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धन और सफलता की होगी बारिश! गणेश चतुर्थी पर बने दुर्लभ योग से इन राशियों को मिलेगा लाभ

इस साल गणेश चतुर्थी (27 अगस्त 2025) पर एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जो कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा. ज्योतिषाचार्य  के अनुसार, इस दिन शुक्र और वरुण ग्रह के बीच नवपंचम योग का निर्माण होगा. यह योग केवल आर्थिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि करियर, स्वास्थ्य, प्रेम और पारिवारिक जीवन में भी शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है. शुक्र को धन, ऐश्वर्य, प्रेम और सामाजिक प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है, जबकि वरुण ग्रह अवसर, रहस्य और जीवन में नए बदलाव लाने के लिए प्रसिद्ध है. जब ये दोनों ग्रह 120 डिग्री पर स्थित होते हैं, तो नवपंचम योग बनता है, जो शुभ अवसरों और अनुकूल परिस्थितियों को जन्म देता है. डॉ. मिश्रा के अनुसार, “इस योग के प्रभाव से विशेष रूप से मेष, कर्क और मीन राशि के जातकों के जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव और लाभ देखने को मिलेंगे.” मेष राशि: रुके कार्य होंगे पूरे मेष राशि वालों के लिए यह योग अत्यंत शुभ रहने वाला है. डॉ. मिश्रा बताते हैं कि लंबे समय से अटके कार्य पूरे होंगे. करियर में नई ऊंचाइयां हासिल होंगी और नए अवसर मिलेंगे. व्यापारियों और नौकरीपेशा जातकों को आर्थिक लाभ की संभावना है. पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. कर्क राशि: आय और वैवाहिक जीवन में वृद्धि कर्क राशि के जातकों के लिए यह संयोग विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा. नए आय स्रोत प्राप्त होंगे और वित्तीय स्थिति मजबूत होगी. वैवाहिक जीवन में खुशहाली आएगी और पारिवारिक संबंधों में सामंजस्य बढ़ेगा. कार्यक्षेत्र में की गई मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा. डॉ. मिश्रा कहते हैं कि “कर्क राशि वालों के लिए यह समय निवेश और नई योजनाओं को सफल बनाने के लिए अनुकूल है.” मीन राशि: कारोबार और सामाजिक मान-सम्मान में लाभ मीन राशि के जातकों को इस दुर्लभ योग का सबसे अधिक लाभ होगा. कारोबार में अप्रत्याशित सफलता मिल सकती है. जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की की संभावना है. नई योजनाओं में सफलता हासिल होगी और सामाजिक प्रतिष्ठा व मान-सम्मान में वृद्धि होगी. प्रेम जीवन में भी मधुरता आएगी. अन्य राशियों पर सामान्य प्रभाव यद्यपि नवपंचम योग का मुख्य लाभ मेष, कर्क और मीन राशि के जातकों को होगा, लेकिन यह संयोग अन्य राशियों के लिए भी सकारात्मक परिवर्तन और अवसर ला सकता है. नए प्रोजेक्ट्स में सफलता, सामाजिक संपर्कों में लाभ और व्यक्तिगत विकास के अवसर बढ़ सकते हैं.  “गणेश चतुर्थी का यह योग न केवल आर्थिक लाभ देगा बल्कि मानसिक संतुलन और पारिवारिक सुख-शांति को भी बढ़ावा देगा. जो लोग अपने लक्ष्यों और योजनाओं पर ध्यान देंगे, वे अधिकतम लाभ उठा पाएंगे.”

