samacharsecretary.com

दुनिया को चौंकाने वाला दान: लैरी एलिसन देंगे 31.24 लाख करोड़, 15 साल पहले ली थी संकल्प

न्यूयॉर्क  दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्‍यक्ति और ओरैकल के फाउंडर लैरी एलिसन ने अपनी कुल संपत्ति का 95 फीसदी दान करने की बात कही है. एलिसन फिलहाल टेस्‍ला के सीईओ एलन मस्‍क के बाद दूसरे सबसे अमीर आदमी हैं. ब्‍लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्‍स के मुताबिक, एलिसन के पास सितंबर, 2025 तक करीब 373 अरब डॉलर की संपत्ति थी. इस लिहाज से अगर देखा जाए तो इसका 95 फीसदी यानी 31 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की संपत्ति वे दान करने वाले हैं. एलिसन की संपत्ति में सबसे ज्‍यादा उछाल ओरैकल के एआई मॉडल की ग्रोथ के बाद आया है, जिसकी वजह से ओरैकल के स्‍टॉक में जबरदस्‍त उछाल दिखा है. एलिसन ने साल 2010 में ही अपनी कुल संपत्ति का 95 फीसदी दान करने की बात कही थी. उनकी संपत्ति में सबसे बड़‍ी हिस्‍सेदारी ओरैकल की इक्विटी में 41 फीसदी भागीदारी के रूप में आती है. सितंबर, 2025 तक एलिसन के पास 373 अरब डॉलर की संपत्ति रही है. उन्‍होंने टेस्‍ला में भी बड़ा निवेश किया हुआ है. कहां दान करते हैं अपना पैसा एलिसन पहले से ही अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्‍सा दान करते आए हैं, जो ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक गैर लाभकारी संगठन एलिसन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी के जरिये किया जाता रहा है. यह संस्‍थान दुनियाभर में हेल्‍थकेयर, खाने की कमी, क्‍लाइमेट में बदलाव और एआई रिसर्च के लिए फंडिंग करता है. इस संस्‍थान का नया कैंपस साल 2027 में खुलने वाला है, जिसकी वैल्‍यू करीब 1.3 अरब डॉलर की होगी. इससे पहले एलिसन ने 20 करोड़ डॉलर का दान यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया को कैंसर रिसर्च सेंटर स्‍थापित करने के लिए दिया था. इसके अलावा 1 अरब डॉलर का दान एलिसन मेडिकल फाउंडेशन को भी दिया था. मुश्किल प्रोजेक्‍ट पर कर रहे काम  एलिसन ने पिदले साल साइंटिस्‍ट जॉन बेल को अपने रिसर्च सेंटर की अगुवाई के लिए नियुक्‍त किया था. लेकिन, पिछले अगस्‍त में उन्‍होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के पूर्व प्रेसिडेंट सैंटा ओनो को हायर किया है, जो बेल के साथ मिलकर काम करते. इसके दो सप्‍ताह बाद ही बेल ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया. उनका कहना था कि यह बहुत मुश्किल प्रोजेक्‍ट है और इस पर काम नहीं किया जा सकता है. कोड लिखने से की थी करियर की शुरुआत एलिसन ने यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस से पढ़ाई समाप्‍त करने के बाद डाटाबेस कोड लिखने से अपने करियर की शुरुआत की थी. साल 1977 में उन्‍होंने बतौर सह-संस्‍थापक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लैबोरेटरीज की स्‍थापना की, जो बाद में ओरैकल के नाम से जानी गई. साल 2014 तक वह ओरैकल के सीईओ रहे. इसके बाद एग्‍जीक्‍यूटिव चेयरमैन और सीटीओ के पद पर काम किया. एलिसन के पास इस कंपनी के अलावा भी कई और निवेश हैं. उन्‍होंने हवाई द्वीप का करीब 98 फीसदी हिस्‍सा खरीद रखा है.

भारत का सबसे अमीर बनने का सपना सच होने के क़रीब: गौतम अदाणी की संपत्ति में दो दिन में 13 अरब डॉलर का उछाल

नई दिल्ली देश के दिग्गज उद्योगपति और अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी की संपत्ति में बीते दो कारोबारी सत्रों में 13 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। उनकी संपत्ति में बढ़ोतरी शेयरों की कीमत में तेजी आने के कारण हुई है। गौतम अदाणी की संपत्ति में इस साल 17.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जबकि मुकेश अंबानी की संपत्ति में 8.02 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। अदाणी ग्रुप के शेयरों में बढ़ोतरी की वजह सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) की ओर से शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग मामले में क्लीन चिट देना है। शॉर्ट-सेलर द्वारा व्यापक रूप से प्रचारित दावों के झूठे होने की पुष्टि करने वाले अपने अंतिम आदेश में, सेबी ने निष्कर्ष निकाला कि अदाणी समूह ने दो निजी फर्मों के माध्यम से धन का प्रवाह करके किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया, जिससे छिपे हुए संबंधित पक्ष लेनदेन और धोखाधड़ी के दावों को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया गया। बीते तीन कारोबारी सत्रों में अदाणी पावर का शेयर करीब 30 प्रतिशत, अदाणी टोटल गैस का शेयर भी करीब 18 प्रतिशत, अदाणी ग्रीन एनर्जी का शेयर करीब 15 प्रतिशत, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर का दाम 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है। इस दौरान अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 11 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दे चुका है, जबकि अदाणी पोर्ट्स के शेयर ने करीब 3 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दुनिया के अरबपतियों की सूची में 452 अरब डॉलर के साथ एलन मस्क शीर्ष पर हैं। इसके बाद 388 अरब डॉलर के साथ लैरी एलिसन दूसरे, 269 अरब डॉलर के साथ मार्क जुकरबर्ग तीसरे, 250 अरब डॉलर के साथ जेफ बेजोस चौथे और 221 अरब डॉलर के साथ लैरी पेज पांचवे स्थान पर होंगे। मौजूदा में समय में अरबपतियों की सूची में मुकेश अंबानी 98.6 अरब डॉलर के साथ 18 वें स्थान पर, गौतम अदाणी 95.7 अरब डॉलर के साथ 19 वें स्थान पर हैं।

