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भोपाल में जीएसटी नियमों में बदलाव: मालवाहक वाहन को अब सिर्फ नंबर या नाम पर नहीं रोका जाएगा, जानकारी देना जरूरी

भोपाल मध्यप्रदेश में अब व्यापारियों के माल से भरे वाहनों को मनमाने ढंग से रोकना आसान नहीं होगा। कमर्शियल टैक्स विभाग ने नया सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से उसी विभाग के पास रहेगा।मध्यप्रदेश में जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की है। अब ऑडिट के दौरान अधिकारी बार-बार डॉक्यूमेंट नहीं मांगेंगे। एक बार में ही पूरी सूची देंगे। इसके अलावा व्यापारियों को जवाब देने के लिए 29 दिन का समय मिलेगा। जानकारी न देने पर लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के मुताबिक अधिकारी व्यापारियों को पहले 15 दिन का समय देंगे। इसके बाद सात-सात दिन के दो रिमाइंडर भेजे जाएंगे। तय समय में जानकारी नहीं दी गई तो राज्य और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत 10-10 हजार रुपए, यानी कुल 20 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। विभाग का कहना है कि समय पर जानकारी न मिलने से राजस्व संग्रह और ऑडिट प्रक्रिया पर असर पड़ता है। गलत जानकारी पर लाइसेंस रद्द 01 मई 2026 से विभाग उन व्यापारियों की जांच शुरू करेगा जो लंबे समय से एक जैसा टर्नओवर दिखा रहे हैं। एक करोड़ 25 लाख से एक करोड़ 50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले माल व्यापारी और 35 से 50 लाख रुपए के सर्विस प्रोवाइडर खास ध्यान में रहेंगे। गलत जानकारी मिली तो उनका कम्पोजीशन लाइसेंस रद्द कर कार्रवाई की जाएगी। इनफार्मर पर भी सख्ती नई व्यवस्था में सूचना देने वाले (इनफार्मर) की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि जांच में सूचना गलत पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा सकता है। इससे विभाग को उम्मीद है कि झूठी या अपुष्ट सूचनाओं में कमी आएगी। कारोबारियों को राहत अब टैक्स चोरी की सूचना पर छापा या जब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित सर्किल प्रभारी को वेब पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। व्यापारियों को दी सलाह कर सलाहकार पलाश खुरपिया का कहना है कि इस सर्कुलर से ऑडिट प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। उन्होंने व्यापारियों को सलाह दी है कि वे तय समय में जानकारी दें।

