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हरित पहल को बढ़ावा: वन विकास निगम–एनएमडीसी बचेली के बीच 50 हजार पौधों के रोपण का समझौता

रायपुर. वन विकास निगम और एनएमडीसी बचेली के बीच 50 हजार पौधारोपण का अनुबंध पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना और जैव विविधता का संरक्षण करना है। इसके माध्यम से वायु की गुणवत्ता सुधारना, मिट्टी के कटाव को रोकना, ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाना और सतत विकास के द्वारा भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ व संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करना है। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से वन विकास निगम एवं एनएमडीसी बचेली के बीच विगत 13 जनवरी  को 50 हजार पौधों के रोपण हेतु अनुबंध हुआ है।                इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में हरियाली बढ़ाना, पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना तथा स्थानीय जैव विविधता का संरक्षण करना है। वन विकास निगम वर्ष 2005 से एनएमडीसी के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार पौधारोपण कार्य कर रहा है। अब तक निगम द्वारा कुल 15 लाख 37 हजार पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिली है और क्षेत्र में हरित क्षेत्र का विस्तार हुआ है। यह पौधारोपण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा पौधों की देखरेख और संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि लगाए गए पौधे सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें।              गौरतलब है कि इस अभियान के लिए वन मंत्री  केदार कश्यप ने वन विकास निगम की सराहना की है। उनका मानना है कि इस अभियान से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। पौधरोपण, देखरेख और संरक्षण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों की भागीदारी से ग्रामीणों की आय में वृद्धि होने की संभावना है।  एनएमडीसी बचेली द्वारा यह पहल कंपनी की सामाजिक दायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के अंतर्गत की जा रही है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय विकास और आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सामुहिक विवाह में वर्चुअल रूप से जुड़कर नव विवाहितों को दिया आशीर्वाद