Nokia की बाजार में वापसी तय, क्या एक बार फिर जीत पाएगा यूज़र्स का भरोसा?

मुंबई  Nokia एक बार फिर मार्केट में वापसी कर रही है. कंपनी ने HMD ग्लोबल के साथ अपने ब्रांड लाइसेंस एग्रीमेंट को बढ़ा दिया है. इसका मतलब है कि HMD अगले कुछ सालों तक Nokia की ब्रांडिंग वाले फोन्स बेच पाएगी. हालांकि, ये एग्रीमेंट सिर्फ फीचर फोन्स के लिए है. यानी मार्केट में आपको नोकिया के स्मार्टफोन नहीं मिलेंगे.  दोनों कंपनियों के बीच साल 2016 में ब्रांड लाइसेंसिंग एग्रीमेंट हुआ था, जो 2026 में एक्सपायर होने वाला था. हालांकि, लाइसेंस एक्सपायर होने से पहले ही HMD ने नोकिया ब्रांड का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था.  कौन-से फोन होंगे लॉन्च? कंपनी पिछले कुछ वक्त से HMD ब्रांड नेम के तहत स्मार्टफोन और फीचर फोन्स मार्केट में बेच रही है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी ने नोकिया के साथ अपने लाइसेंस को अगले दो से तीन साल के लिए बढ़ा लिया है. इसकी वजह से हमें मार्केट में नोकिया ब्रांडिंग वाले फीचर फोन्स एक बार फिर देखने को मिल सकते हैं.  HMD ने नोकिया ब्रांडिंग के साथ कई क्लासिक फोन्स को मार्केट में दोबारा लॉन्च किया था. इन फोन्स को अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला, लेकिन स्मार्टफोन के जमाने में फीचर फोन्स कहां तक मुकाबला करते. वहीं दूसरी तरफ नोकिया की ब्रांडिंग के बाद भी HMD के स्मार्टफोन्स मार्केट में कोई कमाल नहीं कर पाए.  अब तक कंपनी को नहीं हुआ फायदा पिछले कुछ वक्त से कंपनी HMD ब्रांडिंग के साथ स्मार्टफोन को लॉन्च कर रही है. मगर इसका भी कोई फायदा होते ब्रांड को नहीं दिख रहा है. नोकिया ब्रांड की फीचर फोन मार्केट में वापसी कंपनी को राहत पहुंचा सकती है. खासकर भारत और चीन जैसे मार्केट में जहां आज भी फीचर फोन्स की मांग है.  भारत की बात करें, तो फीचर फोन्स की डिमांड यहां सबसे ज्यादा है. IDC के डेटा के मुताबिक, HMD ग्लोबल भारतीय फीचर फोन मार्केट में एक मजबूत प्लेयर है. साल 2024 में कंपनी का मार्केट शेयर लगभग 22 फीसदी था. लाइसेंस एक्सटेंशन से HMD को मजबूती मिलेगी. ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस पारी में नोकिया और HMD की जोड़ी कोई कमाल करेगी.

Hero ने लॉन्च किया नया Destini स्कूटर, GST छूट के बाद कीमत 72,000 रुपये तक पहुंची

