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स्वच्छता की नई इबारत लिखता बास्तानार

रायपुर स्वच्छता की नई इबारत लिखता बास्तानार स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन और निरंतर जन-संवाद के सार्थक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं, जिसके फलस्वरूप बस्तर जिले के जनपद पंचायत बास्तानार की ग्राम पंचायत कोड़ेनार ने ओडीएफ प्लस मॉडल ग्राम होने का गौरव हासिल किया है। इस परिवर्तन की नींव गाँव की उन बुनियादी समस्याओं के समाधान से रखी गई, जहाँ बाजार और घरों से निकलने वाले कचरे के कारण ग्रामीण लंबे समय से परेशान थे। चूँकि स्वच्छता का सीधा संबंध खान-पान से होता है और दैनिक उपभोग की अधिकांश वस्तुएं बाजार से आती हैं, इसलिए गाँव को स्वच्छ बनाने की मुहिम की प्रभावी शुरुआत भी बाजारों से ही की गई। खुले में कचरा फेंकने की इस प्रवृत्ति को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने सीधा मोर्चा संभाला, जिसमें मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बास्तानार सहित ब्लॉक और कलस्टर समन्वयकों ने स्वयं मौजूद रहकर ग्रामीणों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से निरंतर संवाद स्थापित किया।            विकास की इस प्रक्रिया में केवल बुनियादी ढांचा खड़ा करना ही पर्याप्त नहीं था, बल्कि उनके प्रभावी संचालन और रख-रखाव के लिए तकनीकी समझ की कमी को दूर करना भी एक बड़ी चुनौती थी। इस आवश्यकता को समझते हुए ग्राम और विकासखण्ड स्तर के अधिकारियों, स्वच्छताग्राही महिलाओं तथा जनप्रतिनिधियों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाया गया। इस प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को घर-घर कचरा संग्रहण की तकनीक, प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण (रिसायकिल) की प्रक्रिया, गंदे पानी का सुरक्षित निपटान तथा स्कूलों और आंगनबाड़ियों में स्वच्छता गतिविधियों के संचालन जैसी व्यावहारिक जानकारियां दी गईं। साथ ही 15 वें वित्त आयोग की राशि के नियमानुसार उपयोग और उसकी मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया गया ताकि स्वच्छता के कार्य निरंतर जारी रह सकें।            जन-जागरूकता को एक आंदोलन का रूप देने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों का व्यापक सहारा लिया गया, जिसके तहत दीवार लेखन, स्कूली बच्चों की रैलियों और घर-घर संपर्क अभियानों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया। विशेष रूप से महिलाओं और बालिकाओं को केंद्र में रखते हुए माहवारी स्वच्छता प्रबंधन और ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, समूहों की महिलाओं और पंचायत प्रतिनिधियों के आपसी तालमेल ने इस अभियान को और मजबूती प्रदान की, जिससे आज बास्तानार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता न केवल एक आदत, बल्कि एक गौरवपूर्ण पहचान बन चुकी है।