रायपुर. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों को मिला सम्मान और सहारा– उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा आज मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामाजिक रिती-रिवाजों और अभुतपूर्व उत्साह के साथ कबीरधाम जिले के 272 जोड़े एक साथ सात फेरे लेकर अटूट बंधन में बंध गए। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय वर्चुअल माध्यम से जुड़कर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया।          सरदार पटेल मैदान में आयोजित इस समारोह में उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा शामिल वधुओं के परिजन बनकर शामिल हुए। इस अवसर में उन्होंने बारात का स्वागत करने के साथ सभी को परघाते हुए समधी की तरह सभी का अभिवादन किया। वरों एवं उनके परिजनों का फूल माला के साथ स्वागत करते हुए सभी का गले लगाकर अभिनंदन किया। उन्होंने परिणय सूत्र में बंधकर नए जीवन की शुरुआत करने वाले सभी नवदंपतियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में पंडित द्वारा वर-वधुओं को सात वचनों का संकल्प दिलाया गया, जिसके साथ ही विवाह की रस्में संपन्न हुईं। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने मंच पर पहुंचकर सभी नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया और शासन की ओर से प्रत्येक जोड़े को 35-35 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक और सामग्री भेंट किया।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने भी आशीर्वाद देते हुए कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से अनेक जोड़े एक साथ विवाह के पवित्र बंधन में बंधकर अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की परेशानियों को समझते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत की थी। पहले बेटियों की शादी के लिए परिवारों को कर्ज तक लेना पड़ता था, लेकिन इस योजना ने उनकी बड़ी चिंता दूर की है। इस पहल से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल मिला है और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न हो रहा है। उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने नवदाम्पत वर एवं वधु को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके सुखमय जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से आज पूरे सम्मान के साथ कबीरधाम जिले के 272 बेटियों की विवाह पूरे रीति-रिवाज और सामाजिक परंपरा के साथ एक आदर्श विवाह के रूप में संपन्न कराया गया। आज हम सब इस सामुहिक विवाह के साक्षी बने और नवदाम्पत जोड़ों को एक साथ, एक स्थान और एक मंच पर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करने का अवसर भी हम सबकों मिला। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से नवविवाहित जोड़ों को वर्तमान में 35 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है, जिससे उन्हें जीवन की नई शुरुआत में आर्थिक सहारा मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कवर्धा में रायपुर के बाद सबसे अधिक नवजोड़ों का विवाह एक साथ संपन्न हो रहा है, जो इस जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि यहां विवाह का यह आयोजन सार्वजनिक रूप से पूरे परंपरा और रीति-रिवाज के साथ किया जाता है, जिसमें पूरे जिले के लोग मिलकर सहभागिता निभाते हैं और समाज एक परिवार की तरह साथ खड़ा रहता है। उन्होंने नवजोड़ों को संदेश देते हुए कहा कि सुखी जीवन का सबसे बड़ा सूत्र एक-दूसरे को समझना, सम्मान देना और हर परिस्थिति में साथ निभाना है। आचार्यों द्वारा विधि-विधान से विवाह संस्कार संपन्न कराया गया है, अब सभी नवदंपति अपने वचनों को निभाते हुए जीवनभर साथ चलें और अपने परिवार को आगे बढ़ाएं। पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा ने कहा कि कवर्धा में आयोजित यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम एक ऐतिहासिक क्षण है, जहां पूरे मंडप को दूल्हा–दुल्हनों से सजा हुआ देखकर अत्यंत खुशी और गर्व का अनुभव हो रहा है।  इस अवसर पर  कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  सुरेश चंद्रवंशी, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष  बिसेसर पटेल, पूर्व विधायक डॉ. सियाराम साहू,  मोतीराम चंद्रवंशी,  अशोक साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू,  राजेन्द्र चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष  चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट,  अनिल ठाकुर,  नितेश अग्रवाल,  मुकेश ठाकुर, पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत  संतोष पटेल,  विदेशी राम धुर्वे, सभापति मती सुमित्रा पटेल, जनपद अध्यक्ष कवर्धा मती सुषमा बघेल, बोड़ला मती बालका वर्मा, पडरिया मती नंदनी साहू, सहसपुर लोहारा मती दुर्गा सिंह, जिला पंचायत सदस्य डॉ वीरेंद्र साहू, सभापति  राज कुमार मरावी, मती पूर्णिमा साहू, मती दीपा धुर्वे, जिला पंचायत सदस्य मती गंगा साहू, सदस्य जिला पंचायत  रोशन दुबे, मती राजकुमारी साहू, मती ललिता धुर्वे सहित सभी जनप्रतिनिधि ने नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया। उपमुख्यमंत्री बेटिंयों के अभिभावक बनकर दुल्हों का किया स्वागत सत्कार  मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत अभूतपूर्व उत्साह और हर्षोल्लास के साथ सरदार पटेल मैदान में सामुहिक विवाह का आयोजन किया गया। कवर्धा शहर के पुरानी मंडी से बैंड और डीजे सहित आतिशबाजी के साथ 272 दुल्हों की सामुहिक बारात निकाली गई। उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू बेटियों की तरफ से उनके अभिभावक बनकर दुल्हों और वर पक्ष का महामाया मंदिर के पास माला पहनाकर स्वागत किया। वही वर पक्ष की ओर से नगर पालिका अध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य  रामकुमार भट्ट, पूर्व विधायक  सियाराम साहू,  नितेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि बारात में शामिल होकर दुल्हों का आत्मविश्वास बढ़ाया।  बरातियों का छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति ‘डंडा खेल’ और बैंड से हुआ भव्य परघौनी स्वागत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करते हुए आज सामूहिक विवाह के दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति देखने को मिली, जहां बरातियों का स्वागत डंडा खेल के जरिए किया गया। पारंपरिक अंदाज में आयोजित इस ’परघौनी’ ने न सिर्फ शादी समारोह को खास बना दिया, बल्कि ग्रामीण संस्कृति की झलक भी पेश की। वर पक्ष का जब बरात पहुंची, तो वधु पक्ष ने डंडा खेल की आकर्षक प्रस्तुति दी। डंडा खेल, जो छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, आमतौर पर शारीरिक चुस्ती और कलात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस खेल के जरिए वधु पक्ष ने बरातियों का स्वागत किया।

