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मुंबई ब्लास्ट के दोषियों की रिहाई के खिलाफ केंद्र सुप्रीम कोर्ट में, अगली सुनवाई 24 को

मुंबई महाराष्ट्र सरकार ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस आतंकी हमले में 180 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 24 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इन हमलों में कई ट्रेनों को निशाना बनाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप भारी जनहानि हुई। मामले की जांच के बाद 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन हाल ही में बंबई उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को "न्याय के हित में अनुचित" बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। सरकार का तर्क है कि इस मामले में पुख्ता सबूत मौजूद हैं और हाईकोर्ट का फैसला पीड़ितों के साथ न्याय करने में विफल रहा है। पूरा मामला समझिए मुंबई उच्च न्यायालय ने 11 जुलाई 2006 को मुंबई में कई ट्रेन में किए गए सात बम धमाकों के मामले में सोमवार को सभी 12 आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है तथा यह विश्वास करना कठिन है कि आरोपियों ने यह अपराध किया है। यह फैसला शहर के पश्चिमी रेलवे नेटवर्क को हिला देने वाले आतंकवादी हमले के 19 साल बाद आया है। इस हमले में 180 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे। अदालत का यह फैसला महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के लिए अत्यंत शर्मिंदगी की बात है, जिसने इस मामले की जांच की थी। एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ (सिमी) के सदस्य थे और उन्होंने आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के पाकिस्तानी सदस्यों के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। उच्च न्यायालय ने आरोपियों के सभी इकबालिया बयानों को ‘नकल’ करने का संकेत देते हुए अस्वीकार्य घोषित कर दिया। अदालत ने इकबालिया बयान की विश्वसनीयता को और अधिक कम करते हुए कहा कि अभियुक्तों ने सफलतापूर्वक यह स्थापित कर दिया है कि इन इकबालिया बयानों के लिए उन पर अत्याचार किया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण सिंडिकेट (मकोका) के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होंगे और इसके लिए मंजूरी ‘बिना सोचे-समझे यांत्रिक तरीके से’ दी गई थी। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की विशेष पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपराध में प्रयुक्त बमों के प्रकार को रिकार्ड में लाने में भी असफल रहा है तथा जिन साक्ष्यों पर उसने भरोसा किया वे आरोपियों को दोषी ठहराने में विफल रहे हैं। उच्च न्यायालय ने 671 पन्नों के अपने निर्णय में कहा, ‘‘किसी अपराध के वास्तविक अपराधी को सजा देना, आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने, कानून के राज को बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा व संरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस और आवश्यक कदम है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘लेकिन किसी मामले को हल करने का झूठा दिखावा करना- यह दिखाना कि आरोपियों को न्याय के कठघरे में लाया गया है केवल एक भ्रमपूर्ण समाधान की भावना पैदा करता है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा भ्रामक निष्कर्ष न केवल जनता के विश्वास को कमजोर करता है, बल्कि समाज को झूठी तसल्ली देता है, जबकि वास्तव में असली खतरा अब भी आज़ाद घूम रहा होता है। मूल रूप से, यही इस मामले की सच्चाई को दर्शाता है।’’ उच्च न्यायालय ने 12 व्यक्तियों की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए कहा कि गवाहों के बयान और आरोपियों के पास से कथित तौर पर की गई बरामदगी का कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है। इनमें से पांच आरोपियों को विशेष अदालत ने सजा-ए-मौत और सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पश्चिमी लाइन पर विभिन्न स्थानों पर मुंबई की लोकल ट्रेन में 11 जुलाई, 2006 को सात विस्फोट हुए थे, जिनमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे और कई अन्य लोग घायल हुए थे। विशेष अदालत ने जिन दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, उनमें कमाल अंसारी (अब मृत), मोहम्मद फैसल अताउर रहमान शेख, एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी, नवीद हुसैन खान और आसिफ खान शामिल थे। विशेष अदालत ने उन्हें बम रखने और कई अन्य आरोपों में दोषी पाया था। इसने तनवीर अहमद मोहम्मद इब्राहिम अंसारी, मोहम्मद मजीद मोहम्मद शफी, शेख मोहम्मद अली आलम शेख, मोहम्मद साजिद मरगूब अंसारी, मुजम्मिल अताउर रहमान शेख, सुहैल महमूद शेख और ज़मीर अहमद लतीउर रहमान शेख को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। एक आरोपी, वाहिद शेख को 2015 में निचली अदालत ने बरी कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। यह विश्वास करना कठिन है कि आरोपियों ने यह अपराध किया है, इसलिए उनकी दोषसिद्धि रद्द की जाती है।’’ पीठ ने 2015 में विशेष अदालत द्वारा पांच लोगों को मृत्युदंड और शेष सात आरोपियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा की पुष्टि करने से इनकार कर दिया और उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें जेल से तुरंत रिहा कर दिया जाए। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य, गवाहों के बयान और आरोपियों के पास से कथित तौर पर की गई बरामदगी का कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है और इसलिये इसे दोषसिद्धि के लिये निर्णायक प्रमाण नहीं कहा जा सकता। इस मामले में 2015 में एक विशेष अदालत ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था, जिनमें से पांच को मृत्युदंड और शेष सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अपील की सुनवाई लंबित रहने के दौरान एक दोषी की मृत्यु हो गई थी।

उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकारा, गृह मंत्रालय को भेजी आगे की कार्रवाई के लिए फाइल