अप्रैल में GST कलेक्शन 2.43 लाख करोड़ पर पहुंचा, अब तक का सबसे बड़ा उछाल

नई दिल्ली  ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी इजाफा हुआ है। इससे भारत में आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है। देश में अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। नए वित्त वर्ष के पहले महीने जीएसटी कलेक्शन में भारी उछाल इस बात का संकेत है कि देश की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है। अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में पिछले साल के मुकाबले 8.7 फीसदी की तेजी आई है। इससे पहले एक महीने में सबसे अधिक जीएसटी कलेक्शन का रेकॉर्ड पिछले साल अप्रैल में बना था। उस महीने यह 2.37 लाख करोड़ रहा था। इस बार नेट जीएसटी कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल की तुलना में 7.3 फीसदी अधिक है। अप्रैल में टोटल रिफंड भी 19.3 फीसदी बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये रहा। इस तरह नेट जीएसटी रेवेन्यू 2,10,909 करोड़ रुपये रहा। इसमें इम्पोर्ट लिंक्ड रेवेन्यू की मजबूत भूमिका रही। रेकॉर्ड पर जीएसटी कलेक्शन     अप्रैल में GST कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा     यह कलेक्शन पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है     पिछले साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ₹2.37 लाख करोड़ रहा था     नेट जीएसटी कलेक्शन भी 7.3% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा     महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे आयात से होने वाली कमाई में क्या रही खास बात? अप्रैल के जीएसटी कलेक्शन में एक खास बात आयात से जुड़ी जीएसटी रेवेन्यू के दबदबे का कायम रहना रहा। आयात पर आईजीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर लगभग 26% तो नेट कस्टम जीएसटी रेवेन्यू 42.9% की रफ्तार से बढ़ा, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद कारोबार की मजबूती को दिखा रहा है। डेलाइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर एमएस मणि के मुताबिक इससे आयात में तेजी का पता चलता है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि कस्टम कलेक्शंस के आंकड़े नहीं होने के चलते इस तेज उछाल के कारणों का सटीक पता लगाना मुश्किल है। घरेलू खपत स्थिर लेकिन ग्रोथ धीमी आयात ने ओवरऑस ग्रोथ को तगड़ा सपोर्ट मिला लेकिन घरेलू जीएसटी कलेक्शन इसकी तुलना में सुस्त रही। ग्रास डोमेस्टिक रेवेन्यू अप्रैल महीने में सालाना आधार पर 4.3% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा जिससे सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी खपत में स्थिर रुझान का संकेत मिला है। एमएस मणि का कहना है कि दरों में तेज कटौती के बावजूद घरेलू खपत पर जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना खपत में अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है। हालांकि एक अहम बात ये है कि यह ग्रोथ सभी राज्यों में एक जैसी नहीं रही। कुछ बड़ी मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमिंग स्टेट्स में लो-सिंगल-डिजिट ग्रोथ रही जैसे कि गुजरात में 3% और महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में करीब 5% की ग्रोथ रही। ग्रास कलेक्शन में तेज उछाल लेकिन नेट रेवेन्यू की रफ्तार सुस्त मजबूत ग्रास के बावजूद नेट जीएसटी रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रही और यह सालाना आधार पर 7.3% बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंचा। इसकी मुख्य वजह रिफंड की अधिक स्पीड रही। अप्रैल में सालाना आधार पर टोटल रिफंड 19.3% की रफ्तार से बढ़ा तो घरेलू रिफंड 54% से अधिक बढ़ गया। टैक्स कनेक्ट एडवायजरी सर्विसेज एलएलपी के विवेक जालान का कहना है कि नेट डोमेस्टिक कलेक्शंस में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि रिफंड में तेज बढ़ोतरी हुई। टॉप 5 राज्य अप्रैल में ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8 फीसदी उछलकर 57,580 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू 4.3 फीसदी तेजी के साथ 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। कस्टम से नेट रेवेन्यू यानी आयात पर जीएसटी में 42.9 फीसदी तेजी आई जबकि नेट डोमेस्टिक रेवेन्यू में केवल 0.3 फीसदी तेजी रही। इससे साफ है कि अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में तेजी में एक्सटरनल ट्रेड की अहम भूमिका रही। जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (13,793 करोड़ रुपये), कर्नाटक (5,829 करोड़ रुपये), गुजरात (5,455 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (4,724 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (4,399 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष (2025) में यह 20.55 लाख करोड़ रुपये था। नेट जीएसटी कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.1% अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत देता है।

