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कोरबा जिले के तीन उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण में अनियमितताएं पाए जाने पर एफआईआर दर्ज

रायपुर.  कोबरा जिले में राशन वितरण कार्य में अनियमितता को लेकर प्राप्त शिकायतों पर प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए कई उचित मूल्य दुकानों के संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। शिकायतों पर खाद्य विभाग द्वारा जांच कराई गई। जांच में ग्राम पंचायत कोरकोमा, खोड्डल एवं पटपरा की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जिन शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में अनियमितताएं पाई गई है उन संचालकों के विरूद्ध प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज कराया गया है।  कोरकोमा स्थित दुकान में संचालक संस्था द्वारा लगभग 197.45 क्विंटल चावल एवं 22.82 क्विंटल नमक का व्यपवर्तन किया जाना सामने आया है। साथ ही लगभग 435 राशन कार्डधारियों को निर्धारित अवधि में राशन वितरण नहीं किया गया। इस मामले में संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रकरण दर्ज किया गया है। इसी प्रकार खोड्डल की उचित मूल्य दुकान में 334.98 क्विंटल चावल एवं 6 क्विंटल शक्कर के व्यपवर्तन का मामला सामने आया है। यहां दुकान का नियमित संचालन नहीं होने एवं सीमित दिनों में ही वितरण किए जाने की शिकायतें भी सही पाई गईं। इस पर छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं पटपरा (विकासखंड पाली) की दुकान में भी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में पाया गया कि लगभग 422 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण होने के बावजूद उन्हें राशन वितरित नहीं किया गया। इस प्रकरण में संचालकों के विरुद्ध थाना पाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है । विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2026 में भंडारण में विलंब एवं एई-पीडीएस सर्वर मेंटेनेंस के कारण कुछ स्थानों पर समय पर वितरण प्रभावित हुआ। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवितरित राशन के वितरण के लिए अप्रैल माह में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं तथा बैकलॉग वितरण शीघ्र सुनिश्चित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने कहा है कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

बिलासपुर में पीडीएस के तहत राशन का 70 प्रतिशत से अधिक भंडारण, 37 प्रतिशत हितग्राहियों को मिला राशन

रायपुर. बिलासपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन के संबंध में खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद्यान्न भंडारण एवं वितरण कार्य सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। खाद्य नियंत्रक, जिला बिलासपुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 तक तीन माह के खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की व्यवस्था की गई है। इसके तहत जिले में संचालित 695 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में आबंटन के विरुद्ध 70 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न का भंडारण किया जा चुका है। विभाग ने बताया कि किसी भी उचित मूल्य दुकान में तीन माह के खाद्यान्न भंडारण हेतु स्थान की कोई समस्या नहीं आई है। साथ ही, एपीएल मद के चावल का बीपीएल मद में समायोजन या वितरण नहीं किया जा सकता, जिसका पालन किया जा रहा है। राशन वितरण प्रक्रिया के तहत हितग्राहियों को तीन माह का राशन प्राप्त करने के लिए ई-पॉस मशीन में छह बार फिंगरप्रिंट सत्यापन करना पड़ रहा है। विभाग के अनुसार, जिले में अब तक 37 प्रतिशत हितग्राहियों को तीन माह का खाद्यान्न वितरित किया जा चुका है तथा वितरण कार्य निरंतर जारी है। खाद्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-पॉस मशीन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं है तथा एपीएल राशनकार्डधारियों के लिए मासिक आबंटन नियमित रूप से प्राप्त हो रहा है। जिले में राशन वितरण कार्य पूर्णतः व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

मुंगेली में बड़ा घोटाला: धान स्टॉक जांच में 2.54 करोड़ की अनियमितता, केंद्र प्रभारी के खिलाफ केस

