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हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, CGGST के 42 निरीक्षकों को वापस जाना होगा पुराने पद पर

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के राज्य कर (स्टेट GST) विभाग में लिपिक से वाणिज्यिक कर निरीक्षक बने 42 कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पदोन्नति रद्द करने के विभागीय आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद अब इन कर्मचारियों को वापस अपने मूल पद यानी लिपिक के रूप में ही काम करना होगा। दरअसल, मामला वर्ष 2021 और 2022 में हुई सीमित विभागीय भर्ती परीक्षाओं के जरिए लिपिकों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाने से जुड़ा है। विभाग ने कथित अनियमितताओं के चलते 42 कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द कर उन्हें मूल पद पर वापस भेजने का आदेश जारी किया था। कर्मचारियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन याचिका खारिज होने से उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सितंबर में विभाग ने रद्द की थी 42 कर्मचारियों की पदोन्नति राज्य कर विभाग ने आदेश जारी कर दोनों वर्षों की विभागीय परीक्षाओं के जरिए पदोन्नत हुए 42 कर्मचारियों की पदोन्नति निरस्त कर दी थी। यह कार्रवाई राज्यकर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। विभाग की जांच में भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई थी। इसके बाद पदोन्नति रद्द कर सभी संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल लिपिक पद पर वापस भेजने का फैसला लिया गया था। विभाग ने संभावित कानूनी चुनौती को देख हाईकोर्ट में कैविएट भी दाखिल की थी। भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया पर उठे थे सवाल जांच रिपोर्ट में वर्ष 2021 और 2022 की सीमित विभागीय भर्ती परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दोनों परीक्षाओं में परिणाम की सार्वजनिक सूची जारी किए बिना ही चयन सूची तैयार कर दी गई थी। आरक्षण के नियमों के पालन को लेकर भी आपत्तियां सामने आई थीं। जांच के दौरान चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में भी समानताएं मिलने की बात कही गई। कई अभ्यर्थियों के जवाब मॉडल आंसर से हूबहू मेल खाते पाए गए थे। डॉ. खूबचंद बघेल की जीवनी पर लिखे गए निबंध में भी कई कॉपियों के जवाब एक जैसे होने का दावा किया गया था। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता और पात्रता को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोप था कि निर्धारित कट-ऑफ तारीख तक कुछ अभ्यर्थी स्नातक नहीं थे, लेकिन उनके लिए पात्रता की तारीख में बदलाव किया गया। जांच में ऐसे मामलों का भी जिक्र था, जिनमें भृत्य के पद पर नियुक्त कर्मचारी कम समय में लिपिक और फिर वाणिज्यिक कर निरीक्षक बन गए थे। प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता पर भी सवाल भर्ती प्रक्रिया में परीक्षा की गोपनीयता को लेकर भी आपत्तियां सामने आई थीं। जांच में चयन समिति के सदस्यों के हवाले से बताया गया था कि तत्कालीन आयुक्त समीर विश्नोई ने परीक्षा हॉल में प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं बिना सील किए पहुंचाई थीं। वहीं, सूचना के अधिकार के तहत परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं मांगने वाले आवेदकों के मामलों में भी विवाद हुआ था। आरोप था कि RTI आवेदकों को जानकारी देने की प्रक्रिया प्रभावित करने के लिए तत्कालीन जनसूचना अधिकारियों को हटाकर चयन समिति के सदस्यों को ही यह जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। इनमें तत्कालीन अपर आयुक्त कल्पना तिवारी, टीआर धुर्वे और रौशन सिंह के नाम शामिल थे। 2021 बैच के इन 21 कर्मचारियों की पदोन्नति हुई थी रद्द आकाश त्रिपाठी, दिव्य प्रकाश वर्मा, भरत लाल साहू, ओम नारायण बघेल, संतु राम सलाम, नीरज श्रीवास्तव, अमित हुमने, भूषण कुर्रे, तोमन लाल भुआर्या, यज्ञेश दीवान, पुष्पेंद्र करश, विधान रंजन कुल्लू, युगल किशोर साहू, मलिक राम बांधे, लाल साय राम, गो शिवेंद्र टांडे, सत्य नारायण नेताम, मोनिका दीवान, जितेंद्र नेताम, दुरूपरसाय मांझी और अनिल कुमार जांगड़े। 2022 बैच के 21 कर्मचारी भी प्रभावित सुरेश कुमार गुप्ता, प्रभात चन्द्र तिवारी, अजय कौशिक, हितेश कुमार दुबे, दीपा उधवानी, रितु सोनकर, दीपेश कुमार साहू, गायत्री सिन्हा, गजेंद्र कुमार तिवारी, ओम प्रकाश साहू, मनीष चेलक, ताम्रध्वज साहू, नंदनी साहू, दीपक तुरियाकर, अमर सिंह कंवर, उदयराम ध्रुव, रमेश कुमार धृतलहरे, दीप्ति मरकाम, चंद्रकांत ठाकुर, दीपक कुजूर और राकेश कुमार मिंज। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब क्या होगा? अमित हुमने की याचिका खारिज होने के बाद 42 कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द करने का विभागीय आदेश बरकरार है। ऐसे में विभाग को अब संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल लिपिक पद पर वापस पदस्थ करने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।

मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री की पुरानी मांग पूरी, GST काउंसिल के फैसले का AiMeD ने किया स्वागत

नई दिल्ली नई दिल्ली में 8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापार को आसान बनाने, टैक्स रिफंड में तेजी लाने और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई बड़ी सिफारिशें की गई थीं. खासकर मेडिकल और फार्मा सेक्टर के लिए इस बैठक में बड़े फैसले लिए गए थे।  मेडिकल इक्विपमेंट और फार्मा कंपनियों (जैसे AiMeD) के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि काउंसिल ने कैपिटल गुड्स (जैसे बड़ी मशीनरी/प्लांट) और इनपुट सर्विसेज पर फंसी हुई इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रिफंड को मंजूरी दे दी है. पहले मशीनरी या बाहरी सेवाओं पर दिया गया GST ब्लॉक हो जाता था. अब वह रिफंड के रूप में वापस मिल सकेगा, जिससे कंपनियों का कैश फ्लो मजबूत होगा और उपकरण निर्माताओं की लागत घटेगी।  नया नियम लागू होने के बाद इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट के तहत दावों पर रिस्क मूल्यांकन के आधार पर 90% प्रोविजनल रिफंड बिना किसी अधिकारी के हस्तक्षेप के सिस्टम द्वारा ऑटोमैटिक रूप से स्वीकृत किया जाएगा।  मेडिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के संगठन 'एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री' (AiMeD) ने GST काउंसिल के इस फैसले पर खुशी जाहिर की है. सरकार ने यह सिफारिश की है कि अगर किसी सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (यानी कच्चे माल पर टैक्स ज्यादा और तैयार माल पर कम) की समस्या है, तो कंपनियों को पूंजीगत सामान (मशीनों) और बाहरी सेवाओं पर दिए गए टैक्स का रिफंड मिलना चाहिए।  पुराने नियम से क्या दिक्कत थी? दरअसल, यह फैसला उद्योग जगत की एक बहुत पुरानी और बड़ी मांग को पूरा करता है. इससे भारत में फैक्ट्रियां लगाने और बिजनेस करने का माहौल बहुत आसान और बेहतर हो जाएगा. पहले के नियमों के तहत जब कंपनियां कोई नया प्लांट लगाने के लिए बड़ी मशीनें खरीदती थीं या बाहर से प्रोफेशनल सेवाएं (जैसे कंसल्टेंसी, मार्केटिंग या सुरक्षा वगैरह) लेती थीं तो उस पर जो GST चुकाया जाता था, वह फंस जाता था।  मान लीजिए कोई कंपनी नया प्लांट लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करती है, तो उस पर प्लांट और मशीनरी के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये का जीएसटी देना पड़ता था. पहले इस 18 करोड़ रुपये के टैक्स के इस्तेमाल या रिफंड का कोई साफ रास्ता नहीं होता था. यह पैसा पूरी तरह ब्लॉक हो जाता था, जिससे प्रोजेक्ट की लागत बहुत बढ़ जाती थी और भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट में दूसरी कंपनियों से पिछड़ने लगती थीं।  उद्योग जगत ने किया फैसले का स्वागत  इस बारे में AiMeD के फोरम कोऑर्डिनेटर और हिंदुस्तान सिरिंज एंड मेडिकल डिवाइसेज लिमिटेड (HMD) के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव नाथ ने कहा, 'हम सरकार का दिल से धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने पिछले कई सालों से उठाई जा रही हमारी बातों और सुझावों पर सकारात्मक ध्यान दिया है. यह सुधार हमारे टैक्स सिस्टम की एक बड़ी गलती को ठीक करता है. पहले घरेलू निर्माताओं को मशीनें लगाने और जरूरी बिजनेस सेवाओं पर भारी टैक्स का बोझ उठाना पड़ता था।  राजीव नाथ की मानें तो अब सरकार ने इस फंसे हुए टैक्स को वापस पाने का रास्ता खोल दिया है और कंपनियों के पास कैश फ्लो बेहतर होगा. इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को दुनिया भर में मुकाबला करने लायक बनाने और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने में बहुत मदद मिलेगी।  इससे क्या-क्या फायदे होंगे? AiMeD को पूरा भरोसा है कि इस नए कदम से देश को कई बड़े लाभ मिलेंगे. कंपनियों के पास पैसा सुरक्षित रहने से वे देश में और अधिक नए प्लांट लगाने के लिए आगे आएंगी. उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ेगी, जिससे देश में ही मेडिकल उपकरणों का उत्पादन और मजबूत होगा. प्रधानमंत्री का 'मेक इन इंडिया' का सपना और मजबूत होगा तथा भारत दुनिया का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकेगा. अब पूरी इंडस्ट्री और AiMeD इस संबंध में सरकार की तरफ से आधिकारिक नोटिफिकेशन आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   एक्सपायरी दवाओं के राइट-ऑफ पर ITC की छूट इसके अलावा GST काउंसिल की तरह से फॉर्मा सेक्टर को एक और बड़ी राहत दी गई है, जिन दवाओं या स्वास्थ्य उत्पादों की एक्सपायरी खत्म हो जाती है और जिन्हें कानूनन नष्ट करना पड़ता है, उनके राइट-ऑफ पर ITC लाभ की स्पष्टता से फार्मा सेक्टर को फायदा मिलेगा। 