GST कलेक्शन में रिकॉर्ड उछाल! सरकार के खजाने से मिलने वाली सुविधाएं जानें

नई दिल्ली  जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर अच्छी खबर है। मार्च 2026 में देश की GST कलेक्शन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नेट GST कलेक्शन बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले महीने के मुकाबले 8.2% ज्यादा है। इससे साफ है कि देश में कारोबार और खपत दोनों में मजबूती बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स कलेक्शन में यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों के लगातार सुधरने का संकेत देती है। वहीं, अगर ग्रॉस GST कलेक्शन की बात करें तो मार्च में यह 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 8.8% ज्यादा है। लगातार बढ़ती GST वसूली सरकार के राजस्व को मजबूत कर रही है और आने वाले समय में विकास योजनाओं को रफ्तार देने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, यह आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।  इस पैसे से आपको मिलती हैं ये सुविधाएं पिछले कुछ महीनों से भारत सरकार के खजाने में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है. देश में जीएसटी कलेक्शन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है. हर महीने सरकार के खजाने में लाखों करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी जेब से निकला यह टैक्स, घूम-फिरकर आपके जीवन को ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने में कैसे इस्तेमाल होता है? आइए समझते हैं कि सरकार इस भारी-भरकम पैसे से आम जनता के लिए कौन सी सुविधाएं तैयार कर रही है. 1. हाई-वे और एक्सप्रेसवे का बिछेगा जाल GST से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाता है. सरकार का लक्ष्य भारत के सड़क नेटवर्क को अमेरिका और यूरोप के स्तर पर ले जाना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स इसी कमाई के दम पर पूरे हो रहे हैं. जब सड़कें अच्छी होती हैं, तो सामान की आवाजाही सस्ती होती है, जिससे महंगाई कम करने में मदद मिलती है. 2. हेल्थकेयर: अब हर जिले में होंगे ‘सुपर स्पेशलिटी’ अस्पताल टैक्स के जरिए सरकार देश के हेल्थ बजट को बढ़ा रही है. इसका सीधा फायदा आम आदमी को मिलता है. देश के अलग-अलग राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं. आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जिसका फंड इसी टैक्स कलेक्शन से आता है. 3. रेल सफर बनेगा ‘हवाई’ सफर जैसा वंदे भारत ट्रेनों की सफलता और रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प (जैसे अमृत भारत स्टेशन योजना) GST कलेक्शन की मजबूती का ही परिणाम है. ट्रेनों में ‘कवच’ जैसी सुरक्षा तकनीक और हाई-स्पीड ट्रैक बिछाने के लिए सरकार भारी निवेश कर रही है. रेलवे स्टेशनों पर अब आपको एयरपोर्ट जैसी लिफ्ट, एस्केलेटर और वेटिंग लाउंज देखने को मिल रहे हैं. 4. शिक्षा और डिजिटल इंडिया देश के गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना हो या सरकारी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ में बदलना, जीएसटी का पैसा भविष्य की पीढ़ी को तैयार कर रहा है. डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ने से पारदर्शिता आई है, जिससे भ्रष्टाचार कम हुआ है और योजनाओं का फायदा डीबीटी के जरिए सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है. 0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए रिफंड्स की बात करें तो मार्च महीने में कुल 0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो साल-दर-साल आधार पर 13.8% ज्यादा है। रिफंड बढ़ने के बावजूद सरकार की नेट कमाई मजबूत बनी हुई है, जो 1.78 लाख करोड़ रुपये रही। इससे यह भी संकेत मिलता है कि एक्सपोर्ट और कारोबार से जुड़े सेक्टर्स में गतिविधि तेज हुई है। ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा रेवेन्यू के अलग-अलग हिस्सों पर नजर डालें तो घरेलू लेनदेन से मिलने वाला ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 5.9% की बढ़त हुई। वहीं, इंपोर्ट से मिलने वाला रेवेन्यू 0.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें 17.8% की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इसका मतलब है कि देश में आयात गतिविधियां भी काफी मजबूत रही हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो ग्रॉस GST कलेक्शन 8.3% बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। वहीं नेट GST रेवेन्यू 7.1% की बढ़त के साथ 19.34 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। राज्यों में महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा योगदान दिया, जहां से करीब 0.13 लाख करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन हुआ। इसके बाद कर्नाटक और गुजरात का स्थान रहा। कैसे रहे राज्यों के प्रदर्शन राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कई राज्यों में GST कलेक्शन में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। वहीं कुछ राज्यों में गिरावट भी दर्ज की गई, जैसे जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश। कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है।  

GST में बड़े घोटाले का खुलासा, यूपी में 200 करोड़ की चोरी; एसटीएफ ने आरोपी को गुजरात से पकड़ा

 लखनऊ उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने फर्जी फर्मों के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस मामले में एसटीएफ ने गुजरात के अहमदाबाद से गैंग के अहम सदस्य मोहम्मद अल्ताफ सोजतवाला को पकड़ा है. यह नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और लंबे समय से संगठित तरीके से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचा रहा था।  एसटीएफ के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी के पास से लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और नकदी बरामद हुई है. जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी अपने साथियों, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट आकाश पीयूष सोनी समेत अन्य लोग शामिल हैं, इनके साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराता था।  इन फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे, जिससे वास्तविक कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) उपलब्ध कराया जाता और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जाती थी।  पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह लोगों को कमीशन और लालच देकर उनके पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज हासिल करता था. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां खोलकर बैंक खातों के जरिए लेनदेन दिखाया जाता था. बाद में रकम को नकद या दूसरे माध्यमों से वापस कर दिया जाता था।  एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह गैंग गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में एक्टिव था. अलीगढ़ में दर्ज एक केस की जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।  फिलहाल एसटीएफ आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है. साथ ही गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। 

विंध्य में जीएसटी फर्जीवाड़ा खुलासा, सीधी, सतना और कटनी में 9 स्थानों पर छापेमारी, 8 फर्में कागजों पर