इस बार कब है गणेश चतुर्थी? गणपति स्थापना का सही मुहूर्त और टाइमिंग नोट करें

इस महापर्व की शुरुआत भादो शुक्ल चतुर्थी को होती है और चतुर्दशी तिथि को गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन हो जाता है. यह त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है. ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र घड़ी में भगवान गणेश धरती पर उतरते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस साल ये पर्व 27 अगस्त से 6 सितंबर तक मनाया जाएगा. गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का मुहूर्त क्या है?  हिंदू पंचांग के अनुसार, भादो शुक्ल चतुर्थी 26 अगस्त को दोपहर 01.54 बजे 27 अगस्त को दोपहर 03.44 बजे तक रहेगी. उदिया तिथि के चलते गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी और इसी दिन गणपति जी की स्थापना होगी. चूंकि गणपति स्थापना मध्याह्न काल में शुभ होती है, इसलिए 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक गणपति जी की स्थापना होगी. अलग-अलग मूर्तियां स्थापित करने का क्या है महत्व?  भगवान गणेश की अलग-अलग मूर्तियां अलग परिणाम देती हैं. पीले और लाल रंग की मूर्ति की उपासना शुभ होती है. नीले रंग के गणेश "उच्छिष्ट गणपति" कहलाते हैं. इनकी उपासना विशेष दशाओं में ही की जाती है. हल्दी से बनी मूर्ति "हरिद्रा गणपति" कहलाती है. यह कुछ विशेष मनोकामनाओं के लिए शुभ मानी जाती है. एकदंत गणपति , श्यामवर्ण के होते हैं. इनकी उपासना से अद्भुत पराक्रम मिलता है. सफेद गणपति को ऋणमोचन कहते हैं. इनकी पूजा से आदमी कर्ज मुक्त होता है. चार भुजाओं वाले रक्त वर्ण गणपति को "संकष्टहरण गणपति" कहते हैं. इनकी उपासना से संकटों का नाश होता है. त्रिनेत्रधारी, रक्तवर्ण और दस भुजाधारी गणेश "महागणपति" कहलाते हैं. इनके अंदर समस्त गणपति समाहित हैं. सामान्यतः घरों में पीले रंग या रक्त वर्ण की मध्यम आकार वाली प्रतिमा ही स्थापित करनी चाहिए. गणपति स्थापना विधि  घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में एक चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. चौकी पर हल्दी से स्वस्तिक बनाएं और वहां अक्षत अर्पित करें. इसके बाद गणपति जी की मूर्ति को दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद चौकी पर भगवान की  मूर्ति स्थापित करें. मूर्ति स्थापना के समय "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप जरूर करें. इसके बाद एक कलश में गंगाजल भरकर उसके मुख पर आम के पत्ते और नारियल रखें. दीपक और अगरबत्ती जलाएं. गणपति जी की दूर्वा, फल, फूल अर्पित करें. उन्हें मोदक या लड्डू का भोग लगाएं. इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें. उनके मंत्रों का जाप करें और गणपति बप्पा के जयकारे लगाएं. गणेश महोत्सव में कैसे करें गणपति पूजन? यदि आपने घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की है तो नियमित रूप से दोनों वेला उनकी पूजा करें. अन्यथा सामान्य जीवनचर्या में भी दोनों वेला पूजा कर सकते हैं. सुबह और शाम के वक्त दीपक जलाकर गणेश जी की पूजा करें. उन्हें पीले फूल और दूर्वा अर्पित करें. दोनों वेला आरती करें. जितने दिन महोत्सव चल रहा है, उतने दिन पूर्ण सात्विकता का पालन करें. अनंत चतुर्दशी के दिन चाहें तो उपवास रखकर विसर्जन में शामिल हो सकते हैं.

आज का राशिफल (24 अगस्त 2025): भाग्य चमकेगा इन राशियों का, सफलता और प्रतिष्ठा दोनों साथ

मेष आज आपको लंबी दूरी की यात्रा से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों का साथ मिलेगा। आर्थिक रूप से आप अच्छे रहेंगे। व्यापारिक स्थिति अच्छी होगी। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। आपको ऑफिस में अपनी स्किल को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा। वृषभ आज किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। शादीशुदा लोगों को जीवनसाथी का साथ मिलेगा। परिवार की स्थिति अच्छी होगी। अपनों के सहयोग से आर्थिक लाभ हो सकता है। खाली समय पर अपने महत्वपूर्ण टास्कों को निपटाने की कोशिश करें। आर्थिक मामले उतार-चढ़ाव भरे हो सकते हैं। मिथुन आज आपको अपनी नौकरी में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। धन की स्थिति में सुधार होगा। परिवार के लोगों के सपोर्ट से किसी काम में सफलता मिल सकती है। उन्नति के योग हैं। जीवनसाथी के खराब मूड के कारण आज का दिन थोड़ा परेशानी भरा हो सकता है। कर्क धार्मिक और आध्यात्मिक रुचि अपनाने के लिए भी आज का दिन अच्छा है। आज किसी पुराने कर्ज से मुक्ति मिल सकती है। सोशल एक्टिविटी से आपको मन बहलाने का मौका मिलेगा। संतान के साथ अच्छा समय बिताएंगे। आपको किसी अटके हुए धन की वापसी हो सकती है। व्यापारिक स्थिति अच्छी होगी। सिंह आज आपको किसी पुराने मित्र का सहयोग मिलेगा। आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सिंगल जातकों की लाइफ में किसी खास शख्स की एंट्री हो सकती है। रोमांटिक जीवन के लिहाज से यह दिन बेहतर रहेगा। व्यापार में सुधार होगा। कन्या आज आपको मानसिक शांति बनेगी। आपको आर्थिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है। किसी व्यवसाय करने से बचें। आपकी मानसिक शांति के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप ऐसी किसी भी एक्टिविटी में शामिल न हों। परिवार का कोई सदस्य आज आपके खिलाफ बोल सकता है, जिससे आपकी फीलिंग्स को गहरी ठेस पहुंचेगी। तुला आज बच्चों की सेहत पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। कोई पुराना दोस्त आज आपसे आर्थिक मदद मांग सकता है। घरेलू कार्यों के कारण आज आप बिजी रहेंगे। नौकरी में तरक्की के साथ आय में वृद्धि मिल सकती है। नौकरी की तलाश करने वालों के लिए आज का दिन अच्छा है। वैवाहिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। वृश्चिक जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे। पैसे को रियल एस्टेट में निवेश करना चाहिए। शरीर को फिट रहने के लिए एक्सरसाइज से दिन की शुरुआत करें। आज आपको अपने जीवन में सच्चे प्यार की कमी महसूस होगी। फ्रेंड्स के साथ गॉसिप करने से बचें। धनु आज आपको अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल में रखने की जरूरत है। विवाहित जातकों को जीवनसाथी का साथ मिलेगा। आज आपको अचानक किसी अनचाही यात्रा पर जाना पड़ सकता है, जिससे परिवार के साथ समय बिताने का आपका प्लान खराब हो सकता है। किसी बड़े खर्च को लेकर जीवनसाथी के साथ आपकी अनबन हो सकती है। मकर आज आपको महत्वपूर्ण फैसला में आसानी होगी। आज आपके लिए धन संबंधी समस्याओं का सामना करना संभव है। लव लाइफ में थोड़े बदलाव सामने आ सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताना मूड को बेहतर बनाएगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा बर्ताव करें। व्यापारिक स्थिति उतार-चढ़ाव भरी हो सकती है। कुंभ आज आपको धन के मामलों को लेकर सतर्क रहना चाहिए। पैसों का लेन-देन दिन भर लगातार होता रहेगा और दिन ढलने के बाद आप पर्याप्त बचत करने में भी सफल रहेंगे। परिवार के लिए अपना समय निकालें। अनावश्यक विवादों में न पड़ें। आज आप अपने जीवनसाथी के साथ अच्छी बातचीत करेंगे। मीन आज पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। शैक्षिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। बौद्धिक कार्यों से आय में वृद्धि हो सकती है। परिवार का साथ मिलेगा। खर्चों की अधिकता रहेगी। किसी मित्र के साथ यात्रा पर जा सकते हैं।

