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रिलायंस के अधिग्रहण से केल्विनटर को मिलेगा नया जीवन, बाजार में फिर लौटेगा पुराना ब्रांड

मुंबई  केल्विनेटर (Kelvinator), एक समय भारतीय बाजार में इस कंपनी की तूती बोलती है, दौर था 1960-80 का. यानी करीब 50 साल पहले. फिलहाल भारतीय बाजार में ये कंपनी गुमनाम है. लेकिन अब कंपनी के दिन फिर सकते हैं. देश के सबसे अमीर शख्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने इस कंपनी को खरीद लिया है.  दरअसल, रिलायंस रिटेल ने अमेरिका की मशहूर कंपनी केल्विनटर का अधिग्रहण कर लिया है. इस डील की घोषणा 18 जुलाई, 2025 की गई. हालांकि इसका खुलासा नहीं हुआ है कि कितने में ये सौदा हुआ है. Kelvinator कंपनी रिलायंस रिटेल के पास पहुंचने के बाद अब इसका पुनर्जन्म की संभावना है. क्या-क्या बनाती है Kelvinator कंपनी  केल्विनेटर कंपनी फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और किचन के सामान बनाती है. 1970 और 80 के दशक में इस कंपनी के प्रोडक्ट्स की भारत में खूब डिमांड थी. इसके प्रोडक्ट्स मजबूत और अच्छे होते थे. लोग इस पर भरोसा करते थे. आज से 50 साल पहले Kelvinator की पहचान एक बेहतरीन ब्रांड के तौर पर थी.  इस बड़ी डील के बाद रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ईशा अंबानी ने कहा, 'हमारा हमेशा से यह लक्ष्य रहा है कि हम हर भारतीय की जरूरत को पूरा करें. हम चाहते हैं कि हर किसी को अच्छी तकनीक मिले, जो उनके काम आए और भविष्य के लिए तैयार हो.' उन्होंने कहा कि केल्विनेटर को खरीदना हमारे लिए एक बहुत बड़ा कदम है. इससे हम देश के लोगों को और भी अच्छे प्रोडक्ट्स दे पाएंगे. क्योंकि हमारे पास दुकानों का एक बड़ा नेटवर्क है. रिलायंस अपने 19,340 स्टोर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नेटवर्क के जरिये केल्विनेटर को फिर से घर-घर तक पहुंचाने का योजना बना रहा है. इसके अलावा रिलायंस की डिजिटल कॉमर्स रणनीति, जिसमें रिलायंस डिजिटल और जियोमार्ट शामिल हैं, ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा दे सकती है.  Kelvinator का इतिहास केल्विनेटर की स्थापना 1914 में अमेरिका के नाथनियल बी. वेल्स और अर्नोल्ड एच. गोस ने की थी. यह ब्रांड रेफ्रिजरेशन तकनीक में अग्रणी रहा और इसका नाम वैज्ञानिक लॉर्ड केल्विन के नाम पर रखा गया था. भारत में केल्विनेटर ने 1963 में प्रवेश किया और अपने रेफ्रिजरेटरों की विश्वसनीयता और 'द कूलेस्ट वन' टैगलाइन के साथ घर-घर में लोकप्रिय हो गया.  केल्विनेटर ने 1970 और 1980 के दशक में भारत में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई, जब यह गोदरेज और ऑलविन के साथ बाजार में अग्रणी था. हालांकि, 1990 के दशक में उदारीकरण के बाद LG, Samsung और Whirlpool जैसे वैश्विक ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा के कारण इसकी चमक फीकी पड़ गई.  2000 के दशक में, केल्विनेटर उपस्थिति भारतीय मार्केट में कमजोर हुई, हालांकि अभी Kelvinator के पोर्टफोलियो में रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और माइक्रोवेव ओवन शामिल हैं. अब रियालंस इसे फिर से घर-घर तक पहुंचाने का प्लान बनाएगा. फिलहाल Kelvinator ये प्रोडक्ट्स बाजार में हैं… सिंगल-डोर रेफ्रिजरेटर: 95 लीटर से 201 लीटर (1-3 स्टार रेटिंग), कीमत 10,590 रुपये से 15,190 रुपये. डबल-डोर रेफ्रिजरेटर: 252 लीटर से 275 लीटर (2-3 स्टार), कीमत 22,490 रुपये से 23,490 रुपये. साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर: 500 लीटर, कीमत 75,600 रुपये।