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा मंजूर किया। सोमवार शाम को ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा राष्ट्रपति मुर्मू को भेजा था। इसी के बाद से सियासी पारा चढ़ गया था। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 में पूरा होना था.राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे इस्तीफे में धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों को का इसका कारण बताया है. धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब उनके उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी. नियमानुसार इसकी कोई समय सीमा तो नहीं है, लेकिन चुनाव जल्द से जल्द कराना होगा. धनखड़ ने इस्तीफा ऐसे समय दिया है, जब बीजेपी अपने नए अध्यक्ष की तलाश कर रही है. धनखड़ के इस्तीफे से बीजेपी का काम बढ़ गया है.  धनखड़ के इस्तीफे पर बोले PM मोदी- उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना जगदीप धनखड़ के एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की है। पीएम मोदी ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि श्री धनखड़ को उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है । पीएम ने क्या लिखा प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। उल्लेखनीय है कि धनखड़ ने सोमवार देर शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हाल ही में हुई थी एंजियोप्लास्टी धनखड़ (74) ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। राज्यसभा के सभापति धनखड़ का इस्तीफा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आया। हाल में उनकी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एंजियोप्लास्टी हुई थी और इस वर्ष मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ अवसरों पर उनकी हालत ठीक नहीं दिखी थी, लेकिन संसद सहित सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अक्सर ऊर्जावान ही दिखे। वहीं, विपक्ष उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर सवाल उठा रहा है। कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ सोमवार को कार्यकाल के बीच में पद से इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए। इससे पहले, वीवी गिरि ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, जिन्होंने तीन मई 1969 को तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाला था। वहीं, भैरों सिंह शेखावत ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद 21 जुलाई 2007 को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। अब बीजेपी क्या करेगी जगदीप धनखड़ जनता दल और कांग्रेस से होते हुए बीजेपी में शामिल हुए थे. धनखड़ के इस्तीफे के बाद बीजेपी को उनके उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी. उसके पास अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश के साथ ही नए उपराष्ट्रपति के तलाश का भी काम आ गया है. बीजेपी इस समय केंद्र में गठबंधन की सरकार चला रही है. उसे चंद्रबाबू नायडू के तेदेपा, नीतीश कुमार के जेडीयू और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ-साथ कई और छोटे दलों का समर्थन हासिल हैं. इसलिए बीजेपी को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार की तलाश में सहयोगी दलों के हितों का भी ध्यान रखना होगा. नए उम्मीदवार में उसे संसदीय परंपराओं की जानकारी के साथ-साथ सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की क्षमता का भी ध्यान रखना होगा. संसद के मानसून सत्र में सरकार कई विधयेक लेकर आने वाली है, वहीं वन नेशन, वन इलेक्शन, जैसा बिल भी लाया जाना है. इसे पास कराने में नए उपराष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.  बीजेपी के अध्यक्ष की तलाश बीजेपी को ये दोनों काम ऐसे समय करने पड़ रहे हैं, जब लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है. ऐसे में बीजेपी को एक ऐसे अध्यक्ष की तलाश है, जो लगातार चौथी बार पार्टी की जीत का रास्ता बना सके. बीजेपी के नए अध्यक्ष पर उम्मीदों का बड़ा बोझ होगा. उसके सामने अमित शाह जैसे प्रदर्शन की चुनौती होगी. वहीं बीजेपी को एक ऐसे उपराष्ट्रपति पद के लिए एक ऐसे व्यक्ति की तलाश करनी होगी, जिसमें सदन के सुचारु रूप से चलाने की क्षमता हो.क्योंकि आने वाला समय बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण है. नरेंद्र मोदी सरकार कई ऐसे बिल लेकर आ रही है, जिन्हें सुचारू रूप से पास कराना चुनौती होगी.  इन सबके बाद संगठन और सरकार में भी नए बदलाव की उम्मीद की जा रही है. कैबिनेट में विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं. ऐसी भी चर्चाएं हैं कि कुछ मंत्रियों को संगठन और कुछ नेताओं को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है.इसकी संभावना काफी दिनों से जताई जा रही है.  कब और कैसे मिलेगा देश को नया उपराष्ट्रपति? जानिए जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी भूचाल ला दिया है. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है. मानसून सत्र के पहले दिन ही धनखड़ के इस्तीफे से हलचल बढ़ गई. इस इस्तीफे के बाद अब सवाल है कि आगे क्या होगा? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने से उनके उत्तराधिकारी की दौड़ शुरू हो गई है. अब सवाल है कि जगदीप धनखड़ का उत्तराधिकारी कौन होगा? दरअसल, भाजपा नीत एनडीए को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं. आगामी दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है. भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है. राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है. जगदीप धनखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. अब कौन संभालेगा कमान? संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत राष्ट्रपति मुर्मू ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया. अब राज्यसभा में सभापति … Read more

