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GST Collection June: सरकार के खजाने में आए ₹1.94 लाख करोड़, टैक्स संग्रह में शानदार बढ़ोतरी

नई दिल्ली  सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने के जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी पिछले 13 महीनों में सबसे तेज है।  कहां से सरकार को हुई कितनी कमाई?  कमाई में सबसे ज्यादा उछाल आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स से आया है, जो 34.6% बढ़कर 60,038 करोड़ हो गया, जो पिछले साल जून में 44,608 करोड़ रुपये था. जून में घरेलू व्यापार से होने वाली वसूली सालाना आधार पर 6.5% बढ़कर 1,34,774 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,26,505 करोड़ रुपये था. जून में नेट GST रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,45,984 करोड़ रुपये था. वहीं, जून में टोटल रिफंड 29.1% बढ़कर 32,436 करोड़ हो गए।  GST रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी आंकड़ों के मुताबिक जून में GST रिफंड में भी 29.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार का GST रिफंड ₹32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इस अवधि में ₹25,121 करोड़ था। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी का कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में ₹5,82,542 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रह गया है। सबसे अधिक GST कलेक्शन वाले राज्य जून में जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़), गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का नाम शामिल था। बता दें कि 9 साल पहले 1 जुलाई, 2017 को GST को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया। घरेलू खपत और विदेशी व्यापार की ताकत टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जालान ने कहा है कि जून 2026 में भारत का GST रेवेन्यू घरेलू खपत की मजबूती और विदेशी व्यापार की ताकत, दोनों को दिखाता है। नेट GST कलेक्शन में 11.2% की बढ़ोतरी हुई। GST 2.0 में दरों में कटौती और स्टॉक पर जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लगातार असर (जिसके 9-12 महीने तक रहने की उम्मीद है) के बावजूद घरेलू रेवेन्यू में 2.6% की वृद्धि हुई। यह दिखाता है कि स्ट्रक्चरल बदलावों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर ITC जमा होने जैसी चुनौतियों के बावजूद खपत मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि जून में इंपोर्ट रेवेन्यू में 34.6% और साल-दर-साल आधार पर 26.2% की भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैपिटल गुड्स और रॉ मटीरियल की मजबूत मांग को दिखाता है, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस तेजी को GSTAT अपीलों के लिए किए गए प्री-डिपॉजिट और अगस्त 2026 की समय-सीमा (टाइम बार) से पहले FY 2020-21 के लिए सेक्शन 74 के तहत SCN जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों से भी सहारा मिला। राज्यवार किसका कैसा रहा प्रदर्शन?     महाराष्ट्र 30,714 करोड़ के जीएसटी कलेक्शन के साथ टॉप पर है.     कर्नाटक और गुजरात ने भी क्रमशः ₹12,937 करोड़ और 11,743 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया है।      बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. यहां का GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़कर 9,165 करोड़ तक पहुंच गया।      तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रमशः 2%, 5% और 5% की गिरावट दर्ज की गई।  कुल मिलाकर इस साल जीएसटी में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन विदेशी सामानों का आयात रहा. इसके अलावा, देश में वस्तुओं व सामानों की मजबूत मांग के कारण भी जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया है. ऊपर से डिजिटल इकोसिस्टम और टैक्स प्रशासन में बेहतरी के लिए भी जीएसटी कलेक्शन मजबूत हुआ है। 

राजनांदगांव में 76 करोड़ का GST घोटाला! फर्जी बिल ट्रेडिंग का भंडाफोड़, संचालक गिरफ्तार