सोना-चांदी की कीमतों में आखिरी कारोबारी दिन हुई बढ़त दर्ज

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बढ़त दर्ज की गई। 24 कैरेट के सोने की कीमतों में 750 रुपए से ज्यादा का इजाफा हुआ है। वहीं, चांदी की कीमत एक बार फिर 1,12,000 रुपए के पार हो गई है। इससे पहले लगातार तीन दिनों से कीमती धातुओं की कीमत में गिरावट देखी जा रही थी। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) द्वारा शाम को जारी की गई कीमतों के मुताबिक, 24 कैरेट के सोने की कीमत 790 रुपए बढ़कर 98,243 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि बीते गुरुवार को 97,453 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई थी। 22 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत बढ़कर 89,991 रुपए हो गई है, जो कि पहले 89,267 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, 18 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम बढ़कर 73,682 रुपए हो गया है, जो कि पहले 73,090 रुपए प्रति 10 ग्राम था। आईबीजेए की ओर से सोने और चांदी की कीमतों को दिन में दो बार सुबह और शाम अपडेट किया जाता है। सोने के साथ चांदी की कीमत में भी इजाफा देखने को मिला। चांदी की कीमत 1,12,700 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 1,11,000 रुपए प्रति किलो थी। चांदी की कीमत में 1700 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पहले चांदी ने बीते सोमवार को अपना ऑल टाइम हाई 1,13,867 छुआ था। वायदा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमत में तेजी दर्ज की जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 अगस्त 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.57 प्रतिशत बढ़कर 98,030 रुपए और चांदी के 5 सितंबर 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.94 प्रतिशत बढ़कर 1,13,387 रुपए थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमत में तेजी देखी जा रही है। कॉमैक्स पर सोना करीब 0.46 प्रतिशत बढ़कर 3,360.80 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.09 प्रतिशत बढ़कर 38.72 डॉलर प्रति औंस पर थी।

सोना-चांदी की कीमतों में आखिरी कारोबारी दिन हुई बढ़त दर्ज

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बढ़त दर्ज की गई। 24 कैरेट के सोने की कीमतों में 750 रुपए से ज्यादा का इजाफा हुआ है। वहीं, चांदी की कीमत एक बार फिर 1,12,000 रुपए के पार हो गई है। इससे पहले लगातार तीन दिनों से कीमती धातुओं की कीमत में गिरावट देखी जा रही थी। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) द्वारा शाम को जारी की गई कीमतों के मुताबिक, 24 कैरेट के सोने की कीमत 790 रुपए बढ़कर 98,243 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि बीते गुरुवार को 97,453 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई थी। 22 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत बढ़कर 89,991 रुपए हो गई है, जो कि पहले 89,267 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, 18 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम बढ़कर 73,682 रुपए हो गया है, जो कि पहले 73,090 रुपए प्रति 10 ग्राम था। आईबीजेए की ओर से सोने और चांदी की कीमतों को दिन में दो बार सुबह और शाम अपडेट किया जाता है। सोने के साथ चांदी की कीमत में भी इजाफा देखने को मिला। चांदी की कीमत 1,12,700 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 1,11,000 रुपए प्रति किलो थी। चांदी की कीमत में 1700 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पहले चांदी ने बीते सोमवार को अपना ऑल टाइम हाई 1,13,867 छुआ था। वायदा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमत में तेजी दर्ज की जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 अगस्त 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.57 प्रतिशत बढ़कर 98,030 रुपए और चांदी के 5 सितंबर 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.94 प्रतिशत बढ़कर 1,13,387 रुपए थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमत में तेजी देखी जा रही है। कॉमैक्स पर सोना करीब 0.46 प्रतिशत बढ़कर 3,360.80 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.09 प्रतिशत बढ़कर 38.72 डॉलर प्रति औंस पर थी।