जबलपुर  केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) आयुक्तालय, जबलपुर ने टैक्स चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पास करने वाले बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय जीएसटी आयुक्त लोकेश लिल्हारे के नेतृत्व और निर्देशन में विभाग की एंटी इवेजन टीम ने सीधी, सतना और कटनी जिलों में नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। खुफिया जानकारी मिली थी विभाग को खुफिया जानकारी मिली थी कि इन क्षेत्रों में कई ऐसी फर्में पंजीकृत हैं जो केवल कागजों पर चल रही हैं और इनका उपयोग कोयले की फर्जी बिलिंग कर गलत तरीके से आइटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ उठाने के लिए किया जा रहा है। छापामार कार्रवाई के दौरान टीम को चौंकाने वाले तथ्य मिले। जांच की गई नौ फर्मों में से आठ फर्में अपने पंजीकृत पते पर अस्तित्वहीन यानी गैर-परिचालन की पाई गईं। इन फर्मों का मौके पर कोई नामो-निशान नहीं था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इनका गठन केवल सरकारी राजस्व को चूना लगाने के लिए किया गया था। बहरहाल, विभाग अब इन फर्मों द्वारा काटे गए बिलों और पास की गई आइटीसी की गहन जांच कर रहा है, ताकि राजस्व हानि का सही आकलन किया जा सके। कमिश्नर लोकेश लिल्हारे ने स्पष्ट किया है कि टैक्स चोरी करने वालों और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ विभाग की यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी। इन फर्मों के खिलाफ की गई कार्रवाई मेसर्स महादेव ट्रेडर्स (सीधी) मेसर्स मिश्रा ट्रेडिंग कंपनी (सीधी) मेसर्स गायत्री एंटरप्राइजेज (सीधी) मेसर्स जय श्री बालाजी कोल ट्रेडर्स (कटनी) मेसर्स रिशाल एसोसिएट्स (सतना) मेसर्स भव्यंश सेल्स एंड लाजिस्टिक्स (सतना) मेसर्स श्री बालाजी एसोसिएट (सीधी) मेसर्स कुमार ट्रेडिंग कंपनी (कटनी) मेसर्स आदित्य फिलिंग स्टेशन (सीधी)  

वित्त मंत्री के लिए राहत भरी खबर, बजट से पहले GST वसूली में जोरदार उछाल

नई दिल्ली आम बजट से ठीक पहले जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े आ गए हैं। जनवरी के महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन में बंपर उछाल आया है। इस महीने में आयात से प्राप्त राजस्व में वृद्धि के दम पर कलेक्शन 6.2 प्रतिशत बढ़ गया और यह 1.93 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं, कुल रिफंड में 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22,665 करोड़ रुपये रहा। तंबाकू उत्पादों से कितना कलेक्शन अगर जनवरी में नेट जीएसटी रेवेन्यू की बात करें तो इसमें 7.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। तंबाकू उत्पादों से उपकर कलेक्शन जनवरी में 5,768 करोड़ रुपये रहा। जनवरी 2025 में यह 13,009 करोड़ रुपये रहा था। ये वो वक्त था जब कार, तंबाकू उत्पादों जैसे विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता था। 22 सितंबर से कम हुई थीं जीएसटी दरें बता दें कि सरकार ने 22 सितंबर, 2025 से करीब 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी थीं जिससे सामान सस्ता हो गया। इसके साथ ही पहले की तरह विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर लगने वाले उपकर के बजाय अब केवल तंबाकू तथा संबंधित उत्पादों पर ही क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व कलेक्शन पर असर पड़ा है। जनवरी में घरेलू लेनदेन से ग्रॉस टैक्स कलेक्शन 4.8 प्रतिशत बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये हो गया जबकि आयात राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर 52,253 करोड़ रुपये रहा। निर्मला सीतारमण का 9वां बजट अब से कुछ देर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करने वाली हैं। परंपरा के अनुसार, वित्त मंत्री संसद जाने से पहले राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलीं। इससे पहले उन्होंने अपने बजट टीम के साथ तस्वीर खिंचवाई। 'मैजेंटा' रंग की रेशमी साड़ी पहने सीतारमण ने राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न वाले एक लाल 'पाउच' (थैले) में टैबलेट पकड़ा था। उनके साथ राज्य मंत्री और उनके मंत्रालय के सभी छह सचिव भी मौजूद रहे।

