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घर के बेडरूम की लाइट बदलेगी रिश्तों की मिठास, ये रंग करेगा कमाल

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारे जीवन की ऊर्जा और मनोभावों को प्रभावित करता है। खासतौर पर बेडरूम, जो पति-पत्नी के बीच प्रेम, सामंजस्य और सुकून से जुड़ा होता है। अगर आप अपने रिश्ते में प्यार और सकारात्मकता बनाए रखना चाहते हैं, तो बेडरूम की लाइट का रंग बेहद महत्वपूर्ण होता है। सही रंग की रोशनी न सिर्फ माहौल को सुखद बनाती है बल्कि जीवनसाथी के बीच अपनापन और मधुरता भी बढ़ाती है। तो आइए जानते हैं कि कौन-सी लाइट आपके रिश्ते में प्रेम का जादू भर सकती है। क्यों फायदेमंद है इस रंग की लाइट गुलाबी रंग लाइट गुलाबी रंग की रोशनी प्रेम, कोमलता और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है। यह माहौल को रोमांटिक और सुकून भरा बनाती है। वॉर्म येलो लाइट वॉर्म येलो लाइट घर में गर्मजोशी और स्थिरता लाती है। इससे मन शांत रहता है और रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। बहुत ज्यादा चमकीली या सफेद लाइट से बचना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक तनाव और बेचैनी पैदा कर सकती है। वास्तु के अनुसार सही दिशा बेडरूम का स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा स्थायित्व और भरोसे का प्रतीक है, जो रिश्ते को मजबूत बनाती है।

देवउठनी एकादशी पर करें ये खास उपाय, भगवान शिव देंगे हर संकट से मुक्ति

  देवउठनी एकादशी बहुत ही विशेष मानी जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से उठते हैं और फिर से सृष्टि का कार्यभार संभाल लेते हैं. भगवान विष्णु के उठने के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाता है. इसके बाद विवाह समेत तमाम मांगलिक काम फिर से शुरू कर दिए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है. प्रभु की कृपा से जीवन में सुख-शांति रहती है. देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की अराधना के साथ-साथ शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ होता है. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से कष्टों से छुटकारा मिलता है. जीवन में खुशहाली आती है. देवउठनी एकादशी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में देवउठनी एकादशी का व्रत 01 नवंबर को रखा जाएगा. देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें     देवउठनी के दिन शिवलिंग पर गंगाजल और दूध चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से मानसिक तनाव की समस्या से मुक्ति मिलती है. जीवन में खुख-शांति रहती है.     इस दिन शिवलिंग पर दही और शहद चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर शमी के फूल चढ़ाने चाहिए. ऐसा करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर चावल चढ़ाने चाहिए. साथ ही शिव मंत्रों का जप करना चाहिए. ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है.  

कल है देवउठनी एकादशी: जानें आपकी राशि के लिए कौन सा उपाय खोलेगा भाग्य के द्वार!