गोल्ड की चमक हुई फीकी, बिक्री में 60% की गिरावट – जानिए इसके पीछे की वजहें

नई दिल्ली जून में सोने की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 60% गिरकर सिर्फ 35 टन रह गई। कोविड के बाद वॉल्यूम में वे सबसे बड़ी गिरावट है। इसकी वजह यह है कि ऊंची और उतार-चढ़ाव वाली कीमतों की वजह से ग्राहक सोने से दूर रहे। इंडिया बुलियन एंड जूलर्स असोसिएशन (IBJA) ने ये जानकारी दी है। जुलाई में भी सोने के दाम में उतार-चढ़ाव दिख रहा है। अभी कीमतों में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है।  IBJA के नैशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता बताया कि हमें डिमांड में तुरंत कोई रिकवरी नहीं दिख रही है। देश भर में सोने के गहने बनाने वाली कई यूनिट्स ने अपना प्रोडक्शन लगभग आधा कर दिया है। उन्होंने कहा कि छोटे प्लेयर्स पर इसका असर पड़ रहा है। सोने के कारोबार के लिए ये काफी मुश्किल वक्त है। डिस्काउंट देने के बावजूद वॉल्यूम डिमांड बढ़ नहीं रही है। क्यों बढ़ रही है सोने की कीमत सोने के ट्रेड एनालिस्ट्स का कहना है कि कि इंटरनैशनल लेवल पर सोने के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की यूरोपियन यूनियन और मेक्सिको पर और टैरिफ लगाने की धमकी है इससे ट्रेड टेंशन फिर से बढ़ गई है। हालांकि, ट्रंप ने 1 अगस्त तक बातचीत का वक्त दिया है, लेकिन हालात के तेजी से बिगड़ने की आशंका ने रिस्क असेट्स को दबाव में रखा है। इससे निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश की तरफ रुख कर रहे हैं। IBJA के सुरेंद्र मेहता का कहना है कि उनकी असोसिएशन ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से कई दौर की बातचीत की है, ताकि 9- कैरेट सोने के लिए भी हॉलमार्किंग की सुविधा शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि हमें BIS ने बताया है कि उन्होंने 9 कैरेट जूलरी के लिए हॉलमार्किंग का मॉडल तैयार कर लिया है। हमें उम्मीद है कि सरकार से हॉलमार्किंग के लिए जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी। सोने की गिरती कीमतों पर क्या बोले एक्सपर्ट्स केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, सोने के दाम में आई आज की गिरावट की पांच वजहे हैं। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध विराम की घोषणा, अमेरिका ने ईरान पर सैंक्शन में ढील देने के संकेत दिए, रेट कट को लेकर फेडरल रिजर्व का डोविश रुख, घरेलू बाजार में रुपए में आई उछाल और सोने में मुनाफावसूली प्रमुख हैं। LKP सिक्योरिटी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने सोने की दामों में आई गिरावट के बारे में कारण बताते हुए कहा कि ईरान और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम का असर गोल्ड मार्केट पर पड़ा है। सोने में उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है। MCX पर इसकी तत्काल सीमा ₹96,000 और ₹98,000 के बीच देखी जा रही है। ₹96,000 से नीचे की निरंतर चाल आगे की गिरावट का संकेत दे सकती है, जबकि ₹98,000 से ऊपर की रिकवरी तेजी भी देखी जा रही है। जतिन त्रिवेदी ने बताया कि Comex गोल्ड में $25 की गिरावट और रुपये में 0.75% की मजबूती के दोहरे दबाव के कारण भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई। घरेलू सोना लगभग ₹2,000 गिरकर ₹97,350 के करीब कारोबार कर रहा है। ईरान और इजरायल के बीच संभावित युद्धविराम की खबरों के साथ-साथ अमेरिका की आधिकारिक घोषणाओं से भी गिरावट आई। भू-राजनीतिक तनाव कम होने के साथ ही सोने की सुरक्षित मांग कमजोर पड़ गई है। बिक्री बढ़ाने को 14 कैरेट का सहारा दामों में भारी उछाल के बीच अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए जूलर्स अब 14 कैरेट सोने के गहनों को खूब बढ़ावा दे रहे हैं। दरअसल, जूलरी बनाने में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के मुकाबले 14 कैरेट के गहने सस्ते पड़ते हैं। इसकी वजह से ये जूलरी खरीदने वालों के लिए एक ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन बन गया है। ऑल इंडिया जेन एंड जूलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े का कहना है कि भारत में 14 कैरेट सोने की डिमांड बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये ट्रेड आगे भी बढ़ेगा, क्योंकि हल्के वजन वाले गहनों की मांग बढ़ रही है। ये खूबसूरती तो देते हैं, लेकिन आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ते।  