राजकोष में बढ़ोतरी, जीएसटी में कमी: मध्य प्रदेश की वित्तीय तस्वीर

भोपाल मध्य प्रदेश के बजट का बड़ा आधार केंद्रीय करों में हिस्सा और राज्य के स्वयं के करों से आय होती है। केंद्रीय करों में भी जीएसटी बड़ा माध्यम है। पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 26,000 करोड़ रुपये जीएसटी मिला था, जबकि इस बार दिसंबर तक 25,250 करोड़ रुपये मिला है। इसमें तीन प्रतिशत की कमी है। वहीं, राज्य के करों की बात करें तो इसने राजकोष भरने का काम किया है। वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), आबकारी, पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क के माध्यम से सरकार को 32,660 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले वर्ष इस अवधि में प्राप्त राजस्व से अधिक है। प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में एक लाख 11 हजार करोड़ और राज्य के करों से एक लाख नौ हजार करोड़ रुपये 31 मार्च, 2026 तक प्राप्त होने का अनुमान बजट में लगाया गया था। तीसरी तिमाही में देखें तो जीएसटी को छोड़कर राजस्व संग्रहण की स्थिति ठीक चल रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी जीएसटी में तीन प्रतिशत की कमी है। एक फरवरी को पेश होगा बजट एक फरवरी को आम बजट प्रस्तुत होना है, इसमें साफ हो जाएगा कि जीएसटी की दरों में संशोधन का कितना असर राजस्व संग्रहण पर पड़ा है। भारत सरकार 2026-27 के बजट के साथ-साथ 2025-26 का पुनरीक्षित अनुमान भी प्रस्तुत करेगी। इससे स्पष्ट होगा कि प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में कितनी राशि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति में प्राप्त होगी। वहीं, अगले वित्तीय वर्ष में क्या स्थिति बनेगी। प्रदेश का अनुमान है कि इस वर्ष पांच हजार करोड़ रुपये तक जीएसटी का नुकसान हो सकता है। हालांकि, संतोष की बात यह है कि राज्य के टैक्स का संग्रहण लक्ष्य से अधिक चल रहा है। पेट्रोल, डीजल आदि से प्राप्त होने वाला वैट 14 हजार करोड़ रुपये दिसंबर तक प्राप्त हुआ है, जो गत वर्ष इसी अवधि में 13,500 करोड़ रुपये था। इसी तरह आबकारी से आय में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे अभी तक 10,500 करोड़ रुपये खजाने में आए हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क में 8,660 करोड़ रुपये मिले हैं, इसी मद में पिछले वर्ष 7,750 करोड़ रुपये मिले थे। करों में वृद्धि के आसार नहीं जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के पास कर लगाने के अवसर सीमित हो गए हैं। सरकार बिजली से लेकर जितने भी माध्यमों से टैक्स ले सकती है, वह लगाए जा चुके हैं। संभावना जताई जा रही है कि सरकार कर में वृद्धि के स्थान पर संग्रहण की व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर देगी।