पशुपालन योजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय दल

रायपुर. छत्तीसगढ़ में संचालित केन्द्रीय पशुपालन योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग, नई दिल्ली द्वारा तीन राष्ट्रीय स्तर के पर्यवेक्षक (नेशनल लेवल मॉनिटर) नियुक्त किए गए हैं। ये अधिकारी 9 से 14 फरवरी 2026 तक दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों का दौरा कर योजनाओं की प्रगति का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति को मौके पर जाकर परीक्षण करेंगे। भ्रमण दल में भारत सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। भ्रमण कार्यक्रम के पहले दिन संचालनालय स्तर पर ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया। बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, पशुधन विकास विभाग तथा भारत सरकार के नोडल अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं द्वारा केन्द्र से आए अधिकारियों और नेशनल लेवल मॉनिटर  दल को योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा योजनाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके बाद भारत सरकार से आए अधिकारी  मुकेश शर्मा,  ने योजनाओं की समीक्षा ।  बैठक में राष्ट्रीय गोकुल मिशन और राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश स्तरीय नोडल अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण दिया। वहीं पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम और राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत चल रही गतिविधियों की भी जानकारी दी गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य पशुपालकों को समय पर लाभ दिलाना और पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना है। 1962 कॉल सेंटर का किया निरीक्षण नेशनल लेवल मॉनिटर और भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने संचालनालय परिसर में स्थित मोबाइल वेटेनरी यूनिट के कॉल सेंटर 1962 का भी निरीक्षण किया और वहां संचालित सेवाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे 13 फरवरी को मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ

रायपुर. छत्तीसगढ़ के शिमला और छोटा तिब्बत के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। यह महोत्सव रोपाखार जलाशय के समीप 13 से 15 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव का आयोजन राज्य शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल करेंगे।  मैनपाट महोत्सव में लोक गीत और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 13 फरवरी को भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी प्रस्तुति देंगे। साथ ही, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और ओडिशा का प्रसिद्ध छऊ नृत्य की प्रस्तुति होगी। 14 फरवरी को छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका अलका चंद्राकर और इंडियन आइडल फेम वैशाली रायकवार अपनी सुरीली आवाज से शाम को यादगार बनाएंगी। 15 फरवरी को महोत्सव का मुख्य आकर्षण बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर होंगी। इसके साथ ही रायगढ़ घराने की कत्थक नृत्यांगना ज्योति वैष्णव और गायक आयुष नामदेव भी अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही स्थानीय कलाकार और स्कूली बच्चों के द्वारा भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।  जिला प्रशासन द्वारा मैनपाट महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस मौके पर  विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जा रही है, जहां शासन की योजनाओं और स्थानीय उत्पादों जैसे टाऊ और तिब्बती हस्तशिल्प का प्रदर्शन होगा। महोत्सव स्थल पर एडवेंचर एक्टिविटी में पर्यटकों के लिए बोटिंग, साहसिक खेल और पारंपरिक दंगल का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव स्थल पर सुरक्षा, पार्किंग और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। फूड ज़ोन में सरगुजा के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया जा सकेगा।  मैनपाट के प्रमुख आकर्षण अंबिकापुर मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित मैनपाट एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है, जोकि समुद्र तल से 3,781 फीट की ऊंचाई पर है। मैनपाट में बड़ा तिब्बती समुदाय बसा है, जहां का थाकपो शेडुप्लिंग मठ मुख्य आकर्षण है। जलजली- यह एक भूगर्भीय आश्चर्य है जहाँ जमीन दलदली है और कूदने पर स्पंज की तरह हिलती है, इसे म्यूजिकल लैंड भी कहते हैं। उल्टा पानी- यहाँ का पानी ढलान के विपरीत दिशा में बहता है, जो एक अनसुलझा रहस्य है। इसके अलावा टाइगर पॉइंट, मछली पॉइंट, मेहता पॉइंट, सरभंजा जलप्रपात जैसे अनेक दर्शनीय स्थान हैं।

अरपा महोत्सव में 100 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की मिली सौगात