राजनांदगांव में 76 करोड़ रुपये की फर्जी बिल ट्रेडिंग का खुलासा, संचालक गिरफ्तार राज्य कर विभाग की बड़ी कार्रवाई, 8.22 करोड़ रुपये की संदिग्ध आईटीसी का मामला उजागर रायपुर राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी), छत्तीसगढ़ द्वारा कर चोरी एवं फर्जी बिलिंग के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजनांदगांव स्थित मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार किया गया है। विभागीय जांच में सामने आया है कि फर्म द्वारा पिछले लगभग छह माह के दौरान करीब 76 करोड़ रुपये के लेन-देन केवल कागजी रूप से दर्शाए गए। उपलब्ध अभिलेखों, जीएसटी रिटर्न तथा अन्य दस्तावेजों के विश्लेषण में 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) संदिग्ध पाई गई, जिसके माध्यम से शासन को राजस्व हानि पहुंचाने का प्रयास किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि फर्म ने पश्चिम बंगाल स्थित संदिग्ध फर्मों से आयरन एवं स्टील की वास्तविक खरीदी किए बिना करोड़ों रुपये के खरीदी बिल प्राप्त किए थे। इन बिलों के आधार पर फर्जी आईटीसी का लाभ लिया गया तथा आगे अन्य करदाताओं को भी इसका लाभ हस्तांतरित किया गया। जांच के दौरान अधिकांश आपूर्तिकर्ता फर्मों के जीएसटी पंजीयन निरस्त पाए गए तथा उनके द्वारा वास्तविक व्यापार किए जाने के कोई विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुए। विभाग के अनुसार यह पूरा लेन-देन केवल पेपर ट्रेडिंग (कागजी बिलिंग) एवं बोगस आईटीसी नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। जांच में यह भी सामने आया कि जिन फर्मों से खरीदी दर्शाई गई थी, उनमें से कई केवल फर्जी बिल जारी करने एवं अवैध आईटीसी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही थीं। उपलब्ध तथ्यों से संकेत मिलता है कि माल का वास्तविक आवागमन नहीं हुआ और केवल बिलों के माध्यम से कर लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था बनाई गई थी। प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने के बाद राज्य कर विभाग ने आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में कई अन्य व्यक्तियों एवं फर्मों के भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। विभाग बैंक खातों, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेजों तथा संबंधित व्यापारिक इकाइयों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है। राज्य कर विभाग का मानना है कि आगे की जांच में इस फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा तथा फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी जैसे अवैध कृत्यों पर प्रभावी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

पंजाब की टैक्स वसूली में बड़ा उछाल, मई में GST कलेक्शन पहुंचा 2400 करोड़ के पार

 चंडीगढ  पंजाब ने जीएसटी संग्रह के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ते हुए मई 2026 में 14.59 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वित्त, आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को बताया कि राज्य का सकल जीएसटी संग्रह बढ़कर 2,400.52 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा 2,094.81 करोड़ रुपये था। इस प्रकार, एक वर्ष में जीएसटी संग्रह में 305.71 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चीमा ने कहा कि राज्य की यह उपलब्धि आर्थिक गतिविधियों में तेजी, कर अनुपालन में सुधार और कराधान विभाग की सख्त प्रवर्तन कार्रवाई का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जहां देशभर में सकल जीएसटी राजस्व वृद्धि करीब 3.2 प्रतिशत रही, वहीं पंजाब ने 14.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य की नकद संग्रह वृद्धि 6.57 प्रतिशत रही, जबकि कुल जीएसटी संग्रह में कहीं अधिक बढ़ोतरी हुई है, जो मजबूत राजस्व आधार और बेहतर कर प्रशासन का संकेत है। वित्त मंत्री ने बताया कि कर चोरी रोकने के लिए गठित स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट्स (एसआईपीयू) ने मई महीने में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 182.69 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और 178.76 करोड़ रुपये की वसूली की। यह सफलता डेटा एनालिटिक्स, खुफिया सूचनाओं, सत्यापन अभियानों और फील्ड स्तर पर चलाए गए विशेष ऑपरेशनों के कारण मिली है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार सार्वजनिक राजस्व की सुरक्षा और ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फर्जी बिलिंग और संगठित कर चोरी के नेटवर्क के खिलाफ सरकार की जीरो टालरेंस नीति आगे भी जारी रहेगी। 85 करोड़ के फर्जी बिलिंग रैकेट पकड़ा चीमा ने बताया कि कर चोरी के खिलाफ अभियान के दौरान विभाग ने 85.4 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग रैकेट का भी पर्दाफाश किया है। इस मामले में लुधियाना स्थित एक फर्म के निदेशक को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने फर्जी लेन-देन के जरिए 15.56 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल किया था। जांच में सामने आया कि कर चोरी के लिए कागजों पर मौजूद फर्जी फर्मों, नकली बिलों, फर्जी डेबिट नोट और मनगढ़ंत परिवहन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस धोखाधड़ी से जुड़े लाभार्थियों से करीब तीन करोड़ रुपये की वसूली भी की गई।