रूस से कच्चा तेल खरीदने से 3 साल में भारत को 25 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत हुई

नई दिल्ली अमेरिका और NATO जो कुछ दिनों पहले तक भारत की ओर से रूस से कच्चे तल के आयात पर चिंता जता रहे थे अब सीधे धमकी भरी भाषा में बात कर रहे हैं. नाटो ने बुधवार को कहा कि अगर भारत, चीन और ब्राजील रूस से कच्चा तेल मंगाना जारी रखते हैं तो अमेरिका इन देशों पर 100 फीसदी का सेकेंडरी सैंक्शंस लगा सकता है.  अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी कि रूसी तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों की नीतियों का पालन करना होगा, वरना व्यापारिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. दरअसल रूस से कच्चे तेल के आयात को अमेरिका और नाटो यूक्रेन युद्ध से जोड़कर देखते हैं. अमेरिका का मानना है कि भारत और चीन द्वारा रूस से कच्चा तेल मंगाने की वजह से रूस के वॉर मशीन को फंडिंग होती है. अमेरिका को लगता है कि अगर भारत और चीन रूस से कच्चा तेल न मंगाए तो मॉस्को यूक्रेन से युद्ध का खर्चा न उठा पाएगा और उसे जंग बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. लेकिन अमेरिका की ये चाहत भारत और चीन के लिए अरबों डॉलर के नुकसान का सौदा है. तीन साल में भारत को 11 से 25 अरब डॉलर की बचत भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है. घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बावजूद भारत को अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भारी मात्रा में तेल का विदेशों से आयात करना पड़ता है. भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 35% रूस से आयात करता है, जो सस्ता होने के कारण 2022-2025 के बीच भारत को 10.5 से 25 अरब डॉलर की बचत करा चुका है.  वर्ष 2025 की शुरुआत में भारत ने अपनी कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग 40% हिस्सा रूस से मंगाया. मई-जून 2025 में यह मात्रा लगभग 38–44% के बीच रहा. बता दें कि 2022 से पहले भारत को तेल बेचने वाले बड़े देशों में ईराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल थे. लेकिन 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया तो वह अपने युद्ध के खर्चे को पूरा करने के लिए भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों को सस्ता कच्चा तेल बेचने लगा. रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद से भारत को 2022-2024 की अवधि में करीब 11 से 25 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित बचत हुई है.  11 से 16% तक सस्ता पड़ा है कच्चा रूसी तेल  वित्त वर्ष 2023-24 में ही छूट पर रूसी तेल मंगाने से भारत को लगभग 7.9 अरब डॉलर (करीब 65,000 करोड़ रुपये) की बचत हुई. रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलने की वजह से भारत का तेल बिल कम रहा और चालू खाते को नियंत्रित करने में सहायता मिली. बचा दें कि रूसी कच्चा तेल, पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं (जैसे मिडिल ईस्ट) की तुलना में औसतन 11 से 16% तक सस्ता मिलता है.  रूस भारत को डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेचता है, जो वैश्विक बाजार मूल्य (ब्रेंट क्रूड) से प्रति बैरल 4-5 डॉलर कम होता है. 2022 से 2025 तक रूसी तेल की औसत कीमत 65-75 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 80-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. सऊदी अरब और इराक जैसे देश ब्रेंट क्रूड के करीब या उससे थोड़ा कम कीमत पर तेल बेचते हैं, यानी 80-85 डॉलर प्रति बैरल. अमूमन सऊदी तेल रूसी तेल से 10-15% महंगा हो जाता है. अगर भारत मध्य पूर्व से समान मात्रा में तेल खरीदता है तो प्रति बैरल 4-5 डॉलर के अतिरिक्त खर्च के कारण सालाना अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ  भारत पर पड़ेगा. उदाहरण के लिए 20 लाख बैरल प्रतिदिन के आयात पर 4 डॉलर प्रति बैरल का अंतर सालाना ~2.9 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च बनता है. मध्य पूर्व से सप्लाई पर लॉजिस्टिक समस्या मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति हमेशा से भारत के लिए रणनीतिक और लॉजिस्टिक समस्या लेकर आती है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अन्य देशों से तेल की आपूर्ति संभव है, लेकिन यह महंगा होगा और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बढ़ सकती हैं. पश्चिम एशिया में जंग की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से ही अस्थिर है. हाल ही में जब ईरान पर इजरायल ने हमला किया था तो ईरान ने होरमूज जलडमरूमध्य मार्ग को बंद करने की धमकी दी थी. ऐसी स्थिति में भारत के लिए समस्या पैदा हो सकती है.  रूसी तेल की डिलीवरी लागत भी अपेक्षाकृत कम है क्योंकि रूस भारत को समुद्री मार्गों (जैसे ब्लैक सी और बाल्टिक रूट्स) के जरिए तेजी से आपूर्ति करता है.