नई दिल्ली जीएसटी छूट से सरगर्म ऑटो बाजार में हीरो मोटोकॉर्प ने बड़ा दांव खेला है. जब तमाम कंपनियां दाम घटाने की होड़ में हैं, वहीं हीरो ने ग्राहकों को सिर्फ कीमत का तोहफा ही नहीं दिया, बल्कि एकदम नया स्कूटर Destini 110 लॉन्च किया है. महज 72,000 रुपये से शुरू होने वाला यह स्कूटर न सिर्फ किफायती है बल्कि लुक और डिज़ाइन के मामले में सेग्मेंट के लीडर Honda Activa को टक्कर देता है. वेरिएंट और प्राइस जनवरी 2025 में कंपनी ने Destini 125 का नया अवतार पेश किया था और अब उसी डिज़ाइन व स्टाइलिंग पर बेस्ड नया Destini 110 लॉन्च किया गया है. कंपनी ने इसे दो वेरिएंट्स में उतारा है. VX वेरिएंट की कीमत 72,000 रुपये और ZX जिसकी कीमत 79,000 रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है. लुक और डिज़ाइन देखने में यह स्कूटर काफी हद तक बड़े मॉडल Destini 125 से मिलता-जुलता है. इसमें वही H-शेप्ड LED डे-टाइम-रनिंग लाइट (DRLs) और LED टेललैंप दिए गए हैं. इंडिकेटर्स एप्रन पर थोड़ा नीचे की ओर प्लेस किए गए हैं. चौड़ा फ्लोरबोर्ड और लंबी सीट के चलते ये स्कूटर एक आरामयदाक सवारी के लिए डिज़ाइन किया गया है. कलर ऑप्शन     VX वेरिएंट: ग्रे, ब्लू और व्हाइट     ZX वेरिएंट: ग्रे, ब्लू और रेड इंजन और परफॉर्मेंस Destini 110 में कंपनी ने 110.9 सीसी का इंजन दिया है, जो 8.1 bhp की पावर और 8.87 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. हीरो का दावा है कि यह स्कूटर 56.2 kmpl का माइलेज देगा. ZX वेरिएंट में कंपनी ने कैस्ट व्हील्स और फ्रंट डिस्क ब्रेक ब्रेक्स दिए हैं. वहीं  VX वेरिएंट में ड्रम ब्रेक सेटअप मिलता है.  आंकड़ो में Destini सीट हाइट 770 मिमी व्हीलबेस 1,302 मिमी ग्राउंड क्लीयरेंस 162 मिमी वजन 114 किग्रा फ्यूल टैंक 5.3 लीटर मिलते हैं ये फीचर्स दोनों वेरिएंट्स में प्रोजेक्टर LED हेडलाइट, LED टेल लैंप, डिगी-एनालॉग स्पीडोमीटर, फ्रंट ग्लव बॉक्स, इनबिल्ट USB चार्जिंग पोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं. सस्पेंशन के लिए सामने टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे सिंगल-साइड शॉक दिया गया है. दोनों वेरिएंट्स में 12-इंच ट्यूबलेस टायर दिए गए हैं.  Honda Activa से तुलना भारत का सबसे लोकप्रिय स्कूटर Honda Activa फिलहाल 73,000 रुपये से 77,500 (एक्स-शोरूम) की रेंज में उपलब्ध है. ऐसे में हीरो ने Destini 110 को रणनीतिक तरीके से पोजिशन किया है. इसका बेस VX वेरिएंट (72,000 रुपये) Activa से सस्ता है. टॉप ZX वेरिएंट (79,000 रुपये) थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन इसमें डिस्क ब्रेक, कैस्ट व्हील्स और LED प्रोजेक्टर हेडलैंप जैसे प्रीमियम फीचर्स हैं, जो Activa में नहीं मिलते.

अब सस्ता हुआ सीमेंट! देश की सबसे बड़ी कंपनी अल्ट्राटेक ने कीमतों में की बड़ी कमी

नई दिल्ली सीमेंट सेक्‍टर की दिग्‍गज कंपनी अल्‍ट्राटेक ने जीएसटी कटौती का तोहफा अपने कस्‍टमर्स को दिया है. कंपनी ने सीमेंट की कीमतों में कटौती का ऐलान किया है, जो 22 सितंबर से प्रभावी हैं. अब 1 बोरी सीमेंट पहले से काफी सस्‍ता हो चुका है. कंपनी ने अपने सर्कुलर में कहा कि 22 सितंबर से ग्रे सीमेंट और सफेद सीमेंट सभी पर GST 18% लागू होगा, जो पहले 28 फीसदी था.  कंपनी ने कहा कि एक जिम्मेदार संगठन के तौर पर अल्ट्राटेक इस कटौती का पूरा लाभ अपने डीलर्स और कस्‍टमर्स तक पहुंचाएगा. जिस कारण ग्रे और सफेद सीमेंट की कीमतों में जीएसटी संशोधन किया जा रहा है. कंपनी ने सभी डीलर्स को इसका लाभ कस्‍टमर्स को देने के लिए निर्देश दिया.  कंपनी ने कहा कि 22 सितंबर से नई जीएसटी दर सभी सीमेंट बैग पर लागू होंगे. अपने 17 सितंबर को जारी सर्कुलर में कंपनी ने कहा कि अबसे 21 सितंबर, 2025 के बीच, प्लांट से भेजे जाने वाले सभी सीमेंट बैगों पर पुराना और संशोधित एमआरपी दोनों दर्ज किया जाएगा. पुराना स्‍टॉक खत्‍म होने के बाद ही नई कीमत पर नया स्‍टॉक दिया जाएगा. कितने कम हुए सीमेंट के दाम  Ultratech ने अलग-अलग कैटेगरी के सीमेंट की कीमतों में कटौती की है. कंपनी ने एक बोरी सीमेंट पर करीब 50 रुपये घटाए हैं. PPC सीमेंट के एक बोरी की कीमत पहले 550 रुपये थी, जो अब घटकर 500 रुपये हो चुकी है. PCC Premium LPP के एक बोरी की कीमत पहले 600 रुपये थी, जो अब कम होकर 550 रुपये हो चुकी है. बाकी कैटेगरी के सीमेंट पर भी इसी तरह दाम घटे हैं.  सीमेंट पर कितना घटा जीएसटी जीएसटी काउंसिल की बैठक में सीमेंट पर जीएसटी को 28 फीसदी से घटकार 18 फीसदी कर दिया गया, यानी सीमेंट की कीमतों में 10 फीसदी जीएसटी रेट कम किए गए. यह कटौती 22 सितंबर से देश मे लागू हो चुकी है.  अब स‍िर्फ 2 मुख्‍य स्‍लैब  गौरतलब है कि 3 सितंबर को हुए जीएसटी काउंसिल की बैठक में अबतक के सबसे बड़ा जीएसटी सुधार किया गया. इसके तहत 4 स्‍लैब को हटाकर सिर्फ 2 मुख्‍य स्‍लैब 5% और 18% कर दिया गया. वहीं लग्‍जरी और सिन प्रोडक्‍ट पर जीएसटी दर को बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया. जीएसटी में इतने बड़े सुधार के बाद 22 सितंबर से तमाम चीजें सस्‍ती हो गई हैं. एसी-कार से टीवी, कपड़ा और जूता तक सस्‍ते हो चुके हैं. हालांकि अभी कस्‍टमर्स नए स्‍टॉक का इंतजार कर रहे हैं. 

₹49,999 में Ola की S1 X और Roadster बाइक, जानें ऑफर की पूरी डिटेल

मुंबई  अगर आप इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकल बनाने वाली देसी कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने ओला सेलिब्रेट्स इंडिया नाम से एक शानदार फेस्टिव ऑफर शुरू किया है, जिसके तहत इसकी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की शुरुआती कीमत ₹49,999 हो गई है। यह ऑफर मुहूर्त महोत्सव के नाम से शुरू किया गया है जो अगले नौ दिनों तक चलेगा। इस दौरान रोजाना सीमित संख्या में स्कूटर और मोटरसाइकिल 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर उपलब्ध होंगी। ओला रोज सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इन खास मुहूर्तों की घोषणा करेगा। ₹49,999 में मिलेंगे ये स्कूटर और मोटरसाइकल इस ऑफर के तहत ओला S1 X का 2 kWh बैटरी वाला मॉडल मात्र ₹49,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। इसकी कीमत 81,999 रुपये है। इसके अलावा ओला रोडस्टर X का 2.5 kWh बैटरी वाला वेरिएंट सिर्फ ₹49,999 में मिलेगा। इस मोटरसाइकल की कीमत 99,999 रुपये है। ₹99,999 में दमदार मॉडल जो लोग ज्यादा पावर वाले मॉडल लेना चाहते हैं उनके लिए ओला का S1 प्रो+ (5.2 kWh) और रोडस्टर X+ (9.1 kWh) की कीमत अब ₹99,999 है। ये दोनों ही टॉप-स्पेसिफिकेशन वाले मॉडल हैं, जिनमें 4680 भारत सेल बैटरी पैक लगे हैं। वैसे इनकी कीमत 1,69,999 रुपये और 1,89,999 रुपये है। ओला की अन्य गाड़ियों की कीमतें सीमित समय के इस ऑफर के अलावा ओला अपनी अन्य गाड़ियों को भी बेचती रहेगी। S1 प्रो+ और S1 प्रो – इनकी बैटरी 3 kWh से 5.2 kWh तक की है, और इनकी कीमत ₹1.20 लाख से ₹1.69 लाख के बीच है। S1 X – यह इलेक्ट्रिक स्कूटर आम लोगों के लिए बना है और इसकी शुरुआती कीमत ₹81,999 है। पुराने मॉडल – दूसरी जनरेशन के पुराने मॉडल अभी भी ₹97,999 और ₹1,18,999 में उपलब्ध हैं। मोटरसाइकिलों की कीमतें ओला ने अपनी रोडस्टर सीरीज को भी कई कॉन्फिगरेशन में पेश किया है। रोडस्टर X+ – इसमें 4.5 kWh की बैटरी है और इसकी कीमत ₹1,27,499 है। रोडस्टर X – यह 2.5 kWh, 3.5 kWh और 4.5 kWh के विकल्पों में आती है और इसकी कीमत ₹99,999 से ₹1,24,999 के बीच है। स्पोर्ट्स स्कूटर सेगमेंट में एंट्री करेगा ओला ओला ने हाल ही में अपने सालाना संकल्प इवेंट में यह भी बताया कि 4680 भारत सेल वाली S1 प्रो+ (5.2 kWh) और रोडस्टर X+ (9.1 kWh) की डिलीवरी नवरात्रि से शुरू हो जाएगी। इनकी कीमत ₹1.69 लाख और ₹1.89 लाख है। इसके साथ ही ओला ने स्पोर्ट्स स्कूटर सेगमेंट में भी एंट्री की घोषणा की है। S1 प्रो स्पोर्ट नाम का यह स्कूटर जनवरी 2026 में ₹1.49 लाख की शुरुआती कीमत पर लॉन्च होगा। ओला इलेक्ट्रिक इस फेस्टिव सीजन में ग्राहकों को अपनी तरफ खींचने के लिए कई आकर्षक छूट और फायदे दे रहा है।  