भोपाल में जीएसटी नियमों में बदलाव: मालवाहक वाहन को अब सिर्फ नंबर या नाम पर नहीं रोका जाएगा, जानकारी देना जरूरी

भोपाल मध्यप्रदेश में अब व्यापारियों के माल से भरे वाहनों को मनमाने ढंग से रोकना आसान नहीं होगा। कमर्शियल टैक्स विभाग ने नया सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से उसी विभाग के पास रहेगा।मध्यप्रदेश में जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की है। अब ऑडिट के दौरान अधिकारी बार-बार डॉक्यूमेंट नहीं मांगेंगे। एक बार में ही पूरी सूची देंगे। इसके अलावा व्यापारियों को जवाब देने के लिए 29 दिन का समय मिलेगा। जानकारी न देने पर लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के मुताबिक अधिकारी व्यापारियों को पहले 15 दिन का समय देंगे। इसके बाद सात-सात दिन के दो रिमाइंडर भेजे जाएंगे। तय समय में जानकारी नहीं दी गई तो राज्य और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत 10-10 हजार रुपए, यानी कुल 20 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। विभाग का कहना है कि समय पर जानकारी न मिलने से राजस्व संग्रह और ऑडिट प्रक्रिया पर असर पड़ता है। गलत जानकारी पर लाइसेंस रद्द 01 मई 2026 से विभाग उन व्यापारियों की जांच शुरू करेगा जो लंबे समय से एक जैसा टर्नओवर दिखा रहे हैं। एक करोड़ 25 लाख से एक करोड़ 50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले माल व्यापारी और 35 से 50 लाख रुपए के सर्विस प्रोवाइडर खास ध्यान में रहेंगे। गलत जानकारी मिली तो उनका कम्पोजीशन लाइसेंस रद्द कर कार्रवाई की जाएगी। इनफार्मर पर भी सख्ती नई व्यवस्था में सूचना देने वाले (इनफार्मर) की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि जांच में सूचना गलत पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा सकता है। इससे विभाग को उम्मीद है कि झूठी या अपुष्ट सूचनाओं में कमी आएगी। कारोबारियों को राहत अब टैक्स चोरी की सूचना पर छापा या जब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित सर्किल प्रभारी को वेब पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। व्यापारियों को दी सलाह कर सलाहकार पलाश खुरपिया का कहना है कि इस सर्कुलर से ऑडिट प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। उन्होंने व्यापारियों को सलाह दी है कि वे तय समय में जानकारी दें।