गुटखा फैक्ट्री में GST इंटेलिजेंस की रेड, 60 करोड़ की टैक्स चोरी उजागर

 भोपाल  गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) इंटेलिजेंस विभाग ने भोपाल में तंबाकू और गुटखा बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारकर 60 करोड़ रुपये से अधिक की कथित टैक्स चोरी का पता लगाया है। शहर के नवाबगंज इलाके में स्थित यह फैक्ट्री कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से चलाई जा रही थी और इसके परिसर में मशीनें छिपाई गई थीं। यहां गुरु ब्रांड नाम से तंबाकू उत्पाद बनाए जा रहे थे। छापेमारी के दौरान जीएसटी इंटेलिजेंस के अधिकारियों को बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के साक्ष्य मिले। विभाग वित्तीय अनियमितताओं की पूरी स्थिति का पता लगाकर रहा है। इसके लिए जांच जारी है। मामले में फैक्ट्री संचालक सुरेश सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। विभागीय अधिकारी यह भी पता कर रहे हैं कि इस फैक्ट्री के संचालन में और किन-किन लोगों की भूमिका है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती पर बड़ा एक्शन, 42 नियुक्तियां रद्द; पुराने पद पर लौटेंगे कर्मचारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के GST विभाग में वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनने वाले 42 कर्मचारियों को अब अपने पुराने पद पर लौटना होगा। इन कर्मचारियों को 2021 और 2022 में हुई सीमित भर्ती परीक्षा के जरिए लिपिक पद से वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाया गया था। बाद में इस भर्ती परीक्षा को लेकर शिकायतें सामने आईं। इसके बाद जांच कराई गई। जांच में परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाली कई गड़बड़ियां मिलीं। चयनित कर्मचारियों की कॉपियों में एक जैसे जवाब पाए गए। कुछ मामलों में दोबारा जांच के बाद अंक बढ़ने की बात भी सामने आई। वहीं, परीक्षा में कौन-कौन कर्मचारी शामिल हुए थे, इसका उपस्थिति रिकॉर्ड भी नहीं मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य कर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने परीक्षा और उसके आधार पर हुए चयन को रद्द कर दिया। इसके साथ ही 42 कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक पद से हटाकर उनके मूल लिपिक पद पर वापस भेजने का आदेश जारी किया है। जांच में मिलीं कई गड़बड़ियां जांच समिति ने पाया कि कई चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब लिखे गए थे। कुछ जवाब मॉडल आंसर से भी काफी हद तक मिलते थे। GST की धाराओं और नियमों से जुड़े सवालों के जवाब में भी ऐसी समानता पाई गई। गणित के जवाबों पर भी उठे सवाल बताया जा रहा है कि गणित के कुछ सवालों में बिना रफ वर्क किए सीधे उत्तर लिखे मिले। डॉ. खूबचंद बघेल की जीवनी पर पूछे गए निबंध में भी कुछ चयनित कैंडिडेट्स के जवाब एक जैसे पाए जाने की बात सामने आई। जांच के दौरान परीक्षा केंद्र की उपस्थिति पंजी ही नहीं मिली। ऐसे में यह साबित करने वाला मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था कि परीक्षा में कौन-कौन अभ्यर्थी शामिल हुए थे। किसके कितने नंबर आए, इसका भी पूरा रिकॉर्ड नहीं जांच में पाया गया कि परीक्षा की समेकित अंक तालिका तैयार नहीं की गई थी। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया कि किस अभ्यर्थी को कितने अंक मिले और मेरिट सूची किस आधार पर तैयार हुई। उत्तर-पुस्तिकाओं में ऐसी कोडिंग व्यवस्था नहीं थी, जिससे कॉपी जांचते समय अभ्यर्थी की पहचान छिपी रहे। यानी कॉपी जांचने वाले को यह पता चल सकता था कि उत्तर-पुस्तिका किस अभ्यर्थी की है। नंबर दोबारा क्यों बढ़ाए गए? जांच समिति के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया गया। यानी कॉपी एक बार जांचने के बाद दोबारा जांची गई। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों के अंक पुनर्मूल्यांकन के बाद बढ़े। इसके बाद वे चयन सूची में शामिल हुए। जांच के अनुसार, पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में चयन समिति से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। आरक्षण का नियम भी नहीं अपनाया गया जांच में पाया गया कि परीक्षा से पहले पदों का आरक्षण रोस्टर के हिसाब से वर्गवार बंटवारा नहीं किया गया था। किस वर्ग के लिए कितने पद हैं, इसका निर्धारण तय प्रक्रिया के अनुसार नहीं हुआ। विभाग के मुताबिक, इससे पात्र कर्मचारियों को समान अवसर देने की व्यवस्था प्रभावित हुई। 2021 और 2022 की परीक्षा में इस्तेमाल हुई उत्तर-पुस्तिकाओं का पूरा रिकॉर्ड भी जांच में नहीं मिला। जांच समिति ने अभ्यर्थियों की कॉपियों के साथ परीक्षा सामग्री का रिकॉर्ड भी देखा। इसमें खरीदी गई, इस्तेमाल हुई और बची हुई उत्तर-पुस्तिकाओं की संख्या में अंतर पाया गया। अब 42 कर्मचारियों का क्या होगा? इन 42 कर्मचारियों को अब वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नहीं रखा जाएगा। उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेजा जाएगा। यानी जिस पद और जगह से वे कर निरीक्षक बने थे, उन्हें उसी मूल पद और पदस्थापना पर वापस भेजा जाएगा। चयन समिति में ये अधिकारी थे सीमित भर्ती परीक्षा की चयन समिति में तत्कालीन अपर आयुक्त कल्पना तिवारी, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त और वर्तमान अपर आयुक्त टीआर धुर्वे तथा सहायक आयुक्त रौशन सिंह शामिल थे। भर्ती के समय विभाग के आयुक्त समीर विश्नोई थे।  