बप्पा का यह स्वरूप घर में लाएगा खुशियां और बरसेगी अपार संपत्ति

गणेश चतुर्थी का उत्सव कहीं एक दिन तो कहीं 10 दिनों तक (अनंत चतुर्दशी तक) बड़े उत्साह से मनाया जाता है। गणपति की मूर्ति स्थापित कर, विधिवत पूजा, मंत्रोच्चार और आरती के साथ गणेश जी का स्वागत किया जाता है। भक्त गणेश जी को मोदक, दूर्वा घास, लाल फूल, लड्डू और गुड़ चढ़ाते हैं। अंतिम दिन गणेश विसर्जन किया जाता है, जिसमें भक्त "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के जयघोष के साथ मूर्ति को जल में विसर्जित करते हैं। गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश जी की विभिन्न सूंड वाली आकृतियों का दर्शन पूजन किया जाता है। गणेश जी की सूंड की दिशा का अपना विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। संतान सुख की कामना करने वाले व्यक्तियों को बाल गणेश स्वरूप का पूजन करना चाहिए, इससे संतान कामना शीघ्र पूर्ण होती है, और संतान बुद्धिमान, स्वस्थ एवं पराक्रमी भी होती है। नृत्य करते हुए गणपति की छवि का पूजन विशेष रूप से कला जगत से जुड़े व्यक्तियों को करना चाहिए। इनका यह स्वरूप धन और आनंद देने वाला स्वरुप है। लेटी हुई मुद्रा में गणपति की छवि का पूजन करने से घर में सुख और आनंद का स्थायी निवास रहता है। सिंदूरी रंग के गणेश जी को वास्तु दोष दूर करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर लगाया जाता है। ध्यान रखें कि ये बाईं ओर की सूंड की छवि वाले गणपति हों, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर रहती है।      दक्षिणमुखी गणेश जी गणपति जी की सूंड का अग्रभाग दाईं ओर मुड़ा होने पर उन्हें दक्षिणामुखी गणपति कहा जाता है। दाईं बाजू सूर्य नाड़ी का प्रतिनिधित्व करती है। इसके जागृत  होने पर व्यक्ति अधिक तेजस्वी और आत्मविश्वासी होता है। ऐसे गणेश जी को सिद्धि विनायक भी कहा जाता है। इनकी स्थापना घर में न कर मंदिर में ही की जाती है।