सनातन धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है. इसे देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है. चार महीने की योगनिद्रा के बाद, इस दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु जागृत होते हैं और इसी के साथ सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि फिर से शुरू हो जाते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी, तुलसी माता और भगवान शालिग्राम की पूजा का विशेष महत्व होता है. यह दिन अक्षय पुण्य कमाने और अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है. पंचांग के अनुसार, साल 2025 में देवउठनी एकादशी का व्रत 1 नवंबर, शनिवार को रखा जाएगा. आइए जानते हैं साल के इस पावन दिन राशि अनुसार कौन- कौन से उपाय करने चहिए. देवउठनी एकादशी पर राशि अनुसार करें ये विशेष उपाय! मान्यता के अनुसार, इस पावन अवसर पर अपनी राशि के अनुसार कुछ विशेष उपाय करने से भगवान श्रीहरि विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. मेष शाम को तुलसी जी को लाल फूल और लाल चंदन अर्पित करें. भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 11 बार जाप करें. वृषभ तुलसी माता को दूध-चावल की खीर का भोग लगाएं. शालिग्राम भगवान को दूध से स्नान कराएं. शाम को दीपक जलाकर ‘ॐ ह्रीं लक्ष्म्यै नमः’ का जाप करें. मिथुन हरी मूंग दाल का दान करें. माता तुलसी का पूजन करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. साथ ही ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें. कर्क भगवान विष्णु का दूध से अभिषेक करें. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. हल्दी की गांठें अर्पित करें. सिंह भगवान को गुड़ और गन्ने का भोग लगाएं. सूर्यदेव को जल अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. कन्या गरीब और जरूरतमंदों को हरे वस्त्र या फल दान करें. तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं. तुला मां लक्ष्मी और श्रीहरि को मिश्री और सफेद मिठाई का भोग लगाएं. तुलसी के पौधे पर लाल कलावा बांधें. वृश्चिक विष्णु मंदिर में जाकर पीले रंग के वस्त्र और फल दान करें. तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और विष्णु चालीसा का पाठ करें. धनु भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और चने की दाल अर्पित करें. ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करें. मकर भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं. पूजा में नीले रंग के आसन का प्रयोग करें. ‘ॐ महात्मने नमः और ऊँ लक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जप करें. कुंभ पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं. गरीबों को तिल या ऊनी वस्त्र दान करें. ‘ॐ महाकायाय नमः और ऊँ वसुधायै नमः’ मंत्र का जप करें. मीन भगवान विष्णु को केले और हल्दी अर्पित करें. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. ‘ॐ निर्गुणाय नमः और ऊँ कमलायै नमः’ मंत्र का जप करें. देवउठनी एकादशी पर इन कार्यों को करना न भूलें! तुलसी विवाह: इस दिन भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह संपन्न कराया जाता है, जो कन्यादान के समान पुण्यकारी माना जाता है. देवों को जगाना: शंख, घंटा-घड़ियाल बजाकर श्रीहरि विष्णु और अन्य देवों को उनकी योगनिद्रा से जगाएं और उनसे शुभ कार्यों को पुनः आरंभ करने की प्रार्थना करें. दान-पुण्य: इस दिन अन्न, धन, वस्त्र, ऋतुफल (गन्ना, सिंघाड़ा आदि) का दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है और दरिद्रता दूर होती है. दीपदान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाएं. इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में वास करती हैं.

कठिन समय में काम आएंगी चाणक्य की ये 4 नीतियां, जीवन में लौटेगी समृद्धि और सौभाग्य

