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हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा जनहानि, फसल हानि के प्रकरणों का संवेदनशीलता से करें निराकरण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के कार्यों की समीक्षा की रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा जनहानि, पशुहानि एवं फसल क्षति के प्रकरणों में त्वरित, नियमानुसार एवं संवेदनशीलता से क्षतिपूर्ति सहायता प्रदान की जाए। वनांचल में निवासरत लोगों को कई बार वन्यप्राणियों के हमलों से अपनों को खोने की पीड़ा सहनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावितों के दुख-दर्द का मानवीय दृष्टिकोण से शीघ्र निराकरण किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री साय आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हाथी-मानव द्वंद्व और अन्य हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा जनहानि, पशुहानि एवं फसल क्षति की घटनाएं राज्य के वनांचल क्षेत्रों में चुनौती बनकर उभर रही हैं। ऐसी स्थितियों में शासन की जिम्मेदारी है कि पीड़ितों को शीघ्र एवं न्यायसंगत सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित प्रकरणों का नियमानुसार त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जंगली हाथियों द्वारा धान जैसी प्रमुख फसल के अतिरिक्त गन्ना, केला, पपीता एवं कटहल जैसी नगदी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी दोहरी मार झेलनी पड़ती है। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में प्रदत्त व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टों की अद्यतन स्थिति की भी जानकारी ली। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रदत्त सहायता समय पर प्रभावितों तक पहुंचे, इसके लिए विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाए। जनहानि, स्थायी अपंगता, पशुहानि, मकान क्षति तथा फसल हानि के लिए दी जाने वाली क्षतिपूर्ति दरों में वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव भी बैठक में प्रस्तुत किया गया। बैठक में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसल क्षति के आरबीसी के प्रावधानों के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि पर भी चर्चा की गई। बैठक मे मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, कृषि विभाग की सचिव श्रीमती शहला निगार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी सचिव श्री अंकित आनंद, सचिव (वन) श्री अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री सुधीर अग्रवाल, अपर मुख्य वन संरक्षक श्री प्रेम कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री कश्यप ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

विभागीय कार्यों में आ रही तकनीकी समस्याओं का आपसी समन्वय से करें निराकरण: मंत्री श्री केदार कश्यप  रायपुर विभागीय कार्यों में आ रही समस्याओं का निराकरण आपसी समन्वय स्थापित कर समय-सीमा में निराकरण करें। यह बातें जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज शिवनाथ भवन अटल नगर में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने बैठक में जल संसाधन विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की और स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने बैठक का संचालन करते हुए कहा कि एमआईएस में आ रही समस्याओं का आपसी समन्वय स्थापित कर 19 अगस्त 2025 के पूर्व समस्त तकनीकी विषयों पर आवश्यक निर्णय लेते हुए निराकरण कर लिया जाए। साथ ही तकनीकी स्वीकृति से संबधित वित्तीय अधिकार को युक्तियुक्त करने हेतु प्रस्ताव 06 अगस्त 2025 तक शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। निविदा प्रपत्र के अंतर्गत 108 प्रकरणों में दोषी पाये गये निविदाकारों के विरूद्ध कार्यवाही एक सप्ताह के भीतर अनिवार्यतः पूर्ण करें और दोषी पाए गए निविदाकारों को आगामी निविदा में भाग लेने के संबंध में निविदा कंडिका में संशोधन हेतु प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर शासन को प्रेषित करना सुनिश्चित करें।  बैठक में सचिव श्री टोप्पो ने अधिकारियों को एमआईएस में संबंधित प्रविष्टी प्रदर्शित होने के लिए आवश्यक व्यवस्था भी समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।  इसके साथ ही निविदा प्रक्रिया में आ रही समस्याओं का संबंधित मुख्य अभियंता एवं निविदा प्रकोष्ठ कार्यालय प्रमुख अभियंता आपस में समन्वय स्थापित कर निराकरण हेतु आवश्यक कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि बोधघाट वृहद् परियोजना, इन्द्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना, शेखरपुर जलाशय एवं डांडपानी जलाशय के निर्माण हेतु आवश्यक कार्यवाही पूरी कर तथा प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त योजनाओं में निविदा स्वीकृति का कार्य निर्धारित 100 दिवस की समय-सीमा में पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें।  सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने बैठक में जलाशयों से कृषकों की माँग के अनुरूप नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए जल प्रदाय किया जाना सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने विभिन्न विषयों पर विभागीय नीति तैयार कर एक माह के भीतर शासन को प्रस्तुत किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जल-कर में वृद्धि हेतु प्रस्ताव अविलम्ब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग के कार्य को भी पी.पी.पी. माध्यम से कराए जाने हेतु प्रस्ताव अविलम्ब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। सचिव श्री टोप्पो ने मंत्री श्री कश्यप को बताया कि विशेष केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने हेतु प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत कर दिया जाएगा और परियोजना मण्डल की आगामी बैठक हेतु आवश्यक तैयारियां एक सप्ताह के भीतर पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्यवाही भी समय से पूर्ण कर लिया जाएगा। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता श्री इंद्रजीत उईके, मुख्य अभियंता सर्वश्री प्रसून शर्मा, डी.के. बुम्मेरकर, जे.आर. भगत, आर.आर. सारथी, एस.के. टीकम, शंकर ठाकुर, के. एस. भंडारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