श्रीलंकाई नौसेना ने भारतीय मछुआरों को किया गिरफ्तार, तमिलनाडु में रोष

चेन्नई श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के रामेश्वरम से चार भारतीय मछुआरों को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार करने और श्रीलंकाई जलक्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया। इन मछुआरों को मंगलवार तड़के गिरफ्तार किया गया। उस समय मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए मोटर चालित नावों के साथ समुद्र में उतरे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, मछुआरे रामेश्वरम फिशिंग हार्बर से समुद्र में उतरे थे। जब श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें रोका, उस वक्त वह समुद्र के बीच मछलियां पकड़ रहे थे। नौसेना ने उन पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) का उल्लंघन करने और श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने का आरोप लगाया है। श्रीलंकाई नौसेना ने चारों मछुआरों को गिरफ्तार करने के साथ उनकी नाव को भी जब्त कर लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, हिरासत में लिए गए सभी मछुआरों को आगे की पूछताछ के लिए श्रीलंका के मन्नार नौसेना कैंप ले जाया गया है। यह घटना एक सतत क्रम का हिस्सा है, जिसमें श्रीलंकाई अधिकारी कथित तौर पर अपने जलक्षेत्र में प्रवेश करने वाले भारतीय मछुआरों पर कार्रवाई तेज कर रहे हैं। मछुआरों ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के अलावा, श्रीलंकाई सरकार अक्सर उनकी मोटर से चलने वाली नाव को जब्त कर लेती है। इनमें से कई नाव को बाद में राज्य की संपत्ति घोषित कर दिया जाता है। ऐसे घटनाक्रमों ने तमिलनाडु के मछुआरा समुदायों, खासकर रामनाथपुरम जैसे तटीय जिलों में, गहरी चिंता पैदा कर दी है। ये मछुआरे आजीविका के लिए गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को मजबूर हैं। फिशरमैन एसोसिएशन ने श्रीलंकाई नौसेना की कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। इसके साथ ही केंद्र और तमिलनाडु सरकार, दोनों से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। स्थानीय फिशरमैन एसोसिएशन के प्रतिनिधि जॉन थॉमस ने कहा, “इस पुराने विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयास होने चाहिए। बार-बार होने वाली गिरफ्तारियों से हमारी जिंदगियां और आजीविका दोनों खतरे में पड़ गई हैं।” इस तरह की गिरफ्तारियों के चलते मछुआरों के समुदाय भय के साये में जी रहे हैं। भारत और श्रीलंका के बीच स्थायी समाधान के लिए राजनयिक प्रयास अभी तक बेनतीजा रहे हैं।  

पाक सीमा पर मंडराएगा अपाचे का कहर: अमेरिका ने भारत को सौंपे खतरनाक युद्धक हेलीकॉप्टर

नई दिल्ली भारतीय सेना की रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिली है। अमेरिका से बोइंग एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का पहला जत्था आज भारत को सौंप दिया। इन अत्याधुनिक युद्धक हेलीकॉप्टरों को राजस्थान के जोधपुर में तैनात किया जाएगा, जो भारतीय सेना की सामरिक शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। इस उपलब्धि को रक्षा क्षेत्र में एक ‘मील का पत्थर’ माना जा रहा है, क्योंकि ये हेलीकॉप्टर सेना को युद्धक्षेत्र में अभूतपूर्व ताकत और सटीकता प्रदान करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी एयरोस्पेस दिग्गज ‘बोइंग’ ने मंगलवार को भारतीय सेना को तीन अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर सौंपे। एएच-64 अपाचे दुनिया के सबसे एडवांस बहुउद्देशीय लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से एक है और इसे अमेरिकी सेना भी उड़ाती है। सेना की मारक क्षमता में इजाफा ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना के लिए खरीदे गए छह अपाचे हेलीकॉप्टरों की पहली खेप हैं। बता दें कि हेलीकॉप्टरों 5,691 करोड़ रुपये के सौदे का हिस्सा हैं। इनकी तैनाती जोधपुर में की जाएगी, जहां सेना ने करीब 15 महीने पहले अपना पहला अपाचे स्क्वाड्रन खड़ा किया था। सेना के अधिकारियों ने पुष्टि करते हुए कहा, “भारतीय सेना के लिए खरीदे गए पहले अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं। इन्हें जोधपुर में तैनात किया जाएगा।” बचे हुई तीन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी वर्ष 2025 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। अपाचे AH-64E गार्जियन को "आसमान का टैंक" कहा जाता है, क्योंकि ये घातक मारक क्षमता, लंबी दूरी तक अभियान चलाने की क्षमता और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर जैसी तकनीकों से लैस हैं। यह हेलीकॉप्टर विशेष रूप से उन अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां दुश्मन की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो। इसमें एडवांस नाइट विजन, हर मौसम में लक्ष्य साधने की क्षमता और श्रेष्ठ नेविगेशन सिस्टम मौजूद हैं, जो इसे किसी भी तरह के हमले या रक्षा अभियान के लिए बेहद कारगर बनाते हैं। सेना में अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती वायुसेना के साथ संयुक्त अभियानों में भी एक बड़ी रणनीतिक बढ़त मानी जा रही है। भारतीय वायुसेना पहले से ही दो स्क्वाड्रन अपाचे चला रही है- एक पठानकोट में और दूसरा जोरहाट, असम में। डिलीवरी में हुई देरी इस डिलीवरी में देरी वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं और बदलते भू-राजनीतिक हालातों के कारण हुई। ये हेलीकॉप्टर मई-जून 2024 तक भारत आने वाले थे, लेकिन डिलीवरी में विलंब हो गया। इन हेलीकॉप्टरों की खरीद का समझौता वर्ष 2020 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान हुआ था, जिसकी कुल कीमत लगभग 600 मिलियन डॉलर (5,691 करोड़ रुपये) थी। गौरतलब है कि इससे पहले 2015 में भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए अलग समझौता किया था, जिसकी डिलीवरी 2020 के मध्य तक पूरी कर ली गई थी। इन नई अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती के साथ भारतीय सेना की हमलावर शक्ति और समन्वित युद्ध क्षमता को नया बल मिलेगा, खासकर पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर। अपाचे हेलीकॉप्टरों की फीचर्स बोइंग एएच-64ई अपाचे को दुनिया के सबसे उन्नत हमलावर हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है। ये हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं। शक्तिशाली हथियार प्रणाली: हेलीकॉप्टर में हेलफायर मिसाइलें, रॉकेट और 30 मिमी ऑटोमैटिक तोप शामिल हैं, जो दुश्मन के ठिकानों को सटीकता से नष्ट करने में सक्षम हैं। एडवांस सेंसर और नेविगेशन: रात में और प्रतिकूल मौसम में भी ऑपरेशन की क्षमता, जिससे यह हर स्थिति में प्रभावी है। उच्च गतिशीलता: अपाचे की डिजाइन इसे तेज और फुर्तीला बनाती है, जो युद्धक्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आदर्श है। आधुनिक संचार प्रणाली: यह हेलीकॉप्टर अन्य सैन्य इकाइयों के साथ समन्वय में बेहतर प्रदर्शन करता है। इन हेलीकॉप्टरों को जोधपुर में तैनात करने का निर्णय सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। जोधपुर, पश्चिमी सीमा के करीब होने के कारण, एक रणनीतिक स्थान है। यह क्षेत्र भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट है, जहां सेना को तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती से इस क्षेत्र में सेना की ऑपरेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यूक्रेनी विमान से भारत लाए गए अपाचे हेलीकॉप्टर इन अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों को यूक्रेन की एंटोनोव एयरलाइंस के विशाल एंटोनोव एन-124 रुसलान द्वारा अमेरिका के एरिजोना से सीधे भारत के हिंडन एयर बेस पर लाया गया। इस विमान पर "बी ब्रेव लाइक बुचा" लिखा हुआ था, जो यूक्रेन के बुचा शहर के साहस और प्रतिरोध का प्रतीक है। एंटोनोव एन-124 दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य परिवहन विमान है, जो भारी और विशाल कार्गो को लंबी दूरी तक ले जाने में सक्षम है। एंटोनोव एन-124 पर लिखा "बी ब्रेव लाइक बुचा" नारा यूक्रेन के बुचा शहर की वीरता और रूसी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध को श्रद्धांजलि देता है। एंटोनोव एयरलाइंस ने अपनी विमान बेड़े को यूक्रेन के उन शहरों के नाम पर समर्पित किया है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रभावित हुए। यह नारा न केवल यूक्रेनी लोगों की बहादुरी को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उनकी एकजुटता और दृढ़ता का प्रतीक भी है। एंटोनोव एन-124 रुसलान, जिसे 1980 के दशक में यूक्रेन के एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया था, दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य परिवहन विमान है।