शिंगणापुर का चमत्कारी शनि मंदिर

भारत में सूर्यपुत्र शनिदेव के कई मंदिर हैं। उन्हीं में से एक प्रमुख है महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर। विश्व प्रसिद्ध इस शनि मंदिर की विशेषता यह है कि यहां स्थित यहां पर शनि महाराज की कोई मूर्ति नहीं है बल्कि एक बड़ा सा काला पत्थर है जिसे शनि का विग्रह माना जाता है और वह बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर के चबूतरे पर विराजित है। शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए देश विदेश से लोग यहां आते हैं और शनि विग्रह की पूजा करके शनि के कुप्रभाव से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। माना जाता है कि यहां पर शनि महाराज का तैलाभिषेक करने वाले को शनि कभी कष्ट नहीं देते। शनि मराहाज के शिंगणापुर पहुंचने की कहानी बड़ी ही रोचक है। सदियों पहले शिंगणापुर में खूब वर्षा हुई। वर्षा के कारण यहां बाढ़ की स्थिति आ गई। लोगों को वर्षा प्रलय के समान लगने लग रही थी। इसी बीच एक रात शनि महाराज एक गांववासी के सपने में आए, शनि महाराज ने कहा कि मैं पानस नाले में विग्रह रूप में मौजूद हूं। मेरे विग्रह को उठाकर गांव में लाकर स्थापित करो। सुबह इस व्यक्ति ने गांव वालों को यह बात बताई। सभी लोग पानस नाले पर गए और वहां मौजूद शनि का विग्रह देखकर सभी हैरान रह गये। गांव वाले मिलकर उस विग्रह का उठाने लगे लेकिन विग्रह हिला तक नहीं, सभी हारकर वापस लौट आए। शनि महाराज फिर उस रात उसी व्यक्ति के सपने में आये और बताया कि कोई मामा भांजा मिलकर मुझे उठाएं तो ही मैं उस स्थान से उठूंगा। मुझे उस बैलगाड़ी में बैठाकर लाना जिसमें लगे बैल भी मामा-भांजा हों। अगले दिन उस व्यक्ति ने जब यह बात बताई तब एक मामा भांजे ने मिलकर विग्रह को उठाया। बैलगाड़ी पर बिठाकर शनि महाराज को गांव में लाया गया और उस स्थान पर स्थापित किया जहां वर्तमान में शनि विग्रह मौजूद है। इस विग्रह की स्थापना के बाद गांव की समृद्घि और खुशहाली बढ़ने लगी शिंगणापुर के इस चमत्कारी शनि मंदिर में स्थित शनिदेव का विग्रह लगभग पांच फीट नौ इंच ऊंचा व लगभग एक फीट छह इंच चैड़ा है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आकर शनिदेव के इस दुर्लभ विग्रह का दर्शन लाभ लेते हैं। यहां के मंदिर में स्त्रियों का शनि विग्रह के पास जाना वर्जित है। महिलाएं दूर से ही शनिदेव के दर्शन करती हैं। सुबह हो या शाम, सर्दी हो या गर्मी यहां स्थित शनि विग्रह के समीप जाने के लिए पुरुषों का स्नान कर पीताम्बर धोती धारण करना अत्यावश्क है। ऐसा किए बगैर पुरुष शनि विग्रह का स्पर्श नहीं पर सकते हैं।। प्रत्येक शनिवार, शनि जयंती व शनैश्चरी अमावस्या आदि अवसरों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस हेतु यहां पर स्नान और वस्त्रादि की बेहतर व्यवस्थाएं हैंखुले मैदान में एक टंकी में कई सारे नल लगे हुए हैं, जिनके जल से स्नान करके पुरुष शनिदेव के दर्शनों का लाभ ले सकते हैं। पूजनादि की सामग्री के लिए भी यहां आसपास बहुत सारी दुकानें हैं, जहां से पूजन सामग्री लेकर शनिदेव को अर्पित कर सकते हैं। मंगलकारी हैं शनिदेव: आमतौर पर शनिदेव को लेकर हमारे मन में कई भ्रामक धारणाएं हैं। जैसे कि शनिदेव बहुत अधिक कष्ट देने वाले देवता हैं वगैरह-वगैरह, लेकिन वास्तविक रूप मे ऐसा नहीं है। यदि शनि की आराधना ध्यानपूर्वक की जाए तो शनिदेव से उत्तम कोई देवता ही नहीं है। शनि की जिस पर कृपा होती है उस व्यक्ति के लिए सफलता के सारे द्वार खुल जाते हैं। शिंगणापुर की विशेषता: गौरतलब है कि कि शिंगणापुर के अधिकांश घरों में खिड़की, दरवाजे और तिजोरी नहीं है। दरवाजों की जगह यदि लगे हैं तो केवल पर्दे। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां चोरी नहीं होती। कहा जाता है कि जो भी चोरी करता है उसे शनि महाराज उसकी सजा स्वयं दे देते हैं। गांव वालों पर शनिदेव की कृपा है व चोरी का भय ही नहीं है शायद इसीलिये दरवाजे, खिड़की, अलमारी व शिंगणापुर मे नही है। कई मुख्य स्थानो से शिंगणापुर की दूरी:- शिर्डी से शिंगणापुर की दूरी -70 किमी नासिक से शिंगणापुर की दूरी -170 किमी औरंगाबाद से शिंगणापुर की दूरी -68 किमी अहमद नगर से शिंगणापुर की दूरी -35 किमी।  