विद्यालयों में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के साथ हरित पर्यावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर रहेगा फोकस

अम्बिकापुर नवीन शैक्षणिक सत्र 2025-26 के शुभारंभ पर सरगुजा जिले के कलेक्टर विलास भोसकर ने जिले के समस्त शासकीय विद्यालयों में पालक-शिक्षक बैठक आयोजित करने हेतु प्रेरक पत्र जारी किया है। इस वर्ष यह बैठक 6 अगस्त 2025, बुधवार को विद्यालय स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य पालकों और शिक्षकों के बीच संवाद, सहयोग और समन्वय को बढ़ाना है। कलेक्टर ने अपने पत्र में कहा है कि पालक-शिक्षक बैठकों से बच्चों के शिक्षा, संस्कार और पोषण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ठोस चर्चा का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने सभी पालकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे बैठक में सक्रिय सहभागिता दें और अपने पाल्यों के सर्वांगीण विकास के लिए सार्थक सुझाव रखें। बैठक के दौरान शासन द्वारा संचालित विद्यार्थी हितैषी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण एवं व्यक्तिगत विकास से संबंधित विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें प्रत्येक पालक एवं शिक्षक से अपील की है कि वे विद्यालय परिसर में एक पौधा अपनी माँ के सम्मान में रोपित करें तथा उसके संरक्षण का संकल्प लें। यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि विद्यार्थियों में प्रकृति और परिवार के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी विकसित करेगा। कलेक्टर ने पत्र में सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों की चर्चा करते हुए कहा कि यह जिला छत्तीसगढ़ महतारी के मुकुटस्वरूप “स्वर्ग-जया” की भांति है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इसे और अधिक गौरवशाली बनाएं और भावी पीढ़ी को संस्कारित, सक्षम एवं स्वावलंबी बनाकर विकसित भारत के निर्माण में भागीदार बनें।