रायपुर. जीपीएम के समन्वित विकास को मिलेगी गति: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अरपा महोत्सव एवं गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के छठवें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर जिले को लगभग 100 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने कहा कि जिले के समन्वित विकास के लिए हर संभव पहल की जाएगी। उन्होंने इस मौके पर मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में जिले को शामिल करने के साथ ही कई घोषणाएं की। उन्होंने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 300 नव विवाहित जोड़ों को सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए आशीर्वाद दिया।  जीपीएम के समन्वित विकास को मिलेगी गति: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अरपा महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 100 करोड़ से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन जिले के समन्वित विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि पेंड्रारोड से अमरकंटक तक 19 किलोमीटर सड़क निर्माण से आवागमन में सुविधा होगी तथा केवची मार्ग के निर्माण से पर्यटन विकास को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में 6 हजार 414 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है, जो ऐतिहासिक क्षण है तथा इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बेटियों के सम्मान और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योजना है। नव विवाहित 300 जोड़ों को दिया आशीर्वाद मुख्यमंत्री  साय ने इस मौके पर नगर पंचायत मरवाही में उच्च विश्राम गृह की स्वीकृति, मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में जीपीएम जिले को शामिल करने, जिला मुख्यालय में भव्य ऑडिटोरियम निर्माण तथा समदलई पर्यटन स्थल में स्टॉप डैम निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को चेक एवं सामग्री का वितरण के साथ ही  स्वामित्व योजना अंतर्गत 435 किसानों को पट्टा प्रदान किया गया। कार्यक्रम स्थल पर जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित लगाए गए सभी स्टालों का मुख्यमंत्री  साय ने अवलोकन किया।   कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  साय ने जिले के विकास कार्यों पर आधारित बुकलेट का विमोचन भी किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में जिले की पर्यटन संभावनाओं और जिले की दो वर्षों की विकास यात्रा पर आधारित वीडियो फिल्म का भी प्रदर्शन हुआ। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक सर्व प्रणव कुमार मरपच्ची, अटल वास्तव, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष मती समीरा पैकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी तथा बड़ी संख्या में आमजन मौजूद थे।

मेले में सुरक्षा चूक: शिवरीनारायण में आकाश झूले की कुर्सी टूटी, दो घायल

जांजगीर चांपा शिवरीनारायण में चल रहे माघी मेले में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया। नगर पंचायत कार्यालय के सामने संचालित आकाश झूले की कुर्सी टूटकर नीचे खड़ी दो युवतियों पर गिर गई, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गईं। एक युवती को बिलासपुर रेफर किया गया है। घटना के बाद मेला परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी। जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब चार बजे उमेश गुप्ता द्वारा संचालित आकाश झूले में यह हादसा हुआ। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम मल्दा से मेला देखने आई दो युवतियां मेला ग्राउंड में झूले के नीचे खड़ी थीं। इसी दौरान अचानक आकाश झूले की एक कुर्सी टूटकर नीचे गिर गई, जो सीधे दोनों युवतियों पर आ गिरी। हादसे में चंद्रकांती कश्यप (15 वर्ष) एवं भूमिका कश्यप (21 वर्ष), निवासी ग्राम मल्दा, गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से शिवरीनारायण स्थित शबरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार चंद्रकांती कश्यप की हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि भूमिका कश्यप की स्थिति गंभीर होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर रेफर कर दिया गया है। इस घटना के बाद मेले में लगे झूलों एवं अन्य मनोरंजन साधनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में झूलों और मौत के कुएं जैसे खेलों की फिटनेस जांच को लेकर लापरवाही बरती जाती है। वहीं नगर पंचायत और संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण एवं सख्त कार्रवाई न होने को भी हादसे का कारण बताया जा रहा है। फिलहाल घटना के बाद पुलिस और मेला प्रशासन हरकत में आया है और मामले की जांच की बात कही जा रही है। हादसे ने मेला में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। एसडीओपी यदुमणि सिदार ने बताया कि झूला संचालक को नोटिस जारी कर तकनीकी जांच प्रमाणपत्र की मांग की गई है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभी झूला को एहतियात के तौर पर बंद करा दिया गया है।  

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को मिला शैक्षणिक भ्रमण का अवस