जल्द मिलेगी महंगाई से राहत! पेट्रोल-डीजल पर सरकार कर रही विचार

नई दिल्ली  देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द राहत मिल सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो सरकार आने वाले 2-3 महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम घटा सकती है। पुरी ने यह बात दिल्ली में आयोजित ऊर्जा वार्ता 2025 कार्यक्रम के दौरान कही। कीमतों में कटौती स्थिरता पर निर्भर मंत्री पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संभावना भू-राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ईरान-इजराइल जैसे क्षेत्रों में बड़ा टकराव हुआ, तो कच्चे तेल के दाम फिर से चढ़ सकते हैं, जिससे कटौती की योजना प्रभावित हो सकती है। तेल कंपनियों को बढ़ा मुनाफा, फिर भी नहीं घटी कीमतें रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक, मौजूदा समय में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर ₹12-15 और डीजल पर ₹6.12 का लाभ हो रहा है। इसके बावजूद, कंपनियों ने पिछले एक साल से कीमतों में कोई कटौती नहीं की है। अप्रैल में केंद्र सरकार द्वारा ₹2 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी गई थी, जिससे संभावित कटौती टल गई। टैक्स का बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोल पर केंद्र सरकार ₹21.90 और दिल्ली सरकार ₹15.40 वैट वसूल रही है। कुल टैक्स ₹37.30 प्रति लीटर है। डीजल पर केंद्र सरकार ₹17.80 और दिल्ली सरकार ₹12.83 VAT, कुल टैक्स ₹30.63 प्रति लीटर है। औसतन एक व्यक्ति भारत में हर महीने पेट्रोल पर ₹104.44 और डीजल पर ₹193.58 का टैक्स देता है यानी कुल टैक्स भार ₹298 प्रति माह प्रति व्यक्ति हो जाता है।   देश में पेट्रोल की सालाना खपत 4,750 करोड़ लीटर देश में पेट्रोल की सालाना खपत 4,750 करोड़ लीटर यानी प्र​ति व्यक्ति सालाना खपत 33.7 लीटर है। डीजल की सालाना खपत 10,700 करोड़ लीटर यानी 75.88 लीटर प्र​ति व्यक्ति प्रति वर्ष है। यानी प्रति व्यक्ति सालाना पेट्रोल-डीजल की खपत 109.6 लीटर यानी प्रति माह 9.13 लीटर। यह खपत सालाना 10.6% की दर से बढ़ती है।  