मखाना खेती की नई तकनीक सीखने पहुंचे MP के किसान, लिंगाडीह में हुआ प्रशिक्षण

रायपुर मध्यप्रदेश के किसानों का ग्राम लिंगाडीह आरंग में मखाना खेती भ्रमण एवं प्रशिक्षण संपन्न धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अब एक नई फसल अपनी पहचान बना रही है – सुपर फूड मखाना, जिसे काला हीरा भी कहा जाता है। स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर मखाने की खेती अब राज्य में आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ हो रही है। मखाना उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर एवं अध्यक्ष जनपद सदस्य आरंग,  रिंकू चंद्राकर ने की. मध्य प्रदेश के किसानो  सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि  चंद्रहास चंद्राकर ने कहा की केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के  आर्थिक उन्नति के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड सेन्ट्रल सेक्टर स्कीम में शामिल हुआ है इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं.हमारे मुख्य मंत्री  विष्णु देव साय कृषि मंत्री  राम विचार नेताम जी के द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने विशेष प्रयास किया जा रहा है  चंद्राकर ने कहा की छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यवसायिक उत्पादन आरंग ब्लॉक के ग्राम लिंगाडीह के किसान स्व.  कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था। राज्य का प्रथम मखाना प्रसंस्करण केंद्र का उद्घाटन 5 दिसंबर 2021 को ग्राम लिंगाडीह में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। अब मखाना उत्पादन में प्रदेश में आरंग का नाम अपनी अलग पहचान बना चुका है.   कार्यक्रम के अध्यक्ष जनपद सदस्य  रिंकू चंद्राकर ने कहा किया हमारे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का प्रथम मखाना उत्पादन एवं संस्करण केंद्र हमारे क्षेत्र ग्राम लिंगाडीह में स्थापित हुआ है.छटेरा, निसदा एवं अन्य गांव में भी इसके विस्तार हेतु प्रयास किया जा रहे हैं हमारे इस केंद्र में न केवल हमारे प्रदेश के बल्कि अन्य प्रदेश के लोग भी यहां मखाना की खेती सीखने आ रहे हैं जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है.  मध्य प्रदेश के उमरिया जिला से 50 किसानों का एक भ्रमण दल कृषि विभाग के द्वारा मखाना की खेती के भ्रमण हेतु रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक स्थित ओजस फॉर्म का भ्रमण किया। इस दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए। राष्ट्रीय मखाना महोत्सव 2024 एवं 2025 में सम्मानित मखाना उत्पादक किसान  एवं ओजस फार्म दाऊजी मखाना के प्रबंधक  संजय नामदेव ने मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ में 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन लगभग 10 क्विंटल के आसपास प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि 6 माह की अवधि वाले फसल में किसी भी प्रकार का कीट व्याधि का प्रकोप नहीं होता है और न ही किसी प्रकार की चरी और चोरी की समस्या रहती है। इंदिरा गाँधी कृषि विश्व विद्यालय के सब्जी विज्ञान के पी एच डी छात्र डॉ योगेंद्र चंदेल ने किसानों को मखाना की खेती के लिए आवश्यक तकनीक और संसाधनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती तालाब एवं खेत दोनों विधि से की जाती है अधिकतम उत्पादन के लिए धान की तरह खेत की मताई 1 मीटर की दुरी पर 55 दिन के नर्सरी की 4000 पौधो की रोपाई एक मीटर पौधा से पौधा एवं कतार से कतार की दुरी पर रोपाई समय समय पर नींदाई  खाद प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने पर अधिकतम उत्पादन मिलता है मखाना की खेती प्रसंसकरण एवं विपणन के लिए हमारे द्वारा किसानों को  प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है। ICAR-CIPHET (केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), लुधियाना, पंजाब से प्रशिक्षण प्राप्त शिव नारायण साहू ने मखाना के प्रोसेसिंग की जानकारी देते हुए बताया कि 1 किलो मखाना के बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप प्राप्त होता है, जिसकी बाजार में कीमत ₹700 से लेकर ₹1000 तक होती है। उन्होंने बताया कि यदि किसान मखाना का उत्पादन कर स्वयं प्रसंस्करण कर पैकेजिंग करके भेजते हैं तो प्रति एकड़ अधिकतम लाभ प्राप्त हो सकता है। इस भ्रमण के दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में   शिव साहू से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा हो सकता है और यह उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मखाना बोर्ड से इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को मखाना की खेती के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है, और उन्हें इसके लिए सब्सिडी भी दी जाती है। इस भ्रमण में मध्य प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से भ्रमण दल प्रभारी  दहायत एवं भ्रमण दल में शामिल किसानों ने बताया कि वे मखाना की खेती के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्साहित हैं और इसे अपने खेतों में अपनाने के लिए तैयार हैं।

नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आगामी आम एवं उप निर्वाचन 2026 के लिए निर्वाचक नामावली तैयार एवं पुनरीक्षित किए जाने हेतु कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली दिनांक 01 अप्रैल 2026 की स्थिति के आधार पर तैयार की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम संबंधित स्थानीय निकाय के क्षेत्र, वार्ड अथवा पंचायत से संबंधित भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में दर्ज होंगे, वही मतदाता स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज कराने के पात्र होंगे। जारी कार्यक्रम के अनुसार दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तिथि 23 अप्रैल 2026 तक जिन मतदाताओं के नाम भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा निर्वाचक नामावली में दर्ज होंगे, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रारूप क-1 में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर स्थानीय निकाय की निर्वाचक नामावली में अपना नाम दर्ज करा सकेंगे। नगरीय निकाय उप निर्वाचन के अंतर्गत अध्यक्ष के कुल 02 पद, क्रमशः नगरपालिका परिषद सारंगढ़ (जिला-सारंगढ़-बिलाईगढ़) तथा नगरपालिका परिषद शिवपुर-चरचा (जिला-कोरिया) में रिक्त हैं, साथ ही पार्षदों के 15 पद भी रिक्त हैं। इसके अतिरिक्त नवगठित चार निकायों—नगर पंचायत घुमका (जिला-राजनांदगांव), नगर पंचायत बम्हनीडीह (जिला-जांजगीर-चांपा), नगर पंचायत शिवनंदनपुर (जिला-सूरजपुर) तथा नगर पंचायत पलारी (जिला-बलौद)—में अध्यक्ष के 04 पद तथा पार्षदों के कुल 60 पद रिक्त हैं। इसी प्रकार त्रिस्तरीय पंचायतों में जनपद पंचायत सदस्य के 08 पद, सरपंच के 78 पद तथा पंच के 1056 पद रिक्त हैं। इस प्रकार प्रदेश के 33 जिलों में कुल 1142 पद रिक्त हैं, जिनका निर्वाचन कराया जाना है। निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु जारी कार्यक्रम के अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा प्राधिकृत अधिकारियों का प्रशिक्षण 24 मार्च 2026 तक कराया जाएगा तथा निर्वाचक नामावली का मुद्रण 09 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा, जिसके बाद दावे-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावे-आपत्तियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जबकि प्रारूप क-1 में दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल 2026 होगी। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा दावे-आपत्तियों के निराकरण के आदेश के विरुद्ध अपील ऐसा आदेश पारित होने के 05 दिवस के भीतर सक्षम अधिकारी के समक्ष की जा सकेगी।  निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा।