राजौरी में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, जलभराव के चलते स्कूलों में छुट्टी

जम्मू जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जहां एक ओर बारिश से जगह-जगह भूस्खलन (Jammu Kashmir Flood) हो रहा है तो वहीं, राजौरी में लगातार बारिश के बाद धरहाली और सकतोह नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। राजौरी जिला प्रशासन ने आज जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद करने की घोषणा की है। अगले 72 घंटे मुश्किल भरे होंगे आईएमडी ने अगले 72 घंटों में जम्मू संभाग और उधमपुर जिले में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है। प्रशासन ने लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। जिसमें जनता को बाढ़/भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई। सहायता के लिए प्रशासन ने कुछ नंबर भी जारी किए हैं। डीईओसी: 01992-272727, 01992-272728। पीसीआर: 01992-276915 | ईआरएसएस: 112 पर संपर्क कर सकते हैं। जम्मू में भूस्खलन में पुलिस अधिकारी घायल अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को एक पुलिस अधिकारी अपनी निजी कार के जम्मू के पास बारिश के कारण हुए भूस्खलन की चपेट में आने से घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि प्रोबेशनरी डीएसपी सांबा में अपनी तैनाती स्थल जा रहे थे, तभी जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगरोटा इलाके में बान टोल प्लाजा के पास एक सुरंग के बाहर भूस्खलन से उनकी कार क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने बताया कि अधिकारी को बचा लिया गया और अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई गई है।  सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त अधिकारी स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहे हैं क्योंकि लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अभी तक किसी के हताहत होने या किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नालियां जाम रहने से जलभराव की समस्या इस बीच, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) राजौरी के पीर पंजाल क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण कार्य कर रहा है ताकि संपर्क में सुधार हो और कोटरंका, समोट और बुधल जैसे बाजार क्षेत्रों में जलभराव को कम किया जा सके। बीआरओ के एक इंजीनियर संजय शर्मा ने कहा, “जहाँ भी जलभराव की समस्या है, खासकर बाज़ार वाले इलाकों में, हम कंक्रीट के फुटपाथ बना रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “बाज़ार में नालियाँ अक्सर जाम रहती थीं, जिससे सड़कों पर पानी भर जाता था। अब हमने उन इलाकों को कंक्रीट के फुटपाथों से ढक दिया है और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत भी कर रहे हैं।” भूस्खलन में दो लोगों की मौत शर्मा ने आगे कहा कि इस पहल का उद्देश्य सुगम यात्रा सुनिश्चित करना और नियमित रखरखाव के साथ सड़क सुरक्षा बनाए रखना है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में, सोमवार को चंबा ज़िले में बारिश के कारण हुए भूस्खलन में दो लोगों की मौत हो गई। भारी बारिश के दौरान एक घर पर एक पत्थर गिर गया। पटवारी अश्वनी ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “बारिश के कारण कल रात भूस्खलन हुआ। परिणामस्वरूप, एक घर पर एक बड़ा पत्थर गिर गया और इस घटना में दो लोगों की दुखद मौत हो गई। पुलिस की मदद से उनके शव मलबे से निकाले गए और चंबा अस्पताल ले जाया गया। सरकार ने पीड़ितों को तत्काल राहत भी प्रदान की। वर्तमान में, हम क्षेत्र में खतरे का आकलन कर रहे हैं और नुकसान पर एक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।”  