ऑटो शेयरों में रफ्तार, बाजार में ब्रेक — निफ्टी-सेंसेक्स लाल निशान में

मुंबई  शेयर बाजार में मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच सप्ताह के लगातार दूसरे कारोबारी दिन सुस्ती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई और फिर सेंसेक्स-निफ्टी की चाल बदली-बदली नजर आई. दरअसल, ग्रीन में खुलने के बाद दोनों इंडेक्स रेड जोन में आ गए. हालांकि, ऑटो कंपनियों के शेयरों में आई तूफानी तेजी के चलते दोनों इंडेक्स ओपनिंग के साथ सोमवार की गिरावट के उबरे हुए नजर आए थे.  बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स खुलने के कुछ ही मिनटों में 150 अंक के आसपास तक उछला, लेकिन फिर अचानक 100 अंक के करीब टूट गया, लेकिन अगले ही पल फिर ग्रीन में आ गया. तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी अपने पिछले बंद के मुकाबले बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया और 25,250 तक चढ़ा, लेकिन फिर गिरकर 25,160 तक आ गया. इससे पहले सोमवार को मार्केट में आखिरी कारोबारी घंटे में गिरावट तेज हो गई थी और ट्रंप के H1B Visa की फीस में बढ़ोतरी के ऐलान के बाद आईटी स्टॉक्स के बिखरने के चलते में सेंसेक्स-निफ्टी बुरी तरह फिसलकर बंद हुए थे.  ऐसे चढ़त-गिरते नजर आए इंडेक्स मंगलवार को शुरुआती कारोबार सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद 82,159.97 की तुलना में फिसलकर 82,147 पर ओपनिंग की और फिर अचानक उछाल भरते हुए  82,307.50 पर कारोबार करता दिखा, लेकिन इसके बाद इसमें गिरावट आई और ये 140 अंक फिसलकर 82,019 तक आ गया. एनएसई निफ्टी मामूली बढ़त के साथ 25,209 पर कारोबार शुरू किया और फिर सेंसेक्स की तरह इसकी चाल भी बदलती रही. ग्लोबल मार्केट में गिफ्ट निफ्टी भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था.  Tata से MRF तक ऑटो शेयरों का धमाल भले ही शेयर मार्केट में तगड़ा उतार-चढ़ाव दिखा, लेकिन ऑटो और ऑटो सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सरकार के GST Cut के चलते तूफानी तेजी दिखी. टाटा मोटर्स, मारुति से लेकर महिंद्रा एंड महिंद्रा तक के शेयर ओपनिंग के साथ ही दौड़ लगाते नजर आए. Maruti 3.20%, M&M 2.60%, Tata Motors 1.50%, Ashok Leyland 2.66%, Sona Comstar 2.10%, Uno Minda 1.30%, Exide India 1.15%, MRF 1.10% की उछाल के साथ ट्रेड कर रहे थे.   ये शेयर भी ग्रीन जोन में  ऑटो स्टॉक्स के अलावा मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान बढ़त के साथ ग्रीन जोन में नजर आने वाले अन्य शेयरों की बात करें, तो इनमें Thermax 2%, OFSS 1.75%, Glenmark 1.70%, RVNL 1.30%, Om Infra Share 15.15%, IIL 13.43%, KEC 7.58%, ATL 7.52%, PVSL 5.19% की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे.  कल संभल नहीं सका था बाजार शेयर बाजार बीते कारोबारी दिन सोमवार को पूरे कारोबारी दिन सुस्ती के साथ कारोबार हुआ था और भारी उतार-चढ़ाव देखने के बाद दोनों इंडेक्स बड़ी गिरावट के साथ क्लोज हुए थे. सेंसेक्स 466 अंक फिसलकर 82,159.97 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी ने 124 अंक की गिरावट लेकर 25,202.35 पर क्लोजिंग की थी.खासतौर पर आईटी शेयर बुरी तर टूटे थे और टेक महिंद्रा से लेकर टीसीएस, इंफोसिस तक के शेयरों में पैसे लगाने वालों को तगड़ा नुकसान हुआ था. 