ज्वैलरी शॉप पर GST विभाग की छापेमारी, कंप्यूटर डेटा से बैंक खातों तक की जांच

जालंधर  जालंधर में सराफा बाजार स्थित हनुमान चौक पर जीएसटी विभाग ने आभूषण की दुकान पर छापेमारी की। टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दुकान की बिक्री, खरीद, कंप्यूटर डेटा और बैंक खातों से जुड़े अहम दस्तावेजों की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। वी.के. ज्वैलर्स पर सोमवार को की गई इस कार्रवाई में क्या खामियां मिली हैं या कितनी टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। रेड करीब दो घंटे तक चली। जांच अधिकारी दस्तावेजों और खाते के आंकड़ों का मिलान कर रहे हैं, जिसके बाद ही पूरी स्थिति साफ हो पाएगी। ग्राहकों और व्यापारियों के लिए जरूरी नियम टैक्स चोरी पर लगाम लगाने और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जीएसटी विभाग ने आम ग्राहकों से विशेष अपील की है। विभाग के अनुसार, ग्राहक जब भी सोने-चांदी या हीरे के आभूषणों की खरीदारी करें तो दुकानदार से हमेशा पक्का जीएसटी इनवॉइस अनिवार्य रूप से लें। पक्का बिल टैक्स चोरी रोकने में मदद करता है पक्का बिल न केवल टैक्स चोरी रोकने में मदद करता है, बल्कि आभूषणों की शुद्धता और भविष्य में री-सेल या एक्सचेंज के समय ग्राहक के कानूनी अधिकारों की रक्षा भी करता है। व्यापारियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने सभी लेन-देन का सही रिकॉर्ड रखें और नियमानुसार बिल जारी करें।  

GST Collection June: सरकार के खजाने में आए ₹1.94 लाख करोड़, टैक्स संग्रह में शानदार बढ़ोतरी

नई दिल्ली  सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने के जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी पिछले 13 महीनों में सबसे तेज है।  कहां से सरकार को हुई कितनी कमाई?  कमाई में सबसे ज्यादा उछाल आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स से आया है, जो 34.6% बढ़कर 60,038 करोड़ हो गया, जो पिछले साल जून में 44,608 करोड़ रुपये था. जून में घरेलू व्यापार से होने वाली वसूली सालाना आधार पर 6.5% बढ़कर 1,34,774 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,26,505 करोड़ रुपये था. जून में नेट GST रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,45,984 करोड़ रुपये था. वहीं, जून में टोटल रिफंड 29.1% बढ़कर 32,436 करोड़ हो गए।  GST रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी आंकड़ों के मुताबिक जून में GST रिफंड में भी 29.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार का GST रिफंड ₹32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इस अवधि में ₹25,121 करोड़ था। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी का कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में ₹5,82,542 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रह गया है। सबसे अधिक GST कलेक्शन वाले राज्य जून में जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़), गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का नाम शामिल था। बता दें कि 9 साल पहले 1 जुलाई, 2017 को GST को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया। घरेलू खपत और विदेशी व्यापार की ताकत टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जालान ने कहा है कि जून 2026 में भारत का GST रेवेन्यू घरेलू खपत की मजबूती और विदेशी व्यापार की ताकत, दोनों को दिखाता है। नेट GST कलेक्शन में 11.2% की बढ़ोतरी हुई। GST 2.0 में दरों में कटौती और स्टॉक पर जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लगातार असर (जिसके 9-12 महीने तक रहने की उम्मीद है) के बावजूद घरेलू रेवेन्यू में 2.6% की वृद्धि हुई। यह दिखाता है कि स्ट्रक्चरल बदलावों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर ITC जमा होने जैसी चुनौतियों के बावजूद खपत मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि जून में इंपोर्ट रेवेन्यू में 34.6% और साल-दर-साल आधार पर 26.2% की भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैपिटल गुड्स और रॉ मटीरियल की मजबूत मांग को दिखाता है, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस तेजी को GSTAT अपीलों के लिए किए गए प्री-डिपॉजिट और अगस्त 2026 की समय-सीमा (टाइम बार) से पहले FY 2020-21 के लिए सेक्शन 74 के तहत SCN जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों से भी सहारा मिला। राज्यवार किसका कैसा रहा प्रदर्शन?     महाराष्ट्र 30,714 करोड़ के जीएसटी कलेक्शन के साथ टॉप पर है.     कर्नाटक और गुजरात ने भी क्रमशः ₹12,937 करोड़ और 11,743 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया है।      बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. यहां का GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़कर 9,165 करोड़ तक पहुंच गया।      तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रमशः 2%, 5% और 5% की गिरावट दर्ज की गई।  कुल मिलाकर इस साल जीएसटी में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन विदेशी सामानों का आयात रहा. इसके अलावा, देश में वस्तुओं व सामानों की मजबूत मांग के कारण भी जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया है. ऊपर से डिजिटल इकोसिस्टम और टैक्स प्रशासन में बेहतरी के लिए भी जीएसटी कलेक्शन मजबूत हुआ है। 

