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प्रेम और सहयोग की भाषा ने विदेश से आए सैलानियों के लिए तैयार की राह, स्थानीय संस्कृति में ढले सैलानी

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को पर्यटन के नजरिए से बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को स्थानीय प्रशासन और पर्यटन समितियों की मेहनत से पर्यटन के क्षेत्र में नई  पहचान लगातार बढ़ रही है। बनमनई इको फाउंडेशन और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय नेचर हीलिंग कैंप में मलेशिया सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने बड़े ही उत्साह से भाग लिया। मलेशिया से चार विदेशी मेहमान इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए  पहुंचे थे। इनके साथ ही बिहार से फिल्म निर्माता आर्यन चंद्रप्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार विभाष झा, डॉ अरविंद गुप्ता बंगलौर, ए के सिंह (सेवानिवृत्त प्रबंधक, कोल इंडिया), इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय और अमलाई के शोधार्थी सहित 20 अन्य प्रतिभागी कैंप में शामिल हुए।        कार्यक्रम में पर्यावरणविद् संजय पयासी ने जिले के दो प्रमुख जलप्रपात लक्ष्मणधारा और झोझा जल प्राप्त की ट्रैकिंग कराई। मलेशियाई मेहमानों का पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन पहुंचे पर आत्मीय स्वागत किया गया। स्थानीय लोग उत्साह से भर उठे। सभी ने उनके साथ फोटो खिंचवाई। स्थानीय लोगों के इस उत्साह से विदेशी अतिथि अत्यंत प्रसन्न और प्रभावित हुए। उन्हें पेंड्रा की हरी सब्जियां, चरवाहों की बाँस की टोपी, और लक्ष्मणधारा की ऑफ-रोड राइडिंग ने उन्हें एक अनोखा अनुभव दिया।     लक्ष्मणधारा पर्यटन समिति द्वारा परोसे गए पकौड़े और लेमन जिंजर चाय का उन्होंने भरपूर आनंद लिया। इतने सुदूर क्षेत्र में भी पर्यटन समिति के उत्कृष्ट प्रबंधन ने सभी पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर दिया। अरपा नदी पर स्थित लक्ष्मणधारा जलप्रपात अपने पूरे शबाब पर था। पानी की उड़ती बूंदों में छनकर आती सूर्य किरणें सुंदर इंद्रधनुष रच रही थीं। यही पर्यटन का आकर्षण है, जहां अलग-अलग भाषा, देश, परिवेश और संस्कृति के लोग अपने-अपने रंग लिए मिलते हैं।      शाम को पर्यटक लमना होमस्टे पहुंचे, जहां ग्रामीण महिलाओं ने तिलक लगाकर पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। गांव वालों का प्रेम और सम्मान “अतिथि देवो भव” की परंपरा को सजीव कर रहा था। रात्रि में प्रस्तुत गौरा-गौरी का स्थानीय लोकनृत्य सभी को थिरकने पर मजबूर कर गया। लोक नृत्य और गायन, जो ग्रामीणों के पारंपरिक मनोरंजन के साधन हैं, ने अपनी अभिव्यक्ति से ऐसा अद्भुत दृश्य रचा जो स्थानीय सीमा से निकलकर वैश्विक हो गया। यही सांस्कृतिक आदान-प्रदान लमना गांव के सामुदायिक पर्यटन का आदर्श मॉडल है, जो न केवल आर्थिक रूप से ग्रामीणों को सशक्त कर रहा है, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक दृष्टि से भी उन्हें समृद्ध बना रहा है।     शिविर के दूसरे दिन सुबह मलेशिया से आई पर्यटक एलिस ने ग्रामीण महिलाओं  के सहयोग से बड़ी दिलचस्पी के साथ नाश्ता तैयार किया। ग्रामीणजन उनकी भाषा नहीं समझते थे लेकिन प्रेम और सहयोग के लिए भाषा बाधा नहीं बनी। ग्रामीण महिलाएं अपने गांव से बाहर निकले बिना ही दूसरे देश की संस्कृति और खानपान से परिचित हुई। पर्यटकों ने झोझा जलप्रपात की ट्रैकिंग की, यहां लगभग 350 फीट नीचे गिरता  प्राकृतिक जलप्रपात अत्यंत ही सुंदर और दुर्गम है। जिला प्रशासन ने यहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण कराया है, जिससे रास्ता आसान हो गया। यह निर्माण शासन की प्रतिबद्धता उत्कृष्ट उदाहरण है, जो इस क्षेत्र के पर्यटन को और सुलभ बनाता है।