अप्रैल में GST कलेक्शन 2.43 लाख करोड़ पर पहुंचा, अब तक का सबसे बड़ा उछाल

नई दिल्ली  ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी इजाफा हुआ है। इससे भारत में आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है। देश में अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। नए वित्त वर्ष के पहले महीने जीएसटी कलेक्शन में भारी उछाल इस बात का संकेत है कि देश की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है। अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में पिछले साल के मुकाबले 8.7 फीसदी की तेजी आई है। इससे पहले एक महीने में सबसे अधिक जीएसटी कलेक्शन का रेकॉर्ड पिछले साल अप्रैल में बना था। उस महीने यह 2.37 लाख करोड़ रहा था। इस बार नेट जीएसटी कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल की तुलना में 7.3 फीसदी अधिक है। अप्रैल में टोटल रिफंड भी 19.3 फीसदी बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये रहा। इस तरह नेट जीएसटी रेवेन्यू 2,10,909 करोड़ रुपये रहा। इसमें इम्पोर्ट लिंक्ड रेवेन्यू की मजबूत भूमिका रही। रेकॉर्ड पर जीएसटी कलेक्शन     अप्रैल में GST कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा     यह कलेक्शन पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है     पिछले साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ₹2.37 लाख करोड़ रहा था     नेट जीएसटी कलेक्शन भी 7.3% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा     महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे आयात से होने वाली कमाई में क्या रही खास बात? अप्रैल के जीएसटी कलेक्शन में एक खास बात आयात से जुड़ी जीएसटी रेवेन्यू के दबदबे का कायम रहना रहा। आयात पर आईजीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर लगभग 26% तो नेट कस्टम जीएसटी रेवेन्यू 42.9% की रफ्तार से बढ़ा, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद कारोबार की मजबूती को दिखा रहा है। डेलाइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर एमएस मणि के मुताबिक इससे आयात में तेजी का पता चलता है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि कस्टम कलेक्शंस के आंकड़े नहीं होने के चलते इस तेज उछाल के कारणों का सटीक पता लगाना मुश्किल है। घरेलू खपत स्थिर लेकिन ग्रोथ धीमी आयात ने ओवरऑस ग्रोथ को तगड़ा सपोर्ट मिला लेकिन घरेलू जीएसटी कलेक्शन इसकी तुलना में सुस्त रही। ग्रास डोमेस्टिक रेवेन्यू अप्रैल महीने में सालाना आधार पर 4.3% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा जिससे सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी खपत में स्थिर रुझान का संकेत मिला है। एमएस मणि का कहना है कि दरों में तेज कटौती के बावजूद घरेलू खपत पर जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना खपत में अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है। हालांकि एक अहम बात ये है कि यह ग्रोथ सभी राज्यों में एक जैसी नहीं रही। कुछ बड़ी मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमिंग स्टेट्स में लो-सिंगल-डिजिट ग्रोथ रही जैसे कि गुजरात में 3% और महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में करीब 5% की ग्रोथ रही। ग्रास कलेक्शन में तेज उछाल लेकिन नेट रेवेन्यू की रफ्तार सुस्त मजबूत ग्रास के बावजूद नेट जीएसटी रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रही और यह सालाना आधार पर 7.3% बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंचा। इसकी मुख्य वजह रिफंड की अधिक स्पीड रही। अप्रैल में सालाना आधार पर टोटल रिफंड 19.3% की रफ्तार से बढ़ा तो घरेलू रिफंड 54% से अधिक बढ़ गया। टैक्स कनेक्ट एडवायजरी सर्विसेज एलएलपी के विवेक जालान का कहना है कि नेट डोमेस्टिक कलेक्शंस में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि रिफंड में तेज बढ़ोतरी हुई। टॉप 5 राज्य अप्रैल में ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8 फीसदी उछलकर 57,580 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू 4.3 फीसदी तेजी के साथ 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। कस्टम से नेट रेवेन्यू यानी आयात पर जीएसटी में 42.9 फीसदी तेजी आई जबकि नेट डोमेस्टिक रेवेन्यू में केवल 0.3 फीसदी तेजी रही। इससे साफ है कि अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में तेजी में एक्सटरनल ट्रेड की अहम भूमिका रही। जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (13,793 करोड़ रुपये), कर्नाटक (5,829 करोड़ रुपये), गुजरात (5,455 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (4,724 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (4,399 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष (2025) में यह 20.55 लाख करोड़ रुपये था। नेट जीएसटी कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.1% अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत देता है।