राजनांदगांव में 76 करोड़ का GST घोटाला! फर्जी बिल ट्रेडिंग का भंडाफोड़, संचालक गिरफ्तार

राजनांदगांव में 76 करोड़ रुपये की फर्जी बिल ट्रेडिंग का खुलासा, संचालक गिरफ्तार राज्य कर विभाग की बड़ी कार्रवाई, 8.22 करोड़ रुपये की संदिग्ध आईटीसी का मामला उजागर रायपुर राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी), छत्तीसगढ़ द्वारा कर चोरी एवं फर्जी बिलिंग के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजनांदगांव स्थित मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार किया गया है। विभागीय जांच में सामने आया है कि फर्म द्वारा पिछले लगभग छह माह के दौरान करीब 76 करोड़ रुपये के लेन-देन केवल कागजी रूप से दर्शाए गए। उपलब्ध अभिलेखों, जीएसटी रिटर्न तथा अन्य दस्तावेजों के विश्लेषण में 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) संदिग्ध पाई गई, जिसके माध्यम से शासन को राजस्व हानि पहुंचाने का प्रयास किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि फर्म ने पश्चिम बंगाल स्थित संदिग्ध फर्मों से आयरन एवं स्टील की वास्तविक खरीदी किए बिना करोड़ों रुपये के खरीदी बिल प्राप्त किए थे। इन बिलों के आधार पर फर्जी आईटीसी का लाभ लिया गया तथा आगे अन्य करदाताओं को भी इसका लाभ हस्तांतरित किया गया। जांच के दौरान अधिकांश आपूर्तिकर्ता फर्मों के जीएसटी पंजीयन निरस्त पाए गए तथा उनके द्वारा वास्तविक व्यापार किए जाने के कोई विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुए। विभाग के अनुसार यह पूरा लेन-देन केवल पेपर ट्रेडिंग (कागजी बिलिंग) एवं बोगस आईटीसी नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। जांच में यह भी सामने आया कि जिन फर्मों से खरीदी दर्शाई गई थी, उनमें से कई केवल फर्जी बिल जारी करने एवं अवैध आईटीसी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही थीं। उपलब्ध तथ्यों से संकेत मिलता है कि माल का वास्तविक आवागमन नहीं हुआ और केवल बिलों के माध्यम से कर लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था बनाई गई थी। प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने के बाद राज्य कर विभाग ने आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में कई अन्य व्यक्तियों एवं फर्मों के भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। विभाग बैंक खातों, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेजों तथा संबंधित व्यापारिक इकाइयों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है। राज्य कर विभाग का मानना है कि आगे की जांच में इस फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा तथा फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी जैसे अवैध कृत्यों पर प्रभावी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