भालुओं का आतंक: विभाग सोया, जनता डरी

NH-43 से सिद्धबाबा तक खतरे की घंटी, फिर भी "भालू नहीं हैं" का राग मनेंद्रगढ़ क्या भालू जंगल छोड़कर शहर की चौखट पर आ गए हैं? या फिर वन विभाग की आंखों पर "नजर बंद" का ताला लग गया है? NH-43 से सिद्धबाबा धाम (पहाड़) जाने वाली सड़क पर इन दिनों भालुओं की धमक साफ देखी जा सकती है। स्थानीय लोग कह रहे हैं – सावधान रहें, लेकिन विभाग कह रहा है – "भालू नहीं हैं"! सवाल ये है कि जब वार्ड क्रमांक 1 में रोजाना भालू घूमते नजर आते हैं, सिद्धबाबा पहाड़/जंगल से लेकर रेलवे कॉलोनी और चनवारीडांड तक लगभग एक दर्जन भालू विचरण कर रहे हैं, तो आखिर विभाग का दावा किस आधार पर है? लोगों का कहना है कि अंधेरा होते ही जंगल में तफरी करना खतरे से खाली नहीं है। युवाओं की आवाजाही और रोमांच की चाहत कहीं जान पर भारी न पड़ जाए। DFO कार्यालय में भी इस मुद्दे पर बवाल मच चुका है, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही भालुओं की निगरानी बढ़ाई गई। क्या वन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जनता की मांग :- भालुओं की सटीक गिनती और लोकेशन ट्रैक की जाए। खतरे वाले इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। रात्रि गश्त और पिंजरा अभियान चलाया जाए। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, भालुओं का आतंक और विभाग की चुप्पी—दोनों ही खतरनाक हैं।

हाई कोर्ट में भांग की खेती करने के लिए याचिका फिर खारिज

  बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने औद्योगिक भांग की नियंत्रित शोधात्मक खेती की अनुमति को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. डी. गुरु की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि यह मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता और पहले दिए गए फैसले में कोई त्रुटि नहीं है, जिसे सुधारने की जरूरत हो। याचिकाकर्ता ने कहा याचिकाकर्ता तिलकनगर बिलासपुर निवासी डॉ. सचिन अशोक काले ने कोर्ट में खुद पेश होकर कहा कि वह अपने खेत में नहीं, बल्कि सरकार द्वारा तय स्थानों जैसे कृषि कॉलेज की जमीन या दूरस्थ वन क्षेत्र में रिसर्च के लिए भांग की खेती करना चाहते हैं। इसका उद्देश्य भांग का सेवन या धूम्रपान वैध करना नहीं है, बल्कि औद्योगिक और औषधीय संभावनाओं को परखना है। उन्होंने दावा किया कि अगर यह रिसर्च सफल होती है तो खेती को एक बेहतर विकल्प मिल सकता है। कोर्ट ने यह कहा कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुनर्विचार याचिका केवल उन्हीं मामलों में स्वीकार की जा सकती है, जहां पहले के आदेश में कोई साफ-सुथरी गलती हो। यहां ऐसा कोई मामला नहीं है। याचिकाकर्ता वहीं बातें दोबारा उठा रहे हैं, जिन पर पहले ही निर्णय दिया जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि पुनर्विचार का क्षेत्र बेहद सीमित होता है और इसके जरिए कोर्ट खुद अपने ही आदेश की दोबारा सुनवाई नहीं कर सकता। अगर याचिकाकर्ता को फैसले से आपत्ति है, तो इसके लिए अलग कानूनी रास्ता मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्णयों का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया है कि पुनर्विचार याचिका का मतलब अपील नहीं है। इसमें वही गलती सुधारी जा सकती है, जो रिकार्ड पर साफ तौर पर नजर आए। यह याचिका पुनर्विचार योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। कोर्ट ने अंत में यह भी कहा कि, भांग की रिसर्च खेती को लेकर पुनर्विचार याचिका में कोई तथ्य या कानूनी चूक नहीं है। पहले दिए फैसले में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है।  