किसानों को निर्धारित दर 266 रुपए में दिलाई यूरिया खाद

उत्तर बस्तर कांकेर  कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार तथा उप संचालक कृषि जितेंद्र कोमरा के मार्गदर्शन में खरीफ सीजन में किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने जिला स्तर पर टीम गठित की गई है। इसी क्रम में सोमवार को भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के कोरर के निजी कृषि दुकानों में छापेमारी की बड़ी कार्यवाही कर कालाबाजारी पर नकेल कसा गया। सहायक संचालक कृषि सुधीर ददोरिया और गुंजन सिंग भदौरिया के नेतृत्व में खाद बीज निरीक्षक अमिनेश गावड़े, कृषि अधिकारी किरण भंडारी, प्रवीण कवाची, आशीष साहू ने कोरर में संचालित निजी कृषि केंद्रों में दबिश दी। इस दौरान दुकानों में लगे पीओएस मशीनों और स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें जांच में गड़बड़ियां पाई गई। किसानों ने की थी शिकायत   वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी भानुप्रतापपुर ने बताया कि किसानों को कोरर क्षेत्र के निजी कृषि केंद्र पर दो से तीन गुना अधिक कीमत पर रासायनिक खाद बिक्री करने की शिकायत दूरभाष के माध्यम से की गई थी। इस पर कृषि विभाग की टीम ने कार्यवाही करते हुए कोरर बाजार दिवस के दिन निजी कृषि सेवा केंद्र विजय ट्रेंड्स खाद गोदाम का निरीक्षण किया। गोदाम में मौजूदा स्टॉक में दो सौ बोरी यूरिया खाद उपलब्ध पाया गया। किसानों ने शिकायत थी कि एक बोरी यूरिया पांच से छै सौ रुपए में बेचा जा रहा है, जिस पर कृषि विभाग द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए खाद खरीदने आए किसानों को शासन द्वारा निर्धारत दर में यूरिया 266 रुपए पचास पैसा, डीएपी 1350 रुपए, पोटाश 1535 रुपए और एसएसपी राखड़ खाद 495 रुपए की दर से किसानों को उपलब्ध कराई गई।       खाद खरीदने आए 27 किसानों को 79 बोरी यूरिया खाद शासकीय दर 266 रुपए पचास पैसा के दर से दिलवाई गई। कृषि विभाग द्वारा कार्यवाही कर निजी कृषि दुकान संचालकों को सख्त निर्देश देते हुए कहा गया कि किसानों के साथ लूट और काला बाजारी, जमाखोरी बर्दास्त नहीं की जाएगी। किसानों को समझाईश दिया गया कि निजी कृषि दुकान संचालकों द्वारा अधिक दर पर रासायनिक खाद बेचे जाने पर कृषि विभाग के अधिकारियों को तत्काल सूचना दिया, ताकि अविलंब कार्यवाही की जा सके।    

बकरी पालन बना आजीविका का सहारा, जय बड़ादेव महिला समूह रायपुर में बना प्रेरणा स्रोत

रायपुर : बकरी पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी जय बड़ादेव महिला समूह रायपुर की महिलाओं ने रचा आत्मनिर्भरता का उदाहरण, जय बड़ादेव समूह ने बकरी पालन से बदली किस्मत बकरी पालन बना आजीविका का सहारा, जय बड़ादेव महिला समूह रायपुर में बना प्रेरणा स्रोत रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुसार राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के विशेष प्रयास किया जा रहे हैं। विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही हितग्राहीमूलक योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित करते हुए  लाभ के अवसर प्रदान किये जा रहे हैं । ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं व्यवसाय प्रारंभ कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। महासमुंद जिले के ग्राम गुलझर की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि आत्मनिर्भरता का रास्ता दूर नहीं, यदि सही दिशा, दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास साथ हों। वर्ष 2019 में गठित जय बड़ादेव महिला स्व-सहायता समूह ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आजीविका का सशक्त साधन तैयार किया और अपनी आर्थिक स्थिति को नई दिशा दी। बकरी पालन को बनाया आय का स्थायी माध्यम  समूह की अध्यक्ष श्रीमती गोमती ध्रुव बताती हैं कि उन्होंने शुरुआत में बकरी पालन को एक व्यवसाय के रूप में अपनाया, क्योंकि यह ग्रामीण परिवेश में कम लागत और कम प्रशिक्षण में भी लाभकारी साबित हो सकता है। उनके अनुसार बकरी पालन सिर्फ पशुपालन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है। बिहान योजना से मिली आर्थिक ताकत  बकरी पालन की शुरुआत उन्होंने बिहान योजना के अंतर्गत 1 लाख रुपये के ऋण से की। नियमित किस्त चुकाने के बाद वे ऋणमुक्त हुईं और फिर क्रमशः 2 लाख और 4 लाख रुपये का ऋण लेकर व्यवसाय का विस्तार किया। समय पर ऋण अदायगी के फलस्वरूप समूह को 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड और 60 हजार रुपये का सामुदायिक निवेश कोष भी प्राप्त हुआ। बकरी खाद से अतिरिक्त आय और बाजार में मांग  आज समूह की 8 महिला सदस्यों के पास चार से पाँच बकरियाँ हैं। वे न केवल बकरी पालन कर रही हैं, बल्कि उससे उत्पादित जैविक बकरी खाद को तैयार कर बाज़ार में बेच रही हैं, जिससे प्रत्येक महिला को प्रति माह 4 से 5 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। बकरी खाद की गुणवत्ता और जैविक प्रकृति के कारण इसकी मांग पुणे जैसे बड़े शहरों में भी बनी हुई है। आकांक्षा हाट में शानदार प्रदर्शन  हाल ही में जिला पंचायत परिसर में आयोजित आकांक्षा हाट में समूह द्वारा लगाए गए स्टॉल में बकरी खाद को लोगों का जबरदस्त प्रतिसाद मिला। इससे महिलाओं का उत्साह और आत्मविश्वास और भी बढ़ा है। प्रेरणास्रोत बनीं ग्रामीण महिलाएं  श्रीमती गोमती ध्रुव और उनकी साथी महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि यदि ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर कार्य करें और शासन की योजनाओं का सही लाभ उठाएं, तो न केवल वे अपनी आजीविका को सशक्त बना सकती हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन सकती हैं। समूह की महिलाएं बिहान योजना और अन्य आजीविका उन्मुख सरकारी योजनाओं के लिए शासन का आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने उन्हें यह मंच और अवसर प्रदान किया।