भारत के स्वर्णिम इतिहास में कई बड़े-बड़े विद्वान हुए जिनकी कही गई बातें आज भी हमारे जीवन को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। इन्हीं में से एक थे महान दार्शनिक और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य।जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिसके बारे में आचार्य को ज्ञान नहीं था। आज हम आचार्य के बताए कुछ कुछ जीवन सूत्रों के बारे में ही जानेंगे। जैसा कि हम सभी को अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ता हैं। कई बार व्यक्ति के जीवन में इतना बुरा समय भी आ जाता है कि उस दौरान सब कुछ एकदम खत्म सा हो गया लगता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि जब व्यक्ति के सामने ऐसा बुरा समय आए तो उसे क्या करना चाहिए कि वो बुरा समय जल्द की अच्छे समय में तब्दील हो जाए। आइए जानते हैं- कड़ी मेहनत का ना छोड़ें साथ आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बुरा समय चल रहा है तो उसे हताश या निराश हो कर बैठने के बजाए कड़ी मेहनत का सहारा लेना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मजबूत इरादों के साथ कड़ी मेहनत पर अटल रहता है, तो बुरा समय भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। वहीं अगर वह निराश हो कर मेहनत से किनारा कर लेता है तो ये बुरा समय उसे कहीं का नहीं छोड़ता। जीवन में रखें लक्ष्य आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना बेहद जरूरी है। यदि जीवन का लक्ष्य तय है तो मुश्किल से मुश्किल समय भी आसानी से कट जाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति को अपना लक्ष्य ही नहीं पता तो वो कठिन परिस्थितियों के आते ही भटकाव की स्थिति में चला जाता है, जहां से निकालना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। आचार्य के अनुसार यदि कठिन परिस्थितियों के चलते आपका लक्ष्य पाना असंभव लग रहा है, तो उसे छोड़ने के बजाय उसे पाने के तरीके में बदलाव करें और निरंतर प्रयास में लगे रहें। करते रहें नए और बेहतर अवसरों की तलाश केवल प्रतिभावान होना ही काफी नहीं है बल्कि सही समय पर सही अवसर मिलना भी बेहद जरूरी है। आचार्य चाणक्य की नीति के अनुसार बुरा वक्त होते हुए भी नए और बेहतर अवसरों की तलाश में लगे रहना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि आलसी लोग हमेशा सही अवसर ना मिलने की शिकायत में लगे रहते हैं। वहीं मेहनती इंसान स्वयं सही अवसर की तलाश करता है और अपना अच्छा समय खुद लाता है। आचार्य के अनुसार परेशानी को ले कर बैठने के बजाए उसके समाधान को ले कर चिंतित होना ज्यादा बेहतर है। चीजों को ना समझें असंभव आचार्य चाणक्य के अनुसार संसार की कोई भी चीज असंभव नहीं है। अगर आप किसी ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं जहां से निकालना आपको असंभव लग रहा है, तो सबसे पहले खुद को समझाएं कि असंभव जैसा कुछ भी नहीं है। आचार्य के मुताबिक सही दिशा में लगातार कठिन परिश्रम करते रहने से आप हर स्थिति को अपने अनुकूल मोड़ सकते हैं।  

इन तीन वस्तुओं का दान संध्या के समय माना जाता है अशुभ, जानें वजह

वास्तु शास्त्र में धन और संपत्ति की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। घर में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसके लिए समय और अवसर का सही चयन बहुत जरूरी होता है। खासकर दान देने के समय की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि आप शाम के समय कुछ खास चीजें दान करते हैं, तो यह आपके आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। तो आइए जानते हैं कि शाम के समय कौन सी तीन चीजों का दान नहीं करना चाहिए। सिक्के या छोटे पैसे का दान शाम के समय छोटे-मोटे पैसे या सिक्कों का दान करने से घर में धन की ऊर्जा कमजोर हो सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह आपके आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ा सकता है। टूटे या पुराने बर्तन का दान पुराने या टूटे बर्तनों का दान करने से भी धन हानि की संभावना बढ़ सकती है। शाम के समय यह करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और संपत्ति की वृद्धि रुक सकती है। बिना जरूरत की चीजों का दान शाम के समय ऐसा दान करना जिसमें आपकी जरूरत की वस्तुएं शामिल हों या बिना योजना का दान हो, यह भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है। इससे न केवल संपत्ति पर असर पड़ता है बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है।

तुलसी और शालिग्राम का रहस्य: कैसे श्राप बना भक्तिभाव का प्रतीक?