रायपुर. मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप वनांचल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सुकमा जिला प्रशासन की पहल पर ‘नियद नेल्लानार’ योजना के अंतर्गत माध्यमिक शाला मिसमा और बालक आश्रम सामसट्टी के 40 विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को साइंस पार्क ले जाया गया, जहाँ उन्होंने विज्ञान से जुड़े विभिन्न प्रयोगों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। न्यूटन के नियम, ऊर्जा के रूपांतरण, ध्वनि के सिद्धांत, धूप घड़ी से समय मापन, पेंडुलम की गति तथा दर्पणों से जुड़े प्रयोगों ने बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाई। इससे विद्यार्थियों को किताबों में पढ़े विषयों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला। भ्रमण के दौरान विद्यार्थी कलेक्टर कार्यालय भी पहुंचे, जहाँ उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन और मेहनत के महत्व के बारे में बताया तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को तुंगल बांध भी ले जाया गया, जहाँ उन्होंने प्राकृतिक वातावरण, जैव विविधता और जल संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार हुआ। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से शासन द्वारा वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए सार्थक पहल की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ

रायपुर. 13 फरवरी से सजेगा तीन दिवसीय ’मैनपाट महोत्सव’ का भव्य मंच छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का मैनपाट एक प्रमुख हिल स्टेशन है, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ठंडी जलवायु और तिब्बती संस्कृति के कारण ’छत्तीसगढ़ का शिमला’ और ’छोटा तिब्बत’ भी कहा जाता है।  मैनपाट के रोपाखार जलाशय के समीप आगामी 13 से 15 फरवरी तक तीन दिवसीय ’मैनपाट महोत्सव’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। राज्य शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मैनपाट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाना तथा स्थानीय लोक कला व संस्कृति का संवर्धन करना है। 13 फरवरी से सजेगा तीन दिवसीय ’मैनपाट महोत्सव’ का भव्य मंच मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ और सितारों से सजेगी शाम  मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ 13 फरवरी को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में होगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में लोक गीत और आधुनिक संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। प्रथम दिन 13 फरवरी को भोजपुरी सुपरस्टार  मनोज तिवारी अपनी गायकी से दर्शकों का उत्साह बढ़ाएंगे। साथ ही, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और ओडिशा का प्रसिद्ध छऊ नृत्य लोक संस्कृति की छटा बिखेरेंगे। द्वितीय दिवस 14 फरवरी को छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका अलका चंद्राकर और ’इंडियन आइडल’ फेम वैशाली रायकवार अपनी सुरीली आवाज से शाम को यादगार बनाएंगी। वहीं समापन दिवस 15 फरवरी को महोत्सव का मुख्य आकर्षण बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर होंगी। इसके साथ ही रायगढ़ घराने की कत्थक नृत्यांगना ज्योति वैष्णव और गायक आयुष नामदेव भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। साहसिक खेल और स्थानीय जायका मैनपाट महोत्सव केवल संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटकों के लिए मनोरंजन का पैकेज होगा। महोत्सव स्थल पर एडवेंचर एक्टिविटी में पर्यटकों के लिए बोटिंग, साहसिक खेल और पारंपरिक दंगल का आयोजन किया जाएगा। फूड ज़ोन में सरगुजा के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ विभिन्न लजीज पकवानों का आनंद लिया जा सकेगा। प्रदर्शनी एवं मेला में विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जहां शासन की योजनाओं और स्थानीय उत्पादों जैसे टाऊ और तिब्बती हस्तशिल्प का प्रदर्शन होगा। छत्तीसगढ़ का शिमला ’मैनपाट’ के प्रमुख आकर्षण अंबिकापुर मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित मैनपाट एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है, जोकि समुद्र तल से 3,781 फीट की ऊंचाई पर है। यहाँ के प्रमुख आकर्षणों में बौद्ध मंदिर, टाइगर पॉइंट, मेहता पॉइंट, मछली पॉइंट, और अनोखा जलजली शामिल हैं। यह स्थान तिब्बती संस्कृति, टाऊ की खेती और अद्भुत प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। मैनपाट के प्रमुख दर्शनीय स्थल तिब्बती शरणार्थी शिविर और बौद्ध मंदिर- मैनपाट में 1970 में बसाया गया एक बड़ा तिब्बती समुदाय है, जहां का थाकपो शेडुप्लिंग मठ (कैम्प नंबर 3) मुख्य आकर्षण है। टाइगर पॉइंट -200 फीट की ऊंचाई से गिरने वाला यह वॉटरफॉल (झरना) घने जंगलों से घिरा है। जलजली- यह एक भूगर्भीय आश्चर्य है जहाँ जमीन दलदली है और कूदने पर स्पंज की तरह हिलती है, इसे “म्यूजिकल लैंड“ भी कहते हैं। मछली पॉइंट एक बहुत ही सुंदर झरना और मछली पकड़ने के लिए प्रसिद्ध स्थान है। मेहता पॉइंट-घाटियों के शानदार और मनोरम दृश्य देखने के लिए एक बेहतरीन व्यू पॉइंट। उल्टा पानी- यहाँ का पानी ढलान के विपरीत दिशा में बहता है, जो एक अनसुलझा रहस्य है। सरभंजा जलप्रपात-ग्राम पंचायत से तकरीबन दो किलोमीटर ट्रैकिंग मार्ग से इस प्राकृतिक जलप्रपात तक पहुंचा जा सकता है। जुलाई से मार्च के बीच यहां का मौसम बहुत सुहावना रहता है। जोकि पर्यटकों को आकर्षित करता है स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन जिला प्रशासन द्वारा मंच पर नामी कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय स्कूली बच्चों और क्षेत्रीय कलाकारों को भी प्राथमिकता दी गई है, ताकि सरगुजा की माटी की प्रतिभा को उचित मंच मिल और स्थानीय कलाकारों का उत्साहवर्धन भी हो सके। कलेक्टर  अजीत वसंत के निर्देशन में मैनपाट महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। महोत्सव स्थल पर सुरक्षा, पार्किंग और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 15 फरवरी को समापन समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम सम्पन्न होगा।