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की शिकायत, इशाक डार ने फिलेमोन के सामने सिंधु संधि पर जताई चिंता

इस्लामाबाद पाकिस्तान की ओर से सिंधु जल संधि विवाद का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने की तैयारी हो रही है। पाक के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग से मुलाकात की है। डार ने सोमवार को न्यूयॉर्क में यांग से मिलकर सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि से हटने जैसे फैसले क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। डार ने यांग से कहा कि भारत की ओर से इस संधि का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और दुनिया की संस्थाओं को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और भारत पर दबाव डाला जाना चाहिए। पाक मीडिया के मुताबिक, इशाक डार ने फिलेमोन यांग से अपनी बैठक में खासतौर से भारत को चर्चा का केंद्र रखा। डार ने भारत के आक्रामक रुख, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि से पाकिस्तान को हो रही परेशानी से यांग को अवगत बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है पाक पाकिस्तान फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है। उसे रोटेशन के आधार पर ये पद मिला है। ऐसे में उसकी कोशिश इसका फायदा भारत विरोधी रुख को बढ़ाने के लिए करने की है। पाक चाहता है कि कश्मीर और सिंधु जल संधि को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उठाया जाए। इसके लिए पाकिस्तान की कोशिश जारी है। इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष के सामने एक बार फिर कश्मीर कैा मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पाकिस्तान की पुरानी बयानबाजी को दोहराते हुए कहा कि कश्मीर में भारत की ओर से लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। शांति से हो जाए समाधान इशाक डार ने अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के माध्यम से बातचीत के माध्यम से पाकिस्तान और भारत के बीच सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। पहलगाम के बाद शुरू हुआ विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की शुरुआत 22 अप्रैल के बाद हुई। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की बर्बरता से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई स्तरों पर संबंध तोड़ने का फैसला लिया। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी लिया है। ये संधि भारत-पाक में नदियों का पानी बांटती है। भारत ने इस समझौते से हटते हुए पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने की बात कही है। इससे पाकिस्तान में चिंता बढ़ी हुई है।

धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब आगे क्या, कब और कैसे …कांग्रेस हमलावर; टाइमिंग पर उठाए सवाल

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने इस्तीफे में धनखड़ ने लिखा कि वे "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने" के लिए यह फैसला ले रहे हैं। उनके इस अचानक फैसले से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। धनखड़ का इस्तीफा संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन आ गया। फिलहाल उनके उत्तराधिकारी की दौड़ शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं। आगामी दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है। धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए चुनाव ‘‘जल्द से जल्द’’ कराना होगा। संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव, रिक्ति होने के बाद "यथाशीघ्र" आयोजित किया जाएगा। रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति "अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक" पद धारण करने का हकदार होगा। भाजपा के पास कई बड़े नेता कतार में भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है। राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है। धनखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। धनखड़ के पूर्ववर्ती एम वेंकैया नायडू थे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में थे। पार्टी ने 2017 में उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना था। नायडू भाजपा के अध्यक्ष भी रहे। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है। मानसून सत्र के पहले दिन एक्टिव दिखे इंडिया टुडे की सीनियर रिपोर्टर मौसमी सिंह बताती हैं कि मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ पूरी सक्रियता से संसद में दिखे. संसद में उन्होंने कई मीटिंग भी ली. 21 जुलाई की शाम 6 बजे उन्होंने विपक्ष के सांसदों से मुलाकात भी की. इस दौरान उन्होंने खराब स्वास्थ्य का कोई जिक्र नहीं किया था. लेकिन 3 घंटे बाद ही उनका इस्तीफा हो गया. 23 जुलाई को जयपुर दौरा तय था जगदीप धनखड़ का ये फैसला इसलिए भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि उनके आगे के कार्यक्रम भी प्रस्तावित थे. 23 जुलाई को उनको जयपुर जाना था. वहां उपराष्ट्रपति रियल एस्टेट डेवलपर्स संघ के साथ संवाद करने वाले थे. उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से इस कार्यक्रम को लेकर प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी. विपक्ष टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है जगदीप धनखड़ के खिलाफ महाभियोग लाने वाला विपक्ष भी उनके अचानक इस्तीफे से हैरान हैं. विपक्षी नेताओं ने इसको लेकर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस कदम को रहस्यमयी बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,  कार्यकाल और विवादों से भरा रहा सफर जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक था। अपने कार्यकाल के दौरान उनका विपक्ष से कई बार टकराव हुआ और उनके खिलाफ पहली बार महाभियोग प्रस्ताव लाया गया जिसे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था। मार्च 2025 में AIIMS दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी और वे कुछ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। हालांकि वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे, पर उनकी तबीयत को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही। एक सियासी तूफान आकार ले रहा था ऊपर से सामान्य दिखने वाले राजनीतिक गतिविधियों के ठीक पीछे एक सियासी तूफान आकार ले रहा था. सोमवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के विपक्षी सदस्यों के नोटिस को स्वीकार कर लिया. यह लगभग उसी समय (दोपहर 2 बजे) हुआ जब यह खबर आई कि निचले सदन में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 100 से ज़्यादा सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. लगभग 4:07 बजे राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महाभियोग प्रस्ताव पर 63 विपक्षी सांसदों से नोटिस मिलने की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने उस प्रक्रिया की याद दिलाई जब किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर दोनों सदनों में नोटिस दिए जाते हैं.  धनखड़ ने प्रक्रिया का विवरण दिया और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से यह पुष्टि करने के लिए भी कहा कि क्या निचले सदन में नोटिस दिया गया है. फिर उन्होंने एक संयुक्त समिति के गठन और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की बात कही. इस तरह पता चलता है कि उन्होंने अपने अंतिम संबोधन और उपस्थिति में भी उन्होंने अपने स्वास्थ्य या इस्तीफा देने के किसी अन्य इरादे की ओर कोई इशारा नहीं किया.  राजनाथ सिंह के घर क्या हो रहा था? शाम को संसद में राजनाथ सिंह के कार्यालय के बाहर भी काफी हलचल रही और बैठकें भी खूब हुईं. सूत्रों का कहना है कि भाजपा सांसद राजनाथ के कार्यालय में घुसे और बिना कुछ बोले ही बाहर निकल गए. एक भाजपा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे कोरे कागज पर दस्तखत करवाए जा रहे थे. हालांकि विपक्षी सांसद इस बात को लेकर उत्साहित थे और उन्हें विश्वास था कि महाभियोग प्रस्ताव सबसे पहले राज्यसभा में लाया जाएगा क्योंकि राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति भी होते हैं और प्रोटोकॉल के अनुसार सरकार में स्पीकर से पद में बड़े होते हैं. धनखड़ के इस्तीफे के बाद असमंजस में कांग्रेस राज्यसभा के पिछले कुछ सत्र धनखड़ के लिए एक कठिन परीक्षा थी, क्योंकि उन्होंने सहयोग किया और दोनों पक्षों की नाराज़गी झेली. विपक्षी सदस्यों ने धनखड़ पर पक्षपात करने का आरोप लगाया, उन्होंने चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इस मामले में उपसभापति ने फैसला सुनाया और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया. अब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस असमंजस में दिख रही है. इंडिया ब्लॉक के सदस्यों … Read more