निवेशकों के लिए खुशखबरी! Nifty में जबरदस्त उछाल की संभावना

मुंबई  भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन और अनुकूल नीतिगत वातावरण के चलते शेयर बाजार में आने वाले महीनों में मजबूती देखने को मिल सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी 2025 के अंत तक 26,300 से 27,500 की रेंज में रह सकता है। मार्च में बने निचले स्तर से बाजार में तेजी का रुझान देखा जा रहा है और 26,300 का स्तर एक महत्वपूर्ण अवरोध हो सकता है। यदि इसमें ब्रेकआउट होता है, तो निफ्टी 27,500 तक जा सकता है। बर्नस्टीन के प्रबंध निदेशक और भारतीय शोध प्रमुख वेणुगोपाल गैरे ने निखिल अरेला के साथ लिखे नोट में कहा है, यह सीधे ही उस स्तर तक नहीं जाएगा। हमें अगले कदम से पहले इसके कुछ मजबूती लेने की उम्मीद है। सेक्टर के नजरिए से हम कुछ दांव यूटिलिटी से स्टेपल की ओर कर रहे हैं और थोड़े समय के लिए रणनीतिक रूप से ज्यादा वेटेज की ओर बढ़ रहे हैं। रणनीति के तौर पर उन्होंने यूटिलिटी सेक्टर को इक्वल वेट कर दिया है। वित्तीय, टेलिकॉम और डिस्क्रिशनरी उनके ओवरवेट सेक्टर बने हुए हैं। आर्थिक संकेतक बर्नस्टीन ने आगाह किया कि इस बात के संकेत बढ़ रहे हैं कि आ​र्थिक रफ्तार नरम हो रही है और यह नियमित रूप से आने वाले हाल के संकेतकों में दिखता भी है। औद्योगिक गतिविधियों में नरमी लग रही है क्योंकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक मई में नौ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया और कोर सेक्टर में भी इसी तरह की गिरावट देखी गई। अप्रैल-मई में बिजली की मांग और तेल व गैस उत्पादन में नरमी आई है जबकि यात्री वाहनों की बिक्री सुस्त बनी हुई है। हवाई यातायात की वृद्धि भी नरमी के संकेत दे रही है। ऋण वृद्धि में भी नरमी आई है। हालांकि, कुछ मजबूत रुझान भी हैं। इस्पात और कोयला उत्पादन ने हाल के औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमेंट भी मज़बूत है। इसे आंशिक रूप से पेटकोक की बढ़ती खपत से सहारा मिला है। उपभोक्ता मोर्चे की बात करें तो एफएमसीजी और खुदरा क्षेत्र की कई उपभोक्ता कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही के बारे में सकारात्मक टिप्पणियां की हैं और उन्होंने बिक्री वृद्धि में तिमाही आधार पर सुधार की बात कही है। पिछले कुछ हफ़्तों में बिजली की मांग में तेजी आई है। इन कारकों पर रहेगी नजर रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष की दूसरी छमाही में कुछ प्रमुख वैश्विक और घरेलू घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। इनमें शामिल हैं:     अमेरिका की टैरिफ नीतियों पर स्पष्टता और उसका वैश्विक व्यापार पर प्रभाव     हिंद-प्रशांत और मध्य पूर्व क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव का समाधान     यूके-भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रगति     अमेरिका में महंगाई के रुझान        