बीमा बनाम अस्पताल: जंग का खामियाज़ा भुगत रहे मरीज

नई दिल्ली देश में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर इन दिनों गहरे विवाद में फंस गया है. कैशलेस इलाज को लेकर अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच चल रही खींचतान का सबसे बड़ा खामियाजा पॉलिसीधारकों को उठाना पड़ रहा है. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) (AHPI), जिसमें 15 हजार से अधिक अस्पताल जुड़े हैं, ने हाल ही में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के पॉलिसीधारकों को 22 सितंबर से कैशलेस सुविधा बंद करने की चेतावनी दी थी. यह फैसला 12 सितंबर को लिया गया, हालांकि अब इसे फिलहाल टाल दिया गया है. पहले भी दी जा चुकी हैं धमकियां स्टार हेल्थ से पहले भी अस्पताल संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया था. 22 अगस्त 2025 को बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस और केयर हेल्थ इंश्योरेंस को चेतावनी जारी की गई थी कि उनके ग्राहकों को कैशलेस सर्विस नहीं दी जाएगी. दरअसल, टैरिफ दरों को लेकर असहमति इस जंग की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है. बीमा कंपनियों का पलटवार केवल अस्पताल संगठन ही नहीं, कई बीमा कंपनियां भी कुछ अस्पतालों को अपनी सूची से बाहर कर रही हैं. उदाहरण के लिए, निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने 16 अगस्त 2025 को मैक्स हेल्थकेयर को अपने पैनल से हटा दिया. इसी तरह, केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने 17 फरवरी 2025 को दिल्ली-एनसीआर के कई अस्पतालों के साथ करार समाप्त कर दिया था. मरीज बन रहे बीच का शिकार बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच खिंची इस रस्साकशी का सीधा असर मरीजों पर हो रहा है. कई जगह पॉलिसीधारकों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल रही, जबकि कुछ को पूरा बिल एडवांस में चुकाना पड़ रहा है. कई बार रीइंबर्समेंट भी नहीं मिल पाता, जिससे बीमा होने के बावजूद लोग आर्थिक संकट में फंस जाते हैं. बढ़ रही पॉलिसीधारकों की मुश्किलें भारत में अभी भी स्वास्थ्य बीमा धारकों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. ऐसे में बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच चल रही यह खींचतान नए ग्राहकों को बीमा पॉलिसी लेने से हतोत्साहित कर सकती है. बढ़ते विवाद ने लोगों के मन में बीमा की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. पुराना है यह विवाद अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच यह टकराव नया नहीं है. इसकी जड़ें वर्षों पुरानी हैं, लेकिन कोरोना महामारी के बाद यह तनाव और गहरा गया. AHPI के महानिदेशक गिरीधर ग्यानी ने कहा था कि जब बीमा कंपनियों ने कुछ अस्पतालों को अपनी पैनल लिस्ट से हटाना शुरू किया, तब अस्पतालों ने भी एकजुट होकर विरोध करने का निर्णय लिया. आखिर कौन कर रहा है मनमानी? अस्पताल संगठन बीमा कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाते हैं, जबकि बीमा कंपनियां अस्पतालों पर. मैक्स हेल्थकेयर का कहना है कि बीमा कंपनियां लगातार दरें घटाने का दबाव बनाती हैं, नए कॉन्ट्रैक्ट को लटकाए रखती हैं और पुराने कॉन्ट्रैक्ट में संशोधन करने से बचती हैं. वहीं, अस्पतालों की मांग है कि टैरिफ दरें बढ़ाई जाएं, लेकिन बीमा कंपनियां पुराने रेट में भी कटौती चाहती हैं. नतीजा यह है कि दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही और इसकी कीमत आम मरीज चुका रहा है.

जीएसटी कटौती का मिडिल क्लास पर असर: जानें महीने के बचत के आंकड़े

नई दिल्‍ली  22 सितंबर यानी आज से जीएसटी का नया रेट लागू हो गया है. जीएसटी परिषद ने 3 सितंबर को हुई बैठक में कार से लेकर किचन तक की चीजों पर जीएसटी की दरें घटा दी हैं. ज्‍यादातर चीजों पर जीएसटी दरें घटने से कीमतों में भी कटौती हो गई है. इसका सबसे ज्‍यादा लाभ मिडिल क्‍लास को बताया जा रहा है. नई दरें लागू होने के साथ ही यह सवाल भी लोगों के मन में घूम रहा है कि कीमतों में कटौती होने के बाद मिडिल क्‍लास का हर महीने आखिर कितना पैसा बचेगा. सबसे पहले बात करते हैं वाहन की. त्‍योहारी सीजन शुरू हो गया है और मिडिल क्‍लास इसी समय बाइक और कार की खरीदारी करता है. कार, दोपहिया और थ्री-व्‍हीलर्स पर जीएसटी की दरें 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी गई हैं, जबक‍ि साइकिल पर जीएसटी की दर 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 लाख रुपये की बाइक पर सीधे 10 हजार रुपये की बचत होगी. 6 से 8 लाख रुपये की कार खरीदने पर भी 60 से 80 हजार रुपये की सीधी बचत हो जाएगी. अगर कोई ऑटो रिक्‍शा खरीदता है तो 3 लाख रुपये के वाहन पर सीधे 30 हजार रुपये की बचत हो जाएगी. वाहनों के कलपुर्जों पर भी जीएसटी की दर 28 से घटकर 18 फीसदी हो गई है, तो इनके मेंटेनेंस पर भी बचत होती रहेगी. रोजमर्रा के सामान पर कितना पैसा बचेगा रोजमर्रा की जरूरी चीजों में शामिल साबुन, टूथपेस्‍ट, शैम्‍पू, हेयर ऑयल, टूथ पाउडर आदि पर जीएसटी की दर घटकर 5 फीसदी हो गई है. इसके अलावा डायपर, बेबी बॉटल, किचन के बर्तन, सिलाई मशीन, माचिस और मोमबत्‍ती भी सस्‍ती हो गई है. अगर एक मिडिल क्‍लास परिवार इन चीजों पर महीने में 5 हजार रुपये खर्च करता था, तो अब उसे सीधे 500 रुपये की बचत होगी. खाने-पीने के सामान पर कितनी बचत दूध, पनीर, मक्‍खन, घी, चॉकलेट, बिस्‍कुट, नमकीन, पास्‍ता, नूडल्‍स और जूस आदि पर भी जीएसटी घटकर 5 फीसदी हो गया है. इसका मतलब है कि अगर कोई मिडिल क्‍लास पारिवार इन चीजों पर 8 से 10 हजार रुपये हर महीने खर्च करता है तो उसे निश्चित रूप से 800 से 1,000 रुपये की बचत होगी. बिस्‍कुट चॉकलेट 15 फीसदी सस्‍ता हो गया है, जबकि नारियल पानी 5 से 6 रुपये प्रति लीटर सस्‍ता हुआ है. पढ़ाई-लिखाई और इलाज पर कितनी बचत स्‍टेशनरी के सामान जैसे नोटबुक, मैप, पेंसिल, क्रेयॉन्‍स और कटर आदि को भी 12 फीसदी से घटाकर शून्‍य या 5 फीसदी कर दिया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो जो स्‍कूल किट पहले 1,000 रुपये की आती थी, अब 850 रुपये में मिल जाएगी. इसका फायदा सिर्फ यूपी के ही 4.3 करोड़ स्‍कूली बच्‍चों को होगा. जीएसटी परिषद ने जरूरी दवाओं को भी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी में कर दिया है. रेयर डिजीज और कैंसर जैसी दवाओं पर जीएसटी को पूरी तरह खत्‍म कर दिया गया है. जांच किट और मेडिकल सप्‍लाइज को भी 5 फीसदी स्‍लैब में डाल दिया गया है. चश्‍मे को भी 18 से घटाकर 5 फीसदी में डाल दिया गया है. इसका मतलब है कि अब 1,000 रुपये की दवाओं पर 70 से 100 रुपये कम हो जाएंगे. मकान बनवाने पर कितना पैसा बचेगा सीमेंट पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जिसका फायदा गांव और शहर दोनों जगहों पर मकान बनवाने वालों को होगा. पहले जिस मकान को बनाने में 50 हजार की सीमेंट लगती थी, अब उस पर 5 हजार की सीधी बचत होगी. मार्बल, ग्रेनाइट, बांस और अन्‍य लकड़ी के सामान पर भी जीएसटी रेट कम हो गया है और ये सामान सस्‍ते हो जाएंगे. सीधे तौर पर देखा जाए तो 50 लाख रुपये के मकान पर 3 से 4 लाख रुपये की बचत होगी. इलेक्‍ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरण 32 इंच के टीवी, एसी, डिशवॉशर और मॉनिटर पर जीएसटी 28 से घटकर 18 फीसदी हो गया है. इसका मतलब है कि 40 हजार का टीवी अब 4 हजार रुपये सस्‍ता मिलेगा. इसी तरह, 35 हजार के एसी पर 3,500 रुपये की बचत होगी. 60 हजार रुपये सोलर वॉटर हीटर पर जीएसटी 5 फीसदी होने से अब 7 हजार की सीधी बचत हो जाएगी. इससे दिवाली में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सामानों की खरीदारी सस्‍ती पड़ेगी.