वृहत एच.पी.वी. टीकाकरण अभियान में 12 हजार से अधिक बालिकाओं को लगेगा टीका

रायपुर कबीरधाम जिले में सर्वाइकल कैंसर से बचाव में लिए वृहत ‘‘एच.पी.वी. टीकाकरण अभियान’’ शुरू होने जा रहा है। राज्य शासन की संवेदनशील पहल पर यह वृहत कार्यक्रम प्रारंभ होने जा रहा है। अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक गत दिवस आयोजित की गई। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस टीकाकरण अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि 14 वर्ष से अधिक एवं 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को एच.पी.वी. टीकाकरण किया जाएगा। यह अभियान जिले के चिन्हांकित स्वास्थ्य संस्थाओं में संचालित किया जाएगा तथा एच.पी.वी. का टीका पूरी तरह सुरक्षित है। कलेक्टर  गोपाल वर्मा ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए 14-15 वर्ष की बालिकाओं के चिन्हांकन, पालकों को जानकारी प्रदान करना और आवश्यक सहमति लेने का कार्य करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में एक बड़ी समस्या है। ऐसे में यह टीकाकरण कार्यक्रम बच्चियों जरूरी सुरक्षा कवच प्रदान करेगी। इसका लाभ जिले की हर पात्र बालिका को मिलना चाहिए। सीएमएचओ डॉ. डी.के. तुरे ने अभियान के बारे में बताया कि प्रतिवर्ष विश्व में लगभग 74 हजार से 77 हजार महिलाओं की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर से होती है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई मौतें भारत में होती हैं। करीब 48 प्रतिशत मामलों को समय रहते पहचान कर बचाया जा सकता है, लेकिन 50 से 60 प्रतिशत मामलों की पहचान अंतिम चरण में होती है। एच.पी.वी. वैक्सीन (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए लगाया जाता है। टीकाकरण के लिए आधार कार्ड के आधार पर आयु का निर्धारण किया जाएगा। एच.पी.वी. वैक्सीन की सिंगल डोज (0.5 एम.एल.) दी जाएगी। यह अभियान उन शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में संचालित किया जाएगा, जहां मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हैं। अभियान तीन माह तक चलेगा और वैक्सीन बायीं ऊपरी बांह में लगाया जाएगा। यह टीका गर्भावस्था अथवा खाली पेट में नहीं लगाया जाता है। जिले में कुल जनसंख्या के आधार पर 12 हजार से अधिक बालिकाओं को टीकाकृत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। टीकाकरण के पश्चात तर्जनी उंगली में मार्किंग की जाएगी। टीकाकरण से पहले पालकों से सहमति ली जाएगी। यह अभियान नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से अलग संचालित किया जाएगा, जिसके लिए पृथक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। वैक्सीन लगाने के बाद हितग्राहियों को आधे घंटे तक स्वास्थ्य केन्द्र में रुकना होगा तथा इसके पश्चात उन्हें टीकाकरण कार्ड प्रदान किया जाएगा। अभियान के सफल संचालन के लिए शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग रहेगा। इन विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। निर्धारित आयु वर्ग की बालिकाओं के पालकों एवं शिक्षकों को वैक्सीन के संबंध में जानकारी देकर उनकी सहमति प्राप्त की जाएगी। जिले के चिन्हांकित स्वास्थ्य केन्द्रों में निर्धारित तिथि पर सहमति के बाद शाला में अध्ययनरत तथा शाला त्यागी बालिकाओं को चिकित्सक की उपस्थिति में एच.पी.वी. वैक्सीन लगाया जाएगा। टीकाकरण के बाद आधे घंटे की निगरानी के पश्चात सामान्य स्थिति में उन्हें टीकाकरण कार्ड देकर घर भेजा जाएगा। जिले में 14-15 वर्ष की बालिकाओं को टीकाकृत करते हुए इस अभियान को शीघ्र पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

दिव्यांगता के बावजूद सायरा बानो बनीं आत्मनिर्भर, ई-रिक्शा चलाकर पेश की मिसाल

दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी सायरा बनो का हौसला सायरा बानो ई-रिक्शा चलाकर बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल रायपुर धमतरी जिले की सायरा बानो ने यह साबित कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का जज़्बा हो, तो कोई भी कठिन परिस्थिति सफलता की राह नहीं रोक सकती। शारीरिक दिव्यांगता और अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद सायरा बानो आजआत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं।        कुछ समय पहले तक सायरा बानो का जीवन आर्थिक तंगी में गुजर रहा था। रोजगार के अभाव में उनके लिए रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती बन गया था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया और रोजगार के लिए जिला प्रशासन से सहायता की मांग की।       सायरा बानो की परिस्थितियों और उनके मजबूत इरादों को देखते हुए प्रशासन ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया। उनके मार्गदर्शन में सायरा बानो को बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ ई-रिक्शा चलाने की तकनीक सीखी। साथ ही उन्हें स्व-रोजगार से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी गई तथा पुलिस विभाग द्वारा यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद समाज कल्याण विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सक्षम प्रोजेक्ट के अंतर्गत सायरा बानो को ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया।      आज सायरा बानो धमतरी शहर में आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाकर सम्मानजनक आजीविका कमा रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये तक की आय हो रही है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं। सरकार का उद्देश्य शासन की विभिन्न योजनाओं से जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। यदि लाभार्थी दृढ़ संकल्प और मेहनत के साथ आगे बढ़ें, तो वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।        सायरा बानो की यह सफलता की कहानी न केवल दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए एक संदेश है कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने का साहस और संकल्प हो।  

महिला दिवस पर सम्मान समारोह, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्व-सहायता समूह की महिलाएं हुईं सम्मानित