वी क्लब मनेन्द्रगढ़ ‘समर्पण’ द्वारा सुरभि पार्क में सावन उत्सव धूमधाम से सम्पन्न

एमसीबी/मनेंद्रगढ़   वी क्लब ऑफ इंडिया, वी क्लब मनेन्द्रगढ़ समर्पण द्वारा सुरभि पार्क में सावन उत्सव का आयोजन बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। क्लब अध्यक्ष बबीता अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम में अनेक मनोरंजन गेम, झूला, कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता सहित कई रोचक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। सावन सुंदरी प्रतियोगिता में अर्चना गोयल  विजेता बनीं, जिन्हें ताज पहनाकर और गिफ्ट देकर सम्मानित किया गया। कुर्सी दौड़ में प्रथम पुरस्कार अर्चना अग्रवाल  और द्वितीय पुरस्कार मीरा गुप्ता  ने प्राप्त किया। कृष्ण लीला के विशेष कार्यक्रम में कृष्ण जी की भूमिका मंजू गोयल जी ने निभाई, जिसे सभी ने खूब सराहा। पम्मी अरोड़ा  ने कहा, "हम हर त्योहार धूमधाम से मनाते हैं और आगे भी इसी तरह मनाते रहेंगे।" कार्यक्रम में फ्रेंडशिप डे भी मनाया गया, जिसमें सभी ने एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधकर गले मिले और अंताक्षरी प्रतियोगिता का आनंद लिया। बेबी मखीजा  ने अपनी मधुर आवाज़ से सुंदर गीत प्रस्तुत किए। इस अवसर पर क्लब की सभी सदस्य—पम्मी अरोड़ा, बेबी मखीजा, मधु जैन, रश्मि जायसवाल, प्रीति जायसवाल, मंजू गोयल, मीनू अग्रवाल, वर्षा अग्रवाल, नीलम कलरा, पूनम शाह, अर्चना अग्रवाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहीं। अध्यक्ष बबीता अग्रवाल ने सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्लब हर त्योहार को उत्साह और एकता के साथ मनाकर नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ संग मनाया रक्षाबंधन, सेवा-समर्पण को दिया सम्मान

एमसीबी/खड़गंवा   मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आज रक्षाबंधन का त्योहार एक अनोखे अंदाज में मनाया गया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य लाभ ले रही बहनों से राखी बंधवाकर शुभकामनाएं दीं। दिन-रात मरीजों की देखभाल करने वाली नर्स बहनों के साथ यह पर्व मनाकर मंत्री ने उनके सेवा-भाव और समर्पण को सम्मान दिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया, मरीजों और उनके परिजनों से भी आत्मीय मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। राखी के धागों में भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ मानवता और सेवा की डोर भी बंधी, जिससे अस्पताल का माहौल अपनत्व और भावनाओं से भर उठा।

स्पीड का कहर! ट्रक की टक्कर से बाइक सवार की दर्दनाक मौत

बलरामपुर जिला मुख्यालय के समीप हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक चालक की मौके पर ही मौत हो गई. दुर्घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया. घटना बलरामपुर कोतवाली क्षेत्र की है. नेशनल हाइवे-343 सुहानी ढाबा के पास तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक चालक को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें युवक की घटना स्थल पर ही मौत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खतरनाक मोड़ और रफ्तार की वजह से हादसे हुआ. दुर्घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची यातायात पुलिस बाइक नंबर के आधार पर मृतक की पहचान में जुटी है.

केंद्रीय रक्षा मंत्री से मिले रामविचार नेताम, ऑपरेशन सिंदूर पर जताया गर्व

रायपुर छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रामविचार नेताम ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके निवास कार्यालय पर मुलाकात की. इस दौरान मंत्री रामविचार नेताम ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर बधाई दी. वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में चलाए जा रहे नक्सल अभियान पर चर्चा की. कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को बताया कि छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा नियद नेल्लानार अभियान के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनजातियों के विकास के लिए कार्यों किए जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की प्रगति की जानकारी भी दी.