आज से महंगाई पर ब्रेक! ब्रेड, दूध और पनीर समेत 20 चीजों पर GST छूट

मुंबई  देश में GST 2.0 लागू हो गया है और आज नवरात्रि के पहले दिन 22 सितंबर से ऐसे तमाम सामानों के दाम घट गए हैं, जिन्हें देश का आम आदमी लगभग हर रोज खरीदता है. इनमें दूध, ब्रेड से लेकर मक्खन-पनीर तक शामिल हैं. जीएसटी सुधार लागू होने से पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बचत उत्सव की शुरुआत करार दिया था और कहा था कि इससे गरीब-मिडिल क्लास सभी के पैसे बचेंगे. त्योहारों से ऐन पहले सरकार का ये तोहफा राहत भरा है, क्योंकि अब डेली इस्‍तेमाल होने वाली चीजें सस्ती हो जाएंगी. आइए ऐसी ही 20 रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतों में बचत का कैलकुलेशन समझते हैं… देश में हर दिन सुबह से शाम तक लोग दूध, ब्रेड से लेकर आटा-दाल, सब्जियां तक की खरीदारी करते हैं. लेकिन आज से इनकी खरीद पर जेब में काफी पैसे बचेंगे, क्योंकि सरकार ने नए जीएसटी रिफॉर्म लागू कर दिए हैं और करीब 99% रोजमर्रा के सामानों के दाम घट गए हैं.  यूएचटी दूध  दूध, सब्‍जियों पर पहले भी जीएसटी रेट लागू नहीं था और अब भी नहीं लगाया गया है. लेकिन अल्ट्रा हाई टेंप्रेचर दूध यानी UHT Milk को जीरो जीएसटी में शामिल किया गया है, जिसपर अब तक 5% की दर से टैक्स लगता था. इसके बाद अमूल से लेकर मदर डेयरी तक ने इसकी कीमतें कम कर दी हैं, जो 22 सितंबर से लागू हो गई हैं. अब   1 लीटर UHT मिल्क (टोंड-ट्रेटा पैक) 77 रुपये के बजाय 75 रुपये में और 450 एमएल मिल्क पैक 33 रुपये की जगह 32 रुपये का मिलेगा.  पनीर दूध के साथ ही पनीर पर लगने वाला 12 फीसदी का जीएसटी भी अब खत्म हो गया है और ये जीरो जीएसटी स्लैब में शामिल हो गया है. इसपर बचत की बात करें, तो अगर आप 90 रुपये में 200 ग्राम पनीर का पैकेट खरीदते थे, तो अब आपको 10 रुपये कम देने होंगे.  मक्खन  रोजमर्रा में रसोई में इस्तेमाल होने वाले डेयरी प्रोडक्ट्स में मक्खन भी अहम है, जो सोमवार से सस्ता हो गया है. जीएसटी रेट कट लागू होने के बाद पहले जो मक्खन (500 ग्राम) 305 रुपये में मिलता था, वो अब 285 रुपये में मिलेगा और 100 ग्राम की मक्खन की टिकया 62 रुपये की जगह 58 रुपये में मिलेगी. घी घी को लिक्विड गोल्ड कहकर भी पुकारा जाता है और जीएसटी रेट कट का असर इसकी कीमतों पर भी दिखा है, क्योंकि सरकार ने इस पर जीएसटी 12% से कम करते हुए 5% कर दिया है. इसके बाद तमाम कंपनियों के घी के दाम घट गए हैं. अमूल का घी (1 लीटर कार्टन पैक) अब 650 रुपये के बजाय 610 रुपये में मिलेगा, तो मदर डेयरी का घी (1 लीटर कार्टन पैक) 675 रुपये की जगह 645 रुपये का हो गया है. पतंजलि गाय का घी 900 एमएल पैक 780 रुपये से कम होकर अब 731 रुपये का रह गया है.  आइसक्रीम  तमाम सामानों के साथ ही GST Rate Cut का फायदा आइसक्रीम पर भी मिलेगा. नए रेट्स लागू होने से पहले ही तमाम कंपनियों ने अपने आइसक्रीम प्रोडक्ट्स के दाम में कटौती का ऐलान कर दिया था. अमूल की नई रेट लिस्ट देखें, तो 22 सितंबर से 1 लीटर वनीला मैजिक कप 195 रुपये की जगह अब 180 रुपये का मिलेगा, तो वहीं शुगर फ्री शाही अंजीर आइसक्रीम का 125 एमएल कम 50 रुपये की जगह 45 रुपये का मिलेगी. इसके अलावा बटर स्कॉच.(125 एमएल), कुल्फी पंजाबी (60एमएल) में पांच रुपये की कटौती की गई है. मदर डेयरी की आइसक्री के प्राइस पर नजर डालें, तो जीएसटी कट का लाभ देते हुए कंपनी ने आइसकैंडी (45 ग्राम ), 50 एमएल वनीला कप, 30 एमएल चोकोबार की कीमत 10 रुपये से घटकर 9 रुपये रह गई.  ब्रेड ब्रेड का इस्तेमाल भी हर रोज घरों में होता है, फिर बात चाहे चाय के साथ ब्रेड की हो या सैंडविच के लिए, इसपर भी सरकार ने बड़ी राहत दी है. ब्रेड भी 5% जीएसटी स्लैब से सीधे शून्य जीएसटी वाले उत्पादों में शामिल हो गया है. यानी इस पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा. मतलब जो ब्रेड का पैकेट आप 20 रुपये में खरीदते थे, वो 1 रुपये कम यानी 19 रुपये में मिलेगा.  पिज्जा  आपके घर में बच्चे हैं, तो फिर वो पिज्जा खाने की जिद तो करते ही होंगे, रोज नहीं तो एक दो दिन छोड़कर आप दिलाते भी होंगे, तो बता दें सरकार ने इसपर भी टैक्स घटा दिया है. पिज्‍जा, ब्रेड पर जीएसटी को 5% से शून्‍य कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है. ठीक ब्रेड की तरह, ऐसे में अगर आप दुकान से 100 रुपये का पिज्जा खरीदते समय 5 रुपये का जीएसटी देते थे, तो अब ये नहीं लगेगा. मतलब ये 95 रुपये का मिलेगा.  पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, नूडल्स बच्चों के लिए सुबह की शुरुआत आज के समय में घरों में पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स के साथ होती है और नूडल्स भी खूब बनाए जाते हैं, अब इन फूड प्रोडक्ट्स पर भी राहत मिली है. 22 सितंबर से ये सभी चीजें भी सस्ती हो गई हैं. इन पर लगने वाले 12-18% की स्लैब को कम करते हुए इन्हें 5% में शामिल किया गया है. 100 रुपये के नूडल्स के पैकेट पर अब 18 या 12 रुपये की जगह 5 रुपये का टैक्स ही लगेगा.  बिस्कुट-नमकीन सरकार रोजमर्रा में यूज होने वाले सामानों पर जीएसटी घटाने पर विशेष तौर पर फोकस किया है. इनकी लिस्ट में रोज इस्तेमाल होने वाले नमकीन-बिस्कुट भी शामिल हैं, जिनपर अब तक 12 से 18 फीसदी तक का टैक्स लगता था, लेकिन अब इसे कम करते हुए 5 फीसदी कर दिया गया है. कैलकुलेशन समझें, तो 5 रुपये की नमकीन पर पहले 12% टैक्‍स के हिसाब से 60 पैसे GST लगता था, लेकिन अब सिर्फ 25 पैसे लगेगा. वहीं बिस्‍कुट 18% स्लैब में आता था और 5 रुपये के पैकेट पर 90 पैसे टैक्स लगता था, जो अब महज 25 पैसे लगेगा.  तेल-शैंपू और साबुन रोजमर्रा के सामानों की लिस्ट में तेल, शैंपू और साबुन जैसे सामान भी शामिल हैं. इन पर टैक्‍स को 18 फीसदी से कम करके 5% किया गया है. ऐसे … Read more