GST कलेक्शन में रिकॉर्ड उछाल! सरकार के खजाने से मिलने वाली सुविधाएं जानें

नई दिल्ली  जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर अच्छी खबर है। मार्च 2026 में देश की GST कलेक्शन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नेट GST कलेक्शन बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले महीने के मुकाबले 8.2% ज्यादा है। इससे साफ है कि देश में कारोबार और खपत दोनों में मजबूती बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स कलेक्शन में यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों के लगातार सुधरने का संकेत देती है। वहीं, अगर ग्रॉस GST कलेक्शन की बात करें तो मार्च में यह 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 8.8% ज्यादा है। लगातार बढ़ती GST वसूली सरकार के राजस्व को मजबूत कर रही है और आने वाले समय में विकास योजनाओं को रफ्तार देने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, यह आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।  इस पैसे से आपको मिलती हैं ये सुविधाएं पिछले कुछ महीनों से भारत सरकार के खजाने में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है. देश में जीएसटी कलेक्शन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है. हर महीने सरकार के खजाने में लाखों करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी जेब से निकला यह टैक्स, घूम-फिरकर आपके जीवन को ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने में कैसे इस्तेमाल होता है? आइए समझते हैं कि सरकार इस भारी-भरकम पैसे से आम जनता के लिए कौन सी सुविधाएं तैयार कर रही है. 1. हाई-वे और एक्सप्रेसवे का बिछेगा जाल GST से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाता है. सरकार का लक्ष्य भारत के सड़क नेटवर्क को अमेरिका और यूरोप के स्तर पर ले जाना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स इसी कमाई के दम पर पूरे हो रहे हैं. जब सड़कें अच्छी होती हैं, तो सामान की आवाजाही सस्ती होती है, जिससे महंगाई कम करने में मदद मिलती है. 2. हेल्थकेयर: अब हर जिले में होंगे ‘सुपर स्पेशलिटी’ अस्पताल टैक्स के जरिए सरकार देश के हेल्थ बजट को बढ़ा रही है. इसका सीधा फायदा आम आदमी को मिलता है. देश के अलग-अलग राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं. आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जिसका फंड इसी टैक्स कलेक्शन से आता है. 3. रेल सफर बनेगा ‘हवाई’ सफर जैसा वंदे भारत ट्रेनों की सफलता और रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प (जैसे अमृत भारत स्टेशन योजना) GST कलेक्शन की मजबूती का ही परिणाम है. ट्रेनों में ‘कवच’ जैसी सुरक्षा तकनीक और हाई-स्पीड ट्रैक बिछाने के लिए सरकार भारी निवेश कर रही है. रेलवे स्टेशनों पर अब आपको एयरपोर्ट जैसी लिफ्ट, एस्केलेटर और वेटिंग लाउंज देखने को मिल रहे हैं. 4. शिक्षा और डिजिटल इंडिया देश के गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना हो या सरकारी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ में बदलना, जीएसटी का पैसा भविष्य की पीढ़ी को तैयार कर रहा है. डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ने से पारदर्शिता आई है, जिससे भ्रष्टाचार कम हुआ है और योजनाओं का फायदा डीबीटी के जरिए सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है. 0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए रिफंड्स की बात करें तो मार्च महीने में कुल 0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो साल-दर-साल आधार पर 13.8% ज्यादा है। रिफंड बढ़ने के बावजूद सरकार की नेट कमाई मजबूत बनी हुई है, जो 1.78 लाख करोड़ रुपये रही। इससे यह भी संकेत मिलता है कि एक्सपोर्ट और कारोबार से जुड़े सेक्टर्स में गतिविधि तेज हुई है। ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा रेवेन्यू के अलग-अलग हिस्सों पर नजर डालें तो घरेलू लेनदेन से मिलने वाला ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 5.9% की बढ़त हुई। वहीं, इंपोर्ट से मिलने वाला रेवेन्यू 0.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें 17.8% की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इसका मतलब है कि देश में आयात गतिविधियां भी काफी मजबूत रही हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो ग्रॉस GST कलेक्शन 8.3% बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। वहीं नेट GST रेवेन्यू 7.1% की बढ़त के साथ 19.34 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। राज्यों में महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा योगदान दिया, जहां से करीब 0.13 लाख करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन हुआ। इसके बाद कर्नाटक और गुजरात का स्थान रहा। कैसे रहे राज्यों के प्रदर्शन राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कई राज्यों में GST कलेक्शन में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। वहीं कुछ राज्यों में गिरावट भी दर्ज की गई, जैसे जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश। कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है।  

GST में बड़े घोटाले का खुलासा, यूपी में 200 करोड़ की चोरी; एसटीएफ ने आरोपी को गुजरात से पकड़ा