पंजाब की टैक्स वसूली में बड़ा उछाल, मई में GST कलेक्शन पहुंचा 2400 करोड़ के पार

 चंडीगढ  पंजाब ने जीएसटी संग्रह के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ते हुए मई 2026 में 14.59 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वित्त, आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को बताया कि राज्य का सकल जीएसटी संग्रह बढ़कर 2,400.52 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा 2,094.81 करोड़ रुपये था। इस प्रकार, एक वर्ष में जीएसटी संग्रह में 305.71 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चीमा ने कहा कि राज्य की यह उपलब्धि आर्थिक गतिविधियों में तेजी, कर अनुपालन में सुधार और कराधान विभाग की सख्त प्रवर्तन कार्रवाई का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जहां देशभर में सकल जीएसटी राजस्व वृद्धि करीब 3.2 प्रतिशत रही, वहीं पंजाब ने 14.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य की नकद संग्रह वृद्धि 6.57 प्रतिशत रही, जबकि कुल जीएसटी संग्रह में कहीं अधिक बढ़ोतरी हुई है, जो मजबूत राजस्व आधार और बेहतर कर प्रशासन का संकेत है। वित्त मंत्री ने बताया कि कर चोरी रोकने के लिए गठित स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट्स (एसआईपीयू) ने मई महीने में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 182.69 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और 178.76 करोड़ रुपये की वसूली की। यह सफलता डेटा एनालिटिक्स, खुफिया सूचनाओं, सत्यापन अभियानों और फील्ड स्तर पर चलाए गए विशेष ऑपरेशनों के कारण मिली है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार सार्वजनिक राजस्व की सुरक्षा और ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फर्जी बिलिंग और संगठित कर चोरी के नेटवर्क के खिलाफ सरकार की जीरो टालरेंस नीति आगे भी जारी रहेगी। 85 करोड़ के फर्जी बिलिंग रैकेट पकड़ा चीमा ने बताया कि कर चोरी के खिलाफ अभियान के दौरान विभाग ने 85.4 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग रैकेट का भी पर्दाफाश किया है। इस मामले में लुधियाना स्थित एक फर्म के निदेशक को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने फर्जी लेन-देन के जरिए 15.56 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल किया था। जांच में सामने आया कि कर चोरी के लिए कागजों पर मौजूद फर्जी फर्मों, नकली बिलों, फर्जी डेबिट नोट और मनगढ़ंत परिवहन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस धोखाधड़ी से जुड़े लाभार्थियों से करीब तीन करोड़ रुपये की वसूली भी की गई।

भोपाल में जीएसटी नियमों में बदलाव: मालवाहक वाहन को अब सिर्फ नंबर या नाम पर नहीं रोका जाएगा, जानकारी देना जरूरी

भोपाल मध्यप्रदेश में अब व्यापारियों के माल से भरे वाहनों को मनमाने ढंग से रोकना आसान नहीं होगा। कमर्शियल टैक्स विभाग ने नया सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से उसी विभाग के पास रहेगा।मध्यप्रदेश में जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की है। अब ऑडिट के दौरान अधिकारी बार-बार डॉक्यूमेंट नहीं मांगेंगे। एक बार में ही पूरी सूची देंगे। इसके अलावा व्यापारियों को जवाब देने के लिए 29 दिन का समय मिलेगा। जानकारी न देने पर लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के मुताबिक अधिकारी व्यापारियों को पहले 15 दिन का समय देंगे। इसके बाद सात-सात दिन के दो रिमाइंडर भेजे जाएंगे। तय समय में जानकारी नहीं दी गई तो राज्य और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत 10-10 हजार रुपए, यानी कुल 20 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। विभाग का कहना है कि समय पर जानकारी न मिलने से राजस्व संग्रह और ऑडिट प्रक्रिया पर असर पड़ता है। गलत जानकारी पर लाइसेंस रद्द 01 मई 2026 से विभाग उन व्यापारियों की जांच शुरू करेगा जो लंबे समय से एक जैसा टर्नओवर दिखा रहे हैं। एक करोड़ 25 लाख से एक करोड़ 50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले माल व्यापारी और 35 से 50 लाख रुपए के सर्विस प्रोवाइडर खास ध्यान में रहेंगे। गलत जानकारी मिली तो उनका कम्पोजीशन लाइसेंस रद्द कर कार्रवाई की जाएगी। इनफार्मर पर भी सख्ती नई व्यवस्था में सूचना देने वाले (इनफार्मर) की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि जांच में सूचना गलत पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा सकता है। इससे विभाग को उम्मीद है कि झूठी या अपुष्ट सूचनाओं में कमी आएगी। कारोबारियों को राहत अब टैक्स चोरी की सूचना पर छापा या जब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित सर्किल प्रभारी को वेब पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। व्यापारियों को दी सलाह कर सलाहकार पलाश खुरपिया का कहना है कि इस सर्कुलर से ऑडिट प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। उन्होंने व्यापारियों को सलाह दी है कि वे तय समय में जानकारी दें।