मुंगेली. जिले में धान खरीदी को लेकर बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। जिले के हथनीकला धान खरीदी केंद्र में पदस्थ प्रभारी विक्रम सिंह राजपूत पर करीब ₹2.54 करोड़ के धान गबन का आरोप लगा है। मामले में सिटी कोतवाली थाना में FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बता दें कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा मुंगेली में पदस्थ पर्यवेक्षक भरत लाल कौशिक ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने लिखित आवेदन में आरोप लगाया है कि आरोपी द्वारा कुल 8216.30 क्विंटल धान की हेराफेरी कर अमानत में खयानत की गई है, जिसकी कुल कीमत ₹2,54,70,530 है। हथनीकला धान खरीदी केंद्र. कलेक्टर के निर्देश पर गठित हुई जांच टीम भरत लाल कौशिक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर (सहकारिता शाखा) मुंगेली द्वारा 30 मार्च 2026 को संयुक्त जांच दल गठित किया गया था। इस जांच दल में नायब तहसीलदार चंदन दुबे, सहकारिता विस्तार अधिकारी मिथलेश साहू, खाद्य निरीक्षक भानूप्रिया नंदकर, जिला सहकारी बैंक सरगांव के पर्यवेक्षक सुनील यादव और मंडी निरीक्षक शुभम पैकरा शामिल थे। टीम ने 8 अप्रैल 2026 को अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। भौतिक सत्यापन में सामने आई गड़बड़ी जांच रिपोर्ट में भौतिक सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड में 9798.70 क्विंटल धान दर्शाया गया था, जबकि मौके पर केवल 7534 क्विंटल (18835 बोरी) धान ही मिला। इसके अलावा 682.30 क्विंटल का वजन शॉर्टेज पाया गया। इस प्रकार कुल 8216.30 क्विंटल धान की कमी सामने आई, जिसकी कीमत प्रति क्विंटल ₹3100 के हिसाब से ₹2,54,70,530 आंकी गई है। धान की किस्म में भी बड़ा अंतर जांच में यह भी पाया गया कि धान की किस्म में भारी अंतर है। ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार मोटा धान 261.60 क्विंटल और सरना धान 9537.10 क्विंटल दर्ज था, जबकि मौके पर मोटा धान 1260.40 क्विंटल और सरना धान मात्र 322 क्विंटल पाया गया। इस तरह मोटा धान 998.80 क्विंटल अधिक और सरना धान 9215.10 क्विंटल कम मिला। नियमों का उल्लंघन, सिस्टम से छेड़छाड़ के मिले संकेत जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। कंप्यूटर ऑपरेटर की अनुपस्थिति में डेटा एंट्री की गई, जबकि बारदाना प्रभारी की गैरमौजूदगी में धान की लोडिंग और रख-रखाव किया गया। साथ ही आरोपी और उसके पिता द्वारा अनियमित तरीके से कार्य संचालन किए जाने की बात भी सामने आई है। जांच के दौरान जवाब नहीं देने पर दर्ज हुई FIR जांच के दौरान आरोपी विक्रम सिंह राजपूत पिछले 3-4 दिनों से अनुपस्थित पाया गया। उसका मोबाइल फोन बंद मिला और घर पर नोटिस चस्पा करने के बाद भी वह उपस्थित नहीं हुआ। इससे जानबूझकर गड़बड़ी करने की आशंका और मजबूत हो गई है। सहायक आयुक्त सहकारिता द्वारा आरोपी को 10 अप्रैल 2026 को अंतिम अवसर देकर जवाब मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद नोडल अधिकारी के निर्देश पर 13 अप्रैल 2026 को सिटी कोतवाली थाना मुंगेली में FIR दर्ज कराई गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

‘नारी शक्ति’ को मिलेगा संसद में स्वर: लक्ष्मी वर्मा ने सीएम साय के पत्र पर जताया समर्थन

पलारी/पटना. छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक अवसर पर सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया था, जिसके जवाब में लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण का संकल्प है। मैं संसद में पूरी ताकत से इसके पक्ष में आवाज उठाऊंगी।” सीएम साय ने पत्र में कहा था कि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण को प्रभावी बनाना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ में पहले से ही स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है और अब देश स्तर पर भी यह बदलाव जरूरी है। इस पर लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “मुख्यमंत्री का मार्गदर्शन प्रेरणादायक है। मैं गर्व से कहती हूं कि छत्तीसगढ़ ने महिलाओं को जो सम्मान दिया है, वह पूरे देश के लिए मिसाल है।” अपने पत्र में लक्ष्मी वर्मा ने लिखा, “एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरे लिए यह गौरव का विषय है कि मेरा पहला संसदीय सत्र इस ऐतिहासिक विधेयक से जुड़ा है। मैं पूरी सक्रियता, गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी भूमिका निभाऊंगी।” उन्होंने आगे कहा – “आइए, हम सभी मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जहां महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और सशक्त भागीदारी मिले। यही सच्चे लोकतंत्र की कसौटी है।” गौरतलब है कि 16 अप्रैल को होने वाला संसद सत्र महिला आरक्षण को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है। लक्ष्मी वर्मा ने सीएम साय को विश्वास दिलाया है कि वह इस दिशा में हर संभव भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा: सहकार से समृद्धि के संकल्प को साकार करेगा नवगठित पैक्स