कोरिया महिला शक्ति को मिला सम्मान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला पंचायत ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं, बिहान योजना से जुड़ी महिला कैडर्स व जागरूक माताओं को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न सेक्टरों की करीब 19 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को पोषण, बच्चों की नियमित उपस्थिति, शालापूर्व शिक्षा, पोषण वाटिका निर्माण, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पोषण ट्रैकर ऐप में बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया गया। कई कार्यकर्ताओं ने 100 प्रतिशत टीएचआर वितरण, पोषण ट्रैकर के सभी इंडिकेटर पूर्ण करने और हितग्राहियों को योजनाओं से लाभान्वित करने में उल्लेखनीय कार्य किया है। इसके अलावा बिहान योजना के अंतर्गत महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 10 महिलाओं को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पत्रकारिता के पेशे से आने वाली पत्रकार मती कमरून निशा को भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम में स्वस्थ बच्चा-जागरूक महतारी श्रेणी में भी महिलाओं को सम्मानित किया गया। इन माताओं ने बच्चों के बेहतर पोषण, आंगनबाड़ी सेवाओं के नियमित उपयोग, रेडी-टू-ईट एवं गरम भोजन के सेवन और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ लेकर स्वस्थ बाल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि महिलाएं समाज और परिवार की मजबूत आधारशिला हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने और सुविधाएं विकसित करने के दिए निर्देश

बिलासपुर संभागायुक्त  सुनील जैन ने पीएम  स्कूल का किया निरीक्षण संभागायुक्त  सुनील जैन ने पीएम  स्कूल का किया निरीक्षण संभागायुक्त  सुनील जैन ने आज चकरभाठा स्थित पीएम  स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राचार्य से स्कूल में संचालित कक्षाओं की जानकारी ली तथा शिक्षण व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने और सुविधाएं विकसित करने कहा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल भवन के पीछे स्थित परिसर में गार्डन और ओपन जिम विकसित करने के निर्देश दिए।       कमिश्नर  जैन ने स्कूल में शिक्षकों के रिक्त पदों की भी जानकारी ली और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्कूल की लैब और लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए लाइब्रेरी को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। साथ ही लाइब्रेरी को हाईटेक बनाते हुए सभी व्यवस्थाओं को ऑनलाइन करने कहा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल परिसर में मिनी स्टेडियम बनाने के निर्देश भी दिए। परिसर में निर्मित 16 कमरों की भवन की स्थिति का अवलोकन करते हुए उन्होंने उसकी मरम्मत कराने तथा सीपेज की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले सत्र तक सभी आवश्यक कार्य पूर्ण करा लिए जाएं।      इस दौरान डिप्टी कमिश्नर मती स्मृति तिवारी, समग्र शिक्षा के जिला समन्वयक  ओम पांडे सहित संबंधित अधिकारी एवं स्कूल के प्राचार्य उपस्थित थे। 