आपदा में जान गंवाने वालों के परिजनों को मिलेगा आर्थिक सहारा, अम्बिकापुर में 48 लाख मंजूर

अम्बिकापुर  जिला प्रशासन द्वारा प्राकृतिक आपदा में मृतकों के वारिसों को 48 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है। जिसमें तहसील अम्बिकापुर के भिटटीकला निवासी उपदेव यादव की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस रनमेत यादव, तहसील दरिमा के नवापाराकला निवासी रूपनारायण की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस रामबाई, तहसील दरिमा के कतकालो निवासी पार्वती राजवाड़े की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस प्रदीप राजवाड़े, तहसील उदयपुर के पण्डरीपानी निवासी सीता सिरदार की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस पोलेश्वर प्रसाद, तहसील कुन्नी लखनपुर के तुनगुरी निवासी सुरेन्द्र राजवाड़े की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस हीरा बाई, तहसील कुन्नी लखनपुर के मांजा निवासी प्यारी बाई की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस लक्षन राम, तहसील सीतापुर के खड़ादोरना निवासी शिवम गुप्ता की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस अमित गुप्ता, तहसील बतौली के कुनकुरीकला निवासी सुरजपति की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस भागीरथी पैकरा, तहसील लुण्ड्रा के बरगीडीह निवासी विक्रम उर्फ डललू तिवारी की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस घनश्याम तिवारी, तहसील लुण्ड्रा के उदारी निवासी लोकेश पैकरा की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस सोना सिंह, तहसील रघुनाथपुर लुण्ड्रा के बदगरी निवासी रामलाल खोई की मृत्यु आकाशीय बिजली गिरने से होने पर उनके वारिस सुषमा सिंह, एवं तहसील धौरपुर निवासी फुलेश्वरी कुजूर की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस रीखू कुजूर को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की है। इस राशि की मंजूरी राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 6-4 संशोधित प्रावधानों के तहत प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत दी गई है।