बिहान योजना से पंचबाई की बदली तकदीर, बनी सफल व्यवसायी

रायपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में  मुंगेली जिले के विकासखण्ड लोरमी के ग्राम खपरीडीह निवासी श्रीमती पंचबाई साहू ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता प्राप्त की है। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी तकदीर बदली है, अब वे सफल व्यसायी बन चुकी है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व पंचबाई साहू की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें साहूकारों से ऊँचे ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था। आर्थिक निर्भरता के कारण न केवल परिवार की बुनियादी ज़रूरतें अधूरी रह जाती थीं, बल्कि आत्मसम्मान भी प्रभावित होता था।        श्रीमती  पंच बाई ने बताया कि बिहान योजना के अंतर्गत माँ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उन्होंने व्यवसाय के लिए रिवॉल्विंग फंड से 15 हजार रूपए, बैंक ऋण 01 लाख 50 हजार रूपए और 60 हजार रूपए सीआईएफ राशि प्राप्त हुई। साथ ही समूह के स्तर पर उन्हें 30 हजार रूपए का अतिरिक्त सहयोग भी मिला। प्राप्त राशि से उन्होंने फर्नीचर दुकान की शुरुआत की। परिश्रम, सही योजना और समूह के सहयोग से उनका व्यवसाय निरंतर आगे बढ़ता गया। आज उनकी मासिक आय लगभग 2.5 लाख रूपए से 03 लाख रूपए तक पहुँच चुकी है। इससे उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर होने के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार आया है। श्रीमती पंचवाई साहू आज केवल स्वयं सफल नहीं हैं, बल्कि ग्राम की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