सशक्त परिकल्पना एवं उपलब्धि की पहचान हैं इन्द्रा सेंगर

कोरिया उक्ताशय के विचार  संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान मनेन्द्रगढ़ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संबोधन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में संस्था अध्यक्ष  अनिल जैन ने व्यक्त किये उन्होंने कहा कि  इन्द्रा सेंगर मनेन्द्रगढ़ अंचल में  सशक्त परिकल्पना एवं स्वावलंबन की प्रतीक है। आज संबोधन के मंच से उनका सम्मान एक सशक्त प्रतिभा का सम्मान है उनके द्वारा संचालित विजय इंग्लिश मीडियम स्कूल की परिकल्पना ने आज मनेन्द्रगढ़ को अंग्रेजी माध्यम के कई स्कूलों को स्थापना की  प्रेरणा दी है। यह उनकी उपलब्धि है कि इस विद्यालय के विद्यार्थी विगत तीन वर्षों से लगातार छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षाओं में टाप 10 प्रावीण्य सूची में स्थान पाने में सफल रहे हैं जिससे केवल विद्यालय ही नहीं मनेंद्रगढ़ नगर भी छत्तीसगढ़ में गौरवान्वित हुआ है। इंदिरा सेंगर का परिचय देते हुए विचार मंच विभागाध्यक्ष बीरेन्द्र वास्तव ने बताया कि वर्ष 1984 मैं प्रथम अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय स्थापना की सोच  इन्द्रा सेंगर की दूरदृष्टि का परिचायक है। उन्हें मालूम था कि नगर के विकास के साथ-साथ छात्रों को के विकास के लिए अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय आवश्यक है। यही कारण है कि विद्यालय की 42 वर्षों की सतत यात्रा और आज 85 वर्ष की उम्र में भी उनकी सोच और प्रेरणा ने मनेंद्रगढ़ को छत्तीसगढ़ के गिने चुने शिक्षा  केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है। साहित्य शिक्षा और कलात्मक क्षेत्र में कलाकारों और साहित्यकारों को आगे बढ़ाने का संबल दिया है। शिक्षा और साहित्य विकास के क्षेत्र में 48 वर्षों की यह संस्था संबोधन आज उन्हें सम्मानित करते हुए गर्व का अनुभव महसूस करती है। निदान सभागार में आयोजित संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित  कार्यक्रम में उपस्थित विद्वान साहित्यकार कलाकार एवं पत्रकारों की उपस्थिति  में  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्रवण कुमार उर्मलिया जी  सहित  उपस्थित  महिला साहित्यकार  वर्षा वास्तव,  सुषमा वास्तव, एवं  ज्योति वास्तव,  द्वारा अंग वस्त्र, एवं शिक्षा का प्रतीक कलम, प्रदान कर  "संबोधन अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मान 2026" का  सम्मान पत्र   उपस्थित साहित्यकारों के द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर अभिभूत  इंद्रा सेंगर ने खुशी व्यक्त करते हुए संबोधन संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया और इस संस्था को आगे भी इस तरह के आयोजन की शुभकामनाएं दी।कार्यक्रम के दूसरे चरण में रंग पंचमी के अवसर पर संबोधन एवं वनमाली सृजन केंद्र मनेंद्रगढ़ द्वारा आयोजित "होली के रंग गीतों के संग" कार्यक्रम मै गायक कलाकार नरोत्तम शर्मा, शैलेश जैन, एवं गौतम शर्मा ने अपने गीतों की प्रस्तुति के साथ होली और रंगों का आवाहन किया।  साहित्यकार राजेश जैन ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए होली की चुटीली बानगी के साथ पहले साहित्यकार श्याम सुंदर निगम को आमंत्रित किया। इस अवसर पर विद्वान साहित्यकार श्रवण कुमार उरमालिया, वरिष्ठ साहित्यकार बीरेन्द्र वास्तव, कल्याणचंद केसरी, सतीश उपाध्याय, पुष्कर तिवारी,  सुषमा वास्तव,  ज्योति वास्तव, एवं वरिष्ठ साहित्यकार बीरेन्द्र वास्तव, प्रमोद  बंसल, की कविताओं ने होली के माहौल को शब्दों और गीतों में प्रस्तुत कर समां बांध दिया। देर शाम तक चलते इस कार्यक्रम में विद्वान प्राचार्य जसपाल सिंह, संजय सेंगर,  राजकुमार पांडे,  सहित संस्थापक सदस्य निरंजन मित्तल, प्रमोद बंसल, साहित्यकार विजय गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता परमेश्वर सिंह, डॉ निशांत वास्तव एवं पत्रकार  विनय पांडे एवं राजेश सिन्हा की उपस्थिति एवं उद्बोधन ने कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की।                                                             

सुशासन की मिसाल: मजदूरी से ‘लखपति दीदी’ तक का सफर तय कर बनीं मधु कंवर ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा

आजीविका मिशन से मिली नई राह-मधु कंवर को सुशासन की मिसाल: मजदूरी से ‘लखपति दीदी’ तक का सफर तय कर बनीं मधु कंवर ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण गरीबी उन्मूलन परियोजना है। यह योजना स्व-रोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण गरीबों को संगठित करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य गरीबों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करना और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत धमतरी जिले की सारंगपुरी पंचायत निवासी श्रीमती मधु कंवर आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।              कभी आर्थिक तंगी के कारण दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली मधु कंवर ने अपने संघर्ष, मेहनत और शासन की योजनाओं के सहयोग से जीवन की दिशा बदल दी। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। गांव में ही मिल रही डिजिटल सेवाएं         आज मधु कंवर अपने गांव में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन कर रही हैं। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, आधार कार्ड अपडेट, श्रम कार्ड पंजीयन, आयुष्मान कार्ड, बिजली बिल भुगतान सहित कई ई-गवर्नेंस सेवाएं रियायती दरों पर उपलब्ध हो रही हैं।      इस पहल से ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी शासकीय सेवाओं के लिए शहर नहीं जाना पड़ता। इस कार्य से मधु को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है। आजीविका मिशन से मिली नई राह      मधु कंवर बताती हैं कि एक समय परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था। इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत “जय माँ कर्मा महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़कर नई शुरुआत की।      समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने धान खरीदी-बिक्री, मशरूम उत्पादन और छोटे स्वरोजगार के कार्य शुरू किए। समूह से ऋण सुविधा मिलने पर उन्होंने अपने घर में ही कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किया, जो धीरे-धीरे उनकी आय का मजबूत साधन बन गया। महिलाओं के लिए बढ़ रहा स्वरोजगार      मधु कंवर के समूह की महिलाएं आज कई आय संवर्धन गतिविधियों से जुड़ी हैं। इनमें मोमबत्ती निर्माण, केक बनाना, मशरूम उत्पादन, मछली पालन और बैंक सखी के रूप में कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।  गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा      आज मधु कंवर न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके प्रयासों से गांव की अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की योजनाओं और सुशासन की पहल से मधु कंवर जैसी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अवसर, मार्गदर्शन और संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई कहानी लिख सकती हैं।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से बदली शामबती बघेल की जिंदगी

रायपुर बस्तर के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम जैबेल की निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला  शामबती बघेल ने अपनी मेहनत और शासन की योजना का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  शामबती बघेल ने बताया कि उनके परिवार में कुल छह सदस्य हैं। परिवार के पास सीमित कृषि भूमि होने के कारण केवल खेती से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में उन्होंने अपने पति श्री रतन बघेल के सहयोग से गांव में ही एक छोटा सा किराना दुकान शुरू किया, लेकिन कुछ समय बाद पूंजी की कमी के कारण दुकान चलाने में परेशानी आने लगी। इसी दौरान बकावंड में आयोजित जनसमस्या शिविर में जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जगदलपुर के अधिकारियों से उन्हें मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जगदलपुर कार्यालय जाकर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।  गांव के मुख्य मार्ग पर उनका घर होने और आसपास किराना दुकान नहीं होने के कारण ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लगभग 10 किलोमीटर दूर बकावंड जाना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए शामबती बघेल ने किराना दुकान को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए दो लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया। दिसंबर 2022 में पंजाब नेशनल बैंक की जैबेल शाखा द्वारा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत उन्हें दो लाख रुपये का ऋण स्वीकृत एवं वितरित किया गया। इस राशि से उन्होंने अपने किराना दुकान को व्यवस्थित रूप से संचालित करना शुरू किया।        शामबती बघेल ने बताया कि अब उन्हें दुकान चलाते हुए लगभग तीन वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने समय पर पूरी ऋण राशि का भुगतान भी कर दिया है। वर्तमान में उनकी दुकान से प्रतिदिन लगभग एक हजार से डेढ़ हजार रुपये तक की बिक्री होती है, जिससे उन्हें रोजाना करीब 500 से 700 रुपये की आमदनी हो रही है।      आज उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर हो गई है। परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और गांव के लोगों को भी घर के पास ही आवश्यक सामान उपलब्ध हो रहा है। शामबती बघेल आज आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन यापन कर रही हैं। वह अपने चार बच्चों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रही हैं और बड़ी बेटी कुंजवती बघेल को बकावंड कॉलेज में कॉमर्स में दाखिला करवाया है तो मंझले बेटे नेत्र बघेल को गांव के हायर सेकेंडरी स्कूल में 10 वीं कक्षा में पढ़ा रही हैं। दो छोटे बेटे जसवंत और देवांश गांव के उच्च प्राथमिक शाला में 8 वीं एवं तीसरी में पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही शामबत्ती खेती-किसानी को भी नई दिशा देकर अब रबी सीजन में मक्का की खेती कर रही हैं।