सहकार से समृद्धि के संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होंगे नवगठित पैक्स: मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का किया वर्चुअल शुभारंभ प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर हुई 2 हजार 573 किसानों को आसानी से मिलेगी खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण की सुविधा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया।उन्होंने इसे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह कदम ऐतिहासिक है।                 मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई समितियों के शुरू होने से अब पूरे प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाता किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक और सहकारिता के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, ताकि गांव और किसान समृद्ध बन सकें। उन्होंने बताया कि अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं उनके गांव के पास ही उपलब्ध होंगी। साथ ही धान बेचने की प्रक्रिया भी आसान होगी और किसान अपनी नजदीकी समिति में ही धान बेच सकेंगे।            मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले से कार्यरत 2058 समितियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कंप्यूटरीकृत किया गया है और इनमें माइक्रो एटीएम भी लगाए गए हैं, जिनसे किसान 20 हजार रुपये तक की राशि निकाल सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवगठित 515 समितियों में से 197 समितियां आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूर-दराज के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये समितियां केवल खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन जैसे सहायक कृषि गतिविधियों से भी जुड़ेंगी।  साथ ही समितियों में लोक सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे, जहां एक ही स्थान पर 25 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे इन समितियों के सदस्य बनकर इसका अधिकतम लाभ उठाएं और इनके संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।              इस अवसर पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप वर्चुअल उपस्थित रहे, साथ ही कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा सचिव सहकारिता सी.आर. प्रसन्ना, सहकारिता विभाग के प्रबंध संचालक के.एन. कांडे सहित विभिन्न जिलों से लगभग 2500 जनप्रतिनिधिगण, किसान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

PM नरेंद्र मोदी का ऐलान: वेदांता हादसे में मृतकों को ₹2 लाख, घायलों को ₹50 हजार सहायता

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर बॉयलर ब्लास्ट हो गया। इस हादसे में अब तक 13 मजदूरों की मौत हुई है। वहीं 26 से अधिक मजदूर घायल हुए हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर शोक जताया है और पीएमएनआरएफ की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में बिजली संयंत्र में हुई दुर्घटना बेहद दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता में लगा हुआ है। पीएमएनआरएफ की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपये सहायता राशि दी जाएगी। प्लांट के बाहर मजदूरों का हंगामा इधर हादसे के बाद प्लांट के बाहर मजदूरों के परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया है। वे प्रबंधन पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कुछ मजदूर लापता हैं। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन कोई जानकारी नहीं दे रहा है। विधायक रामकुमार यादव परिजनों के साथ प्लांट के सामने बैठे हैं। मृतकों के परिजनों और घायलों को उचित मुआवजे की मांग की जा रही है। कलेक्टर ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। हादसे की जानकारी मिलते ही कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर घटना स्थल पर पहुंचे हैं। दोनों अधिकारियों ने मौके पर ही राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया और टीमों का नेतृत्व करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। 

फैक्ट्रियों में सुरक्षा पर सवाल: छत्तीसगढ़ में 3 साल में 296 मजदूरों की जान गई, बालको जैसे हादसे फिर चर्चा में