सबक्लेवियन आर्टरी कटने के बावजूद अत्यंत जटिल सर्जरी से बचाया गया मरीज का हाथ

रायपुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की एक और बड़ी सफलता, चाकू से कटी मुख्य धमनी, सबक्लेवियन आर्टरी को जोड़कर बचाया युवक का हाथ पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के डॉक्टरों ने एक बार फिर जटिल और जानलेवा केस की जटिल एवं सफलतापूर्वक  सर्जरी कर घायल मरीज के हाथ को कटने से बचाया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को समय पर इस प्रकार की जटिल शल्य- चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलती तो मरीज के हाथ कटने की नौबत आ जाती और मरीज दिव्यांग हो जाता।  हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में एक युवक के कंधे पर चाकू से हुए हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त मुख्य रक्त नली (सबक्लेवियन आर्टरी) को जोड़कर डॉक्टरों की टीम ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि उसका हाथ कटने से भी बचा लिया। इस सर्जरी की एक और विशेष बात यह रही कि इसमें ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल रहे जिनकी मदद से कॉलर बोन को काटा गया एवं ऑपरेशन के बाद वापस प्लेट लगाकर जोड़ दिया गया।   इस केस की विस्तृत जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष (हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी) डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि :- अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में 34 वर्षीय एक मरीज अत्यधिक रक्तस्राव और मरणासन्न अवस्था में लाया गया। मरीज  इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी में काम करता है और अमलेश्वर का निवासी है। परिजनों के अनुसार, मरीज अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से रायपुर रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी इलेक्ट्रिक रिक्शा से टक्कर हो गई। विवाद के दौरान रिक्शा चालक ने मरीज के बाएं कंधे पर धारदार चाकू से हमला कर दिया। घाव इतना गहरा था कि कंधे की हड्डी (क्लेविकल बोन) के पीछे से गुजरने वाली मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। चोट लगते ही धमनी से खून का तेज फव्वारा निकलने लगा और कुछ ही देर में मरीज बेहोश हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचाया, जहां घाव में कॉटन गॉज भरकर रक्तस्राव को अस्थायी रूप से रोका गया। हालांकि रक्तस्राव रुकने के साथ ही बाएं हाथ में रक्त प्रवाह भी बंद हो गया, जिससे हाथ काला पड़ने लगा और ताकत खत्म होने लगी। समय पर ऑपरेशन न होने की स्थिति में हाथ काटने की नौबत आ सकती थी। प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज के परिजन उसे अपनी इच्छा से अन्य अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन चोट की गंभीरता और धमनी के क्षतिग्रस्त होने के कारण अन्य अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को पुनः अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में लाया गया, जहां मेरे (डॉ. कृष्णकांत साहू के) नेतृत्व में तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी सबक्लेवियन आर्टरी की सर्जरी विशेष रूप से उसके दूसरे भाग (सेकंड पार्ट) में बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि यह धमनी छाती के भीतर कॉलर बोन के पीछे स्थित रहती है। पट्टी हटाते ही अत्यधिक रक्तस्राव की आशंका बनी हुई थी, जिसके लिए वैस्कुलर कंट्रोल अत्यंत आवश्यक था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि मरीज की कॉलर बोन को काटकर धमनी तक पहुंच बनाई जाए। कॉलर बोन को काटने के बाद पाया गया कि धमनी लगभग 3 सेमी तक पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुकी थी। इसे जोड़ने के लिए 7×30 मिमी. साइज का डेक्रॉन ग्राफ्ट (कृत्रिम नस) लगाया गया। सर्जरी के दौरान लगभग 5 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो सका। इस दौरान ब्रैकियल प्लेक्सस (तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, क्योंकि इसमें क्षति होने पर हाथ में स्थायी लकवे की संभावना रहती है। ऑपरेशन के बाद कॉलर बोन को प्लेट लगाकर वापस जोड़ दिया गया अब पूरी तरह स्वस्थ, काम पर लौटा मरीज सफल ऑपरेशन और समय पर उपचार के चलते मरीज का हाथ बच गया और गैंगरीन की स्थिति टल गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अपने रोजमर्रा के कार्यों में वापस लौट चुका है। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रणय वास्तव, डॉ लोमेश साहू,  एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू, जूनियर डॉक्टर – डॉ. आयुषी खरे, ख्याति, , आकांक्षा साहू, संजय त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश शामिल रहे। नर्सिंग स्टाफ में राजेन्द्र, नरेन्द्र, मुनेश, चोवा, दुष्यंत तथा एनेस्थेसिया तकनीशियन भूपेन्द्र और हरीश ने अहम भूमिका निभाई। यह सफलता न केवल अम्बेडकर अस्पताल बल्कि सभी के लिए गर्व का विषय है, जो यह साबित करती है कि समय पर सही निर्णय, समेकित प्रयास और विशेषज्ञ चिकित्सा से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। सबक्लेवियन आर्टरी जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण धमनी की मरम्मत प्रत्येक अस्पताल में संभव नहीं होती। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग, ट्रॉमा यूनिट और एनेस्थेसिया टीम के समन्वित प्रयास से यह संभव हो सका। यह प्रयास यह दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय और जीवन रक्षक उपचार सुविधा उपलब्ध है। डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल