हमारी जद से बच रहे थे अब उन पर फोकस किया जा सकेगा। समय पर रोग की पहचान होने से टीबी के संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। टू नेट मशीन में एमडीआर रोगियों यानी मल्टीपल ड्रग रेजिस्टेंस मरीजों की भी जांच हो सकेगी जनवरी से अक्तूबर तक हरियाणा में 79,000 नए मरीजों की पहचान की गई है। इस समयावधि में करीब नौ लाख टेस्ट किए गए हैं। इस दौरान 78,000 से अधिक मरीजों को सफलतापूर्वक टीबी मुक्त किया भी जा चुका है। टीबी अधिकारी का कहना है कि ज्यादा टेस्ट होने पर मरीजों की संख्या भी बढ़ना तय है। उन्होंने बताया कि ज्यादा टेस्ट करने का मकसद टीबी के प्रसार को रोकना है। एक अनुमान के मुताबिक एक टीबी मरीज साल में दस से 15 लोगों को संक्रमित करता है। ऐसे में यदि समव पर उसकी जांच कर इलाज शुरू कर दिया जाए तो टीबी को रोका जा सकता है। इसलिए हरियाणा में ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं।

पेंशनधारकों की मुश्किलें बढ़ीं: 36 हजार लाभार्थियों को दो महीने से नहीं मिले पैसे, सरकार तैयारी में

चंडीगढ़  हरियाणा प्रदेश में 36 हजार से ज्यादा अपात्रों की पेंशन रोकी है, सरकार ने पीपीपी में मानक से अधिक मिली आय निर्धारित सीमा से अधिक आय और दो-दो योजनाओं का लाभ ले रहे 36,250 लोगों की सरकार ने पेंशन रोक दी है। इन लोगों को सितंबर और अक्तूबर माह की पेंशन नहीं मिली है। अब इन लोगों से 12 फीसदी ब्याज के साथ पेंशन की धनराशि वसूली जाएगी। समाज कल्याण विभाग लगातार पेंशन लाभार्थियों के दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन कर रहा है। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में आय और सरकारी लाभ का डेटा अपडेट होने पर पता चला कि प्रदेश में 36 हजार से अधिक लोगों की आय पेंशन पात्रता सीमा से अधिक पाई गई है। इसके बावजूद ये लोग वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग या अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभले रहे हैं। जिन लाभार्थियों ने गलत आय दिखाकर पेंशन हासिल की है। उनसे पहले आय संबंधी दस्तावेज मांगे जाएंगे। अगर कोई लाभार्थी यह साबित करने में असमर्थ रहता है कि उसकी पेंशन पात्रता सही थी तो उससे पूर्ण राशि ब्याज सहित वसूली जाएगी। 

पानी के दुरुपयोग पर बड़ी सख्ती: नया कानून आएगा, उल्लंघन पर होगी कड़ी सज़ा

चंडीगढ़ सूबे में पानी के दुरुपयोग और बर्बादी करने वालों पर आने वाले वक्त में शिकंजा कसा जाएगा।  हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विशेष बिल लाने की तैयारी है, जिसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। विभाग के मंत्री ने साफ कर दिया है कि पानी का दुरुपयोग, बर्बादी व कमर्शियल इस्तेमाल चोरी छिपे करने वालों विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि विधेयक में भारी जुर्माने के साथ साथ सजा तक का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के इस तरह के रवैये के कारण बाकी लोगों को दिक्कत उठानी होती है। मंत्री ने कहा है कि शहरी क्षेत्र में पानी की दिक्कत नहीं है, बल्कि कुछ ग्रामीण इलाकों से हमें इस तरह की शिकायत मिली है, लेकिन उसके तकनीकी कारण भी हैं, क्योंकि इस बार भारी बारिश, जलभराव के कारण कईं तरह की चुनौतियां आन खड़ी हुई हैं। उसके बावजूद भी अधिकारियों को साफ साफ निर्देश हैं कि नियमित कार्यों के लिए ग्रामीण एरिया में भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में पेयजल बर्बादी रोकने को लेकर जहां सूबे की नायब सैनी सरकार दिसंबर में होने वाले शीतकालीन सत्र में नया बिल लेकर आएगी। जिसमें कड़ी सजा, मोटे जुरमाने जैसे प्रावधान रखे जा रहे हैं। इसके अलावा पानी के इस्तेमाल को लेकर मीटर लगाए जाने के साथ ही बिलों का बकाया समय से जमा हो इसके भी ठोस प्रबंधन किए जा रहे हैं। मंत्री ने साफ कर दिया है कि पेयजल की बर्बादी करने और समय से बिल नहीं जमा करने वालों पर  शिकंजा कसा जाएगा। इस क्रम में लीगल एक्सपर्ट की सलाह लेकर बिजली चोरी की तर्ज पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए कानून बनाने से आला अफसरों को उम्मीद है कि लोगों की पानी  बर्बाद करने की आदतों पर अंकुश लगेगा। अवैध कट पर भी कार्रवाई  पेयजल लाइन में अवैध कटों पर भी कार्रवाई का प्रावधान होगा। उन्होंने कहा कि पानी के बिलों की शहरों में 60 से 65 फीसदी रिकवरी है, लेकिन गांवों में यह 5 से 7 फीसदी ही है। ऐसे में विभाग पेयजल सप्लाई के मीटर लगाए जाने के  विकल्प पर भी काम कर रहा है। गंगवा ने कहा कि महाग्राम योजना में 10 हजार से अधिक आबादी वाले 148 गांव चिह्नित किए हैं। 17 में पेयजल, सीवरेज और एसटीपी की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है जबकि 30 में कार्य प्रगति पर है। दो साल में इन सभी 148 गांवों में शहरों की  तर्ज पर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यहां पर बता दें कि गुरुग्राम नगर निगम ने नई दरें तय कर अधिसूचना भी पूर्व में जारी कर दी गई है।   बाकी नगर निगमों में भी तैयारी हो रही है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को पहले से दोगुना भुगतान करना होगा। एक से 20 किलोलीटर पानी की खपत पर दर 3.19 से बढ़ाकर 6.38 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है। 20 से 40 किलो लीटर तक की खपत पर अब 10.21 रुपये प्रति किलोलीटर देना होगा, जो पहले की तुलना में लगभग 60% की बढ़ोतरी है। 40 किलोलीटर से अधिक पानी उपयोग करने वालों को 12.76 प्रति किलोलीटर के हिसाब से भुगतान करना होगा। सरकार ने नगर निगमों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए नई पेयजल और सीवरेज दरें लागू करने का निर्णय लिया है। यहां पर यह  भी उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत, पानीपत कई जिलों में एक नवंबर से बिलों में बढ़ोतरी हो गई है। बताया जा रहा है कि खर्चों की भरपाई और नई पेयजल और सीवरेज लाइन बिछाने के क्रम में यह कदम उठाया जा रहा है।  नई पेयजल तथा सीवरेज लाइन बिछाने में खर्च की गई रकम की भरपाई के लिए नया रास्ता निकाला है। गुरुग्राम, फरीदाबाद तथा सोनीपत और पानीपत सहित कई जिलों में नवंबर से पानी के बिलों में डबल बढ़ोतरी होने जा रही है।