हिंदू धर्मग्रंथों में तुलसी और भगवान विष्णु की कथा को अत्यंत पवित्र और भावनात्मक माना गया है. यह कथा भक्ति, निष्ठा और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है. तुलसी विवाह का पर्व इसी दिव्य मिलन का प्रतीक है, जब माता तुलसी (लक्ष्मी स्वरूपा) और भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) का पुनर्मिलन होता है. यह कथा यह भी बताती है कि ईश्वर अपने भक्त के प्रेम से इतने बंधे होते हैं कि श्राप को भी आशीर्वाद बना देते हैं. तुलसी और विष्णु का यह संबंध सिखाता है कि सच्ची भक्ति और पवित्र प्रेम सभी विपरीत परिस्थितियों को मंगलमय बना देते हैं. पुराणों के अनुसार, तुलसी का पूर्व जन्म वृंदा नामक एक पवित्र स्त्री के रूप में हुआ था. वह दैत्यराज जलंधर की पत्नी थीं, जो भगवान विष्णु के वरदान के कारण एक अपराजित दैत्य था. जलंधर की भक्ति और पत्नी की पतिव्रता शक्ति के कारण देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे. जब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी, तो भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा के सामने प्रकट हुए. वृंदा को जब यह ज्ञात हुआ कि उनके साथ छल हुआ है, तो उन्होंने क्रोध में भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया. इस श्राप के फलस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर के रूप में सामने आए. वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर रूप में तो परिवर्तित हुए, किंतु उन्होंने वृंदा की भक्ति और पतिव्रता को प्रणाम करते हुए उन्हें वर दिया कि तुम धरती पर तुलसी के रूप में जन्म लोगी और मेरा शालिग्राम रूप सदा तुम्हारे साथ पूजा जाएगा. वृंदा के शरीर से ही गंडकी नदी का उद्भव हुआ जो कि नेपाल में स्थित है. जहां से आज भी शालिग्राम पत्थर प्राप्त होता हैं. इसलिए आज भी तुलसी-दल से शालिग्राम भगवान की पूजा की जाती है. किसका अवतार माना जाता है तुलसी का पौधा? धर्मग्रंथों में तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है. लक्ष्मी जी जिस प्रकार सौभाग्य, समृद्धि और शुद्धता की देवी हैं, उसी प्रकार तुलसी भी सात्त्विकता और पवित्रता का प्रतीक हैं. भगवान विष्णु के प्रति तुलसी की अखंड भक्ति के कारण उन्हें लक्ष्मी स्वरूपा कहा गया. कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां स्वयं लक्ष्मी जी का वास होता है. तुलसी-दल के बिना विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि यह ईश्वर के प्रति निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है. तुलसी का पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह घर में शांति, सौभाग्य और दिव्य ऊर्जा के प्रवाह को भी स्थिर करता है.

31 अक्टूबर 2025 का राशिफल: मकर राशि को मिलेगा सौभाग्य, देखें अन्य राशियों का भविष्यफल

मेष राशि- आज के दिन घूमने-फिरने का प्लान बन सकता है। अपने पार्टनर को अधिक समय दें। आप इसे अगले लेवल तक ले जाने पर भी विचार कर सकते हैं। ऑफिस में अनुशासित रहें। धन-संपत्ति का मामला पॉजिटिव है। वृषभ राशि- आज अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। मिथुन राशि- आज के दिन सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों। कारोबार फलेगा-फूलेगा, इसलिए अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं। धन और वित्त के मामले में समय अच्छा रहेगा। कर्क राशि- आज के दिन नया कार्यभार मिलने की बड़ी संभावना है। आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है, हो सकता है आप पॉलिटिक्स का शिकार हो जाएं। अहंकारी न होने का प्रयास करें। सिंह राशि- आज के दिन आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। ऑयली फूड से दूरी बनाएं और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। आज का दिन संतोषजनक रहेगा। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है। कन्या राशि- आज के दिन आपके दिन की शुरुआत अच्छी होगी लेकिन अंत मध्यम रहेगा। पार्टनरशिप में बिजनेस करने वालों में मतभेद हो सकता है, जिससे दरार पड़ सकती है। दोपहर में आपको कुछ राहत मिलने की संभावना है। तुला राशि- आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे और अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। वृश्चिक राशि- आज के दिन कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपके काम करने की स्पीड को धीमा कर सकती हैं। आप मनमुताबिक परिणाम प्राप्त नहीं कर सकेंगे। आर्थिक स्थिति उम्मीद के मुताबिक रहेगी लेकिन कुछ अप्रत्याशित खर्चे चीजें बिगाड़ सकते हैं। धनु राशि- आज के दिन खुद को और स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए। फिटनेस पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। आपके काम की तारीफ होगी। मकर राशि- आज के दिन करियर और फाइनेंशियल लाइफ नॉर्मल रहेगी। बिजनेस में आर्थिक कमजोरी का अनुभव हो सकता है और कुछ नुकसान होने की भी आशंका है। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। कुंभ राशि- आज के दिन आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। तनाव से बचने के लिए सेल्फ केयर पर फोकस करें। परिवार के किसी सदस्य से कोई गुड न्यूज मिल सकती है। मीन राशि- आज के दिन करियर में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें और सेल्फ-केयर पर फोकस करें। आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।