एचडीएफसी बैंक पहली बार देने जा रहा बोनस शेयर, मिलेगा डबल गिफ्ट

नई दिल्ली  भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक के निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। बैंक ने कहा है कि उनका बोर्ड 19 जुलाई को एक मीटिंग करने वाला है। इस मीटिंग में पहली बार बोनस शेयर जारी करने और फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए स्पेशल डिविडेंड देने पर विचार किया जाएगा। बैंक ने कहा है कि बोनस शेयर जारी करने का फैसला नियमों के अनुसार होगा। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी होगी। अभी तक बैंक ने बोनस शेयर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। Trendlyne के डेटा के अनुसार अगर HDFC बैंक बोनस शेयर जारी करता है, तो यह पहली बार होगा। बोनस शेयर का मतलब है कि कंपनी अपने शेयरधारकों को मुफ्त में अतिरिक्त शेयर देगी। यह एक तरह से कंपनी की तरफ से शेयरधारकों को तोहफा होगा। बोनस शेयर के साथ-साथ बोर्ड 2025-26 के वित्तीय वर्ष के लिए स्पेशल डिविडेंड पर भी विचार करेगा। डिविडेंड का मतलब है कि कंपनी अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयरधारकों को देगी। पहली बार बोनस शेयर देने की तैयारी! बैंक के इतिहास में यह पहली बार होगा जब वह अपने निवेशकों को बोनस शेयर देने की योजना बना रहा है. इस संभावित घोषणा की खबर आते ही शेयर बाजार में तेजी देखी गई. बुधवार के कारोबारी सत्र में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) का शेयर करीब 1% बढ़कर ₹2,022 के स्तर पर पहुँच गया. बोनस के साथ विशेष लाभांश? एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की 19 जुलाई को होने वाली बोर्ड मीटिंग सिर्फ बोनस शेयरों तक ही सीमित नहीं है. बैंक विशेष अंतरिम लाभांश पर भी विचार करेगा. अगर दोनों प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है, तो निवेशकों को एक साथ दोहरा तोहफा मिलने की संभावना है. शेयर में सकारात्मक तेजी, वॉल्यूम में उछाल बुधवार को शेयर का ट्रेडिंग वॉल्यूम 23,92,100 तक पहुंच गया, जिससे साफ जाहिर है कि बाजार में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है. बोनस शेयर और लाभांश की संभावना अल्पावधि में इस शेयर को और मजबूत बना सकती है. 2025 में अब तक 22% रिटर्न, भरोसा कायम एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयर ने साल 2025 में अब तक 22% से ज़्यादा रिटर्न दिया है. पिछले तीन महीनों में इस शेयर में लगभग 6% की वृद्धि और एक महीने में 3% का सकारात्मक रिटर्न देखने को मिला है. इससे पता चलता है कि मजबूत बुनियादी बातों के साथ यह शेयर लगातार निवेशकों को आकर्षित कर रहा है. मार्केट कैप में शीर्ष पर: बैंकिंग क्षेत्र की रानी ₹15.30 लाख करोड़ से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) न केवल भारत में बल्कि एशिया में भी सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक है. यह निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय और स्थिर विकल्प बना हुआ है. शेयर की कीमत एचएफडीसी बैंक ने पहले ही बता दिया था कि उसके कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए शेयर बाजार में ट्रेडिंग 21 जुलाई, 2025 तक बंद रहेगी। यह नियम इसलिए है ताकि कोई भी अंदरूनी जानकारी का गलत इस्तेमाल न कर सके। बैंक के इस नियम को शेयर डीलिंग कोड कहा जाता है। बैंक की वेबसाइट के मुताबिक उसके निवेशकों की संख्या 41,21,815 है। बैंक में विदेशी निवेशकों की करीब 41 फीसदी हिस्सेदारी है। HDFC बैंक के शेयर की बात करें तो पिछले एक साल में इसके शेयर में 23.01% की बढ़ोतरी हुई है। इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें 11.94% की तेजी आई है। पिछले छह महीनों में शेयर 21.46% बढ़ा है। पिछले तीन महीनों में 6.99% और पिछले एक महीने में 4.07% की बढ़ोतरी हुई है। HDFC बैंक ने पिछले 12 महीनों में 22 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया है। बीएसई पर आज बैंक का शेयर कारोबार के दौरान करीब 1 फीसदी तेजी के साथ 2021.90 रुपये तक गया। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 2,027.40 रुपये है।  

Aprilia SR 175 भारत में लॉन्च, कीमत 1.26 लाख रुपये से शुरू, अपडेटेड फीचर्स के साथ युवाओं को बनाएगी दीवाना