कलेक्टर ने तिरंगा यात्रा, स्वतंत्रता दिवस और योजनाओं की प्रगति की गई समीक्षा

महासमुंद : कलेक्टर ने ली समय-सीमा की बैठक समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने दिए निर्देश, महासमुंद में विकास कार्यों की हुई समीक्षा महासमुंद: कलेक्टर की अध्यक्षता में समय-सीमा की बैठक सम्पन्न, अधिकारियों को सौंपे गए आवश्यक निर्देश कलेक्टर ने तिरंगा यात्रा, स्वतंत्रता दिवस और योजनाओं की प्रगति की गई समीक्षा महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह ने आज सुबह 10 बजे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक लेकर विभिन्न विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों और आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर नवपदस्थ जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, अनुविभागीय अधिकारी, सभी विभाग के जिला अधिकारी उपस्थित रहे। वीसी के माध्यम से जनपद सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ सहित सभी ब्लॉक स्तरीय संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर लंगेह ने तिरंगा यात्रा की तैयारी की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष तिरंगा यात्रा हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता स्वतंत्रता का उत्सव स्वच्छता के संग थीम पर आयोजित किया जाएगा। यह अभियान तीन चरणों में आयोजित होगा, जो 15 अगस्त तक चलेगा। कलेक्टर ने कहा कि तिरंगा यात्रा की तैयारी हेतु सभी जनपद सीईओ को आवश्यक निर्देश दिए। इस अभियान में स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूह और आम नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भी आजादी का महोत्सव मना सकते हैं। साथ ही कलेक्टर ने इस वर्ष मनाए जाने वाले स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसे रजत जयंती थीम के अनुरूप एवं गरिमापूर्ण आयोजन करने और पूर्व वर्षों की भांति अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपते हुए कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में लंगेह ने अटल मॉनिटरिंग पोर्टल में समय-सीमा में डेटा अपलोड करने, तथा ई-ऑफिस का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने 15 वर्ष से अधिक पुरानी शासकीय वाहनों की नीलामी हेतु संबंधित जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। मुख्यमंत्री घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए बसना एवं खल्लारी में प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पीएम जनमन योजना अंतर्गत निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवासों को 15 अगस्त तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। बहुद्देशीय केंद्रों की प्रगति की जानकारी भी ली गई। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अब तक 87 प्रतिशत कार्ड बनाए जा चुके हैं, शेष शत-प्रतिशत लक्ष्य को जल्द पूर्ण करने हेतु स्वास्थ्य विभाग की टीम को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने को कहा गया। राशन कार्ड में मृत व्यक्तियों के नाम हटाने हेतु विशेष अभियान चलाने को कहा गया। कृषि विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि 66 हजार टन खाद में से 81 प्रतिशत खाद का वितरण किया जा चुका है। वहीं, मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहने व जरूरत पड़ने पर गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि पशु मालिकों पर अपने पशुओं को सड़क पर खुला छोड़ने पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाए। पंचायत स्तर पर पशुओं को रखने की स्थानीय व्यवस्था की जाए। अब तक महासमुंद में 1500 रुपए, पिथौरा में 400, सरायपाली में 1400 एवं बसना में 500 रुपए की पेनाल्टी वसूली गई है तथा कुल 251 पशुओं को विस्थापित किया गया है। अनुविभागीय अधिकारियों को इस पर निजी रूप से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। बैठक में पेंशन प्रकरणों की समीक्षा की और सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को समय-सीमा में जानकारी भेजने के निर्देश दिए। बैठक में समय-सीमा में प्राप्त पत्रों की समीक्षा, जनशिकायत निवारण, एवं लोक सेवा गारंटी अधिनियम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जनता से जुड़े प्रकरणों को समय पर और प्राथमिकता से हल किया जाए।

छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज से खुला समृद्धि का नया द्वार