 लखनऊ उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने फर्जी फर्मों के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस मामले में एसटीएफ ने गुजरात के अहमदाबाद से गैंग के अहम सदस्य मोहम्मद अल्ताफ सोजतवाला को पकड़ा है. यह नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और लंबे समय से संगठित तरीके से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचा रहा था।  एसटीएफ के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी के पास से लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और नकदी बरामद हुई है. जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी अपने साथियों, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट आकाश पीयूष सोनी समेत अन्य लोग शामिल हैं, इनके साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराता था।  इन फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे, जिससे वास्तविक कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) उपलब्ध कराया जाता और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जाती थी।  पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह लोगों को कमीशन और लालच देकर उनके पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज हासिल करता था. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां खोलकर बैंक खातों के जरिए लेनदेन दिखाया जाता था. बाद में रकम को नकद या दूसरे माध्यमों से वापस कर दिया जाता था।  एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह गैंग गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में एक्टिव था. अलीगढ़ में दर्ज एक केस की जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।  फिलहाल एसटीएफ आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है. साथ ही गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। 

विंध्य में जीएसटी फर्जीवाड़ा खुलासा, सीधी, सतना और कटनी में 9 स्थानों पर छापेमारी, 8 फर्में कागजों पर

जबलपुर  केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) आयुक्तालय, जबलपुर ने टैक्स चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पास करने वाले बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय जीएसटी आयुक्त लोकेश लिल्हारे के नेतृत्व और निर्देशन में विभाग की एंटी इवेजन टीम ने सीधी, सतना और कटनी जिलों में नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। खुफिया जानकारी मिली थी विभाग को खुफिया जानकारी मिली थी कि इन क्षेत्रों में कई ऐसी फर्में पंजीकृत हैं जो केवल कागजों पर चल रही हैं और इनका उपयोग कोयले की फर्जी बिलिंग कर गलत तरीके से आइटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ उठाने के लिए किया जा रहा है। छापामार कार्रवाई के दौरान टीम को चौंकाने वाले तथ्य मिले। जांच की गई नौ फर्मों में से आठ फर्में अपने पंजीकृत पते पर अस्तित्वहीन यानी गैर-परिचालन की पाई गईं। इन फर्मों का मौके पर कोई नामो-निशान नहीं था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इनका गठन केवल सरकारी राजस्व को चूना लगाने के लिए किया गया था। बहरहाल, विभाग अब इन फर्मों द्वारा काटे गए बिलों और पास की गई आइटीसी की गहन जांच कर रहा है, ताकि राजस्व हानि का सही आकलन किया जा सके। कमिश्नर लोकेश लिल्हारे ने स्पष्ट किया है कि टैक्स चोरी करने वालों और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ विभाग की यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी। इन फर्मों के खिलाफ की गई कार्रवाई मेसर्स महादेव ट्रेडर्स (सीधी) मेसर्स मिश्रा ट्रेडिंग कंपनी (सीधी) मेसर्स गायत्री एंटरप्राइजेज (सीधी) मेसर्स जय श्री बालाजी कोल ट्रेडर्स (कटनी) मेसर्स रिशाल एसोसिएट्स (सतना) मेसर्स भव्यंश सेल्स एंड लाजिस्टिक्स (सतना) मेसर्स श्री बालाजी एसोसिएट (सीधी) मेसर्स कुमार ट्रेडिंग कंपनी (कटनी) मेसर्स आदित्य फिलिंग स्टेशन (सीधी)  