अब मोबाइल से घर बैठे बनाएं रेंट एग्रीमेंट और एफिडेविट, एक क्लिक में मिलेगा E-स्टाम्प पेपर

नई दिल्ली डिजिटल इंडिया में कई ऐसे काम अब बेहद आसान हो गए हैं जिनके लिए पहले सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। ऐसे ही कामों में से एक अब एफिडेविट, एग्रीमेंट या सेल्फ डिक्लेरेशन बनवाने के लिए कोर्ट या नोटरी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं! यह काम अब आप घर बैठे सिर्फ अपने फोन से कुछ मिनटों में कर सकते हैं और सरकारी मान्यता प्राप्त e-Stamp Paper पा सकते हैं। आसान और डिजिटल प्रोसेस से न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि डॉक्यूमेंट्स भी पूरी तरह वैध और सुरक्षित रहेंगे। चलिए अब देर न करते हुए पूरे प्रोसेस का एक-एक स्टेप समझते हैं। क्या है ई स्टांप पेपर? ई-स्टांप पेपर एक डिजिटल स्टांप पेपर होता है, जो किसी भी कानूनी या वित्तीय डॉक्यूमेंट को वैध बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे सरकार द्वारा अधिकृत वेबसाइट जैसे कि shcilestamp.com से ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ऐसा समझ लें कि यह पारंपरिक स्टांप पेपर का डिजिटल वर्जन है। ई स्टांप पेपर कहां काम आते हैं? ई-स्टांप पेपर का इस्तेमाल एफिडेविट, रेंट एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी, सेल डीड और कोर्ट कचहरी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स जैसे कई कामों में होता है। इससे नकली स्टांप पेपर की समस्या नहीं होती और दस्तावेजों की वैधता कानूनी रूप से सुरक्षित रहती है। ऐसे बनवाएं एग्रीमेंट और एफिडेविट?     इसके लिए सबसे पहले आपको shcilestamp.com या राज्य सरकार की अधिकृत वेबसाइट पर जाना होगा, जो डिजिटल स्टांप पेपर जारी करने की सर्विस देती हैं।     वेबसाइट पर पहुंचने के बाद अपने राज्य को चुनें। ऐसा इसलिए क्योंकि स्टांप ड्यूटी हर राज्य में अलग-अलग होती है। फिर भाषा में हिंदी या अंग्रेजी को चुनें।     अब "e-Stamping Services" या “Generate e-Stamp Certificate” वाले विकल्प पर क्लिक करें, ताकि आप ऑनलाइन स्टांप पेपर के लिए फॉर्म भर सकें।     फॉर्म में इस्तेमाल करने वाले का नाम, पता, डॉक्यूमेंट का प्रकार जैसे कि एफिडेविट या एग्रीमेंट, स्टांप पेपर की वैल्यू, पिन कोड आदि सही-सही भरें।     इसके बाद डॉक्यूमेंट के प्रकार के अनुसार स्टांप पेपर की राशि चुनें, जैसे 10, 50 या 100 रुपये। यह राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस तरह का डॉक्यूमेंट बनवा रहे हैं।     अब आप नेट बैंकिंग, UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।     पेमेंट पूरी होने के बाद वेबसाइट आपको स्टांप पेपर का PDF देगी जिसे आप तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं या ईमेल पर मंगवा सकते हैं।     अब आप वर्ड या पीडीएफ में अपना एफिडेविट/एग्रीमेंट बनाकर उसे डाउनलोड किए गए स्टांप पेपर पर चिपका सकते हैं या प्रिंट करवाकर साथ जोड़ सकते हैं।     अगर डॉक्यूमेंट को कानूनी तौर पर वैध बनाना जरूरी है, तो उसे किसी अधिकृत नोटरी से हस्ताक्षर और मोहर के साथ प्रमाणित करवाया जा सकता है।     बस अब आपका डॉक्युमेंट तैयार है। आप इसे कोर्ट, बैंक, मकान मालिक या अन्य किसी संस्थान को वैध रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह से आप बेहद आसानी से घर बैठे ही एग्रीमेंट्स या एफिडेविट के लिए ई-स्टाम्प पेपर ले सकते हैं। ध्यान रखने वाली बातें ई-स्टांप पेपर या ऑनलाइन एफिडेविट बनवाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, हमेशा सिर्फ सरकारी या अधिकृत वेबसाइट जैसे shcilestamp.com का ही इस्तेमाल करें। स्टांप पेपर का राज्य चुनते समय उस राज्य की स्टांप ड्यूटी की जानकारी जरूर पढ़ें, क्योंकि हर राज्य के नियम अलग होते हैं। फॉर्म भरते समय नाम, पता, उद्देश्य जैसी सभी जानकारियां बिल्कुल सही भरें। पेमेंट करते समय सुरक्षित गेटवे का ही इस्तेमाल करें। ई-स्टांप पेपर डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रखें। अगर दस्तावेज में नोटरी की जरूरत हो, तो अधिकृत नोटरी से प्रमाणित करवाएं। गलत जानकारी या प्रक्रिया से डॉक्युमेंट अवैध हो सकता है।