रणनीतिक खनिजों की खोज में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक छलांग:छत्तीसगढ़ में निकेल-क्रोमियम-PGE की पुष्टि रायपुर  खनिज विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। मेसर्स डेक्कन गोल्ड माइनिंग लिमिटेड (DGML) ने राज्य में हाल ही में प्राप्त संयुक्त अनुज्ञा क्षेत्र में निकल (Nickel), क्रोमियम (Chromium) और प्लेटिनम समूह के तत्वों (PGEs) की खोज की है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि छत्तीसगढ़ में रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उनके सतत विकास के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। यह खोज महासमुंद जिले के भालुकोना–जामनीडीह निकल, क्रोमियम और PGE ब्लॉक में हुई है, जो लगभग 3000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस क्षेत्र का प्रारंभिक अन्वेषण भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा G4 स्तर पर किया गया था, जिसमें इन खनिजों की उपस्थिति की संभावना प्रकट हुई थी। इस आधार पर, छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग के अंतर्गत भूविज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय (DGM) ने विस्तृत भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन कर ब्लॉक की ई-नीलामी प्रक्रिया संपन्न कराई। दिनांक 6 मार्च 2023 को ब्लॉक का सफलतापूर्वक नीलामीकरण हुआ, जिसमें DGML ने 21%  सबसे ऊँची बोली लगाकर इसे हासिल किया। इसके पश्चात DGM छत्तीसगढ़ द्वारा अन्वेषण कार्यों को शीघ्र गति देने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग प्रदान किया गया। आवश्यक वन और पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त होने के बाद, DGML ने अन्वेषण कार्यों की शुरुआत की, जिनमें विस्तृत भू-वैज्ञानिक मानचित्रण, रॉक चिप सैम्पलिंग, ड्रोन आधारित मैग्नेटिक सर्वेक्षण तथा इंड्यूस्ड पोलराइजेशन (IP) सर्वेक्षण शामिल हैं। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। अब तक लगभग 700 मीटर लंबी खनिजीकृत पट्टी की पहचान की गई है, जो संभावित मैफिक-अल्ट्रामैफिक चट्टान संरचनाओं में स्थित है। भूभौतिकीय सर्वेक्षणों से प्राप्त संकेतों के अनुसार 300 मीटर गहराई तक सल्फाइड खनिजों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो इस ब्लॉक की समृद्ध खनिज क्षमता को रेखांकित करती है। भालुकोना ब्लॉक के समीप ही स्थित केलवरडबरी निकल, क्रोमियम एवं PGE ब्लॉक पूर्व में मेसर्स वेदांता लिमिटेड को नीलामी के माध्यम से प्रदान किया गया था। इन दोनों ब्लॉकों के संयुक्त विकास से महासमुंद क्षेत्र को देश के रणनीतिक खनिजों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाएँ सशक्त हुई हैं। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक खोज राज्य और देश के लिए अत्यावश्यक खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की भावना को सशक्त करती है और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करती है। छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य शासन द्वारा रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसका प्रमाण 2024-25 के अन्वेषण प्रस्तावों में परिलक्षित होता है, जहां 50% से अधिक प्रस्ताव इन्हीं खनिजों पर केंद्रित हैं। अब तक राज्य द्वारा 51 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है, जिनमें ग्रेफाइट, निकल, क्रोमियम, PGEs, लिथियम, ग्लॉकोनाइट, फॉस्फोराइट एवं ग्रेफाइट-वैनाडियम जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 टिन ब्लॉकों को भारत सरकार के खनिज मंत्रालय को आगामी नीलामी हेतु सौंपा गया है। इस दिशा में योजनाबद्ध एवं संस्थागत प्रयासों को गति देने के लिए DGM, छत्तीसगढ़ ने एक क्रिटिकल मिनरल सेल (Critical Mineral Cell) का गठन किया है, जो शोध, शैक्षणिक एवं पेशेवर संस्थानों के साथ सहभागिता बढ़ाकर खनिज अन्वेषण एवं परिशोधन को प्रोत्साहित कर रहा है। इस संदर्भ में खनिज संसाधन विभाग के सचिव, श्री पी. दयानंद, ने कहा कि यह खोज केवल एक वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक छलांग है। बढ़ती वैश्विक मांग के मद्देनज़र, हरित ऊर्जा एवं हाई-टेक तकनीकों के लिए आवश्यक खनिज — जैसे निकेल और प्लेटिनम समूह के तत्व — भविष्य की तकनीकों की रीढ़ हैं। छत्तीसगढ़ भारत के रणनीतिक खनिज मानचित्र में एक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए कटिबद्ध है और हम इसके लिए आवश्यक संस्थागत और संचालनात्मक सहयोग सुनिश्चित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ की खनिज समृद्धि की स्थिति को और मजबूत करती है, बल्कि आधुनिक तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में उपयोगी खनिजों की खोज की दिशा में अद्भुत संभावनाओं की नींव भी रखती है।

कौशल से समृद्धि की ओर – युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर मुख्यमंत्री साय का विशेष जोर

कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ें, युवाओं को बनाएं आत्मनिर्भर – मुख्यमंत्री श्री साय रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में कौशल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि युवाओं के कौशल प्रशिक्षण को सीधे रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है। इसके लिए विभाग द्वारा निरंतर नवाचार और प्रभावी कार्ययोजना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए वर्ष 2025–26 के लिए जिलेवार प्रशिक्षण उपलब्धि और आबंटित बजट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0, और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के सम्बन्ध में जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि अब तक 549 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि पुनर्वास केंद्रों में 382 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी क्रम में पीएम जनमन योजना के तहत अत्यंत पिछड़ी जनजाति (PVTG) के युवाओं को दिए जा रहे कोर्सवार प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई। बैठक में विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 1 जुलाई 2025 से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत चेहरा-आधारित स्कैनिंग प्रणाली द्वारा प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निगरानी में सुधार हुआ है। बैठक में विभाग द्वारा निजी संस्थाओं के साथ किए गए एमओयू की जानकारी भी साझा की गई, जिनमें नांदी फाउंडेशन और महिंद्रा एंड महिंद्रा संस्थानों से किए गए समझौते शामिल हैं। इन संस्थानों के माध्यम से राज्य में गुणवत्ता आधारित प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। बैठक में ‘कौशल तिहार 2025’ के आयोजन की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं में कौशल के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह प्रतियोगिता जिला और राज्य स्तरीय दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें दो आयु वर्ग – 22 वर्ष से कम एवं 22 वर्ष से अधिक – के प्रतिभागी भाग लेंगे। प्रतियोगिता में 10 प्रमुख ट्रेड ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, ब्रिकलेइंग, रिन्युएबल एनर्जी हेल्थ एंड सोशल केयर, प्लंबिंग एंड हीटिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशंस, इलेक्ट्रॉनिक्स फील्ड टेक्नीशियन, कंप्यूटर, मोबाइल फोन टेक्नीशियन, ग्राफिक डिजाइन टेक्नोलॉजी/डेस्कटॉप पब्लिशिंग तथा रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग शामिल है।जिला स्तर पर प्रत्येक ट्रेड और आयु वर्ग से दो विजेताओं का चयन किया जाएगा, जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेंगे। राज्य स्तर के विजेताओं को पुरस्कार, ट्रॉफी और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। उन्हें इंडिया स्किल्स 2025 की क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा, जहाँ से चयनित प्रतिभागी ‘वर्ल्ड स्किल्स 2026’, शंघाई (चीन) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कौशल विकास योजनाओं को युवाओं की आजीविका, आत्मनिर्भरता और भविष्य के निर्माण से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में सतत प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में वन एवं कौशल विकास मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, कौशल विकास विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास अभिकरण (CSDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विजय दयाराम के सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

नहर लाइनिंग और चैनल निर्माण के लिए रायपुर को 3.55 करोड़ की स्वीकृति

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग ने  मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिला के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड में गुडरू व्यपवर्तन नहर की लाईनिंग एवं आर.सी.सी. चैनल निर्मार्ण हेतु 3 करोड़ 54 लाख 80 हजार रुपये  की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के पूर्ण होने पर 486 हेक्टेयर खरीफ एवं 243 हेक्टेयर रबी सहित कुल 729 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे क्षेत्रीय किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यह कार्य अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत लघु सिंचाई योजना के मद से क्रियान्वित किया जाएगा, जिसके लिए वित्त विभाग द्वारा पूर्व में सहमति प्रदान की जा चुकी है। राज्य शासन द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि स्वीकृत कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर ही पूर्ण कराएं। कार्य प्रारंभ करने से पहले तकनीकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी और निर्माण कार्य की ड्रॉइंग एवं डिज़ाइन की स्वीकृति भी सक्षम अधिकारी से लिया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक हो, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। निर्माण कार्य केवल उसी स्थिति में प्रारंभ किया जाएगा जब कम से कम 75 प्रतिशत भूमि बाधा रहित रूप से उपलब्ध हो। यदि भू-अर्जन की आवश्यकता हो, तो उसे स्वीकृत राशि की सीमा के भीतर ही पूरा किया जाएगा और किसी अन्य मद की बचत राशि से भू-अर्जन नहीं किया जाएगा। यदि प्रस्तावित क्षेत्र में भू-अर्जन नहीं है तो निर्माण केवल शासकीय भूमि पर किया जाएगा, जिसके लिए भूमि का आबंटन सक्षम अधिकारी से कराया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। कार्य पूर्ण होने के बाद योजना का पूर्णता प्रमाण पत्र शासन को प्रस्तुत करना भी अनिवार्य होगा। इस निर्णय से मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि की संभावना है।