सौभाग्य देते हैं भगवान श्री गणेश के यह मनोकामना मंत्र

भगवान गणेश सबसे सरल और सुखदायक देवता हैं। उन्हें आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। प्रस्तुत है गणेश जी के मनोकामना पूर्ति मंत्र- मनोवांछित फल प्राप्त करने हेतु भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के सामने अथवा किसी मंदिर में अथवा किसी पुण्य क्षेत्र अथवा भगवान श्री गणेश के चित्र या प्रतिमा के सम्मुख बैठकर अनुष्ठान कर सकते हैं। अनुष्ठानकर्ता पवित्र स्थान में शुद्ध आसन पर बैठकर विभिन्न उपचारों से श्री गणेश का पूजन करें। श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मनोवांछित फल प्रदान करने वाले स्तोत्र का कम से कम 21 बार पाठ करें। यदि अधिक बार कर सकें तो श्रेष्ठ। प्रातः एवं सायंकाल दोनों समय करें, फल शीघ्र प्राप्त होता है। कामना पूर्ण हो जाने तक पाठ नियमित करते रहना चाहिए। कुछ एक अवसरों पर मनोवांछित फल की प्राप्ति या तो देरी से हो पाती है अथवा यदाकदा फल प्राप्त ही नहीं होते हैं। फल प्राप्ति के अभाव में विद्वान, ज्योतिषी अथवा संत की शरण लेकर मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए, न कि अविश्वास व कुशंका करके आराध्य के प्रति अश्रद्धा व्यक्त करना चाहिए। विघ्नों के नाश व मंगल विधान के लिए मंत्र… गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः। द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः।। विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः। द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्।। विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्। (पद्म पु. पृ. 61।31-33) गणपति, विघ्नराज, लम्बतुण्ड, गजानन, द्वैमातुर, हेरम्ब, एकदन्त, गणाधिप, विनायक, चारुकर्ण, पशुपाल और भवात्मज-ये बारह गणेशजी के नाम हैं। जो प्रातःकाल उठकर इनका पाठ करता है, संपूर्ण विश्व उनके वश में हो जाता है तथा उसे कभी विघ्न का सामना नहीं करना पड़ता। मोक्ष प्राप्ति के लिए मंत्र… परमं धामं, परमं ब्रह्म, परेशं परमेश्वरं विघ्ननिघ्नं करं शांतं पुष्टं कांतमनंतकम सुरा सुरेंद्रे सिद्धेन्द्रे स्तुतं स्तोमि परात्परम सुर पद्म दिनेशं च गणेशं मंगलाय नमः इदं स्तोत्रं महापुण्यं विघ्नशोक हरं परम यह पठेत् प्रातरुत्थाय सर्व विघ्नात् प्रमुच्यते। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गणेश मंत्र ऊं नमो विघ्नराजाय, सर्वसौख्य प्रदायिने दुष्टारिष्ट विनाशाय पराय परमात्मने लंबोदरं महावीर्यं, नागयज्ञोपज्ञोभितम अर्धचंद्र धरं देहं विघ्नव्यूह विनाशनम् ऊं ह्रां, ह्रीं ह्रुं, ह्रें ह्रौं हेरंबाय नमो नमः सर्व सिद्धिं प्रदोसि त्वं सिद्धि बुद्धि प्रदो भवं चिंतितार्थं प्रदस्तवं हीं, सततं मोदक प्रियं सिंदूरारुण वस्त्रैश्च पूजितो वरदायकः इदं गणपति स्तोत्रं य पठेद् भक्तिमान नरः तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीं निर्मुंजति। संतान प्राप्ति हेतु मंत्र ऊं नमोस्तु गणनाथाय, सिद्धिबुद्धि युताय च सर्व प्रदाय देहाय पुत्र वृद्धि प्रदाय च गुरुदराय गरबे गोपुत्रे गुह्यासिताय ते गोप्याय गोपिता शेष, भुवनाय चिदात्मने विश्व मूलाय भव्याय, विश्व सृष्टि कराय ते नमो नमस्ते सत्याय, सत्यपूर्णाय शुंडिने एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः प्रपन्न जन पालाय, प्रणतार्ति विनाशिने शरणंभव देवेश संततिं सुदृढ़ां कुरु भविष्यंति च ये पुत्रा मत्कुले गणनायकः ते सर्वे तव पूजार्थं निरताः स्युर्वरोमतः पुत्र प्रदं इदंस्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकम।  