जन्मतिथि और बायोमेट्रिक अपडेट की लिमिट तय, UIDAI CEO ने दी जानकारी

नई दिल्ली आधार कार्ड से संबंधित कई बादलाव हो रहे हैं। हाल ही में सरकार ने आधार कार्ड के लिए एक नया ऐप पेश किया है। फिलहाल ऐप का अर्ली एक्सेस आया है, लेकिन इसे फोन में डाउनलोड करके यूज किया जा सकता है। लोग आधार कार्ड में कई बदलाव कराते हैं। नाम से लेकर पता तक, कई बदलाव कराए जा सकते हैं। इतना ही नहीं, आप अपनी जन्म तिथि को भी बदल सकते हैं। हालांकि, अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। बार-बार जन्म तिथि में बदलाव को रोकने के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था UIDAI अब आधार और नकली UID नंबरों से होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, UIDAI के CEO भुवनेश कुमार ने बताया कि जन्मतिथि और बायोमेट्रिक्स में बार-बार बदलाव को रोका जाएगा। जन्मतिथि में बदलाव के लिए देना होगा यह सर्टिफिकेशट भुवनेश कुमार ने बताया है कि गलत फोटो और बायोमेट्रिक्स के इस्तेमाल को रोकने के लिए UIDIA द्नारा कई उपाय किए जाएंगे। UIDAI अन्य सरकारी डेटाबेस से जानकारी वेरिफाई करेगा। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी नई टेक्नोलॉजी का यूज किया जाएगा। आधार एप्लीकेशन फॉर्म को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया जाएगा। साथ ही, लोगों को ऐसे डॉ्कयूमेंट्स यूज करने होंगे, जो कि राज्यों से ऑनलाइन वेरिफाई हो सकें। आधार की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग गलत तरीके से आधार का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए इसे रोकना जरूरी है। UIDAI अब जन्मतिथि में बदलाव करने पर सख्ती करेगा। अगर किसी को जन्मतिथि बदलनी है, तो उसे पहले ओरिजिनल बर्थ सर्टिफिकेट में जन्मतिथि बदलवानी होगी। UIDAI द्नारा दूसरे बर्थ सर्टिफिकेट को मान्यता नहीं दी जाएगी। लोग ऐसे करते हैं गलत इस्तेमाल UIDAI 35 राज्यों के ओरिजिनल डेटाबेस से सीधा कॉन्टैक्ट कर रहा है। पैन कार्ड, CBSE मार्कशीट और MGNREGA रिकॉर्ड जैसे डॉक्यूमेंट्स को भी इंटीग्रेट किया जा रहा है। कुमार का कहना है कि अगर लोग क्रिकेट टीम में खेलना चाहते हैं, तो वे अपनी उम्र दो साल कम करने की कोशिश करते हैं। अगर वे नौकरी पाना चाहते हैं, तो वे अपनी उम्र दो साल बढ़ाने की कोशिश करते हैं। यह बहुत बड़ा फ्रॉड है। इसका मतलब है कि लोग अलग-अलग फायदे के लिए अपनी उम्र बदलने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आगे बताया है कि लोग कई जन्म प्रमाण पत्रों से ऐसा करने की कोशिश करते हैं। UIDAI अब इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। UIDAI यह सुनिश्चित करेगा कि आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के लिए दिए गए डॉक्यूमेंट्स सही हैं या नहीं। इसके लिए UIDAI सीधे सोर्स से डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करेगा। UIDAI सिस्टम को और भी बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। UIDAI ने फिंगरप्रिंट फ्रॉड को रोकने के लिए AI/ML एल्गोरिदम बनाया है। यह एल्गोरिदम यह सुनिश्चित करेगा कि फिंगरप्रिंट असली हैं। आयु की ऐसे होगी जांच इसी तरह, AI बेस्ड सॉफ्टवेयर कैमरों में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सॉफ्टवेयर उम्र की जांच करेगा। बच्चे के आधार के लिए बायोमेट्रिक्स की जरूरत नहीं होती है। AI का इस्तेमाल ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन डेटाबेस में मौजूद फोटो से किसी व्यक्ति की फोटो को मिलाने के लिए भी किया जा रहा है। इससे फ्रॉड को रोका जा सकेगा। UIDAI फिंगरप्रिंट अपडेट करने की संख्या को सीमित करने पर भी विचार कर रहा है। कुमार ने कहा कि बुजुर्ग लोगों के लिए फिंगरप्रिंट अपडेट करना ठीक है, क्योंकि उनकी उंगलियों के निशान बदल सकते हैं। हालांकि, युवाओं के लिए बार-बार फिंगरप्रिंट अपडेट करने का कोई मतलब नहीं है। बार-बार फिंगरप्रिंट भी नहीं करा पाएंगे अपडेट UIDAI फिंगरप्रिंट अपडेट करने की संख्या को सीमित करने पर भी विचार कर रहा है। कुमार ने कहा कि बुजुर्ग लोगों के लिए फिंगरप्रिंट अपडेट करना ठीक है, क्योंकि उनकी उंगलियों के निशान बदल सकते हैं। हालांकि, युवाओं के लिए बार-बार फिंगरप्रिंट अपडेट करने का कोई मतलब नहीं है। UIDAI के इन कदमों से आम लोगों को काफी फायदा होगा। UIDAI ने यह भी कहा है कि वह जल्द ही आधार कार्ड को और भी ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए कुछ और नए कदम उठाएगा।