मुंबई   दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Aprilia India ने भारतीय बाजार में अपनी नई Aprilia SR 175 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस स्कूटर को 1.26 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है. बता दें कि यह नई स्कूटर कंपनी के पोर्टफोलियो में पहले से मौजूद Aprilia SR 160 की जगह लेगी. Aprilia SR 175 का इंजन गौरतलब है कि यह स्कूटर लॉन्च से पहले ही कंपनी के आधिकारिक डीलरशिप तक पहुंचना शुरू हो गई थीं. हालांकि उस समय तक कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया था. इंजन की बात करें तो इसमें एक नया-विकसित 174.7cc, सिंगल-सिलेंडर एयर-कूल्ड इंजन लगाया गया है, जिसमें 3-वाल्व सेटअप दिया गया है. पावर आउटपुट की बात करें तो यह नया इंजन 7,200rpm पर 12.74 bhp की पावर और 6,000rpm पर 14.14 Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है. जबकि कंपनी के Aprilia SR 160 स्कूटर के 11.11 bhp की पावर और 13.44 Nm के टॉर्क आउटपुट से बेहतर है. Aprilia SR 175 के फीचर्स नए SR 175 में मिलने वाले फीचर्स की बात करें तो इसमें एक और महत्वपूर्ण अपडेट कलर TFT डिस्प्ले का इस्तेमाल किया गया है, जो Aprilia RS 457 और Tuono 457 में देखी गई यूनिट के समान दिखता है. हालांकि, इसमें मिलने वाला इंटरफ़ेस और एनिमेशन काफ़ी अलग हैं, और डीलर सूत्रों का कहना है कि SR 175 की स्क्रीन कई लेआउट विकल्प प्रदान करती है. 457 सीरीज की तरह, इसके डिस्प्ले में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी मिलती है, जिससे कॉल अलर्ट, नोटिफिकेशन और म्यूजिक कंट्रोल के लिए Aprilia ऐप के माध्यम से स्मार्टफ़ोन को जोड़ा जा सकता है. मैकेनिकल तौर पर इस स्कूटर में, फ्रेम, सस्पेंशन, ब्रेक और टायर जैसे कंपोनेंट्स Aprilia SR 160 से अपरिवर्तित दिखते हैं. इस स्कूटर में आगे और पीछे दोनों तरफ 14-इंच के व्हील्स इस्तेमाल किए गए हैं, जिनमें चौड़े 120-सेक्शन वाले टायर लगे हैं. ब्रेकिंग के लिए स्कूटर में आगे सिंगल-चैनल ABS के साथ फ्रंट डिस्क ब्रेक और रियर में ड्रम ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है. देखने में, नई Aprilia SR 175, SR 160 जैसी ही दिखती है. हालांकि, इसके कलर ऑप्शन Aprilia RS 457 से प्रेरित प्रतीत है. रेड कलर के साथ व्हाइट और रेड कलर के साथ पर्पल जैसे रंग, दोनों ही RS के रंग-रूप से काफ़ी मिलते-जुलते हैं. 1.26 लाख रुपये की कीमत वाली यह अप्रिलिया स्कूटर, Yamaha Aerox 155 और Hero Xoom 160 जैसे स्कूटर्स से होने वाला है.

शेयर बाजार में सुस्त ट्रेडिंग, बैंकिंग शेयरों ने दिखाया दम

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 63.57 अंक या 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 82,634.48 और निफ्टी 16.25 अंक या 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,212.05 पर था। बैंकिंग शेयरों में तेजी देखी गई। निफ्टी बैंक 162.30 अंक या 0.28 प्रतिशत की मजबूती के साथ 57,168.95 पर था। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी खरीदारी हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 8 अंक की तेजी के साथ 59,620 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 4.80 की मामूली बढ़त के साथ 19,140.05 पर था। सेक्टोरल आधार पर ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, रियल्टी, मीडिया, एनर्जी, प्राइवेट बैंक और इन्फ्रा इंडेक्स हरे निशान में थे। मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा और कमोडिटीज लाल निशान में थे। सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, टेक महिंद्रा, एसबीआई, इन्फोसिस, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, आईटीसी, एक्सिस बैंक, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी, भारती एयरटेल और टाइटन टॉप गेनर्स थे। इटरनल (जोमैटो), सन फार्मा, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, बजाज फाइनेंस, बीईएल, टीसीएस और पावर ग्रिड टॉप लूजर्स थे। एसबीआई सिक्योरिटीज के तकनीकी एवं डेरिवेटिव्स अनुसंधान प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि सुस्त शुरुआत के बाद, बुधवार के सत्र के दूसरे भाग में भारतीय शेयर बाजारों ने वापसी की और निफ्टी लगातार दूसरे दिन हरे निशान में बंद हुआ। इस सुधार का नेतृत्व इन्फोसिस, एसबीआई और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों ने किया, जो सूचकांक में बढ़त में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शेयरों के रूप में उभरे। दूसरी ओर, आईसीआईसीआई बैंक, आयशर मोटर्स और सन फार्मा में गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने आगे कहा कि लगातार दो सत्रों के मजबूत प्रदर्शन के बाद, व्यापक बाजारों ने राहत की सांस ली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों सूचकांक स्थिर रुख के साथ बंद हुए, जो व्यापक बाजार की तेजी में ठहराव को दर्शाता है। मिश्रित वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत लाल निशान में हुई। सुबह 9:46 पर सेंसेक्स 139 अंक या 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,431 और निफ्टी 58 अंक या 0.23 प्रतिशत की कमजोर के साथ 25,137 पर था।