दुर्लभ खगोलीय घटना: 100 साल बाद पितृपक्ष में दिखेगा सूर्य-चंद्र ग्रहण का संगम

वाराणसी पितरों के श्राद्ध और तर्पण का पक्ष सात सितंबर से शुरू हो रहा है। ज्योतिष और खगोलविदों के अनुसार लगभग 100 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब पितृपक्ष के दौरान चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण दोनों एक पक्ष में पड़ेंगे। ग्रहण की यह घटना पितरों की शांति, तर्पण और कर्मकांड को बेहद खास बनाएगी। साढ़े तीन घंटे के चंद्रग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले लग जाएगा। जबकि सूर्यग्रहण भारत में दृश्य नहीं होने से सूतक नहीं लगेगा। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि काशी के पंचांगों के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत सात सितंबर से हो रही है। प्रतिपदा का श्राद्ध आठ सितंबर को होगा। इस बार नवमी तिथि की हानि हो रही है। पंचमी और षष्ठी तिथि का श्राद्ध 12 सितंबर को होगा। चंद्रग्रहण सात सितंबर को रात 9:57 बजे शुरू होगा और मोक्ष 1:27 बजे होगा। इसके नौ घंटे पूर्व सूतक काल की शुरुआत हो जाएगी। ग्रहण के दौरान श्राद्धकर्म वर्जित नहीं होते हैं, हालांकि चंद्रग्रहण के सूतक के पूर्व ही तर्पण और श्राद्ध के कार्य हो जाएंगे। वहीं, 21 सितंबर को पितृ विसर्जन पर सूर्यग्रहण पड़ रहा है। सूर्यग्रहण रात 11 बजे शुरू होगा और 22 सितंबर को सुबह 3:24 बजे पर खत्म होगा। हालांकि इस सूर्यग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। यह ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा। इसलिए इसका ज्योतिषीय महत्व है। ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में ग्रहण का लगना शुभ-अशुभ फल को और प्रभावशाली बनाता है। यह घटना पितरों की शांति और तर्पण कर्मकांड को विशेष महत्व देने वाली होगी।

आज का भाग्यफल: 23 अगस्त 2025 को इन राशियों की बढ़ेगी चमक, मिलेगा सौभाग्य और सफलता

मेष राशि– आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। अपनों का साथ मिलेगा। कर्ज से छुटकारा मिल सकता है। सेहत से जुड़ी परेशानियां चिंता का कारण बन सकती है। सिंगल जातकों की लाइफ में प्यार की एंट्री हो सकती है। विवाहित जातक पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताएंगे। वृषभ राशि- आज आपको प्यार का साथ मिलेगा। कुछ जातकों को आज जमीन से जुड़े किसी मामले पर पैसा खर्च करना पड़ सकता है। दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। प्रेम संबंधों में जबरदस्ती करने से बचें। आज आप कार्यस्थल पर खास महसूस करेंगे। व्यापारिक स्थिति अच्छी रहने वाली है। मिथुन राशि- आज बड़े-बुजुर्गों को अपनी सेहत पर नजर रखने की जरूरत है। आज आपको निवेश करने से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों का साथ मिलेगा। लव लाइफ अच्छी रहेगी। अधूरे कार्यों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। आज आपके वैवाहिक जीवन का सबसे अच्छा दिन बन सकता है। कर्क राशि– आज आपको अपनी सेहत पर नजर रखने की जरूरत है। वर्कप्लेस पर ऑफिस की पॉलिटिक्स पर नजर रखें।। सभी कमिटमेंट और वित्तीय लेनदेन को सावधानी से संभालने की आवश्यकता है। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य चिंता का कारण बन सकता है। आपको अचानक किसी अनचाही यात्रा पर जाना पड़ सकता है, जिससे परिवार के साथ समय बिताने का आपका प्लान खराब हो सकता है। सिंह राशि– आपका जीवनसाथी आज आपको खुश करने की भरपूर कोशिश करेगा।आपका व्यवहार लोगों का ध्यान आकर्षित करेगा। वर्कप्लेस पर आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। आर्थिक रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। यात्रा लाभकारी रहने वाली है। कारोबार में वृद्धि के संकेत हैं। कन्या राशि- आज आपको अपनी सेहत पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिए दिन अच्छा रहने वाला है। माता-पिता की सेहत के प्रति सचेत रहें। नौकरी में विदेश जाने के अवसर मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। परिश्रम अधिक रहेगा। तुला राशि- आज आपका दिन आनंददायक रहने वाला है। शादीशुदा लोगों को अपने बच्चे का खास ख्याल रखने की जरूरत है। सेहत पर नजर रखें। व्यक्तिगत परेशानियां सुलझाने के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। व्यापारिक स्थिति पहले से अच्छी होगी। वृश्चिक राशि– आज आपका पराक्रम रंग लाएगा और आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। नौकरी के लिए परीक्षा, इंटरव्यू आदि कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। शासन- सत्ता का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। धनु राशि- आज आपको पार्टनर का नजरिया समझकर व्यक्तिगत समस्याएं सुलझानी चाहिए। दिन शुरू से अंत तक काम को लेकर एनर्जेटिक महसूस करेंगे। दिन खुशियों से भरा रहेगा। आज सोच-समझकर पैसा खर्च करें, क्योंकि आपको धन हानि होने की संभावना है। कोई भी नया प्रोजेक्ट लेने से पहले दो बार सोचें। मकर राशि- आज आपका दिन तनाव से भरा हो सकता है। किसी दोस्त की सलाह आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। रुपए-पैसे को उधार देने से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों का साथ मिलेगा। जीवनसाथी की सेहत पर नजर रखना आपके लिए जरूरी है। व्यापार में उन्नति मिल सकती है। संतान का पूरा साथ मिलेगा। कुंभ राशि- आज आपका आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, लेकिन धैर्य से काम लेना आपके लिए अच्छा रहेगा। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों की अधिकता रहेगी। परिवार के साथ यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा। मीन राशि- आज किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। परिवार में अपनों का साथ मिलेगा। आज आपको अपना पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि घर का कोई बुजुर्ग आपकी आर्थिक मदद कर सकता है। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होने की संभावना है।