अप्रैल में GST कलेक्शन 2.43 लाख करोड़ पर पहुंचा, अब तक का सबसे बड़ा उछाल

नई दिल्ली  ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी इजाफा हुआ है। इससे भारत में आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है। देश में अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। नए वित्त वर्ष के पहले महीने जीएसटी कलेक्शन में भारी उछाल इस बात का संकेत है कि देश की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है। अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में पिछले साल के मुकाबले 8.7 फीसदी की तेजी आई है। इससे पहले एक महीने में सबसे अधिक जीएसटी कलेक्शन का रेकॉर्ड पिछले साल अप्रैल में बना था। उस महीने यह 2.37 लाख करोड़ रहा था। इस बार नेट जीएसटी कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल की तुलना में 7.3 फीसदी अधिक है। अप्रैल में टोटल रिफंड भी 19.3 फीसदी बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये रहा। इस तरह नेट जीएसटी रेवेन्यू 2,10,909 करोड़ रुपये रहा। इसमें इम्पोर्ट लिंक्ड रेवेन्यू की मजबूत भूमिका रही। रेकॉर्ड पर जीएसटी कलेक्शन     अप्रैल में GST कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा     यह कलेक्शन पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है     पिछले साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ₹2.37 लाख करोड़ रहा था     नेट जीएसटी कलेक्शन भी 7.3% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा     महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे आयात से होने वाली कमाई में क्या रही खास बात? अप्रैल के जीएसटी कलेक्शन में एक खास बात आयात से जुड़ी जीएसटी रेवेन्यू के दबदबे का कायम रहना रहा। आयात पर आईजीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर लगभग 26% तो नेट कस्टम जीएसटी रेवेन्यू 42.9% की रफ्तार से बढ़ा, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद कारोबार की मजबूती को दिखा रहा है। डेलाइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर एमएस मणि के मुताबिक इससे आयात में तेजी का पता चलता है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि कस्टम कलेक्शंस के आंकड़े नहीं होने के चलते इस तेज उछाल के कारणों का सटीक पता लगाना मुश्किल है। घरेलू खपत स्थिर लेकिन ग्रोथ धीमी आयात ने ओवरऑस ग्रोथ को तगड़ा सपोर्ट मिला लेकिन घरेलू जीएसटी कलेक्शन इसकी तुलना में सुस्त रही। ग्रास डोमेस्टिक रेवेन्यू अप्रैल महीने में सालाना आधार पर 4.3% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा जिससे सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी खपत में स्थिर रुझान का संकेत मिला है। एमएस मणि का कहना है कि दरों में तेज कटौती के बावजूद घरेलू खपत पर जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना खपत में अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है। हालांकि एक अहम बात ये है कि यह ग्रोथ सभी राज्यों में एक जैसी नहीं रही। कुछ बड़ी मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमिंग स्टेट्स में लो-सिंगल-डिजिट ग्रोथ रही जैसे कि गुजरात में 3% और महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में करीब 5% की ग्रोथ रही। ग्रास कलेक्शन में तेज उछाल लेकिन नेट रेवेन्यू की रफ्तार सुस्त मजबूत ग्रास के बावजूद नेट जीएसटी रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रही और यह सालाना आधार पर 7.3% बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंचा। इसकी मुख्य वजह रिफंड की अधिक स्पीड रही। अप्रैल में सालाना आधार पर टोटल रिफंड 19.3% की रफ्तार से बढ़ा तो घरेलू रिफंड 54% से अधिक बढ़ गया। टैक्स कनेक्ट एडवायजरी सर्विसेज एलएलपी के विवेक जालान का कहना है कि नेट डोमेस्टिक कलेक्शंस में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि रिफंड में तेज बढ़ोतरी हुई। टॉप 5 राज्य अप्रैल में ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8 फीसदी उछलकर 57,580 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू 4.3 फीसदी तेजी के साथ 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। कस्टम से नेट रेवेन्यू यानी आयात पर जीएसटी में 42.9 फीसदी तेजी आई जबकि नेट डोमेस्टिक रेवेन्यू में केवल 0.3 फीसदी तेजी रही। इससे साफ है कि अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में तेजी में एक्सटरनल ट्रेड की अहम भूमिका रही। जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (13,793 करोड़ रुपये), कर्नाटक (5,829 करोड़ रुपये), गुजरात (5,455 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (4,724 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (4,399 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष (2025) में यह 20.55 लाख करोड़ रुपये था। नेट जीएसटी कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.1% अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत देता है।