रायपुर. छत्तीसगढ़ में तेजी से औद्योगिक विकास हो रहा है. विकास की रफ्तार में कई बड़े-बड़े पावर प्लांट स्थापित हो चुके हैं. लेकिन सवाल अब भी यहां काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर है. उन्हें सुरक्षा मानकों के अनुरूप जरूरी सेफ्टी उपकरण दिए जा रहे हैं. पिछले 3 सालों में औद्योगिक दुर्घटनाओं में 296 मजदूरों की मौत हुई है. मंगलवार को सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में हुआ हादसा एक बार फिर 2009 के बालको के दर्दनाक हादसे की यादें ताजा कर गया, जिसमें 40 मजदूरों की मौत हुई थी. प्रदेश में हुए औद्योगिक हादसे  2009 – बालको प्लांट में 240 मीटर ऊंची चिमनी गिरने से 40 श्रमिकों की मौत. 2006 – बलौदाबाजार के रियल इस्पात प्लांट के डस्ट सेटलिंग चेंबर में धमाके से 7 श्रमिकों की मौत. 2025 – रायपुर के सिलतरा में गोदावरी स्टील प्लांट में छत गिरने से 6 श्रमिकों की मौत. 2024 – सरगुजा एलुमिनियम प्लांट हादसे में कोयले से भरा बेल्ट गिरने से 4 श्रमिकों की मौत. लगातार हो गए छोटे हादसे फरवरी 2026 : रायगढ़ के मंगल कार्बन फैक्ट्री में विस्फोट के बाद दो श्रमिकों और एक बच्ची की मौत हुई. मार्च 2026 : बलौदाबाजार के स्वदेश मेटालिक प्लांट में 30 फीट की ऊंचाई से गिरने से एक श्रमिक की मौत. जून 2025 : भिलाई स्टील प्लांट में 1000 किलो का जंबो बैग गिरने से एक महिला श्रमिक की मौत हो गई. मई 2024 : बेमेतरा में स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड फैक्ट्री में हुए विस्फोट में एक की मौत और 6 लोग घायल हुए. अप्रैल 2026 : बीएसपी में टर्बाइन में आग से सात कर्मचारी घायल हुए. कई श्रमिकों ने कूदकर जान बचाई. तीन वर्षों में 296 श्रमिकों ने गंवाई जान, 248 घायल मार्च में विधानसभा में राज्य सरकार ने जानकारी दी थी कि पिछले तीन वर्षों में औद्योगिक दुर्घटनाओं में 296 श्रमिकों की मौत हुई, जबकि 248 घायल हुए. उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया था कि राज्य में 7,324 कारखाने संचालित हैं, जिनमें 948 ‘खतरनाक’ और 32 ‘अत्यंत खतरनाक’ श्रेणी में हैं. सरकार ने सुरक्षा मानकों, पीपीई किट और आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य बताई हैं. हर हादसे के बाद जांच, लेकिन सुरक्षा मानकों पर अब भी सवाल सक्ति जिले के वेदांता प्लांट हादसे ने फिर से औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. श्रमिक संगठनों ने मामले की जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो. फिलहाल प्रशासन घायलों के बेहतर उपचार और राहत कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है.

साय कैबिनेट ने किए 9 बड़े फैसले, UCC समिति का गठन, महिलाओं को 50% रजिस्ट्री छूट, खनन-उद्योग नियमों में बदलाव