सीएम साय के नेतृत्व में बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलकरण तेज़ी से आगे

 स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर “नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल” से स्वास्थ्य सुविधाएं हुईं और भी सुलभ, प्रभावी एवं पारदर्शी रायपुर, बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तथा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का प्रभावी क्रियान्वयन क्षेत्र के लिए एक बड़ा परिवर्तन साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्त विस्तार की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सतत मार्गदर्शन में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं आज तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। बस्तर के छ :जिला चिकित्सालयों,  दो सिविल अस्पतालों और 41 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल प्रणाली का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे ओपीडी पंजीकरण, परामर्श, जांच, दवा वितरण तथा मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां अब एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध हो रही हैं। इसके तहत मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल तकनीक के इस समावेशन ने अस्पतालों में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और मरीजों की संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत अस्पतालों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन (HFR) और चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन (HPR) सुनिश्चित किया गया है। अस्पताल परिसरों में आभा कियोस्क स्थापित कर मरीजों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने की सुविधा दी जा रही है। स्कैन एंड शेयर एवं आभा आईडी के माध्यम से ऑनलाइन ओपीडी पंजीयन की सुविधा से मरीजों को लम्बी कतारों से राहत मिली है और उन्हें त्वरित सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल नवाचारों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से सामने आया है। जिला चिकित्सालय बस्तर में मई, जून और जुलाई 2025 के दौरान कुल 60,045 ओपीडी पंजीयन दर्ज किए गए, जिनमें से 32,379 पंजीयन आभा लिंक के माध्यम से हुए — जो कि कुल पंजीयनों का 53% है। इसी अवधि में जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा में 33,895 ओपीडी पंजीयन दर्ज हुए, जिनमें से 13,729 पंजीयन आभा से लिंक किए गए — यानी 40% का डिजिटल एकीकरण। यह पूरी प्रक्रिया न केवल समय की बचत सुनिश्चित कर रही है, बल्कि मरीजों के लिए डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की सुविधा भी प्रदान कर रही है, जिसे वे देश के किसी भी हिस्से में कभी भी देख सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ उपचार की निरंतरता और गुणवत्ता में भी वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी आधुनिक तकनीकों के सफल क्रियान्वयन ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति और दिशा दी है। डिजिटल पंजीकरण, हेल्थ रिकॉर्ड और पारदर्शी सेवा प्रणाली से मरीजों को समयबद्ध, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। यह पहल न केवल बस्तर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है, जिसे हम शीघ्र ही राज्य के सभी जिलों में लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" के संकल्प को साकार करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का यह तकनीकी उन्नयन न केवल स्थानीय जनता के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस प्रणाली को सभी जिलों में सुदृढ़ रूप से लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में यह पहल केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। बस्तर में मिले सकारात्मक परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जब तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ आते हैं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाएगी, बल्कि ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण में भी छत्तीसगढ़ का महत्त्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करेगी।    

अबूझमाड़ में बदलती फिज़ा, रक्षाबंधन बना भरोसे और स्वतंत्रता का पर्व

नारायणपुर नक्सल प्रभावित जिला नारायणपुर का अबूझमाड़, यह वह नाम है जिसे सुनते ही दिमाग़ में जंगलों की अनंत हरियाली के बीच बम, बारूद और गोलियों की गूंज उतर आती थी. दशकों तक नक्सलवाद के साये में जीते लोग, जिनका संसार अपने घर और आसपास के जंगलों तक सीमित था. जहां त्योहारों की रौनक नहीं, बल्कि सन्नाटे और डर का पहरा हुआ करता था. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. सरकार के नक्सलवाद के खात्मे के दृढ़ संकल्प और सुरक्षा बलों की लगातार तैनाती ने इस इलाक़े में भरोसे और सुरक्षा की नई कहानी लिख दी है. वही लोग, जो कभी बंदूक की नोक पर जीते थे, अब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पर्वों को खुले दिल और पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं. रक्षाबंधन पर दिखी बदलाव की झलक इस बदलाव की झलक हाल ही में रक्षाबंधन के पर्व पर देखने को मिली. अबूझमाड़ के सोनपुर, डोड़रीबेड़ा, होरादी, गारपा समेत कई नक्सल प्रभावित गांवों की महिलाएं और बालिकाएं अपने गांव में स्थित पुलिस कैंप पहुंचीं. वहां नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हुए उनके चेहरे पर भय नहीं, बल्कि गर्व और आत्मीयता की चमक थी. सीमा सुरक्षा बल की 133वीं वाहिनी के जवानों ने भी ग्रामीणों से वादा किया कि वे हर परिस्थिति में उनकी सुरक्षा करेंगे. महीनों तक घर-परिवार से दूर रहकर नक्सल मोर्चे पर डटे इन जवानों के लिए यह सिर्फ एक औपचारिक पर्व नहीं था,यह उन बहनों का विश्वास था, जिनकी रक्षा के लिए वे अपनी जान दांव पर लगाए हुए हैं.इस कार्यक्रम में आसपास के गांवों के विभिन्न विद्यालयों और आश्रमों से 106 बालिकाएं, 13 शिक्षक और 18 ग्रामीण शामिल कुल 200 नागरिक शामिल हुए. जब नन्हीं-नन्हीं हथेलियों से राखी बांधी गई, तो कई जवानों की आंखें भर आईं. वर्षों से सुरक्षा की आस में जीते इन गांवों में यह दृश्य एक भावनात्मक क्रांति जैसा था ,जहां भाईचारे का धागा, डर की जंजीरों को तोड़ रहा था. बता दें कि सीमा सुरक्षा बल की भूमिका केवल नक्सल मोर्चे तक सीमित नहीं है. वे अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयासों में भी जुटे हैं. जहां कल तक स्कूल भवन अधूरे या जर्जर थे, वहां अब पढ़ाई की गूंज सुनाई देने लगी है. चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक सेवाएं धीरे-धीरे इन घने जंगलों तक पहुँच रही हैं.यह राह इतना आसान नहीं है, नक्सली विकास कार्यों में रुकावट डालने के लिए आए दिन जवानों पर हमला करते हैं, आईईडी लगाते हैं, और आगजनी की घटनाएं करते हैं. लेकिन सुरक्षा बल भी पीछे हटने वालों में से नहीं,वे हर वार का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं. नक्सलवाद धीरे-धीरे बैकफुट पर जाने लगा है, और अबूझमाड़ के लोग महसूस करने लगे हैं कि वे वास्तव में आज़ाद हो रहे हैं.आज अबूझमाड़ के गांवों में रक्षाबंधन ही नहीं, दीपावली, होली और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहार भी उल्लास से मनाए जाते हैं. हर उत्सव में सुरक्षा बलों को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि इन ग्रामीणों के लिए वे सिर्फ रक्षक नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा बन चुके हैं.अबूझमाड़ की फिजा में अब विश्वास, भाईचारे और बदलती हुई हवा, जिसमें अब गोलियों की गूंज नहीं, बल्कि ढोल-नगाड़ों और हंसी की आवाज़ सुनाई देती है.

शिवनाथ नदी में फिर हादसा: दो दिनों में डूबने से 2 युवकों की मौत

दुर्ग जिले में पिछले दो दिनों के भीतर अलग-अलग हादसों में दो युवकों की शिवनाथ नदी में डूबकर मौत हो गई. पहली घटना सिरसा चौकी क्षेत्र के ग्राम सिरसा की है, जहां दोस्तों के साथ नहाने गया युवक तेज बहाव में बह गया. समोदा निवासी साहिल देशमुख की डूबने से मौत हो गई. सूचना मिलते ही दुर्ग एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान चलाकर युवक का शव बरामद किया. दूसरी घटना में शिवनाथ नदी में मोहारा एनीकेट में प्रशान्त सोनी ( 35 साल) की नदी में डूबने से मौत ही गई. घटना के बाद से परिजनों में शोक का माहौल है. घटना की सूचना के बाद एसडीआरफ की टीम ने मशक्कत के बाद प्रशांत के शव को नदी से बाहर निकाल लिया. हादसों की वजह दरअसल कुछ दिनों से बारिश थम गई है, जिससे शिवनाथ नदी का जलस्तर कम हो रहा है. जिसे देखकर ग्रामीण और युवा नदी में नहाने पहुंचते है और दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं.