samacharsecretary.com

101 कन्याओं का पूजन कर दिया संरक्षण का संदेश, स्वास्थ्य और मानसिक सशक्तीकरण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा गुरुवार को महासमुंद के अंबेडकर भवन, बागबाहरा रोड में “कन्या पूजन से कन्या संरक्षण तक” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 350 किशोरी बालिकाओं एवं माताओं ने सहभागिता की। आयोजन के माध्यम से बालिकाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने के साथ उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 101 कन्याओं के पूजन एवं कन्या भोज के साथ हुई। इसके बाद जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बालिकाओं और माताओं को शारीरिक स्वास्थ्य, कैंसर से बचाव, किशोरावस्था में होने वाले बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। आयोग का उद्देश्य कन्या पूजन की परंपरा को बालिकाओं के संरक्षण और उनके अधिकारों के प्रति जिम्मेदारी के संकल्प से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बेटियों का सम्मान केवल किसी पर्व या विशेष अवसर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए वर्षभर प्रयास किए जाने चाहिए। बाल मनोचिकित्सक डॉ. गार्गी पांडेय ने बच्चों की सुरक्षा, उनसे संवाद करने के तरीके और व्यवहार के महत्व पर अपनी बात रखी। साथ ही मोबाइल के अत्यधिक उपयोग, स्क्रीन टाइम और डिजिटल लत के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति अभिभावकों को जागरूक किया गया। बालको मेडिकल सेंटर, नया रायपुर की विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. यामिनी शुक्ला भविष्कर ने सर्वाइकल कैंसर के कारणों, लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो सकते, इसलिए समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श महत्वपूर्ण है। उन्होंने एचपीवी जांच, पैप स्मीयर और एचपीवी टीकाकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। वहीं, बालको मेडिकल सेंटर की वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. अनीशा ने ब्रेस्ट कैंसर के संभावित लक्षणों और बचाव के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने स्तन में गांठ, आकार में बदलाव अथवा त्वचा में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं किशोरियों के लिए स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग संबंधी पहल भी की गई। एम्स रायपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा साहू ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, माहवारी स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने किशोरियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी समस्या की स्थिति में उचित चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया। आईटीएसए हॉस्पिटल, रायपुर की बाल मनोचिकित्सक डॉ. इशिका जायसवाल ने किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, चिंता, आत्म-जागरूकता और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य को समझने तथा उन्हें सकारात्मक वातावरण देने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी गई। नाटक के माध्यम से बालिकाओं के सम्मान, संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के सामने स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और सुरक्षा से जुड़ी अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जागरूकता, समय पर जांच, उचित परामर्श और विभिन्न संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने एम्स रायपुर, बालको मेडिकल सेंटर और आईटीएसए हॉस्पिटल जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर बालिकाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद की पहल की है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव, एचपीवी टीकाकरण और समय पर जांच के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और एचपीवी टीकाकरण के संबंध में चिकित्सकीय सलाह लेकर उपलब्ध पात्रता एवं सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार टीकाकरण सुनिश्चित करें। अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि आयोग “फ्रॉम डिलिबरेशन टू डिलीवरी” अर्थात विचार-विमर्श से प्रभावी क्रियान्वयन के सिद्धांत के साथ प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त बचपन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कन्या पूजन की सार्थकता तभी है, जब प्रत्येक बेटी को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के समान अवसर मिलें। बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोंगरा पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम ठाकुर सहित अन्य पार्षद एवं जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। उपस्थित बालिकाओं और माताओं ने बेटियों के सम्मान, स्वास्थ्य एवं संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और समाज में इस संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

बालोद के आदिवासी कन्या छात्रावास का डॉ. वर्णिका शर्मा ने किया औचक निरीक्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने बालोद प्रवास के दौरान आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित शासकीय पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास, बालोद का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावास में उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए छात्राओं से संवाद किया और उनकी आवश्यकताओं एवं सुविधाओं की जानकारी ली। बच्चियों ने ट्यूशन टीचर, कंप्यूटर एवं लाइब्रेरी की पूरजोर मांग की। निरीक्षण के दौरान डॉ. शर्मा ने छात्रावास में निवासरत छात्राओं से बातचीत करते हुए उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी छात्राएं अच्छे से शिक्षा ग्रहण कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करें तथा देश और प्रदेश का नाम रोशन करें। उन्होंने छात्राओं से उनकी पढ़ाई, रहन-सहन और छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में भी जानकारी ली। डॉ. शर्मा ने छात्रावास के बालिका कक्षों, बाथरूम तथा सेनेटरी वेंडिंग मशीन का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्राओं के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्रावास अधीक्षिका सहित संबंधित अधिकारियों को छात्रावास में आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने तथा सभी सुनिश्चित सुविधाएं समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावास में छात्राओं की सुरक्षा, स्वच्छता एवं मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही छात्राओं की आवश्यकताओं को गंभीरता से लेते हुए उनकी समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन तोमन साहू सहित संबंधित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

हर छात्र बनेगा बच्चों के अधिकारों का प्रहरी – डॉ. वर्णिका शर्मा

रायपुर.  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, रायपुर द्वारा “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। “रक्षक” पाठ्यक्रम एक विशेष शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह एमओयू राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और सुरक्षा संबंधी विषयों में प्रशिक्षित किया जा सके। इसी क्रम में आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप प्रदान करने हेतु विश्वविद्यालयीन परामर्श बैठक का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके पश्चात आयोग के सचिव श्री प्रतीक खरे एवं आयोग की डायरेक्टर श्रीमती संगीता बिंद द्वारा उपस्थित कुलपतियों, कुलसचिवों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। जिसके पश्चात आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हम सभी का सामूहिक प्रयास है कि इस पहल को अंतिम स्वरूप देकर इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित एवं जागरूक बन सके। इस बैठक में राज्य के तीन शासकीय और तीन प्राइवेट विश्वविद्याल शामिल हुए जिसमें पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी एवं अंजनेय यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव और अधिकृत प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षक पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार किए गए उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना रहा, ताकि पाठ्यक्रम को आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को अपने सुझाव एवं विचार साझा करने हेतु आमंत्रित किया गया तथा पाठ्यक्रम का गहन मूल्यांकन किया गया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पाठ्यक्रम की उपयोगिता, संरचना एवं व्यवहारिक पहलुओं पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।  बैठक में उपस्थित सभी कुलपतियों, कुलसचिव, एवं प्रतिनिधि प्रोफेसर्स ने आयोग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया और इसके सफल क्रियान्वयन हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम को शीघ्र ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित किया जा सकेगा।