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज (15 अप्रैल) को मंत्रिपरिषद की बैठक संपन्न हो गई है। यह बैठक मंत्रालय स्थित महानदी भवन के मंत्रिपरिषद कक्ष (एम-5/20) में चल रही है। इस बैठक में कई विभागों से आए प्रस्तावों और योजनाओं की समीक्षा की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –  1.    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ में Uniform Civil Code लागू करने के संबंध में Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया तथा समिति के सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया।   छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य के नागरिकों, संगठनों एवं विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करेगी। यह समिति वेब पोर्टल के माध्यम से फीडबैक भी आमंत्रित कर सकती है। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार प्रारूप को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य में एक समान और पारदर्शी नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित हो सके। 2.    मंत्रिपरिषद ने महिलाओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि महिलाओं के नाम पर होने वाले भूमि रजिस्ट्रेशन पर लगने वाले शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति अर्जन के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस निर्णय से सरकार को लगभग 153 करोड़ रुपये राजस्व की कमी होगी, लेकिन महिला सशक्तीकरण के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना गया है।  3.    मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके तहत उन्हें जीवनकाल में एक बार छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर 25 लाख रूपए तक की संपत्ति (भूमि/भवन) क्रय करने पर देय स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट प्रदान किया जाएगा। देश सेवा में समर्पित सैनिकों का जीवन प्रायः स्थानांतरण और अस्थायित्व से भरा होता है, जिसके बाद वे स्थायी निवास के लिए संपत्ति क्रय करते हैं, ऐसे में यह निर्णय उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करेगा।  4.    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन से सेवा क्षेत्र को आबंटन हेतु स्पष्ट वैधानिक पात्रता मिलेगी। भूमि आवंटन प्रावधानों में न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा का तार्किक सामंजस्य स्थापित होगा। लैंड बैंक भूखण्डों हेतु एप्रोच रोड का वैधानिक प्रावधान किया गया है। NBFC सहित वित्तीय संस्थाओं को सम्मिलित करने से उद्योगों के लिए ऋण उपलब्धता के विकल्प बढ़ेंगे। कंपनियों में शेयर धारिता परिवर्तन से संबंधित प्रावधानों में व्यावहारिक स्पष्टता आएगी और Ease of Doing Business सुनिश्चित होगा। PPP मॉडल के लिए स्पष्ट प्रावधान से निजी निवेश एवं औद्योगिक अवसंरचना विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।  5.    छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2025 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। अब केन्द्र अथवा राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम जैसे छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पाेरेशन लिमिटेड को रेत खदानें आरक्षित की जा सकेगी। इससे पट्टेदार के एकाधिकार के फलस्वरूप उत्पन्न रेत की आपूर्ति-संकट में कमी आएगी तथा दुर्गम क्षेत्रों में रेत खदानों के सुगम संचालन सहित रेत की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।   6.    मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 में व्यापक संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, नियंत्रण और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करना है, अवैध खनन को रोकना तथा प्रक्रिया का सरलीकरण करना है। गौण खनिज की ऐसी खदाने जो अकारण बंद रहती है अथवा शिथिल रहती है, में कठोर प्रावधान लाया गया है। अब इन खदानों के अनिवार्य भाटक दर में 30 वर्षाें के बाद वृद्धि की गई है। इन खदानों को व्यपगत (लैप्स) घोषित किए जाने संबंधी कठोर प्रावधानों को नियमों में शामिल किया गया है, जिसके फलस्वरूप ऐसी खदानों का संचालन अनिवार्य रूप से किये जाने की बाध्यता सुनिश्चित हो सकेगी। खनिजों के अवैध उत्खनन/परिवहन/भंडारण पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें न्यूनतम जुर्माना 25 हजार रूपए निर्धारित किया गया है, जो कि 5 लाख रूपए तक भी हो सकता है। अवैध परिवहन के मामलों में सुपुर्दगी दिए जाने हेतु जमानत राशि का भी निर्धारण किया गया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र संबंधी प्रावधान को पूरे प्रदेश में एकसमान लागू किया जा रहा है।  इसके अतिरिक्त उत्खनन पट्टों के समामेलन, अनुबंध पश्चात भू-प्रवेश एवं पर्यावरणीय शर्तों के अनुरूप संचालन जैसे प्रावधानों को भी सुदृढ़ किया गया है, जिससे खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित दोहन और राज्य के आर्थिक सुदृढ़ीकरण को बल मिलेगा। 7.    मंत्रिपरिषद द्वारा दुधारू पशु प्रदाय संबंधी पायलट प्रोजेक्ट योजना में समस्त सामाजिक वर्ग के हितग्राहियों को लाभान्वित किए जाने संबंधी संशोधन तथा एनडीडीबी के साथ निष्पादित एमओयू की संबंधित कंडिका में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इससे अनुसूचित जनजाति वर्ग सहित सभी सामाजिक वर्ग के हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा जिससे उनके स्वरोजगार और आय में वृद्धि होगी तथा प्रदेश के सर्वांगीण, सामाजिक एवं आर्थिक विकास में सहयोग प्राप्त हो सकेगा।  8.    मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने हेतु आवश्यक टीकाद्रव्यों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए National Dairy Development Board (NDDB) की सब्सिडरी कंपनी Indian Immunologicals Limited, हैदराबाद से टीकों की खरीदी किए जाने की अनुमति प्रदान की गई है। निविदा प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा न बन पाने एवं जेम पोर्टल पर … Read more