वास्तु टिप्स: इस दिशा में लगाएं केले का पेड़, दूर होंगे कष्ट और बढ़ेगी सुख-समृद्धि

हिंदू धर्म में केले के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं गुरुवार के दिन जो भी इंसान केले के पेड़ की पूजा करता है उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ये ही नहीं ज्योतिषाचार्य भी उपाय के तौर पर केले के पेड़ की पूजा करने की सलाह देते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में उलझन होती है कि केले का पेड़ घर में लगाना चाहिए या नहीं। वैसे तो केले का पेड़ घर लगाने को मना किया जाता है लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर हम कुछ नियमों का पालन करें, तो इससे शुभ फल भी मिलते हैं। तो आइए जानते हैं कि केले का पेड़ घर में लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए और इसके फायदे के बारे में- वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा में देवी-देवताओं का वास माना गया है। इसलिए अगर आप केले के पेड़ को घर में लगाने की योजना बना रहे हैं तो इसके लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। इसके अलावा, वास्तु शास्त्र में पश्चिम दिशा में भी केले का पेड़ लगाना सही नहीं माना गया है। इससे आपको धन हानि होने की संभावना बढ़ जाती है। केले के पेड़ को कभी भी पूर्व या दक्षिण दिशा के आग्नेय कोण में भी नहीं लगाना चाहिए। साथ ही घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा अवरुद्ध हो सकती है। वास्तु के अनुसार केले के पेड़ के आसपास कोई कांटेदार पौधे जैसे गुलाब आदि नहीं लगाना चाहिए। इससे घर में लड़ाई-झगड़े की स्थिति उत्पन्न होती है। केले के पेड़ को कभी सूखने न दें। इसके अलावा, केले के पेड़ में कभी भी गंदा पानी नहीं डालना चाहिए। केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना गया है और तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए केले के पेड़ के पास तुलसी का पौधा ज़रूर रखना चाहिए। इससे नारायण और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही हर गुरुवार को केले के पेड़ पर हल्दी लगाकर पूजा करें और दीपक जलाएं। केले के पेड़ के तने के चारों ओर हमेशा लाल या पीले रंग का धागा बांधना चाहिए। अगर आप घर में केले का पेड़ लगाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखते हैं यानि कि ज्योतिषीय नियमानुसार लगाते हैं, तो आपके परिवार में सुख, समृद्धि, आरोग्य के साथ खुशियां आती हैं। वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही है, उनकी बाधा दूर होती है। कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है और धन संकट दूर होता है।

देवउठनी एकादशी पर करें ये खास उपाय, किस्मत चमकेगी अगले ही दिन से!

देवउठनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह भगवान विष्णु के जागरण और विवाह, गृहप्रवेश व धार्मिक अनुष्ठानों जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत की प्रतीक है, जो चातुर्मास काल के दौरान रुके हुए थे। भक्त इस पवित्र दिन देवउठनी एकादशी की तिथि तिथि प्रारंभ: 1 नवम्बर 2025, रात्रि 11:48 बजे तिथि समाप्त: 2 नवम्बर 2025, रात 9:42 बजे इसलिए व्रत व पूजा 2 नवम्बर 2025 (रविवार) को की जाएगी। देवउठनी एकादशी उपाय देवउठनी एकादशी की रात घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ गाय के घी के दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस रात पीपल के पेड़ के नीचे एक दीपक अवश्य जलाएं और सात बार उसकी परिक्रमा करें। ऐसा करने से आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है और धन प्राप्ति के योग बनते हैं। देवउठनी एकादशी की रात रसोईघर में भी एक दीपक जलाना चाहिए, क्योंकि यह माता अन्नपूर्णा का पवित्र स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने से घर में अन्न का भंडार सदैव भरा रहता है। इस दिन तुलसी पूजा का भी बहुत महत्व है। संध्या समय तुलसी माता के समीप घी के पांच दीपक जलाएं। तुलसी देवी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और लक्ष्मी जी की कृपा भी बनी रहती है। दीपक जलाते समय बोले ये मंत्र दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।। दीपक जलाने के नियम दीपक की लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु में वृद्धि होती है। दीपक की लौ पश्चिम दिशा की ओर रखने से दुख बढ़ता है। दीपक की लौ उत्तर दिशा की ओर रखने से धन लाभ होता है। दीपक की लौ कभी भी दक्षिण दिशा की ओर न रखें, ऐसा करने से जन या धनहानि होती है।

आंवला नवमी पर पढ़ें मां लक्ष्मी की पौराणिक कथा, दूर होगी दरिद्रता और मिलेगा आशीर्वाद

कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है. शास्त्रों में कहा गया है कि आंवले के नीचे की गई पूजा हजार यज्ञों के समान फल देती है. पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं. जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस वृक्ष की पूजा करता है उसे आरोग्य, संतान, सौभाग्य और दीर्घायु का वरदान मिलता है. कहा जाता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करने से सारे रोग और पाप दूर होते हैं. इस बार आंवला नवमी की पूजा 31 अक्टूबर को की जाएगी. दरअसल, नवमी तिथि की शुरुआत अक्टूबर 30 को 10 बजकर 06 मिनट पर हुई है और इसका समापन 31 अक्तूबर को 10 बजकर 03 मिनट पर होगा. आंवले के पेड़ की पूजा करने का समय 31 अक्टूबर को 06:32 से 10:03 बजे तक है यानी 03 घंटे 31 मिनट्स तक शुभ मुहूर्त है, ऐसे में पूजा करते समय आंवले की कथा जरूर पढ़नी चाहिए. आंवला नवमी को पढ़ें ये कथा एक समय की बात है, माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकलीं. भ्रमण करते हुए उनके मन में विचार आया कि वह एक साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें, लेकिन यह समझ नहीं पा रहीं थीं कि दोनों देवताओं की एकसाथ पूजा किस प्रकार संभव है. ध्यान करते हुए लक्ष्मी जी ने पाया कि आंवले का वृक्ष ही ऐसा स्थान है जहां तुलसी की पवित्रता और बेल के पावन गुण दोनों साथ मिलते हैं. उन्होंने निश्चय किया कि वे आंवले के वृक्ष की पूजा करेंगी. माता लक्ष्मी ने शुद्ध मन और विधि-विधान से आंवले के वृक्ष की पूजा की, जल अर्पित किया, दीप जलाया और भगवान विष्णु व शिव का ध्यान किया. पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिव जी दोनों स्वयं प्रकट हुए और देवी लक्ष्मी को आशीर्वाद दिया कि जो भी श्रद्धा और भक्ति से आंवले के वृक्ष की पूजा करेगा, उसके जीवन में कभी दरिद्रता नहीं आएगी और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी. इसके बाद माता लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन तैयार किया और उसी स्थान पर भगवान विष्णु और भगवान शिव को भोजन अर्पित किया. दोनों देवताओं ने प्रसन्न होकर वह प्रसाद स्वीकार किया. तत्पश्चात, माता लक्ष्मी ने भी वही भोजन प्रसाद रूप में ग्रहण किया. उसी दिन से कार्तिक शुक्ल नवमी के अवसर पर आंवला नवमी व्रत और पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई. आंवला वृक्ष की पूजा विधि     सुबह उठकर स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें.     किसी पवित्र स्थल या घर के आंगन में आंवले का वृक्ष सजाएं.     वृक्ष के चारों ओर जल, हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाएं.     आंवला वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और विष्णु जी की आरती करें.     आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.     परिवार सहित वृक्ष के नीचे भोजन ग्रहण करें. इसे आंवला भोजन कहा जाता है.