वित्त मंत्री के लिए राहत भरी खबर, बजट से पहले GST वसूली में जोरदार उछाल

नई दिल्ली आम बजट से ठीक पहले जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े आ गए हैं। जनवरी के महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन में बंपर उछाल आया है। इस महीने में आयात से प्राप्त राजस्व में वृद्धि के दम पर कलेक्शन 6.2 प्रतिशत बढ़ गया और यह 1.93 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं, कुल रिफंड में 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22,665 करोड़ रुपये रहा। तंबाकू उत्पादों से कितना कलेक्शन अगर जनवरी में नेट जीएसटी रेवेन्यू की बात करें तो इसमें 7.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। तंबाकू उत्पादों से उपकर कलेक्शन जनवरी में 5,768 करोड़ रुपये रहा। जनवरी 2025 में यह 13,009 करोड़ रुपये रहा था। ये वो वक्त था जब कार, तंबाकू उत्पादों जैसे विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता था। 22 सितंबर से कम हुई थीं जीएसटी दरें बता दें कि सरकार ने 22 सितंबर, 2025 से करीब 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी थीं जिससे सामान सस्ता हो गया। इसके साथ ही पहले की तरह विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर लगने वाले उपकर के बजाय अब केवल तंबाकू तथा संबंधित उत्पादों पर ही क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व कलेक्शन पर असर पड़ा है। जनवरी में घरेलू लेनदेन से ग्रॉस टैक्स कलेक्शन 4.8 प्रतिशत बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये हो गया जबकि आयात राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर 52,253 करोड़ रुपये रहा। निर्मला सीतारमण का 9वां बजट अब से कुछ देर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करने वाली हैं। परंपरा के अनुसार, वित्त मंत्री संसद जाने से पहले राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलीं। इससे पहले उन्होंने अपने बजट टीम के साथ तस्वीर खिंचवाई। 'मैजेंटा' रंग की रेशमी साड़ी पहने सीतारमण ने राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न वाले एक लाल 'पाउच' (थैले) में टैबलेट पकड़ा था। उनके साथ राज्य मंत्री और उनके मंत्रालय के सभी छह सचिव भी मौजूद रहे।

राजकोष में बढ़ोतरी, जीएसटी में कमी: मध्य प्रदेश की वित्तीय तस्वीर

भोपाल मध्य प्रदेश के बजट का बड़ा आधार केंद्रीय करों में हिस्सा और राज्य के स्वयं के करों से आय होती है। केंद्रीय करों में भी जीएसटी बड़ा माध्यम है। पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 26,000 करोड़ रुपये जीएसटी मिला था, जबकि इस बार दिसंबर तक 25,250 करोड़ रुपये मिला है। इसमें तीन प्रतिशत की कमी है। वहीं, राज्य के करों की बात करें तो इसने राजकोष भरने का काम किया है। वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), आबकारी, पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क के माध्यम से सरकार को 32,660 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले वर्ष इस अवधि में प्राप्त राजस्व से अधिक है। प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में एक लाख 11 हजार करोड़ और राज्य के करों से एक लाख नौ हजार करोड़ रुपये 31 मार्च, 2026 तक प्राप्त होने का अनुमान बजट में लगाया गया था। तीसरी तिमाही में देखें तो जीएसटी को छोड़कर राजस्व संग्रहण की स्थिति ठीक चल रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी जीएसटी में तीन प्रतिशत की कमी है। एक फरवरी को पेश होगा बजट एक फरवरी को आम बजट प्रस्तुत होना है, इसमें साफ हो जाएगा कि जीएसटी की दरों में संशोधन का कितना असर राजस्व संग्रहण पर पड़ा है। भारत सरकार 2026-27 के बजट के साथ-साथ 2025-26 का पुनरीक्षित अनुमान भी प्रस्तुत करेगी। इससे स्पष्ट होगा कि प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में कितनी राशि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति में प्राप्त होगी। वहीं, अगले वित्तीय वर्ष में क्या स्थिति बनेगी। प्रदेश का अनुमान है कि इस वर्ष पांच हजार करोड़ रुपये तक जीएसटी का नुकसान हो सकता है। हालांकि, संतोष की बात यह है कि राज्य के टैक्स का संग्रहण लक्ष्य से अधिक चल रहा है। पेट्रोल, डीजल आदि से प्राप्त होने वाला वैट 14 हजार करोड़ रुपये दिसंबर तक प्राप्त हुआ है, जो गत वर्ष इसी अवधि में 13,500 करोड़ रुपये था। इसी तरह आबकारी से आय में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे अभी तक 10,500 करोड़ रुपये खजाने में आए हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क में 8,660 करोड़ रुपये मिले हैं, इसी मद में पिछले वर्ष 7,750 करोड़ रुपये मिले थे। करों में वृद्धि के आसार नहीं जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के पास कर लगाने के अवसर सीमित हो गए हैं। सरकार बिजली से लेकर जितने भी माध्यमों से टैक्स ले सकती है, वह लगाए जा चुके हैं। संभावना जताई जा रही है कि सरकार कर में वृद्धि के स्थान पर संग्रहण की व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर देगी।