नीम करोली बाबा के अनुसार अमीर बनने के 5 अचूक मंत्र

नीम करौली बाबा एक बहुत ही सरल लेकिन चमत्कारी संत थे। उनके पास जो भी गया, उसे जीवन का सही रास्ता मिला, सुकून मिला और उसके जीवन में बदलाव भी आया। बाबा ने सिखाया कि असली समृद्धि कैसे आती है। उनका मानना था कि अगर इंसान अपने मन, सोच और कर्म को सही दिशा में ले जाए, तो पैसा और सुख अपने आप जीवन में आने लगते हैं। बाबा ने हमेशा सच्चे जीवन और अच्छे कर्मों पर जोर दिया। उन्होंने कुछ ऐसे आसान नियम बताए, जो अगर हर इंसान अपनाए, तो ना सिर्फ वह अमीर बन सकता है, बल्कि मन से भी संतुष्ट रह सकता है। चलिए जानते हैं नीम करौली बाबा के अनुसार जीवन में अमीर बनने के लिए क्या करना चाहिए। सेवा भावना को अपनाएं नीम करौली बाबा का सबसे पहला और महत्वपूर्ण संदेश था- निःस्वार्थ सेवाभाव। उनका कहना था कि जब आप बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करते हैं, तो ईश्वर आपको इसके बदले में कई गुना ज्यादा लौटा कर वापस देता है। इसलिए नीम करोली बाबा का कहना मानकर जरूरतमंदो की हमेशा सहायता करनी चाहिए फिर वो चाहे आर्थिक रूप से हो या इमोशनली। जो लोग दूसरों की सहायता करते हैं, उनके जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है, जिससे धन की देवी लक्ष्मी उनकी तरफ आकर्षित होती है। हमेशा सच्चाई और ईमानदारी से रहें नीम करौली बाबा हमेशा सत्य और ईमानदारी की राह पर चलने की प्रेरणा देते थे। उनका मानना था कि अगर इंसान सच्चे दिल से अपने कर्म करे और छल-कपट से दूर रहे, तो भगवान खुद उस व्यक्ति को जीवन के सही रास्ते पर ले जाते हैं। जो लोग सच्चाई और ईमानदारी से रहते हैं, उन्हें व्यापार और नौकरी हर जगह पर तरक्की मिलती है, साथ ही सामाजिक तौर पर भी उनकी इज्जत बढ़ती है। ध्यान और भक्ति से जुड़ें नीम करौली बाबा खुद भक्ति और साधना से जुड़े हुए थे। ऐसे में वे दूसरों को भी भक्ति की राह पर चलने की सलाह देते थे। उनका कहना था कि अगर कोई व्यक्ति रोज थोड़ी देर के लिए ध्यान करता है और भगवान का नाम जपता है, तो उसके अंदर की सारी नेगेटिव एनर्जी खत्म हो जाती है और मन शांत होता है। ऐसे शांत मन के साथ जब कोई व्यक्ति कुछ भी काम करता है तो उसे अपने काम में सफलता जरूर मिलती है। जीवन में उदारता अपनाएं नीम करोली बाबा का कहना था कि धन को कभी भी बांधकर नहीं रखना चाहिए, बल्कि अगर आपके पास धन है तो उससे जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और दान करना चाहिए। जब आप किसी भूखे को भोजन देते हैं या अनाथ बच्चों की पढ़ाई में सहायता करते हैं, तो इससे आपके जीवन में समृद्धि आती है। कर्म पर भरोसा करें, फल की चिंता ना करें नीम करौली बाबा ने जीवन से जुड़ी एक बहुत ही महत्वपूर्ण सीख दी है कि इंसान को अपना कर्म करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। जब कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने कर्मों में लगा रहता है, तो उसे जीवन में सफलता जरूर मिलती है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में कभी सुख और समृद्धि की कमी नहीं होती।  

मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू देता है भविष्य के संकेत, समझें इशारे

मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू माना गया है। यह प्रतीक है कि धन-सम्पदा और वैभव तभी स्थिर रहते हैं जब व्यक्ति में विवेक हो। विशेषकर सफेद उल्लू लक्ष्मी जी के शुद्ध और सात्त्विक स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। यह सफाई, पवित्रता और शुभता का द्योतक है। पौराणिक दृष्टि से देखें तो लक्ष्मी जी उल्लू पर विराजमान होकर बताती हैं कि “संसार में धन का उपयोग अंधेरे (अज्ञान) में न हो, बल्कि ज्ञान के साथ हो।” सफेद उल्लू यदि घर की छत, आंगन या आंगन के वृक्ष पर बैठता है तो इसे लक्ष्मी जी का आगमन माना जाता है लेकिन यदि यह बार-बार बैठे और घर की दिशा दक्षिण या पश्चिम हो तो इसे खर्च बढ़ने या परिवार के निर्णयों में भ्रम की स्थिति से भी जोड़ा जाता है। मंदिर की छत या शिखर पर सफेद उल्लू बैठना अत्यंत शुभ है। यह मान्यता है कि वहां दिव्य ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और उस स्थान पर लक्ष्मी कृपा स्थायी होती है। तांत्रिक दृष्टिकोण से इसे स्थिर लक्ष्मी का संकेत भी कहा गया है। धार्मिक विद्वान इसे मां लक्ष्मी की उपस्थिति और आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं। तांत्रिक परंपरा के अनुसार सफेद उल्लू को गुप्त साधनाओं और लक्ष्मी साधना में विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि यह साधना को सिद्ध करने वाला पक्षी है। सफेद उल्लू का घर या मंदिर पर बैठना अधिकतर सकारात्मक है, खासकर यदि यह क्षणिक रूप से आए तो। यदि यह बार-बार किसी एक ही घर पर ठहरता रहे तो उसे सावधानी का संकेत मानकर घर की ऊर्जा (साफ-सफाई, दीपक, पूजा) को शुद्ध रखना चाहिए। लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू जो रात्रि में जागता और दिन में सोता है बहुत ही रहस्यमय है जिसे आज तक कोई भी व्यक्ति समझ नहीं पाया है। भारत में प्रत्येक परिवार में उल्लू शुभ व अशुभ दायरे में विद्यमान है। कहते हैं कि उल्लू को संकट से पूर्व में ही अनुभव हो जाता है। इसलिए इसे अपशकुन का प्रतीक माना जाता है लेकिन कुछ विद्वानों  ने उल्लू के निम्र संकेतों को शुभ व लाभदायक माना है। कहते हैं कि रोगी व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से उल्लू छू ले तो वह शीघ्र ही स्वस्थ हो जाता है। सुबह-सवेरे उल्लू की वाणी सुनना लाभदायक व मंगलकारी है। यदि उल्लू गर्भवती औरत को छूता है तो पुत्री होने का संकेत है। पूर्व दिशा में और वृक्ष पर बैठे उल्लू को देखने और उसकी आवाज सुनने वाले व्यक्ति को धन लाभ होता है। दक्षिण दिशा में उल्लू की आवाज सुनने पर उस व्यक्ति के शत्रुओं का नाश होता है। उल्लू का प्राकृतिक स्पर्श पाने वाले व्यक्ति का जीवन सुख ऐश्वर्य से व्यतीत होता है। यदि यात्रा करते समय उल्लू पीछे उड़ रहा हो या आवाज कर रहा हो तो यात्रा शुभ होती है। यदि उल्लू  उत्तर दिशा की ओर आवाज करे तो सुनने वाले को भयंकर बीमारी होने की संभावना होती है। रात को यदि उल्लू पास बैठकर आवाज करे तो यह मंगल कार्य का सूचक होता है। उल्लू यदि किसी विशेष स्थान पर आकर रोज-रोज रोए तो यह भयंकर दुखदायी घटना का सूचक है। इसके अलावा यदि उल्लू घर के आंगन में मरा मिले तो पारिवारिक कलह का सूचक है। पश्चिम दिशा की ओर बैठे उल्लू की आवाज सुनने वाले व्यक्ति को भयंकर धन हानि होती है। इस प्रकार उल्लू हमेशा हमें शुभ और अशुभ संकेत देता है।