प्रशांत सिंह के इस्तीफे पर सस्पेंस, GST विभाग में मचा हड़कंप, सरकार अनजान

लखनऊ अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से इस्तीफे का एलान किए जाने के बावजूद, अब तक उनका त्यागपत्र न तो शासन स्तर पर पहुंचा है और न ही राज्य कर आयुक्त कार्यालय में इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि हो सकी है. सूत्रों के मुताबिक, विभागीय अधिकारी स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि जब तक लिखित रूप में इस्तीफा प्राप्त नहीं होता, तब तक आगे की किसी भी कार्रवाई पर निर्णय नहीं लिया जा सकता. प्रशांत कुमार सिंह ने इसी मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में भावनात्मक बयान देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. इस एलान ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में बल्कि सियासी हलकों में भी हलचल मचा दी थी. यह इस्तीफा एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा गया, लेकिन उसी दिन देर रात उनके बड़े भाई डॉक्टर विश्वजीत ने यह आरोप लगा दिया था कि प्रशांत फर्जी दिव्यांग प्रमाण के सहारे नौकरी पाई और जब कार्रवाई होने की तैयारी थी तो उससे बचने को इस रूप में इस्तीफे दिया. अब जब प्रशासनिक स्तर पर इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, तो पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े होने लगे हैं. राज्य कर आयुक्त से मांगी गई पूरी रिपोर्ट इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है. शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट में उनके खिलाफ चल रही जांच, अब तक की गई विभागीय कार्रवाई, जारी नोटिस और भविष्य में संभावित कार्रवाई से जुड़े सभी बिंदुओं को शामिल किया जाए. सूत्रों के अनुसार, शासन यह भी जानना चाहता है कि इस्तीफे की घोषणा किन परिस्थितियों में की गई और क्या इसका सीधा संबंध प्रशांत कुमार सिंह के खिलाफ चल रही जांच से है. रिपोर्ट शासन को मिलते ही आगे की रणनीति तय की जाएगी.  फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से नौकरी पाने का दावा पूरे विवाद की जड़ में प्रशांत कुमार सिंह के सगे भाई, डॉक्टर विश्वजीत सिंह द्वारा लगाए गए बेहद गंभीर आरोप हैं. डॉ. विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत ने कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की है. उन्होंने इस मामले में न सिर्फ विभागीय स्तर पर शिकायत की, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचाई. डॉ. विश्वजीत सिंह के अनुसार, उन्होंने 20 अगस्त 2021 को औपचारिक रूप से प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाणपत्र की जांच कराने की मांग की थी. इसके बाद मंडलीय चिकित्सा परिषद ने दो बार प्रशांत को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाया, लेकिन दोनों ही मौकों पर वे पेश नहीं हुए. डॉ. विश्वजीत का कहना है कि यह अपने आप में संदेह पैदा करने वाला तथ्य है. यदि प्रमाणपत्र वैध और सही है, तो जांच से बचने की क्या आवश्यकता थी? डॉ. विश्वजीत सिंह ने उस पत्र को भी दिखाया है, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिव्यांग प्रमाणपत्र की विधिवत जांच कराने के निर्देश दिए गए थे. इस पत्र के सामने आने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया. सूत्र बताते हैं कि मऊ से जुड़े प्रकरण में सीएमओ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे शासन को भेजा जाना है. यह रिपोर्ट तय करेगी कि दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं. बीमारी को लेकर सवाल डॉ. विश्वजीत सिंह ने एक और अहम सवाल उठाया है. उनका दावा है कि जिस आंख की बीमारी के आधार पर प्रशांत कुमार सिंह ने दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया, वह बीमारी चिकित्सकीय दृष्टि से 50 वर्ष की आयु से पहले होना अत्यंत दुर्लभ है. ऐसे में कम उम्र में उस बीमारी के आधार पर दिव्यांगता का प्रमाणपत्र मिलना, कई सवालों को जन्म देता है. यही नहीं, डॉ. विश्वजीत का कहना है कि 2021 से अब तक प्रशांत कुमार सिंह को कम से कम तीन बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने न तो व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखा और न ही लिखित जवाब दिया. राजनीतिक पृष्ठभूमि भी बनी चर्चा का विषय प्रशांत कुमार सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इन दिनों चर्चा में है. जानकारी के अनुसार, वे कभी वरिष्ठ नेता अमर सिंह की पार्टी ‘लोकमंच’ में जिलाध्यक्ष रह चुके हैं. इसके बाद उन्होंने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर सेल टैक्स विभाग में चयन पाया. उनका एक और पोस्टर वायरल हो रहा है जिसमें भगवा बैकग्राउंड के बीच वह अपनी फोटो लगाए हैं और उस पर अटल बिहारी वाजपेई की कविता लिखी है. बताया जा रहा है कि वह बीजेपी से टिकट के दावेदार भी थे.

दिसंबर में GST संग्रह में 6% की बढ़त, सरकार का खजाना पहुंचा 1.74 लाख करोड़

  नई दिल्ली GST Collection से सरकार का खजाना लगातार बढ़ रहा है. गुरुवार 1 जनवरी 2026 को दिसंबर 2025 महीने में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection In December) का आंकड़ा जारी कर दिया गया है और ये शानदार रहा है. कलेक्शन साल के आखिरी महीने में सालाना आधार बढ़ोतरी के साथ 1.74 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है. इससे पिछले साल दिसंबर 2024 में ग्रॉस गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) रेवेन्यू 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा था. GST कलेक्शन में 6.1% की बढ़ोतरी सरकार द्वारा जारी किए गए दिसंबर महीने के जीएसटी कलेक्शन के डेटा पर नजर डालें, तो इसमें सालाना आधार पर 6.1 फीसदी की बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. बड़े टैक्स कट (GST Cut) के बावजूद घरेलू बिक्री से रेवेन्यू में धीमी ग्रोथ के बाद ये आंकड़ा सामने आया है. घरेलू ट्रांज़ैक्शन से ग्रॉस रेवेन्यू 1.2% बढ़कर 1.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया, जबकि दिसंबर के दौरान आयातित सामान से रेवेन्यू 19.7% बढ़कर 51,977 करोड़ रुपये हो गया. इसके अलावा रिफंड 31% के इजाफे के साथ उछलकर 28,980 करोड़ रुपये हो गया. नेट GST रेवेन्यू (रिफंड एडजस्ट करने के बाद) 1.45 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा, जो पिछले साल की तुलना में 2.2% ज्यादा है. बीते साल के आखिरी महीने में सेस कलेक्शन घटकर 4,238 करोड़ रुपये रह गया, जबकि दिसंबर 2024 में यह 12,003 करोड़ रुपये था. GST Cut का कलेक्शन पर असर रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 22 सितंबर 2025 से करीब 375 चीजों पर GST Rate Cut किया गया था, जिससे खासतौर पर रोजमर्रा के 99% सामानों के दाम घट गए थे. इसके साथ ही कंपन्सेशन सेस सिर्फ़ तंबाकू और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स पर लगाया जाता है, जबकि पहले लग्ज़री, सिन प्रोडक्ट्स पर भी लागू था. इसमें कहा गया है कि GST रेट कम होने से रेवेन्यू कलेक्शन पर असर पड़ा है.