शादीशुदा ज़िंदगी बनी नर्क – पूर्व सांसद ने पति पर लगाए यौन शोषण और हिंसा के गंभीर आरोप

बर्टन  ब्रिटेन के बर्टन के पूर्व सांसद एंड्रयु ग्रिफिथ्स की पूर्व पत्नी केट नीवेटन ने पति को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पहली बार उन्होंने बलात्कार से लेकर घरेलू हिंसा तक पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया है कि किस तरह से ग्रिफिथ्स सोते समय उनका बलात्कार और हिंसा करता था। साथ ही आरोप हैं कि उसने महज रोने के चलते नवजात पर बुरी तरह बर्ताव किया था। खास बात है कि निवेटन खुद भी साल 2019 से 2024 तक बर्टन सांसद रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीवेटन के आरोप हैं कि जब उनकी नवजात बेटी भूख की वजह से रो रही थी, तो ग्रिफिथ्स उसपर बुरी तरह से चिल्लाया था। उन्होंने कहा, 'लोगों को यह नहीं लगता कि यह प्रोफेशनल मिडिल क्लास लोगों के साथ हो सकता है, लेकिन घरेलू हिंसा की कोई सीमा नहीं होती। यह किसी की भी प्रभावित कर सकता है। जब मैं चुनी गई थी, तो मैंने वादा किया था कि घरेलू हिंसा के पीड़ितों के लिए काम करूंगी।' उन्होंने कहा, 'मैं सिर्फ 10 सालों तक झेली हिंसा के कारण सदमे में नहीं हूं, बल्कि इसके बाद के 5 साल की वजह से हूं, जिस दौरान कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल उसने मुझे परेशान करने में किया।' उन्होंने बताया कि ग्रिफिथ्स के साथ उनकी शादी साल 2013 में हुई थी और 2018 में दोनों अलग हो गए। जब वह ग्रिफिथ्स से मिली थीं, तो उन्हें बेहद आकर्षक और मिलनसार मानती थीं। उन्होंने कहा, 'बाहर से देखने वाले अधिकांश लोगों को हमारा रिश्ता एकदम ठीक लगता था, लेकिन हिंसा सालों तक चलती रही थी। हर बार जब मैं कहती थी कि मैं पुलिस से शिकायत करूंगी, तो वह कहता था कि कोई भी तुम्हारी बात पर भरोसा नहीं करेगा केट। मैं यहां सांसद हूं। पुलिस के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं। वो सभी मुझे अच्छा समझते हैं।' उन्होंने कहा, 'यह सब तब शुरू होता था, जब मैं सो रही होती थी। मैं जागती थी और वो मेरे साथ सेक्स करने लगता था…। कभी कभी मुझे लगता था कि जाने दो, लेकिन कई बार मैं रोती थी। ऐसा होने पर कई बार वह रुक जाता था, लेकिन उसका मूड खराब हो जाता था। मुझे याद है कि उसने मुझे बिस्तर से बाहर लात मार दी थी। मैं दूसरे कमरे में जाती थी और खुद को रातभर के लिए बंद कर लेती थी या घर से बाहर चली जाती थी।' नीवेटन ने बताया कि जब उन्हें लगने लगा कि नवजात को भी खतरा है, तो उन्होंने सुरक्षा के लिए कदम उठाए। खास बात है कि ग्रिफिथ्स साल 2006 में उन्हें महज 3 सप्ताह में क्षेत्र की 2 महिलाओं को 2 हजार अश्लील संदेश भेजने के चलते बाहर कर दिया था। दिसंबर 2021 में फैमिली कोर्ट के जज ने आदेश दिए थे कि वह पत्नी के साथ हिंसा और बलात्कार किया।