घायलों के इलाज में कलेक्टर और एसपी ने बढ़ाई मुस्तैदी

घायलों के बेहतर उपचार हेतु कलेक्टर–एसपी मुस्तैद मृतकों के परिजनों से संपर्क एवं सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी स्वास्थ्य मंत्री भी निरंतर जिला प्रशासन के संपर्क में रायपुर  सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता प्लांट में बॉयलर फटने से हुए भीषण हादसे के बाद जिला प्रशासन त्वरित रूप से सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय घटना एवं घायलों के उपचार को लेकर कलेक्टर श्री अमृत विकास टोपनो तथा पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर से लगातार संपर्क में हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल भी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और कलेक्टर के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी तथा प्रशासन की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टीस हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया। प्रशासन द्वारा घटनास्थल को बैरिकेड कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। कलेक्टर  टोपनो ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव देह को उनके गृहग्राम तक एम्बुलेंस के माध्यम से भेजने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। हादसे में घायल अथवा प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर भी सहमति बनाई गई है। कलेक्टर ने बताया कि मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा कर सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय है। मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों हेतु 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है। पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी दी कि इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 17 की मृत्यु हो चुकी है तथा 19 घायल हैं, जिनका उपचार जारी है।  कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रहेगा और परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मृतकों के नाम हादसे में मृतकों में छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 तथा उत्तर प्रदेश के 2 मजदूर शामिल हैं। मृतकों के नाम इस प्रकार हैं– रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार), अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़), थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़), तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड), आकिब खान (दरभंगा, बिहार), सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), अब्दुल करीम (झारखंड), उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़), शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल), पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), अशोक परहिया (पलामू, झारखंड), मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़), कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल), नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़), शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)।

सुरक्षित मातृत्व की दिशा में बड़ा कदम: बस्तर में शुरू हुआ ‘रेड कॉल सेंटर’, हर डिलीवरी होगी मॉनिटर

जगदलपुर. बस्तर जिले में सुरक्षित मातृत्व की अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन और यूनिसेफ़ ने एक अत्यंत संवेदनशील और अनूठी पहल की शुरुआत की है. सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर जिला कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में महारानी अस्पताल में ‘रेड (रिचिंग एवरी डिलिवरी) कॉल सेंटर’ का विधिवत शुभारंभ किया गया. इस गौरवपूर्ण क्षण को और भी विशेष बनाते हुए कलेक्टर ने स्वयं पहल की और अस्पताल में उपस्थित एक नवजात शिशु की माता को सादर आमंत्रित कर उनके हाथों से ही इस केंद्र का उद्घाटन करवाया. यह हृदयस्पर्शी दृश्य इस सशक्त संदेश का प्रतीक बना कि मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्त सरकारी योजनाएं वास्तव में माताओं के समर्पण के लिए हैं और उनकी सक्रिय सहभागिता ही इन प्रयासों को सफल बनाएगी. इस नई व्यवस्था के तहत संचालित “हरिक मांय, हरिक पिला”(खुश मां, खुश बच्चा) पहल के माध्यम से अब बस्तर की हर गर्भवती महिला तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है, जैसा कि इसके नाम ‘रेड’ यानी ‘रिचिंग एवरी डिलिवरी’ से स्पष्ट होता है. महारानी अस्पताल परिसर में स्थित इस हाई-टेक कॉल सेंटर के जरिए जिले की उन महिलाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनकी गर्भावस्था 7 से 9 माह के बीच है और जो उच्च जोखिम की श्रेणी में आती हैं. सेंटर के प्रतिनिधि सप्ताह में एक से दो बार इन महिलाओं से सीधे फोन पर संपर्क साधेंगे, जिसका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव के फायदों के प्रति जागरूक करना और उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ समन्वय स्थापित करने में हरसंभव सहायता प्रदान करना है. प्रशासन की यह दूरगामी योजना केवल प्रसव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह जन्म के उपरांत भी सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगी. प्रसव के बाद के शुरुआती 30 दिनों तक माँ और नवजात शिशु की सेहत की बारीकी से निगरानी की जाएगी. इस दौरान कॉल सेंटर के माध्यम से नियमित फॉलो-अप लिया जाएगा ताकि प्रसव पश्चात होने वाली किसी भी संभावित स्वास्थ्य संबंधी जटिलता का समय रहते पता लगाया जा सके और त्वरित चिकित्सकीय समाधान सुनिश्चित किया जा सके. स्वास्थ्य और तकनीक के इस अनूठे संगम से बस्तर प्रशासन का विजन प्रत्येक प्रसव को सुरक्षित बनाना और जिले में स्वस्थ मातृ-शिशु परंपरा को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है.