रिपोर्ट: जीएसटी सुधारों के असर से भारत में कार और अन्य वाहन की बिक्री में 22% इजाफा

नई दिल्ली  भारत के यात्री वाहन (पैसेंजर व्हीकल) उद्योग में नवंबर 2025 में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली। त्योहारी सीजन के बाद भी लगातार मांग, जीएसटी दरों में कटौती और सर्दियों में शादी के सीजन के शुरू होने से गाड़ियों की मांग में वृद्धि देखी गई। इससे बिक्री और उत्पादन दोनों में सालाना आधार पर अच्छा इजाफा हुआ। आईसीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में गाड़ियों की रिटेल बिक्री पिछले साल के मुकाबले 22 प्रतिशत बढ़ी। हालांकि, अक्टूबर में त्योहारों के कारण हुई बिक्री के मुकाबले नवंबर में यह 29 प्रतिशत कम रही।  वहीं, होलसेल बिक्री (कंपनियों से डीलरों को गाड़ियां भेजना) 19 प्रतिशत बढ़कर 4.1 लाख गाड़ियों तक पहुंच गई, क्योंकि कंपनियों ने मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन जारी रखा। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में होलसेल बिक्री में 1 से 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका कारण स्थिर मांग, जीएसटी में कटौती, नए मॉडल्स की लॉन्चिंग और बाजार में बनी सकारात्मक स्थिति है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के पहले 8 महीनों में होलसेल बिक्री 3.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि रिटेल बिक्री 6.1 प्रतिशत बढ़ी है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, गाड़ियों की बिक्री बढ़ने से डीलरों के पास रखा स्टॉक भी संतुलित हुआ है। सितंबर के अंत में जहां गाड़ियों का स्टॉक करीब 60 दिनों का था, नवंबर तक घटकर 44–46 दिन रह गया। नवंबर में यात्री वाहनों की कुल बिक्री में यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत रही, जो अक्टूबर में 69 प्रतिशत थी, जबकि जीएसटी में कटौती के बाद मिनी, कॉम्पैक्ट और सुपर-कॉम्पैक्ट सेगमेंट में बिक्री से सुधार देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर महीने के दौरान भारत में तीन पहिया वाहनों की बिक्री में 21.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 71,999 यूनिट तक पहुंच गई, जबकि दो पहिया वाहनों की बिक्री में 21.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो 19,44,475 यूनिट तक पहुंच गई है। यही नहीं, शहरी क्षेत्रों में ज्यादा मांग के चलते स्कूटरों की बिक्री में 29 प्रतिशत की शानदार वृद्धि हुई और इनकी बिक्री 7,35,753 यूनिट तक पहुंच गई। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थिर मांग के चलते मोटरसाइकिलों की बिक्री में 17.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 11,63,751 यूनिट तक पहुंच गई। यात्री वाहनों की बढ़ती मांग के कारण नवंबर में तीन पहिया वाहनों की बिक्री में 24.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 59,446 यूनिट तक पहुंच गई। तो वहीं मालवाहक वाहनों की बिक्री में 10.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 10,874 यूनिट तक पहुंच गई। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत से यात्री वाहनों का निर्यात भी बढ़ा है। मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे देशों से मजबूत मांग के कारण भारतीय गाड़ियों की विदेशों में अच्छी बिक्री हो रही है।